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Friday, July 3, 2026

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

02 जुलाई 2026
हरदोई। शिकायतों और अनियमितताओं के जाल में फंसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को आखिरकार शासन ने निलंबित कर दिया। बीएसए पर लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। डॉ. अजित को बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) करेंगे।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कुछ गंभीर शिकायतें जिलाधिकारी अनुनय झा को मिली थीं। इस पर उन्होंने जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। एसडीएम सदर, संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रमेंद्र सिंह इसमें सदस्य थे। जांच टीम ने 61 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पत्रावली गायब होने, ईसीसीई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में शासनादेश का पालन न करने, सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और अन्य देयताओं से संबंधित पत्रावलियों को लंबित रखने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को 20 जून को सौंपी थी।

इसी रिपोर्ट पर डीएम अनुनय झा ने बीएसए डॉ. अजित सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराए जाने की संस्तुति की थी। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बीएसए को निलंबित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि निलंबन अवधि में बीएसए निदेशायल से संबद्ध रहेंगे। मामले की विस्तृत जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक करेंगे।
 



हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

पदेन दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और कार्यशैली पर सवाल

23 जून 2026
हरदोई: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाक्टर अजित सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने और लेनदेन से जुड़े आरोपों की एफआईआर की पुलिस जांच जारी रहने के बीच जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की संस्तुति की है।

जांच समिति, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्रवक्ता डाक्टर रामेंद्र सिंह शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए पर न केवल नियुक्ति पत्र वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, बल्कि पेंशन पत्रावलियों से जुड़े मामलों में भी 20 हजार रुपये मांगने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक्टर अजित सिंह द्वारा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया। उनकी कार्यशैली और आचरण को पद एवं गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है। समिति ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय, शासन और निदेशालय के निर्देशों के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इस संवेदनशील पद पर रहने योग्य नहीं हैं। 

समिति ने अपने निष्कर्ष में यह भी कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सीमित मामलों के आधार पर यह आशंका मजबूत होती है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति, सेवा संबंधी निलंबन-बहाली, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे सभी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। 

जांच रिपोर्ट में उच्च स्तर पर यह भी संस्तुति की गई है कि बीएसए डाक्टर अजित सिंह के पूरे कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी लंबित और विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। डीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और संभावित अनियमितताओं के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अब शासन स्तर पर तय की जाएगी।

रची गई साजिश, आरोप फर्जीः बीएसए डाक्टर अजित सिंह पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष लेने का प्रयास किया, जिसमें सोमवार की शाम बीएसए का प्राइवेट नंबर बंद आता रहा। सीयूजी नंबर पर फोन किया तो वह उठा नहीं। पूर्व में बीएसए डाक्टर अजित सिंह से हुई वार्ता में उन्होंने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को पूरी तरह से फर्जी बताया था। बीएसए डाक्टर अजित सिंह के अनुसार उन्हें प्रशासन की तरफ से पूरी साजिश कर फंसाया जा रहा है, जिसके लिए फर्जी रिपोर्ट बनाई गई है। इसमें कई लोग शामिल हैं, जोकि उन्हें किसी भी तरह से हटवाना चाहते हैं।

प्रशासन ने आरोपों को नकारा
बीएसए डाक्टर अजित सिंह द्वारा प्रशासन पर साजिश रचे जाने के आरोप में प्रशासन का कहना है कि बीएसए ने खुद अनियमितता की। फाइलों को गायब कराया। पेंशन पत्रावलियों में हस्ताक्षर नहीं किए। बिना किसी कारण के पत्रावलियों को लंबित रखा। बीएसए के लिपिकों ने ही बयान दिए हैं। अब बीएसए फंस रहे तो साजिश बता रहे हैं।



हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  

20 जून 2026
हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जानिए पूरा मामला 
गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

Sunday, June 21, 2026

शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

इसी मामले में निलंबित बीएसए शालिनी 16 जून को दिल्ली से हुई थी गिरफ्तार

21 जून 2026

गोरखपुर : शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में वांछित चल रहे देवरिया बीएसए कार्यालय के निलंबित लिपिक संजीव सिंह ने शनिवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत में हाजिर होने के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। उसकी गिरफ्तारी पर एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। साथ ही उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। 


शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में नामजद आरोपित संजीव सिंह देवरिया जिले के रामनाथ कालोनी का रहने वाला है। 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में दर्ज मुकदमे के बाद से वह फरार चल रहा था। मामला 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर प्रताड़ित करने, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने तथा मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा था कि लगातार प्रताड़ना से आहत होकर कृष्ण मोहन सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप यह भी था कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।


