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Wednesday, July 1, 2026

3 साल से अनुपस्थित शिक्षिका के अवकाश स्वीकृत करने का आरोप में आगरा के BEO निलंबित, देखें आदेश

3 साल से अनुपस्थित शिक्षिका के अवकाश स्वीकृत करने का आरोप में आगरा के BEO  निलंबित, देखें आदेश 


➡️ अपर शिक्षा निदेशक बेसिक ने जारी किए आदेश
➡️ शिक्षिका को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप 
➡️ गलत तरीके से लाभ देने का था आरोप
➡️ सहायक अध्यापिका रिनी सिंह को दिया लाभ
➡️ तथ्य छिपाने,भ्रामक जानकारी देने का भी आरोप
➡️ उच्चाधिकारियों को गुमराह करने पर गिरी गाज
➡️ अनुशासनहीनता के आरोप में बीईओ निलंबित


आगरा के बेसिक शिक्षा विभाग के फतेहाबाद ब्लॉक के बीईओ शेष बहादुर सरोज को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतों, अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर की गई है। बीईओ पर लगे आरोपों की जांच के आदेश दिए गए है।

बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी शेष बहादुर सरोज के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोप लगे थे। आरोप है कि उन्होंने उच्च प्राथमिक विद्यालय रावर फतेहाबाद की सहायक अध्यापक रिनी सिंह को 1 नवंबर 2022 से निरंतर तीन साल तक अनुपस्थित रहने पर उन्हें अनुचित लाभ दिया गया।

सहायक अध्यापक रिनी सिंह के अनुपस्थित रहने पर भी ग्रीष्म अवकाश, बाल्य देखभाल अवकाश, शीत अवकाश, असाधारण अवकाश, मेडिकल लीव स्वीकृत कर दी गई। खंड शिक्षाधिकारी की ओर से अधिकारियों को भ्रमित किया गया। उनकी ओर से साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराए गए। कार्यशैली में अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के भी आरोप लगाए गए हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच आवश्यक मानी गई है। निलंबन के मंडल मुख्यालय अटैच किए गए हैं। 

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आगरा मंडल अटैच किया गया है और उन्हें मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) के नियंत्रण में रखा जाएगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) दिया जाएगा, जो वित्तीय हस्त पुस्तिका के प्रावधानों के अनुरूप होगा।

हालांकि, यदि किसी अन्य स्रोत से आय प्राप्त होने की पुष्टि होती है, तो भत्ते में आवश्यक समायोजन किया जाएगा। इसके अलावा, यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या देयकों का मामला लंबित पाया जाता है, तो संबंधित राशि की वसूली नियमानुसार की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा है कि आरोपों की पुष्टि के लिए पृथक से विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त कर विस्तृत जांच कराई जाएगी।


Sunday, June 21, 2026

वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

जांच में असहयोग के आरोप सिद्ध


सीतापुर। बेहटा की बीईओ विभा सचान को शासन ने भ्रष्टाचार के मामले में शनिवार को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में वह सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध रहेंगी।

प्रयागराज निवासी विकास कुशवाहा ने विभा सचान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। शासन ने संस्कृत पाठशाला निरीक्षक प्रयागराज को मामले की जांच सौंपी थी। जांच के दौरान बीईओ ने जांचकर्ता को अभिलेख उपलब्ध कराए। इसमें सामान की खरीदारी के बिल व जीएसटी बिल थे। बहराइच से खरीदे गए सामान के हाथ से बने हुए बिल भी दिए गए। इन पर जीएसटी भी नहीं दिया गया था। इससे भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।

इसके बाद निरीक्षक ने भ्रष्टाचार करने वाले विद्यालयों की जांच की। कंपोजिट विद्यालय शाहपुर में 12 मई को पांच शिक्षक, एक अनुदेशक व एक शिक्षामित्र अनुपस्थित मिले। जूनियर हाईस्कूल शेखनापुर 10.55 बजे पर बंद मिला। प्रधानाध्यापक व अध्यापक गैरहाजिर मिले। विद्यालय देखकर ऐसा लगा कि यहां पढ़ाई होती ही नहीं है।

