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Wednesday, February 25, 2026

9वीं व 10वीं के ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति ₹750 रुपये बढ़ी, छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई का लाभ पाने के लिए अभिभावकों की आय सीमा भी बढ़ी

9वीं व 10वीं के ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति ₹750 रुपये  बढ़ी, छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई का लाभ पाने के लिए अभिभावकों की आय सीमा भी बढ़ी

आय सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख, सामान्य वर्ग को भी जल्द मिलेगा फायदा


लखनऊ। कक्षा 9 व 10 के पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को अब 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये छात्रवृत्ति मिलेगी। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई का लाभ पाने के लिए अभिभावकों की आय सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये सालाना करने की घोषणा की।


राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि वर्ष 2026-27 में लगभग 38 लाख विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है। दिव्यांगजन पेंशन राशि 1000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह होने जा रही है। वर्ष 2017 से पहले यह राशि मात्र 300 रुपये थी, जिसे योगी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर अब पांच गुना तक पहुंचा दिया है। इसके लिए पेंशन मद में 1400 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था हो चुकी है।

मंत्री ने कहा कि पिछड़े वर्ग की गरीब बेटियों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना में भी आय सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। पहले यह ग्रामीण क्षेत्र में 46000 और शहरी क्षेत्र में 56000 रुपये थी। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीआरसी) स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है।


अब सितंबर में ही छात्रवृत्ति वितरण : नरेंद्र कश्यप ने कहा कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 से एक भी पात्र छात्र-छात्रा भुगतान से वंचित नहीं रह रहा है। पहले छात्रवृत्ति वितरण वित्त वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को होता था, लेकिन योगी सरकार में 25 सितंबर से ही छात्रवृत्ति वितरण प्रारंभ कर दिया। अब तक लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।


सामान्य वर्ग के लिए भी आयसीमा में वृद्धि पर सहमति : असीम अरुण
समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भी छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में आयसीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये सालाना किए जाने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। अगले वित्त वर्ष से इसे लागू कर दिया जाएगा। अभी सामान्य व पिछड़े वर्ग के करीब 50 लाख छात्र इस योजना का लाभ पाते हैं।

Wednesday, November 19, 2025

वित्तीय वर्ष 2024-25 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत वंचित समस्त वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति भुगतान हेतु संशोधित समय सारिणी निर्गत किये जाने के सम्बन्ध में

वित्तीय वर्ष 2024-25 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत वंचित समस्त वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति भुगतान हेतु संशोधित समय सारिणी निर्गत किये जाने के सम्बन्ध में 




Wednesday, September 3, 2025

छह लाख पात्र छात्रों को शुल्क भरपाई न होने पर योगी सरकार सख्त, 14 अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि, एक बाबू सस्पेंड, मुख्यमंत्री ने 100 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश

छह लाख पात्र छात्रों को शुल्क भरपाई न होने पर योगी सरकार सख्त, 14 अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि, एक बाबू सस्पेंड, मुख्यमंत्री ने 100 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश, कई विश्वविद्यालयों के नोडल, आईटीआई के 8 जेडी भी कार्रवाई की जद में


लखनऊ। प्रदेश में छह लाख पात्र छात्रों को पिछले साल की शुल्क भरपाई न होने पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अयोध्या, बहराइच, रायबरेली व सीतापुर समेत 14 जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी वाले जिला बरेली के बाबू प्रमोद जोशी को निलंबित कर दिया गया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 100 से ज्यादा अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसमें कई विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी और आईटीआई के आठ मंडलों के संयुक्त निदेशक भी शामिल हैं।

प्रदेश सरकार ढाई लाख रुपये तक सालाना आय वाले एससी-एसटी छात्रों और दो लाख रुपये तक आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई करती है। वर्ष 2024-25 में शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अधिकारियों की लापरवाही से सभी वर्गों के करीब 6 लाख पात्र छात्र योजना का लाभ नहीं पा सके। कहीं लापरवाह अधिकारियों ने डाटा लॉक नहीं किया तो कहीं शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन आवेदन आगे ही नहीं बढ़ाए।


