विद्यालय में पढ़ाई कैसी हो रही है। शिक्षक समय पर स्कूल आते हैं या नहीं। आते हैं तो पूरी प्रतिबद्धता से शिक्षण करते भी हैं कि नहीं। मनरेगा की तरह अब परिषदीय विद्यालयों का भी सोशल आडिट होगा। इसके लिए कार्ययोजना बनाने का कार्य जल्दी ही शुरू होगा। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना के सोशल आडिट को सभी जानते हैं। कुछ इसी तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों की गतिविधियों व शिक्षण स्तर का मूल्यांकन किया जाएगा। दरअसल सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत छात्रों को दी जा रहीं अनेक सुविधाओं और नए शिक्षकों की लगातार भर्ती के बावजूद सरकारी विद्यालय अभिभावकों का विश्वास नहीं जीत पा रहे हैं। कई अभिभावक बच्चों का नाम तो परिषदीय विद्यालय में लिखा देते हैं, लेकिन अच्छी पढ़ाई न होने से उसे पढ़ने प्राइवेट स्कूल भेजते हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप चौधरी ने कहा कि 5 से 20 दिसंबर के बीच सोशल आडिट कराने का कार्यक्रम आया है। इसके लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी। इससे शिक्षा में समुदाय की सहभागिता बढ़ेगी। आडिट के लिए जिला स्तर पर एक समिति भी बनेगी।
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