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Monday, August 9, 2021

जालौन : शैक्षिक सत्र 2021-22 में कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकों को बीआरसी से विद्यालय तक पहुंचाने के सम्बन्ध में बीएसए का आदेश

 जालौन : शैक्षिक सत्र 2021-22 में कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकों को बीआरसी से विद्यालय तक पहुंचाने के सम्बन्ध में बीएसए का आदेश  




Monday, April 5, 2021

कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


नई दिल्ली । शिक्षा व्यवस्था किसी भी देश का भविष्य निर्धारित करती है। लेकिन जब शिक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम में चलाई जाने वाले किताबों पर निजी स्कूल एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने की मनमानी करते हैं तो अभिभावकों का परेशान होना लाजिमी है। देशभर में सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) से संबंधित हर स्कूल के अलग कोर्स और किताबें हैं।


इन स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगवाने के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवाई जाती है। एनसीईआरटी की किताबों का अधिकतम मूल्य अगर 50 से 150 रूपए हैं तो वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 300 से 600 रूपये तक की होती हैं।


वहीं, सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


एनसीईआरटी की किताबें उबाऊ और सामग्री की कमी

मयूर विहार फेज-1 स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक एनसीईआरटी की किताबें पुराने ढर्रे पर चली आ रही है, किताबें काफी उबाऊ भी हैं और उनमें सामग्री की भी कमी है। किताब में केवल संक्षिप्त सवाल होते है, जो छात्र को प्रैक्टिस करने के लिए कम पड़ते हैं। आप यह आलेख प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।वहीं, द्वारका स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक उनके स्कूल में वो फिलहाल कुछ किताबें विदेशी प्रकाशकों की इस्तेमाल कर रही हैं। उनके मुताबिक निजी प्रकाशकों की किताबें 21वीं सदी के छात्रों के हिसाब से हैं।


राजेंद्र नगर स्थित सलवान पब्लिक स्कूल के एक शिक्षक के मुताबिक एनसीईआरटी की कुछ किताबें कई बार बाजार में ही उपलब्ध नहीं होती या देरी से मिलती है। वहीं, निजी प्रकाशकों की किताबें आसानी से उपलब्ध हो जाती है इसलिए स्कूल निजी प्रकाशकों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। राजधानी के ज्यादातर निजी स्कूलों की निजी प्रकाशकों की किताबें इस्तेमाल करने को लेकर लगभग यही तर्क है।

प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षा के लिए एनसीईआरटी बेहतर

इन सभी निजी स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं के छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती है। इस पर निजी स्कूलों की तर्क है कि बोर्ड की परीक्षाओं में ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी की किताबों से ही आते हैं।

करोल बाग स्थित दिल्ली सरकार के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य हंस राज मोदी बताते हैं कि उनके स्कूल में सभी छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती हैं। अगर किसी विषय में एनसीईआरटी की किताब नहीं है तो स्कूल छात्रों को सपोर्ट मटेरियल उपलब्ध कराता है। उनके मुताबिक स्कूल के सभी छात्र बोर्ड के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एनसीईआरटी का ही इस्तेमाल करते हैं क्योंकि जितना अच्छा कान्सेप्ट (संकल्पना) एनसीईआरटी की किताबें से समझ आता है उतना शायद ही किसी निजी प्रकाशक की किताबों से आए।

स्कूलों का बंधा होता है कमीशन

दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम के मुताबिक शासन प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद ज्यादातर निजी स्कूल एनसीईआरटी की किताबों को अपनी सूची में शामिल करने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल से ही दुकान का पता बताया जाता है कि कहां से निजी प्रकाशक की किताब खरीदनी है और किताब में लिखे दाम पर ही किताब खरीदनी पड़ती है। क्योंकि स्कूलों की कमीशन बंधा होता है। उनके मुताबिक किताब वितरण के जो ठेके दुकानों को दे रखे थे उसमें भी मनमर्जी चलाई जाती है, स्कूलों को जहां से कमीशन कम हुआ वहां से हटाकर दूसरी जगह आवंटित कर दिया जाता है। 

वहीं, फेसबुक, ट्वीटर पर एनसीईआरटी बनाम निजी प्रकाशकों की किताबों को लेकर मुद्दा उठा रहे शिक्षाविद और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निरंजन कुमार के मुताबिक आज सबसे ज्यादा परेशान निम्न मध्यम वर्गीय परिवार है। वो जैसे तैसे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाता हैं उस पर भी स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों को खरीदने का जो दबाव बनाया है वो अभिभावकों के लिए सही नहीं है। उनके मुताबिक स्कूलों का काम सिर्फ शिक्षा देना होना चाहिए न कि शिक्षा के नाम पर व्यापार करना।

एनसीईआरटी सचिव मेजर हर्ष कुमार ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और प्रोफेसर काफी शोध के बाद छात्रों के लिए किताबें तैयार करते हैं। इन्हें तैयार करने में भी लंबा समय लगता है। एनसीईआरटी की किताबें देशभर के 22 से ज्यादा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में चलती हैं और ये देशभर के छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। आज सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र इन्हीं किताबों से पढ़कर उत्तीर्ण होते हैं। इसका दाम बी निजी प्रकाशकों के मुकाबले बहुत कम होता है। निजी स्कूलों को इन किताबों को आठवीं तक की कक्षा में जरूर शामिल करना चाहिए।

Wednesday, March 24, 2021

इस बार भी नहीं बढ़ेंगे कक्षा 9 से 12 तक की किताबों के दाम

इस बार भी नहीं बढ़ेंगे कक्षा  9 से 12 तक की किताबों के दाम

■ सबसे सस्ती 7₹ तो सबसे महंगी 66 रुपये की किताब


यूपी बोर्ड के कक्षा 9 से 12वीं तक के | सवा करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। एक अप्रैल से शुरू हो रहे नये सत्र 2021-22 में उनकी किताबों के दाम नहीं बढ़ेंगे। बोर्ड | ने पिछले साल प्रकाशकों से दो साल के | लिए अनुबंध किया था। इसलिए | किताबों की जो कीमत पिछले साल थी | वही इस साल भी रहेगी। इस सत्र से | 12वीं कॉमर्स और 10वीं 12वीं में | अंग्रेजी की किताबें राष्ट्रीय शैक्षिक | अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद | (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम पर आधारित लागू होनी है।


यूपी बोर्ड की किताबें एनसीईआरटी से भी 80 फीसदी तक सस्ती हैं। कक्षा 11 अंग्रेजी की किताब स्नैपशॉट बाजार में सिर्फ 7 रुपये में उपलब्ध है जबकि एनसीईआरटी की यही किताब 40 रुपये में उपलब्ध है। यूपी बोर्ड नौवीं की अर्थशास्त्र की किताब 9 रुपये में और 11वीं की 10 रुपये में है। 9वीं की अंग्रेजी, 12वीं की इतिहास एवं समाजशास्त्र की किताबें 11-11 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। सबसे महंगी किताब कक्षा 11 गणित विषय की है जो 66 रुपये की है।

Sunday, March 21, 2021

पंचाट के जरिये सुलझेगा यूपी बोर्ड का पुस्तक विवाद, नए सत्र में नहीं हुआ माध्यमिक शिक्षा की पुस्तकों का टेंडर

पंचाट के जरिये सुलझेगा यूपी बोर्ड का पुस्तक विवाद, नए सत्र में नहीं हुआ माध्यमिक शिक्षा की पुस्तकों का टेंडर


प्रयागराज : नया शैक्षिक सत्र शुरू होने को है। यूपी बोर्ड से संबद्ध 27 हजार से अधिक माध्यमिक कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्रओं को किताबें मुहैया कराने की जगह पुस्तकों की बिक्री के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। नए सत्र में किताबों के लिए टेंडर नहीं हो सका है। बोर्ड प्रशासन ने प्रकरण निस्तारण के लिए पंचाट तैनात करने का अनुरोध भी ठुकरा दिया था, जिस पर प्रकाशकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले में आर्बीट्रेशन की तैनाती की है। अब उम्मीद जगी है कि विवाद खत्म होगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2020-21 में एनसीईआरटी की किताबों के मुद्रण व वितरण के लिए टेंडर जारी किया था। प्रकाशकों से रायल्टी व जीएसटी भुगतान के लिए पत्रचार हुआ तो कोरोना संक्रमण का हवाला दिया गया।


कहा गया कि संक्रमण के दौरान बोर्ड के निर्देश पर ऑनलाइन पढ़ाई हुई, जिससे किताबों की बिक्री प्रभावित रही, अधिकांश किताबें बिकी ही नहीं। साथ ही किताबों का मुद्रण भी पूरा नहीं हो सका है। बोर्ड प्रशासन ने इन तर्को को नहीं माना और वास्तविक संख्या के आधार पर रायल्टी व जीएसटी भुगतान के साथ ही पंचाट की नियुक्ति को ठुकरा दिया।

बोर्ड के दावों में ही विरोधाभास

यूपी बोर्ड एक ओर प्रकाशकों से भुगतान कराने पर अड़ा है, वहीं नए सत्र में किताबें मुहैया कराने पर कहा जा रहा है कि पिछले सत्र में कोरोना के कारण किताबें बिकीं नहीं, बाजार में उपलब्ध हैं। सवाल यह है कि यदि किताबें बिकीं नहीं तो भुगतान किस बात का मांगा जा रहा? सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने कहा कि जिन विषयों का पाठ्यक्रम बदला है, उनकी किताबें एनसीईआरटी से मुहैया कराने की तैयारी है।

प्रकाशकों को कोर्ट से राहत

रायल्टी व जीएसटी भुगतान को लेकर प्रकाशक हाई कोर्ट पहुंचे। उनका कहना था कि कोविड के कारण करार के तहत किताबें नहीं छापी गयी। मांग भी नहीं थी, विशेष स्थिति में छूट देने से बोर्ड ने इन्कार किया है। करार में पंचाट (आर्बीट्रेशन) का क्लाज है। इसलिए पंचाट नियुक्त हो। हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस आरएल मेहरोत्र को आर्बीट्रेटर नियुक्त किया है, जो विवाद सुलझाएंगे, उन्होंने सहमति भी दे दी है।

