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Saturday, August 29, 2020

शाहजहांपुर : ऑडिट में उगाही का देखें वायरल वीडियो, बीईओ से जवाब-तलब, शिक्षकों से 500 व 1000₹ तक की वसूली का आरोप

शाहजहांपुर : ऑडिट में उगाही का देखें वायरल वीडियो, बीईओ से जवाब-तलब, शिक्षकों से 500 व 1000₹ तक की वसूली का आरोप


शाहजहांपुर ;  बेसिक स्कूलों के ऑडिट में धनउगाही का वीडियो वायरल हुआ। जिसके बाद बीएसए राकेश कुमार ने जलालाबाद ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश चंद्र को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। बीईओ की रिपोर्ट में एक बीआरसी के अनुचर समेत एक शिक्षक को दोषी पाया गया है।




वायरल वीडियो 26 अगस्त का है। जलालाबाद बीआरसी पर ऑडिट के दैरान वहां का अनुचर तथा एक अन्य व्यक्ति शिक्षकों से 500 व 1000 रुपये वसूल रहा है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।  जनपद के बेसिक स्कूलों का 24 अगस्त से ऑडिट शुरू किया गया है। बीएसए को 26 अगस्त की रात ही वीडियो मिल गया था।


खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए को भेजी रिपोर्ट: 27 अगस्त को खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश चंद्र ने वायरल वीडियो की बीएसए को रिपोर्ट भेज दी। कहा जो व्यक्ति पैसे लेते दिखाया गया है वह उनके कार्यालय का ही अनुचर है, जबकि पास बैठा व्यक्ति एक प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक है। 


24अगस्त से जनपद में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का चल रहा है ऑडिट, पूर्व एवीआरसी व सेवक के आए सामने नाम


वायरल वीडियो के मामले में खंड शिक्षा अधिकारी से जवाब तलब किया गया है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी -राकेश कुमार, बीएसए


एक शिक्षक व अनुचर की पहचान हो गई है। बीएसए को दोनों के खिलाफ रिपोर्ट भेज दी गई है। जिस समय का वीडियो है, उस समय मैं मदनापुर में था। -सुरेश चंद, खंड शिक्षा अधिकारी जलालाबाद

Friday, August 14, 2020

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश। 


नया अपडेट 👇

लखनऊ। बुलंदशहर के सिकंदरा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, थपरावली के व्यायाम शिक्षक पंकज यादव को आपस में मारपीट के मामले में निलंबित कर दिया गया है।

शुक्रवार को न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर मारपीट की ख़बरें चली थीं। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने इसका संज्ञान लेते हुए दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।



हफ्ते भर बाद पुराना वीडियो हुआ वायरल जिसमे 👇
BEO साहब के बिगड़े बोल, प्राइमरी का मास्टर से बोले रहो औकात में, आपत्ति जताने पर की हाथापाई, हो रहा वीडियो वायरल




दिनांक 11 अगस्त
सीसीटीवी फुटेज के बाद बीएसए साहब हुए बैकफुट 👇 
दर्ज एफआईआर को पुंजित करने का पत्र 


दिनांक 13 अगस्त
शिक्षक के पत्र के जरिये सीसीटीसी फुटेज को संज्ञान में लेने की मांग 👇

■ दिनांक : 7 अगस्त
घटना बाद कई बीईओ की शिकायत पर तुरन्त केवल शिक्षक को किया निलंबित 👇 

Tuesday, August 11, 2020

69000 शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे नहीं बढ़ सकी एसटीएफ की जांच, आरोपी नेता को बचाने का आरोप

69000 शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे नहीं बढ़ सकी एसटीएफ की जांच, आरोपी नेता को बचाने का आरोप


प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की जांच अब एसटीएफ कर रही है. एसटीएफ को जांच मिले हुए दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन तेज-तर्रार बताई जाने वाली ये एजेंसी इन दो महीनों में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है. एक अभ्यर्थी को छोड़ दिया जाए तो एसटीएफ न तो किसी आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है और न ही जांच को जरा भी आगे बढ़ा सकी है. जांच एजेंसी एसटीएफ इस मामले में मोस्टवांटेड बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव पर तो पूरी तरह मेहरबान नजर आ रही है. न तो अभी तक उसकी गिरफ्तारी की गई है और न ही उस पर कानूनी शिकंजा कसा गया है.


