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Thursday, August 18, 2022

यूपी : इन बच्चों को खोज रहा बेसिक शिक्षा विभाग, शिक्षकों की लगाई ड्यूटी, जानिए ऐसा है क्यों

यूपी : इन बच्चों को खोज रहा बेसिक शिक्षा विभाग,  शिक्षकों की लगाई ड्यूटी, जानिए ऐसा है क्यों?


उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई छोड़ने वालों की तलाश तेज हो गई है। इसके लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।



प्रदेश में प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की तलाश शुरू हो गई। इस काम के लिए स्कूल वार एक-एक शिक्षक की ड्यूटी लगाई है। यह शिक्षक स्कूल न आने वाले बच्चों का ब्योरा जुटा रहे हैं। ड्राप आउट बच्चों के एडमिशन पर सरकार प्रति बच्चे पढ़ाई के लिए स्कूलों को 860 रुपये देगी। सूबे के सभी बीएसए को ड्राप आउट बच्चों का ब्योरा 31 अगस्त तक बेसिक शिक्षा विभाग को देना है।


बीएसए के निर्देश पर शिक्षक स्कूल में पंजीकृत बच्चों के दस्तावेजों की पड़ताल कर पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की सूची बना रहे हैं। शिक्षक घर-घर जाकर इन बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों तैयार कर रहे हैं। उन्हें जागरूक कर रहे हैं। जिससे ड्राप आउट बच्चों की संख्या में कमी लायी जा सके। 



40 दिन से स्कूल न आने वाले बच्चे ड्राप आउट
40 या इससे अधिक दिनों से स्कूल न आने वाले बच्चे ड्राप आउट की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा किसी वजह से जिन बच्चों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। यह सभी बच्चे ड्राप आउट माने जाएंगे।  के ग्रामीण और शहरी इलाकों में 1619 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें 1148 प्राइमरी, 268 जूनियर और 203 कॉम्पोजित स्कूल हैं। इनमें दो लाख आठ हजार बच्चे पंजीकृत हैं।



शारदा योजना
योगी सरकार ने तीन साल पहले ड्राप आउट बच्चों को खोजकर दोबारा दाखिला देकर पढ़ाई के लिए शारदा योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को दोबारा दाखिला देना। स्कूल वार एक-एक शिक्षक को इसकी जिम्मेदारी दी गई। कोरोना के चलते दो साल से इस योजना का क्रियान्वयन सही नहीं हो पाया। मौजूदा सत्र इस योजना पर तेजी से काम चल रहा है।

Thursday, September 23, 2021

यूपी : 13 जिलों में 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं 35% बच्चे

यूपी : 13 जिलों में 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं 35% बच्चे


प्रयागराज 
प्रदेश के 13 जिलों में 35 फीसदी से अधिक बच्चे 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। सूबे के 75 जिलों में से सबसे चिंताजनक स्थिति सिद्धार्थनगर की है जहां लगभग आधे या 53.5 प्रतिशत बच्चे कक्षा 8 पास करने के बाद 9वीं में नाम नहीं लिखवाते हैं।


प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 शैक्षणिक सत्र में 87 फीसदी बच्चों ने उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा पूरी करने के बाद कक्षा 9 में प्रवेश लिया था। इनमें से 92.4 प्रतिशत लड़के और 81.5 फीसदी लड़कियां थीं। यानि हर पांच में से एक लड़की 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती है। हालांकि 2018-19 सत्र में 85.45 प्रतिशत बच्चों ने ही 8वीं पास करने के बाद कक्षा 9 में प्रवेश लिया था।

 
इन 13 जिलों की स्थिति चिंताजनक

सिद्धार्थनगर में ड्रॉपआउट रेट सबसे अधिक है। इसके अलावा सीतापुर में 56.2, हरदोई 56.9, श्रावस्ती 57.1, संभल 61.2, बदायूं 61.5, शाहजहांपुर 61.8, चित्रकूट 62.4, फर्रुखाबाद 63.2, पीलीभीत 63.6, बांदा 64.5, बहराइच 64.8 और बस्ती में 64.9 प्रतिशत बच्चे ही 8वीं पास करने के बाद 9 में दाखिला लेते हैं। बाकी बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।

● इन जिलों में 65 से भी कम बच्चे 9 में प्रवेश लेते हैं

● सिद्धार्थनगर, सीतापुर और हरदोई की रिपोर्ट सबसे खराब

● यूपी के 13 जिलों में दाखिले की स्थिति है चिंताजनक

● 8वीं के 87 प्रतिशत बच्चे ही 9 में लेते हैं प्रवेश


विकास की दृष्टि से ये जिले पिछड़े हैं। यहां लोगों को लगता है कि पढ़ाई के बाद जब नौकरी नहीं मिलनी तो समय और रुपये क्यों खर्च करें। इस समस्या के समाधान को इन जिलों में अभियान चलाकर लोगों की आशंकाएं दूर करनी होंगी। - प्रो. एमपी दुबे, पूर्व कुलपति राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय