शिक्षा विभाग का रूटीन है, काम में देर-भ्रष्टाचार का फेर, प्रदेशभर में लंबे समय से लटके हैं मामले, रिश्वत की भी आती हैं शिकायतें, फिर भी नहीं होता निस्तारण
देवरिया में शिक्षक ने की थी आत्महत्या
लखनऊ: देवरिया में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने 20 फरवरी को आत्महत्या कर ली। सुइसाइड नोट से पता चला कि उन्हें पहले बर्खास्त किया गया था। बाद में हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और तैनाती के आदेश दिए। एक साल से वह बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। इस दौरान उन्होंने जेवर गिरवी रख और खेत बेच कर 16 लाख रुपये भी दिए, लेकिन उन्हें तैनाती नहीं मिली।
यह मामला तो शिक्षक की आत्महात्या के बाद चर्चा में आ गया, लेकिन शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हैं। नियुक्ति से लेकर वेतन, भत्ते और पेंशन के मामले लंबे समय तक लटके रहते हैं। आत्महत्या, मारपीट जैसी घटनाओं के बाद मामला जब चर्चा में आ जाता है तो उस पर कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ दिन बाद मामला शांत हो जाता है। तय समय में निस्तारण का सिटीजन चार्टर और समय-समय पर अधिकारियों के आदेश भी होते हैं, लेकिन कार्यप्रणाली में अंतर नहीं आता। अब भी बीएसए और डीआईओएस दफ्तरों में कई मामले लंबित हैं।
निधन हुआ, पर पेंशन का पुनर्निर्धारण नहीं: मोलनलालगंज से बेसिक स्कूल से रिटायर शिक्षिका मनोरमा देवी का निधन हो गया। डेढ़ साल पहले उनके पति लक्ष्मी नारायण ने पेंशन का पुनर्निर्धारण अपने पक्ष में करवाने के लिए आवेदन किया। जनवरी 2025 में ही बीएसए ने पत्रावली की जांच पड़ताल करने के लिए मोहनलालगंज के बीईओ को पत्र लिख। तब से वह दफ्तर के चक्कर लगाते रहे। इस बीच वह बीमार भी हुए। इलान के लिए पैसे के अभाव की बात भी बताई, लेकिन उनको पेंशन नहीं मिल सकी और 2 सितंबर 2025 को उनका निधन हो गया। उसके बाद उनकी बहू ने अधिकारियों से लेकर सीएम तक को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके श्वसुर से 70 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। उन्होंने बीईओ पर कार्रवाई की मांग की है।
वेतन वृद्धि रोकी : लखनऊ में ही पूर्व माध्यमिक विद्यालय कमालपुर विचिलिका में ही पूर्व इंचार्ज प्रधानाध्यापिका शशि सिंह की वेतन वृद्धि पिछले साल जुलाई में रोक दी गई। इसकी वजह ये बताई गई कि उन्होंने एक बच्चे का दाखिला जन्म तिथि में छेड़छाड़ करके लिया। शिक्षिका ने बीएसए को स्पष्टीकरण में लिखा कि आधार कार्ड के अनुसार उन्होंने आयुसंगत कक्षा में प्रवेश लिया। आरटीई के नियमों के आधार पर ही जारी शासनादेश में भी कहा गया था कि टीसी या आयु प्रमाण पत्र के अभाव में दाखिले न रोके और आयु संगत कक्षा में प्रवेश देकर उनको मुख्य धारा में जोड़े। उन्होंने अभिभावक का एफिडेविट भी दिया है। इसके बाद भी प्रधानाध्यापिका की वेतन वृद्धि रोकने का आदेश अब तक वापस नहीं लिया गया।
विधान परिषद में उठा मुद्दा
विधान परिषद में शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने रायबरेली का मामला उठाया। वशी नकवी इंटर कॉलेज में प्रवक्ता प्रदीप कुमार कार्यवाहक प्रधानाचार्य बने। प्रबंधतंत्र कुछ भर्तियां करवाना चाहता था। शासन से रोक होने के कारण उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद उनको पहले सस्पेंड और फिर बर्खास्त कर दिया गया। डीआईओएस ने निलंबन समाप्त भी कर दिया, लेकिन उसके बावजूद तीन साल से उनको आन तक न तो कॉलेज में पढ़ाने दिया जा रहा है और न वेतन दिया जा रहा है। मामला कोर्ट भी गया। इस बीच कई बार विधान परिषद में यह मुद्दा उठा। पीठ से मामला निस्तारित करने के आदेश भी हुए। विशेष सचिव और निदेशक के साथ बैठक भी हुई, लेकिन अब भी स्थिति जस की तस है।
पहले भी कई मामले रहे चर्चित
पुराने चर्चित मामलो की बात करें तो 2013 में एक रिटायर शिक्षक ने बीएसए के लेखाधिकारी के सामने ही आत्मदाह का प्रयास किया था। वहा भी मामला पेशन और भत्तों के लिए रिश्वत मागने का था। हाल ही में सीतापुर के बीएसए को हेडमास्टर द्वारा बेल्ट से पीटे जाने का मामला सामने है। उसमे यह बात सामने आई थी कि स्कूल न आने वाली एक शिक्षिका की हाजिरी लगाने का दबाव उन पर बीएसए बना रहे थे।
मिलता है भ्रष्टाचार को बढ़ावा
इस बारे में प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय कहते हैं कि सिटीजन चार्टर और समय-समय पर विभागीय आदेश भी जारी होते रहे है। उनका पालन किया जाए और तय समय पर काम हो तो ये नौबत ही न आए। सिटीजन चार्टर और विभागीय ऐक्ट में हर काम की समय सीमा और प्रक्रिया तय है। मामले लम्बित होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
मामले लंवित न रखने के लिए स्पष्ट निर्देश है। इसकी समीक्षा भी की जाती है। फिर भी यदि कोई अधिकारी मामलों को लंवित रखता है या भ्रष्टाचार की शिकायत आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मोनिका रानी, डीजी-स्कूल शिक्षा
No comments:
Write comments