शिक्षक भर्ती मामले में एसटीएफ की नाकामी सवालों के घेरे में है. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि एसटीएफ वाकई नाकाम है या फिर वह कुछ बड़े लोगों को बचाने के लिए जानबूझकर जांच और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाले हुए है. एसटीएफ के ढुलमुल रवैये के बाद अभ्यर्थी और छात्र संगठन अब इस मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच कराए जाने की मांग करने लगे हैं. बीजेपी नेता चंद्रमा यादव यूपी के एक कैबिनेट मंत्री का प्रतिनिधि रहा है और वो इससे पहले टीईटी परीक्षा का पेपर लीक कराने के आरोप में भी पांच महीनों तक जेल में रह चुका है. एसटीएफ ने बीजेपी नेता चंद्रमा को अब तक न तो भगोड़ा घोषित किया है और न ही उस पर इनाम जारी किया है.


गौरतलब है कि, यूपी के प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में पैसे लेकर पास कराने के आरोप में प्रयागराज पुलिस ने प्रतापगढ़ के अभ्यर्थी राहुल सिंह की शिकायत पर इसी साल चार जून को केस दर्ज जांच शुरू की थी. प्रयागराज पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड केएल पटेल और दो टॉपर्स समेत 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इतना ही नहीं पुलिस ने यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के प्रतिनिधि रहे बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव को भी इस मामले में आरोपी बनाया था. प्रयागराज पुलिस ने ये सारी कार्रवाई चार दिन में कर ली थी. भर्ती घोटाले का मामला सियासी गलियारों में गूंजने के बाद यूपी सरकार ने 9 जून को जांच प्रयागराज पुलिस से वापस लेकर एसटीएफ को सौंप दी थी. इसके साथ ही हफ्ते भर में ही तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को हटाने पर भी खूब कोहराम मचा था.


बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव सूबे के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह का प्रतिनिधि रह चुका है. उसकी गिनती प्रयागराज में बीजेपी के रसूखदार नेताओं में होती है. चंद्रमा यादव बीजेपी में महानगर उपाध्यक्ष के साथ ही किसान मोर्चे की प्रदेश कार्य समिति का सदस्य भी रह चुका है. वो एक इंटर कॉलेज का प्रबंधक भी है. अपने कॉलेज पंचमलाल आश्रम इंटर कालेज को वो रसूख का इस्तेमाल कर तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर बनवाता था और वहीं से पेपर लीक कराकर अपने गिरोह को देता था.



टीईटी पेपर लीक मामले में वो पांच महीने तक जेल में रह चुका है. वैसे एसटीएफ को जांच सौंपने और चंद्रमा को गिरफ्तार नहीं किए जाने पर विपक्षी पार्टियां पहले ही सवाल उठा रही थीं. एसटीएफ ने दो महीने में इस मामले में सिर्फ एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा वो न तो किसी की गिरफ्तारी कर सकी है और न ही जांच में एक कदम भी आगे बढ़ सकी है. एसटीएफ की ये नाकामी सवालों के घेरे में है. आरोप लग रहा है कि सरकार को इस मामले का सनसनीखेज खुलासा रास नहीं आया, इसलिए उसने तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज का तबादला किया और उसके बाद जांच को ठंडे बस्ते में डालने के लिए मामला एसटीएफ के सुपुर्द कर दिया.


प्रयागराज में आइसा के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश पासवान, सपा छात्र सभा से जुड़े अजय यादव सम्राट और एनएसयूआई के ऋषि यादव ने एसटीएफ पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाते हुए इस मामले की जांच अब सीबीआई या फिर हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ड जज से कराए जाने की मांग की है.

