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Wednesday, September 2, 2026

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर बड़ा फैसला, कक्षा 6 से 8 की पढ़ाई वाले स्कूलों में आदेश निरस्त

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर बड़ा फैसला, कक्षा 6 से 8 की पढ़ाई वाले स्कूलों में आदेश निरस्त


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के स्थानांतरण/समायोजन को लेकर शिक्षा निदेशालय ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शासनादेश के तहत वर्ष 2026-27 के लिए चिन्हित सरप्लस शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं के स्थानांतरण/समायोजन की प्रक्रिया में संशोधन किया गया है।

जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरप्लस की गणना के लिए निर्धारित मानकों में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाओं को भी ध्यान में रखा जाना है। ऐसे राजकीय माध्यमिक विद्यालय, जहां कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाएं संचालित नहीं होती हैं, उन्हें यथास्थिति बनाए रखा जाएगा।

वहीं, जिन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाएं संचालित हैं, वहां सरप्लस शिक्षकों की गणना RTE के निर्धारित मानकों के अनुसार की जाएगी और इस क्रम में आदेश रद्द किया जाएगा।  शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) ने सभी संबंधित अधिकारियों को शासनादेश के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति फाइल नहीं लटकेगी, फाइल पर निदेशक को अधिकतम 30 दिन में लेना होगा निर्णय, समर्थ पोर्टल पर यह प्रक्रिया 90 दिन में होगी पूरी

राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति फाइल नहीं लटकेगी, फाइल पर निदेशक को अधिकतम 30 दिन में लेना होगा निर्णय, समर्थ पोर्टल पर यह प्रक्रिया 90 दिन में होगी पूरी


लखनऊ। राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति की फाइल अब बेवजह लटकाई नहीं जा सकेगी। उच्च शिक्षा निदेशक को शिक्षक के प्रोन्नति की फाइल पर अधिकतम 30 दिनों में निर्णय लेना होगा। 


अभी तक निदेशालय में लंबे समय तक फाइलें लटकाने के चलते शिक्षकों को दौड़ भाग करनी पड़ती थी। अब उन्हें बड़ी राहत मिल गई है। अभी तक राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की समर्थ पोर्टल पर करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत शिक्षक पदोन्नति के लिए आवेदन करता है तो पहले कॉलेज की इंटरनल क्वॉलिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के पास आवेदन जाता है। वह उसकी जांच कर आगे प्राचार्य को ऑनलाइन ही पोर्टल पर रिपोर्ट बढ़ा देती है। 

फिर प्राचार्य कमेटी का गठन कर प्रोन्नति की प्रक्रिया को पूरा करता है। यह प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी होती है। फिर यहां से निदेशालय को शिक्षक की प्रोन्नति के लिए प्रस्ताव भेज दिया जाता है। अब निदेशक के पास शिक्षकों की पदोन्नति की फाइल जाने पर उन्हें 30 दिनों में निर्णय लेना होगा। 

निदेशक को अब अधिकतम 30 दिनों में इस पर निर्णय लेना होगा। समर्थ पोर्टल पर शिक्षक प्रोन्नति की पूरी प्रक्रिया 90 दिनों में पूरी हो जाएगी। फिलहाल, इस निर्णय से 212 राजकीय डिग्री कॉलेजों व 331 एडेड डिग्री कॉलेजों के करीब 16 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिल गई है।

Sunday, August 30, 2026

26 राजकीय बेसिक विद्यालय बंद, संचालित 42 स्कूलों में 39 शिक्षक, राजकीय बेसिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त नहीं होने से व्यवस्था बेपटरी

26 राजकीय बेसिक विद्यालय बंद,  संचालित 42 स्कूलों में 39 शिक्षक, राजकीय बेसिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त नहीं होने से व्यवस्था बेपटरी

प्रदेश के कुल 68 विद्यालयों में 44 शिक्षक विहीन, शिक्षक युक्त विद्यालयों की संख्या 24

प्रयागराज : पठन-पाठन बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में राजकीय बेसिक विद्यालय स्थापित तो किए गए, लेकिन आज स्कूल से लेकर शिक्षक व विद्यार्थियों तक को ढूंढ़ना पड़ेगा। स्थिति यह है कि कुल स्थापित 68 विद्यालयों में 26 बंद हो गए हैं। जो 42 संचालित हैं, उनमें विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 39 शिक्षक हैं। 1990 के बाद शिक्षकों की नियुक्ति इस संवर्ग के विद्यालयों में नहीं होने से स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती गई, जिसका परिणाम यह है कि इनके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है कि ये संचालित ही क्यों हैं? सोमवार को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक/बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा की विभागीय समीक्षा बैठक में राजकीय बेसिक विद्यालयों की बदहाली का विषय भी उठ सकता है।