प्राथमिक विद्यालय चंदीभानपुर की मिड डे मील पंजिका का किसी अधिकारी ने अवलोकन तक नहीं किया। इन विद्यालयों के शिक्षक स्कूल से नदारद थे लेकिन वह बीआरसी में बीईओ के आसपास टहलते मिले। इससे शिकायत की पुष्टि हुई। इस संबंध में बीईओ को नोटिस दिया गया। इसके बाद भी बीईओ ने कोई जवाब नहीं दिया। शासन ने इस मामले में बीईओ की संलिप्तता उजागर होने पर निलंबित कर दिया है।

बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि बीईओ विभा सचान को निलंबित कर दिया गया है। जल्द ही वहां पर नए बीईओ की तैनाती की जाएगी।


Thursday, June 11, 2026

139 बीईओ और 369 लिपिकों के तबादले की सूची तैयार, शासन की मंजूरी मिलते ही जारी होगा आदेश

139 बीईओ और 369 लिपिकों के तबादले की सूची तैयार, शासन की मंजूरी मिलते ही जारी होगा आदेश


लखनऊ/ प्रयागराज । प्रदेश के विभिन्न जिलों में तीन वर्ष से अधिक समय से तैनात 139 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) और 369 लिपिकों के स्थानांतरण की सूची बेसिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को भेज दी है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में तीन वर्ष से अधिक समय से तैनात 139 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) और 369 लिपिकों के स्थानांतरण की सूची बेसिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को भेज दी है। शासन की मंजूरी मिलते ही तबादला आदेश जारी किए जा सकते हैं।



सूत्रों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 862 से अधिक खंड शिक्षा अधिकारी तैनात हैं। 15 से अधिक अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित हैं। कई अन्य के खिलाफ जांच चल रही है। शासन की स्थानांतरण नीति के तहत एक ही जिले में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके बीस फीसदी खंड शिक्षा अधिकारियों और लिपिकों को स्थानांतरित किया जाना है।

बेसिक शिक्षा निदेशालय ने स्थानांतरण की सूची मई माह में ही शासन को भेज दी गई थी। सूची भेजे जाने के बाद निदेशक और अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) के पदों पर नई तैनाती की जा चुकी है।

ऐसे में तबादलों के लिए विभागीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है। इस संबंध में अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि उनकी तैनाती से पहले ही स्थानांतरण सूची शासन को भेजी जा चुकी होगी। अब अंतिम निर्णय शासन स्तर से मंजूरी मिलने के बाद ही होगा।

Thursday, June 4, 2026

अध्यापिका को CCL दिए जाने के मामले में मनमानेपन और मानसिक शोषण किए जाने तथा विभाग की छवि धूमिल करने पर कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश

उत्पीड़न और भ्रष्टाचार की शिकायत पर कन्नौज के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित, प्रधानाध्यापक की शिकायत पर अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने की कार्रवाई

चार बार सीसीएल निरस्त करने का भी आरोप

कन्नौज। जिले में भ्रष्टाचार व उत्पीड़न के आरोप में मंगलवार को सौरिख ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक को अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम पाल ने निलंबित कर दिया। इससे पहले तालग्राम के खंड शिक्षा अधिकारी रमेशचंद्र चौधरी को भी निलंबित किया जा चुका है। सौरिख क्षेत्र की एक प्रधानाध्यापक की शिकायत पर जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्हें भी एडी बेसिक कानपुर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

सौरिख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया की प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने 24 अप्रैल को शपथ पत्र के साथ उच्चाधिकारियों से बीईओ विश्वनाथ पाठक की लिखित शिकायत की थी। उनका आरोप था कि दिसंबर 2025 में विद्यालय के मरम्मत कार्य के लिए 4,62,796 रुपये का बजट आया था। इस धनराशि को जारी करने और पास कराने के एवज में बीईओ उन पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 20 प्रतिशत कमीशन (सुविधा शुल्क) देने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो बीईओ ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। 25 मार्च 2026 को बीईओ एक शिक्षामित्र को साथ लेकर स्कूल पहुंचे और उपस्थिति रजिस्टर सील कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा था कि जब तक रुपये नहीं दोगी, ऐसे ही परेशान किया जाएगा। काम चाहे जितना अच्छा कराओ, कमियां निकाली जाएंगी। उन्होंने इस 20 प्रतिशत कमीशन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीसी का भी हिस्सा होने की बात कही थी। इसके बाद बीआरसी पर बुलाकर बीईओ ने धमकी दी कि आजकल पैसे से किसी भी अधिकारी को खरीदा जा सकता है। उसने (बीईओ) बहुत रुपया कमाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सात मई 2026 को बीईओ विश्वनाथ पाठक से स्पष्टीकरण मांगा था।


