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Wednesday, September 16, 2026

परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) अब डिजिटलीकरण की राह पर, यूपीटीईटी और डीएलएड की मार्कशीट अब एक क्लिक पर

परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) अब डिजिटलीकरण की राह पर, यूपीटीईटी और डीएलएड की मार्कशीट अब एक क्लिक पर

30 लाख से ज्यादा छात्रों को मिलेगी राहत, डिजिलॉकर में मिलेगी मार्कशीट


प्रयागराज। परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) खुद को डिजिटल करने जा रहा है। डीएलएड व यूपी-शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की मार्कशीट को अब विशेष सॉफ्टवेयर पर लाने की तैयारी चल रही है। छात्र अब एक क्लिक पर अपनी मार्कशीट आसानी से देख सकेंगे।


इसके अलावा मार्कशीट को डिजीलॉकर में भी अपलोड किया जाएगा। चयन आयोग व लोक सेवा आयोग समेत अन्य संस्थाओं को भी इससे बड़ी सहूलियत होगी। मार्कशीट के लिए उन्हें कोई पत्राचार करने की जरूरत नहीं होगी। सीधे वह सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह पता लगा सकेंगे कि मार्कशीट असली है या फर्जी।

वर्ष 2013 से 2021 तक की मार्कशीट- प्रमाण पत्र नए सॉफ्टवेयर पर अपलोड किए जाने हैं। नवंबर माह तक इस काम को पूरा करने का लक्ष्य पीएनपी की ओर से तय किया गया है। करीब 30 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा।

प्रदेश भर के डीएलएड व टीईटी के जो अभ्यर्थी मार्कशीट के लिए प्रयागराज स्थित पीएनपी का चक्कर लगाते हैं उन्हें भाग-दौड़ से राहत मिलेगी। विभिन्न विभागों की ओर से इन मार्कशीट के सत्यापन में भी महीनों का समय लग जाता है। मार्कशीट सत्यापन के लिए पीएनपी में भी पुराने रिकॉर्ड की तलाश होती है। ऐसे में सॉफ्टवेयर तैयार होने से आसानी से मार्कशीट के सत्यापन हो सकेंगे।


शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजा गया था। अनुमति मिलने के बाद नया सॉफ्टवेयर तैयार कराया जा रहा है। यूपी बोर्ड की तर्ज पर मार्कशीट को डिजिलॉकर में अपलोड किया जाएगा। इससे मार्कशीट के सत्यापन में सहूलियत होगी। वर्ष 2013 से 2021 तक की मार्कशीट को नए सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया जाएगा। - डॉ. राजेंद्र प्रताप, सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज


गोपनीयता के लिए पीएनपी के पास पहुंचेगा ओटीपी

यदि किसी संस्था की ओर से किसी छात्र की मार्कशीट का सत्यापन किया जाता है तो इसकी जानकारी सीधे पीएनपी को भी होगी। पीएनपी मुख्यालय में इसकी ओटीपी भी आएगी, इससे पीएनपी में यह रिकॉर्ड होगा कि किसके द्वारा किस छात्र की मार्कशीट का सत्यापन किया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर में गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है। कुछ समय पहले फर्जी टीईटी की मार्कशीट का मामला सामने आया था। इस व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर रोक लग सकेगी।

Monday, September 14, 2026

यूपीटीईटी पास 38.05 लाख, विज्ञापित पद सिर्फ 3.22 लाख, उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की तुलना में मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित

यूपीटीईटी पास 38.05 लाख, विज्ञापित पद सिर्फ 3.22 लाख,  उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की तुलना में मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित

वर्ष 2011 में पहली बार शुरू की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा


