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Friday, January 31, 2025

बेसिक शिक्षकों और शिक्षामित्रों के तबादलों की प्रक्रिया पर लगा ग्रहण, शासनादेश के एक माह बाद भी नहीं जारी हुआ कार्यक्रम


बेसिक शिक्षकों और शिक्षामित्रों के तबादलों की प्रक्रिया पर लगा ग्रहण,  शासनादेश के एक माह बाद भी नहीं जारी हुआ कार्यक्रम

31 जनवरी 2025
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों का जिले के अंदर परस्पर तबादले व एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले की प्रक्रिया एक महीने बाद भी नहीं शुरू हो पाई है। शिक्षामित्रों के समायोजन की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे शिक्षक व शिक्षामित्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

प्रदेश में परस्पर व सामान्य तबादला जाड़े व गर्मी की छुट्टी में करने का पूर्व में निर्देश दिया गया है। इसके तहत 2023 में शुरू हुई तबादले की प्रक्रिया जनवरी 2024 में पूरी की गई। करीब एक साल बाद जिले के अंदर तबादले का शासनादेश बीती 27 दिसंबर व जिले के बाहर तबादले का शासनादेश सात जनवरी को जारी किया गया था। इसके बाद 10 जनवरी तक शिक्षकों का डाटा अपडेट करने का निर्देश दिया गया।

पर, स्थिति ये है कि जिले के अंदर परस्पर तबादले की प्रक्रिया बेसिक शिक्षा विभाग नहीं शुरू कर सका है। वहीं, शिक्षकों को एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले का भी इंतजार है। शिक्षकों का कहना है कि एक तो विभाग हर छह महीने में होने वाली प्रक्रिया को एक साल बाद शुरू कर रहा है। अब उसे भी टरकाया जा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि शासनादेश जारी करने में जाड़े की छुट्टी बीत गई, अब प्रक्रिया पूरी करने में गर्मी की छुट्टी बीत जाएगी। विभाग को गर्मी की छुट्टियों से पहले सभी औपचारिकता पूरी करनी चाहिए ताकि छुट्टी के दौरान शिक्षकों को रिलीव और जॉइन कराया जा सके। शिक्षकों ने बताया कि विभाग में इस पर कोई जानकारी भी नहीं दे रहा है।


बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षकों के साथ छल कर रहा है। एक-एक प्रक्रिया पूरी करने में छह- छह महीने लगेंगे तो शिक्षक को तबादले के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। जल्दी ही प्रक्रिया पूरी कर गर्मी की छुट्टियों में तबादले का लाभ शिक्षकों को देना चाहिए। - डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ

परस्पर तबादले का शासनादेश जारी होने के बाद शिक्षकों का डाटा अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसकी सूचनाएं जिलों से मांगी गई हैं। उच्च स्तर पर वार्ता करके आगे का कार्यक्रम जल्द जारी किया जाएगा। - सुरेंद्र तिवारी, सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद




पारस्परिक अन्तर्जनपदीय तबादला आदेश ठंडे बस्ते में, शासनादेश जारी हुए 18 दिन बीते बेसिक शिक्षा विभाग अब तक समय सारणी तक जारी नहीं कर सका

28 जनवरी 2025
लखनऊ । प्राइमरी शिक्षकों के जिले के बाहर पारस्परिक स्थानांतरण का आदेश अब ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। शिक्षकों के पारस्परिक स्थानांतरण को लेकर शासनादेश के जारी हुए 18 दिन बीत चुके हैं परन्तु बेसिक शिक्षा विभाग अब तक समय सारणी तक जारी नहीं कर सका है। परिषदीय शिक्षक प्रक्रिया प्रारंभ होने में हो रही इस देरी से काफी परेशान हैं।


 गत वर्ष जून 2023 में पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी और साल भर बाद जून 2024 में पूर्ण हो सकी थी। इस बार यदि आवेदन प्रक्रिया समय पर शुरू हो जाती, तो शिक्षकों को इस ग्रीष्मावकाश में अपने वांछित जनपद में जाने का मौका मिल सकता है लेकिन समय सारिणी जारी न होने से शिक्षकों में निराशा की स्थिति बनी हुई है। गत वर्ष 1398 जोड़ों यानी करीब 2800 शिक्षकों को इसका लाभ मिला था।


