टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
कलक्ट्रेट तक जुलूस लेकर पहुंचे शिक्षक, केंद्र सरकार से मामले में स्पष्ट रुख की मांग, आंदोलन की चेतावनी भी दी
लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बृहस्पतिवार को शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ व उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन कर टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य करने का जमकर विरोध किया। जिलों में शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम मोदी को ज्ञापन भेजा।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने से पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट आ गया है। इससे देश भर के शिक्षक आंदोलन की राह पर हैं। इसी क्रम में जिलों में बीएसए कार्यालय पर एकत्र होकर शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ हुंकार भरी। उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत दे। उन्होंने बताया कि 7 मार्च को दिल्ली में टीएफआई की बैठक होगी। इसमें सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष व महासचिव भाग लेंगे। बैठक में दिल्ली में होने वाली रैली की तिथि घोषित की जाएगी।
पीएम को भेजे ज्ञापन में आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग की गई है। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द इस मामले में संसद में अध्यादेश लाकर राहत दे।
23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे यूपी के शिक्षक
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ यूपी के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय
23 फरवरी 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। राजधानी में रविवार को हुई बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (जेटीएफआइ) का गठन किया और शिक्षक हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।
बैठक में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि टीईटी के मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए हर मोर्चे पर संघर्ष जारी रखने की बात कही।
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी कर नौकरी प्राप्त की है, ऐसे में अब उन्हें टीईटी के बिना अपात्र बताना पूरी तरह गलत है।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी ने सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहने की बात कही। वहीं बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि महासंघ शिक्षकों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देगा, संघर्ष अब और तेज होगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि नौ मार्च से 15 मार्च तक 'शिक्षकों की पाती' नाम से ईमेल और पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा।
टीईटी अनिवार्यता का विरोध तेज, सरकार के रुख से खुश नहीं है प्रदेशभर के शिक्षक, X पर #JusticeForTeachers ग्लोबल ट्रेंडिंग में टॉप पर
23 फरवरी 2026
प्रयागराज : टीईटी की अनिवार्यता पर प्रदेश सरकार का रुख स्पष्ट न होने से नाराज परिषदीय शिक्षकों ने रविवार दोपहर दो से चार बजे तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान चलाया। जस्टिस फॉर टीचर्स हैशटैग से चलाया गया अभियान एक समय पूरी दुनिया में टॉप ट्रेंड कर रहा था। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले देशभर के सरकारी शिक्षकों ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज से भी उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ के सदस्यों ने बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई।
शिक्षकों का कहना है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता उचित नहीं है। उनकी जब नियुक्ति हुई तब आवश्यक सारी अर्हताएं पूरी करते थे। नियुक्ति के सालों बाद कोई नियम लागू करने के कारण हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। विरोध अभियान के क्रम में सभी शिक्षक 23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। 26 फरवरी को एक से चार बजे तक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देंगे और जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के सभी शिक्षक महारैली करके भारत सरकार को ज्ञापन देंगे।
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आज सोशल मीडिया पर अभियान चलाएंगे शिक्षक
22 फरवरी 2026
लखनऊ। देश-प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर शिक्षक एक बार फिर से आंदोलन तेज करेंगे, ताकि इस मामले में दबाव बनाकर जल्द से जल्द सकारात्मक परिणाम लिया जा सके। इसके लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक की ओर से 22 फरवरी को दोपहर में सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में 23 फरवरी से शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे।
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद लगाए शिक्षक संगठन फिर आंदोलन की राह पर हैं। इस बार प्रदेश के कई शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले आंदोलन करने के लिए तैयार हुए हैं। इसका कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।
रिसालदार पार्क स्थित शिक्षक भवन में हुई बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने तय किया कि 27 जुलाई 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए वे सभी मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।
बैठक में तय किया गया कि 22 फरवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर धरना देंगे। यहां डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली में महारैली की जाएगी।
बैठक में टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, उप्र महिला शिक्षक संघ की डॉ. सुलोचना मौर्य, संजय सिंह, शिवशंकर पांडेय, राधेरमण त्रिपाठी, अनंत कुमार, पंकज अवस्थी, प्रीति सिंह, ज्योति सिंह आदि उपस्थित हुए। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने भी अपनी सहमति दी है।
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