
Wednesday, November 30, 2016

हरदोई : विद्यालय बने तबेला बांधे जा रहे जानवर, काश ! फटकार से सुधर जाएं जिम्मेदार
काश ! फटकार से सुधर जाएं जिम्मेदार
घरों से बोरी लेकर आते हैं बच्चे सुप्रीम कोर्ट ने विद्यालयों के बच्चों को टाट बोरे की फट्टी पर बैठालने पर नाराजगी जताई है लेकिन देखा जाए तो जिले के कुछ प्राथमिक विद्यालयों में यह भी नहीं है। बच्चे अपने स्कूली बैंगों में घरों से बोरी लेकर आते हैं और उन्हीं पर कक्षाओं में बैठते हैं। विद्यालय विकास अनुदान में बच्चों को बैठालने के संसाधन का भी इंतजाम किया जाना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता।
गायब हो चौकी और बेंच ऐसा नहीं कि बच्चों के बैठने का इंतजाम नहीं किया गया था। कुछ वर्ष पूर्व प्राथमिक के बच्चों के लिए चौकी और उच्च प्राथमिक स्कूलों में डेस्क और बेंच का इंतजाम किया गया था लेकिन कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में चौकी और बेंच गायब हो गए हैं। जहां हैं भी वह कमरे में बंद हैं और बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।
परिषदीय विद्यालयों की दशा देखकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है। देखा जाए तो इलाहाबाद में ही नहीं शायद ही ऐसा कोई जिला हो जहां पर शिक्षा के नाम पर खेल न हो रहा हो। हरदोई में तो पूरी तरह से व्यवस्था का मजाक उड़ाया जा रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता तो दूर की बात है विद्यालयों में बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिलती हैं। बातें तो आसमान की हो रही हैं लेकिन हकीकत पूरी व्यवस्था की पोल खोल रही है। विभागीय लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद में व्यवस्था सुधार का जो आदेश दिया है, पूरे प्रदेश में लागू हो जाए तो बच्चों का उनका हक मिल जाए।
बेसिक शिक्षा ही समाज की नींव है और इसके सुधार को लेकर शासन प्रशासन गंभीर है। सर्व शिक्षा अभियान में तो दिल खोलकर धनराशि खर्च हो रही है। शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर संसाधनों पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है लेकिन सब कुछ कागजों पर ही हो रहा है। जिले के कुछ विद्यालयों को छोड़ दें तो अधिकांश की यही दशा है। केंद्र और प्रदेश सरकार विद्यालयों को साफ सुथरा और शौचालयों पर जोर दे रही है। बच्चों के लिए पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप से लेकर बाटर टैंक तक बनवाये गए हैं लेकिन देखा जाए तो जिले के करीब 40 फीसद विद्यालयों में बच्चों के शौचालयों का इंतजाम नहीं है। कागजों पर तो व्यवस्थाएं सही हैं लेकिन हकीकत में ताला पड़ा है। तो कई विद्यालयों के शौचालयों में दरवाजे तक नहीं हैं। इसी तरह हैंडपंपों में कई केवल ठूठ है तो कहीं वर्षों से खराब पड़े हैं। ऐसा नहीं कि जिम्मेदार जानते नहीं हैं। सब कुछ जानते हुए भी चुप हैं और इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मरम्मत और रंगाई पुताई पर खर्च होते हैं लाखों रुपये : विद्यालयों की मरम्मत से लेकर रंगाई पुताने के लिए प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च होते हैं। देखा जाए तो प्रति विद्यालय