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Sunday, January 24, 2021

पटना हाईकोर्ट ने दी शिक्षा विभाग को नसीहत : शिक्षकों की तैनाती शिक्षा देने के लिए होती है, उन्हें शिक्षा के काम में ही लगाएं, ठेकेदार न बनाएं

पटना हाईकोर्ट ने दी शिक्षा विभाग को नसीहत : शिक्षकों की तैनाती शिक्षा देने के लिए होती है, उन्हें शिक्षा के काम में ही लगाएं, ठेकेदार न बनाएं।


निर्माण कार्य में आवंटित राशि का उपभोग न किये जाने पर शिक्षक पर एफआईआर किये जाने पर पटना हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी।


हाईकोर्ट ने फंड का दुरुपयोग करने के मामले में शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर बिहार सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की बहाली छात्रों को शिक्षा देने के लिए की जाती है। लेकिन शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में लगाने की बजाए उन्हें दूसरे काम में लगाया दिया जाता हैं। 
शिक्षकों का मुख्य कार्य छात्रों को शिक्षित करने के लिए उन्हें शिक्षा प्रदान करने का है।


हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य है कि बिहार में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र से हटा कर उन्हें स्कूल भवन के निर्माण कार्य में लगा ठेकेदार के रूप में स्थापित कर दिया है। यही नहीं आवंटित राशि का उपयोग नहीं किये जाने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अभियुक्त बना दिया गया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक को अभियुक्त बनाये जाने के पूर्व विभाग ने जिम्मेवारी तक तय नहीं की है। कोर्ट ने शिक्षक को अग्रिम जमानत दे दी। 


मामला गोपालगंज जिले के कटेया थाना कांड संख्या 172/2016 से सम्बंधित है। इस केस में शिक्षक शैलेश कुमार को आवंटित निधि का उचित उपयोग नहीं किये जाने को लेकर विभाग ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी। निचली अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर शिक्षक ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर अग्रिम जमानत देने का गुहार लगाई गई थी। अग्रिम जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पचास हजार के दो मुचलकों पर अग्रिम जमानत दे दी।

Thursday, January 21, 2021

देशभर में सबसे मुश्किल यूपी में शिक्षक बनना

देशभर में सबसे मुश्किल यूपी में शिक्षक बनना


यूपी में शिक्षक बनना पूरे देश में सबसे कठिन काम है। शिक्षक भर्ती की अर्हता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) तय करता है। एनसीटीई ने शिक्षक बनने के लिए बीएड, डीएलएड आदि के अलावा टीईटी को अनिवार्य माना है। 


वहीं यूपी में टीईटी के बाद एक और लिखित परीक्षा देनी होती है। अन्य राज्यों में डीएलएड 12वीं के बाद ही होता है जबकि यूपी में डीएलएड में दाखिले की योग्यता स्नातक है।

Saturday, January 16, 2021

श्रद्धांजलि : शिक्षक राजनीति के वटवृक्ष थे ओमप्रकाश शर्मा, लगातार 50 साल तक उठाते रहे सदन में शिक्षकों की आवाज

शिक्षक संघ की राजनीति में 50 साल तक एकछत्र राज करने वाले शिक्षक पूर्व एमएलसी ओम प्रकाश शर्मा का निधन

50 साल से थे शिक्षक संघ सीट से एमएलसी, नवंबर में मिली थी करारी हार

श्रद्धांजलि : शिक्षक राजनीति के वटवृक्ष थे ओमप्रकाश शर्मा, लगातार 50 साल तक उठाते रहे सदन में शिक्षकों की आवाज


शिक्षक राजनीति के वटवृक्ष थे ओमप्रकाश,50 साल से थे जीत की गारंटी, संघर्ष था मूलमंत्र Meerut Newsओमप्रकाश शर्मा का शिक्षक राजनीति में करिश्माई दखल था।

ओमप्रकाश शर्मा ने शिक्षक राजनीति में एक मुकाम हासिल किया था। उनके विरोधी भी मानते हैं कि उनके राजनीतिक दबदबे तक पहुंचना किसी सियासतदां के लिए मुश्किल हागा। सूबे में सरकारों का आना-जाना लगा रहा। राष्ट्रीय दलों से सत्ता सरककर क्षेत्रीय दलों के पाले में आ गई।


मेरठ । शिक्षक राजनीति के स्तंभ रहे ओमप्रकाश शर्मा की सियासी परछाई बेहद लंबी थी। शिक्षक राजनीति में लगातार 50 साल की मैराथन पारी खेलने के बाद पिछले चुनावों में क्रीज से बाहर हुए, लेकिन शिक्षकों के हित में उनकी आवाज आज भी बुलंद थी। राजनीति के पंडित बताते हैं कि उनकी एक आवाज पर सूबे के कोने-कोने से शिक्षक हाथ उठाकर खड़े हो जाते थे। सत्तर और अस्सी के दशक में उन्हें कई दिग्गजों ने मंत्री बनाने का भी आफर दिया, लेकिन वो सिद्धांतों की डगर से नहीं भटके।