 पुलिस को उनकी जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपित देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को गुलरिहा पुलिस ने 16 जून को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में आरोपित बनाए गए देवरिया, गौरीबाजार के अर्जुनडीहा निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पुलिस ने घटना के 10 दिन बाद ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि फरार चल रहे लिपिक संजीव सिंह के सरेंडर के बाद अब मामले के सभी आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।



शिक्षक कृष्ण मोहन की आत्महत्या मामले में अभियुक्त हैं निलंबित बीएसए शालिनी

गिरफ्तार निलंबित बीएसए को जेल भेजा गया, लिपिक के घर की कुर्की की taiyaari

नामजद आरोपी लिपिक संजीव सिंह के घर चस्पा हो चुका है नोटिस, अब कुर्की की तैयारी

जांच के दौरान भ्रष्टाचार का मामला आने पर पूर्व प्रधानाध्यक को भेजा जा चुका है जेल

19 जून 2026

गोरखपुर । गुलरिहा इलाके में बर्खास्त शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में नामजद आरोपी व 25 हजार की इनामी देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को बुधवार को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी शालिनी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था और फिर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बुधवार को गोरखपुर पहुंची। पूछताछ के बाद बीएसए को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेजा गया। उधर, मामले में नामजद फरार आरोपी निलंबित लिपिक संजीव सिंह के घर की कुर्की की तैयारी शुरू कर दी गई है।

शालिनी श्रीवास्तव पत्नी सौरभकुमार सिन्हा मूल रूप से बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित आनंद नगर, बड़ी काली मंदिर की निवासी हैं। जानकारी के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने खुदकुशी कर ली थी। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि दोनों ने शिक्षक को लगातार प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

तहरीर के आधार पर गुलरिहा थाने में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने, धमकी देने, साक्ष्य मिटाने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित भी किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।

जांच के दौरान एक रिटायर प्रधानाध्यक अनिरुद्ध का नाम आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। वहीं, मुकदमा दर्ज होने के बाद से शालिनी व लिपिक संजीव फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने के साथ 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। शालिनी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। अब उन्हें जेल भेजा गया।

गुलरिहा थाने में दर्ज केस मैं आरोपी निलंबित बीएसए को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। लिपिक की तलाश की जा रही है। उसके खिलाफ कुर्की का नोटिस जारी हो चुका है। अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है। - निमिष पाटील, एसपी सिटी



शिक्षक की आत्महत्या मामले में देवरिया की फरार निलम्बित बीएसए दिल्ली से गिरफ्तार, लिपिक अभी भी फरार


शिक्षक आत्महत्या मामले में चल रहीं थीं शालिनी श्रीवास्तव फरार

16 जून 2026

गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या कांड में चार महीने से फरार चल रहीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है। कुशीनगर के रहने वाले और देवरिया में तैनात शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह ने 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में केस दर्ज कराया था।



शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

27 अप्रैल 2026

गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


अपडेट 19 मार्च 2026
निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

16 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

यह है मामला
कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

09 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

जांच में असहयोग के आरोप सिद्ध


सीतापुर। बेहटा की बीईओ विभा सचान को शासन ने भ्रष्टाचार के मामले में शनिवार को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में वह सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध रहेंगी।

प्रयागराज निवासी विकास कुशवाहा ने विभा सचान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। शासन ने संस्कृत पाठशाला निरीक्षक प्रयागराज को मामले की जांच सौंपी थी। जांच के दौरान बीईओ ने जांचकर्ता को अभिलेख उपलब्ध कराए। इसमें सामान की खरीदारी के बिल व जीएसटी बिल थे। बहराइच से खरीदे गए सामान के हाथ से बने हुए बिल भी दिए गए। इन पर जीएसटी भी नहीं दिया गया था। इससे भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।

इसके बाद निरीक्षक ने भ्रष्टाचार करने वाले विद्यालयों की जांच की। कंपोजिट विद्यालय शाहपुर में 12 मई को पांच शिक्षक, एक अनुदेशक व एक शिक्षामित्र अनुपस्थित मिले। जूनियर हाईस्कूल शेखनापुर 10.55 बजे पर बंद मिला। प्रधानाध्यापक व अध्यापक गैरहाजिर मिले। विद्यालय देखकर ऐसा लगा कि यहां पढ़ाई होती ही नहीं है।