शासनादेश जारी होने के ढ़ाई सप्ताह से अधिक समय के व्यतीत होने के बाद भी विभाग में कोई कवायद शुरू नहीं होने के पीछे विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को माना जा रहा है। क्योंकि बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के नाम सर्कुलर जारी कर कहा था कि परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के अन्तः जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण की कार्यवाही राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र, लखनऊ द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन सम्पादित किया जाना है लिहाजा मानव सम्पदा पोर्टल पर शिक्षकों के विवरण मसलन, पदनाम, जन्मतिथि, मोबाइल नम्बर, नियुक्ति तिथि आदि विवरण को संशोधित व अपडेट किए जाने की कार्यवाही हरहाल में 10 जनवरी तक पूर्ण कर ली जाए लेकिन आधे से भी अधिक जिलों में इस दिशा में कोई कार्य ही नहीं हो सके है। ऐसे में पारस्परिक तबादले की प्रक्रिया लटकती नजर आ रही है।

■ 18 दिन बाद भी नहीं बनी समय सारिणी

■ परिषदीय शिक्षक प्रक्रिया में देरी से परेशान

Sunday, January 12, 2025

बेसिक शिक्षकों का डाटा अपडेट अब तबादले की समय सारिणी का इंतजार, जिले के अंदर व एक से दूसरे जिले में म्यूचुअल ट्रांसफर का मामला

बेसिक शिक्षकों का डाटा अपडेट अब तबादले की समय सारिणी का इंतजारजिले के अंदर व एक से दूसरे जिले में म्यूचुअल ट्रांसफर का मामला

14 जनवरी को खत्म हो रही हैं परिषदीय स्कूलों में जाड़े की छुट्टियां


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में जिले के अंदर व एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले का शासनादेश जारी होने के साथ ही शिक्षकों का डाटा अपडेट कर दिया गया, लेकिन तबादले की समय सारिणी नहीं जारी की गई है। इसे लेकर शिक्षकों में ऊहापोह है। क्योंकि जाड़े की छुट्टियां भी 14 जनवरी को समाप्त हो रही हैं। 


परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया जाड़े व गर्मी की छुट्टियों में करने की व्यवस्था है। इसी के तहत 31 दिसंबर को छुट्टी शुरू होते ही परस्पर तबादले का शासनादेश जारी किया गया। इसके बाद बेसिक शिक्षा परिषद सचिव ने 10 जनवरी तक डाटा अपडेट करने का निर्देश सभी बीएसए को दिया था।


तबादला प्रक्रिया में विलंब को देखते हुए शिक्षकों ने जल्द से जल्द विस्तृत कार्यक्रम जारी करने की मांग की है ताकि वे छुट्टियों में आवेदन कर दें। दोबारा स्कूल खुलने पर वह पूरा समय पठन-पाठन में दे सकें। 


उप्र. बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि विभाग शिक्षकों से जुड़े मामले को अनावश्यक लटकाए है। जब पूर्व में तय है कि जाड़े व गर्मी की छुट्टियों में ही तबादला होगा। तो एक छुट्टी में कार्यक्रम जारी कर रहे हैं और फिर दूसरी छुट्टी में इसकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। यह न्यायोचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि तबादले से जुड़ी समय सारणी जल्द घोषित हो।

Tuesday, September 24, 2024

2700 शिक्षकों की वेतनवृद्धि लटकाने पर 82 BEO पर कार्रवाई की लटकी तलवार, नोटिस जारी कर मांगी गई अमल रिपोर्ट

2700 शिक्षकों की वेतनवृद्धि लटकाने पर 82 BEO पर कार्रवाई की लटकी तलवार, नोटिस जारी कर मांगी गई अमल रिपोर्ट


🔴 27 सौ शिक्षकों का मामले को लटका रखा है
🔴 शिक्षकों के वेतन वृद्धि को रोकने का मामला
🔴 जुलाई से ही बढ़ना था वेतन, अब तक नहीं बढ़ा
🔴 हर महीने की पांच तारीख को देनी होगी अमल रिपोर्ट


