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Friday, August 21, 2026

सेमेस्टर और परीक्षा में देरी पर बताना होगा कारण, UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्र, सेमेस्टर, परीक्षा तय शेड्यूल के अनुसार करें

सेमेस्टर और परीक्षा में देरी पर बताना होगा कारण, UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्र, सेमेस्टर, परीक्षा तय शेड्यूल के अनुसार करें


नई दिल्ली। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अपना अकादमिक सत्र तय शेड्यूल के अनुसार चलाना होगा। शैक्षणिक सत्र 2026-27 को शुरू करने, सेमेस्टर और परीक्षा में देरी पर कारण बताना होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अकादमिक कैलेंडर के तहत अपना सत्र चलाने को कहा है।


यूजीसी का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के मनमाने रवैये से छात्रों को दिक्कत होती है। इसलिए अकादमिक सत्र में बदलाव होने पर संस्थानों को अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर उसकी जानकारी देनी होगी। यूजीसी ने छात्रों की शिकायत के बाद इस संबंध में सभी राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों को पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि अगस्त का आधा महीना बीत चुका है।

लेकिन कई उच्च शिक्षण संस्थानों में अभी तक दाखिला प्रक्रिया चल रही है। इसके कारण कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में सितंबर तक नियमित कक्षाएं शुरू नहीं हो पाएंगी। इससे सेमेस्टर सिस्टम भी प्रभावित होने से उसे आगे बढ़ा दिया जा रहा है। सेमेस्टर शुरू और समाप्त होने में देरी का असर परीक्षाओं में भी देखने को मिल रहा है।

इसके बाद रिजल्ट देरी से जारी किया जा रहा है। अगर कोई शिक्षण संस्थान अपने अकादमिक कैलेंडर में देरी के कारण बदलाव करता है तो फिर उसकी जानकारी संबंधित संस्थान की अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाए, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अगर कोई संस्थान अकादमिक सत्र में बदलाव करता है तो उसके कारण की रिपोर्ट यूजीसी को भी भेजी जाए।


दाखिले में देरी, पढ़ाई भी प्रभावित

दरअसल, छात्रों ने अपनी समस्या में लिखा है कि अकादमिक सत्र में देरी का असर उनके अगले दाखिले पर भी पड़ रहा है। इसके अलावा यूजी और पीजी डिग्री प्रोग्राम के साथ वे अन्य कोर्स साथ में करते हैं, उसकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

Sunday, June 28, 2026

शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन अब होगा निशुल्क, निर्देश जारी, UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए सख्त निर्देश

शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन अब होगा निशुल्क, निर्देश जारी, UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए सख्त निर्देश


नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी कर शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन निशुल्क करने को कहा है। अब कोई भी कॉलेज या विश्वविद्यालय सरकारी नौकरियों के लिए छात्रों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन से मना नहीं कर सकेगा।


यूजीसी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों के लिए शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता की जांच एक अनिवार्य शर्त है। पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद छात्रों को सत्यापन के लिए लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

इसी को देखते हुए अब सभी केंद्रीय, राज्य, मानित (डीम्ड) और निजी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी भर्ती एजेंसी द्वारा मांगे जाने पर शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि बिना किसी शुल्क के करें। आयोग का मानना है कि उम्मीदवारों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना सरकारी हितों के लिए आवश्यक है, इसलिए संस्थान इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग प्रदान करें।

Wednesday, June 10, 2026

30 जून तक अपलोड करने होंगे शैक्षिक रिकार्ड, UGC ने सभी विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश

30 जून तक अपलोड करने होंगे शैक्षिक रिकार्ड, UGC ने सभी विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश

 समय सीमा के बाद बंद हो जाएगा अपलोड विंडो, छात्रों को एबीसी सुविधा का मिलेगा लाभ


 लखनऊराष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में लचीली और बहुविषयक पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को परीक्षा वर्ष 2025 के विद्यार्थियों के शैक्षिक रिकार्ड 30 जून तक अनिवार्य रूप से नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी और एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) प्लेटफार्म पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए यूजीसी ने मंगलवार को सार्वजनिक सूचना जारी की है।