प्राथमिक विद्यालय चंदीभानपुर की मिड डे मील पंजिका का किसी अधिकारी ने अवलोकन तक नहीं किया। इन विद्यालयों के शिक्षक स्कूल से नदारद थे लेकिन वह बीआरसी में बीईओ के आसपास टहलते मिले। इससे शिकायत की पुष्टि हुई। इस संबंध में बीईओ को नोटिस दिया गया। इसके बाद भी बीईओ ने कोई जवाब नहीं दिया। शासन ने इस मामले में बीईओ की संलिप्तता उजागर होने पर निलंबित कर दिया है।

बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि बीईओ विभा सचान को निलंबित कर दिया गया है। जल्द ही वहां पर नए बीईओ की तैनाती की जाएगी।


Tuesday, May 19, 2026

मुख्यमंत्री कंपोजिट मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल, निर्माण में टेंडर की शर्तें अलग-अलग

मुख्यमंत्री कंपोजिट मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल,  निर्माण में टेंडर की शर्तें अलग-अलग
 

लखनऊ। मुख्यमंत्री मॉडल स्कूलों के निर्माण में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया। प्रदेश में एक जैसे बनने वाले मॉडल स्कूलों के लिए अलग अलग टेंडर नियम बनाकर विभाग ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रदेश में करीब 80 मुख्यमंत्री मॉडल स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है। इसमें से करीब 40 स्कूलों के निर्माण की जिम्मेदारी शासन ने यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को दी है, लेकिन अब इन्हीं के निर्माण में अनियमितता और टेंडर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के पत्र के बाद मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने मामले में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा से रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों का दावा है,जांच की आंच ऊपर तक पहुंचती देख मामले को दबाने की कोशिश शुरू हो गई।


जीएसटी जोड़कर बदले गए टेंडर के खेल: प्रदेश के लगभग सभी बड़े विभाग, पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी, एलडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग और आवास विकास परिषद खुद विकास कार्यों के टेंडर में जीएसटी अलग रखते हैं। इससे परियोजना की वास्तविक लागत और बिलो टेंडर की स्थिति स्पष्ट रहती है। लेकिन उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने कई टेंडरों में 18% जीएसटी जोड़कर लागत बढ़ा दी। 

यह खेल सिर्फ इसलिए हुआ ताकि कुछ विशेष श्रेणी के ठेकेदारों को पात्र बनाया जा सके। दरअसल, 20 करोड़ तक के कार्यों में ए श्रेणी के ठेकेदार हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन 20 करोड़ से ऊपर का टेंडर होने पर ए-1 प्लस श्रेणी के बड़े ठेकेदार पात्र हो जाते हैं। आरोप है कि विभाग ने जानबूझकर जीएसटी जोड़कर कई परियोजनाओं की लागत 20 करोड़ के पार पहुंचा दी।

टेंडर में जीएसटी की रकम नहीं जोड़ी जाती है। एलडीए में भी इसी तरह टेंडर होता है। यदि कोई विभाग कभी जीएसटी जोड़कर और कभी हटाकर टेंडर करता है तो सवाल उठेगा। -मानवेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता, एलडीए



भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है। अधिकारी जहां जरूरत समझते हैं वहां जीएसटी जोड़ देते हैं और जहां नहीं समझते हटाकर टेंडर कराते हैं। इसका कोई नियम नहीं है। -एके सिंह, सीजीएम, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड

जहां चाहा जीएसटी हटाया, जहां चाहा जोड़ दिया

प्रोजेक्ट कारपोरेशन में टेंडर प्रक्रिया में दोहरे मानदंडों के उदाहरण भी सामने आए हैं। 3 मार्च 2023 को आगरा के बिरुनी में 18.47 करोड़ के मॉडल स्कूल का टेंडर बिना जीएसटी जोड़े निकाला गया। कई अन्य जिलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। दूसरी ओर 30 मई 2023 को मऊ के पितवल में मॉडल स्कूल निर्माण के लिए 20.15 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया, जिसमें जीएसटी जोड़ दी गई। बस्ती के रुधौली में 22.36 करोड़ के टेंडर में भी जीएसटी जोड़कर लागत बढ़ाई गई। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के जरिए बिलो टेंडर की वास्तविक तस्वीर भी धुंधली कर दी गई।


टेंडर में एकरूपता होनी चाहिए। हम इस मामले को दिखवाएंगे। अलग अलग यूनिट के सीजीएम ने टेंडर कराए हैं। सुधारा जाएगा। सभी कामों के टेंडर एक ही शर्तों पर होंगे। संतोष कुमार सिंह, एमडी, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन


Thursday, February 26, 2026

शिक्षा विभाग का रूटीन है, काम में देर-भ्रष्टाचार का फेर, प्रदेशभर में लंबे समय से लटके हैं मामले, रिश्वत की भी आती हैं शिकायतें, फिर भी नहीं होता निस्तारण

शिक्षा विभाग का रूटीन है, काम में देर-भ्रष्टाचार का फेर, प्रदेशभर में लंबे समय से लटके हैं मामले, रिश्वत की भी आती हैं शिकायतें, फिर भी नहीं होता निस्तारण

देवरिया में शिक्षक ने की थी आत्महत्या


लखनऊ: देवरिया में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने 20 फरवरी को आत्महत्या कर ली। सुइसाइड नोट से पता चला कि उन्हें पहले बर्खास्त किया गया था। बाद में हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और तैनाती के आदेश दिए। एक साल से वह बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। इस दौरान उन्होंने जेवर गिरवी रख और खेत बेच कर 16 लाख रुपये भी दिए, लेकिन उन्हें तैनाती नहीं मिली।


यह मामला तो शिक्षक की आत्महात्या के बाद चर्चा में आ गया, लेकिन शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हैं। नियुक्ति से लेकर वेतन, भत्ते और पेंशन के मामले लंबे समय तक लटके रहते हैं। आत्महत्या, मारपीट जैसी घटनाओं के बाद मामला जब चर्चा में आ जाता है तो उस पर कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ दिन बाद मामला शांत हो जाता है। तय समय में निस्तारण का सिटीजन चार्टर और समय-समय पर अधिकारियों के आदेश भी होते हैं, लेकिन कार्यप्रणाली में अंतर नहीं आता। अब भी बीएसए और डीआईओएस दफ्तरों में कई मामले लंबित हैं।


निधन हुआ, पर पेंशन का पुनर्निर्धारण नहीं: मोलनलालगंज से बेसिक स्कूल से रिटायर शिक्षिका मनोरमा देवी का निधन हो गया। डेढ़ साल पहले उनके पति लक्ष्मी नारायण ने पेंशन का पुनर्निर्धारण अपने पक्ष में करवाने के लिए आवेदन किया। जनवरी 2025 में ही बीएसए ने पत्रावली की जांच पड़ताल करने के लिए मोहनलालगंज के बीईओ को पत्र लिख। तब से वह दफ्तर के चक्कर लगाते रहे। इस बीच वह बीमार भी हुए। इलान के लिए पैसे के अभाव की बात भी बताई, लेकिन उनको पेंशन नहीं मिल सकी और 2 सितंबर 2025 को उनका निधन हो गया। उसके बाद उनकी बहू ने अधिकारियों से लेकर सीएम तक को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके श्वसुर से 70 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। उन्होंने बीईओ पर कार्रवाई की मांग की है।

वेतन वृद्धि रोकी  : लखनऊ में ही पूर्व माध्यमिक विद्यालय कमालपुर विचिलिका में ही पूर्व इंचार्ज प्रधानाध्यापिका शशि सिंह की वेतन वृद्धि पिछले साल जुलाई में रोक दी गई। इसकी वजह ये बताई गई कि उन्होंने एक बच्चे का दाखिला जन्म तिथि में छेड़छाड़ करके लिया। शिक्षिका ने बीएसए को स्पष्टीकरण में लिखा कि आधार कार्ड के अनुसार उन्होंने आयुसंगत कक्षा में प्रवेश लिया। आरटीई के नियमों के आधार पर ही जारी शासनादेश में भी कहा गया था कि टीसी या आयु प्रमाण पत्र के अभाव में दाखिले न रोके और आयु संगत कक्षा में प्रवेश देकर उनको मुख्य धारा में जोड़े। उन्होंने अभिभावक का एफिडेविट भी दिया है। इसके बाद भी प्रधानाध्यापिका की वेतन वृद्धि रोकने का आदेश अब तक वापस नहीं लिया गया। 

विधान परिषद में उठा मुद्दा 
विधान परिषद में शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने रायबरेली का मामला उठाया। वशी नकवी इंटर कॉलेज में प्रवक्ता प्रदीप कुमार कार्यवाहक प्रधानाचार्य बने। प्रबंधतंत्र कुछ भर्तियां करवाना चाहता था। शासन से रोक होने के कारण उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद उनको पहले सस्पेंड और फिर बर्खास्त कर दिया गया। डीआईओएस ने निलंबन समाप्त भी कर दिया, लेकिन उसके बावजूद तीन साल से उनको आन तक न तो कॉलेज में पढ़ाने दिया जा रहा है और न वेतन दिया जा रहा है। मामला कोर्ट भी गया। इस बीच कई बार विधान परिषद में यह मुद्दा उठा। पीठ से मामला निस्तारित करने के आदेश भी हुए। विशेष सचिव और निदेशक के साथ बैठक भी हुई, लेकिन अब भी स्थिति जस की तस है।


