शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बना नियमित किए जाने से इन्कार को हाई कोर्ट में चुनौती, केंद्र व राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
30 मई 2026
प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राथमिक - विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को पद सृजित कर सहायक अध्यापक पद पर नियमित करने और वेतन भुगतान की मांग में दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार व राज्य सरकार - से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। - याचिका की अगली सुनवाई की -तिथि 17 जुलाई नियत की है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी - चौहान ने वाराणसी के जितेंद्र कुमार भारती की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा द्वारा 11 मई 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें शिक्षामित्रों को नियमित अध्यापक नियुक्त करने से इन्कार कर दिया गया है। याची के अधिवक्ता सत्येन्द्र चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि प्रदेश में लगभग 1.70 लाख शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। उन्हें मात्र 18 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है जबकि वे सहायक अध्यापक की तरह कार्य कर रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के उपरांत उन्हें न तो ग्रेच्युटी मिलती है और न ही पेंशन। ऐसे शिक्षामित्र विगत 25 वर्षों से निरंतर शैक्षिक कार्य कर रहे हैं।
इतना ही नहीं यदि किसी शिक्षामित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी व परिवार को कोई पेंशन नहीं मिलती जबकि पेमेंट आप ग्रेच्युटी एक्ट तथा ईपीएफ एक्ट शैक्षिक संस्थाओं में लागू है। संविधान की धारा 39, 42, 43, 47 में भी दैनिक भोगी संविदा एवं अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का दायित्व राज्य का है। राज्य अपना दायित्व शिक्षामित्रों के मामले में नहीं निभा रही है।
शिक्षामित्र की ग्रेच्युटी, भविष्य निधि व पेंशन पर निर्णय लेने का निर्देश
बीएसए वाराणसी को छह सप्ताह में याची को सुनकर सकारण आदेश करने को कहा
20 मई 2026
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्र को ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि, पारिवारिक पेंशन का लाभ देने की मांग में दाखिल याचिका पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वाराणसी को छह सप्ताह में नियमानुसार याची को सुनकर सकारण आदेश करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने याची से तीन सप्ताह में नए सिरे से प्रत्यावेदन देने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने शहनाज बेगम की याचिका पर अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी को सुनने के बाद याचिका निस्तारित करते हुए दिया है।
एडवोकेट सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी का कहना था कि उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख 70 हजार शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं, जिन्हें मात्र 10 हजार रुपये प्रत्येक माह दिया जाता था, जो वर्तमान में 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें न तो ग्रेच्युटी जबकि और न ही पेंशन दिया जा रहा है ऐसे शिक्षामित्र 25 वर्षों से निरंतर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं।
इतना ही नहीं यदि किसी शिक्षा मित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी एवं परिवार को कोई सहायता नहीं दी जाती जबकि ग्रेच्युटी ऑफ पेमेंट एक्ट व कर्मचारी भविष्य निधि कानून शैक्षणिक संस्थाओं में लागू है। साथ ही संविधान की धारा 39, 42, 43, 47 में भी दैनिक वेतन भोगी, संविदाकर्मी एवं अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का दायित्व राज्य का है। वाराणसी में कार्यरत शिक्षामित्र की 48 वर्ष में मृत्यु हो जाने के कारण उनकी पत्नी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से पारिवारिक पेंशन एवं ग्रेच्युटी भुगतान के लिए अनुरोध किया।
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