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Wednesday, December 18, 2024

फिलहाल नहीं होगी यूपी में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती: विधानसभा में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का जवाब

फिलहाल नहीं होगी यूपी में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती: विधानसभा में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का जवाब 


लखनऊ: बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती की कोई नई योजना फिलहाल नहीं है। प्रदेश में शिक्षकों की संख्या मानक के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 30 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। अगर शिक्षामित्रों को भी जोड़ लिया जाए तो यह अनुपात एक शिक्षक पर 22 छात्रों का हो जाता है।


प्रश्नकाल में सपा सदस्य अनिल प्रधान और संदीप सिंह के प्रश्न पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगर प्रदेश में छात्रों की संख्या बढ़ेगी और नए छात्र आएंगे तो सरकार जरूर शिक्षकों की भर्ती पर विचार करेगी। इस पर अनिल प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में एक आंकड़े में बताया है कि प्रदेश में 7.85 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि यह आंकड़ा कहां से आया है, इसको वह दिखवा रहे हैं।

Sunday, August 8, 2021

निर्देश : समायोजन की ऐसी नीति बनाएं जिसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके : बेसिक शिक्षा मंत्री

निर्देश : समायोजन की ऐसी नीति बनाएं जिसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके : बेसिक शिक्षा मंत्री

कानूनी अड़चन दूर कर शिक्षकों का जल्द करें समायोजन करने का निर्देश

प्री-प्राइमरी शिक्षा शुरू करने के लिए जरूरी इंतजाम करने का निर्देश


लखनऊ : जिले के अंदर प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसे लेकर जो भी कानूनी अड़चन है, उसे जल्द दूर किया जाएगा। शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। शनिवार को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश द्विवेदी ने विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षकों की प्रोन्नति भी जल्द की जाए।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी स्कूल भी शुरू किए जाएंगे। अभी कक्षा एक से पढ़ाई शुरू होती है। आगे नर्सरी व केजी की कक्षाएं भी लगेंगी। इसके लिए जरूरी इंतजाम करने को एक विस्तृत कार्य योजना बनाने के निर्देश भी मंत्री ने दिए। यूनीफार्म, स्वेटर, जूता-मोजा व बैग आदि के वितरण से संबंधित रिपोर्ट भी उन्होंने ली और निर्देश दिए कि पूरी पारदर्शिता के साथ इसे बांटा जाए।


लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के जिले के अंदर तबादले के लिए ऐसी नीति बनाने के निर्देश दिए हैं जिसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके। वे शनिवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय में विभागीय कामकाज की समीक्षा कर रहे थे.


डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी बैठक में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के उच्चीकरण का कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहायक अध्यापकों की पदोन्नति का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इससे उनकी पदोन्नति नहीं हो पा रही है। उन्होंने अधिकारियों को न्यायालय में मजबूत पैरवी कर जल्द मामले का निस्तारण कराने को कहा। 


अधिकारियों को उन्होंने टीईटी की तिथि तय करने, एडेड जूनियर हाई स्कूलों में शिक्षक भर्ती परीक्षा की तिथि तय करने सहित अन्य मुद्दों पर बात की।

Monday, May 24, 2021

EWS कोटे से बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई के प्रोफेसर बनने पर उठे सवाल, विपक्ष के घेरने पर मंत्री जी ने दिया यह जवाब

EWS  कोटे से बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई के प्रोफेसर बनने पर उठे सवाल, विपक्ष के घेरने पर मंत्री जी ने दिया यह जवाब


सिद्धार्थनगर : बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. सतीश द्विवेदी के भाई डा. अरुण कुमार द्विवेदी की सिद्धार्थ विश्वविद्यालय (सिविवि) में अल्प आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में हुई नियुक्ति पर सवाल उठने लगे हैं। डा. अरुण राजस्थान की वनस्थली विद्यापीठ में असिस्टेंट प्रोफेसर थे, ऐसे में इंटरनेट मीडिया पर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। सिविवि के कुलपति ने नियुक्ति प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते हुए जांच कराने की बात कही है।

