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Tuesday, August 25, 2026

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026: उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक सम्मानित होंगे

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026: उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक सम्मानित होंगे


नई दिल्ली, 25 अगस्त। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षकों/फैकल्टी सदस्यों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 प्रदान करेंगी।

शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार इस वर्ष चयनित 21 शिक्षकों में केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों से 12, राज्य विश्वविद्यालयों से 5 तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों से 4 शिक्षक शामिल हैं। चयन प्रक्रिया में शिक्षण-अधिगम की प्रभावशीलता, आउटरीच गतिविधियां, शोध एवं नवाचार तथा प्रायोजित शोध, फैकल्टी विकास कार्यक्रम और कंसल्टेंसी जैसे विभिन्न मानकों को आधार बनाया गया।


राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए इस वर्ष ऑनलाइन नामांकन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किए गए थे। इसमें स्व-नामांकन के साथ संस्थागत और सहकर्मी नामांकन की व्यवस्था भी थी। प्रारंभिक स्तर पर स्क्रीनिंग के बाद ज्यूरी की समिति द्वारा अंतिम चयन किया गया।

उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के दायरे में वर्ष 2023 में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।


पुरस्कार पाने वाले 21 शिक्षक एवं उनके संस्थान

  • प्रो. अवलोकिता अग्रवाल — IIT Roorkee, Uttarakhand
  • प्रो. कीर्ति चंद्र साहू — IIT Hyderabad, Telangana
  • प्रो. विनय चमौला — BITS Pilani, Rajasthan
  • डॉ. श्रीकांत गोल्लापुडी — IIT Bhubaneswar, Odisha
  • प्रो. मिथुन राधाकृष्ण — IIT Gandhinagar, Gujarat
  • प्रो. सौरव दत्ता — IISER Bhopal, Madhya Pradesh
  • प्रो. विक्रम विशाल — IIT Bombay, Maharashtra
  • प्रो. सरवैया जयराजसिंह इंद्रजीतसिंह — National Forensic Sciences University, Gandhinagar, Gujarat
  • प्रो. शंकर प्रसाद रथ — IIT Kanpur, Uttar Pradesh
  • डॉ. मनीषा निगम — Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University, Srinagar, Uttarakhand
  • डॉ. अमर मोहनराव ताकसांडे — Jawaharlal Nehru Medical College (JNMC), Wardha, Maharashtra
  • डॉ. अरुण बाबू — All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), Mangalagiri, Andhra Pradesh
  • डॉ. पुख्रम्बम लिलाबती देवी — Manipur University, Imphal, Manipur
  • प्रो. डॉ. आशुतोष मोहन — Institute of Management Studies, Banaras Hindu University (BHU), Varanasi
  • प्रो. अंकुरन दत्ता — Gauhati University, Guwahati, Assam
  • सुश्री शिवानी वी. — Karnataka Sanskrit University, Bengaluru
  • प्रो. राजीव चौधरी — Pt. Ravishankar Shukla University, Raipur, Chhattisgarh
  • डॉ. विश्वनाथ एच. एस. — M.E.I. Polytechnic, Bengaluru, Karnataka
  • डॉ. शशिकला एस. — PSG Polytechnic College, Coimbatore, Tamil Nadu
  • डॉ. कन्नन रथिनम — Sakthi Polytechnic College (Govt. Aided), Erode, Tamil Nadu
  • डॉ. संदीपन्न प्रल्हाद नारोटे — Government Polytechnic, Solapur, Maharashtra


Saturday, August 22, 2026

कक्षा-9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक वीडियो निर्माण हेतु अध्यापकों का आनलाइन पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।

कक्षा-9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक वीडियो निर्माण हेतु अध्यापकों का आनलाइन पंजीकरण कराने के सम्बन्ध में।


Monday, August 17, 2026

महज 940 शिक्षकों के भरोसे 570 संस्कृत विद्यालयों के छात्रों का भविष्य

महज 940 शिक्षकों के भरोसे 570 संस्कृत विद्यालयों के छात्रों का भविष्य


प्रयागराज । संस्कृत विद्यालयों में पठन-पाठन की स्थिति खस्ताहाल है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्कृत विद्यालय के छात्रों का भविष्य अधर में है। प्रदेश में 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालय संचालित हैं। इनमें शिक्षकों के 2549 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 940 शिक्षक ही तैनात हैं। प्रधानाचार्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। 657 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 170 प्रधानाचार्य ही कार्यरत हैं।


शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ की छात्र संख्या पर भी पड़ रहा है। प्रांतीय संस्कृत विद्यालय कल्याण समिति के प्रदेश महामंत्री आनंद उपाध्याय का कहना है कि संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों के साथ ही संसाधनों का अभाव है। कुछ विद्यालय संविदा शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं।


प्रबंधकों को भर्ती का अधिकार, आदेश का इंतजार : शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की कमी को देखते हुए शासन ने हाल में संस्कृत विद्यालयों में नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। इसके तहत माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की भर्ती शिक्षा सेवा चयन आयोग के बजाय विद्यालयों के प्रबंधकों के माध्यम से किए जाने की बात कही गई है। एडी माध्यमिक कामता राम पाल का कहना है कि संस्कृत विद्यालयों में भर्ती प्रबंधकों को ही करनी है, चयन आयोग इनकी नियुक्ति नहीं करेगा।