नहीं हुए थे टस से मस
ओमप्रकाश शर्मा के विरोधी भी मानते हैं कि उनके राजनीतिक दबदबे तक पहुंचना किसी सियासतदां के लिए मुश्किल हागा। सूबे में सरकारों का आना-जाना लगा रहा। राष्ट्रीय दलों से सत्ता सरककर क्षेत्रीय दलों के पाले में आ गई। प्रदेश की सियासत में भारी बदलाव नजर आया, लेकिन शर्मा का वजूद दलगत सियासत की मोहताज नहीं रही।

बदलते दौर में चौधरी चरण सिंह की सरकार से लेकर कांग्रेस, जनता दल, सपा, बसपा और भाजपा ने सत्ता संभाला, लेकिन उनका राजनीतिक दुर्ग अभेद्य रहा। उनके आठ बार एमएलसी रहने के दौरान 19 मुख्यमंत्रियों ने यूपी की कमान संभाली। कहते हैं कि हेमवती नंदन बहुगुणा और मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मंत्री बनाने के अलावा लखनऊ से संसदीय चुनाव लडऩे का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन शर्मा टस से मस नहीं हुए।

87 साल की उम्र में भी जमकर लड़े चुनाव
शिक्षक राजनीति में ओम प्रकाश का करिश्माई दखल ऐसा रहा कि सूबे का शिक्षक उनकी एक आवाज पर उठ खड़ा होता था। 87 साल की उम्र में एमएलसी चुनाव लड़े। वक्त काफी आगे निकल चुका था। संगठन में भी भारी मतभेद उभरा, और जिलाध्यक्षों की उनके महामंत्रियों से ठन गई। संगठन में नए लोग भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं सके। लंबे समय से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सूबे में संगठन को बड़ी ताकत और विस्तार दिया। आखिरकार भाजपा प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा से चुनाव हार गए। लेकिन उनका कद ऐसा था कि चुनाव जीतने के बाद श्रीचंद शर्मा ओमप्रकाश से मिलने उनके घर गए। पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

ओमप्रकाश शर्मा के निधन से शिक्षा जगत की राजनीति में रिक्तता आ गई है। वो कई दशकों तक राजनीति में अपने मूल्यों के साथ आगे बढ़ते रहे। संघर्ष किया, और शिक्षकों का भरोसा जीता। भगवान उन्हें अपने चरणों में स्थान दें। - डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा


मेरठ :  शिक्षक संघ की राजनीति में 50 साल तक एकछत्र राज करने वाले शिक्षक एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा का आज निधन हो गया। वे करीब 84 साल के थे। हालांकि उनका निधन किन कारणों से हुआ इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं हो पाई है लेकिन पूर्व एमएलसी के निधन की खबर मिलते ही उनके समर्थकों का घर पर तांता लगना शुरू हो गया। बताया जाता है कि उन्होंने खुद को कुछ अस्वस्थ महसूस किया और उसके बाद उनके चिकित्सक पुत्र ने उनका उपचार शुरु किया लेकिन इसके कुछ ही देर बाद उनका निधन हो गया।


उतर प्रदेश शिक्षक राजनीति का 50 साल से नेतृत्व कर रहे शिक्षक नेता व निवर्तमान एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा एक बड़ा नाम थे । 50 साल तक ओमप्रकाश शर्मा के इर्द-गिर्द ही शिक्षकों, कर्मचारियों की राजनीति घूमती रही। ओम प्रकाश शर्मा ने विधान परिषद का पहला चुनाव 1970 में जीता था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंतिम चुनाव उन्होंने 2014 में जीता था। शर्मा की लोकप्रियता 90 के दशक में इतनी थी कि सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुई और साढ़े 10 बजे तक उन्हें प्रथम वरीयता के 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिल जाते थे। 


गत दिनों मिली हार पर उन्होंने साफ कहा था कि हार से शिक्षकों के आंदोलन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शिक्षक हित में आंदोलन जारी रहेगा। चुनाव हारने के बाद भी पूर्व एमएलसी ओम प्रकाश शर्मा शिक्षकों के हित के लिए प्रयासरत थे। शनिवार काे भी वे जीआईसी में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए थे।

Monday, January 11, 2021

सदन में उठेगा शिक्षकों के पद कम करने का मुद्दा

सदन में उठेगा शिक्षकों के पद कम करने का मुद्दा


प्रयागराज। माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के पद लगातार कम किए जा रहे हैं। वहीं, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भी शिक्षक भर्ती में विलंब कर रहे है। नियुक्ति प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। यह मुद्दा अब सदन में उठेगा। यह बात एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने रविवार को एक होटल में आयोजित शिक्षक संघ की बैठक में कही।