Monday, August 10, 2020

बीईओ बोलीं, 10 हजार से नीचे नहीं हो पाएगा काम, वायरल वीडियो के खलबली मचाने के बाद दी प्रतिकूल प्रविष्टि, बीएसए ने बताया आरोपों को निराधार



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बीईओ बोलीं, 10 हजार से नीचे नहीं हो पाएगा काम,  वायरल वीडियो के खलबली मचाने के बाद दी प्रतिकूल प्रविष्टि, बीएसए ने बताया आरोपों को निराधार


हरदोई: बेसिक शिक्षा विभाग में वायरल वीडियो ने खलबली मचा दी है। खंड शिक्षा अधिकारी शाहाबाद शुचि गुप्ता की एक सेवानिवृत्त अध्यापक से बातचीत के वायरल वीडियो के अनुसार..मास्टर साहब, हम क्या बताएं इसमें, हमें तो बीएसए को भी देना पड़ता है। बीएसए साहब को क्या हम पैसे अपने पास से देंगे। आप से तो कोई ज्यादा मांगे भी नहीं हैं, केवल 10 हजार रुपये की बात हुई है। आप पता कर लो कि हम बाकी का कितने में कर रहे हैं। जितना बीएसए को देना है उतना तो पूरा हो जाए हमारा।. .नहीं मास्टर साहब इससे कम हम क्या कर लें। आप हमारे घर आए थे तो हमने आपकी बात रख ली। बात यह है कि हमें तो फाइलें गिनकर बीएसए को हिसाब देना पड़ता है। कम से कम उनके खर्चा भर को तो निकल आए। बीएसए को पता होता है कि इतने लोग रिटायर हो रहे हैं। दस हजार रुपये में हम क्या उन्हें देंगे और क्या खुद रखेंगे। दस में भी चलो उनके भर का मिल जाए हमें नहीं मिल रहा है तब भी कोई बात नहीं। ..हालांकि यह वीडियो पुराना बताया जा रहा है और इसके चर्चा में आने पर 31 जुलाई को बीएसए, बीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुके थे, लेकिन शनिवार रात सोशल मीडिया पर छाए वीडियो ने खलबली मचा दी है।


वायरल वीडियो के अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता से कोई सेवानिवृत्त अध्यापक अपनी फाइल निस्तारण की बात कहता है। उससे पूर्व में 10 हजार रुपये की बात हुई और रुपयों के लिए ही वह बीईओ से मिलने आया। फोन पर किसी से बात करने के बाद बीईओ सेवानिवृत्त अध्यापक से मुखातिब होती हैं और 10 हजार रुपये से कम में काम न हो पाने की बात कहती हैं। इतना ही नहीं वह अन्य सेवानिवृत्त अध्यापकों का भी हवाला देती हैं कि किसी ने कोई सिफारिश नहीं लगवाई। सभी आए और अपना हिसाब कर काम करा ले गए। 


भाजपा जिलाध्यक्ष के गांव के एक सेवानिवृत्त अध्यापक की भी वह नजीर देती हैं। कहती हैं कि वह तो अध्यक्ष जी के रिश्तेदार थे, लेकिन कोई सिफारिश नहीं कराई, रुपये दिए और काम करवाया। वह खंड शिक्षा अधिकारी और अध्यापक के बीच आपसी रिश्तों का भी हवाला देती हैं। करीब छह मिनट 28 सेकेंड के वीडियो में अध्यापक कुछ अन्य के लिए भी पूछता है तो वह कहती हैं कि उनसे 18 हजार रुपये लिए, अपनी जल्दी फाइल करवा लो। शाहाबाद में किसी भी दिन चले आना और चुपचाप रुपये देना बस। बीईओ के रुपये मांगने के वीडियो की बात संज्ञान में आने पर 31 जुलाई को ही बीईओ शुचि गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया था। बीईओ उनका नाम लेकर जो भी बात कह रही हैं वह पूरी तरह निराधार है। रुपये मांगने के वीडियो पर बीईओ शुचि गुप्ता को प्रतिकूल प्रविष्टि देते हुए कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया है।


वीडियो पुराना है, पूरी साजिश करके आवाज बदलकर इसे बनाया गया है और इसके नाम पर ब्लैकमेलिग की भी कोशिश की गई। पत्रावली निस्तारण के नाम पर कोई रुपये नहीं मांगे, उनके ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं। - हेमंतराव, बीएसए