प्रयागराजप्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षक भर्ती को लेकर आंदोलन चल रहे हैं। प्रयागराज में भी लंबे समय से धरना और ज्ञापन का सिलसिला चल रहा है। कभी शिक्षा सेवा चयन आयोग तो कभी सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी या सिविललाइंस के धरना स्थल पर प्रतियोगी छात्रों की मांगों की गूंज सुनाई देती है। उनका कहना है कि नौकरियों के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। अब तक पदों का विज्ञापन कितना सीमित रहा, इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि वर्ष 2011 में पहली बार शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई गई। इसमें 270806 अभ्यर्थी सफल हुए। यदि इस वर्ष तक की परीक्षा के आंकड़े को जोड़ दें तो प्रदेश में कुल 3805377 प्रतियोगी छात्र छात्राओं ने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। 2011 से अब तक के पदों के विज्ञापन का कुल आंकड़ा देखें तो मात्र 321917 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए।


अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वालों और पदों के विज्ञापन के आंकड़े को देखें तो मात्र 8.46 प्रतिशत पद विज्ञापित हुए। इनमें भी बहुत से पदों को लेकर न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं। वर्ष 2013 में 102755 अभ्यर्थियों ने टीईटी पास की। इसमें 27882 प्राथमिक स्तर के, 74873 उच्च प्राथमिक के अभ्यर्थी रहे। 2014 में यह संख्या 184700 पहुंच गई। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के क्रमशः 71331 व 123369 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। 2015 में उत्तीर्ण 146415 अभ्यर्थियों में प्राथमिक के 59062 व उच्च प्राथमिक के 87353 रहे। वर्ष 2016, 2017, 2018 और 2019 में क्रमशः 75364, 94311, 574783 और 354703 अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफता प्राप्त की। 2021 में यह आंकड़ा 660592 रहा। 


इन सब के लिए शिक्षक बनने के अवसर पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2011 में प्राथमिक सतर पर बेसिक शिक्षा विभाग ने 72825 पदों का विज्ञापन जारी किया। 2012 में 9770 पद विज्ञापित हुए। 2013 में तीन बार पदों का विज्ञापन हुआ। एक बार 10800, दूसरी पर 10000 तीसी पर उर्दू के लिए 4280 पदों के विज्ञापन आए। 2015 में 15000, 2016 में उर्दू के 3500 पद और सामान्य शिक्षक भर्ती के 16448 और 12460 पदों का विज्ञापन जारी हुआ। 2018-19 में 69000 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आया। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान और गणित विषय की भर्ती का विज्ञापन भी 2013 में आया। उनकी संख्या 29334 रही।


 2018 के बाद से प्रतियोगी छात्र छात्राओं को भर्ती का इंतजार है। इसके लिए वे निरंतर आंदोलन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती के करीब 60000 पद रिक्त हैं। उधर, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है कि अभी नगर क्षेत्र के लिए 11500 शिक्षकों की भर्ती के लिए अधियान भेजा गया है, शेष के लिए प्रक्रिया चल रही है।

Thursday, September 10, 2026

यूपी टीईटी के संशोधित अंकपत्र 15 दिन में जारी करें: हाईकोर्ट, हाईकोर्ट ने विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर संशोधित अंकपत्र जारी करने का अतिरिक्त समय दिया

यूपी टीईटी के संशोधित अंकपत्र 15 दिन में जारी करें: हाईकोर्ट,  हाईकोर्ट ने विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर संशोधित अंकपत्र जारी करने का अतिरिक्त समय दिया


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी 2019) के विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर संशोधित अंकपत्र जारी करने का अतिरिक्त समय दिया है। वह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने अनुराधा एवं नौ अन्य की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर उनके अधिवक्ता संजय कुमार यादव व राजेश यादव को सुनकर दिया है।


मूल याचिकाओं में यूपी टीईटी 2019 की परीक्षा के पांच प्रश्नों प्रश्न संख्या 35 (हिंदी), 83 (संस्कृत), 124, 139 व 144 (पर्यावरण अध्ययन) के उत्तरों को लेकर विवाद उठाया गया था। याचियों का कहना था कि कुछ प्रश्नों में सभी विकल्प गलत होने के बावजूद एक विकल्प को सही घोषित किया गया जबकि कुछ अन्य प्रश्नों में गलत विकल्पों को सही माना गया। हाईकोर्ट ने पांच फरवरी 2024 के आदेश में कहा था कि प्रश्न संख्या 83 व 144 पर याचियों की आपत्तियां विषय विशेषज्ञों द्वारा सही मानी जा चुकी थीं और इन पर एक-एक अंक पहले ही दिया जा चुका था। 


