Tuesday, December 10, 2024
Thursday, January 21, 2021

देशभर में सबसे मुश्किल यूपी में शिक्षक बनना
Sunday, April 5, 2020
Sunday, April 7, 2019
Thursday, February 28, 2019
Wednesday, February 27, 2019
Wednesday, November 14, 2018
Tuesday, October 9, 2018
Monday, July 30, 2018
Friday, January 13, 2017

प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक स्कूलों से संबद्ध प्राइमरी विद्यालयों में नियुक्ति हेतु शासन ने 2012 का आदेश किया रदद्, प्राइमरी स्कूलों के भर्ती नियम बदले
प्रदेश भर के माध्यमिक कॉलेजों से संबद्ध प्राइमरी स्कूल शिक्षकों की भर्ती का नियम बदल गया है। अब जिला विद्यालय निरीक्षक मनमाने तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सकेंगे, बल्कि उन्हें शिक्षा निदेशालय और फिर शासन से अनुमति लेनी होगी। हर कक्षा में एक शिक्षक को ही नियुक्त किया जा सकेगा। नियुक्ति के लिए दो समाचारपत्रों में विज्ञापन जारी करना भी अनिवार्य किया गया है। शासन ने 2012 का आदेश रद कर दिया है।
प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक स्कूलों से संबद्ध प्राइमरी विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए 2012 मई एवं दिसंबर में दो आदेश हुए थे। उसमें नियुक्ति का अधिकार कुछ शर्तो के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक को देने का निर्णय हुआ। उसी आधार पर इन दिनों जिला विद्यालय निरीक्षकों ने जनशक्ति, मानक एवं स्कूल में छात्र संख्या अनुकूल न होने पर भी नियुक्तियां कर डाली। इनमें से कई मामले कोर्ट तक पहुंचे जिससे शासन असहज हुआ। अब माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार ने नियमों में बदलाव कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक संबद्ध प्राइमरी स्कूल के कक्षा एक से पांच तक में एक अध्यापक प्रति कक्षा नियुक्त होगा। यही नहीं, इन स्कूलों में तैनात रहे शिक्षकों की सेवानिवृत्ति, पदोन्नति या फिर मृत्यु हो जाने पर रिक्त पद के प्रति स्कूल की छात्र संख्या एवं आवश्यकता को ध्यान में रखकर जिला विद्यालय निरीक्षक संस्तुति सहित प्रस्ताव शिक्षा निदेशालय भेजेंगे। यह प्रस्ताव परीक्षण के बाद एक माह के अंदर शासन को भेजा जाएगा। शासन रिक्त पदों की पूर्ति करने का अनुमति पत्र डीआइओएस व संबंधित स्कूल प्रबंधक को भी भेजेगा। यह भी निर्देश है कि शासन एवं प्रबंधक की अनुमति के बाद सहायक अध्यापक पद की नियुक्ति के लिए दो समाचारपत्रों में विज्ञापन देना अनिवार्य होगा। उसमें शिक्षक की शैक्षिक योग्यता, आयु, वेतनमान व आरक्षण आदि का पूरा विवरण दिया जाएगा
Saturday, October 15, 2016
Friday, October 14, 2016

मैनपुरी : 118 सहायक अध्यापक बने प्रधानाध्यापक, विकलांग और महिला शिक्षकों से विद्यालय आवंटन हेतु भरवाए 3 विकल्प
काफी समय से प्रधानाध्यापक बनने का इंतजार कर रहे सहायक अध्यापकों को आखिरकार प्रधानाध्यापक बनने का मौका मिल ही गया। गुरुवार को बीएसए कार्यालय में प्रधानाध्यापक बनने वाले शिक्षकों की भीड़ पूरे दिन जुटी रही। विकलांग और महिला शिक्षकों को मनमाफिक विद्यालय देने के लिए तीन विकल्प भरवाए गए।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों के सिर्फ 28 पद ही रिक्त थे, जबकि प्रधानाध्यापक बनने के लिए 118 शिक्षक पात्रता सूची में आ रहे थे। पद कम होने की वजह से विभाग को दिक्कत आ रही थी। विभाग ने सचिव बेसिक शिक्षा को पत्र लिखकर पद बढ़ाने की मांग की, जिस पर शासन स्तर से सर्व शिक्षा अभियान के तहत 301 प्रधानाध्यापकों के पद स्वीकृत कर दिए गए। शासन से पद स्वीकृत होते ही सभी पात्र शिक्षकों के प्रधानाध्यापक बनने का रास्ता दो दिन पहले ही साफ हो गया था।
गुरुवार को बीएसए कार्यालय में महिला शिक्षकों और विकलांग शिक्षकों को मनमाफिक विद्यालय देने के लिए तीन विकल्प भरवाए गए। पूरे दिन कार्यालय में जुटी रही शिक्षकों की भीड़ ने अपने विकल्प भरकर दिए हैं।
अधिकारी का कहना है कि :
'जिले में 118 शिक्षकों को प्रधानाध्यापक पद पर प्रमोशन किया गया है। महिला और विकलांग शिक्षकों को सुविधानुसार विद्यालय आवंटित किए जाएंगे। जबकि पुरुष प्रधानाध्यापकों को आवश्यकतानुसार विद्यालयों पर नियुक्ति दी जाएगी।'
Saturday, October 1, 2016
Sunday, July 3, 2016

