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Wednesday, January 3, 2024

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के जनवरी सत्र में प्रवेश शुरू, 29 फरवरी तक प्रवेश का मौका

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के जनवरी सत्र में प्रवेश शुरू,  29 फरवरी तक प्रवेश का मौका

कुलपति ने किया ऑनलाइन प्रवेश का शुभारंभ

124 कार्यक्रमों में 29 फरवरी तक प्रवेश का मौका


प्रयागराज । उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के सत्र जनवरी 2024 में ऑनलाइन प्रवेश मंगलवार से शुरू हो गया। कुलपति प्रो. सीमा सिंह ने ऑनस्पॉट प्रवेश लेने वाले एमए हिन्दी के छात्र घनश्याम यादव को शुभकामनाएं दी। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय ने जनवरी सत्र से छह नए डिप्लोमा कार्यक्रम प्रोडक्शन एंड ऑपरेशन मैनेजमेंट, मार्केटिंग मैनेजमेंट, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजिक एंड एंटरप्रेन्योरियल बिजनेस मैनेजमेंट शुरू किया है।


कुलपति प्रो. सीमा सिंह ने बताया कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया प्रदेश के सभी 12 क्षेत्रीय केंद्रों से सम्बद्ध लगभग 1400 अध्ययन केंद्रों पर शुरू की गई है जो 29 फरवरी तक चलेगी। प्रो. सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार पाठ्यक्रमों से विश्वविद्यालय के छात्र लाभान्वित होंगे। जनवरी सत्र में 22 परास्नातक, 08 स्नातक, 28 डिप्लोमा, 52 सर्टिफिकेट एवं 14 जागरूकता कार्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा। इस तरह विश्वविद्यालय ने जनवरी सत्र में 124 कार्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की है।


एक लाख प्रवेश का लक्ष्य

कुलपति प्रो. सीमा सिंह के अनुसार सत्र जुलाई 2023-24 में कुल 71 हजार प्रवेश हुए थे और जनवरी सत्र में एक लाख का आंकड़ा पार करने का लक्ष्य रखा गया है। ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रवेश पोर्टल पर सुधार किए गए हैं जिससे प्रवेशार्थी आसानी से सभी प्रविष्टियां पूर्ण कर सकें। उन्होंने सभी अध्ययन केंद्र समन्वयकों को निर्देशित किया कि शिक्षार्थियों के प्रवेश फार्म को त्वरित गति से सत्यापित करते हुए विवि भेजें जिससे उनकी पाठ्य सामग्री सही समय पर पहुंचाई जा सके। जिससे शिक्षार्थियों काँ सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षाओं से पूर्व पढ़ाई का उचित अवसर प्रदान होगा। विश्वविद्यालय स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से छात्रों को उनके विषय से संबंधित विद्वानों के लेक्चर मुहैया करा रहा है।

Sunday, October 1, 2023

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में 20 अक्तूबर तक प्रवेश

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में 20 अक्तूबर तक प्रवेश


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के सत्र जुलाई 2023- 24 के प्रवेश की अंतिम तिथि 20 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई है।


कुलसचिव कर्नल विनय कुमार के अनुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो ने जुलाई सत्र की प्रवेश तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 20 अक्तूबर तक कर दी है। कुलपति प्रो. सीमा सिंह का कहना है कि प्रवेश तिथि बढ़ने से विश्वविद्यालय की छात्र संख्या में आशातीत वृद्धि होगी।

प्रवेश प्रभारी प्रोफेसर जेपी यादव ने बताया कि जुलाई सत्र में प्रवेश की शनिवार को अंतिम तिथि होनें से विश्वविद्यालय के सर्वर पर काफी दबाव बना रहा। प्रवेश कीं अंतिम तिथि बढ़ने से प्रवेशार्थियों को मौका मिला है।

Friday, June 24, 2022

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पढ़ाई अब महंगी हुई

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पढ़ाई अब महंगी हुई 


प्रयागराज : सूबे के इकलौते उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पढ़ाई अब महंगी हो गई है। नए शैक्षिक सत्र में दाखिला लेने वालों को बढ़ी फीस भरनी होगी।