यूजीसी ने कहा है कि सभी क्रेडिट प्रदान करने वाले संस्थानों को छात्रों की मार्कशीट, ग्रेड शीट और संबंधित क्रेडिट डेटा को नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी और एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) प्लेटफार्म पर निर्धारित समयसीमा के भीतर अपलोड करना होगा। यह कार्य अपार आइडी के साथ किया जाएगा, जिससे छात्रों को क्रेडिट संचय, क्रेडिट ट्रांसफर, क्रेडिट रिडेम्पशन और अन्य छात्र-केंद्रित सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 29 मई को जारी पत्र व सात नवंबर 2024 के पूर्व निर्देशों के क्रम में जारी किए गए हैं। आयोग के अनुसार 30 जून की समयसीमा अंतिम होगी। इसके बाद परीक्षा वर्ष 2025 से संबंधित नए रिकार्ड अपलोड करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और अपलोड विंडो बंद कर दी जाएगी।

हालांकि, पहले से अपलोड किए गए रिकार्ड में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर केवल विशेष परिस्थितियों में और नैड-एबीसी प्रणाली के निर्धारित नियमों के अनुसार संशोधन की अनुमति दी जा सकेगी।


Friday, April 24, 2026

स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले, प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले

प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ-साथ शिक्षक शिक्षा में भी बड़ा बदलाव करने जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से एनसीईआरटी स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अपने डिग्री कार्यक्रम शुरू करेगा, जिनमें बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड कोर्स शामिल होंगे।

पहली बार स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षक बनने की पढ़ाई का पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इससे पहले इस पाठ्यक्रम की समीक्षा रिपोर्ट तैयार होगी और उसमें मौजूद कमियों को दूर किया जाएगा। इसके लिए एनसीईआरटी, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के साथ मिलकर काम करेगा। इन पाठ्यक्रमों में दाखिला एनसीटीई की ओर से आयोजित प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। इसके तहत एनसीईआरटी परिसर और छह अन्य कॉलेजों में सीटें उपलब्ध होंगी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्ताव पर एनसीईआरटी को 'डीम्ड टू-बी विश्वविद्यालय' का दर्जा दिया है। अब तक एनसीईआरटी बालवाटिका से कक्षा 12 तक के पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करता रहा है, लेकिन उसी आधार पर शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में एकरूपता नहीं थी।

नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार पर रहेगा फोकस नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार, पढ़ाने के तरीकों में बदलाव, खेल-आधारित शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और तकनीक आधारित शिक्षण को आसान बनाने के तरीकों पर शोध किया जाएगा।




एनसीईआरटी अब खुद देगा अपनी डिग्रियां

डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी अब खुद अपनी डिग्री दे सकेगा। साथ ही देश भर में उसके जो छह क्षेत्रीय संस्थान है, वह भी अपनी डिग्री दे सकेंगे। अभी तक एनसीईआरटी के क्षेत्रीय संस्थानों को डिग्री देने के लिए स्थानीय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेनी पड़ती थी। इन संस्थानों में अभी शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कोर्स संचालित किए जा रहे है। हालांकि इस दर्ज के बाद अब जल्द ही वह कुछ और नए कोर्स भी शुरू कर सकता है।


NCERT अब डीम्ड यूनिवर्सिटी, स्नातक से पीएचडी तक की मिलेगी डिग्री

शिक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी, एनसीईआरटी के छह संस्थान भी होंगे शामिल

04 अप्रैल 2026
नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) किताबें बनाने के साथ-साथ अब डिग्री, डिप्लोमा व पीएचडी की पढ़ाई भी कराएगी। केंद्र सरकार ने एनसीईआरटी को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी (मानद विश्वविद्यालय) का दर्जा दे दिया है। इसी हफ्ते इसकी अधिसूचना जारी होगी।

