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Tuesday, October 1, 2024

माध्यमिक शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और स्वच्छ कार्य संस्कृति के लिए DGSE के सख्त निर्देश जारी, कार्यालयों में सीसीटीवी और बायोमेट्रिक हुई अनिवार्य

माध्यमिक शिक्षा के मंडलीय और जिलास्तरीय दफ्तरों में भी अब होगी बायोमीट्रिक हाजिरी, देखें आदेश 

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में  शिक्षकों के कड़े विरोध के बाद अब माध्यमिक शिक्षा के मंडल व जिला स्तर के दफ्तरों में कर्मचारियों की बायोमीट्रिक हाजिरी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यालय से बाहर आने-जाने वाले कर्मचारियों व बाहर से आने वाले लोगों के नाम भी एक रजिस्टर में दर्ज किए जाएं। 

महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से मंडल व जिला स्तरीय कार्यालयों में पारदर्शी कार्य संस्कृति को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि मंडल व जिला स्तरीय कार्यालयों में सभी कर्मचारियों की बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज की जाए। अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यालय कक्ष व अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य रूप से लगाया जाए।


माध्यमिक शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और स्वच्छ कार्य संस्कृति के लिए DGSE के सख्त निर्देश जारी, कार्यालयों में सीसीटीवी और बायोमेट्रिक हुई अनिवार्य

लखनऊ, 28 सितंबर 2024
प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में पारदर्शी और स्वच्छ कार्य संस्कृति स्थापित करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, कंचन वर्मा द्वारा जारी इस पत्र में मंडल और जनपद स्तर के कार्यालयों में स्वच्छ और प्रभावी कार्य प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशानिर्देश दिए गए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य जनसामान्य, शिक्षकों और कर्मचारियों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है।

शासन के आदेश के तहत सभी कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे, और उनकी रिकॉर्डिंग को नियमित रूप से सुरक्षित रखा जाएगा। यह कदम भ्रष्टाचार और कार्यालयों में अनुशासनहीनता पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही, कार्यालय में काम करने वाले सभी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की गई है, ताकि कर्मचारियों की नियमितता और अनुशासन सुनिश्चित हो सके।

आदेश में यह भी कहा गया है कि कार्यालय में संदिग्ध व्यक्तियों और अवैधानिक गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए। आगंतुक पंजिका और गमनागमन पंजिका की व्यवस्था को भी अनिवार्य किया गया है, जिससे कार्यालय में अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण हो सके। 

महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए, ताकि जनसामान्य, शिक्षक, और कर्मचारियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कार्यालय में आने वाले जन प्रतिनिधियों और आगंतुकों की समस्याओं को विनम्रता से सुनने और नियमों के अनुसार उनका समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस आदेश का सबसे अहम पहलू यह है कि कार्यदिवस के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों के मण्डलीय या जनपदीय कार्यालयों में अनावश्यक रूप से घूमने पर रोक लगाई गई है, ताकि विद्यालयों में पठन-पाठन कार्य बाधित न हो। कार्यालयों में अनावश्यक बाहरी व्यक्तियों के आने पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया गया है।




क्या इन निर्देशों से आएगी कार्य संस्कृति में सुधार?

शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर लगाम लगाने के इस प्रयास को सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन सख्त निर्देशों से कार्य संस्कृति में वास्तविक सुधार होगा या यह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा? 

सरकार की यह पहल जनसामान्य को बेहतर और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। अब देखना यह है कि इन सख्त निर्देशों का वास्तविक प्रभाव कार्यालयों में कब और कैसे दिखाई देता है।

Saturday, September 28, 2024

डीजीएसई कार्यालय की सुस्ती से मृतक आश्रित कर्मियों की समस्याओं का समाधान लंबित, शासन ने तीसरी बार भेजा अनुस्मारक

डीजीएसई कार्यालय की सुस्ती से मृतक आश्रित कर्मियों की समस्याओं का समाधान लंबित, शासन ने तीसरी बार भेजा अनुस्मारक


लखनऊ, 28 सितंबर 2024
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के रूप में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की समस्याओं के निराकरण को लेकर शासन द्वारा लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं, परंतु समस्याओं का समाधान अभी भी लंबित है। इस संदर्भ में शासन ने तीसरी बार अनुस्मारक भेजते हुए संबंधित जानकारी और प्रस्ताव त्वरित रूप से मांगा है।

शासन के पत्र क्रमांक 1/448504/2023 और 1/499049/2024, दिनांक 14 दिसंबर 2023 और 19 फरवरी 2024, के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, अब तक यह सूचना शासन तक नहीं पहुंच पाई है। 

