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Sunday, September 20, 2026

सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?

सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?


लखनऊः उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ 28 सितंबर से सभी जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने शिक्षामित्रों के प्रति सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। साथ ही यह असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों के स्थानांतरण आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है।


विभागीय टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया गया। अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने के बावजूद शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु नहीं बढ़ाई गई है। संघ की मांग है कि टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को नई शिक्षक भर्ती में पूर्व की भर्तियों की तरह 25 अंक का भारांक या वरीयता दी जाए।

Tuesday, April 7, 2026

20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक

20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक

लखनऊ। राजधानी के ईको गार्डन धरना स्थल पर सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शक्ति प्रदर्शन किया। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की बहाली पर सरकार को अल्टीमेटम दिया। 20 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा बहाली न होने पर शिक्षक सड़क पर उतरेंगे और कलमबंद हड़ताल करेंगे। माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के आह्वाहन पर प्रदेशभर के शिक्षक ईको गार्डन धरना स्थल पर सुबह से एकत्रित होने लगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री आवास से शिक्षक प्रतिनिधियों का बुलावा आया।

इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारियों ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि 20 से 25 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा की धारा 21,18 और 12 को बहाल करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 में शामिल किया जाएगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा ने बताया कि एडेड माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक शिक्षकों का उत्पीड़न करते हैं। यह बंद होना चाहिए। यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को 25 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। इनमें एडेड माध्यमिक विद्यालयों की राजकीयकरण की मांग की गई है। 



सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षकों की रैली आज, लखनऊ के ईको गार्डन में जुटेंगे हजारों शिक्षक

06 अप्रैल 2026
लखनऊः अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक सेवा सुरक्षा और स्कूलों के राजकीयकरण की मांग को लेकर सोमवार को अपनी ताकत दिखाएंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के बैनर तले लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित होने वाली राज्यस्तरीय रैली में वे अपनी मांगों को लेकर मुखर होंगे।


संघ के नेताओं ने प्रदेश भर के शिक्षकों से अपील की है कि वे यहां पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाएं। प्रदेश में इस समय 4512 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें करीब 67 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए। संघ का आरोप है कि सेवा सुरक्षा खत्म होने के कारण प्रबंधकों का दबाव बढ़ गया है।

संगठन के नेताओं का कहना है कि इसी के चलते प्रदेश में अब तक करीब 180 शिक्षकों को निलंबित और 120 शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। उनकी यह भी मांग है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम में सेवा सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट प्रविधान शामिल किए जाएं, ताकि भविष्य में शिक्षकों के साथ मनमानी न हो सके।

Sunday, April 5, 2026

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

05 अप्रैल 2026
नई दिल्ली: देशभर के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। टीचर फेडरेशन आफ इंडिया (टीएफआइ) के नेतृत्व में आयोजित रैली में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शिक्षक शामिल हुए। रैली में टीएफआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि यह फैसला देशभर के करीब 20 लाख शिक्षकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रभाव को खत्म करने के लिए कानून बनाया जाए और पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए।

रैली में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षकों का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। दरअसल, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी अनिवार्य किया गया था।

हालांकि, हाल में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो वर्षों के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद केंद्र सरकार के विद्यालयों में 23 अगस्त, 2010 तथा विभिन्न राज्यों में वर्ष 2011 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी की अर्हता अनिवार्य की गई है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षक केंद्र सरकार से कानून बनाकर अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा आदि ने सरकार से शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की।


शिक्षकों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले के शिक्षकों से भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ सैकड़ों शिक्षकों ने शनिवार को रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन भारतीय शिक्षक संघ के तत्वाधान में किया गया। भारतीय शिक्षक संघ के शिक्षकों ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त किया जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि आरटीआई 2009 अधिनियम लागू होने से पहले कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इसके खिलाफ बीते छह महीने से अधिक समय के दौरान शिक्षकों ने कई सांसद व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व अन्यों से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर शिक्षकों के समर्थन में कानून बनाने की मांग की। इस संबंध में भारतीय शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को शनिवार को पत्र भी लिखा।

उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षक प्रभावित : उत्तर प्रदेश के कई शहरों से आए शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट का फैसला व्यावहारिक नहीं है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। शिक्षकों ने इस फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की उम्र अब 50 से 55 साल के बीच है और जिन्होंने 30-35 साल तक सेवा दी है। उनसे दोबारा इस तरह की परीक्षा देने की अपेक्षा करना गलत है। जैसे किसी पुलिस अधिकारी या जज से 20-30 साल बाद फिर से परीक्षा या शारीरिक परीक्षण नहीं लिया जाता, वैसे ही शिक्षकों के साथ भी ऐसा नहीं होना चाहिए।


टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। राजधानी के रामलीला मैदान में शनिवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर के 13 से अधिक राज्यों से पहुंचे हजारों शिक्षकों का आक्रोश फूट पड़ा। इस बड़े प्रदर्शन में शिक्षकों ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर पुराने शिक्षकों को राहत देने की मांग की।

प्रदर्शन करने आए शिक्षक "टीईटी अनिवार्यता वापस लो", "शिक्षकों के साथ अन्याय बंद करो" और "शिक्षक बचाओ, शिक्षा बचाओ" जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शनकारी शिक्षका सुनीता सिंह ने बताया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी पास करने का आदेश देना अनुचित है। ऐसा आदेश शिक्षकों के अनुभव और मेहनत का अपमान है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यह आंदोलन उनके सम्मान, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।

सुबह से ही रामलीला मैदान के आसपास शिक्षकों की भारी भीड़ जुटने लगी थी, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। देशभर से आए शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर के शिक्षकों की आवाज है। शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में गरजे

प्रयागराज। आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ रामलीला मैदान नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित देशव्यापी प्रदर्शन में प्रयागराज से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने मुख्य

अतिथि सांसद जगदंबिका पाल के साथ मंच साझा किया और कहा कि लाखों शिक्षकों के सामने संकट आया है। इस संकट से लड़ने का काम टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ही करेगा। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के विनोद कुमार पांडेय आदि ने प्रदर्शन में भाग लिया।



यूपी के शिक्षकों ने दिल्ली में विरोध कर दिखाई ताकत

लखनऊ। देशभर के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध-प्रदर्शन किया। यूपी से भी बड़ी संख्या में शिक्षक पहुंचे और केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को कानून बनाकर रोकने की मांग की।

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के आह्वान पर देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक रामलीला मैदान पहुंचे। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2011 के पूर्व भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया जाना उचित नहीं है। तमाम शिक्षक रिटायर होने की कगार पर हैं और अब वह टीईटी पास करें तो उनकी नौकरी बचे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को केंद्र सरकार कानून बनाकर रोके, जिससे देश भर के 20 लाख और यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों के जीविकोपार्जन पर संकट न आए। उन्होंने कहा कि शिक्षक इसके विरोध में लगातार आंदोलन करते रहेंगे। शिक्षकों की रैली में सांसद जगदंबिका पाल भी मौजूद रहे और उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों के साथ हैं।




टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे देश भर के शिक्षक, केंद्र सरकार से राहत के लिए कानून बनाने की करेंगे मांग

03 अप्रैल 2026
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में देशभर के शिक्षक एकत्र हो रहे हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले रामलीला मैदान में देशभर से लाखों शिक्षक एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी करने की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है। जब यूपी में 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू किया गया है तो उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता लागू करने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। प्रदेश से एक लाख से अधिक शिक्षक रामलीला मैदान दिल्ली में पहुंच रहे हैं।

इस क्रम में गोरखपुर, कुशीनगर, उन्नाव समेत कई जिलों के शिक्षक आज बृहस्पतिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय को पूर्व के प्रभाव से लागू करना, सही नहीं है। इससे देश भर के लाखों शिक्षकों की जीविका पर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार इससे राहत देने के लिए कानून बनाए। 



टीईटी अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को देश भर के शिक्षकों की महारैली

11 मार्च 2026
लखनऊ। देश भर के बेसिक शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों की दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को महारैली होगी। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर इसकी घोषणा की।


टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई वार्ता में उन्होंने आश्वासन दिया था कि सभी शिक्षकों के सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए कानून बनाया जाएगा। किंतु अभी तक केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे देश भर के शिक्षकों में काफी नाराजगी है।

इसके लिए वे चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इस क्रम में दिल्ली में महारैली की जाएगी। बैठक में राममूर्ति ठाकुर, संजय सिंह, योगेश त्यागी, शिवशंकर पांडेय, विपिन प्रकाश शर्मा, राधेरमण त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव, केदार जैन, मनीष मिश्रा, वेद प्रकाश मिश्रा, रविंद्र राठौर, कल्पना राजौरिया आदि उपस्थित थे।

Wednesday, March 18, 2026

69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

18 मार्च 2026
प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के मामले में 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। यह सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस एजी मसीह की बेंच में होगी। पीड़ित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात कर सरकार से याची लाभका प्रस्ताव सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत किए जाने की मांग की। अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।

पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी ने कहा कि पीड़ित अभ्यर्थी वर्ष 2020 से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर याची लाभ' की मांग कर रहे हैं। 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने भर्ती सूची को रद कर नई सूची बनाने का आदेश दिया था, जिसमें आरक्षण नियमावली के पालन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने अनुपालन नहीं किया। 

