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Tuesday, January 24, 2023

बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल होंगे मोटे अनाज, मंशा डिमांड बढ़ाने की

बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल होंगे मोटे अनाज, मंशा डिमांड बढ़ाने की

योगी सरकार की मंशा: हर आम एवं खास की थाल तक पहुंचे मोटे अनाज


Uttar Pradesh: बच्चे अपने इन परंपरागत अनाजों एवं इनकी खूबियों के बाबत जानें, इसके लिए मिलेट्स को प्राइमरी स्कूलों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। वास्तव में सरकार की मंशा अलग अलग प्रयासों से समग्र रूप में मिलेट्स की डिमांड बढ़ाने की है। और, बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए उत्पाद के रूप में गुणवत्तापूर्ण माल की भी जरूरत होगी।


लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय मिलेट ईयर-2023 में मोटे अनाज (बाजरा, ज्वार, सावां, कोदो, रागी आदि) किसी न किसी रूप में हर आम एवं खास की थाली का हिस्सा बनें, यह यूपी सरकार की मंशा है। इसके लिए मिलेट्स द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ये उत्पाद नाश्ते, लंच, ब्रंच या डिनर के लिए स्पेसिफिक हंगर (किसी खास तरह के खाद्य पदार्थ की मांग) बनें। इसके लिए प्रसंस्कृत उत्पादों को स्थानीय लोगों की उम्र एवं स्वाद के पसंद के अनुरूप होना होगा। 

बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल होंगे मिलेट्स, मंशा डिमांड बढ़ाने की

बच्चे अपने इन परंपरागत अनाजों एवं इनकी खूबियों के बाबत जानें, इसके लिए मिलेट्स को प्राइमरी स्कूलों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। वास्तव में सरकार की मंशा अलग अलग प्रयासों से समग्र रूप में मिलेट्स की डिमांड बढ़ाने की है। और, बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए उत्पाद के रूप में गुणवत्तापूर्ण माल की भी जरूरत होगी। इसके लिए एफपीओ (फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) के जरिए रकबा एवं उत्पादन बढ़ाने का भी काम होगा। साथ ही ये बीज का भी उत्पादन करेंगे। प्रगतिशील किसानों को प्रदर्शन के लिए बीज के निःशुल्क और खेती के इच्छुक किसानों को केंद्र एवं प्रदेश सरकार की संस्थाएं राष्ट्रीय बीज निगम, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम आदि के जरिए अनुदानित बीज दिया जाएगा। 

जी-20 के मेहमानों की थाल की शोभा बढ़ाएंगे मिलेट्स के लजीज पकवान

उत्तर प्रदेश में फरवरी 2023 से लेकर अगस्त के अंत के दौरान जी-20 की करीब दर्जन भर बैठकें होनी है। इसमें से आधा दर्जन बैठकें महादेव की काशी, तीन ताजनगरी आगरा, बाकी लखनऊ एवं ग्रेटर नोएडा में होंगी। इनमें आने वाले मेहमानों को भी मिलेट्स के लजीज व्यंजन परोसे जाएंगे। यह एक तरह से इनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग भी होगी। सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि इन अनाजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद भी हो। इसी तरह हर विभाग में समय समय पर होने वाले राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मिलेटस के उत्पाद की ब्रांडिंग करेंगे। यह नाश्ते, भोजन के रूप में हो सकता है। गिफ्ट हैंपर के रूप में भी।


मोटे अनाज को लोकप्रिय बनाने की अन्य योजनाएं

– मिड-डे मील, बाल पुष्टाहार, पीडीएस कार्यक्रम में मिलेट्स के विभिन्न उत्पाद सम्मिलित होंगे।

– स्वयं सहायता समूहों को मिलेट्स के उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

-एनआरएलएम द्वारा चयनित आंगनबाड़ी एवं पोषित आहार में मिलेट्स भी शामिल होंगे



स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल होगी मोटे अनाज की जानकारी

आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को दिए जाएंगे मोटे अनाज से बने पुष्टाहार

उचित मूल्य की दुकानों पर भी बांटा जाएगा मोटा अनाज


लखनऊ। प्रदेश में मोटे अनाज के उत्पादन व उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संबंधित जानकारी को बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को भी मोटे अनाज से बने पुष्टाहार दिए जाएंगे।


दरअसल, राज्य सरकार ने हर स्तर पर मोटे अनाज (मिलेट्स) के तहत ज्वार, बाजरा, सांवा, कोदो, काकुन, रागी, कुटकी, चेना, कुट्टू और चौलाई के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाई है मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र की पहल पर बनाई गई योजना में अधिकांश विभागों की भूमिका भी तय की गई है।


योजना के तहत मोटे अनाज की विभिन्न फसलों, उनके उत्पाद और पोषण के महत्व को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। खाद्य एवं रसद विभाग को मोटे अनाज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने और उसके भंडारण की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उचित मूल्य की दुकानों पर वितरित होने वाले राशन में मोटे अनाज को करने की योजना है।


विकास खंड और गांवों में खोले जाएंगे स्टोर

ग्राम्य विकास विभाग विकास खंड और गांवों में अन्य सार्वजनिक स्थलों पर मोटे अनाज के आउटलेट और दुकानें स्थापित करेगा। महिला स्वयं सहायता समूह के जरिये भी मोटे अनाज के उत्पाद तैयार कराए जाएंगे। इस समूह की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तैयार किए जा रहे पुष्टाहार भी मोटे अनाज से बनाए जाएंगे।


