परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों की सुरक्षा व्यवस्था तय करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारें जितनी भी योजनाएं चलाई जा रही हों और इस क्रम में उन पर चाहे जितना भी धन पानी की तरह बहाया जा रहा हो, विभागीय उदासीनता के चलते सारी सदिच्छा और कोशिशें बेकार होकर रह जा रही हैं। जानकार बता रहे कि कुछ योजानाओं की जहां खानापूर्ति की जा रही है वहीं कुछ प्राय: पूरी तरह कागज पर तैर रही हैं। मौजूदा हालात पर गौर करें तो कहीं भवन जर्जर हाल मे हैं तो कहीं विद्यालय की चहरदीवारी ध्वस्त पड़ी है।ऐसे में अभिभावक सीने पर पत्थर रखकर ही अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। आलम यह है कि बार-बार अवगत कराने के बावजूद अधिकारी मौन साधे हुए हैं। अधिकारियों का यह रवैया नौनिहालों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा है। बताते चलें कि क्षेत्र के ज्ञानपुर देहाती, मिल्की, रायपुर, संसारापुर, सागररायुपर, समेत दर्जनों परिषदीय विद्यालय अपनी दयनीय हालत पर आंसू बहा रहे हैं। किसी विद्यालय का शौचालय ध्वस्त है तो किसी में बैठने-भर भी समुचित जगह उपलब्ध नहीं। कहीं के विद्यालय का मुख्य-द्वार गिरा पड़ा है तो कहीं पर चहरदीवारी ही लापता है। कई विद्यालय तो ऐसे हैं जो अतिक्रमण के जंजाल में जकड़े हुए हैं। निर्माण एजेंसियां किसी तरह मरम्मत तो करा देती हैं लेकिन निर्माण-सामग्री मानक के अनुरूप नहीं होने के कारण शीघ्र ही यह निर्माण ध्वस्त हो जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या नौनिहालों की सुरक्षा-व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना सफल हो पाएगी। वहीं अभिभावकों का कहना है कि परिषदीय विद्यालयों की दशा देखकर बच्चों को विद्यालय भेजने पर एक भय बना रहता है। विद्यालय मे न तो पेयजल की समुचित व्यवस्था रहती है और न ही बैठने की। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जब तक अधिकारियों के बच्चे परिषदीय विद्यालय में नहीं पढ़ेंगे तब तक विद्यालयों की हालत में सुधार नहीं आएगा।
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