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Saturday, March 28, 2026

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने कक्षा में रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर लगाई रोक, शिक्षकों पर भी नियम लागू

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने कक्षा में रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर लगाई रोक, शिक्षकों पर भी नियम लागू

🔴 कक्षा के दौरान रील्स, शॉर्ट वीडियो बनाने पर रोक।

🔴 पढ़ाई का माहौल बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश।

🔴 शैक्षणिक सामग्री अनुमति से, आपत्तिजनक सामग्री प्रतिबंधित।

दिल्ली  शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई के दौरान रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर सख्त रोक लगा दी है। यह कदम पढ़ाई के माहौल को प्रभावित करने वाली शिकायतों के बाद उठाया गया है। निर्देश में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को कक्षा के घंटों में ऐसे वीडियो बनाने से मना किया गया है।


नई दिल्ली। स्कूलों में पढ़ाई के दौरान रील्स और शार्ट वीडियो बनाने के बढ़ते चलन पर अब सख्ती शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि कक्षा के घंटों में विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी किसी भी तरह के रील्स या शार्ट वीडियो न बनाएं।


निदेशालय ने कहा कि स्कूल परिसर में मनोरंजन के लिए वीडियो बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सभी स्कूल प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाएं।

केवल शिक्षा पर फोकस दिलाना उद्देश्य
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी गतिविधि जो पढ़ाई-लिखाई में बाधा डाले या विद्यार्थियों का ध्यान भटकाए, उसे पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। साथ ही स्कूलों की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है और फोकस केवल शिक्षा पर होना चाहिए।

हालांकि, विभाग ने यह भी कहा है कि शैक्षणिक, सांस्कृतिक या जागरूकता से जुड़े कंटेंट को अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए पहले संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी लेनी होगी और शिक्षक की निगरानी में ही ऐसी गतिविधि होनी चाहिए।

नियम उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी
साथ ही यह भी साफ किया गया है कि स्कूल परिसर में किसी भी तरह का आपत्तिजनक, गैर-शैक्षणिक या प्रमोशनल कंटेंट रिकार्ड नहीं किया जाएगा। सभी स्कूलों को यह निर्देश तुरंत लागू करने और विद्यार्थियों व कर्मचारियों तक जानकारी पहुंचाने को कहा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा।

Sunday, April 14, 2024

केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाई के नए मानक, अब प्रत्येक कक्षा में 40 की जगह 32 बचे ही होंगे

केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाई के नए मानक, अब प्रत्येक कक्षा में 40 की जगह 32 बचे ही होंगे


प्रयागराज। केंद्रीय विद्यालयों की कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या में कमी कर दी गई है। अब किसी भी कक्षा में 32 से अधिक बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। पहले यह मानक 40 बच्चों का था। इस बदलाव से अभिभावकों में नाराजगी है। इस कारण कक्षा एक के अलावा अन्य कक्षाओं में प्रवेश नहीं हो रहा है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत यह बदलाव किया गया है।


सैन्यकर्मियों के बच्चों का इन विद्यालयों में प्राथमिकता में प्रवेश हो जाता है। उसके बाद रिक्त सीटों पर अन्य वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। इस बार प्रवेश की गाइडलाइन जारी हुई तो पूर्व के सापेक्ष प्रत्येक कक्षा में बच्चों की संख्या कम कर दी गई है। केवल कक्षा एक में प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन लिया जा रहा है। कक्षा दो से 11वीं तक की कक्षाओं में प्रवेश के लिए फार्म नहीं दिए जा रहे हैं। कई विद्यालयों ने दो से ऊपर की कक्षाओं में प्रवेश न होने का बोर्ड लगा दिया है।


प्राचार्यों ने बताया कि पहली कक्षा में विद्यार्थियों का मानक 40 का था। हर वर्ष प्रत्येक कक्षा में औसतन चार या पांच बच्चों के अभिभावकों के तबादले के कारण स्कूल छोड़ते थे तो उनके स्थान पर दूसरे बच्चों को प्रवेश मिल जाता था। इस बार कक्षा का मानक कम कर दिया है। अब कुछ बच्चे स्कूल छोड़ेंगे, तब भी कक्षा की क्षमता 32 से अधिक रहेगी। उन्होंने बताया कि अब केवल केवल कक्षा एक में ही प्रवेश हो रहा है। उसके लिए आनलाइन आवेदन 15 अप्रैल तक लिया जाएगा। प्रवेश का परिणाम 22 अप्रैल को जारी कर दिया जाएगा। 30 जून तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी है। 

प्रवेश के लिए भटक रहे हैं अभिभावक

केवी में प्रवेश के लिए अभिभावक परेशान हैं। धूमनगंज की सरोज देवी ने अपनी बेटी का कक्षा नौ में प्रवेश के लिए केवी न्यू कैंट, केवी मनौरी और केवी बमरौली गई लेकिन फार्म नहीं मिला। ऐसे ही कन्हईपुर के त्रिभुवन सिंह भी अपने बेटे का कक्षा पांच प्रवेश कराने के लिए भटक रहे हैं। करेली के तलहा रहमानी ने कक्षा चार में बेटे का प्रवेश करवाने के लिए कई केवी का चक्कर लगाया लेकिन फार्म नहीं मिला।

श्रेणी एक और दो को रियायत

जिस विभाग के परिसर में केंद्रीय विद्यालय है, वहां के कर्मियों के बच्चों को प्रवेश में रियायत दी है। उनके बच्चों को कक्षा एक में अधिकतम 40 की क्षमता तक और दो से 11वीं तक 45 की क्षमता तक प्रवेश दिया जाएगा।