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Tuesday, September 15, 2020

बीएड : निजी संस्थानों की फीस तय न होने से बढ़ सकती हैं छात्रों की मुसीबतें

बीएड : निजी संस्थानों की फीस तय न होने से बढ़ सकती हैं छात्रों की मुसीबतें।

निजी संस्थानों के लिए चालू शिक्षण सत्र में बीएड की फीस निर्धारित नहीं होने से छात्रों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। फीस का निर्धारण न होने से निजी संस्थानों के विद्यार्थियों को राज्य विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम की न्यूनतम फीस के बराबर भुगतान करना होगा।



राज्य विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों की फीस में भारी अंतर है। निजी बीएड शिक्षण संस्थानों के लिए वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक प्रथम वर्ष में 51,250 रुपये और द्वितीय वर्ष में 30,000 रुपये फीस थी। इसके बाद 2019-20 के लिए भी इसी दर से शुल्क निर्धारित किया गया। चालू सत्र में निजी संस्थानों के लिए सक्षम स्तर से बीएड की फीस निर्धारित नहीं की गई है।

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों के लिए पूरी फीस की भरपाई करती है, जबकि बीएड  में अन्य वर्गों के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति की कैपिंग लगाई गई है। इस साल कोरोना संकट के कारण ऑनलाइन क्लासेज ही चल रही हैं। इसलिए प्रदेश सरकार शुल्क भरपाई में कटौती करने पर भी विचार कर रही है। इसके पीछे तर्क है कि ऑनलाइन क्लासेज से संस्थानों का व्ययभार कम हुआ है।


 सक्षम स्तर से बीएड में ली जाने वाली फीस का निर्धारण जरूरी

अधिकारियों का कहना है कि 2 अक्तूबर को शुल्क प्रतिपूर्ति की जानी है। इसलिए सक्षम स्तर से बीएड में ली जाने वाली फीस का निर्धारण जरूरी है। चाहें इसकी राशि कम या ज्यादा हो, क्योंकि किसी भी स्थिति में यह राज्य विश्वविद्यालय में ली जाने वाली फीस से अधिक ही निर्धारित होगी।

अनुसूचित जाति की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति मद का एक चौथाई बजट बीएड पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले छात्रों पर व्यय होता है। कुल दो हजार करोड़ रुपये के सालाना बजट में से करीब 450 करोड़ रुपये बीएड के विद्यार्थियों को दिया जाता है। सामान्य वर्ग में आवेदन करने वाले पात्र विद्यार्थियों की संख्या करीब 25000 रहती है।


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Sunday, September 13, 2020

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में कटौती कर सकती है सरकार, नियमों में करना होगा बदलाव

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में कटौती कर सकती है सरकार, नियमों में करना होगा बदलाव

 
लखनऊ : गरीब विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में प्रदेश सरकार इस बार कटौती कर सकती है। कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल कॉलेजों के खर्च में भी कमी आई है। इसलिए सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति की रकम कम करने पर विचार कर रही है। साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं को मान्यता देने के लिए नियमावली में भी बदलाव किया जाएगा।


प्रदेश में समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग हर साल 57 लाख से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति देते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण छात्रवृत्ति की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। पहले चरण की छात्रवृत्ति दो अक्टूबर को बांटी जाती है। इसलिए समाज कल्याण विभाग ने दिशा-निर्देश मांगे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में छात्रवृत्ति किस प्रकार बांटी जाए, इसे लेकर अपर मुख्य सचिव वित्त के साथ समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण के अफसरों की एक बैठक हो चुकी है। इसमें कोई निर्णय नहीं हो सका। ऑनलाइन पढ़ाई में स्कूल, कॉलेज व संस्थानों का खर्च कम हुआ है, जबकि डेटा, लैपटॉप, कंप्यूटर, स्मार्ट फोन के लिए विद्यार्थियों का खर्च बढ़ गया है। शिक्षण संस्थान में छात्रों के न जाने से बिजली-पानी व प्रयोगशाला से संबंधित खर्च भी बच रहे हैं।


’>>उच्चस्तरीय बैठक में जल्द हो सकता है फैसला

’>>हर साल 57 लाख विद्यार्थियों को दी जाती है छात्रवृत्ति

नियमों में करना होगा बदलाव

कक्षा में 75 फीसद उपस्थिति के नियम में भी बदलाव करना होगा। पाठ्यक्रम के लिए एनबीए (नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन) व नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल) की अनिवार्यता भी इस साल स्थगित करनी होगी।