बालिका वर्ग, 23 सह शिक्षा प्रदेश में स्थापित कुल 68 विद्यालयों में तीन बालक वर्ग, 41 विद्यालय तथा एक विद्यालय कंपोजिट था। पिछले वर्ष इन विद्यालयों की स्थिति का आकलन शिक्षा निदेशालय ने कराया तो चिंताजनक तस्वीर सामने आई। इनमें कोई बालक विद्यालय संचालित नहीं मिला। यानी तीनों बंद हैं। इसके अलावा बालिका वर्ग के 21 तथा सह शिक्षा के 21 विद्यालय संचालित मिले। इस तरह कुल 44 विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं, जबकि 24 विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती है। संचालित विद्यालयों में 243 छात्राएं व 1017 बालक पंजीकृत हैं।

जिन विद्यालयों में विद्यार्थी पंजीकृत हैं, वहां शिक्षकों को संबद्ध करके काम चलाया जा रहा है। स्थिति यह है कि मऊ जिले में स्थित राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय में 32 छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन कोई शिक्षक नहीं हैं। राजकीय कन्या सीनियर बेसिक विद्यालय नगर क्षेत्र बांदा में भी ऐसा ही है। यहां 13 बालक व आठ बालिका तो पंजीकृत हैं, लेकिन शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। आगरा के राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल बाह में तीन बालक और तीन बालिका को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक नियुक्त हैं। ऐसे ही मेरठ के राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल रोहटा में पंजीकृत पांच बालिकाओं के लिए एक शिक्षक की तैनाती है।

Monday, August 10, 2026

स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं और कर दी कार्यालयों में मनमानी तैनाती, शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए थे

स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं और कर दी कार्यालयों में मनमानी तैनाती, शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए the

10 अगस्त 2026
प्रयागराज । राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों की कमी के बावजूद हाल ही में पदोन्नत प्रधानाचार्यों की तैनाती मनमाने तरीके से स्कूल के बजाय बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कर दी गई है। यह स्थिति तब है जबकि शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए थे।

 बीएसए, प्रधानाचार्य जीआईसी और समकक्ष पदों पर मई में पदोन्नति के बाद 30 जुलाई को जारी पदस्थापन आदेश में तमाम शिक्षकों को एससीईआरटी लखनऊ, राज्य शिक्षा संस्थान, कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थान, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान, राज्य हिंदी संस्थान, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान के अलावा यूपी बोर्ड में उपसचिव, सह जिला विद्यालय निरीक्षक, मंडलीय मनोवैज्ञानिक, विज्ञान प्रगति अधिकारी, मध्याह्न भोजन प्राधिकरण लखनऊ भेज दिया गया।

वहीं, राजकीय इंटर कॉलेज बार ललितपुर जहां 850 छात्र-छात्राएं हैं वहां न तो प्रधानाचार्य हैं और न कोई प्रवक्ता है। दो सहायक अध्यापक विद्यालय चला रहे हैं। यही हाल राजकीय इंटर कॉलेज कलिंजर बांदा का है। जहां 860 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यहां भी न तो प्रधानाचार्य हैं और न ही किसी विषय के प्रवक्ता, तीन सहायक अध्यापक तीन साल से यह विद्यालय चला रहे हैं। 

राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश संरक्षक रामेश्वर पांडेय और छाया शुक्ला ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मनमानी तैनाती पर आपत्ति की है। मांग की है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता एवं शिक्षकों की नियुक्ति वरीयता के आधार पर करें और जिन क्लास टू अफसरों का पदस्थापन विभिन्न संस्थानों में किया गया है उसे निरस्त किया जाए। उन्हें प्रदेश के खाली राजकीय विद्यालयों में नियुक्त किया जाए। यदि एक सप्ताह के अंदर उक्त कार्यवाही नहीं हुई तो बाध्य होकर राजकीय शिक्षक संघ उच्च न्यायालय में वाद दाखिल करेगा।



विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली, विभागों में भेजे अधिकारी, शिक्षक संघ ने आरोप लगाते हुए समूह ख अधिकारियों की पदस्थापना सूची को तत्काल रद्द करने की मांग की

