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Sunday, June 7, 2026

सुप्रीम कोर्ट के टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के बाद नई मांग: सेवा अनुभव को वेटेज देकर कराया जाए विभागीय टीईटी

सुप्रीम कोर्ट के टीईटी की अनिवार्यता के आदेश के बाद नई मांग: सेवा अनुभव को वेटेज देकर कराया जाए विभागीय टीईटी


7 जून 2026
लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर हाल में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में लंबे समय से कार्यरत टीईटी-प्रभावित शिक्षकों के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इसी क्रम में एक ओर शिक्षक संगठन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सेवा अनुभव को महत्व देते हुए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित करने की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने का आग्रह किया है।


ज्ञापन में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया निर्णय में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए राज्यों को वर्ष में कम से कम दो बार टीईटी आयोजित करने तथा प्रभावित शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया है। ऐसे में प्रदेश में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग से विभागीय टीईटी आयोजित किया जाना चाहिए।

मांग करने वालों का तर्क है कि परिषदीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने वर्षों तक विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया है और शिक्षा व्यवस्था को संभाले रखा है। यदि केवल औपचारिक परीक्षा के आधार पर उनकी सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसका असर न केवल शिक्षकों पर पड़ेगा बल्कि विद्यालयों के संचालन और लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि विभागीय टीईटी में शिक्षकों की सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त अंक (वेटेज) दिए जाएं। साथ ही न्यूनतम उत्तीर्णांक में आवश्यक शिथिलता प्रदान कर अनुभव और दक्षता के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को एक न्यायसंगत अवसर मिल सकेगा और शिक्षा व्यवस्था में अचानक उत्पन्न होने वाली अस्थिरता से भी बचा जा सकेगा।

ज्ञापन और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांगों के बाद अब निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। शिक्षा जगत में यह चर्चा तेज है कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना का पालन करते हुए अनुभवी शिक्षकों के लिए कोई विशेष व्यवस्था या विभागीय टीईटी मॉडल तैयार करेगी, अथवा सभी प्रभावित शिक्षकों को सामान्य टीईटी प्रक्रिया से ही गुजरना होगा। फिलहाल इस मुद्दे ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


टीईटी की अनिवार्यता को लेकर मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल

6 जून 2026
लखनऊः  शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे संकट के दृष्टिगत विधान परिषद के दो सदस्यों और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराया।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से कहा कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद संकट में हैं। शिक्षकों के लंबे अनुभव को देखते हुए उनके लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित की जाए और उन्हें सेवा अनुभव के आधार पर वेटेज देते हुए उनकी सेवाएं सुरक्षित की जाएं। प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल व देवेंद्र प्रताप सिंह और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी व संयुक्त महामंत्री अमित सिंह शामिल थे।

योगी के समक्ष सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को सहानुभूतिपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि सभी शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाएगी और उनकी सेवाएं सुरक्षित रखने का प्रयास जारी रहेगा।



परिषदीय स्कूलों में सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी कराएं

5 जून 2026
लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.86 लाख सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेंद्र प्रताप सिंह ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पत्र लिखकर सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित करने और उनकी सेवा अवधि के आधार पर वेटेज अंक देने की मांग की है।.

पत्र में उन्होंने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को सेवारत शिक्षकों के लिए वर्ष में कम से कम दो बार टीईटी आयोजित करने का निर्देश दिया है। साथ ही टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा में एक वर्ष का अतिरिक्त विस्तार भी दिया गया है। ऐसे में प्रदेश सरकार को प्रभावित शिक्षकों को राहत देने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए। यदि शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसका असर स्कूलों के संचालन के साथ गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

एमएलसी ने सुझाव दिया कि सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित की जाए। इसके साथ ही न्यूनतम उत्तीर्णांक में आवश्यक शिथिलता प्रदान की जाए और शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त भारांक (वेटेज) दिया जाए।

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