पहले भी कई मामले रहे चर्चित
पुराने चर्चित मामलो की बात करें तो 2013 में एक रिटायर शिक्षक ने बीएसए के लेखाधिकारी के सामने ही आत्मदाह का प्रयास किया था। वहा भी मामला पेशन और भत्तों के लिए रिश्वत मागने का था। हाल ही में सीतापुर के बीएसए को हेडमास्टर द्वारा बेल्ट से पीटे जाने का मामला सामने है। उसमे यह बात सामने आई थी कि स्कूल न आने वाली एक शिक्षिका की हाजिरी लगाने का दबाव उन पर बीएसए बना रहे थे।

मिलता है भ्रष्टाचार को बढ़ावा
इस बारे में प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय कहते हैं कि सिटीजन चार्टर और समय-समय पर विभागीय आदेश भी जारी होते रहे है। उनका पालन किया जाए और तय समय पर काम हो तो ये नौबत ही न आए। सिटीजन चार्टर और विभागीय ऐक्ट में हर काम की समय सीमा और प्रक्रिया तय है। मामले लम्बित होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।


मामले लंवित न रखने के लिए स्पष्ट निर्देश है। इसकी समीक्षा भी की जाती है। फिर भी यदि कोई अधिकारी मामलों को लंवित रखता है या भ्रष्टाचार की शिकायत आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मोनिका रानी, डीजी-स्कूल शिक्षा

Sunday, January 18, 2026

AD बेसिक के खिलाफ महिला आयोग पहुंची निलंबित BEO, जानिए पूरा मामला

AD बेसिक के खिलाफ महिला आयोग पहुंची निलंबित BEO,  जानिए पूरा मामला 

दो कार्यक्रम एक में ही मर्ज करने के आरोप में सस्पेंड हैं वंदना सैनी

मुरादाबाद । डॉ. वंदना सैनी BEO ने एडी बेसिक की महिला आयोग में शिकायत की है। मुरादाबाद नगर क्षेत्र में खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात रही BEO डॉ.वंदना सैनी ने मुरादाबाद के पूर्व बीएसए और वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक (AD) बुद्ध प्रिय सिंह पर उत्पीड़न समेत गंभीर आरोप लगाते हुए महिला आयोग में शिकायत की है।

महिला अधिकारी की शिकायत पर महिला आयोग ने मुरादाबाद पुलिस से 8 दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। सिविल लाइंस सर्किल के सीओ पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं। महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में विभागीय भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाते हुए साक्ष्य संलग्न करने का भी दावा किया है। फिलहाल महिला अधिकारी की शिकायत के बाद से विभाग में खलबली मची है। 

बुद्ध प्रिय मुरादाबाद में लंबे समय से तैनात महिला अधिकारी ने जिस अधिकारी पर आरोप लगाए हैं वो (AD बेसिक) मुरादाबाद में लंबे समय से तैनात हैं। बुद्ध प्रिय सिंह करीब 3 साल तक मुरादाबाद जिले के बीएसए रहे। इसके बाद प्रमोट होकर यहीं पर सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) बन गए। एडी बेसिक होने के साथ-साथ उन पर मुरादाबाद और संभल जिले के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डॉयट) का भी चार्ज है।


2 प्रोग्राम एक में ही मर्ज करने के आरोप में सस्पेंड हैं वंदना सैनी

वहीं आरोप लगाने वाली डॉ. वंदना सैनी भी मुरादाबाद नगर क्षेत्र में बीईओ रही हैं। उन दिनों बुद्ध प्रिय सिंह मुरादाबाद के बीएसए हुआ करते थे। पिछले दिनों वंदना सैनी को बुद्ध प्रिय की एक रिपोर्ट पर सस्पेंड किया गया है। जिसमें वंदना पर आरोप था कि उन्होंने दो सरकारी आयोजन एक ही समय में कर दिए और भुगतान दो अलग-अलग आयोजनों का प्राप्त कर लिया।

एडी बेसिक बोले- आरोप सरासर बेबुनियाद वंदना सैनी के आरोपों पर एडी बेसिक बुद्ध प्रिय सिंह ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप सरासर बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि वंदना सैनी को उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया है। इसलिए वंदना सैनी उनके ऊपर झूठे आरोप लगा रही हैं।


महिला आयोग को भेजी गई शिकायत के प्रमुख अंश