में विद्यालय विकास अनुदान पांच हजार रुपये जिसमें मरम्मत आदि का काम कराया जाता है तो प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में उनके कक्षा कक्षों के अनुसार पांच से 10 हजार 500 रुपये भेजे जाते हैं। लेकिन विद्यालयों में कुछ दिखाई नहीं देता है। कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में रंगाई पुताई तक नहीं कराई जाती है। बाउंड्रीवाल गिरी रहती है तो पानी की टंकी में ही गंदगी छाई रहती है लेकिन कोई देखने वाला नहीं है।
विद्यालय बने तबेला बांधे जा रहे जानवर : परिषदीय विद्यालयों की दशा के लिए विभाग तो जिम्मेदार है ही कुछ अभिभावक और ग्रामीण भी जिम्मेदार हैं। ग्रामीणों के बच्चे विद्यालयों में पढ़ते हैं लेकिन कोई विद्यालयों को खलिहान बना देता है तो कोई तबेला और जानवर तक बांधे जाते और तो और विद्यालयों के दरवाजे और खिड़की भी कुछ स्थानों पर तोड़ दिए जाते। शिक्षक शिक्षिकाएं चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते और मजबूर होकर बैठे रहते हैं

सरकार कागज में ही दिखा रही सब चकाचक, ठंडक में स्कूल के नौनिहाल बैठ रहे टाट-पट्टी पर
पूरी तरह से हाईटेक होते युग और स्मार्ट होते शैक्षणिक माहौल के बीच सरकारी प्राइमरी स्कूलों में कहीं नौनिहालों के लिए टाट-पट्टी, कहीं कक्षाओं में उखड़ी हुई जमीन, कहीं दीवारों में सीलन और कहीं गंदगी के बीच भोजन बनाए जाने की व्यवस्था। इतना ही नहीं, स्कूलों में बने शौचालयों में साफ सफाई का कोई मद नहीं, कहीं-कहीं तो शौचालय ही नहीं हैं। इलाहाबाद के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों की कुछ ऐसी ही सूरत है। पूरे जिले में परिषदीय स्कूलों की सूरत बताने के लिए जिला मुख्यालय में स्थित एक स्कूल ही काफी है। लेकिन ऐसे उदाहरण दर्जनों हैं। पीडी टंडन रोड स्थित प्राथमिक स्कूल में नौनिहाल आज भी टाट-पट्टी पर ही बैठकर शिक्षा का ककहरा सीख रहे हैं जबकि ठंडक का मौसम आ गया है। जिस रसोई में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन बनता है वहां की दीवारें सीलन भरी हैं, छत में जाले लगे और फर्श पर भी सफाई के माकूल इंतजाम नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि रसोईघर के बगल में पानी भरा रहता है जिसकी निकासी नहीं कराई जाती। इससे कभी कोई दुर्घटना होने की आशंका भी बनी रहती है और भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं। गौरतलब है कि जिला मुख्यालय में शिक्षा विभाग के सभी बड़े अफसरों और प्रशासनिक अफसरों का कार्यालय है इसके बावजूद इस प्रकार के स्कूलों की स्थिति से सभी की बेफिक्री है।
नगरक्षेत्र में दर्जनों स्कूल चल रहे एकल : नगर क्षेत्र में दर्जनों स्कूल एकल चल रहे हैं। जबकि विभागीय नियम शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने में रोड़ा बने हुए हैं।
शासनादेश जारी नहीं होने से नगर क्षेत्र के दर्जनों स्कूल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इन शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई, मिड डे मील पर पूरा ध्यान रखने सहित विभागीय लिखापढ़ी और अन्य सरकारी कामकाज भी करने पड़ते हैं
Wednesday, October 19, 2016
Wednesday, October 12, 2016