Monday, September 7, 2020

चालू सत्र के लिए कम की जा सकती है शुल्क भरपाई की राशि, समाज कल्याण विभाग कर रहा विचार, शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी

चालू सत्र के लिए कम की जा सकती है शुल्क भरपाई की राशि, समाज कल्याण विभाग कर रहा विचार, शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी।

लखनऊ :  चालू सत्र के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों की शुल्क भरपाई की राशि कम की जा सकती है। कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं के कारण शिक्षण संस्थानों पर कम हुए व्यय-भार को देखते हुए इस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस मामले में कोई अंतिम फैसला शासन स्तर से ही होगा।

प्रदेश सरकार सभी वर्गों के गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की सुविधा देती है। अनुसूचित जाति व जनजाति के परिवारों की सालाना आमदनी ढाई लाख रुपये और शेष वर्गों के लिए दो लाख रुपये सालाना आमदनी होने पर यह सुविधा दी जाती है। कोई भी छात्र न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति होने पर इस सुविधा का लाभ ले सकता है। हालांकि, अभी तक यह व्यवस्था ऑनलाइन क्लासेज के आधार पर थी। पहली बार इसे ऑनलाइन पढ़ाई के आधार पर करने पर भी सहमति बन चुकी है। समाज कल्याण विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऑनलाइन पढ़ाई में जहां छात्रों का डाटा, लैपटॉप, कंप्यूटर या स्मार्टफोन का खर्च बढ़ जाता है, वहीं शिक्षण संस्थानों पर भार कम होता है। विद्यार्थियों के शिक्षण संस्थान में न आने से उनके कई तरह के खर्चे (बिजली-पानी व प्रयोगशाला आदि से संबंधित) बचते हैं। इसी आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि भी कम करने पर विचार किया जा रहा है। जिस अनुपात में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कम की जाएगी, उसी अनुपात में शिक्षण संस्थानों को भी अपनी फीस कम करनी होगी।



शासन के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि इस संबंध में तमिलनाडु में लागू व्यवस्था का अध्ययन कराया जा रहा है। इसके लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया है। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर समाज कल्याण विभाग इस बाबत ठोस प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजेगा। सभी संबंधित विभागों से बात करके शासन इस मुद्दे पर उचित निर्णय लेगा।

इस तरह होती है शुल्क भरपाई : प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों की पूरी फीस की भरपाई की जाती है, जबकि सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोचिंग की व्यवस्था लागू है। इसके तहत समूह-1 के पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अधिकतम 50 हजार हजार, समूह-3 में 20 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसी तरह समूह-2 के पाठ्यक्रमों में अधिकतम 30 और समूह-4 के पाठ्यक्रमों में अधिकतम 10 हजार रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति की जाती है।


प्रदेश में अब सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के 60 फीसद नंबर होने पर ही उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिल पाएगा। इससे कम अंकों पर वे आवेदन नहीं कर सकेंगे। 60 फीसद की न्यूनतम अर्हता के साथ मेरिट के आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा। मेरिट बढ़ भी सकती है। समाज कल्याण विभाग ने यह बदलाव प्रतिपूर्ति के नियमों में किया है।


इंटर में 60, स्नातक में 55 फीसद अंक अनिवार्य : नई नियमावली के अनुसार स्नातक स्तर पर शुल्क प्रतिपूर्ति का आवेदन करने वालों के लिए 12वीं में न्यूनतम 60 फीसद अंक अनिवार्य हैं, स्नातकोत्तर कोर्स की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए स्नातक में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।



कोरोना के चलते बजट घटा : कोरोना संक्रमण का असर सामान्य वर्ग की छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति के बजट पर भी पड़ा है। सरकार ने वर्ष 2020-21 का बजट 325 करोड़ रुपये कम करके 500 करोड़ कर दिया है। ऐसे में न्यूनतम अर्हता बढ़ाकर आवेदनों की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

पिछड़े वर्ग के लिए 50 फीसद अंक अनिवार्य : पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में पहले से ही 50 फीसद अंक की अनिवार्यता है। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि बजट के आधार पर मेरिट सूची बनती है। वर्ष 2019-20 में 67 फीसद तक अंक पाने वालों को ही लाभ मिल सका था।


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Saturday, September 5, 2020

छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति : शिक्षण संस्थान 30 सितम्बर तक दें सीट, कोर्स व फीस का डाटा