नया अपडेट ☝️
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पुराना अपडेट 👇

हरदोई : फाइलें गिनकर बीएसए को पहुंचाना होता है हिस्सा, वायरल वीडियो में बीईओ का खुलासा, बीएसए ने थमाया नोटिस




● काम में लापरवाही पर भरखनी बीईओ को नोटिस
● बीएसए ने तीन दिन में मांगा जवाब, कार्रवाई की चेतावनी
● सोशल साइट पर वायरल वीडियो में पेंशन के पैसे मांगने का भी आरोप



हरदोई। शिक्षा विभाग के कामों में लापरवाही बरतने और सोशल साइट पर पेंशन की धनराशि मांगने के आरोप के बाद बीएसए ने भरखनी खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। बीएसए ने चेतावानी दी कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।  बीएसए हेमंत राव ने बताया कि भरखनी बीईओ शुचि गुप्ता के पास शाहाबाद का भी अतिरिक्त प्रभार है। 


मिशन प्रेरणा से संबंधित कार्य, कंपोजिट ग्रांट से कराए गए कामों की फीडिंग, एमडीएम डाटा आदि की फीडिंग में दोनों ब्लाक पिछड़े हुए हैं। इसके अलावा विकास खंड भरखनी में विद्युतीकरण भी कम है। मानव संपदा के तहत अपलोडिंग भरखनी 53 प्रतिशत, नगर पंचायत पाली 29 प्रतिशत और शाहाबाद में सिर्फ 43 प्रतिशत हुई है। बार-बार पत्र लिखने के बाद भी अगर काम में प्रगति नहीं आ रही है, तो यह अनुशासन हीनता की श्रेणी में आता है। 


इसी तरह सोशल साइट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें पेंशन से रुपये भी मांगे जा रहे हैं, इन सब आरोपों के बाद उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। तीन दिन का समय दिया गया है, यदि तीन दिन के बाद मिले स्पष्टीकरण से संतुष्टी न हुई तो उनके कार्रवाई करने की बात कही।


● खंड शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी

● हरदोई विकास खंड भरखनी-शाहाबाद का एक वीडियो वायरल हुआ है. जिसमें रुपये मांगने की बात कही गई है।...



हरदोई : विकास खंड भरखनी-शाहाबाद का एक वीडियो वायरल हुआ है,. जिसमें रुपये मांगने की बात बताई जा रही है। बीएसए ने वीडियो के साथ ही कार्यों में उदासीनता पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


बीएसए हेमंत राव ने खंड शिक्षा अधिकारी भरखनी/शाहाबाद शुचि गुप्ता को जारी पत्र में कहा गया है कि 31 जुलाई 2010 को सोशल मीडिया पर पेंशनर से धनराशि मांगे जाने का वीडियो वायरल हुआ है, जो अत्यंत निदाजनक व आपकी अनुशासनहीनता का प्रतीक है। इस कृत्य से विभाग की छवि खराब हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि आपके द्वारा जानबूझ कर विभाग की छवि धूमिल की गई। इसके अलावा मिशन प्रेरणा से संबंधित कार्यो के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए थे। मगर विकास खंड भरखनी और शाहाबाद का कार्य पूर्ण नहीं कराया गया, जो आदेशों की अवहेलना है। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारी से तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।


खबर साभार :  दैनिक जागरण / अमर उजाला

निरंकुश खंड शिक्षा अधिकारी, अध्यापक परेशान, शिक्षक संघ की चुप्पी भी कर रही हैरान

निरंकुश खंड शिक्षा अधिकारी, अध्यापक परेशान, शिक्षक संघ की चुप्पी भी कर रही हैरान

 
प्रकरण एक- बीएसए ने बीईओ भरावन को फर्जी अध्यापक के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने का आदेश दिया। बीईओ ने न केवल उसे मानने से मना किया बल्कि बीएसए के लिए भी खरी खोटी सुनाईं। जिसका वीडियो खूब वायरल हुआ, अब जांच हो रही है।


प्रकरण दो: बीईओ हरपालपुर पर विकास खंड क्षेत्र के ही अध्यापक ने उत्पीड़न का आरोप लगाया। मामला बेसिक शिक्षा मंत्री तक पहुंचा, जिसकी जांच का आदेश दिया गया, लेकिन धीरे धीरे फाइलों में खो गया। अध्यापक शिकायत करते घूम रहा है। 