बिजनौर : "सब पढ़ें सब बढ़ें" का नारा व्यवस्था के आगे अर्थहीन, परिषदीय स्कूलों के छात्र बिना पढ़े देंगे परीक्षा
‘सब पढ़े, सब बढ़ें,' बेसिक शिक्षा विभाग का नारा व्यवस्था के आगे दम तोड़ रहा है। परिषदीय प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में 15 अक्टूबर से अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरु होने जा रही है, लेकिन इन विद्यालयों के छात्र-छात्रओं ने अभी तक आधा कोर्स पढ़ा ही नहीं है। बड़ी संख्या में नौनिहाल बिना किताबें पढ़े ही अर्धवार्षिक परीक्षाओं में बैठेंगे, क्योंकि उनके स्कूलों में सभी विषयों की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। परिषदीय स्कूलों में आधा शैक्षिक सत्र समाप्त हो गया है, लेकिन अभी तक जिले के पचास प्रतिशत विद्यालयों में भी पूरा कोर्स नहीं पहुंचा है। दूरदराज के गांव तो दूर जिला मुख्यालय व अन्य नगरों के विद्यालयों में भी शतप्रतिशत किताबें नहीं पहुंची है। कुछ विद्यालयों के शिक्षक गत शैक्षिक सत्र की पुरानी किताबों से बच्चों को विद्यालय में पढ़ देते है, लेकिन उनके घर पढ़ने को कुछ नहीं है। इस कारण शिक्षक बच्चों का पाठ्यक्रम अभी तक पूरा नहीं करा पाए है, जबकि अर्धवार्षिक परीक्षाएं 15 अक्टूबर से शुरू होने को हैं। ऐसे में बिना कोर्स पूरा करे ही अधूरे ज्ञान से बच्चे परीक्षा में शामिल होंगे। उधर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महेशचंद का कहना है कि उनकी तैनाती हाल ही में हुई है। उन्होंने जानकारी की थी, पता चला है कि काफी विद्यालयों में पुरानी किताबों से ब्लैकबोर्ड पर कोर्स पढ़ाया जा रहा है। पढ़े हुए कोर्स से परीक्षा ली जाएगी
Tuesday, October 11, 2016

अम्बेडकर नगर : सब पढ़ें-सब बढ़ें नारे पर खरे नहीं उतर पा रहे प्राथमिक विद्यालय, कई विद्यालय एकल शिक्षक, कई में प्रधानाध्यापक ही नहीं, मानक के विपरीत है शिक्षकों की तैनाती
तय मानक 30 छात्र पर एक शिक्षक का है। शिक्षा क्षेत्र में कई जगह कुछ विसंगतियां जरूर हैं, लेकिन आगामी समय में बड़ी मात्र में शिक्षकों के तबादले अपेक्षित हैं। इसके बाद सम्बंधित सभी कमियों को दूर कर प्राथमिक शिक्षा को उच्च शिखर पर पहुंचाया जाएगा। सुरेश कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी कटेहरी
कटेहरी हिन्दुस्तान संवाद शिक्षा क्षेत्र कटेहरी के प्राथमिक विद्यालय सब पढ़ें-सब बढ़ें नारे पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। बच्चों में शिक्षा की प्राथमिक नींव रखने वाले कई प्राथमिक विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे हैं तो कहीं जरूरत से ज्यादा शिक्षक भरे हैं। कई विद्यालय प्रधानाध्यापकविहीन हैं तो कई जगह बच्चों की संख्या 50 से भी कम है। कुल मिलाकर दरक रही व्यवस्था पर हिन्दुस्तान ने पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।