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Tuesday, January 7, 2025

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति-पदोन्नति के लिए नया मसौदा जारी

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति-पदोन्नति के लिए नया मसौदा जारी


नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को यूजीसी (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति और पदोन्नति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा में मानकों के रखरखाव के लिए उपाय) विनियम, 2025 का मसौदा जारी किया। उन्होंने यूजीसी के नए सभागार पुष्पगिरी का भी उद्घाटन किया।

इस अवसर पर सुनील कुमार बरनवाल, अतिरिक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय, प्रो. एम. जगदीश कुमार, अध्यक्ष, यूजीसी, संस्थानों के प्रमुख, शिक्षाविद्, मंत्रालय के अधिकारी उपस्थित थे। धर्मेद्र प्रधान ने इस मौके पर कहा, ये मसौदा उच्च शिक्षा के हर पहलू में सुधार, नवाचार, समावेशिता, लचीलापन और गतिशीलता लाएंगे। शैक्षणिक मानकों को मजबूत करेंगे और शैक्षिक उत्कृष्टता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। 

शिक्षा मंत्री ने बताया कि मसौदा विनियम, 2025 को फीडबैक, सुझाव और परामर्श के लिए सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यूजीसी जल्द ही मसौदा विनियम, 2025 को अपने अंतिम रूप में प्रकाशित करेगा। नया मसौदा विश्वविद्यालयों को अपने संस्थानों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति और पदोन्नति में लचीलापन देगा।


विनियम की मुख्य विशेषताएं

लचीलापन : उम्मीदवार उन विषयों में शिक्षण करियर बना सकते हैं, जिनके लिए वे नेट/सेट के साथ अर्हता प्राप्त करते हैं। पीएचडी विशेषज्ञता को प्राथमिकता दी जाएगी।

समग्र मूल्यांकन : इसका उद्देश्य उल्लेखनीय योगदान सहित योग्यताओं की व्यापक श्रेणी पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्कोर-आधारित शॉर्ट-लिस्टिंग को खत्म करना है।

विविध प्रतिभा पूल : नया मसौदा कला, खेल और पारंपरिक विषयों के विशेषज्ञों के लिए समर्पित भर्ती का रास्ता बनाता है। 

समावेशिता : विकलांग खिलाडियों सहित निपुण खिलाड़ियों को शिक्षण पेशे में प्रवेश के अवसर प्रदान करता है। पात्रता मानदंड के साथ कुलपतियों के लिए चयन प्रक्रिया को संशोधित करता है।

सरलीकृत पदोन्नति प्रक्रिया : शिक्षण, अनुसंधान आउटपुट और अकादमिक योगदान पर जोर देते हुए पदोन्नति के मानदंडों को सुव्यवस्थित करता है।

व्यावसायिक विकास पर ध्यान : संकाय विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों के लिए निरंतर सीखने और कौशल वृद्धि को प्रोत्साहित करता है।

पारदर्शिता और जवाबदेही : यह मसौदा भर्ती, पदोन्नति और शिकायतों के समाधान के लिए पारदर्शी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देता है।




यूनिवर्सिटी में पीएचडी-नेट के विषयों से ही बनेंगे शिक्षक, विश्वविद्यालयों व कालेजों में शिक्षकों की भर्ती के नियम में बदलाव का मसौदा जारी