 हरदोई: खंड शिक्षा अधिकारियों की विद्यालयों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन देखा जाए तो वही निरंकुश होते जा रहे हैं। खबर में शामिल दो मामले तो लिखापढ़ी में हैं। बीएसए के नाम पर रुपये मांगने का वायरल वीडियो बीईओ की निरंकुशता की गवाही दे रहा है और इसका खामियाजा अध्यापक भुगत रहे हैं। अध्यापकों का कहना है कि सीसीएल, प्रसूति अवकाश के तो रेट ही निर्धारित हैं। अध्यापकों को जरा जरा सा काम के लिए बीआरसी बुलाया जाता है।



 पाठ्य पुस्तकों को विद्यालयों तक पहुंचाने की धनराशि आती है, लेकिन अध्यापकों को निजी संसाधनों से किताबें ले जानी पड़ती हैं। जिले के 19 विकास खंडों में कई बीईओ सराहनीय काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा देते। निरीक्षण के नाम पर शोषण किया जाता है। बीईओ के चहेते अध्यापक स्कूल नहीं जाते, लेकिन अन्य कोई देर से पहुंचे तो कार्रवाई निश्चित।



शिक्षक संघ भी साधे बैठा चुप्पी

शिक्षकों की परेशानी के आए दिन मामले सामने आते रहते हैं। देखा जाए तो बीएसए कार्यालय से लेकर बीआरसी तक शिक्षक-शिक्षिकाएं परेशान रहते हैं और उन्हें टरकाया जाता है, लेकिन शिक्षक संघ चुप्पी साधे बैठा है। जूनियर शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष योगेश त्यागी का कहना है कि जो भी मामला सामने आता है उसे उठाया जाता है और अध्यापकों का उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा।  प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व प्रांतीय कोषाध्यक्ष शिवशंकर पांडेय का कहना है कि संघ अध्यापकों के साथ है। 


बीईओ की जहां भी लापरवाही सामने आती है। कार्रवाई होती, उन्हें नोटिस जारी किया जाता है। किसी भी अध्यापक को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। अगर कोई परेशानी है तो विद्यालय के समय के बाद अध्यापक उन्हें मिलकर या फोन कर अपनी परेशानी बता सकता है। जो बीईओ निरंकुशता कर रहे हैं, उन पर भी कार्रवाई हो रही है। -हेमंतराव, बीएसए

Sunday, August 9, 2020

पीलीभीत : स्वर्गवासी गुरुजी का दो साल तक वेतन निकाले जाने के मामले की एडी बेसिक ने तलब की रिपोर्ट, पत्नी एटीएम से निकालती रहीं वेतन

पीलीभीत : स्वर्गवासी गुरुजी का दो साल तक वेतन निकाले जाने के मामले की एडी बेसिक ने तलब की रिपोर्ट, पत्नी एटीएम से निकालती रहीं वेतन।




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पीलीभीत : बेसिक शिक्षा विभाग का कारनामा : स्वर्गवासी होने के बाद भी गुरुजी का दो साल तक निकलता रहा वेतन, इंक्रीमेंट भी लगाया,  मामले को दबाने में जुटे अधिकारी।


●  स्वर्गवासी होने के बाद भी गुरुजी का दो साल तक निकलता रहा वेतन, इंक्रीमेंट भी लग गया

● बिलसंडा के खंड शिक्षाधिकारी ने बीएसए को लिखा पत्र, अब मामले को दबाने में जुटे अधिकारी


पीलीभीत। बीएसए दफ्तर अक्सर अपने अजीबोगरीब कारनामों के लिए चर्चा में रहता है। पहले भी यहां फर्जीवाड़ा सामने आते रहे हैं। अब बीएसए दफ्तर में नया कारनामा सामने आया है। प्राथमिक स्कूल के शिक्षक की दो साल पहले मौत हो गई। मगर, उसका वेतन नवंबर 2018 तक निकलता रहा। इतना ही नहीं, बीएसए ने स्वर्गवासी गुरुजी का इंक्रीमेंट भी लगा दिया।


