स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं और कर दी कार्यालयों में मनमानी तैनाती, शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए the
10 अगस्त 2026
प्रयागराज । राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों की कमी के बावजूद हाल ही में पदोन्नत प्रधानाचार्यों की तैनाती मनमाने तरीके से स्कूल के बजाय बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कर दी गई है। यह स्थिति तब है जबकि शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए थे।
बीएसए, प्रधानाचार्य जीआईसी और समकक्ष पदों पर मई में पदोन्नति के बाद 30 जुलाई को जारी पदस्थापन आदेश में तमाम शिक्षकों को एससीईआरटी लखनऊ, राज्य शिक्षा संस्थान, कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थान, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान, राज्य हिंदी संस्थान, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान के अलावा यूपी बोर्ड में उपसचिव, सह जिला विद्यालय निरीक्षक, मंडलीय मनोवैज्ञानिक, विज्ञान प्रगति अधिकारी, मध्याह्न भोजन प्राधिकरण लखनऊ भेज दिया गया।
वहीं, राजकीय इंटर कॉलेज बार ललितपुर जहां 850 छात्र-छात्राएं हैं वहां न तो प्रधानाचार्य हैं और न कोई प्रवक्ता है। दो सहायक अध्यापक विद्यालय चला रहे हैं। यही हाल राजकीय इंटर कॉलेज कलिंजर बांदा का है। जहां 860 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यहां भी न तो प्रधानाचार्य हैं और न ही किसी विषय के प्रवक्ता, तीन सहायक अध्यापक तीन साल से यह विद्यालय चला रहे हैं।
राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश संरक्षक रामेश्वर पांडेय और छाया शुक्ला ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मनमानी तैनाती पर आपत्ति की है। मांग की है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता एवं शिक्षकों की नियुक्ति वरीयता के आधार पर करें और जिन क्लास टू अफसरों का पदस्थापन विभिन्न संस्थानों में किया गया है उसे निरस्त किया जाए। उन्हें प्रदेश के खाली राजकीय विद्यालयों में नियुक्त किया जाए। यदि एक सप्ताह के अंदर उक्त कार्यवाही नहीं हुई तो बाध्य होकर राजकीय शिक्षक संघ उच्च न्यायालय में वाद दाखिल करेगा।
विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली, विभागों में भेजे अधिकारी, शिक्षक संघ ने आरोप लगाते हुए समूह ख अधिकारियों की पदस्थापना सूची को तत्काल रद्द करने की मांग की
7लय अगस्त 2026
लखनऊ। राजकीय शिक्षक संघ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसमें नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। साथ ही 30 जुलाई को जारी समूह ख अधिकारियों की पदस्थापना सूची को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
महामंत्री संघ के प्रांतीय सत्यशंकर मिश्रा व प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय ने कहा है कि पुरुष शिक्षकों को बालक विद्यालयों में और महिला शिक्षकों को बालिका विद्यालयों में तैनात किया जाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन नियमों का उल्लंघन किया है। पुरुष को बालिका विद्यालयों में और महिला अधिकारियों को बालक विद्यालयों में तैनात किया गया है। यह पूरी तरह गलत है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के काफी राजकीय बालक और बालिका विद्यालय प्रधानाचार्य विहीन हैं। इसके बावजूद समूह ख की पदोन्नति पाए कई अधिकारियों को विद्यालयों की जगह कार्यालयों में भेजा गया है। इनमें ऐसे कार्यालय भी शामिल हैं, जहां कोई खास काम तक नहीं है। संघ का आरोप है कि इससे राजकीय इंटर कॉलेजों में पठन-पाठन में सुधार नहीं हो पा रहा है।
छात्र-छात्राओं के नामांकन में भी वृद्धि नहीं हो रही है। राजकीय शिक्षक संघ ने पदस्थापना सूची की समीक्षा की मांग की है। संघ ने नियम विपरीत किए गए सभी तैनाती को तत्काल निरस्त करने को कहा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे। इसकी पूरी जवाबदेही शासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की होगी।