कोर्ट ने निर्देश दिया था कि ये अंक सभी याचियों को नहीं मिले हैं तो दिए जाएं और नए सिरे से परिणाम घोषित किया जाए। वहीं प्रश्न संख्या 35, 124 व 139 के संदर्भ में कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति द्वारा जारी संशोधित उत्तरकुंजी में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। अवमानना याचिका पर सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से गत तीन सितंबर के निर्देश प्रस्तुत किए गए, जिनके अनुसार याचियों के अंक बढ़ाए जा चुके हैं और संशोधित अंकपत्र 15 दिन के भीतर जारी किया जाएगा। याचियों के अधिवक्ताओं ने इन तथ्यों पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद कोर्ट ने अवमानना याचिका निस्तारित कर दी।

Wednesday, August 26, 2026

विशेष UPTET के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शासन को भेजी कार्ययोजना

विशेष UPTET के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शासन को भेजी कार्ययोजना

कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी कराने का सरकार ने लिया है निर्णय, आदेश के बाद आयोग शुरू कर देगा प्रक्रिया

प्रयागराज : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण नियुक्त शिक्षकों के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट से अनिवार्य किए जाने के बाद प्रदेश सरकार के निर्णय के क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विशेष टीईटी का आयोजन को तैयार है। शासन के निर्देश पर आयोग ने इस संबंध में कार्ययोजना भेज दी है।


सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 के एक निर्णय में विद्यालयों में नियुक्त उन सभी शिक्षकों को दो वर्ष में टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया था, जिनकी सेवा पांच वर्ष से अधिक शेष थी। फिर इस वर्ष मई के अपने निर्णय में टीईटी उत्तीर्ण होने की अवधि एक वर्ष बढ़ा दी थी। यानी 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

 इस अवधि में उत्तीर्ण नहीं हो पाते, उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी। इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग जुलाई के प्रथम सप्ताह में सभी के शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया, जिसका परिणाम आना शेष है। इसमें बिना टीईटी उत्तीर्ण हुए नियुक्त 1.80 लाख से ज्यादा शिक्षक भी सम्मिलित हुए। 

इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी के आयोजन का निर्णय लिया था, जिसके क्रम में शासन ने आयोग से इस संबंध में कार्ययोजना मांगी थी। आयोग ने कार्ययोजना भेज दी है। जल्द निर्णय होने की संभावना है।

Tuesday, July 14, 2026

अब यूपीटीईटी में त्रुटिपूर्ण OMR में संशोधन हेतु लगी कतार, पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रार्थना पत्र भेजे

अब यूपीटीईटी में त्रुटिपूर्ण OMR में संशोधन हेतु लगी कतार, पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रार्थना पत्र भेजे


14 जुलाई 2026
प्रयागराज। दो से चार जुलाई तक आयोजित यूपीटीईटी के ओएमआर में गड़बड़ी करने वालों की अब चयन आयोग पर कतार लगने लगी है। किसी शरारती तत्व बिना किसी अधिकृत सूचना के सोशल मीडिया पर प्रत्यावेदन का प्रोफार्मा जारी कर ऐसे अभ्यर्थियों को चयन आयोग में प्रत्यावेदन देने की सलाह दे दी जिनके उत्तरपत्रक में गलती है। 

उसके बाद सोमवार को सैकड़ों अभ्यर्थियों ने लाइन में लगकर त्रुटिपूर्ण भरे गए ओएमआर (उत्तर पत्रक) के मूल्यांकन का अनुरोध किया। ई-मेल और पंजीकृत डाक से भी बड़ी संख्या में प्रत्यावेदन भेजे गए हैं। अब तक पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने चयन आयोग में स्वयं उपस्थित होकर या ई-मेल और डाक से प्रार्थना पत्र भेजे हैं।



