शिक्षकों को कम वेतन देने में फंसे निजी स्कूल, शिक्षा के व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने उठाए सवाल, फीस से हुई आमदनी का 75 फीसदी वेतन में नहीं कर रहे भुगतान
प्रयागराज, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर की मांगी रिपोर्ट
प्रयागराज। शिक्षकों को कम वेतन देने में दर्जनों निजी स्कूल फंस गए हैं। विधान परिषद की शिक्षा का व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने इस पर सवाल उठाया है। प्रयागराज की रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर प्रयागराज समेत लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और गोरखपुर के निजी स्कूलों की भी जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। नियम है कि प्राइवेट स्कूलों को फीस से हुई आय की 75 प्रतिशत धनराशि शिक्षकों के वेतन मद में व्यय करनी चाहिए, लेकिन 2024 में प्रस्तुत शहर की रिपोर्ट में कई स्कूल इस मानक पर खरे नहीं उतरे हैं।
जिले के 35 स्कूलों से आमदनी और शिक्षकों के वेतन मद में भुगतान के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। समिति का मानना है कि इस तरह की गड़बड़ी कई अन्य जनपदों में भी होने की संभावना है। समिति ने वर्ष 2021 से 2024 तक तीन वित्तीय वर्षों की रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अपनी आमदनी का आधा भी खर्च नहीं किया है।
समिति ने प्रमुख सचिव से यह अपेक्षा की है कि अपनी आख्या एक महीने के अंदर प्रस्तुत करें। जांच के आदेश मिलने पर बीएसए ने शहर के 35 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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