शिक्षक दल का नेता बनने के बाद शिक्षक संघ के साथ पहली बार बैठक कर रहे एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने शिक्षकों से उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। कहा हय कार्य विभाग का है, वह अपने स्तर पर सत्यापन कराए। कहा कि यह मुद्दा भी सदन में उठाएंगे। 


कोरोना काल में तमाम वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों के समक्ष भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। शुल्क न मिलने से स्कूल प्रबंधन ने वेतन नहीं दिया। अब समान कार्य का समान वेतन देने की मांग सदन में उठेगी। पुरानी पेंशन योजना को भी बहाल कराने के लिए भी संघर्ष होगा।


उन्होंने बताया कि प्रदेश भर के शिक्षक 16 जनवरी को अवकाश पर रहेंगे और अपने जनपद में सुबह 11 से शाम चार बजे तक उपवास पर रहते हुए धरना देंगे। शिक्षकों की समस्याओं को लेकर डीआईओएस के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी प्रेषित किया जाएगा। वहीं, एक फरवरी को प्रत्येक विद्यालय से एक-एक शिक्षक लखनऊ स्थित ाश्क्षिा निदेशक के शिविर कार्यालय में इकट्ठा होंगे और उपवास पर रहकर धरना देंगे। बैठक में जिला अध्यक्ष राम प्रकाश पांडेय, जिला मंत्री अनुज कुमार पांडेय, कुंज बिहारी मिश्र, रामसेवक त्रिपाठी, जगदीश प्रसाद आदि शामिल हुए।

Friday, January 8, 2021

शिक्षा विभाग के समूह-ख संवर्ग में पदोन्नति से पहले ही राजकीय शिक्षक व निरीक्षक संवर्ग आमने सामने

शिक्षा विभाग के समूह-ख संवर्ग में पदोन्नति से पहले ही राजकीय शिक्षक व निरीक्षक संवर्ग आमने सामने।


प्रयागराज : शिक्षा विभाग के समूह-ख संवर्ग में पदोन्नति से पहले ही राजकीय शिक्षक व निरीक्षण शाखा संघ आमने-सामने है। दोनों अनुपात प्रतिशत अधिक पाने की पैरवी में जुटे हैं। हालांकि शिक्षा निदेशालय का दावा है कि पदोन्नति के लिए गोपनीय आख्या पुराने कोटे के तहत मांगी गई है, जिसमें पुरुष शाखा का 61, महिला शाखा का 22 व निरीक्षण शाखा का 17 अनुपात प्रतिशत है।



उप्र शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह ख के पदों पर पदोन्नति छह साल से नहीं हो सकी है। प्रदेश में इस संवर्ग के अब गिने-चुने अफसर बचे हैं, जबकि रिक्त पदों की तादाद करीब पांच सौ है। 2018 में भी विभागीय पदोन्नति समिति ने सूची फाइनल की थी लेकिन, उस पर कोर्ट ने रोक लगा दी। शासन ने इस संवर्ग के पदों को भरने के लिए पांच नवंबर को आदेश दिया। शिक्षा निदेशालय ने 23 दिसंबर को सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से पदोन्नति के लिए गोपनीय आख्या मांगी। यह पत्र इंटरनेट पर वायरल हुआ और सूची के अनुसार यह कयास लगे कि निरीक्षण शाखा का कोटा बढ़ाया है। अपर शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने स्पष्ट किया कि अनुपात प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं है।


महिलाएं भी कोटे से असहज : पदोन्नति में महिला शाखा का कोटा सिर्फ 22 प्रतिशत होने से महिला शिक्षिकाएं भी असहज हैं। वे भी अपना कोटा बढ़ाने की मांग कर रही हैं। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. राजेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि महिलाओं व पुरुषों का कोटा बराबर करने की मांग हो रही है।

Saturday, December 5, 2020

क्या शिक्षकों के हितों की बात कर पाएंगे राजनीतिक दलों के शिक्षक एमएलसी?

यूपी : दिग्गजों के हारने से अब उच्च सदन में कुंद होगी शिक्षकों से जुड़े मुद्दों की धार, अंदरूनी गुटबाजी ले डूबी


● हार से विधान परिषद में कम हुआ अध्यापकों का प्रतिनिधित्व
● ओमप्रकाश शर्मा जैसे दिग्गज की हार से उच्च सदन ने खोया अग्रदूत

 क्या शिक्षकों के हितों की बात कर पाएंगे राजनीतिक दलों के शिक्षक एमएलसी? 