टीईटी की ओएमआर शीट भरने में त्रुटि पर प्रत्यावेदन देने उमड़े अभ्यर्थी

प्रयागराजः उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) की उत्तरकुंजी जारी कर कोई विसंगति होने पर अभ्यर्थियों से साक्ष्य सहित प्रत्यावेदन मांगे हैं, लेकिन सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ओएमआर शीट पर विवरण भरने में त्रुटि हो जाने पर प्रत्यावेदन लेकर आयोग पहुंच गए। आयोग ने ऐसे अभ्यर्थियों के लिए कोई अवसर नहीं दिया है, लेकिन अभ्यर्थियों ने पहुंचकर काउंटर पर अपने प्रत्यावेदन देकर सुधार का अवसर दिए जाने की मांग की।

आयोग ने ओएमआर शीट भरने में किसी तरह की त्रुटि पर सुधार के लिए तो अवसर नहीं दिया, लेकिन किसी ने इंटरनेट मीडिया पर सूचना प्रसारित कर दी कि यदि किसी अभ्यर्थी से ओएमआर शीट भरने में कोई त्रुटि हो गई तो वह शिक्षा सेवा चयन आयोग पहुंचकर अपना आवेदन दे सकते हैं। इसके लिए बाकायदा एक प्रारूप भी इंटरनेट मीडिया पर जारी किया गया। 

अचानक प्रत्यावेदन लेकर अभ्यर्थियों के पहुंच जाने से आयोग के अधिकारी हैरान हो गए। पुलिस लगाकर अभ्यर्थियों को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं माने। ऐसे में आयोग के पूछताछ काउंटर पर अभ्यर्थियों ने अपने प्रत्यावेदन दिए। इसमें कुछ ने अनुक्रमांक गलत अंकित किए हैं तो किसी ने केंद्र का कोड गलत लिख दिया है। कुछ के विषय चयन में भी त्रुटि हुई है।

Sunday, May 31, 2026

सत्यापन में UPTET के 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध, नियमानुसार होगी कार्रवाई, सत्यापन की प्रक्रिया जारी, जिलों को भेजी जा रही रिपोर्ट

सत्यापन में UPTET के 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध, नियमानुसार होगी कार्रवाई, सत्यापन की प्रक्रिया जारी, जिलों को भेजी जा रही रिपोर्ट

नाम अथवा अन्य विवरणों में नियमानुसार होगा संशोधन

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक - पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के -प्रमाण पत्रों के सत्यापन में 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध पाए गए हैं। यह प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) द्वारा वर्ष 2011 से 2021 के बीच जारी किए गए थे। इनकी जांच जून 2025 से मई 2026 के बीच की गई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार शिकायतों के आधार पर गाजियाबाद, गोंडा, देवरिया, अमेठी, शामली, संभल, बलरामपुर, मैनपुरी, फिरोजाबाद, सीतापुर, मथुरा, गाजीपुर, भदोही, बलिया और लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों से भेजे गए मामलों की जांच की गई। जांच में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आई हैं।

पीएनपी के रजिस्ट्रार विजेंद्र सिंह का कहना है कि नाम अथवा अन्य विवरणों में संशोधन नियमानुसार ही किया जा सकता है। नियुक्ति प्राप्त करने के बाद किए जाने वाले संशोधन संबंधी मामलों की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर जांच की जाती है।

हाल ही में सीतापुर जनपद से सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए पीएनपी भेजे गए थे। जांच में सभी प्रमाणपत्र असत्य पाए गए। पीएनपी के अनुसार पांच शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुक्रमांक विभागीय अभिलेखों में आवंटित ही नहीं थे जबकि दो अन्य मामलों में प्रस्तुत अनुक्रमांक अन्य अभ्यर्थियों के नाम पर दर्ज पाए गए।

इस संबंध में जांच रिपोर्ट 26 फरवरी 2026 तथा 12 मई 2026 को संबंधित जिले को भेजी गई। इसी प्रकार गोंडा जनपद से भेजे गए पांच शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों में भी विसंगति सामने आई है। हालांकि संबंधित रिपोर्ट अभी जिले को प्रेषित किए जाने की प्रक्रिया में है।