पढ़ाई प्रभावित, परंपरा पर भी असर
संस्कृत केवल एक विषय नहीं बल्कि भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष और शास्त्रीय ज्ञान की प्रमुख भाषा है। विद्यालयों में नियमित पढ़ाई न होने से विद्यार्थियों की रुचि भी कम हो रही है। एक महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यव्रत मिश्र के मुताबिक माध्यमिक स्तर पर संस्कृत शिक्षा कमजोर होने का असर आगे चलकर उच्च शिक्षा और संस्कृत के विद्वानों की नई पीढ़ी पर भी पड़ सकता है।

2011 के बाद भर्ती प्रक्रिया भी सवालों में
शिक्षा निदेशालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2011 में मंडलीय समिति के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया हुई थी। इसमें अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन और बस्ती मंडल में नियुक्तियां हुईं। आजमगढ़ मंडल में मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से नियुक्तियां नहीं हो सकीं।

शासन के आदेश पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। - प्रताप सिंह बघेल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा


Thursday, August 13, 2026

शिक्षकों को कम वेतन देने में फंसे निजी स्कूल, शिक्षा के व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने उठाए सवाल, फीस से हुई आमदनी का 75 फीसदी वेतन में नहीं कर रहे भुगतान

शिक्षकों को कम वेतन देने में फंसे निजी स्कूल, शिक्षा के व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने उठाए सवाल, फीस से हुई आमदनी का 75 फीसदी वेतन में नहीं कर रहे भुगतान

प्रयागराज, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर की मांगी रिपोर्ट


प्रयागराज। शिक्षकों को कम वेतन देने में दर्जनों निजी स्कूल फंस गए हैं। विधान परिषद की शिक्षा का व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने इस पर सवाल उठाया है। प्रयागराज की रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर प्रयागराज समेत लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और गोरखपुर के निजी स्कूलों की भी जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। नियम है कि प्राइवेट स्कूलों को फीस से हुई आय की 75 प्रतिशत धनराशि शिक्षकों के वेतन मद में व्यय करनी चाहिए, लेकिन 2024 में प्रस्तुत शहर की रिपोर्ट में कई स्कूल इस मानक पर खरे नहीं उतरे हैं।


जिले के 35 स्कूलों से आमदनी और शिक्षकों के वेतन मद में भुगतान के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। समिति का मानना है कि इस तरह की गड़बड़ी कई अन्य जनपदों में भी होने की संभावना है। समिति ने वर्ष 2021 से 2024 तक तीन वित्तीय वर्षों की रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अपनी आमदनी का आधा भी खर्च नहीं किया है।

समिति ने प्रमुख सचिव से यह अपेक्षा की है कि अपनी आख्या एक महीने के अंदर प्रस्तुत करें। जांच के आदेश मिलने पर बीएसए ने शहर के 35 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

Wednesday, August 5, 2026

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए नई नीति से सरकार का इंकार, 2001 के शासनादेश का दिया हवाला

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए नई नीति से सरकार का इंकार, 2001 के शासनादेश का दिया हवाला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या-20 के उत्तर में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु फिलहाल कोई नई नीति या सेवा नियमावली बनाने पर सरकार विचार नहीं कर रही है।

सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 के शासनादेश में पहले से निर्धारित हैं। इसके अनुसार अंशकालिक अध्यापकों का पारिश्रमिक विद्यालय प्रबंधन अपने संसाधनों से नियमित रूप से पूरे शिक्षण सत्र के दौरान देगा तथा उसका लेखा-जोखा भी रखा जाएगा। साथ ही यह भी प्रावधान है कि उनका भुगतान न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत कुशल श्रमिकों के लिए समय-समय पर निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगा।

उत्तर में यह भी कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन ऐसे अंशकालिक शिक्षकों के लिए नियमानुसार भविष्य निधि (EPF) तथा जीवन बीमा जैसी योजनाएं भी लागू करेगा, जिनमें नियोक्ता का अंशदान प्रबंधन अपने निजी संसाधनों से वहन करेगा।

इस प्रकार सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अलग से नई सेवा नीति बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और वर्तमान व्यवस्था 2001 के शासनादेश के अनुसार ही संचालित रहेगी।


Wednesday, July 29, 2026

कैशलेस चिकित्सा योजना में सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शामिल करने को उठ रही मांग

कैशलेस चिकित्सा योजना में सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शामिल करने को उठ रही मांग


लखनऊ। मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना में सेवारत बेसिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को शामिल किए जाने के बाद अब सेवानिवृत्त शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त कर्मचारियों को भी योजना का लाभ देने की मांग तेज हो गई है। विभिन्न शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सभी पात्र वर्गों को बिना भेदभाव योजना में शामिल करने की मांग की है।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने इसे सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ असमान व्यवहार बताते हुए कहा कि जिस प्रकार राज्यकर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी चिकित्सा सुविधा मिलती है, उसी प्रकार शिक्षकों को भी समान अधिकार मिलना चाहिए। वहीं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और मृतक आश्रित नियुक्त कर्मचारियों को भी योजना के दायरे में लाने की मांग उठाई गई है।

इस बीच बेसिक शिक्षा से सेवानिवृत्त शिक्षक देवेंद्र दत्त त्रिवेदी ने भी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के हजारों सेवानिवृत्त शिक्षक वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं देने के बाद बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना से बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को सेवा निवृत्त बेसिक शिक्षकों को भी समान रूप से योजना में शामिल कर उन्हें सम्मानजनक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षकों के आजीवन योगदान के प्रति राज्य का सम्मान भी होगा।