अब प्रकरण पिछले 18 महीने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मोर्चा पदाधिकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त पैरवी न होने के कारण मामला लंबित है, जिससे अभ्यर्थियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है। यदि सरकार 19 मार्च की सुनवाई में 'याची लाभ' का प्रस्ताव प्रस्तुत करती है, तो यह विवाद समाप्त हो सकता है।



69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने घेरा शिक्षा निदेशालय

10 मार्च 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय घेर लिया। बेसिक शिक्षा निदेशक से मिले आश्वासन के बाद भी असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने धरना जारी रखा। बाद में पुलिस ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों को बस से ईको गार्डेन पहुंचाया।


आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग की। अभ्यर्थियों की तरफ से धनंजय गुप्ता ने कहा कि सरकार खुद ही जाकर नई डेट ले आती है। ऐसे में उन्हें अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। धरने में राज बहादुर, हसीन, अनूप गुप्ता, बृजेश सिंह, श्यामलता सिंह शामिल थे। वहीं, पिछडा दलित संयुक्त मोर्चा की बैठक में अभ्यर्थियों ने फिर से याची लाभ देने की मांग उठाई। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के साथ ही 29334 गणित-विज्ञान भर्ती के अभ्यर्थी भी सोमवार को धरना देने पहुंचे।

इसलिए आक्रोश : 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभ्यर्थी लगातार नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

Friday, February 27, 2026

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कलक्ट्रेट तक जुलूस लेकर पहुंचे  शिक्षक, केंद्र सरकार से मामले में स्पष्ट रुख की मांग, आंदोलन की चेतावनी भी दी 


लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बृहस्पतिवार को शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ व उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन कर टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य करने का जमकर विरोध किया। जिलों में शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम मोदी को ज्ञापन भेजा।


दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने से पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट आ गया है। इससे देश भर के शिक्षक आंदोलन की राह पर हैं। इसी क्रम में जिलों में बीएसए कार्यालय पर एकत्र होकर शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ हुंकार भरी। उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत दे। उन्होंने बताया कि 7 मार्च को दिल्ली में टीएफआई की बैठक होगी। इसमें सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष व महासचिव भाग लेंगे। बैठक में दिल्ली में होने वाली रैली की तिथि घोषित की जाएगी।

पीएम को भेजे ज्ञापन में आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग की गई है। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द इस मामले में संसद में अध्यादेश लाकर राहत दे। 



23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे यूपी के शिक्षक 




टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ यूपी के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय 

23 फरवरी 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। राजधानी में रविवार को हुई बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (जेटीएफआइ) का गठन किया और शिक्षक हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

बैठक में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि टीईटी के मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए हर मोर्चे पर संघर्ष जारी रखने की बात कही। 

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी कर नौकरी प्राप्त की है, ऐसे में अब उन्हें टीईटी के बिना अपात्र बताना पूरी तरह गलत है। 

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी ने सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहने की बात कही। वहीं बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि महासंघ शिक्षकों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देगा, संघर्ष अब और तेज होगा। 

बैठक में निर्णय लिया गया कि नौ मार्च से 15 मार्च तक 'शिक्षकों की पाती' नाम से ईमेल और पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा।


टीईटी अनिवार्यता का विरोध तेज, सरकार के रुख से खुश नहीं है प्रदेशभर के शिक्षक, X पर #JusticeForTeachers ग्लोबल ट्रेंडिंग में टॉप पर

23 फरवरी 2026
प्रयागराज : टीईटी की अनिवार्यता पर प्रदेश सरकार का रुख स्पष्ट न होने से नाराज परिषदीय शिक्षकों ने रविवार दोपहर दो से चार बजे तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान चलाया। जस्टिस फॉर टीचर्स हैशटैग से चलाया गया अभियान एक समय पूरी दुनिया में टॉप ट्रेंड कर रहा था। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले देशभर के सरकारी शिक्षकों ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज से भी उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ के सदस्यों ने बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई।

शिक्षकों का कहना है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता उचित नहीं है। उनकी जब नियुक्ति हुई तब आवश्यक सारी अर्हताएं पूरी करते थे। नियुक्ति के सालों बाद कोई नियम लागू करने के कारण हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। विरोध अभियान के क्रम में सभी शिक्षक 23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। 26 फरवरी को एक से चार बजे तक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देंगे और जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के सभी शिक्षक महारैली करके भारत सरकार को ज्ञापन देंगे।





टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आज सोशल मीडिया पर अभियान चलाएंगे शिक्षक

22 फरवरी 2026
लखनऊ। देश-प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर शिक्षक एक बार फिर से आंदोलन तेज करेंगे, ताकि इस मामले में दबाव बनाकर जल्द से जल्द सकारात्मक परिणाम लिया जा सके। इसके लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक की ओर से 22 फरवरी को दोपहर में सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में 23 फरवरी से शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 


टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के कई शिक्षकों संगठन आए एक साथ, मार्च के अंत में दिल्ली में रैली करेंगे 

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद लगाए शिक्षक संगठन फिर आंदोलन की राह पर हैं। इस बार प्रदेश के कई शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले आंदोलन करने के लिए तैयार हुए हैं। इसका कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।

रिसालदार पार्क स्थित शिक्षक भवन में हुई बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने तय किया कि 27 जुलाई 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए वे सभी मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।

बैठक में तय किया गया कि 22 फरवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर धरना देंगे। यहां डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली में महारैली की जाएगी।

बैठक में टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, उप्र महिला शिक्षक संघ की डॉ. सुलोचना मौर्य, संजय सिंह, शिवशंकर पांडेय, राधेरमण त्रिपाठी, अनंत कुमार, पंकज अवस्थी, प्रीति सिंह, ज्योति सिंह आदि उपस्थित हुए। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने भी अपनी सहमति दी है।


Tuesday, September 30, 2025

किसी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने देंगे, भारतीय किसान यूनियन ने भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ खोला मोर्चा

किसी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने देंगे, भारतीय किसान यूनियन ने भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ खोला मोर्चा


मुजफ्फरनगर । भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के शैक्षिक प्रकोष्ठ ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शुक्रवार को एक बड़ा मोर्चा खोलते हुए यहां ऐतिहासिक शिक्षक महापंचायत का आयोजन किया। इस दौरान बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंच से ऐलान किया कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे और किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने दी जाएगी।


नारायण ग्रैंड रिसॉर्ट पर आयोजित इस महापंचायत में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने शिक्षकों को एकजुट होकर संगठित संघर्ष का आशन किया। इस मौके पर पूर्वांची चेयरमैन व बीकेयू महासचिव जहीर फारूकी ने टीईटी लागू करने के फैसले को गलत ठहराया।


 भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर, 2025 के आदेश और एनसीटीई की 29 मई, 2017 की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करना अव्यवहारिक है। उन्होंने 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से मुक्त रखने की मांग की।


महापंचायत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करके प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया कि टीईटी के मुद्दे पर शिक्षक समुदाय के हित में शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाए। इसी मंच से राकेश टिकैत ने रविंद्र सिंह को भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया।


महापंचायत की अध्यक्षता गुर्जर खिलारी सिंह ने की, जबकि मंच संचालन अनु चौधरी, मेराज खालिद रिजवी, डॉ. संजीव कुमार वर्मा और विनेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। जिला अध्यक्ष रामरतन बालियान ने सभी अध्यापकों को टीईटी से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया।


मंच पर प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह, महामंत्री ज्योति चौधरी, महासचिव मनीष गोयल, कार्यालय प्रमुख विनेश कुमार के अलावा सहारनपुर मंडल अध्यक्ष रोहित जटराणा, मेरठ जिला अध्यक्ष कवीन्द्र तोमर, शामली जिला अध्यक्ष प्रमेन्द्र तोमर, बागपत जिला अध्यक्ष हरेन्द्र तोमर, बुलन्दशहर जिला अध्यक्ष शक्ति प्रताप सिंह, अमरोहा जिला अध्यक्ष राकेश चहल, हापुड़ जिला अध्यक्ष अशु सिद्धू और सम्भल जिला अध्यक्ष रुकमेश चहल मौजूद रहे।


 मुजफ्फरनगर से कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमित तोमर के नेतृत्व में नरेंद्र गोस्वामी, विवेक कुमार, क्षितिज नेगी, रविंद्र कोठारी, कैलाश चंद, सपना सिंह सहित हजारों शिक्षक अपने-अपने ब्लॉक से पहुंचे। मोहित बालियान, जसराज सिंह, शिवम शर्मा, सुधीर कुमार, प्रवीण कुमार, बालकिशोर, तुषार गोयल, सील विश्नोई, संजय राठी, नीरज कुमार, रणवीर सिंह, रामकुमार, अमित कुमार त्यागी, सुशील कुमार, सुमन सैनी, रितु त्यागी, पूजा शर्मा, रितु रतु वालियां, वालियां, गौरव गौरव कुमार, कु ओमपाल सिंह, पूनम पवार, इरफान अहमद, खुशनुद अहमद, मुस्तफा अहमद, प्रियंका त्यागी, शिखा शर्मा, मधु वर्मा, रश्मि पवार, वंदना शर्मा, निशु, अरुण कुमार, राजेश कुमार, चरण सिंह, अरविंद कुमार, उपासना सिंह सहित हजारों अध्यापक-अध्यापिकाएं महापंचायत में शामिल हुए। विभिन्न जनपदों से आए शिक्षकों ने टीईटी के खिलाफ एकजुटता दिखाई और अधिकारों की आवाज बनकर इतिहास रच दिया