नए भर्ती नियमों को एनईपी के अनुरूप बनाया गया लचीला, अनुभव को मिलेगा महत्व

नई दिल्लीः उच्च शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों की तरह विश्वविद्यालयों सहित देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी अब लचीली होगी। अब शिक्षकों की नियुक्ति सिर्फ पीएचडी और नेट के विषयों के आधार पर दी जाएगी। अभी तक विश्वविद्यालयों और कालेजों में शिक्षकों की भर्ती के लिए जो न्यूनतम पात्रता थी, उनमें ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन व पीएचडी या फिर नेट की पढ़ाई एक ही विषय में होनी जरूरी होती थी। हालांकि, अब इस बाध्यता को खत्म कर दिया गया है। नई व्यवस्था में उम्मीदवार ने भले ही ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई किसी भी विषय से की है, लेकिन अब वह सिर्फ पीएचडी या नेट में रखे गए विषय के आधार पर ही संबंधित विषय के शिक्षक पद पर भर्ती के लिए पात्र होंगे।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों और कालेजों में शिक्षकों की भर्ती व पदोन्नति के नियमों को नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत व लचीला किया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन बदलावों को लेकर सोमवार को यूजीसी का मसौदा जारी किया। मसौदे को अंतिम रूप देने के छह माह के भीतर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को इसे अपनाना होगा। इनमें विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और स्वायत्त कालेज भी होंगे। नई व्यवस्था में शैक्षणिक योग्यता के साथ ही अनुभव और स्किल को भी महत्व दिया जाएगा। 


उच्च शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों को भी पहले के मुकाबले लचीला बनाया गया है। यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों से शिक्षकों की पदोन्नति में शैक्षणिक प्रदर्शन की जगह उनके स्किल और अनुभव को महत्व देने का भी सुझाव दिया है। नए प्रस्तावित नियमों में योग, संगीत, परफार्मिंग व विजुअल आर्ट, मूर्तिकला और नाटक जैसे क्षेत्रों से जुड़ी सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाएगी। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल की गई उपलब्धियों को शिक्षक भर्ती की पात्रता से जोड़ा गया है। माना जा रहा है कि इससे इन क्षेत्रों को बेहतर शिक्षक मिल सकेंगे। शारीरिक शिक्षा और खेल से जुड़ी शिक्षा में शिक्षक के पद पर नियुक्ति में इन क्षेत्रों में बेहतर योगदान देने वाले खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा।


यह मसौदा उच्च शिक्षा में सुधार के साथ नवाचार, समावेशिता, लचीलापन और गतिशीलता लाएगा। शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों को सशक्त बनाएगा। शैक्षणिक मानकों को मजबूत करेगा और उत्कृष्टता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुरूप होगा।~ धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री





UGC NET  या PhD वाले विषय में बन सकेंगे शिक्षक; NEP  के तहत संशोधन की तैयारी

Professor Recruitment Rule: विश्वविद्यालयों में अब यूजीसी नेट या पीएचडी वाले विषयों में ही शिक्षक बना जा सकेगा। शिक्षक बनने के लिए पहले एक ही विषय में स्नातक(यूजी), परास्नातक (पीजी) और पीएचडी होना जरूरी था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)2020 के तहत विश्वविद्यालयों का शिक्षक बनने की प्रक्रिया में लचीलापन लाया जा रहा है। इसका मकसद उच्च शिक्षा में छात्रों को विभिन्न विषयों की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करना है। 


इसके अलावा प्रमोशन में अब शोधपत्र, स्टार्टअप, उद्यमिता, नवाचार, पेटेंट, उद्योग साझेदारी आदि के मूल्यांकन सहायक होंगे। इसके अलावा, असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट और प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन के लिए पीएचडी व फैकल्टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम की ट्रेनिंग अनिवार्य होगी। सूत्रों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर रोजगार में लगातार बदलाव आ रहा है। अब साधारण डिग्री, पांरपरिक तरीके से विषयों के किताबी ज्ञान से छात्रों को तैयार नहीं किया जा सकता है।


रेग्यूलेशन 2018 में संशोधन की तैयारी
इन्हीं जरूरतों और बदलाव को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अपने रेग्यूलेशन 2018 में संशोधन की तैयारी कर रहा है। उसकी जगह यूजीसी रेग्यूलेशन 2024 आएगा। इससे यूजीसी के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होगा।


असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर 12 साल में बन तो जाएंगे, लेकिन प्रमोशन में मूल्यांकन प्रक्रिया बदल जाएगी। इसका मकसद गुणवत्ता में सुधार, आम लोग, समाज व विश्वविद्यालय हित पर फोकस करना है। इससे विभिन्न विषयों में शोध के लिए प्रेरित किया जा सकेगा। इसके साथ ही शिक्षक भी नए विचारों से दक्ष होंगे।
 

एक ही विषय में पढ़ाई की बंदिश समाप्त
अभी तक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक बनने के लिए यूजी, पीजी और पीएचडी में एक ही विषय में पढ़ाई होनी जरूरी थी। लेकिन एनईपी 2020 में यूजी, पीजी के दौरान छात्रों को बहुविषयक पढ़ाई की आजादी दी गई है, ताकि छात्र का हर क्षेत्र में समग्र विकास हो सके। इसी के तहत शिक्षक बनने के नियमों में यह बदलाव किया जा रहा है।


क्षेत्र में महारत तो भी शिक्षक बन सकेंगे
स्नातक करने वाले अगर किसी क्षेत्र में महारत हासिल करते हैं तो वह उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षक बन सकेंगे। इसमें योग, नाटक, फाइन आर्ट्स आदि क्षेत्रों के महारत हासिल लोगों को शिक्षक बनने का मौका मिलेगा। वे सीधे अस्सिटेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन उनके पास राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड या पुरस्कार होना जरूरी है।

Sunday, January 5, 2025

यूजीसी नेट, पीएचडी बिना भी विश्वविद्यालयों में बन सकेंगे शिक्षक, यूजीसी ने एनईपी 2020 के अनुरूप नियमों में किए बेहद महत्वपूर्ण बदलाव

यूजीसी नेट, पीएचडी बिना भी विश्वविद्यालयों में बन सकेंगे शिक्षक, यूजीसी ने एनईपी 2020 के अनुरूप नियमों में किए बेहद महत्वपूर्ण बदलाव



नई दिल्ली। देश के विश्वविद्यालयों में अब तीन तरह के शिक्षक सेवाएं देंगे। इनमें दो तरह के नियमित और एक तरह के अस्थायी शिक्षक होंगे। अस्थायी शिक्षक का कार्यकाल 3 वर्ष होगा। नियमित शिक्षकों में यूजीसी नेट परीक्षा करने वालों के साथ ही विशेषज्ञ स्नातक शामिल होंगे, जिनके लिए यूजीसी नेट या पीएचडी की अनिवार्यता नहीं होगी। नई शिक्षा नीति के अनुरूप विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमों में बदलाव कर रहा है जो अगले शैक्षिक वर्ष से लागू होंगे।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षक नियमों में बदलाव पर आधारित यूजीसी निमयन 2025 को जारी करेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा में पढ़ने, पढ़ाने के नियमों में बदलाव के आधार पर इन नियमों को तैयार किया गया है। एनईपी में छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा, समानता, उपलब्धता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत अगले 20 से 40 सालों में रोजगार की बदलती मांग के आधार पर छात्रों को तैयार करना है।


एक साथ दो डिग्री की पढ़ाई

छात्रों को स्नातक में एक साथ दो डिग्री की पढ़ाई करने की अनुमति होगी। कौशल आधारित कोर्स जुड़ रहे हैं। प्रोजेक्ट और फील्ड वर्क, इंटर्नशिप पर फोकस होगा। छात्र एक विषय की पढ़ाई के साथ किसी अन्य विषय में इंटर्नशिप कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने वाले छात्र इंटर्नशिप के लिए हॉस्पिटल को भी चुन सकते हैं। इसमें मरीजों की देखभाल और प्रबंधन का विषय शामिल होगा।


