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Wednesday, October 5, 2016

लखीमपुर खीरी : न बदला स्कूलों का समय और न ही बदला माहौल, पलिया के परिषदीय विद्यालयों में स्थिति खराब, अध्यापकों के साथ अधिकारियों का व्यवहार भी गैर जिम्मेदाराना

भले ही अक्टूबर शुरू हो गया हो, लेकिन अब तक मौसम सर्दी की ओर बढ़ता नजर नहीं आ रहा है। उल्टे दिन में अच्छी खासी गर्मी भी पड़ती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के खुलने के समय में फिलहाल बदलाव न करने का निर्णय लिया है। पूर्व की तरह अभी स्कूल सुबह आठ से अपराह्न एक बजे तक ही खुलेंगे। यह निर्णय आठ अक्टूबर तक के लिए ही है, उसके बाद मौसम की स्थिति देखकर ही निर्णय होगा। ग्र्रीष्मकाल में विद्यालय सुबह आठ से अपराह्न एक बजे तक खुलते हैं। जबकि शीत ऋतु में समय नौ से अपराह्न तीन हो जाता है। वार्षिक कैलंेंडर के हिसाब से एक अक्टूबर को शीत कालीन समयावधि का पालन करने के निर्देश हैं। लेकिन इस बार अब तक सर्दी की शुरूआत नहीं हुई है। ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव नहीं हो सका। इस संबंध में बीएसए द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जिले के शिक्षक संघों द्वारा इस संबंध में मांग की गई थी कि मौसम को दृष्टिगत रखते हुए फिलहाल विद्यालयों के खुलने और बंद होने के समय में बदलाव न किया जाए। इसको ध्यान में रखते बीएसए स्तर से पलिया बीआरसी को इस संबंध में आदेश जारी किए गए। परिणाम स्वरूप मंगलवार को विद्यालय सुबह आठ बजे ही खोले गए। एबीआरसी अरूण वर्मा ने बताया कि आदेश मिल चुका है, विद्यालय फिलहाल पूर्व की तरह ही खोले जाएंगे। अक्टूबर माह में लगातार कई छुट्टियां हैं। इसी माह दशहरा, दीपावली, मोहर्रम जैसे बड़े त्यौहार पड़ रहे हैं। त्यौहारों की आड़ में कुछ शिक्षक लंबी छुट्टी लेने के जुगत में हैं। स्थानीय बीआरसी द्वारा इस संबंध में कोई सजगता भी नहीं दिखाई जा रही। विद्यालयों का निरीक्षण भी बिल्कुल बंद कर दिया गया है। ऐसे में अध्यापक मनमर्जी पर उतारू हैं। इसका सीधा असर विद्यालय के माहौल और बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा। मझगईं क्षेत्र के कुछ स्कूलों में अध्यापकों के समय से न पहुंचने, बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ाने के बजाए झुंड बनाकर गप्पे लड़ाने जैसी गंभीर शिकायतें बीइओ तक पहुंची थीं। जिसके बाद उन्होंने एक एबीआरसी के साथ जाकर मझगईं क्षेत्र के स्कूलों का निरीक्षण भी किया था। मझगईं के ग्रामीण राधेश्याम, उपेंद्र, वल्लभदास, सिराजुद्दीन आदि ने बताया कि निरीक्षण में शिकायत सही मिली थी। लेकिन इस मामले में अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिस वजह से शिक्षकों की गैरजिम्मेदारी जारी है।

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