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Saturday, October 22, 2016

बाराबंकी : शिक्षा विभाग का जादू बिना पढ़ाई के बच्चे देंगे परीक्षा ! परीक्षा कराकर एनपीआरसी स्तर पर मूल्यांकन कराने के निर्देश, बीएसए ने जारी की स्कीम

आधे विषयों की किताबें ही नहीं हुई वितरित, परीक्षा कराकर एनपीआरसी स्तर पर मूल्यांकन कराने के निर्देश, शिक्षा अधिकारी ने जारी की स्कीम

क्या कहते हैं बेसिक शिक्षा के अधिकारी

बिना पढ़ाई के परीक्षा! यह सुनने में भले ही अटपटा लगता हो लेकिन शिक्षा विभाग वर्तमान समय में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को बगैर किताबें वितरित किए ही सील्ड पैकेट प्रश्न पत्रों के माध्यम से अर्धवार्षिक परीक्षा करा रहा हैं। बच्चों को बिना पढ़ाए ही प्रश्नों को हल करा लेना शिक्षा विभाग के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। मिली जानकारी के मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग बीते दो वर्षों से निजी विद्यालयो की तर्ज पर शिक्षा सत्र की शुरूआत जुलाई के बजाए 1 अप्रैल से कर रखा हैं और स्कूल चलो अभियान सहित बच्चो के नामांकन की प्रक्रिया अप्रैल से ही शुरू हो जाती हैं। परिषदीय विद्यालयोें में पढ़ने वाले कक्षा 1 एक से लेकर कक्षा 8 तक बच्चों को विभाग से ही नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती है। नए शिक्षा सत्र के 6 माह बीत जाने के बाद भी बच्चे को अभी तक आधे विषयो की किताबें वितरित नहीं की गई हैं हद तो यह हो गई हैं कि कक्षा 5 के बच्चों को अभी तक एक भी विषय की किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं और बच्चों से बोर्ड परीक्षा की तरह से सील्ड पैकेट प्रश्न पत्रों के माध्यम से परीक्षा कराकर बच्चों की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन एनपीआरसी स्तर पर करवाने का आदेश दिया गया हैं जिसके लिए बाकायदा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पीएन सिंह द्वारा स्कीम जारी की गई हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की अर्धवार्षिक परीक्षाएं 17 अक्टूबर से चालू हो गई हैं। जो 25 अक्टूबर तक चलेगी परीक्षा में इस बार काफी फेर बदल किया गया हैं। विभाग द्वारा खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को मिले सील्ड पैकेट प्रश्न पत्रों को स्कीम के अनुसार परीक्षा शुरु होने से एक घंटे पहले विद्यालय पहुंचने की हिदायत दी गई हैं। विद्यालयो तक प्रश्न पत्र पहुंचाने की जिम्मेदारी एनपीआरसी को दी गई हैं। अब सवाल यह उठता हैं कि बच्चे बिना पढ़े परीक्षा कैसे देंगे! और शिक्षा विभाग निजी विद्यालयों की तर्ज पर शिक्षा को चुस्त-दुरुस्त रखने का जो दंभ भर रही हैं। वह पहले ही कदम में धड़ाम हो गया हैं। पुस्तक वितरण पर गौर करे तो अभी तक मात्र कक्षा 1 व कक्षा 2 के ही छात्रों को पूरी किताबें मिल पाई हैं। जिसमे कक्षा 1 में कलरव व कक्षा 2 में कलरव व गिनतारा किताबें चलती हैं। कक्षा 3,4,5 में कलरव, गिनतारा, रैनबो, हमारा परिवेश, विज्ञान, संस्कृत, उर्दू, कला जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं जिनमें अभी तक कक्षा तीन के बच्चों को गिनतारा व रैनबो की पुस्तकें वितरित हुई हैं और कक्षा 4 के बच्चों को रैनबो व संस्कृत की पियूषम की किताबें वितरित की गई हैं। और कक्षा 5 के बच्चों को शिक्षा सत्र का आधा समय बीतने के बाद भी अभी तक कोेई पुस्तक का वितरण नहीं किया गया हैं। जूनियर स्तर में कक्षा 6,7,8 के बच्चों के लिए मंजरी, गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, पृथ्वी हमारा जीवन, वर्तिका, उर्दू, महान व्यक्तित्व, कृषि, गृह शिल्प जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं परन्तु बच्चों को अभी तक आधे विषयों तक की किताबें नहीं दी गई हैं। विद्यालयो में किताब के बगैर आधा शिक्षण सत्र समाप्त हो जाना बच्चों के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता और लोग अब जहां सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता परक शिक्षा पर शासन की मंशा पर उंगली उठाने लगे हैं। वही बिना पढे प्रश्न पत्रो को हल कर लेना बच्चों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है और शिक्षा विभाग बच्चों से नकल विहीन परीक्षा करा लेने का दंभ भर रहा हैं। जो किसी जादू से कम नहीं हैं।
मसौली बाराबंकी। खण्ड शिक्षा अधिकारी आलोक सिंह का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया के चलते किताबों के छपने में देरी हुई। जिसके चलते बच्चों को समय से किताबें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। अब किताबें आ गई हैं जिनका वितरण परीक्षा के साथ-साथ किया जा रहा हैं तथा शिक्षा विभाग के आला अधिकारियो के निर्देशानुसार अर्धवार्षिक परीक्षाएं संपन्न कराई जा रही हैं। पिछड़े कोर्स की पढ़ाई समयानुसार अध्यापकों से कराई जाएगी।

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