खंड शिक्षाधिकारी ने बीएसए को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी तो अब अधिकारी पूरे मामले को दबाने में लग गए। इससे बीएसए दफ्तर की आंख मूंदकर शिक्षकों की हाजिरी प्रमाणित करने की कार्यशैली भी उजागर हुई है। बिलसंडा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हर्रायपुर में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत अरविंद कुमार का 22 मई 2016 को निधन हो गया। मगर, मौत के बाद भी मई 2016 से नवंबर 2018 तक उनका वेतन पहले की तरह ही न केवल खाते में पहुंचता रहा, बल्कि कुछ समय बाद स्वर्ग सिधार गए गुरुजी का बीएसए ने इंक्रीमेंट भी लगा दिया। कुछ समय पहले जब बिलसंडा के खंड शिक्षा अधिकारी को किसी दूसरे शिक्षक ने उस शिक्षक की मौत के बारे में जानकारी दी, तो वह चौंक गए। बिलसंडा के खंड शिक्षा अधिकारी ने 24 जुलाई को इस प्रकरण में बीएसए और वित्त लेखाधिकारी को एक पत्र लिखा। इसमें हर्रायपुर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की मौत की जानकारी देते हुए दो साल का वेतन रिकवरी करने की बात कही गई। यह जानकारी होते ही बीएसए दफ्तर में हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार, बीएसए ने आनन-फानन में बिलसंडा खंड शिक्षा अधिकारी को अपने दफ्तर बुलाकर मामला और ज्यादा न खोलने पर बात कही.

मौत के बाद भी शिक्षक का वेतन लगातार निकलने का प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है, खंड शिक्षा अधिकारी से मामले की जानकारी कर जांच कराई जाएगी। अगर, इसमें किसी की लापरवाही सामने आई तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - देवेंद्र स्वरूप, बीएसए

तो क्या स्वर्गवासी होने के बाद भी विद्यालय आते रहे गुरुजी!
सबसे बड़ी बात यह है कि जिन शिक्षक की चार साल पहले मौत हो गई, वो क्या वह स्वर्गवासी होने के बाद भी दो साल तक लगातार स्कूल आकर बच्चों को पढ़ाते रहे। अगर वह स्कूल नहीं आए तो उनकी उपस्थिति कैसे दर्शा दी गई। इन पर जांच कराने के बजाय बीएसए दफ्तर पूरे मामले पर परदा डालने में जुट गया है।

भूल मानकर मामला निपटाने में लगे अफसर
भले ही बेसिक शिक्षा विभाग से दिवंगत शिक्षक के खाते में वेतन गया हो। मगर, बीएसए और लेखा विभाग के जिम्मेदार अब उसे भूल मानकर निपटाने की तैयारी में लग गए हैं। नियमानुसार बीएसए दफ्तर के लेखा विभाग को जो वेतन बिल मिलता है, उसी के अनुसार वेतन जारी करते हैं। अब वर्तमान लेखाधिकारी का मानना है कि यह मामला उनके समय का नहीं है न ही उन्हें शिक्षक की मौत के बारे में कोई जानकारी थी। नीचे से वेतन बिल पास होकर आया और वेतन जारी हो गया।

उपस्थिति प्रमाणित होने पर ही मिलता है वेतन
वेतन के लिए एक स्कूल के सभी शिक्षकों से प्रारूप नौ पर महीने भर के हस्ताक्षर कराए जाते हैं उसी पर मेडिकल लीव, आकस्मिक अवकाश आदि भी दर्ज होता है। प्रधानाध्यापक इसे ब्लॉक संसाधन केंद्र भेज देते हैं। जहां पर खंड शिक्षा अधिकारी के द्वारा उनकी उपस्थिति को प्रमाणित कर आगे भेजा जाता है। फिर उसे बीएसए प्रमाणित करते हैं तब जाकर वेतन निकलता है। मगर, इस मामले में खंड शिक्षाधिकारी और बीएसए दोनों ही शिक्षक की मौत होने के बाद भी उपस्थिति प्रमाणित करते रहे।




साभार : अमर उजाला