24 सितम्बर 2024
लखनऊ । शिक्षकों के वेतन वृद्धि को रोकने वाले 82 बीईओ पर निलंबन की तलवार लटक गई है। शासन ने ऐसे सभी बीईओ (खण्ड शिक्षा अधिकारी) के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है, जिन्होंने एक जिले से दूसरे जिले में स्थान्तरित होकर गए 2700 शिक्षकों की वेतन वृद्धि संबंधी मामले को अब तक लटका कर रखा है।

दरअसल विधान परिषद में शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने इस मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाते हुए तत्काल शिक्षकों के वेतन वृद्धि के आदेश जारी कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए तत्काल अद्यतन जानकारी मांगी थी। इसी परिप्रेक्ष्य में शासन ने विभाग से इसकी विस्तृत जानकारी तलब की।

विभाग ने जब संबंधित बीईओ से पूछताछ की तो ज्यादातर बीईओ ने वेतन वृद्धि संबंधी पत्रावलियों को लंबित रहने का मुख्य कारण रिकॉर्ड मिलान न हो पाने को बताया। शासन ने उनके इस तर्क से असहमति जताते हुए कहा कि सभी की सेवा पुस्तिकाएं ऑनलाइन हैं, लिहाजा इस जवाब को कतई संतोषजनक नहीं माना जा सकता। ऐसे में शासन ने नई नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर संबंधित सभी बीईओ से जवाब मांगने के निर्देश दिए हैं। 

बताया जाता है कि साल भर से अधिक समय तक चली लंबी प्रक्रिया के बाद पिछले वर्ष सरकार ने प्राइमरी स्कूलों के 2700 शिक्षकों का बीते जून माह में एक जिले से दूसरे जिले में परस्पर तबादला किया था। नियमानुसार जुलाई में ऐसे सभी शिक्षक जिनके खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई लम्बित नहीं है, उन्हें वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाता है। स्थानांतरित होकर नए जिलों में पहुंचे शिक्षकों का वेतन वृद्धि जुलाई तो क्या अगस्त के वेतन में भी जुड़कर नहीं आई, जिससे शिक्षकों के बीच बेचैनी बढ़ी।

उन्होंने इस बारे में खण्ड शिक्षा अधिकारियों से पूछताछ शुरू की। कुछ ने तो इसके लिए अपने क्षेत्र के खण्ड शिक्षा अधिकारी को आवेदन पत्र तक दिया लेकिन आनाकानी जारी रही। अलबत्ता कुछ खण्ड शिक्षा अधिकारियों की ओर से यह जवाब भी मिला है कि अभी शिक्षकों के रिकार्ड का मिलान किया जा रहा है।


शिक्षकों की वेतन वृद्धि लटकाने वाले 82 बीईओ को कार्यवाई की नोटिस

लखनऊ : शिक्षकों की वेतन वृद्धि लटकाने के मामले में 82 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों व उच्च प्राथमिक स्कूलों के करीब 2,700 शिक्षकों की वेतन वृद्धि जुलाई से ही होनी थी लेकिन दस्तावेज के मिलान व अन्य अडंगा लगाकर यह उनकी वेतन वृद्धि अभी तक रोके हुए हैं। ऐसे में शासन में शिकायत होने के बाद अब इनके खिलाफ नोटिस जारी की गई है और आगे निलंबन की तलवार इन पर लटक गई है। 

विधान परिषद में शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी की ओर से इस मामले पर मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत की थी कि शिक्षकों को वेतन वृद्धि का करीब 2,700 शिक्षकों की नहीं हो पाई वेतन वृद्धि लाभ नहीं मिल पा रहा। एक जिले है से दूसरे जिले में परस्पर स्थानांतरित होकर गए शिक्षकों को यह लाभ देने में सत्यापन के नाम पर परेशान किया जा रहा है और मामला लटकाया जा रहा है। 

फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इस पर संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई तो दस्तावेज का सत्यापन न हो पाना मुख्य कारण बताया गया। सेवा पुस्तिकाएं आनलाइन होने के कारण यह जवाब संतोषजनक नहीं माना गया।