7लय अगस्त 2026
लखनऊ। राजकीय शिक्षक संघ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसमें नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। साथ ही 30 जुलाई को जारी समूह ख अधिकारियों की पदस्थापना सूची को तत्काल रद्द करने की मांग की है।


महामंत्री संघ के प्रांतीय सत्यशंकर मिश्रा व प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय ने कहा है कि पुरुष शिक्षकों को बालक विद्यालयों में और महिला शिक्षकों को बालिका विद्यालयों में तैनात किया जाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन नियमों का उल्लंघन किया है। पुरुष को बालिका विद्यालयों में और महिला अधिकारियों को बालक विद्यालयों में तैनात किया गया है। यह पूरी तरह गलत है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के काफी राजकीय बालक और बालिका विद्यालय प्रधानाचार्य विहीन हैं। इसके बावजूद समूह ख की पदोन्नति पाए कई अधिकारियों को विद्यालयों की जगह कार्यालयों में भेजा गया है। इनमें ऐसे कार्यालय भी शामिल हैं, जहां कोई खास काम तक नहीं है। संघ का आरोप है कि इससे राजकीय इंटर कॉलेजों में पठन-पाठन में सुधार नहीं हो पा रहा है।

छात्र-छात्राओं के नामांकन में भी वृद्धि नहीं हो रही है। राजकीय शिक्षक संघ ने पदस्थापना सूची की समीक्षा की मांग की है। संघ ने नियम विपरीत किए गए सभी तैनाती को तत्काल निरस्त करने को कहा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे। इसकी पूरी जवाबदेही शासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की होगी।

Sunday, July 12, 2026

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादलों पर हाईकोर्ट की रोक

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादलों पर हाईकोर्ट की रोक

कोर्ट ने आरटीई एक्ट के उल्लंघन पर जताई नाराजगी, कहा- पुराने आश्वासन तोड़ रही है सरकार

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले और उन्हें सरप्लस (अतिरिक्त) घोषित करने की राज्य सरकार की नीति पर नाराजगी जताई है। साथ ही 2026 की तबादला नीति के उस हिस्से और उसके आधार पर जारी स्थानांतरण आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जो शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 का उल्लंघन करते हैं।


इसके साथ ही प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने विपिन कुमार आर्य की याचिका पर दिया। याची की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक जून 2026 को स्थानांतरण संबंधी गाइडलाइन जारी की थी। इसमें सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए 20 नवंबर 1976 के शासनादेश को आधार बनाया गया। जबकि, यह व्यवस्था आरटीई अधिनियम में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुरूप नहीं है। इसी नीति के आधार पर याची को सरप्लस घोषित करते हुए 30 जून को प्रयागराज राजकीय इंटर कॉलेज से स्थानांतरित कर दिया गया।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2017 में राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर आश्वासन दिया था कि भविष्य में आरटीई अधिनियम के अनुसार नई स्थानांतरण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 



एक ही पद पर कर दी गई दो-दो शिक्षकों की तैनाती, राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ पहले से तबादले में लगा रहा गड़बड़ी के आरोप

संघ ने सरप्लस शिक्षकों को अपने ही विद्यालय में रखने की उठाई मांग

लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों की घोषणा व उनकी तैनाती में पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। हालत यह है कि विभाग ने एक ही पद पर दो-दो शिक्षकों की तैनाती तक कर दी है। इसे लेकर राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ पहले से गड़बड़ी के आरोप लगा रहा है। वहीं अब इस मामले में हाईकोर्ट ने भी प्रयागराज के कुछ शिक्षकों को राहत दी है।

राजकीय शिक्षक संघ ने बताया कि राजधानी के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, विकास नगर में अंग्रेजी शिक्षक का एक पद है। जबकि 30 जून को जारी आदेश में यहां पर दो दो शिक्षकों की तैनाती की गई है।

इससे पहले संघ ने कहा था कि वैकल्पिक विषय के शिक्षकों (वाणिज्य) को जहां भेजा गया है, वहां वाणिज्य का पद ही नहीं है। इतना ही नही कहीं-कहीं एक भी छात्र नहीं है। इसके विपरीत जहां से शिक्षकों को हटाया जा रहा है, वहां पर पद भी स्वीकृति है तथा छात्र संख्या भी पर्याप्त है। संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय व प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने कहा है कि विभाग ने सरप्लस शिक्षकों की गलत व मनमानी व्याख्या की है। ऐसे में उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय शिक्षक हित में है। ऐसे में सरप्लस घोषित शिक्षकों को उनको अपने ही विद्यालय में रखा जाए, उनका तबादला न किया जाए।