इस तरह से बनेंगे शिक्षक

विश्वविद्यालयों में अब शिक्षक बनने के लिए एक ही विषय में यूजी, पीजी व पीएचडी की बाध्यता नहीं होगी। पीएचडी की डिग्री अस्सिटेंट प्रोफेसर से एसोसिएट व प्रोफेसर की पदोन्नति के लिए जरूरी होगी। योग, ड्रामा, फाइन आर्ट्स आदि क्षेत्रों में महारत हासिल स्नातक भी अस्सिटेंट प्रोफेसर बन सकेंगे। इनके लिए यूजीसी नेट या पीएचडी की डिग्री जरूरी नहीं होगी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड जरूरी होगा। विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी विश्वविद्यालयों में 3 वर्ष तक शिक्षक बनकर सेवाएं दे सकेंगे।


नए नियमों में छात्रों की सुविधाओं पर ध्यान

नए नियमों में हर तरह के छात्रों की सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है, ताकि वे पढ़ाई को बोझ न समझें। जिन छात्रों को सीखने और समझने की क्षमता कम है उन्हें अपनी सुविधा और पसंद से देरी से डिग्री हासिल करने की छूट होगी, वहीं तेजी से सीखने और समझने वाले 10 फीसदी छात्रों को डिग्री की पढ़ाई जल्द पूरी करने की अनुमति होगी।

Monday, March 13, 2023

अब बिना PhD बन सकेंगे असिस्टेंट प्रोफेसर, यूजीसी का यह नया नियम जानिए

अब बिना PhD बन सकेंगे असिस्टेंट प्रोफेसर, यूजीसी का यह  नया नियम जानिए


कॉलेज या यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अब पीएचडी की डिग्री जरूरी नहीं होगी. यूजीसी के चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने एक कार्यक्रम में यह बताया कि अब नए नियमों के पीएचडी को अनिवार्य योग्यता की श्रेणी से हटाया गया है.


हाल ही में ओस्मानिया यूनिवर्सिटी में हुए एक कार्यक्रम में UGC के चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने बताया कि नए नियमों के तहत किसी भी कॉलेज में अस‍िस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए PhD जरूरी नहीं है. विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में Assistant Professor के पदों पर भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं होगी. इसके लिए अब सिर्फ यूजीसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी UGC NET में योग्यता पर्याप्त मानी जाएगी.

 
बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, UGC ने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में असिस्‍टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए निर्धारित योग्यताओं में साल 2021 में बदलाव किया था. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले इसकी घोषणा की और फिर UGC ने असिस्‍टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए अनिवार्य PhD की आवश्यकता को हटा दिया था. आयोग ने अगले 2 वर्षों के लिए यह छूट बढ़ाई थी. जारी नियम के अनुसार, इस साल जुलाई 2023 तक PhD की अनिवार्यता खत्‍म रहने की बात कही थी. हालांकि, असिस्‍टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए UGC NET क्‍वालिफिकेशन कसे हमेशा अनिवार्य रखा गया. 


यूजीसी के अध्यक्ष प्रो एम जगदीश कुमार उस्मानिया विश्वविद्यालय कैंपस में नवनिर्मित यूजीसी-एचआरडीसी भवन के उद्घाटन के लिए गए थे. यहां उन्होंने कहा कि राष्ट्र-एक डेटा पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिसमें यूजीसी के सभी दिशानिर्देश और अन्य विवरण होंगे. उन्होंने यह भी बताया कि अगले शैक्षणिक वर्ष से शिक्षा की पारंपरिक पद्धति के साथ-साथ राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सीधे छात्रों तक पहुंचाई जाएगी.


PhD के लिए 6 साल

हाल ही में, यूजीसी की ओर से पीएचडी कोर्स को लेकर नए नियम लागू किए गए थे. नए नियम के तहत PhD के लिए उम्मीदवारों को एडमिशन की डेट से अधिकतम छह साल का समय दिया जाएगा. उम्मीदवारों को री-रजिस्ट्रेशन के जरिए ज्यादा से ज्यादा दो साल का और समय दिया जाएगा. यूजीसी चेयरमैन ने इसकी जानकारी दी थी. नए नियम के तहत ऑनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग से पीएचडी पर रोक लगा दी गई है. इससे पहले थीसिस जमा कराने से पहले शोधार्थी को कम से कम दो शोधपत्र छपवाना पड़ता था. अब पीएचडी के नए नियमों में इसकी छूट दी गई है. रिसर्च की प्रक्रिया के दौरान दो रिसर्च पेपर छपवाने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है.


विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर पदों के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं: यूजीसी अध्यक्ष 


हैदराबाद: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष प्रो. एम जगदीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं है और यूजीसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) में योग्यता पर्याप्त होगी.


शुक्रवार को उस्मानिया विश्वविद्यालय (ओयू) परिसर में नवनिर्मित यूजीसी-एचआरडीसी भवन का उद्घाटन करने वाले यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि एक देश-एक डेटा पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिसमें यूजीसी के सभी दिशानिर्देश और अन्य विवरण होंगे।


प्रोफेसर कुमार ने कहा कि पारंपरिक मोड में शिक्षाविदों के साथ-साथ अगले शैक्षणिक वर्ष से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सीधे राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाई जाएगी।
तेलंगाना स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन के चेयरमैन प्रो. आर लिंबाद्री ने कहा कि नया भवन ओयू में मौजूदा बुनियादी ढांचे के लिए एक बढ़िया अतिरिक्त है और यह देश भर में उच्च शिक्षा में शिक्षण बिरादरी में बहुत योगदान देगा।


ओयू के कुलपति प्रो. डी रविंदर ने विश्वविद्यालय की पहल और प्रगति के बारे में बताया और कहा कि महिला संकाय सदस्यों के लिए 50 प्रतिशत प्रशासनिक पद निर्धारित किए गए हैं।

Sunday, October 2, 2022

UGC : बिना PhD और NET किए बनेंगे यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर, यूजीसी ने जारी किए भर्ती के नियम और दिशानिर्देश

UGC : बिना PhD और NET किए बनेंगे यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर, यूजीसी ने जारी किए भर्ती के नियम और दिशानिर्देश


विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान अब मशहूर एक्सपर्ट्स को प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी) इन यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस कैटेगरी के तहत फैकल्टी मेंबर्स के रूप में नियुक्त कर सकेंगे


विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान अब मशहूर एक्सपर्ट्स को प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी) इन यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस कैटेगरी के तहत फैकल्टी मेंबर्स के रूप में नियुक्त कर सकेंगे। इसके लिए औपचारिक शैक्षणिक योग्यता और प्रकाशन की आवश्यकताएं अनिवार्य नहीं होंगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा शुक्रवार को अधिसूचित नये दिशा-निर्देशों के अनुसार इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता, सामाजिक विज्ञान, ललित कला, सिविल सेवा और सशस्त्र बलों जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस श्रेणी के अंतर्गत नियुक्ति के लिए पात्र होंगे।


दिशानिर्देशों अनुसार, ''जिन व्यक्तियों की अपने विशिष्ट पेशे या भूमिका में कम से कम 15 साल की सेवा या अनुभव के साथ विशेषज्ञता है, अधिमानतः वरिष्ठ स्तर पर, वे 'प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस' के लिए पात्र होंगे। इस पद के लिए एक औपचारिक शैक्षणिक योग्यता आवश्यक नहीं, यदि उनके पास अनुकरणीय पेशेवर अभ्यास है।''


पीओपी दुनिया भर में सामान्य है। पीओपी, मुख्य रूप से गैर-कार्यकाल वाले संकाय सदस्य होते हैं। ये मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, एसओएएस यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी आफ हेलसिंकी जैसे कई विश्वविद्यालयों में प्रचलित है। भारत में भी, पीओएस को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली, मद्रास और गुवाहाटी में नियुक्त किया जाता है।


