महराजगंज : बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। कतिपय कर्मचारी संग दो अधिकारी नियमों, शासनादेश को ताक पर रखकर चहेतों को धन का भुगतान कर रहे हैं और उनसे मिलने वाली नोटों की हरियाली से परिवार की खुशियां खरीद रहे हैं। इस भ्रष्टाचार की पोल सितंबर माह में तब खुली और नए वित्त एवं लेखाधिकारी के रूप में रवि सिंह ने कार्यभार ग्रहण किया। नवागत लेखाधिकारी रवि सिंह ने पिछले पांच माह से कूट रचित दस्तावेज पर धन का भुगतान करने वाले लेखा परीक्षक अर्जुन कुमार को आज पकड़ लिया। भ्रष्टाचार में लिप्त मिले लेखा परीक्षक को नोटिस जारी करते हुए पंद्रह दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है। वित्त एवं लेखाधिकारी रवि ने लेखा परीक्षक अर्जुन को भेजी नोटिस में लिखा है कि परिषदीय अधिवक्ता मो. शेर अली क पत्र 31 अगस्त के माध्यम से संज्ञान में आया है कि आप द्वारा योजित रिट याचिका संख्या-6755/1993 अर्जुन कुमार वनाम अन्य में पारित उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश 13 दिसंबर 93 द्वारा वेतन का भुगतान किया जा रहा था। इस याचिका को उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश 21 अप्रैल 16 द्वारा खारिज कर दिया गया है। इसमें याची को कोई अनुदान प्रदान नहीं किया गया है। इसके बाद भी आप द्वारा कूट रचित ढंग से तथ्य गोपन कर विभाग को गुमराह कर कार्यालय में कार्य करते रहने एवं वेतन प्राप्त करने के दोषी मिले हैं। कूट रचित दस्तावेज के बल पर सरकारी धन का इस तरह दुरुपयोग कर आपने उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है। निर्गत नोटिस जारी कर आपको निर्देशित किया जाता है कि अपना स्पष्टीकरण 15 दिन के अंदर प्रस्तुत करें, तब तक के लिए आपको विभागीय कार्य से विरत रखा जाता है। उचित स्पष्टीकरण न मिलने पर आपके खिलाफ नियमानुसार विधिक एवं विभागीय कार्यवाही की जाएगी तथा अनियमित धनराशि की वसूली भू-राजस्व की भांति करायी जाएगी।
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