सिविवि ने मनोविज्ञान संकाय में एसोसिएट प्रोफेसर के दो पदों के लिए आवेदन मांगा था। एक पद पिछड़ा व दूसरा अल्प आय वर्ग के लिए आरक्षित था। इटवा तहसील के शनिचरा निवासी व शिक्षा राज्य मंत्री के भाई डा. अरुण कुमार ने ईडब्ल्यूएस वर्ग में आवेदन किया, जबकि वह वनस्थली में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। इसे उन्होंने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में भी दिखाया है। 

आरटीआइ एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल से शिकायत की है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व प्रवक्ता इंजीनियर इमरान लतीफ ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उधर, मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। जिन्हें शक है, वे जांच करा सकते हैं।


■ मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई डा. अरुण द्विवेदी की सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नियुक्ति का मामला

■ विश्वविद्यालय से पहले वनस्थली विद्यापीठ के मनोविज्ञान संकाय में तैनात थे डा. अरुण

■ दो पदों के लिए हुई थी भर्ती, एक ओबीसी दूसरा ईडब्ल्यूएस के लिए था आरक्षित


2019 का बताया जा रहा प्रमाण पत्र
बताया जा रहा है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र 2019 का है। लेखपाल छोटई प्रसाद ने पहले कहा कि उन्होंने कोई रिपोर्ट नहीं दी। बाद में बताया कि 2019 में रिपोर्ट लगाई थी, तब उनकी आय आठ लाख रुपये से कम थी। एसडीएम इटवा उत्कर्ष श्रीवास्तव ने बताया कि प्रमाणपत्र तहसील से जारी हुआ है।

आठ लाख से कम आय वाले ईडब्ल्यूएस
अल्प आय वर्ग का प्रमाणपत्र उन्हें जारी किया जाता है, जिनके परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये और कृषि भूमि पांच एकड़ से कम हो। घर है तो उसका क्षेत्रफल एक हजार वर्ग फीट से कम होना चाहिए। शहरी क्षेत्र में निवास है तो आवासीय प्लाट का क्षेत्रफल 100 वर्ग गज (900 वर्ग फीट) से कम होना चाहिए।



लखनऊ : पंचायत चुनाव में कोरोना से शिक्षकों की मौत के विवाद में उलङो बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश द्विवेदी की मुश्किलें निर्धन वर्ग कोटे में छोटे भाई डा.अरुण कुमार की नियुक्ति होने पर और बढ़ी है। कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी समेत प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने निर्धन आय वर्ग कोटे में भाई की नियुक्ति पर सवाल खड़े कर के बेसिक शिक्षा मंत्री को घेरना शुरू कर दिया है।

प्रमाण पत्र बनाने की जांच कराने और नियुक्ति निरस्त करने की मांग जोरों से उठ रही है। बेसिक शिक्षा मंत्री के छोटे भाई की नियुक्ति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुई है।

सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने भी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे मंत्री के भाई का निर्धन आय वर्ग प्रमाणपत्र कैसे बन गया? इसकी जांच होनी चाहिए।

सत्ता का दुरुपयोग: सपा
समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव में शिक्षकों की कोरोना संक्रमण से मौत को लेकर गलत आंकड़ेबाजी करने वाले बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने सत्ता का दुरुपयोग करके गरीबों के आरक्षण कोटे का दुरुपयोग किया है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

कांग्रेस ने की जांच की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने आपदा में अवसर हड़प कर निर्धन का अधिकार मारने का आरोप बेसिक शिक्षा मंत्री और उनके भाई पर लगाया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति कराने के लिए बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया। उन्होंने पूरे मामले में संलिप्त लोगों की जांच कराकर विधिक कार्रवाई कराने की मांग की।

नौकरी के लिए लाठी खा रहे युवाओं का घोर अपमान: आप
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने ट्वीट कर मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, आदित्यनाथ जी के मंत्री सतीश द्विवेदी का कारनामा। 1621 शिक्षक चुनाव ड्यूटी में मर गए, मंत्रीजी को नहीं मालूम उन्होंने सिर्फ तीन बताया। लेकिन अपने सगे भाई को गरीबी के कोटे में नौकरी कैसे देनी है, ये मंत्रीजी को मालूम है। नौकरी के लिए लाठी खा रहे यूपी के युवाओं का घोर अपमान है।

