DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label लखनऊ. Show all posts
Showing posts with label लखनऊ. Show all posts

Saturday, July 4, 2020

माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर

माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर


राज्य मुख्यालय : फर्जी शिक्षकों की भर्ती का शोर अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग तक ही सीमित है जबकि राजकीय इंटर और सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी बहुत बड़ी संख्या में नियुक्तियां हुई हैं। एलटी ग्रेड में 2014 में हुई 6645 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया इसी फर्जीवाड़े के चलते ही पूरी नहीं हो पाई थी। हालांकि यहां जांच के आदेश हो चुके हैं लेकिन अभी इसमें तेजी नहीं आई है। 


सभी मंडलीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सहायताप्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के प्रमाणपत्र वे अपने पास रख लें। अभी ये प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन के पास हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सत्यापन की कार्रवाई शुरू होगी। वहीं राजकीय इंटर कॉलेजों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर मौजूद हैं। वहां से भी सत्यापन किया जा रहा है। हालांकि माध्यमिक शिक्षा में फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर पहले से ही है लेकिन इसके लिए कोई पुख्ता प्रयास नहीं किए गए। 



2014 में 6645 पदों पदों के लिए 27 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे क्योंकि उस समय मंडलवार आवेदन लिए जाते थे लेकिन भर्ती के बाद जैसे ही सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई उसमें फर्जी प्रमाणपत्र सामने आने लगे। ज्यादातर मंडलों में 60 से 65 फीसदी चयनितों के प्रमाणपत्र फर्जी निकले थे। इस भर्ती में 2 हजार के आासपास पद ही भर पाएं लेकिन 2016 में इस पर रोक लगा दी गई। इसके बाद ही एलटी ग्रेड भर्ती को लोक सेवा आयोग को देने का फैसला लिया गया।

Friday, July 3, 2020

लखनऊ : बाबूगीरी में लगे शिक्षकों पर होगी कार्रवाई, बीएसए ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के दिए निर्देश

लखनऊ : बाबूगीरी में लगे शिक्षकों पर होगी कार्रवाई, बीएसए ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के दिए निर्देश।

सख्ती

लखनऊ : छात्रों को कक्षा में पढ़ाने के बजाए बीएसए कार्यालय व खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बाबूगीरी कर रहे शिक्षकों पर अब विभाग के तेवर सख्त हो गए हैं। बीएसए ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो पढ़ाने के बजाए विभाग की योजनाओं व अन्य कामों में लगे हुए हैं। साथ ही ऐसे शिक्षकों की सूची भी तैयार करने को कहा गया है जो तैनात किसी और स्कूल में हैं और पढ़ा कहीं और रहे हैं। जिले के कई शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विभिन्न योजनाओं में जुड़े हुए हैं या फिर कुछ और कार्य कर रहे हैं। महानिदेशक बेसिक शिक्षा की ओर से ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के निर्देश बीएसए को दिए गए हैं। लखनऊ में तीन दर्जन से अधिक शिक्षक बाबूगिरी कर रहे या फिर तैनात किसी और स्कूल में है और पढ़ा किसी और स्कूल में रहे हैं। विभाग का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस पूरे मामले में बीएसए दिनेश कुमार का कहना है कि ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सूची आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।




नगर क्षेत्र में पढ़ाई हो जाएगी ठप : नगर क्षेत्र में 50 से अधिक ऐसे स्कूल है। जहां पर पढ़ाने के लिए कोई नियमित शिक्षक तैनात नहीं है। शिक्षकों के रिटायर होने के बाद यह स्कूल खाली हो गए हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों ने अस्थाई तौर पर दूसरे स्कूल के शिक्षकों को शिक्षक रहित स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय कार्रवाई के बाद जो शिक्षक एक साथ दो-दो स्कूलों की जिम्मेदारी उठा रहे हैं, वह उन स्कूलों में पढ़ाना छोड़ देंगे। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Saturday, June 27, 2020

लखनऊ : पोर्टल फीडिंग कराने BRC आई शिक्षिका निकली कोरोना पॉजिटिव, मचा हड़कंप और साथी कर्मी दहशत में

लखनऊ : पोर्टल फीडिंग कराने BRC आई शिक्षिका निकली कोरोना पॉजिटिव, मचा हड़कंप और साथी कर्मी दहशत में



मोहनलालगंज में शिक्षिका की रिपोर्ट आई कोरोना पाजिटिव, हड़कंप

24 जून को शिक्षिका की रिपोर्ट आई पॉजिटिव 20 जून को गई थी खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय

संक्रमित मिलने के बाद नहीं हुआ सैनीटाइजेशन व कर्मचारियों की कोरोना जांच


लखनऊ।  बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही जिले के शिक्षकों पर भारी पड़ सकती है। मोहनलालगंज ब्लाक में एक महिला शिक्षिका के कोरोना संक्रामित पाए जाने के बाद न तो खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सैनीटाइज किया गया और न ही वहां काम करने वाले कर्मचारियों की कोरोना जांच कराई गई। 