वर्ष 2011 की यूपीटीईटी परीक्षा का आयोजन माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कराया था जबकि वर्ष 2013 से 2021 तक परीक्षा का संचालन उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) द्वारा किया गया। बाद में इस व्यवस्था का दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग को सौंप दिया गया। उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि जिलों से प्राप्त सत्यापन अनुरोधों के आधार पर प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है।

केस एक
देवरिया जिले के निवासी एक युवक की हाल ही में बिहार में  पर नौकरी लग अध्यापक पद गई। उसने अपने नाम में संशोधन कराने के लिए पीएनपी में संपर्क किया। जहां मना कर दिया गया तो उसने सीबीएसई बोर्ड में अपने नाम में संशोधन करा लिया। पीएनपी ने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया कि वह संशोधन नहीं कर सकते। क्योंकि नियुक्ति होने के पहले इन्होंने कोई संशोधन नहीं कराया।


केस दो
आजमगढ़ का एक युवक हाल ही पीएनपी कार्यालय में आवेदन दिया लड़की के नाम कि उसका नाम पर सर्टिफिकेट में दर्ज हो गया है। जिस युवती का उसने नाम बताया वह उसकी बहन ही थी। अधिकारियों को आशंका हुई कि वह अपनी बहन के सर्टिफिकेट में संशोधन कराकर नौकरी हासिल करने की जुगत में है। सीतापुर में एक मामले में ऐसे ही भाई- बहन फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी हासिल कर चुके थे।




TET प्रमाणपत्रों का सत्यापन किए बिना दे दी गई नियुक्ति, PNP ने ऑनलाइन अपलोड कराए हैं UPTET के परीक्षाफल

जब अनुक्रमांक आवंटित नहीं जिलों में सत्यापन पर प्रश्न

प्रयागराजः उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के कई प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) कार्यालय द्वारा किए गए सत्यापन में फर्जी मिलने से जिलों में किए गए अभिलेख सत्यापन पर प्रश्न उठे हैं। 


पीएनपी ने टीईटी का परीक्षाफल आनलाइन उपलब्ध कराने के साथ व्यवस्था दी है कि प्रमाणपत्रों का आनलाइन सत्यापन किया जा सकता है। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद की शिक्षक भर्तियों में कई जिलों में कुछ अभ्यर्थियों के टीईटी के प्रमाणपत्र पीएनपी के सत्यापन में तब फर्जी कूटरचित मिले, जब उन्हें नौकरी और वेतन पाते हुए महीनों/वर्ष बीत गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है नियुक्ति देने से पहले कराई गई काउंसलिंग में संबंधित के प्रमाणपत्रों का सत्यापन जिलों में नहीं किया गया।


यह प्रश्न देवरिया, आगरा, आजमगढ़, बलरामपुर, मुजफ्फरनगर, कौशांबी के बाद सीतापुर के सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों का पीएनपी कार्यालय में सत्यापन किए जाने के बाद उठा है। सीतापुर के मामले में पांच अभ्यर्थियों के टीईटी प्रमाणपत्र पर जो अनुक्रमांक अंकित है, वह पीएनपी ने आवंटित ही नहीं किए थे। इसी तरह दो अन्य ने जिस अनुक्रमांक का प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नौकरी पाई, वह पीएनपी ने उन्हें नहीं, बल्कि दो अन्य अभ्यर्थियों को आवंटित किए थे। ऐसे में यदि काउंसलिंग में सही ढंग से सत्यापन कराया गया होता तो उसी समय फर्जीवाड़ा सामने आ जाता। 


मामले में पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि टीईटी के परीक्षाफल आनलाइन उपलब्ध हैं। सत्यापन के संबंध में पूर्व में आदेश निर्गत है कि आनलाइन माध्यम से सत्यापन किया जा सकता है। यदि किसी मामले में संदिग्ध स्थिति मिलती है तो उसे पीएनपी कार्यालय भेजकर सत्यापन कराया जा सकता है। वर्ष 2011 से टीईटी का आयोजन शुरू हुआ। पहली टीईटी यूपी बोर्ड ने कराई थी। 2012 में टीईटी का आयोजन नहीं हुआ। वर्ष 2013 से यह आयोजन पीएनपी करा रहा था। अब इसके आयोजन का दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को दिया गया है।