एनसीईआरटी के साथ उसके छह संस्थानों को भी इसमें शामिल किया गया है। इनमें राजस्थान के अजमेर, ओडिशा के भुवनेश्वर, कर्नाटक के मैसूर, मेघालय के शिलांग और मध्य प्रदेश के भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान है।

एनसीईआरटी अब तक सीबीएसई बोर्ड समेत राज्यों के लिए स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करती थी। नई व्यवस्था के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेगी। परिषद को कुछ सख्त शर्तों के साथ यह दर्जा मिला है, जिसमें संस्थान अपनी संपत्ति या फंड बिना सरकार और यूजीसी की अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकता।

एनसीईआरटी ने 2025 में सरकार को दी थी रिपोर्ट

यूजीसी ने 2023 में कुछ शर्तों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया था, जिसमें एनसीईआरटी को तीन साल में सभी शर्तों को पूरा करना था। एनसीईआरटी ने सरकार को 2025 में रिपोर्ट दी थी। इसके बाद, विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर यूजीसी ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

शोध पर होगा काम 
विश्वविद्यालय के रूप में एनसीईआरटी शोध पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करेगी। नए कोर्स, ऑफ कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस भी तय नियमों के तहत ही शुरू किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के दाखिले, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।





NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियों को किया पूरा, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन


10 जनवरी 2026
नई दिल्ली: स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्य पुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा। जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते हैं। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल हैं। 


शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे हैं, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। साथ ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।


एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का एलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है। एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है।


इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी। वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।

Sunday, April 5, 2026

UGC का निर्देश: उच्च शिक्षण संस्थान अब गोद लेंगे 5 से 6 आंगनबाड़ी केंद्र, छात्रों को इंटर्नशिप और शोध का मिलेगा मौका

UGC का निर्देश: उच्च शिक्षण संस्थान अब गोद लेंगे 5 से 6 आंगनबाड़ी केंद्र, छात्रों को इंटर्नशिप और शोध का मिलेगा मौका


नई दिल्ली। अब देश के प्रतिष्ठित संस्थान जैसे आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और विश्वविद्यालय अपने आसपास के पांच से छह आंगनबाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी उठाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 3-6 वर्ष के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा को मजबूत करने के लिए यह योजना तैयार की गई है।

दिल्ली में फरवरी में हुए मुख्य सचिवों के सम्मेलन में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी थी। अब यूजीसी ने सभी राज्यों और संस्थानों को इसके लिए पत्र लिखा है। इस पहल के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों को समाज कार्य, पोषण, जन स्वास्थ्य, बाल विकास और मनोविज्ञान जैसे विषयों में इंटर्नशिप, अकादमिक फील्डवर्क और शोध का अवसर मिलेगा।

इससे न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों को दीर्घकालिक मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी और व्यावसायिक अनुभव की भावना भी विकसित होगी। आगामी शैक्षणिक सत्र से इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा



UGC का निर्देश: विश्वविद्यालय अपनाएं आंगनवाड़ी केंद्र, सुधारें बच्चों की शिक्षा

यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने आसपास के 5-6 आंगनवाड़ी केंद्रों को अपनाने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी में बच्चों की बेहतर देखभाल और शिक्षा सुनिश्चित करना है।


नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश भर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से शैक्षणिक गतिविधियों के साथ अपने सामाजिक दायित्व को निभाने का भी सुझाव दिया है। इस दौरान प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेजों से अपने आसपास के कम से कम पांच से छह आंगनवाड़ी केंद्रों को अपनाने व उन्हें जरूरी सहयोग देने को कहा है।

देश में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हो रहे है, इनमें अधिकांश में बच्चों की बेहतर देखभाल और उन्हें पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक नहीं है। यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों को यह निर्देश तब दिए हैं, जब हाल ही में नीति आयोग की अगुवाई में हुए मुख्य सचिवों के सम्मेलन में आंगनवाड़ी की स्थिति को लेकर चिंता जताई।

