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Tuesday, May 5, 2026

नवीनीकरण न करना मनमाना व न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध, स्कूलों में छात्रों की संख्या में गिरावट के लिए सिर्फ अनुदेशक जिम्मेदार नहीं : हाईकोर्ट

नवीनीकरण न करना मनमाना व न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध, स्कूलों में छात्रों की संख्या में गिरावट के लिए सिर्फ अनुदेशक जिम्मेदार नहीं : हाईकोर्ट



प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विद्यालय में छात्रों की संख्या में कमी के लिए केवल अंशकालिक अनुदेशकों को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। अगर किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कम हो जाती है तो इसके लिए सभी सभी शिक्षकों को जिम्मेदार माना जा सकता है, सिर्फ अनुदेशकों को नहीं। ऐसे में छात्रों की संख्या में कमी के आधार पर अंशकालिक अनुदेशकों की सेवा का नवीनीकरण न करना मनमाना और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने कानपुर देहात निवासी मनोज कुमार व 57 अन्य की याचिका पर दिया है। 


यह मामला विभिन्न जिलों में कार्यरत उन अंशकालिक अनुदेशकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कला, स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों के लिए की गई थी।

वर्ष 2013 के शासनादेश के तहत नियुक्त इन अनुदेशकों की सेवाओं को विभाग ने इस आधार पर समाप्त कर दिया था कि संबंधित विद्यालयों में छात्र संख्या 100 के निर्धारित मानक से कम हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि 31 जनवरी 2013 के मूल शासनादेश में नवीनीकरण के लिए छात्र संख्या की कोई अनिवार्य शर्त नहीं जोड़ी गई और संतोषजनक सेवा के बावजूद अनुदेशकों हटाना गलत है। 

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