पीओपी की संख्या स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत से अधिक न हो
दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी समय उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) में पीओपी की संख्या स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए और उन्हें तीन श्रेणियों में नियुक्त किया जाना चाहिए - उद्योगों द्वारा वित्त पोषित, एचईआई द्वारा अपने संसाधनों द्वारा वित्त पोषित और मानद आधार पर।


दिशानिर्देशों में कहा गया है कि किसी संस्थान में सेवा की अधिकतम अवधि तीन साल से अधिक नहीं होनी चाहिए, जिसे असाधारण मामलों में एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।


योजना के तहत संकाय सदस्यों को तीन श्रेणियों में नियुक्त किया जाएगा - उद्योगों द्वारा वित्त पोषित प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस, एचईआई द्वारा अपने स्वयं के संसाधनों से रखे गए प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस और मानद आधार पर प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस।


दिशानिर्देशों में कहा गया है, ''प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए होगी। उनकी नियुक्ति किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज के स्वीकृत पदों को छोड़कर होगी। यह स्वीकृत पदों की संख्या और नियमित संकाय सदस्यों की भर्ती को प्रभावित नहीं करेगी। यह योजना उन लोगों के लिए खुली नहीं होगी जो शिक्षण पद पर हैं, चाहे सेवारत या सेवानिवृत्त हों।''

Saturday, October 2, 2021

UGC NET Exam Date : यूजीसी नेट का परीक्षा शेड्यूल बदला, अब 6 अक्टूबर से नहीं होगी परीक्षा

UGC NET Exam Date : यूजीसी नेट का परीक्षा शेड्यूल बदला, अब 6 अक्टूबर से नहीं होगी परीक्षा, ugcnet.nta.nic.in पर चेक करें




UGC NET Admit Card 2021 : यूजीसी नेट परीक्षा का कार्यक्रम बदल गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए - NTA) ने शुक्रवार (01-10-2021) को परीक्षा शेड्यूल में बदलाव करते हुए नया परीक्षा कार्यक्रम जारी दिया। 

यूजीसी एनटीए के लेटेस्ट नोटिस अनुसार, यूजीसी नेट दिसंबर 2020 और यूजीसी नेट जून 2021 की परीक्षाएं पहले से तय कार्यक्रय के अनुसार 6 अक्टूबर से नहीं होंगी। अब यह परीक्षा 17 अक्टूबर 2021 से 25 अक्टूबर 2021 तक आयोजित की जाएगी।


यूजीसी एनटीए के अनुसार, 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर, और 17 व 19 अक्टूबर परीक्षाएं निर्धारित थीं लेकिन इस दौरान कई अन्य बड़ी परीक्षाएं टकरा रही थीं। इन परीक्षाओं को देखते हुए अभ्यर्थियों ने यूजीसी-एनटीए से परीक्षा कार्यक्रम बदलने की गुजारिश की थी।


■ UGC-NET परीक्षा की पूरानी तिथियां - 
06 अक्टूबर से 08 अक्टूबर 2021 और 17 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2021 तक।

■ UGC-NET परीक्षा की नई तिथियां - 
रविवार, 17 अक्टूबर 2021 से सोमवार 25 अक्टूबर 2021।


एनटीए ने बताया है कि अभी परीक्षा की डिटेल्ड डेटशीट जल्द ही अपलोड कर दी जाएगी। परीक्षा से जुड़ी अपडे, डेटशीट या एडमिट कार्ड के लिए nta.ac.in या ugcnet.nta.nic.in को भी विजिट करते रहें।

आपको बता दें कि इस बार एनटीए ने यूजीसी नेट परीक्षा दिसंबर 2020 सत्र की परीक्षा और जून 2021 सत्र की परीक्षा को मर्ज कर दिया है। यूजीसी नेट की परीक्षा 6 से 8 और 17 से 19 अक्टूबर तक आयोजित की जाएगी। पहले ये परीक्षा 6 से 11 अक्टूबर तक होनी थी।