साथ ही कहा गया कि एनईपी के तहत अभी इनमें तीन से छह वर्ष की उम्र तक के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्रों में योग्य व प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है। ऐसे में बच्चों को शुरूआत में ही अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। इसके बाद ही उच्च शिक्षण संस्थानों को सामाजिक दायित्व के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ने पर सहमति बनी थी।

इस दौरान यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से आंगनवाड़ी केंद्रों को अपनाने के साथ ही अपने छात्रों के जरिए इन केंद्रों से जुड़ी शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने, इंटर्नशिप प्रोग्राम से इन्हें जोड़ने व सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने जैसे पहल करने को कहा है। गौरतलब है कि देश में मौजूदा समय में एक हजार से अधिक विश्वविद्यालय व 45 हजार से अधिक कॉलेज है।

Monday, March 9, 2026

प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर रखे जायेंगे एक काउंसलर, पहले चरण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में व्यवस्था लागू होगी

प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर रखे जायेंगे एक काउंसलर, पहले चरण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में व्यवस्था लागू होगी

वित्तविहीन महाविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों में भी रखे जाएंगे

34 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वास्थ्य नीति के तहत


प्रयागराज। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर एक काउंसलर रखे जाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य नीति के तहत सरकार ने बजट में 34 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है। पहले चरण में 216 राजकीय और 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद वित्तविहीन महाविद्यालयों में काउंसलर की व्यवस्था की जाएगी। काउंसलर को निश्चित मानदेय दिया जाएगा।


सुकदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2025) में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रत्येक छात्र के लिए प्रमाणित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा बाह्य विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी कवायद शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य नीति का उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा, संवर्धन और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी है ताकि शैक्षिक संस्थानों में हर छात्र समावेशी, सुरक्षित और सहयोगी वातावरण में तनावमुक्त, आत्मनिर्भर एवं सकारात्मक रूप से विकसित हो सके।

काउंसलर की नियुक्ति से त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा एवं आकस्मिक सहायता तो मिलेगी ही उत्पीड़न, भेदभाव, रैगिंग, यौन हिंसा और असंवेदनशील व्यवहार के खिलाफ गोपनीय शिकायत और सहयोग की व्यवस्था भी होगी। अभिभावकों के लिए जागरूकता, साक्षरता व जीवन कौशल शिक्षा का समावेश भी करेंगे जिससे वे बच्चों पर अनुचित दबाव न डालें तथा मानसिक संकट को समझ सकें। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां, करियर काउसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास, सामर्थ्य व सकारात्मक मानसिकता का निर्माण होगा।



खास-खास

त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा, अस्पताल व आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन के लिए लिखित प्रोटोकॉल, टेली एवं मानस जैसे नंबर हर कक्षा, हॉस्टल, अन्य स्थलों एवं वेबसाइट पर प्रमुखता से लिखना होगा।

सभी शिक्षक, गैर-शिक्षक स्टाफ के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर साल में कम-से-कम दो बार प्रशिक्षण-मनोवैज्ञानिक फर्स्ट एड, चेतावनी संकेत पहचान आदि की व्यवस्था।

नियमित रूप से छात्रों व अभिभावकों दोनों के लिए पाठ्येतर गतिविधियां (खेल, कला, व्यक्तित्व विकास) व संरचित करियर काउंसलिग।

हॉस्टलों व आवासीय संस्थानों में छेड़छाड़, ड्रग्स, उत्पीड़न, टेम्पर-प्रूफ पंखे, छत/बालकनी की पहुंच नियंत्रित करने जैसे उपाय होंगे।

एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग व अन्य संवेदनशील छात्रों के लिए विशेष ध्यान, सहयोग व गैर भेदभावपूर्ण वातावरण, क्रियाशील आंतरिक शिकायत समिति/एंटी रैगिंग सेल।