प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर रखे जायेंगे एक काउंसलर, पहले चरण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में व्यवस्था लागू होगी
वित्तविहीन महाविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों में भी रखे जाएंगे
34 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वास्थ्य नीति के तहत
प्रयागराज। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर एक काउंसलर रखे जाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य नीति के तहत सरकार ने बजट में 34 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है। पहले चरण में 216 राजकीय और 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद वित्तविहीन महाविद्यालयों में काउंसलर की व्यवस्था की जाएगी। काउंसलर को निश्चित मानदेय दिया जाएगा।
सुकदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2025) में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रत्येक छात्र के लिए प्रमाणित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा बाह्य विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी कवायद शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य नीति का उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा, संवर्धन और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी है ताकि शैक्षिक संस्थानों में हर छात्र समावेशी, सुरक्षित और सहयोगी वातावरण में तनावमुक्त, आत्मनिर्भर एवं सकारात्मक रूप से विकसित हो सके।
काउंसलर की नियुक्ति से त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा एवं आकस्मिक सहायता तो मिलेगी ही उत्पीड़न, भेदभाव, रैगिंग, यौन हिंसा और असंवेदनशील व्यवहार के खिलाफ गोपनीय शिकायत और सहयोग की व्यवस्था भी होगी। अभिभावकों के लिए जागरूकता, साक्षरता व जीवन कौशल शिक्षा का समावेश भी करेंगे जिससे वे बच्चों पर अनुचित दबाव न डालें तथा मानसिक संकट को समझ सकें। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां, करियर काउसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास, सामर्थ्य व सकारात्मक मानसिकता का निर्माण होगा।
खास-खास
त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा, अस्पताल व आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन के लिए लिखित प्रोटोकॉल, टेली एवं मानस जैसे नंबर हर कक्षा, हॉस्टल, अन्य स्थलों एवं वेबसाइट पर प्रमुखता से लिखना होगा।
सभी शिक्षक, गैर-शिक्षक स्टाफ के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर साल में कम-से-कम दो बार प्रशिक्षण-मनोवैज्ञानिक फर्स्ट एड, चेतावनी संकेत पहचान आदि की व्यवस्था।
नियमित रूप से छात्रों व अभिभावकों दोनों के लिए पाठ्येतर गतिविधियां (खेल, कला, व्यक्तित्व विकास) व संरचित करियर काउंसलिग।
हॉस्टलों व आवासीय संस्थानों में छेड़छाड़, ड्रग्स, उत्पीड़न, टेम्पर-प्रूफ पंखे, छत/बालकनी की पहुंच नियंत्रित करने जैसे उपाय होंगे।
एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग व अन्य संवेदनशील छात्रों के लिए विशेष ध्यान, सहयोग व गैर भेदभावपूर्ण वातावरण, क्रियाशील आंतरिक शिकायत समिति/एंटी रैगिंग सेल।
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