चार बार सीसीएल निरस्त करने का भी आरोप
प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने आरोप लगाया विश्वनाथ और बीएसए ने मिलकर सोची-समझी रणनीति के तहत उनकी बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) को चार बार आवेदन करने के बावजूद निरस्त किया। बीएसए कंट्रोल रूम से सुबह-सुबह स्कूल में फोन करवाकर पहले शिक्षिका को अनुपस्थित दर्शाया जाता था और फिर तकनीकी आधार पर रात को 9:50 बजे छुट्टी निरस्त कर दी जाती थी। 22 अप्रैल 2026 को स्कूल में पूरी टीम के साथ छापा मारकर शिक्षिका को निलंबित करने की धमकी भी दी गई थी। आरोप है कि नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में जब प्रधानाध्यापिका छुट्टी या चिकित्सीय अवकाश पर थीं, और उसी दौरान सहायक अध्यापक ने भी आकस्मिक अवकाश लिया, तब बीईओ ने विद्यालय संचालन के लिए किसी अन्य शिक्षक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, जिससे स्कूल बिना देखरेख के चलता रहा।

तालग्राम के बाद अब सौरिख बीईओ पर गिरी गाज
तालग्राम विकास खंड में तैनात बीईओ रमेशचंद्र चौधरी पर बिना मान्यता संचालित राजकुमारी मेवाराम आदर्श विद्यालय को संरक्षण देने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप थे। इसके अलावा अन्य आरोप लगाए गए थे। इन सभी आरोपों को देखते हुए आठ मई 2026 को निलंबित कर दिया गया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर कार्यालय में संबद्ध किया गया था।




अध्यापिका को CCL दिए जाने के मामले में मनमानेपन और मानसिक शोषण किए जाने तथा विभाग की छवि धूमिल करने पर कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश 

Saturday, May 9, 2026

मनमाने तरीके से कार्य करने कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश

मनमाने तरीके से कार्य करने कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश 



Friday, April 24, 2026

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

लोक सेवा आयोग ने आयोजित की डीपीसी, प्रक्रिया तेज

लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यामक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग को जल्द ही 500 नियमित प्रधानाचार्य मिलेंगे। लोक सेवा आयोग ने इसके लिए हाल ही में डीपीसी (विभागीय प्रोन्नति समिति) आयोजित की है।


शासन ने खंड शिक्षा अधिकारियों व पुरुष-महिला शिक्षकों का नया कोटा हाल ही में तय किया है। पदोन्नति के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसमें खंड शिक्षा अधिकारियों के लिए 34 फीसदी कोटा निर्धारित है, जो पहले 17 फीसदी था। महिला-पुरुष शिक्षकों के लिए 33-33 फीसदी कोटा तय किया गया है, जो पहले क्रमशः 22 व 61 फीसदी था।

डीपीसी में बीईओ व विभाग के वरिष्ठ शिक्षकों के पदोन्नति के पद भरे जाएंगे। निर्धारित मानक पूरे करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी प्रधानाचार्य बनेंगे। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक भी पदोन्नति पाकर प्रधानाचार्य बनेंगे। इसका असर विद्यालयों के कामकाज पर पड़ेगा।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डीपीसी के बाद लोक सेवा आयोग योग्य अभ्यर्थियों की सूची शासन को भेजेगा। शासन औपचारिकताएं पूरी कर इन प्रधानाचार्यों को विद्यालयों में तैनाती देगा। प्रदेश के 2400 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में से 600 से ज्यादा में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं।


बीईओ के खाली पद भरेंगे

प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के बाद प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के काफी पद खाली होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें भरने की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी है। विभाग खाली पदों की जानकारी जुटा रहा है। ताकि इसके अनुसार नई भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जा सके। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है।