बेसिक शिक्षा के राज्य शिक्षक पुरस्कार पर कई जिलों से उठे सवाल, जिला स्तर पर सबसे कम अंक वालों को प्रदेश स्तर पर चुने जाने का आरोप
लखनऊ । पांच सितंबर को शिक्षक दिवस है। इस अवसर पर आयोजित समारोह में राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले ही राज्य पुरस्कार सवालों के घेरे में आ गए हैं। कई जिलों में शिक्षकों ने शिकायत की हैं चयन में कमियां बताई हैं। सबसे ज्यादा सवाल जिला स्तर पर दिए गए अंकों और प्रदेश स्तर पर किए गए चयन में बड़े अंतर को लेकर हैं। वहीं, हेडमास्टर के अग्रसारित किए बिना पुरस्कार देने और कई बार सस्पेंड शिक्षिका का नाम पुरस्कार लिस्ट में होने जैसी शिकायतें भी हैं।
ये है प्रक्रिया : पुरस्कारों के चयन के लिए सबसे पहले जिला स्तरीय समिति शिक्षकों से जरूरी दस्तावेज लेकर तय प्रक्रिया के तहत अंक देती है। पुरस्कार के लिए जरूरी इन दस्तावेज के 80 अंक होते हैं। उसके बाद निदेशालय स्तर पर साक्षात्कार होता है और दस्तावेज की जांच होती है। निदेशालय स्तर से 20 अंक तय होते हैं। इस आधार पर 100 अंकों में जिसके अंक ज्यादा होंगे, उसे पुरस्कार के लिए चुना जाएगा।
जिसके कम अंक, उसे पुरस्कार : सबसे ज्यादा सवाल अंक देने की प्रक्रिया पर ही हैं। ललितपुर में शिक्षक नीरज द्विवेदी को जिला स्तर पर 80 में से 65 अंक मिले। अनिल कुमार को 50 और प्रीति गुप्ता को 36 अंक मिले। प्रदेश स्तर पर साक्षात्कार और समीक्षा के बाद चयन जिले में सबसे कम अंक वाली प्रीति गुप्ता का हुआ। इसी तरह महोबा में जिला स्तर पर ब्रज किशोर को 69 अंक मिले। वहीं, ओम प्रकाश तिवारी को 49 और विनोद कुमार पाठक को 39 अंक मिले। पुरस्कार की सूची आई तो उसमें 39 अंक पाने वाले विनोद कुमार पाठक का नाम आया। इस पर सवाल ये उठ रहे हैं कि जिसके जिला स्तर पर 69 और 65 अंक पाने वालों को साक्षात्कार में शून्य अंक भी दिया जाए और 39 और 36 अंक पाने वालों को पूरे 20-20 नंबर भी दे दिए जाएं तो भी कम रहेंगे।
ऐसे में उनका चयन कैसे हो गया ?
कई बार सस्पेंड शिक्षिका को पुरस्कार : बदायूं में प्राथमिक विद्यालय रिसौली की शिक्षका किरण देवी को पुरस्कार के लिए चुना गया है। उसी गांव की मेघा ने उनके बारे में अधिकारियों को शिकायत की है। कहा है कि किरण देवी तीन बार गंभीर आरोपों सस्पेंड हो चुकी हैं। ऐसे में उनको यह पुरस्कार कैसे दिया जा सकता है? बीएसए बदायूं का कहना है कि निलंबन कोई सजा नहीं होती है।
हेडमास्टर ने ही की शिकायत
लखनऊ में भी जिला स्तर पर 48 अंक पाने वाली विनीता का चयन पुरस्कार के लिए हुआ है। उससे ज्यादा अंक पाने वालो को नहीं चुना गया। इसके अलावा गोसाईगंज के प्राथमिक विद्यालय अमेठी की हेड टीचर संतोष राय ने इसकी शिकायत भी जनसुनवाई पोर्टल पर की है और एक विडियो बनाकर भी प्रसारित किया है। उनका कहना है कि उनसे हस्ताक्षर ही नहीं करवाए गए। उन्हें आशंका है कि उनकी शिक्षिका विनीता ने उनके फर्जी हस्ताक्षर किए। इस बारे में विनीता का कहना है कि हेड टीचर ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। ऐसे में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को अधिकार होता है और उन्होंने आवेदन अग्रसारित कर दिया।
जिलों में तय मानकों के अनुसार अंक नहीं दिए गए थे। कई के पूरे दस्तावेज नहीं थे। ऐसे में निदेशालय स्तर पर समीक्षा की गई। उस आधार पर चयन किया गया है। यदि हेडमास्टर किसी व्यक्तिगत कारण से किसी का आवेदन अग्रसारित नहीं करता तो उससे बड़े सक्षम अधिकारी को यह अधिकार होता है। जिनका चयन नहीं हुए वे बेवजह जिले के अंकों के आधार पर सवाल उठा रहे हैं। - अनिल भूषण चतुर्वेदी, निदेशक-बेसिक शिक्षा
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