उल्लेखनीय है कि मृतक आश्रित चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की मांगों और समस्याओं के समाधान हेतु प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में 16 जुलाई 2024 को एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, शासन को संबंधित आख्या अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

शासन ने अब इस प्रकरण पर गंभीरता दिखाते हुए 27 सितंबर 2024 को तीसरी बार अनुस्मारक जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों को 02 कार्यदिवस के भीतर आख्या और प्रस्ताव शासन को प्रस्तुत करने होंगे। 

सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे के लंबित होने के कारण कई चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, जिससे कर्मियों में असंतोष व्याप्त है। 

अब देखना होगा कि इस बार शासन के सख्त रुख के बाद क्या बेसिक शिक्षा विभाग त्वरित कार्रवाई कर इन कर्मियों की समस्याओं का समाधान करता है या यह मुद्दा और लंबित रहेगा। 


Thursday, July 18, 2024

DGSE और शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक संघर्ष मोर्चे की बैठक सकारात्मक लेकिन रही बेनतीजा, बैठक का परिणाम 29 जुलाई के पहले नहीं आया तो संयुक्त मोर्चा निदेशालय में करेगा धरना प्रदर्शन

DGSE और शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक संघर्ष मोर्चे की बैठक सकारात्मक लेकिन रही बेनतीजा

बैठक का परिणाम 29 जुलाई के पहले नहीं आया तो संयुक्त मोर्चा निदेशालय में करेगा धरना प्रदर्शन


लखनऊ । अवकाश के बावजूद बुधवार को डीजी स्कूल शिक्षा की पहल पर शिक्षक संगठनों के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही। हालांकि बैठक में तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। अलबत्ता शिक्षक नेताओं को बेहतर निर्णय का आश्वासन जरूर मिला। हालांकि बैठक के दौरान मोर्चे की ओर से स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि बैठक सकारात्मक रही, मगर इस बैठक का परिणाम यदि 29 जुलाई के पहले सकारात्मक नहीं आया तो संयुक्त मोर्चा के पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 29 जुलाई को प्रदेश भर शिक्षक़ लखनऊ पहुंच कर धरना-प्रदर्शन करेंगे।


मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के निर्देश पर (डीजी) कंचन वर्मा ने शिक्षक, शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों के संयुक्त मंच 'संयुक्त संघर्ष मोर्चा' को अवकाश के दिन बुधवार को बातचीत के बुलाया था। स्कूल शिक्षा महानिदेशक कार्यालय में मोर्चे के सभी घटकों के साथ हुई इस बातचीत में संयुक्त मोर्चा के मांगपत्र पर महानिदेशक के साथ बिंदुवार विधिवत चर्चा हुई। 


महानिदेशक ने बिंदुवार चर्चा कर मोर्चा प्रतिनिधियों को आस्वस्त किया कि जो प्रकरण उनके स्तर का है, उसे वे अपने स्तर से जल्द निस्तारित कर देंगे। वहीं जो प्रकरण नीतिगत है और शासन स्तर से जिसका समाधान होना है। मसलन शिक्षा मित्र एवं अनुदेशकों के मानेदेय से जुड़े मामले को वे प्रस्ताव के रूप में शासन और सरकार को भेज देंगी।


कई मांगें रखी गईं

बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने डीजी के सामने संगठन की मांग रखी कि हाफ डे सीएल, 31 ईएल, कैशलेश चिकित्सा, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को समान कार्य के समान वेतन अथवा मानदेय दिए जाएं। इस मुद्दे पर डीजी की ओर से शीघ्र ही विचार कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया।


कार्यवृत्त जारी किया जाए

मोर्चे के सदस्यों ने बैठक में दिए गए आश्वासनों व सहमति को लेकर कार्यवृत्त जारी करने की मांग की, जिस पर डीजी ने कल तक निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद मोर्चे के सदस्यों ने कहा कि आज की वार्ता में जो सहमति बनी है। उस पर अगर 28 जुलाई तक आवश्यक कार्रवाई या आदेश नहीं हुआ तो 29 को घेराव होगा।


स्कूल शिक्षा महानिदेशक के साथ वार्ता में ये रहे मौजूद

डीजी के साथ वार्ता में संयुक्त मोर्चा के संयोजक मंडल के प्रदेश अध्यक्ष जूनियर संघ योगेश त्यागी, प्राथमिक शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष सुशील पांडेय, बिशिष्ट बीटीसी प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव, प्रदेश सचिव संयुक्त मोर्चा दिलीप चौहान, टीएससीटी अध्यक्ष विवेकानंद, शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुशील यादव, हरिनाम सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगेश यादव, अटेवा के विक्रमादित्य मौर्या, विश्वनाथ मौर्या, सुधेश पांडेय मौजूद थे।