281 शिक्षकों का सामान्य तबादला

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सरप्लस शिक्षकों के अतिरिक्त 281 सामान्य शिक्षकों का भी हाल ही में तबादला किया है। इसमें 73 प्रवक्ता पुरुष, सहायक अध्यापक पुरुष 208 व महिला 125 कुल 281 शिक्षकों का तबादला किया गया है। यह तबादला निर्धारित गुणांक के आधार पर शिक्षकों के आवेदन पर किया गया था। बता दें कि पूर्व में विभाग सरप्लस 271 का तबादला किया था।


Saturday, May 30, 2026

राजकीय महाविद्यालयों के 91 शिक्षकों का ऑनलाइन तबादला

राजकीय महाविद्यालयों के 91 शिक्षकों का ऑनलाइन तबादला
उच्च शिक्षा मंत्री ने पोर्टल पर बटन दबाकर किए तबादले

30 मई 2026
लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के ऑनलाइन स्थानांतरण उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शुक्रवार को किया। मंत्री ने ऑनलाइन स्थानांतरण पोर्टल पर बटन दबाकर तबादला जारी किया। इसके तहत कुल 91 शिक्षकों को तबादला मिला जिनकी सूची उच्च शिक्षा निदेशालय के पोर्टल पर अपलोड की गई है।

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन स्थानांतरण प्रक्रिया के अंतर्गत राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के कुल 193 शिक्षकों ने आवेदन किया था। इनमें से प्राचार्यों द्वारा 116 आवेदन अनुमोदित किए गए। जबकि 70 आवेदन अपूर्ण पाए जाने के कारण निरस्त कर दिए गए। सभी आवेदन के परीक्षण व अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल 91 शिक्षकों के स्थानांतरण ऑनलाइन पोर्टल से किए गए।

उन्होंने बताया कि ऑनलाइन स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित शिक्षकों को एसएमएस से भी सूचना भेजी गई। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि तबादला प्रक्रिया पारदर्शी व तकनीकी आधारित हुई है। वहीं इस तबादला सूची में भी लखीमपुर खीरी जैसे कुछ जरूरत वाले कॉलेजों में शिक्षकों के तैनात न होने पर उच्च शिक्षा निदेशक ने कहा कि वहां पर ऑफलाइन तबादला कर शिक्षकों को भेजा जाएगा। 




राजकीय महाविद्यालयों के 230 प्रवक्ताओं का तबादला, उच्च शिक्षा विभाग ने कहीं पूरी की जरूरत, कहीं अभी बाकी

कम प्रवेश वाले महाविद्यालयों पर भी चला है डंडा


24 मई 2026
लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग ने शनिवार देर रात महाविद्यालयों के 230 प्रवक्ताओं राजकीय का तबादला किया है। इसमें उच्च शिक्षा विभाग ने जहां जरूरत वाले कुछ महाविद्यालयों में तैनाती की है तो कुछ अभी बाकी हैं। वहीं कम प्रवेश वाले राजकीय महाविद्यालयों पर भी शासन का डंडा चला है।


प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की सख्ती के बाद छात्र संख्या बढ़ाने के लिए लगातार बैठकें व दौरे चल रहे हैं। इस बीच राजकीय महाविद्यालयों में जरूरत के अनुसार शिक्षकों की तैनाती न होने का भी मामला संज्ञान में आया था। इसे देखते हुए पिछले दिनों विभाग ने सभी शिक्षकों की संबद्धता निरस्त कर दी थी।

जबकि तबादला नीति जारी होने के बाद शनिवार को 230 प्रवक्ताओं की तबादला सूची जारी की गई। इसके तहत कम छात्र संख्या वाले राजकीय महाविद्यालय निहस्था, रायबरेली से चार शिक्षकों का तबादला किया गया है। वहीं सोनभद्र के अलग-अलग राजकीय महाविद्यालयों में आधा दर्जन शिक्षकों की तैनाती की गई है। हालांकि लखीमपुर खीरी के अच्छी छात्र संख्या वाले कॉलेज को इसमें भी शिक्षक नहीं मिले हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी की ओर से तबादला सूची जारी करते हुए शिक्षकों को तत्काल नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए उन्हें किसी तरह का अवकाश नहीं दिया जाएगा।