Monday, July 5, 2021

नेट पास कर शिक्षक बनने की राह मुश्किल, नियुक्ति में पीएचडी को दिया जाता है ज्यादा वेटेज, यूजीसी के नए दिशानिर्देशों से और घटेंगे अवसर

नेट पास कर शिक्षक बनने की राह मुश्किल, नियुक्ति में पीएचडी को दिया जाता है ज्यादा वेटेज, यूजीसी के नए दिशानिर्देशों से और घटेंगे अवसर

नई दिल्ली : नेट (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) पास कर चुके लाखों नौजवानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आने वाले समय में सहायक प्रोफेसर की सीधी भर्ती में पीएचडी को भी लगभग अनिवार्य करने की तैयारी चल रही है । जहां नेट को न्यूनतम अर्हता के रूप में मान्यता मिली हुई है, वहां भी पीएचडी उम्मीदवारों को ज्यादा तरजीह दी जा रही है। इस प्रकार आने वाले दिनों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित की जाने वाली नेट परीक्षा महत्वहीन साबित हो सकती है। 


नेट या पीएचडी में से एक न्यूनतम योग्यता होना जरूरी : विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए अभी नेट या पीएचडी में से एक न्यूनतम योग्यता होना जरूरी है। जो उम्मीदवार पीएचडी है, उसे नेट करने की जरूरत नहीं है। जो नेट किया हुआ है, वह बिना पीएचडी के भी सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति पा सकता है, लेकिन पिछले कुछ से इस नियम का इस प्रकार से क्रियान्वयन हो रहा है कि नेट करने वाले उम्मीदवार को नियुक्ति के अवसर नहीं मिल पाते हैं। नियमों को विश्वविद्यालयों द्वारा अपने-अपने तरीके से लागू किया जा रहा है। यूजीसी ने दोनों अर्हताओं को मंजूरी दी है। लेकिन, नियुक्ति प्रक्रिया में नेट करने वाले उम्मीदवार को 5- 10 अंकों का वेटेज दिया जाता है, जबकि पीएचडी में 30 अंकों का यह गैप इतना ज्यादा हो जाता है कि मेरिट बनने के बाद नेट उम्मीदवार पिछड़ जाता है। इसलिए नेट उम्मीदवार के लिए नियुक्ति के मौके नहीं रह जाते हैं। हाल में बिहार में निकली भर्तियों में नेट के लिए पांच और पीएचडी के लिए 30 अंकों की वेटेज दी गई।


रहे सहे मौके भी खत्म हो जाएंगे

इस बीच यूजीसी के नए नियमों पर भी अमल शुरू होने जा रहा है, जिसमें सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में नेट करने वालों के लिए रहे सहे मौके भी खत्म हो जाएंगे। नेट एक न्यूनतम अर्हता तो रहेगी, लेकिन शोध पत्रों के प्रकाशन, शिक्षण अनुभव समेत इतनी शर्तें जोड़ दी गई हैं कि नेट उम्मीदवारों के लिए दरवाजे करीब-करीब बंद हो जाएंगे।

साल में दो बार होता है परीक्षा

नेट साल में दो बार होती है, जिसमें हर बार तकरीबन साढ़े पांच लाख उम्मीदवार बैठते हैं। इनमें से 45-50 हजार उम्मीदवार परीक्षा पास करते हैं। इस प्रकार हर साल 90 हजार से एक लाख उम्मीदवार सहायक प्रोफेसर बनने की योग्यता हासिल करते हैं। जबकि पीएचडी में कुल प्रवेश एक समय में अधिकतम दो लाख के करीब हैं। इसमें तीन-चार साल के उम्मीदवार शामिल हैं। नेट पहले यूजीसी खुद कराता था, लेकिन अब एनटीए द्वारा कराया जाता है। यह एक राष्ट्रव्यापी परीक्षा है, जिसमें अलग-अलग विषय के हिसाब से उम्मीदवारों की कड़ी परीक्षा होती है।