अन्तर्जनपदीय तबादला होकर आए शिक्षकों को अब वेतन वृद्धि का इंतजार

सर्विस बुक ऑनलाइन इंक्रीमेंट , फिर भी लगाने में आनाकानी कर रहे बीईओ

09 सितंबर 2024
लखनऊ : डेढ़ साल चली लंबी प्रक्रिया के बाद दूसरे जिलों से तबादला होकर आए बेसिक शिक्षकों को अभी तक इंक्रीमेंट का इंतजार कर रहे हैं।


जून में प्रदेश के करीब 2,700 शिक्षकों के अंतरजनपदीय म्यूचुअल तबादले पूरे हो गए थे। जुलाई में सबका इंक्रीमेंट लगता है। तबादला होकर आए शिक्षकों का अगस्त तक का वेतन आ गया लेकिन इंक्रीमेंट लगकर नहीं आया। 


कई शिक्षकों ने अप्लीकेशन लिखकर इंक्रीमेंट लगाने की मांग की है। इसके बावजूद बीईओ इसमें आनाकानी कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि बीईओ जिस जिले से आए हैं, वहां से रेकॉर्ड का मिलान करने की बात कह रहे हैं जबकि सभी शिक्षकों की सर्विस बुक ऑनलाइन हैं। तुरंत सभी रेकॉर्ड का मिलाने किया जा सकता है। 


बाराबंकी से लखनऊ के माल ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालय लोधई में शिक्षक निर्भय सिंह ने बताया कि वह बीईओ को अप्लीकेशन भी लिख चुके हैं लेकिन अभी तक इंक्रीमेंट नहीं लगा। बहराइच से गोंडा के प्राथमिक विद्यालय कुंडरी खेमपुर में तबादला होकर आए शिक्षक पवन मिश्र और रचना राय ने भी बताया कि अभी तक उनका इंक्रीमेंट नहीं लगा। अभी उनके रेकॉर्ड मंगाकर मिलान करने की बात अधिकारी कह रहे हैं। 


बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने बताया कि स्पष्ट निर्देश हैं कि जुलाई में सभी का इंक्रीमेंट लग जाना चाहिए। यदि कहीं से भी इस तरह की शिकायत है तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

Sunday, September 8, 2024

बेसिक शिक्षकों के पारस्परिक अंतर्जनपदीय तबादले पर जवाब नहीं देने पर हाईकोर्ट खफा, विभाग को सशर्त मोहलत

हाईकोर्ट ने शिक्षकों के अंतर्जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण पर जवाब मांगा


प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद में अध्यापकों के अंतर्जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण के मामले में जवाब दाखिल न करने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि 30 सितंबर तक अधिकारी हलफनामा दाखिल करें या फिर स्वयं अदालत में उपस्थित हों। प्रतिभा वर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने दिया है। 


तमाम सहायक अध्यापकों ने  पारस्परिक स्थानांतरण मामले में कि परिषद अध्यापकों का एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण करने के बजाय सीधे उन विद्यालयों में स्थानांतरण कर रहा है जहां उनके पेयर अध्यापक नियुक्त थे।


कोर्ट ने इस मामले में संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। मगर परिषद और राज्य सरकार की ओर से कोई हलफनामा नहीं दिया गया। राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद की अधिवक्ता ने कहा कि जवाब तैयार है और जल्द दाखिल कर दिया जाएगा।




बेसिक शिक्षकों के पारस्परिक अंतर्जनपदीय तबादले पर जवाब नहीं देने पर हाईकोर्ट खफा, विभाग को सशर्त मोहलत


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अध्यापकों की ओर से अंतर्जनपदीय सहमति स्थानांतरण को लेकर दाखिल याचिका में बेसिक शिक्षा विभाग ने जवाब दाखिल नहीं किया। इससे खफा कोर्ट ने 30 सितंबर तक बेसिक शिक्षा परिषद के जिम्मेदार अधिकारी को हलफनामा दाखिल करने की सशर्त मोहलत दी है। अब जवाब न देने पर उन्हें अदालत में हाजिर होना होगा। 


यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष माथुर की अदालत ने प्रतिभा वर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते दिया है। विभिन्न जिलों के कई शिक्षकों ने तमाम सहायक अध्यापकों ने अंतर्जनपदीय सहमति स्थानांतरण के मामले में याचिका दाखिल की है। दलील दी है कि बेसिक शिक्षा नियमावली के विपरीत विभाग अध्यापकों का स्थानांतरण एक से दूसरे जिले में न कर उन विद्यालयों में कर रहा है, जहां उनके समकक्ष अध्यापक नियुक्त हैं।

Saturday, July 27, 2024

पहले तबादले का इंतजार, अब वेतन का; अंतरजनपदीय म्यूचुअल ट्रांसफर पर आए शिक्षकों की आईडी अभी नहीं हुई ट्रांसफर

पहले तबादले का इंतजार, अब वेतन का; अंतरजनपदीय म्यूचुअल ट्रांसफर पर आए शिक्षकों की आईडी अभी नहीं हुई ट्रांसफर


लखनऊ । डेढ़ साल के इंतजार के बाद अंतरजनपदीय म्यूचुअल तबादले तो हो गए लेकिन अब शिक्षक अपने वेतन के लिए परेशान हैं। तबालों को एक महीना हो गया लेकिन जिस जिले से आए थे, वहां से उनकी आईडी मानव सम्पदा पोर्टल पर ट्रांसफर नहीं हुई है। वे अपनी अटेंडेंस लगा रहे हैं लेकिन ब्लॉक स्तर से वह लॉक नहीं हो रही। ऐसे में उनको इस महीने का वेतन मिलना मुश्किल होगा।


डेढ़ साल चली प्रक्रिया के बाद 19 जून को शिक्षकों के अंतरजनपदीय म्यूचुअल तबादलों की लिस्ट जारी हुई थी। इसमें प्रदेश के करीब 2700 शिक्षकों का तबादला हुआ था। उन्होंने नए जिले में आवंटित ब्लॉक के स्कूल में जॉइन भी कर लिया। इसके बाद जहां से उनका तबादला हुआ है, वहां से उनका लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) जारी होना था। कुछ जिलों ने LPC जारी कर दिया लेकिन कई जिले ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक जारी नहीं किया। उसी आधार पर शिक्षकों का आगे का वेतन नए जिले में लगेगा। 


जहां LPC जारी हो गया है, वहां अभी आईडी ट्रांसफर नहीं हुई है। इस आईडी से ही शिक्षकों को अपनी अटेंडेंस लॉक करनी होती है। उसके बाद स्कूल के हेड टीचर को सभी शिक्षकों की अटेंडेंस लॉक का ब्योरा सबमिट करना होगा। अटेंडेंस स्कूल स्तर से लॉक करने के बावजूद ज्यादातर जिलों में ब्लॉक स्तर से अटेंडेस लॉक नहीं हो रही। इसकी वजह आईडी ट्रांसफर न होना है।


वेतन आदेश भी जारी नहीं

बाराबंकी से माल ब्लॉक में ट्रांसफर होकर आए शिक्षक निर्भय सिंह ने बताया कि उन्होंने भी अपनी अब तक की अटेंडेंस लॉक की है, लेकिन ब्लॉक स्तर से लॉक नहीं हो रही। ऐसी ही समस्या कई और शिक्षकों की भी है। आईडी ट्रांसफर होने के बाद ही बीएसए वेतन के आदेश जारी करेंगे। अभी तक एक-दो जिलों को छोड़कर बाकी ने वेतन आदेश जारी नहीं किए हैं। इस बारे में प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि जब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है तो इसमें वक्त लगना ही नहीं चाहिए। शिक्षकों से अधिकारी हर काम समय पर चाहते हैं लेकिन खुद शिक्षकों के काम लटकाए रहते हैं।


इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ वक्त लगता है। कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से ऐसा हो सकता है। जल्द दुरुस्त करवाया जाएगा। कोशिश होगी किसी का वेतन न रुके। - सुरेंद्र तिवारी, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद

Wednesday, April 24, 2024

अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, शिक्षकों के अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण का मामला