शिक्षण संस्थान 30 सितम्बर तक दें सीट, कोर्स व फीस का डाटा


लखनऊ : प्रदेश भर के शिक्षण संस्थान अब 30 सितम्बर तक छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से जुड़े पाठ्यक्रमों के मास्टर डाटाबेस में शामिल हो सकते हैं। अभी तक अंतिम तारीख 31 अगस्त थी। इस डाटाबेस में शिक्षण संस्थानों को अपने यहां चलने वाले कोर्स, उसकी फीस व सीट समेत अन्य जानकारी देनी होती है। कोरोना संकट को देखते हुए सरकार ने समय सीमा को एक माह के लिए बढ़ाया है।





गलती सुधार के लिए रिसेट का विकल्प

मास्टर डाटाबेस में दर्ज की जाने वाली जानकारियों में अक्सर शिक्षण संस्थानों के स्तर पर गलतियां हो जाती है। इसका खामियाजा छात्रों को भी भुगतना पड़ जाता है। ऐसे में फीस, सीट या कोर्स आदि में गलती सुधार के लिए संस्थानों को निदेशालय तक कई चक्कर लगाने पड़ते थे। इसे देखते हुए सरकार ने इस बार मास्टर डाटाबेस में रिसेट का विकल्प दे दिया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ अमरनाथ यति बताते हैं कि संस्थान अब मास्टर डाटा को डिजिटल लॉक करने के बाद भी स्वयं संशोधन कर सकते हैं। इसके लिए रिसेट का विकल्प दिया गया है, लेकिन यह विकल्प 30 सितम्बर तक ही काम करेगा।


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Monday, July 27, 2020

ऑनलाइन पढ़ाई को हाजरी मानेगी सरकार, छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का बनेगी आधार

ऑनलाइन पढ़ाई को हाजरी मानेगी सरकार, छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का बनेगी आधार।

लखनऊ :: प्रदेश सरकार ऑनलाइन पढ़ाई को कक्षा में हाजिरी की तरह मानेगी। इसी के आधार पर माध्यमिक, उच्च शिक्षा और तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए समाज कल्याण विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।




वर्तमान में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ लेने के लिए यह अनिवार्य है कि विद्यार्थी की उपस्थिति न्यूनतम 75 प्रतिशत रही हो। परीक्षा देने के लिए भी इतनी उपस्थिति जरूरी है।

कोरोना के चलते स्कूल-कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थान ऑनलाइन क्लास चला रहे हैं इसलिए समाज कल्याण विभाग ने ऑनलाइन क्लासेज में उपस्थिति को कक्षा में व्यक्तिगत हाजिरी के समान ही स्वीकार करने का निर्णय लिया है। इस बारे में प्रस्ताव तैयार करने के लिए इसी हफ्ते शासन ने सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ ऑनलाइन बैठक करने की कार्ययोजना बनाई है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बैठक में उपस्थिति को लेकर नियम तय होंगे ताकि, छात्रों को योजना का लाभ मिल सके।


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Thursday, July 23, 2020

प्रदेश सरकार की ओर से गरीब छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति व फीस भरपाई में फंसा हाजिरी का पेच

प्रदेश सरकार की ओर से गरीब छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति व फीस भरपाई में फंसा हाजिरी का पेच।

लखनऊ :: प्रदेश सरकार की ओर से अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के गरीब छात्र छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की योजना में अब हाजिरी का पेच फंस गया है। समाज कल्याण विभाग की ओर से चलाई जाने वाली इस योजना में नियमों के तहत ऐसे जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को कक्षा में 75 प्रतिशत हाजिरी पर ही छात्रवृत्ति और फीस भरपाई दी जाती है।




कोरोना संकट की वजह से जुलाई से शैक्षिक सत्र ऑनलाइन पढ़ाई के सहारे शुरू हुआ। इस आनलाइन पढ़ाई में कक्षा में हाजिरी का कोई पुख्ता प्रमाण शिक्षण संस्थान कैसे दे पाएंगे? यही नहीं हालात सुधरने पर आगामी महीनों में जब भी ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होगी तो फिर बाकी बचे शैक्षिक सत्र के कितने महीनों में कितने प्रतिशत हाजिरी का मानक छात्रवृत्ति, फीस भरपाई दिलवा पाएगा। इस बारे में अभी शुरुआती दौर में सभी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन से बातचीत की जा रही है। समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के मामलों को देख रहे सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्र ने बताया कि जल्द ही इस बारे में विभाग के निदेशक के साथ बैठक होगी।


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