बहराइच : नयी सोच और ऊर्जा के साथ कार्य करें शिक्षक - बीईओ महसी, विद्यालय में बेहतर शैक्षिक माहौल बनाये जाने के दिए निर्देश
नई सोच और ऊर्जा के साथ कार्य करें शिक्षक : बीईओ
विद्यालय में बेहतर शैक्षिक माहौल बनाए जाने के निर्देश
संसू, महसी (बहराइच): शनिवार को ब्लॉक संसाधन केंद्र महसी में खंड शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्याय ने संकुल प्रभारियों के साथ बैठक की। शिक्षा की गुणवत्ता, मध्यान्हृ भोजन, फल वितरण, स्कूल भवन की रंगाई पुताई, साज-सज्जा, पेयजल, शौचालय व्यवस्था को दुरूस्त रखने को कहा। संकुल प्रभारियों को विद्यालय के लगातार मानीटरिंग किए जाने के दिए। सचेत किया कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।1बीईओ ने कहा कि शिक्षक अपने दायित्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करते हुए विद्यालय में बेहतर शैक्षिक माहौल विकसित करें। अभिभावकों से संपर्क कर 6 से 14 वय वर्ग के बच्चों का नामांकन करें। अभिभावकों से छात्र-छात्रओं को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करें। कहा कि बच्चों को दिए जाने वाले मध्याहृन की गुणवत्ता बेहतर हो। सोमवार को छात्र-छात्रओं को वितरित किए जाने वाले फल पर जोर देते हुए कहा कि फल का वितरण अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि कटा हुआ फल कदापि वितरित न किया जाए। इसके लिए उन्होंने बच्चों को आम, केला, सेब, संतरा, अमरूद सहित मौसमी फल का वितरण कराए जाने का दिया। बीईओ ने कहा कि शिक्षा के उन्नयन के लिए शिक्षक नई सोच और ऊर्जा के साथ कार्य करें। शिक्षक शत-प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखें और समय से स्कूल पहुंचे। उन्होंने मौजूद संकुल प्रभारियों को स्कूलों की लगातार मानीटरिंग किए जाने के दिया। सचेत किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मौके पर एबीबारसी अयोध्या प्रसाद वर्मा, एनपीआरसी रामलखन पाण्डेय, विजय शंकर तिवारी, भीष्म सिंह, मिश्रीलाल, रामधीरज त्रिपाठी, शिवकुमार, चिंतामणि सहित अन्य मौजूद रहे।
Saturday, May 14, 2016

बहराइच : सेवानिवृत्त 11 शिक्षकों का हुआ सम्मान
शिक्षकों का हुआ सम्मान
चरदा (बहराइच): शुक्रवार को नवाबगंज ब्लॉक के जैतापुर में ‘शिक्षक सम्मान समारोह एवं शैक्षिक संवर्धन गोष्ठी’ आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता संकुल प्रभारी बनारस गिरि ने की। समारोह में सेवानिवृत्त हुए 11 शिक्षकों को अंग वस्त्र व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन गिरीश कुमार ने किया।समारोह के मुख्य अतिथि प्रमुख प्रतिनिधि हरिशचंद्र रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षक का सेवाभाव सवरेपरि है। विकास की नींव का आधार शिक्षक ही रखता है। विशिष्ट आतिथि जरवल शिक्षक संघ अध्यक्ष आसिफ अली ने कहा कि एक शिक्षक का सेवा क्षेत्र दायरे से परे है। इनके अलावा समारोह को शिक्षक जगराम वर्मा, विपिन सिंह, प्रधान संघ अध्यक्ष हरीश, अविराज, जिला महामंत्री संतोष मिश्र व अन्य ने भी संबोधित किया।
Thursday, March 17, 2016
Friday, January 1, 2016