जानकारों के अनुसार शिक्षिका की कोरोना रिपोर्ट आने से तीन दिन पहले खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अपने कार्य से गई थी। इसे लेकर ब्लाक के शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है जबकि विभाग मामले को दबाने में जुटा है। मोहनलालगंज के क्रमोत्तर कन्या विद्यालय में तैनात बैंककर्मी शिक्षिका के पति का 21 जून की शाम को कोविड-19 का सैम्पल लिया गया। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद शिक्षिका और उनके दोनों बेटों को सैंपल लिया गया। जो कोरोना पाजिटिव निकले। 


20 जून को कोरोना संक्रामित शिक्षिका भी पोर्टल पर फीडिंग कराने कार्यालय गई थी। हालाकि संक्रामित शिक्षिका के साथ आई दूसरी शिक्षिकाओं को जानकारी दे दी गई। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रान्तीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि क्वारंटाइन सेंटर बने स्कूलों को और बीआरसी को सेनेटाइज करने एवं सोशल डिस्टेंसिंग की बात कई बार विभागीय अधिकारियों से कही गई। इसके आदेश भी जारी हुए, लेकिन ब्लॉक स्तर पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है। 


मोहनलालगंज खण्ड शिक्षा अधिकारी धमेंद्र प्रसाद का कहना है कि सभी बीआरसी पर मानव सम्पदा पोर्टल की फीडिंग का कार्य चल रहा है। शिक्षिका 20 जून के बाद से बीआरसी पर नहीं आई थी। बीआरसी के सभी कर्मचारियों को कोरोना की जांच करवाई जाएगी।

अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा


अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा

अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने का स्पष्ट निर्देश दे सरकार

कहा जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। ...


लखनऊ । 18 मार्च से स्कूल बंद हैं। तब से फीस कलेक्शन न के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो फीस जमा होने का ग्राफ जीरो है। अभिभावकों से स्कूलों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो स्कूलों को संचालन बंद करना पड़ सकता है। यह कहना था अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अनिल अग्रवाल का।


शुक्रवार को अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कनफेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल (सीआईएस),पूर्वांचल स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से हज़रतगंज स्थिति क्राइस्ट चर्च कॉलेज में संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसके तहत स्कूलों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। अनिल अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान से ही ऑनलाइन एजुकेशन मुहैया कराई जा रही है मगर अभिभावक सहयोग नहीं कर रहे हैं, फीस न आने से शिक्षकों का वेतन प्रभावित हुआ है। 


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। अगर स्कूलों को 30 ही प्राप्त नहीं होगी तो संचालन कैसे संभव हो पाएगा।


सीआईएस के सचिव राहुल केसरवानी ने कहाकि कुछ लोगों द्वारा या भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने तीन महीने की फीस माफ कर दी है, जबकि सरकार ने न तो पूर्व में ही न ही वर्तमान में ही कोई फीस माफ करने का आदेश जारी नहीं किया। सशक्त अभिभावक फीस दे ताकि अशक्त अभिभावकों को मदद दी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में स्कूलों से करीब आठ से दस लाख शिक्षक- कर्मचारी जुड़े हैं। ऐसे में फीस न मिलने से इतनी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों में जावेद आलम समेत तमाम लोग मौजूद रहे। 


85 प्रतिशत अभिभावक फीस देने में सक्षम कन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स के अध्यक्ष विशाल जैन ने बताया कि पश्चिमी यूपी में स्कूलों को न के बराबर फीस मिली है। करीब 15 प्रतिशत अभिभावक ऐसे होंगे जो फिलहाल फीस देने में सक्षम नहीं होंगे, लेकिन बाकी 85 प्रतिशत अभिभावकों को फीस जमा कर देनी चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में शिक्षकों और स्टाफ के रोजगार पर असर पड़ सकता है।


निजी स्कूलों के संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वे अभिभावकों को स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करे। अभिभावकों में भ्रम की स्थिति है कि लॉकडाउन अवधि की फीस माफ कर दी जाएगी। इसके चक्कर में अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि वे बड़ी मुश्किल से अपने स्टाफ को दो महीने का वेतन दे पाए यदि अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

Wednesday, June 24, 2020

फर्जी शिक्षकों पर हाथ डालने से परहेज कर रहे बीएसए

Tuesday, June 23, 2020

लखनऊ : बीएसए को बताई शिक्षकों की समस्याएं, PSPSA ने सौंपा ज्ञापन

लखनऊ : बीएसए को बताई शिक्षकों की समस्याएं, PSPSA  ने सौंपा ज्ञापन


लखनऊ  :  बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षकों की समस्याओं को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी से प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष लल्ली सिंह ने मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।