समाज कल्याण विभाग के आश्रम पद्धति विद्यालयों में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। विद्यार्थियों का आरोप है कि खाने में धांधली हो रही है। दूध और दाल में पानी की मात्र अधिक रहती है। जिले में आश्रम पद्धति के दो विद्यालय हैं।
मड़िहान में बालिकाओं तथा हलिया विकास खंड के परसिया में बालकों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय है। दोनों ही जगह पहली से बारह तक हर कक्षा में 40- 40 विद्यार्थी हैं। पूर्ण रूप से आवासीय इन विद्यालयों में विद्यार्थियों के भोजन से लेकर सभी सुविधाएं सरकार की ओर से की जाती हैं। यह दीगर बात है कि इन सुविधाओं में कटौती हो जाती है। अक्सर लगने वाले इस आरोप की सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। इन विद्यालयों के विद्यार्थियों में अधिकतर आदिवासी अथवा पिछड़े क्षेत्र के होते हैं। वे अपनी स्वाभाविक कठिनाई भी नहीं बता पाते। पिछले महीने मंडलायुक्त रंजन कुमार ने मड़िहान के विद्यालय का निरीक्षण में शिकायतों को सही पाया था। इसको लेकर उन्होंने संबंधित शिक्षकों व कर्मचारियों को आड़े हाथ लेते हुए सुधार की ताकीद भी की लेकिन वह असरकारक नहीं रही। भोजन को लेकर विद्यालय में असंतोष की स्थिति है। फलों की तो बात ही बेमानी है। अभिभावकों का कहना है कि यदि विद्यालय में हफ्ता- दस दिन में अधिकारियों का निरीक्षण होता रहे तो समस्या का समाधान हो सकता है।
कोई समस्या नहीं : जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र यादव ने कहा कि आश्रम पद्धति विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कोई समस्या नहीं है। हर इंसान को संतुष्ट कर पाना असंभव है। इतनी बड़ी संस्था है उन्नीस-बीस तो होता ही रहता है।
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