शिक्षा क्षेत्र कटेहरी में कुल 149 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिसमें 13 हजार 475 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। प्रति विद्यालय छात्रों का औसत 90 पड़ता है, लेकिन सही तस्वीर कुछ और ही बयां करती है। शिक्षा क्षेत्र के कुल 149 प्राथमिक विद्यालयों में से 87 विद्यालयों में छात्र संख्या 100 से कम पंजीकृत है। प्राथमिक विद्यालय बहोरिकपुर, भिउरा, कसियापुर, कटघरवा, निभियहवां, सारंगपुर दियरा, कौड़ाहा, जलालपुर, टीकमपारा, कसाना, सखौना पीरपुर, बसंतपुर, पियारेपुर में पंजीकृत छात्रों की संख्या 50 से भी कम है। इनमें से निभियहवां प्राथमिक विद्यालय में तो मात्र 20 छात्र पंजीकृत हैं। इसके विपरीत गोसरपुर करौना प्राथमिक विद्यालय में 219 तथा हाथपाकड़ में 214 छात्र संख्या है। यह आंकड़े साबित करते हैं कि प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना करते समय स्थान के चयन में अदूरदर्शिता दिखाई गई है।
इन विद्यालयों में शिक्षकों का विश्लेषण किया जाए तो शिक्षा क्षेत्र में स्वीकृत प्रधानाध्यापकों की संख्या 122 है, जबकि कार्यरत 112 हैं। इसी तरह सहायक अध्यापकों की संख्या 358 है तथा कार्यरत मात्र 338 है। मतलब कुल स्वीकृत पद 480 है तथा कार्यरत 450 शिक्षक हैं। विभाग के मानक के अनुसार 30 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति की जानी चाहिए। 450 शिक्षकों की नियुक्ति तो मानकानुसार है, लेकिन विद्यालय आवंटन में काफी गड़बड़झाला नजर आता है। प्राथमिक विद्यालय गोसरपुर करौना में छात्र संख्या 219 है। इस अनुसार यहां सात शिक्षकों को रहना था, लेकिन यहां स्वीकृत पद चार है तथा कार्यरत भी मात्र चार शिक्षक हैं। हाथपाकड़ में कुल 214 छात्र हैं। यहां भी कम से कम सात शिक्षक होने चाहिए, लेकिन यहां भी स्वीकृत चार पदों पर मात्र तीन शिक्षक तैनात किए गए हैं। इसके विपरीत प्राथमिक विद्यालय निभियहवां में मात्र 20 छात्रों के लिए दो पद सृजित हैं तथा दो शिक्षक कार्यरत हैं। पड़ताल करने पर पाया गया कि अहिरौली में 115 छात्रों के लिए स्वीकृत तीन पदों पर पांच शिक्षक तैनात हैं। बेनीपुर में 90 छात्रों के लिए तीन पदों पर पांच शिक्षक हैं। रानीपुर मोहन में 103 बच्चों के लिए चार पदों मात्र एक शिक्षक की तैनाती की गई है। जरुखा विद्यालय में 68 छात्रों के लिए तीन पद सृजित हैं, यहां पांच शिक्षकों की तैनाती है। इसी तरह घाघूपुर में 81 छात्रों के लिए चार पद हैं, लेकिन पांच शिक्षक पढ़ा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय मथानी में 80 छात्रों पर तीन पद है, लेकिन चार शिक्षक नियुक्त हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो शिक्षकों की तैनाती में मनपसंद विद्यालय देकर बड़ा खेल किया गया है, जो छात्र-शिक्षक के तयशुदा मानक के विपरीत है।यहां तो हेड मास्टर ही नहीं: यदि प्रधानाध्यापक पद पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि प्राथमिक विद्यालय आमा, चककोड़ार, चांदपुर महमूदपुर, हाथपाकड़, कटेहरी प्रथम, खेमापुर, लोकापुर, मीरपुर मंशा, मूसेपुर गिरंट, रामनगर जमघरा, रानीपुर मोहन तथा सेमरी अभी तक यहां पद रिक्त पड़ा है। इसके अलावां स्वीकृत 122 पदों में 10 पद भी रिक्त है। प्रधानाध्यापक की अनुपस्थिति में इन विद्यालयों का काम शिक्षकों के भरोसे चलता है।