एक ओर जहां पीएचडी (शोध करने) की फीस दोगुनी हो गई है, वहीं स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों के शुल्क में 12 से 21 फीसदी तक इजाफा किया गया है। नए शैक्षिक सत्र में पीएचडी, बीएड, एमसीए और एमबीए में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यूजी, पीजी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन 25 जून से शुरू करने की तैयारी है। इस बार मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से शैक्षिक सत्र 2022-23 में पीएचडी, डिग्री, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट समेत 126 पाठ्यक्रमों में प्रवेश होंगे।



पीएचडी की फीस 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये वार्षिक कर दी गई है। एमबीए का शुल्क 16,200 से बढ़ाकर 18,200 (12.3 फीसद बढ़ोतरी) और एमसीए का 15,200 से बढ़ाकर 17,200 (13.15 फीसद बढ़ोतरी) किया गया है। इसी प्रकार बीएड की फीस 16,200 से बढ़ाकर 18,500 रुपये (14.2 फीसद इजाफा) की गई है। बीए की फीस 3700 से 4500 (21.6 फीसद का इजाफा) और एमए की 7200 से 8500 रुपये (18 फीसद बढ़ोतरी) सालाना की गई है। छात्रों को इसी साल से बढ़ी फीस जमा करनी होगी।


 डिप्लोमा कोर्स की नहीं बढ़ी फीस
 
मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से डिप्लोमा करने वाले छात्रों के लिए राहत है। क्योंकि डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का शुल्क नहीं बढ़ाया गया है।


कार्य परिषद से मंजूरी के बाद पीएचडी, यूजी, पीजी कोर्स की फीस बढ़ा दी गई है। डिप्लोमा का शुल्क यथावत है।
डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव, प्रवेश प्रभारी, मुक्त विश्वविद्यालय

Tuesday, August 25, 2020

राजर्षि टण्डन मुक्त विवि में 12 साल बाद पीएचडी को हरी झंडी

राजर्षि टण्डन मुक्त विवि में 12 साल बाद पीएचडी को हरी झंडी

 

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से 12 साल बाद फिर पीएचडी की जा सकेगी। राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कुलपति से चर्चा के बाद हरी झंडी दे दी है। कार्यपरिषद से भी मंजूरी मिल गई है। सितंबर से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के आसार हैं।


वर्ष 2008 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पीएचडी संबंधी अध्यादेश की वजह से विश्वविद्यालय में प्रवेश बंद था। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने इसे शुरू कराने की पहल की। प्रस्ताव को कुलाधिपति तथा प्रदेश सरकार की अनुमति मिलने के बाद कार्यपरिषद की बैठक में रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई। नए शैक्षिक सत्र में शिक्षाशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, कंप्यूटर विज्ञान, एग्रीकल्चर, हेल्थ साइंस, कॉमर्स, मैनेजमेंट, हिंदी, संस्कृत और पत्रकारिता में पीएचडी की जा सकेगी।


संस्थान के शिक्षक ही होंगे निदेशक: पूर्व में शोध निदेशक, बाहरी होते थे। अतएव शोध भी बाहर कराए जाते थे। यहां शोधाíथयों को थीसिस जमा करनी होती थी। सिर्फ डिग्री अवार्ड होती थी। नए रेगुलेशन के तहत प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा और मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षक ही निदेशक होंगे।


आरडीसी में तय होंगे शोध निदेशक: मुविवि उन्हीं विषयों में पीएचडी कराएगा, जिसमें शिक्षक होंगे। सबसे पहले शोध निदेशक का नाम स्कूल बोर्ड प्रस्तावित करेगा। फिर रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) मुहर लगाएगी। आरडीसी में बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल होगा। इसके बाद एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद की मंजूरी मिलने पर संख्या के अनुसार विषयवार रिक्तियां निकाली जाएंगी। प्रोफेसर को आठ, रीडर को छह और लेक्चरर को चार लोगों को पीएचडी कराने की अनुमति रहेगी।


प्री-पीएचडी अनिवार्य

पीएचडी से पहले आवेदक को इसके लिए परीक्षा में सफल होना पड़ेगा। इसके बाद मेरिट और निर्धारित आरक्षण के आधार पर रजिस्ट्रेशन होगा। शोध के दौरान छह माह की प्री पीएचडी भी अनिवार्य होगी।

पीएचडी के लिए नए सत्र में आवेदन मांगे जाएंगे। आरडीसी की बैठक में शोध निदेशक तय होने के बाद आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी।