जागरण संवाददाता, सीतापुर : परिषदीय विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों की तैनाती को लेकर उन्हें नियमों से परे जाकर सहूलियत दे रही है अथवा भर्ती के नाम पर उन्हें महज सरकारी झुनझुना दिया गया है। वजह, उर्दू शिक्षकों की दूसरी काउंसिलिंग में शासन ने अभ्यर्थियों के लिए कटऑफ का निर्धारण नहीं किया है। ऐसे में नौकरी की चाहत में अभ्यर्थियों की भीड़ काउंसिलिंग कराने को उमड़ पड़ी, लेकिन चयन समिति ने काउंसिलिंग कराने वाले उन अभ्यर्थियों का चयन करके नियुक्ति पत्र दे दिया, जिनकी मैरिट अधिकतम थी। ऐसे में महज काउंसिलिंग में शिरकत करने वाले अभ्यर्थियों को सिवाय निराशा के कुछ हाथ नहीं लगा। 1परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों की 3500 शिक्षकों की भर्ती के लिए शासन ने फरमान जारी किया था। इसके तहत जिले में 120 उर्दू शिक्षकों की जिले में नियुक्ति होनी थी। इस चयन को लेकर 26 फरवरी को विभाग ने प्रथम काउंसिलिंग कराई, जिसमें शासन स्तर से कट ऑफ मेरिट का निर्धारण किया गया था। पदों के सापेक्ष सीट रिक्त रह जाने के बाद शासन ने दूसरी काउंसिलिंग पांच मार्च को कराकर रिक्त सीट भरने का फरमान जारी किया। इसके बाद शासन ने नया आदेश जारी किया। इसमें न तो अधिकतम उम्र के मानक भी 62 वर्ष के तय किए गए। 1इसके बाद जब नियुक्ति पत्र देने के बात आई तो कट ऑफ तैयार के लिए विभाग के पास कोई शासन का दिया हुआ फामरूला आदेश में नहीं मिला। विभाग के अधिकारियों ने शैक्षिक योग्यता को आधार बनाते हुए मेरिट तैयार की। इसमें सामान्य की 59.70, पिछड़ा वर्ग की 56.14 तथा विकलांग अभ्यर्थियों की 53.64 प्रतिशत मेरिट फाइनल हुई। इस सूची में अनुसूचित जाति एवं जनजाति का कोई आवेदन नहीं आया। शैक्षिक मेरिट में अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर निर्धारित हुए विद्यालयों में एक समय सीमा में कार्य भार ग्रहण करने के आदेश जारी कर दिए। चयन प्रक्रिया का आश्चर्यजनक पहलू यह देखने को मिला कि काउंसिलिंग से पहले जिन चेहरों पर मुस्कराहट फैली थी नियुक्ति पत्र जारी करते समय वह चेहरे मुरझाए हुए दिखे। काउंसिलिंग में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि मेरिट ही चयन का आधार था तो कम अंकों वालों की काउंसिलिंग ही क्यों कराई गई।
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