नहीं बंटी किताब, शौचालय हैं निष्प्रयोज्य : इसके अलावां कई विद्यालय अभी तक चहरदिवारी विहीन हैं। कई विद्यालयों में शौचालय निष्प्रयोज्य है। नया सत्र शुरू हुए चार माह से अधिक हो चुके हैं लेकिन कई जगह अभी भी पुस्तकों का वितरण नहीं हो पाया है। दीपक तले अंधेरा तब नजर आता है जब ब्लाक संसाधन केन्द्र परिसर में स्थापित प्राथमिक विद्यालय कटघरवा में मात्र 43 छात्र पंजीकृत हैं तथा यहां एक प्रधानाध्यापक एवं एक सहायक अध्यापक कार्यरत है। इस तस्वीर से स्पष्ट नजर आता है कि शिक्षा क्षेत्र कटेहरी की प्राथमिक शिक्षा से किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है।
Sunday, October 9, 2016

कुशीनगर : कई विद्यालयों में जल जमाव, समस्या के समाधान को लेकर कोई पहल नहीं, निजी कमरे में पढ़ा रही शिक्षिका
हाटा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय तमासपुर में जल जमाव हो जाने के कारण ताला बंद हो गया है, लेकिन यहां तैनात शिक्षिका एक निजी मकान के बरामदे में बच्चों को पढ़ा कर व्यवस्था को आइना दिखा रही है। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात का पानी विद्यालय परिसर में जमा है। आने-जाने का कोई मार्ग नहीं होने के कारण विद्यालय में ताला बंद हो है। तैनात शिक्षिका नीलम ने कहा कि विद्यालय में 58 छात्र नामांकित हैं। इन्हें पढ़ाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। व्यवस्था बनाना विभागीय अधिकारी और गांव का जिम्मेदारों का कार्य है। विद्यालय में जल जमाव के कारण पठन-पाठन में भारी दिक्कत आ रही है। स्थिति की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दे दी गई है। ग्राम प्रधान संध्या मिश्र ने कहा कि बजट के अभाव में विद्यालय में मिट्टी नहीं भरवाया जा रहा है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
कई परिषदीय विद्यालयों में जलजमाव है। कहीं-कहीं तो जल जमाव से विद्यालयों को बंद करने तक की नौबत आ गई है। इन विद्यालयों में नामांकित बच्चे व उनके अभिभावक चिंतित हैं। सुकरौली विकास खंड के गांव हासखोर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय के परिसर में जलजमाव के कारण डेढ़ से दो फीट तक पानी इकट्ठा हो गया है। इसी ब्लाक के गांव बरवा खुर्द के गोपालपुर विरैचा स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में भी एक फीट से अधिक जलजमाव है। बच्चों को विद्यालय जाने में परेशानी हो रही है। इसी तरह विकास खंड मोतीचक के मुहम्दा जमीन सिकटिया का बारी टोला स्थित प्राथमिक व जूनियर विद्यालय परिसर में भी जलजमाव है। जलजमाव की समस्या के समाधान को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है।
Thursday, October 6, 2016
Sunday, August 21, 2016
Friday, May 13, 2016
Friday, April 8, 2016
Sunday, February 21, 2016

सीतापुर : पशुओं का अड्डा बना स्कूल,कई बार शिकायत के बाद सुध लेने वाला कोई नहीं, अध्यापक बच्चे परेशान