विपक्ष के आरोपों पर बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि उनके छोटे भाई की नियुक्ति विश्वविद्यालय द्वारा चयन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई है। मंत्री होने के नाते इसमें उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है। यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह इसकी जांच करवा सकता है।

Saturday, October 12, 2019

बेसिक शिक्षा मंत्री ने कक्षा- 2 के छात्रों की ली क्लास, पढ़ाया र से राम, क से कमल

बेसिक शिक्षा मंत्री ने कक्षा- 2 के छात्रों की ली क्लास, पढ़ाया र से राम, क से कमल।









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Monday, September 30, 2019

बोले बेसिक शिक्षा मंत्री : अपनी जगह दूसरों से पढ़वा रहे है शिक्षक, 25 फीसद शिक्षकों को नही पता, कहा है उनका स्कूल

अपनी जगह दूसरों से पढ़वा रहे है शिक्षक, 25 फीसद शिक्षकों को नही पता, कहा है उनका स्कूल


Thursday, September 26, 2019

सरकार का अब शिक्षा विभाग में ऑपरेशन क्लीन', 5 हजार टीचर्स पर बर्खास्‍तगी की तलवार

 
सिद्धार्थनगर पहुंचे बेसिक शिक्षा मंत्री (Basic Education Minister) सतीश द्विवेदी (Satish Dwivedi) ने कहा कि प्रदेश से सभी फर्जी शिक्षकों को बाहर किया जाएगा. ऐसे करीब चार शिक्षकों की पहचान की गई है.


NEWS18 UTTAR PRADESH
LAST UPDATED: SEPTEMBER 26, 2019, 1:37 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के करीब चार हजार सरकारी शिक्षकों (School Teachers) पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है. योगी सरकार ने शिक्षा विभाग (Education Department) में नियुक्त फर्जी शिक्षकों (Fake Teachers) की सूची तैयार कर ली है. करीब पांच हजार फर्जी टीचर की सूची तैयार की गई है. सिद्धार्थनगर पहुंचे बेसिक शिक्षा मंत्री (Basic Education Minister) सतीश द्विवेदी (Satish Dwivedi) ने कहा कि प्रदेश से सभी फर्जी शिक्षकों को बाहर किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि एसटीएफ को जांच सौंपी गई है. चार हजार शिक्षक चिह्नत किए गए हैं. विभाग खुद अपने स्तर पर ऐसे शिक्षकों के खिलाफ करवाई कर रहा है.

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश द्विवेदी ने फर्जी टीचर्स को लेकर बड़ा बयान दिया है. उनके मुतबिक, प्रदेश में तकरीबन पांच हजार शिक्षक फर्जी हैं. अगर फर्जी शिक्षकों की भर्ती में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका पाई जाती है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. फर्जी शिक्षकों को लेकर एसटीएफ अपना काम कर रहा है.


*दर्ज किया जाएगा मुकदमा*

सतीश द्विवेदी ने कहा कि योगी सरकार का संकल्प है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. इसी पर काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में जांच चल रही है. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि फर्जी शिक्षकों की संख्या करीब पांच हजार है. सघन जांच के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी. इन फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत करवाया जाएगा. कोशिश है कि उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में एक भी फर्जी शिक्षक न बचे. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के भर्ती के खेल में जो भी कर्मचारी या अधिकारी शामिल हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.


*मथुरा में 60 शिक्षक हो चुके हैं निलंबित*

बता दें कि मथुरा, आगरा, सिद्धार्थनगर समेत कई जिलों में फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है. उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने बीएड की फर्जी डिग्री के जरिए टीचर की नौकरी पाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने मथुरा के ऐसे 60 शिक्षकों को चिह्नित कर उन्हें निलंबित कर दिया है. बेसिक शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में एसआईटी की जांच के दौरान करीब 4700 ऐसे बीएड डिग्रीधारक मिले थे, जिनकी डिग्री या तो फर्जी थी या फिर उसमें हेरफेर की गई थी. अधिकारियों के द्वारा इन फर्जी डिग्रीधारकों की सूची सीडी के रूप में दो बार विभागीय माध्यम से जनपद स्तर पर पहुंचाई गई थी।