शिक्षक एमएलसी के नतीजे आ चुके हैं। 6 में से 4 सीटें भाजपा व सपा के पास हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी हैं कि क्या ये नेता दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर शिक्षक हितों की बात कर पाएंगे? वित्तविहीन महासभा के अध्यक्ष उमेश द्विवेदी इस बार सत्ताधारी दल के टिकट से जीते हैं, ऐसे में वे कैसे सरकार के खिलाफ जाते हुए शिक्षकों की मांगों को सदन में उठाएंगे, इस पर शिक्षकों की नजरें रहेंगी। 


एडेड और वित्तविहीन की लड़ाई का फायदा राजनीतिक दलों को पहुंचा है और नतीजे इसकी पुष्टि करते हैं। वित्तविहीन शिक्षक आरोप लगाते रहे हैं कि एडेड स्कूल के शिक्षक संघों ने सदन में सिर्फ अपने फायदे की बात उठाई। यही कारण था कि वित्तविहीन शिक्षकों ने लड़ाई लड़ कर अपने वोट बनवाए और पिछली बार वित्तविहीन महासभा के अध्यक्ष उमेश द्विवेदी सदन भी पहुंचे। प्रदेश में वित्तविहीन शिक्षकों की संख्या 2 लाख से भी ज्यादा है लेकिन इस बार उमेश द्विवेदी भाजपा के टिकट पर जीते हैं। भाजपा के टिकट पर सदन पहुंचे अन्य दो एमएलसी भी खांटी भाजपाई पहले हैं और शिक्षक बाद में। ऐसे में वे किस तरह शिक्षक हितों की बात करेंगे, ये देखने वाली बात होगी।  वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय, सेवा नियमावली, प्रबंधन का उत्पीड़न या एडेड स्कूलों में प्रबंधन के खेल आदि से निजात शिक्षकों की पुरानी मांगे हैं। 


फैजाबाद-गोरखपुर से जीते शर्मा गुट के ध्रुव कुमार त्रिपाठी वित्तविहीन महासभा के अजय सिंह के साथ कांटे की टक्कर के बाद जीते हैं। अजय सिंह हालांकि भाजपा में शामिल हुए थे लेकिन भाजपा ने उन्हें यहां से टिकट न देते हुए ध्रुव कुमार को ही समर्थन दे दिया था।  मौजूदा नतीजे के बाद अब विधान परिषद में शिक्षक एमएलसी की 8 सीटों में तीन भाजपा के पास, दो शर्मा गुट, एक सपा, एक वित्तविहीन और एक चंदेल गुट के पास है यानी अब केवल सशिक्षक दलों के चार नेता सदन में हैं और बाकी के चार दलों के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे। 


लखनऊ : विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव में शिक्षक संगठनों के पराभव से उच्च सदन में शिक्षकों से जुड़े मुद्दें की धार कुंद होगी। शिक्षकों के हितों से जुड़े विषयों को जिस शिद्दत से शिक्षक संगठन सदन में उठाते थे और उसके प्रति आग्रही होते थे, अब ऐसा शायद न हो पाए। वजह यह है कि शिक्षक कोटे की जिन छह सीटों पर चुनाव हुए, उनमें से चार सीटों पर राजनीतिक दलों के उम्मीदवार जीते हैं जो सदन में अपनी पार्टियों की लाइन के हिसाब से चलेंगे। उच्च सदन में अध्यापकों का प्रतिनिधित्व करने वाले शर्मा गुट और चंदेल गुट की ताकत कम हो गई है।


विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद सदन में शिक्षक दल का संख्याबल पांच से घटकर दो रह गया है। वहीं उमेश द्विवेदी के भाजपा के टिकट पर निर्वाचित होने और चेत नारायण सिंह की पराजय से निर्दलीय समूह (चंदेल गुट) की ताकत भी आधी रह गई है। ओम प्रकाश शर्मा जैसे धुरंधर भी अब सदन में मौजूद नहीं रहेंगे। ऐसे में अब उच्च सदन में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाले राज बहादुर सिंह चंदेल, सुरेश कुमार त्रिपाठी और ध्रुव कुमार त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ सदस्यों पर शिक्षक बिरादरी से जुड़े मुद्दों को असरदार तरीके से उठाने का अधिक दारोमदार होगा।

अतीत में था दबदबा

कभी शिक्षक दल का दबदबा विधान परिषद की शिक्षक कोटे की सभी आठों सीटों पर होता था और उसका संख्या बल दहाई तक पहुंचा था। शिक्षक दल की इसी ताकत ने 1997 में उसके नेता ओम प्रकाश शर्मा को विधान परिषद में नेता विरोधी दल का रुतबा दिलाया था । ओम प्रकाश शर्मा की बढ़ती उम्र के तकाजे, अंदरूनी गुटबाजी, और वर्ष 2007 में पंचानन राय की मृत्यु के बाद से ही शिक्षक दल का प्रभाव कम होने लगा था। मतभेद के चलते शिक्षक दल से छिटककर अलग हुए नेताओं ने अलग ठीहे बनाए या तलाशे ।