जागरण संवाददाता सीतापुर : विकास खंड गोंदलामऊ क्षेत्र के प्राईमरी स्कूल अल्लीपुर में बाउंड्री वाल का निर्माण नहीं हो सका है। जिससे स्कूल में आवारा पशुओं का लगा झुंड लगा रहता है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। पशु स्कूल परिसर में गंदगी भी करते हैं। 1विद्यालय में चहारदीवारी के न होने से प्रांगण में जानवरों का झुंड विचरण करता रहता है। यह स्कूल परिसर में रसोई घर के आस पास जमा रहते हैं। जिससे प्रांगण गंदगी से पट जाता है। मध्याह्न भोजन बनाने में भी दिक्कतें होती हैं। इससे विद्यालय के खेल मैदान में बच्चे खेलने से डरते हैं। लोग वाहन पर सवार होकर परिसर से गुजरते हैं। कई बार सामान्य दुर्घटनाओं का बच्चे शिकार हो चुके हैं। इसलिए विद्यालय में चहारदीवारी बनवाने की मांग की गयी थी। लेकिन अभी तक बनी नहीं। 1प्रधानाध्यापक अजय कुमार पांडेय ने बताया कि विद्यालय प्रबंध समिति व ग्राम शिक्षा समिति अल्लीपुर के सहयोग से बाउंड्री वाल का प्रस्ताव कराकर खंड शिक्षा अधिकारी गोंदलामऊ व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को लिखित भेज चुके हैं। वहां से कब अनुमति मिले। जब तक निर्माण नहीं होता पढ़ाई प्रभावित हैं। वहीं बच्चों को चोट लगने का खतरा है। अभिभावक रामस्वरूप कनौजिया, हरिश्याम, रमेश यादव कहते हैं कि बाउंड्री बनवाना बहुत जरूरी है। अधिकारी इसके शीघ्र आदेश दें।अल्लीपुर प्राथमिक स्कूल में लगा पशुओं का झुंड जागरण

फर्रुखाबाद: मिड-डे मील को लेकर विवाद, प्रधानाध्यापक को पीटा, सिर फोड़ा
मिड-डे मील को लेकर विवाद
कंपिल। थाना क्षेत्र के गांव बहबलपुर में एमडीएम को लेकर अध्यापक और छात्र के अभिभावकों में विवाद हो गया। अध्यापक की ओर से मुकदमा दर्ज कर लिया गया। छात्र के पिता ने भी तहरीर दी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि वह अनुसूचित जाति का है। उसके बेटे को अन्य बच्चों के साथ अध्यापक ने एमडीएम नहीं खाने दिया।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बहबलपुर में तैनात शिक्षक आनंद कुमार ने शनिवार को थाने में दी गई तहरीर में कहा कि प्रधान पुत्र शनि ठाकुर और तीन अज्ञात लोगों ने धारदार हथियार से मारपीट कर घायल कर दिया। वहीं दूसरी तरफ इसी विद्यालय में कक्षा 6 में पढ़ अरविंद के पिता ब्रह्मानंद ने तहरीर दी में कहा कि उसके बेटे ने शिकायत की कि आनंद कुमार ने एमडीएम अलग बैठकर खिलाया। शिकायत करने गए तो जातिसूचक शब्द का प्रयोग करके गालियां दीं। वह ग्राम प्रधान के पुत्र शनि ठाकुर के पास गया तो शनि ठाकुर तथा गांव के अन्य लोग वहां पहुंचे। इस पर शिक्षक आक्रोशित हो गए और खुद गिर गए, जिससे वह चुटहिल हो गए।
फिलहाल ब्रह्मानंद की तहरीर पर देर शाम तक मुकदमा नहीं लिखा गया। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष भूपेश पाठक ने कहा कि शिक्षक आनंद कुमार को वहां से हटाया जाए। उसे जानमाल का खतरा है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
शिक्षक और अनुसूचित छात्र के पिता ने लगाए आरोप
शिक्षक का मुकदमा दर्ज, छात्र के पिता ने दी तहरीर
Wednesday, December 30, 2015

महराजगंज : ठंड में ठिठुर रहीं हैं कस्तूरबा गांधी स्कूलों की बालिकाएं
महराजगंज : कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की बालिकाएं ठंड में जैसे- तैसे अपना दिन गुजार रही हैं। हद तो ये है कि कक्षा सात व आठ की बालिकाओं को स्वेटर स्कॉर्फ व जूता भी नहीं दिए गए हैं। यूं तो जिले में 13 कस्तूरबा गांधी विद्यालय संचालित हैं पर यहाँ बालिकाओं को ठंड से जंग लड़ने की व्यवस्था नाकाफी है।
खबर साभार : 'दैनिक जागरण'







