DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label जूता. Show all posts
Showing posts with label जूता. Show all posts

Wednesday, February 24, 2021

जूतों के साइज को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायतें, शिक्षकों को अपने खर्च पर करनी पड़ रही ढुलाई

जूतों के साइज को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायतें,  शिक्षकों को अपने खर्च पर करनी पड़ रही ढुलाई


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को शिक्षा विभाग से मिले जूतों के साइज को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायतें आ रही हैं। किसी छात्र का जूता बड़ा तो किसी का छोटा होने पैर में फिट नहीं हो रहा है। अब जूते बदलवाने के लिए शिक्षक गोदाम के चक्कर लगा रहे हैं।

साल बीतने के बाद परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को जनवरी में जूते-मोजे भेजे गए तो ये गलत नाप के निकल गए। एक मार्च से स्कूल आने के लिए बच्चों को इन्हें बांटा जा रहा है.तो कोई जूता छोटा होने तो कोई बड़ा होने की शिकायत कर रहा है।

उच्च प्राथमिक के कक्षा 6 से 8 के छात्र विद्यालय आने लगे हैं तो वे विद्यालय में ही जूते नापकर देख ले रहे हैं, लेकिन प्राथमिक कक्षा 1 से 5 तक के छात्र अभी विद्यालय नहीं आ रहे हैं तो उनके सामने साइज की समस्या आ रही है। लड़कों को फीते वाले तो लड़कियों को स्ट्रिप वाले जूते मुहैया कराए जा रहे हैं । दोनों ही वर्गों को साइज को लेकर शिकायतें है।

इन साइज के मिले जूते

उच्च प्राथमिक के कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को 5 से 7 नंबर तक के तो छात्राओं को 4 से 7 नंबर तक के जूते दिए गए। वहीं प्राथमिक के बच्चों को इससे कम नंबर के जूते दिए गए। जिले में करीब 196000 परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए जूते मुहैया कराए गए। एक ही क्लास में कुछ बच्चों को छोटे तो कुछ को बड़े साइज के जूते मिले।

शिक्षकों को अपने खर्च पर करनी पड़ रही ढुलाई

हर ब्लॉक के बीआरसी या उसके पास स्थित विद्यालय में अस्थायी गोदाम बनाकर जूते रखे गए हैं। विद्यालयों तक जूते न पहुंचने से शिक्षक अपने खर्च पर गोदाम से जूते विद्यालय तक ला रहे हैं। इसमें साइज गड़बड़ होने पर इन्हें गोदाम तक चक्कर लगाना पड़ रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि कुछ बच्चों के जूते ज्यादा बड़े व छोटे होने से शिक्षकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

फर्म की है जिम्मेदारी

अस्थायी गोडाउन बने हुए हैं। शिक्षक वहां से जूते बदलवा सकते हैं। अगर वहां पर भी सही साइज नहीं मिलेगा तो फर्म की जिम्मेदारी है सही साइज के जूते मुहैया कराए। जिले में 95 प्रतिशत जूते और 100 फीसदी मोजे व बैग बंट चुके हैं। -दिनेश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी