परिषदीय विद्यालयों में अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं और योजनाओं के क्रियांवयन पर सोशल आडिट टीम नजर रखेगी। इसके लिए जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक टीमों का गठन किया जाएगा। इसके लिए समिति के सदस्यों को परिचय पत्र और प्रपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम को लागू करने और इसके तहत विद्यार्थियों को मिलने वाले लाभ साथ ही सर्व शिक्षा अभियान के तहत संचालित योजनाओं के विधिवत क्रियांवयन के लिए सोशल आडिट टीमों का गठन किया जाएगा। इस सोशल आडिट के माध्यम से शिक्षा के अधिकार अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए तीन स्तरीय टीमें गठित की जाएंगी, जो विद्यालयों में संचालित योजनाओं के विषय में जानकारी करेंगी और उनका विधिवत क्रियांवयन कराएंगी। इससे विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। वहीं विद्यालयों की हकीकत भी सामने आएगी। 1तीन स्तरीय टीमें होंगी गठित : सोशल आडिट के लिए तीन स्तरीय टीमें गठित की जाएंगी। जिसमें जिला स्तरीय टीम के अध्यक्ष जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष सीडीओ, सचिव बीएसए, सदस्य सीएमओ, डीपीओ व डीपीआरओ होंगे। ब्लाक स्तरीय टीम में खंड शिक्षा अधिकारी, बीडीसी, स्थानीय स्वयं सेवी संस्था का एक सदस्य शामिल होगा। विद्यालय स्तरीय टीम में विद्यालय प्रबंध समिति का सदस्य अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होंगे, अभिभावक, विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष, एक अध्यापक जो प्रबंध समिति में सचिव न हो, ग्राम पंचायत सदस्य, सेवानिवृत्त शिक्षक या कर्मचारी शामिल होंगे।सीडीओ, सचिव बीएसए, सदस्य सीएमओ, डीपीओ व डीपीआरओ होंगे। ब्लाक स्तरीय टीम में खंड शिक्षा अधिकारी, बीडीसी, स्थानीय स्वयं सेवी संस्था का एक सदस्य शामिल होगा। विद्यालय स्तरीय टीम में विद्यालय प्रबंध समिति का सदस्य अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होंगे, अभिभावक, विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष, एक अध्यापक जो प्रबंध समिति में सचिव न हो, ग्राम पंचायत सदस्य, सेवानिवृत्त शिक्षक या कर्मचारी शामिल होंगे।
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