लखनऊ (डीएनएन)। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों ने पहले तो दाखिला दे दिया। उसके बाद बच्चों को निकाल दिया। वहीं कई स्कूलों ने अब तक गरीब बच्चों को दाखिला दिया ही नहीं। इसी के विरोध में मंगलवार को दर्जनों अभिभावक मैगसेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय के नेतृत्व में शिक्षा भवन स्थित संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं जिला विद्यालय निरीक्षक पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। अभिभावकों की मांग थी कि ऐसे स्कूलों को दिया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) समाप्त कर दिया जाए।दरअसल, आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिले दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन राजधानी के कई स्कूल इस आदेश को नहीं मान रहे। समाजसेवी संदीप पांडेय ने बताया कि आरटीई के अंतर्गत राजेंद्र नगर स्थित नवयुग रेडियंस में 25 बच्चे दाखिले के लिए अर्ह पाए गए थे। स्कूल प्रशासन ने सिर्फ दो बच्चों पाखी राजपूत और आसना फरहद को दाखिला दिया। लेकिन कुछ ही दिन बाद उन्हें स्कूल से निकाल दिया। यही स्थिति महानगर स्थित वीरेंद्र स्वरूप पब्लिक स्कूल की है। यहां स्कूल प्रशासन ने शान मोहम्मद व मोहम्मद जैद को दाखिला देने के बाद बाहर निकाल दिया।कई स्कूल अभी तक दाखिला देने को तैयार नहींआरटीई के तहत अभी कई ऐसे स्कूल हैं जो गरीब बच्चों को दाखिला देने को तैयार नहीं हैं। संदीप पांडेय के मुताबिक इनमें सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में 58, नवयुग रेडियंस में 25, सिटी इंटरनेशनल स्कूल मानस विहार में 10 और सेंट मैरी स्कूल मटियारी में पांच बच्चों को अब तक दाखिला नहीं दिया गया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल भी बच्चों को दाखिला देने में समस्या खड़ी कर रहा है। वहीं, एग्जॉन मांटेसरी स्कूल राजाजीपुरम में 9 बच्चों को दाखिला देने के बाद अब उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। ऐसे में विभाग द्वारा इन स्कूलों को दिया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र वापस लेना चाहिए।नए सत्र को बीत गए छह महीने से ज्यादा, पढ़ाई प्रभावित : स्कूलों में नए शैक्षिक सत्र शुरू हुए छह महीने से अधिक समय गुजर गया। लेकिन कई निजी स्कूलों में अब तक अर्ह पाए गए गरीब बच्चों को दाखिला नहीं मिल सका है। शिक्षा विभाग के जिम्मेदार भी इन बच्चों को दाखिला नहीं दिला पाए हैं।
No comments:
Write comments