जमाल के कमाल को सबका सलाम, उसरू गांव बना बेसिक शिक्षा में बदलाव का ध्वजवाहक, अभिनव प्रयोगों से बनी अलग पहचान
📌 विषयों के साथ दी जाती है संगीत की शिक्षा
फैजाबाद । जब सरकार के बेसिक शिक्षा को सुधारने के सारे जतन फेल हो गए, सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया हो। ऐसे समय में सदर तहसील के मसौधा ब्लॉक का एक सामान्य सा गांव उसरू नई उम्मीद बनता दिखे तो बरबस ही याद आता है रवींद्र नाथ टैगोर का ‘एकला चलो रे’। उसरू गांव की प्रधानाध्यापक रितु जमाल ने न तो सुविधाओं का इंतजार किया और न ही लोगों से मदद मांगी। सरकार से मिली सुविधाओं से ही स्कूल का पूरा ढर्रा बदल दिया। आज हर कोई उनके कमाल को सलाम करता है।
रितु जमाल अकेले ही उम्मीद की ध्वजवाहक बन निकल पड़ीं साथी शिक्षकों में भी प्रेरणा जगी और देखते ही देखते स्कूल की तस्वीर बदल गई। आज यहां के बच्चे कांवेंट स्कूल को टक्कर देते दिखते हैं। यह एक ऐसा परिषदीय विद्यालय बन गया जहां भविष्य की उम्दा तस्वीर गढ़ी जा रही है। आज फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना और लिखना प्राथमिक विद्यालय उसरू के बच्चों की पहचान है। कान्वेंट स्कूलों की तरह ही इस विद्यालय में कक्षा एक व दो के बच्चों को प्ले-वे से पढ़ाया और सिखाया जाता है।
इसी साल अप्रैल माह में विद्यालय में प्रधानाध्यापक के तौर पर तैनाती मिलने के साथ ही रितु जमाल ने प्रयोगों का सिलसिला आरंभ किया, जो अब भी जारी है। इसी के तहत उन्होंने बच्चों के लिए शिक्षा के साथ-साथ निश्चित अंतराल पर कार्यशाला का आयोजन शुरू किया है, जिसमें बच्चों को ‘वेस्ट मटीरियल’ से खिलौने व अन्य दूसरी उपयोगी वस्तुएं बनाना सिखाया जाता है। इसका मकसद बच्चों को शुरुआती दौर से ही रचनात्मक बनाना है। यही नहीं कार्यशाला में विशेषज्ञों को बुलाकर कलाकृतियां बनाना व चित्रकारी सिखाई जाती है। खास बात यह है कि शिक्षक और छात्र-छात्रएं सभी अंग्रेजी में ही बातचीत करते हैं। विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संगीत की शिक्षा भी दी जाती है। रितु जमाल ने विद्यालय की कमान संभालने के बाद से ही नृत्य व संगीत की नियमित रूप से कक्षाएं आरंभ कराई है। इसका मकसद बच्चों को अन्य विधाओं में भी पारंगत करना है और पढ़ाई को रुचिपूर्ण बनाना है। बच्चों में पर्यावरण की जागरूकता विकसित करने के लिए प्रमुख अवसरों पर पौधरोपण कराया जाता है। विद्यालय में अब तक ढाई सौ पौधे लगाए गए हैं। यहां से पहले मिल्कीपुर के चकनथा विद्यालय में तैनाती के दौरान भी इन्हीं प्रयोगों को कराया था और करीब पांच सौ पौधों को भी रोपित कराया था। प्रधानाध्यापक रितु इसका श्रेय सभी शिक्षकों को देती हैं।
दिया नया नारा : प्रधानाध्यापक रितु जमाल ने नया नारा भी दिया है। उन्होंने ‘विद्यालय मेरा दूसरा घर, अध्यापक मेरे मित्र’ का नारा देकर बच्चों को स्कूल से जोड़ा। इसी का नतीजा है कि प्राथमिक विद्यालय उसरू में बच्चों की संख्या डेढ़ सौ है और रोजाना उपस्थिति नब्बे फीसदी तक रहती है।
बच्चों को कराए जाते हैं टूर : प्राथमिक विद्यालय उसरू के बच्चों को टूर भी कराया जाता है। प्रधानाध्यापक ने इसी साल छात्र-छात्रओं को अन्यत्र होने वाले आयोजनों में ले जाने का सिलसिला आरंभ किया। जिससे बच्चों को सैद्धांतिक के साथ-साथ प्रायोगिक जानकारी भी दी जा सके।
मनाए जाते हैं सभी तीज-त्योहार : प्राथमिक विद्यालय उसरू में रक्षा बंधन, दीपावली, ईद समेत सभी धर्मों के त्योहारों को मनाया जाता है, जिससे छात्र-छात्रओं की रुचि विद्यालय आने में बनी रहे और उत्सव भी हो।
सभी बच्चों के पास है आइ-कार्ड : अक्सर प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के पास यूनीफार्म नहीं होने की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन प्राथमिक विद्यालय उसरू के सभी बच्चों को यूनीफार्म के साथ-साथ आइ-कार्ड, टाई व बेल्ट का भी वितरण किया गया है। साथ ही इस नियम को भी सख्ती से लागू किया गया है कि सभी बच्चों को अपना आइ-कार्ड रोजाना साथ लाना होगा और यूनीफार्म में ही आना होगा। प्रधानाध्यापक रितु जमाल कहती हैं कि इस प्रकार से बच्चों को अनुशासित भी रखा जाता है।
अधिकारी मानते हैं गौरव : बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार द्विवेदी का कहना है कि रितु जमाल के अनूठे प्रयोगों से ही विद्यालय की जिले में अलग पहचान बनी है। यह निश्चित रूप से सभी के लिए उदाहरण है और उनके प्रयोगों को अन्य विद्यालयों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा। ये गौरव की बात है।
