लिखित आश्वासन न मिलने पर 29 को निदेशालय घेरेंगे शिक्षक

लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस का निर्णय अगले आदेश तक स्थगित होने के बाद बुधवार को शिक्षक संगठनों की महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा के साथ बैठक हुई। इसमें शिक्षकों ने ईएल, सीएल, हाफ डे, कैशलेश चिकित्सा सुविधा, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों को समान कार्य समान वेतन देने आदि मुद्दों पर बात की।

बैठक में अधिकारियों ने इस मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया, तो शिक्षक संगठनों ने कहा कि मांगों से संबंधित लिखित आश्वासन न मिलने पर वह 29 जुलाई को निदेशालय का घेराव करेंगे। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा की शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के सभी घटक संगठनों की बैठक निदेशालय में हुई।

विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने बताया कि महानिदेशक ने कहा कि हाफ डे व ईएल-सीएल को लेकर शासन से वार्ता की जाएगी। मेडिकल सुविधा को लेकर वार्ता की जा रही है। शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को समान कार्य के लिए समान वेतन मामले में एक कोर्ट केस है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन को आवश्यक प्रस्ताव भेजा जाएगा। शिक्षकों की अन्य मांगों पर भी वार्ता के बाद उन्होंने सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संघ योगेश त्यागी ने कहा कि शिक्षकों ने कहा कि हमारी अवकाश तालिका में जयंती, राष्ट्रीय पर्व व रविवार का अवकाश भी शामिल हैं। उन्हें भी हटाया जाए। 

Thursday, July 11, 2024

सुर्खियों में हरदोई की वर्तमान और पूर्व BSA का विवाद, नई BSA को विभागीय दायित्व न सौंपने पर पत्र लिख DGSE से की गई शिकायत


सुर्खियों में हरदोई की वर्तमान और पूर्व BSA का विवाद, नई BSA को विभागीय दायित्व न सौंपने पर पत्र लिख DGSE से की गई शिकायत

पूर्व बीएसए पर कार्य में बाधा डालने और अफवाह फैलाने का लगा आरोप, शासन तक पहुंचा मामला

पूर्व BSA विजय प्रताप सिंह ने नए BSA को नहीं सौंपा CUG नंबर, आवास और विभाग की गाड़ी


उत्तर प्रदेश का बेसिक शिक्षा विभाग आजकल सुर्खियों में है। पहले शिक्षकों की ऑनलाइन हजारी को लेकर तो अब अपने ही दो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के बीच के विवाद को लेकर विभाग चर्चा में है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में तबादला नीति के तहत बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारियों के तबादले किए गए हैं।


जिसके तहत हरदोई के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह का स्थानांतरण हरदोई से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय कर दिया गया। वहीं, हरदोई में रतन कीर्ति को नई तैनाती दी गई और उन्होंने ज्वाइन किया। सरकारी नंबर और विभागीय गाड़ी नए बीएसए को नहीं दिया गया।

दरअसल, हरदोई की नई बेसिक शिक्षा अधिकारी के द्वारा डीजी बेसिक शिक्षा को पत्र लिख पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह की शिकायत की गई। लिखा गया कि विजय सिंह द्वारा विभागीय दायित्वों को सौंपने में सहयोग नहीं किया गया।

फिलहाल शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों के विवाद में पूरे हरदोई जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षा प्रभावित है। शासन ने गंभीर मानते हुए विभागीय जांच गठित कर दी 


3 जुलाई को पदभार ग्रहण करने के बाद से पूर्व बीएसए विजय प्रताप सिंह और नई बीएसए रतन कीर्ति के बीच आपसी तनातनी देखने को मिल रही है। बीएसए विजय प्रताप सिंह के तबादले के बाद जनपद में एक बार चर्चा जोरों से हुई कि बीएसए विजय प्रताप सिंह ने अपना तबादला रुकवा लिया है और वही अब हरदोई के बीएसए बने रहेंगे।हालाँकि इस बाबत कोई भी शासनादेश जारी नहीं हुआ जबकि नई बीएसए रतन कीर्ति ने 3 जुलाई को पदभार ग्रहण किया और लगातार स्कूलों का निरीक्षण भी कर रही हैं।

इन सबके बीच रतन कीर्ति ने एक पत्र जारी कर तत्कालीन बीएसए पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रतन कीर्ति ने कहा कि 3 जुलाई को पदभार ग्रहण करने के बाद तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह का रवैया उनके प्रति सहयोगात्मक नहीं रहा।उनके द्वारा लगातार झूठी अफवाहें फैलाई जा रही है कि वह पुनः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरदोई के पद पर आसीन होने वाले हैं साथ ही उनके द्वारा सीयूजी नंबर, विभागीय गाड़ी व विभागीय आवास अब तक उनको नहीं दिया गया है। बीएसए रतन कीर्ति ने तत्कालीन बीएसए विजय प्रताप सिंह पर आरोप लगाया है कि उनके द्वारा विभागीय कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि उन्हें किसी प्रकार से कार्यालय में कोई कार्य सुचारू रूप से न करने दिया जाए।