Friday, March 19, 2021

यूपी बोर्ड : किताबों की आपूर्ति पर कोरोना का ग्रहण, ऑनलाइन पढ़ाई होने से किताबों की बिक्री ठप

यूपी बोर्ड : किताबों की आपूर्ति पर कोरोना का ग्रहण, ऑनलाइन पढ़ाई होने से किताबों की बिक्री ठप

संबद्ध माध्यमिक कॉलेजों में पढ़ने वालों के लिए जनवरी में होता था प्रबंध


प्रयागराज : यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक कॉलेजों में कोरोना संक्रमण की वजह से सिर्फ पढ़ाई ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि किताबों की आपूíत पर भी ग्रहण लगा है। इस वर्ष किताबों के लिए होना वाला नियमित टेंडर तय समय पर नहीं हो सका। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि बाजार में किताबों की भरपूर उपलब्धता है इसलिए नए सत्र में पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा। यह जरूर है कि जिन विषयों का पाठ्यक्रम बदला है उनकी किताबों का इंतजार रहेगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड का वैसे तो संबद्ध 27 हजार से अधिक कॉलेजों की पढ़ाई पर सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है, वह सिर्फ पाठ्यक्रम तैयार कराता है और किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करता रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान जब लंबे समय तक कॉलेज नहीं खुले तो टेलीविजन व ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई। 


पहली बार यूपी बोर्ड ने सीधे इसकी कमान संभाली। अगस्त में शैक्षिक पंचांग जारी करने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई की देखरेख बोर्ड ने ही की। छात्रओं की सहूलियत के लिए 30 प्रशित पाठ्यक्रम कम करके वेबसाइट पर अपलोड किया गया। बोर्ड ने पिछले साल ही किताबों के लिए नया टेंडर जारी कराने को प्रस्ताव शासन को भेजा था, टेंडर नहीं किया गया। 


नए शैक्षिक सत्र से शुरू होने वाली पढ़ाई में किताबों की कमी नहीं रहेगी, लेकिन, अंग्रेजी व कॉमर्स की पढ़ाई शुरू होने पर संशय जरूर है, क्योंकि इन दोनों विषयों का पाठ्यक्रम बदल रहा है। बोर्ड ने अंग्रेजी विषय में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम कक्षा 9 व 11 में लागू कर दिया था लेकिन, नए सत्र से 10वीं व 12वीं में बदले पाठ्यक्रम आधारित किताबों की जरूरत होगी। कॉमर्स में कक्षा 11 में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू होना है। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि इसका इंतजाम सत्र शुरू होने तक पूरा कर लिया जाएगा।

Thursday, July 9, 2020

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बांटी जाएंगी किताबें, अभिभावकों को स्कूल बुलाकर दी जाएंगी पुस्तकें

परिषदीय स्कूलों में मुफ्त मिलती हैं किताबें, 

अभिभावकों को स्कूल बुलाकर दी जाएंगी पुस्तकें

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बांटी जाएंगी किताबें


परिषदीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की किताबें खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों तक पहुंच चुकी हैं। एक दो दिन में स्कूलों से किताबों का वितरण शुरू हो जाएगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार बच्चों के बजाए उनके अभिभावकों को स्कूल बुलाकर किताबें वितरित की जाएंगी। शिक्षकों को पुस्तक वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखना होगा। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकार की ओर से


निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाता है। लखनऊ में 1850 से अधिक स्कूलों में करीब एक लाख साठ हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि बच्चों की पुस्तकें छप कर आ चुकी हैं। इन्हें सभी ब्लाकों के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों तक पहुंचा दिया है। यहां से शिक्षक पुस्तकें ले जाकर वितरित करेंगे। 


उन्होंने बताया कि इस बार अभिभावकों को स्कूल बुलाकर पुस्तकें वितरित की जाएंगी। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक बार में दस से बारह अभिभावकों को ही पुस्तकें प्राप्त करने के लिए स्कूल बुलाएं। एक समय में अभिभावकों की भीड़ स्कूल में न लगने दें। पुस्तक वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जाए। हालांकि नगर क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पुस्तकें अभी नहीं पहुंची हैं। अधिकारियों का कहना है कि नगर क्षेत्र के छात्रों की पुस्तकें भी जल्द वितरित की जाएंगी।



अभिनव मॉडल स्कूल में पुस्तक वितरण शुरू

जिले के अभिनव मॉडल स्कूलों में बच्चों की पुस्तकों का वितरण शुरू हो गया है। एडी बेसिक पीएन सिंह और बीएसए दिनेश कुमार ने बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर पुस्तक वितरण की शुरूआत की। उन्होंने बताया कि इस बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि सब कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहें। अब यहां पर शिक्षक पुस्तकें वितरित करेंगे।