बीज निगम उपलब्ध कराएगा प्रमाणिक बीज

मोटे अनाज के बीज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बीज विकास निगम को सौंपी गई है। खेतों में फील्ड डे का आयोजन किया जाएगा। कृषक उत्पादन संगठनों के जरिये मोटे अनाज के बीज उत्पादन के लिए सीड मनी उपलब्ध कराई जाएगी। मिलेट्स प्रसंस्करण की स्थापना के लिए कृषि विश्वविद्यालय को शत प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।


किसानों के प्रशिक्षण टूल तैयार किए जाएंगे रहमान खेड़ा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान के जरिये मोटे अनाज की उन्नत खेती और किसानों के प्रशिक्षण के लिए टूल तैयार किए जाएंगे। कृषक उत्पादन संगठनों के सदस्यों का प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। कृषि विवि मोटे अनाज की उन्नत खेती का प्रदर्शन कर कृषकों को प्रशिक्षित करेंगे। बीज का उत्पादन करेंगे।


मोटे अनाज की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होगी

उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग मोटे अनाज की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करेगा। कृषि विपणन विभाग मोटे अनाज के उत्पादों के आउटलेट और स्टोर स्थापित करेगा। वहीं, मंडियों में विक्रय स्थल का आवंटन किया जाएगा।

प्रमुख उत्पादक क्षेत्र : मोटे अनाज में यहां ज्वार और बाजरा की पैदावार होती है। बाजरा आगरा, बदायूं, अलीगढ़, फिरोजाबाद, संभल, हाथरस, एटा, मथुरा, कासगंज और इटावा की फसल है। वहीं, ज्वार बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर, कौशांबी, रायबरेली, जालौन, सोनभद्र और जौनपुर की प्रमुख फसल है।


स्कूलों में बंटेगा मोटे अनाज से बना मिड-डे मील, सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में भी मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ परोसे जाएंगे


लखनऊ। प्रदेश में मोटे अनाज (मिलेट्स) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग कराएगी। सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में मोटे अनाज से बनने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाएगा। सभी होटल और रेस्तरां के मेन्यू में भी मोटे अनाज के खाद्य पदार्थ को शामिल कराया जाएगा। सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में भी मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ ही परोसे जाएंगे।


प्रदेश में मोटे अनाज के उत्पादन एवं उपयोग पर शनिवार को लोक भवन में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में मोटे अनाज के रूप में ज्वार, बाजरा, सावां, कोदो, काकुन, रागी, कुटकी, चना, कुट्टू, चौलाई की पैदावार होती है। मोटे अनाज की खेती में सिंचाई के लिए पानी की कम जरूरत होती है। इसके लिए खाली पड़े असिंचित क्षेत्र को भी चिह्नित किया जाए।


उन्होंने सामान्य बीज एवं निःशुल्क बीज मिनी किट वितरित करने के निर्देश दिए।   साथ ही शेफ प्रतियोगिता आयोजित करने का भी सुझाव दिया। उधर, जी-20 से संबंधित सभी आयोजनों व ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिलेट्स की ब्रांडिंग व मार्केटिंग कराई जाएगी। आगरा, लखनऊ, वाराणसी और नोएडा में होने वाली बैठकों में आने वाले विदेशी मेहमानों को मोटे अनाज से बने व्यंजन परोसने की तैयारी है। सचिवालय स्थित कैंटीन व आकांक्षा मसाला मठरी केंद्र को मिलेट्स उत्पाद एवं उससे तैयार होने वाले पकवान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

Wednesday, April 27, 2022

आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायक कानून के तहत ग्रेच्युटी के हकदार : सुप्रीम कोर्ट

आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायक कानून के तहत ग्रेच्युटी के हकदार : सुप्रीम कोर्ट



नयी दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में काम करने के लिए नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं।


न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तथा वे सरकार की विस्तारित इकाई बन गए हैं। पीठ ने कहा कि 1972 (ग्रेच्युटी का भुगतान) कानून आंगनवाड़ी केंद्रों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों पर लागू होगा।


पीठ ने कहा कि इन अपीलों में शामिल विषय यह है कि क्या एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत स्थापित आंगनवाड़ी केंद्रों में काम करने के लिए नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं।


पीठ ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इस निष्कर्ष की पुष्टि की लेकिन उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जिला विकास अधिकारी द्वारा दायर अपीलों पर एकल पीठ के फैसले को खारिज करते हुए निर्णय दिया गया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 1972 के कानून की धारा 2(ई) के अनुसार कर्मचारी नहीं कहा जा सकता तथा आईसीडीएस परियोजना को उद्योग नहीं कहा जा सकता है।


उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 के प्रावधानों और शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 11 के कारण आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हैं।
न्यायमूर्ति ओका ने एक अलग फैसले में कहा कि इस प्रकार, आंगनवाड़ी केंद्र राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और गुजरात सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के मद्देनजर सरकार की एक विस्तारित शाखा बन गए हैं।


 उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत परिभाषित राज्य के दायित्वों को प्रभावी बनाने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई है और ऐसे में कहा जा सकता है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सहायक के पद वैधानिक हैं।