शासकीय अधिवक्ता शासन से 30 दिन में लें निर्देश


हमीरपुर । पिछले एक वर्ष से अंतरजनपदीय पारस्परिक (म्यूचुअल) स्थानांतरण की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे शिक्षकों की याचिका पर हाईकोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता से प्रक्रिया के पूर्ण न हो पाने पर शासन से 30 दिन में निर्देश लेने को आदेशित करते हुए अगली सुनवाई 29 मई को नियत की है।

याचिकाकर्ता शिक्षक अनुराग तिवारी ने बताया कि उच्च न्यायालय ने निर्भय सिंह और अदर्स की याचिका में 12 फरवरी 2024 के आदेश में 2023-24 के अंत में स्थानांतरण करने का आदेश पारित किया था लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश का पालन न होने पर उन्होंने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की थी। इस याचिका की 22 अप्रैल की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने शासकीय अधिवक्ता से इस प्रक्रिया के पूर्ण न हो पाने पर शासन से 30 दिन में निर्देश लेने को आदेशित करते हुए अगली सुनवाई 29 मई को नियत की है।

बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग के दो जून 2023 के शासनादेश में अंतर्जनपदीय सामान्य एवं पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया समानांतर रूप से चलनी थी। सामान्य स्थानांतरण की प्रकिया लगभग एक माह में पूर्ण कर ली गई, किन्तु पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया अभी तक अधर में लटकी है। शिक्षक पिछले एक वर्ष में कई बार विभागीय अधिकारियों एवं मंत्रियों से इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए मिले किन्तु उन्हें मायूस होना पड़ा।


अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, शिक्षकों के अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण का मामला


हमीरपुर। अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण को लेकर उच्च न्यायालय का आदेश शासन द्वारा न मानने पर आवेदन करने वाले शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की। जिसमें उच्च न्यायालय ने शासन से 30 दिन में पक्ष मांगते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 मई की तिथि तय की है।

मुख्यालय के रमेड़ी मोहल्ला निवासी याचिकाकर्ता शिक्षक अनुराग तिवारी ने बताया कि दो जून 2023 को बेसिक शिक्षा विभाग ने अंतरजनपदीय सामान्य व पारस्परिक स्थानांतरण के आदेश जारी किए।  जिसमें दोनों प्रक्रियाएं समानांतर चलने का भी उल्लेख किया गया। लेकिन सामान्य स्थानान्तरण की प्रक्रिया को लगभग एक माह में पूर्ण कर लिया गया और पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया अभी भी पूर्ण नहीं हो सकी।

अंतर जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए आवेदकों द्वारा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व पेयर बनाने की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। लेकिन सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने नौ जनवरी 2024 के आदेश में इस प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण की कार्रवाई को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया। इस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में निर्भय सिंह व अन्य के नाम से याचिका दाखिल की थी।

उच्च न्यायालय ने 12 फरवरी 2024 को सत्र के अंत मे स्थानांतरण करने का आदेश दिया। लेकिन शासन द्वारा कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की गई। जिसमें बीते 22 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 30 दिन में शासन से पक्ष मांगा है।



अंतर्जनपदीय म्यूचुअल स्थानांतरण पर फंसा पेंच,  उच्च न्यायालय का आदेश न मानने पर दायर हुई अवमानना याचिका

■ बेसिक शिक्षा विभाग में सामान्य और म्यूचुअल स्थानांतरण का मामला

■ शिक्षक ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया अवमानना की याचिका


बेसिक शिक्षा विभाग में स्थानांतरण नीति पर कोर्ट के आदेश की अनदेखी की जा रही है। सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया होने के बाद भी अभी तक पारस्परिक (म्यूचुअल) स्थानांतरण का पेंच फंसा हुआ है। विभाग की हीलाहवाली से नाराज होकर याचिकाकर्ता शिक्षक ने हाईकोर्ट में अवमानना की रिट दायर की है।