बीएसए रतन कीर्ति ने कहा कि वह प्रतिदिन सुबह 9:30 पर कार्यालय पहुंच जाती हैं मोबाइल न होने और लगातार तत्कालीन बीएसए के दखल से स्कूल से संबंधित कार्यों को करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और साथ ही मानसिक पीड़ा उठानी पड़ रही है। हरदोई के बेसिक शिक्षा विभाग में दो बेसिक शिक्षा अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान का मामला शासन तक पहुंच गया है।

जानकारी के मुताबिक बीएसए रतन कीर्ति ने शासन को तत्कालीन बीएसए विजय प्रताप सिंह की शिकायत की है जिसे शासन ने गंभीर मानते हुए विभागीय जांच गठित कर दी है। हरदोई के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह की कार्यशाली को लेकर पहले भी कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। 

Wednesday, December 6, 2023

माता-पिता के देहावसान पर '15 दिवसीय अंतिम संस्कार अवकाश' अवकाश की मांग को लेकर राजकीय शिक्षक संघ ने DGSE को लिखा पत्र

माता-पिता के देहावसान पर '15 दिवसीय अंतिम संस्कार अवकाश' अवकाश की मांग को लेकर राजकीय शिक्षक संघ ने DGSE को लिखा पत्र


Sunday, November 26, 2023

DGSE का आदेश दरकिनार, शिक्षक निदेशालय में संबद्ध

DGSE का आदेश दरकिनार,  शिक्षक निदेशालय में संबद्ध

• संवद्ध शिक्षकों/कार्मिकों को कार्यमुक्त कर आख्या देने के दिए हैं निर्देश
• इसके चलते मूल विद्यालय/ कार्यालय में अनावश्यक रूप से उत्पन्न हो रही हैं समस्याएं


प्रयागराजः अनियमित रूप से जिला मुख्यालय, मंडल कार्यालयों एवं अन्य कार्यालयों में संबद्ध शिक्षक/कार्मिकों की संबद्धता महानिदेशक (डीजी) विजय किरन आनन्द के निर्देश के बावजूद खत्म नहीं की गई। शिक्षा निदेशालय तक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं शिक्षक संबद्ध बने हुए हैं। इस मामले कई शिकायतें मिलने के बाद डीजी ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पिछले महीने निर्देश दिए थे कि संबद्ध कार्मिकों को उनके मूल तैनाती स्थल के कार्यमुक्त किया जाए।


एक तरफ विद्यालयों में शिक्षकों व कार्मिकों की कमी है तो दूसरी तरफ अनियमित संबद्धता देकर अराजकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे जहां विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है, वहीं कार्यालयों में संबद्ध शिक्षकों व कार्मिकों की कार्यशैली को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं। 


शिक्षा निदेशालय में राजकीय विद्यालयों के शिक्षक व कार्मिक को संबद्ध किए जाने से वहां नियुक्त स्थाई कार्मिकों के कामकाज में हस्तक्षेप के चलते नाराजगी बढ़ रही है। इसके अलावा प्रयागराज सहित कुछ जनपदों में शिक्षकों की संबद्धता विवाद का विषय बन रही है। हमीरपुर में मारपीट तक की घटना हो चुकी है।


 इन सबके चलते महानिदेशक ने  पिछले माह सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजा था, उसमें बताया था कि प्रदेश मुख्यालय पर कतिपय गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि विभिन्न विद्यालयों या अधीनस्थ कार्यालयों में मूल रूप में तैनात शिक्षक/कार्मिक को अनियमित रूप से अन्य कार्यालय/ विद्यालयों में संबद्ध किया गया है।


 इसके चलते मूल विद्यालय/ कार्यालय में अनावश्यक रूप से समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसे उन्होंने शासकीय नियमों के विपरीत बताया था। साथ ही निर्देश दिए थे कि विभागीय आदेशों के क्रम में प्रशासनिक/विद्यालय संचालन की आवश्यकता के कारण तैनात किए गए शिक्षकों को छोड़कर अन्य सभी संबद्ध शिक्षकों/कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर उसकी आख्या ई-मेल पर देने के निर्देश दिए थे। करीब एक महीने बाद भी कई शिक्षक/कार्मिक डीआइओएस कार्यालय, अन्य कार्यालय एवं निदेशालय तक में संबद्ध हैं।