याचिकाकर्ता शिक्षक अनुराग तिवारी ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के अंतरजनपदीय सामान्य एवं पारस्परिक (म्यूचुअल) स्थानांतरण 2023-24 के लिए दो जून 2023 को शासनादेश जारी हुआ था। उल्लेख था कि दोनों प्रक्रियाएं समानांतर चलेंगी। सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया को लगभग एक माह में पूरा किया गया और पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया अभी भी लटकी है। प्रक्रिया के लिए आवेदकों द्वारा ऑनलाइन


रजिस्ट्रेशन एवं पेयर बनाने की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है लेकिन सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के नौ जनवरी 2024 के आदेश में इस प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण की कार्यवाही को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया। शिक्षकों ने 11 से 14 जनवरी तक निशातगंज लखनऊ में स्थानांतरण के लिए महायाचना कार्यक्रम किया। जिसमें विभागीय अधिकारियों एवं मंत्रियों से गुहार लगाई किंतु शिक्षकों को मायूसी ही हाथ लगी। 


उन्होंने बताया कि शिक्षकों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में निर्भय सिंह एंड अदर्स के नाम से पारस्परिक स्थानांतरण के लिए एक याचिका दाखिल की, जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा 12 फरवरी 2024 को सत्र 2023-24 के अंत में स्थानांतरण करने का आदेश पारित किए। न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अंतर्गत इस प्रक्रिया के शिक्षक कई बार विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर स्थानांतरण के लिए अनुरोध कर चुके हैं, किंतु अभी तक शासन द्वारा कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है।


याचिकाकर्ता शिक्षक ने बताया कि कोर्ट के आदेश का निर्धारित समय में पालन न हो पाने के कारण उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल कर दी गई है, जिसकी सुनवाई अगले सप्ताह संभावित है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के पूर्ण न होने से पूरे प्रदेश में लगभग चार से पांच हजार शिक्षक प्रभावित है।



उच्च न्यायालय का आदेश न मानने पर दायर की अवमानना याचिका

बीते वर्ष दो जून को बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किया था आदेश

शिक्षकों के अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण का मामला



अंतरजनपदीय  पारस्परिक स्थानांतरण को लेकर  उच्च न्यायालय का आदेश न मानने पर आवेदन करने वाले शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की है।

बीते वर्ष दो जून को बेसिक शिक्षा  विभाग ने शिक्षकों के अंतर्जनपदीय सामान्य व पारस्परिक स्थानांतरण के - लिए शासनादेश जारी किया था। जिसमें सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी।

जिसमें उच्च न्यायालय ने सत्र के अंत में उनके स्थानांतरण के आदेश - दिए थे। इसके बाद भी विभाग ने इस - पर कोई कार्रवाई नहीं की। मुख्यालय के रमेड़ी मोहल्ला निवासी याचिकाकर्ता शिक्षक - अनुराग तिवारी ने बताया कि दो जून - 2023 को बेसिक शिक्षा विभाग ने अंतरजनपदीय सामान्य व पारस्परिक स्थानांतरण के आदेश जारी किए थे।

जिसमें दोनों प्रक्रियाएं समानांतर चलने का भी उल्लेख किया गया। लेकिन सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया को लगभग एक माह में पूर्ण कर लिया गया और पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया अभी भी पूर्ण नहीं हो सकी।

बताया कि अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए आवेदकों द्वारा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व पेयर बनाने की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। लेकिन सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने नौ जनवरी 2024 के आदेश में इस प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण की कार्रवाई को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया।

जिस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में निर्भय सिंह व अन्य के नाम से याचिका दाखिल की। इसमें उच्च न्यायालय ने 12 फरवरी 2024 को सत्र के अंत में स्थानांतरण करने का आदेश दिया। आदेश के क्रम में कई बार विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर स्थानांतरण का अनुरोध किया।

लेकिन अभी तक शासन द्वारा कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। जिस पर आदेश का निर्धारित समय में पालन न हो पाने के कारण उच्चन्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल कर दी गई है। इसकी सुनवाई अगले सप्ताह संभावित है। बताया कि शिक्षक अब न्याय पाने को न्यायालय की शरण में है, जिससे उनकी स्थानांतरण नीति सुरक्षित रहे व उनके अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण शीघ्र हो सके।