इन जिलों के समाज कल्याण बाबुओं को भी प्रतिकूल प्रविष्टि

विपिन कुमार व प्रवीन माहेश्वरी (अलीगढ़), विष्णु चंद्र वर्मा व भूपेंद्र सिंह (औरेया), विकास श्रीवास्तव (अयोध्या), मसीह उल्लाह अंसारी व नवनीत आर्या (बहराइच), विकास पाठक (बलिया), अंकित कुमार (बिजनौर), सारांश श्रीवास्तव (गौतमबुद्धनगर), संजीव शर्मा (गाजियाबाद), जितेंद्र कुमार (कन्नौज), मनोज कुमार व अनूप कुमार (प्रतापगढ़), आशीष पांडे (रायबरेली), सुरेश गौतम व अरुण वर्मा (सीतापुर), उत्तम कुमार (वाराणसी)।


ये भी आए कार्रवाई की जद में 
सीएम ने इस मामले में लापरवाही करने वाले राज्य विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विवि, संबद्धता देने वाली एजेंसियों और निजी विश्वविद्यालयों के 66 नोडल अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई के लिए सक्षम स्तर से कार्रवाई कराने के भी निर्देश दिए हैं। 14 राज्य विश्वविद्यालयों और 19 निजी विश्वविद्यालयों को कठोर चेतावनी जारी की जा रही है। 

आयुष विभाग के दो नोडल अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा आयुष विवि गोरखपुर, स्टेट मेडिकल फैकल्टी, अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, राम मनोहर लोहिया संस्थान, एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विवि के छात्रवृत्ति के नोडल अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। गोरखपुर, आगरा, वाराणसी, अलीगढ़, लखनऊ, चित्रकूट, अयोध्या और सहारनपुर के आईटीआई के संयुक्त निदेशकों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।



इन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि

मामले में अलीगढ़ की जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल, औरेया की समाज कल्याण अधिकारी इंदिरा सिंह, अयोध्या के रणविजय सिंह, बहराइच के रमाशंकर, बलिया के तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी दीपक श्रीवास्तव, बरेली के सुधांशु शेखर, बिजनौर के जागेश्वर सिंह, गौतमबुद्धनगर के सतीश कुमार, गाजियाबाद के वेद प्रकाश मिश्रा, कन्नौज के सत्य प्रकाश सिंह, प्रतापगढ़ के नागेंद्र मौर्य, रायबरेली की सृष्टि अवस्थी, सीतापुर के हर्ष मवार और वाराणसी के जिला समाज कल्याण अधिकारी गिरीश दुबे को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है


बरेली में सबसे ज्यादा 40 संस्थानों के 1600 विद्यार्थी प्रभावित

बरेली में सबसे ज्यादा 40 शिक्षण संस्थानों के 1600 पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिला। इसलिए वहां के बाबू प्रमोद जोशी को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया। बाराबंकी के समाज कल्याण बाबू प्रभात सिंह, हापुड़ के दीपक, झांसी के मनोज वर्मा और प्रयागराज के रामचंद्र यादव को कठोर चेतावनी जारी की गई है।


कार्रवाई की जद में आए एक अधिकारी अब आईआरएस

कार्रवाई की जद में आए बलिया के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपक श्रीवास्तव अब विभाग छोड़ चुके हैं। उनका भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में चयन हो चुका है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विधिक राय लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा

Monday, June 16, 2025

मोबाइल एप से भी छात्रवृत्ति के लिए कर सकेंगे आवेदन, NIC को एप विकसित करने की दी गई है जिम्मेदारी

मोबाइल एप से भी छात्रवृत्ति के लिए कर सकेंगे आवेदन, NIC को एप विकसित करने की दी गई है जिम्मेदारी

60 लाख छात्रों को होगा लाभ, छात्रों को स्टेटस का पता करना भी होगा आसान


लखनऊ। विद्यार्थियों के लिए जल्द ही मोबाइल एप से छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के लिए आवेदन करने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए एनआईसी को एप विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे यूपी के 60 लाख से ज्यादा छात्रों को फायदा होगा।

प्रदेश सरकार ढाई लाख रुपये तक सालाना आय वाले एससी-एसटी छात्रों और दो लाख रुपये तक सालाना आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को इस योजना का लाभ देती है। इसमें छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की जाती है।


अभी तक वेबसाइट के माध्यम से छात्र ऑनलाइन आवेदन करते हैं। इससे आवेदन में कोई खामी होने पर वे आसानी से इसकी सूचना प्राप्त नहीं कर पाते हैं। समाज कल्याण विभाग आवेदन को और सुगम बनाने के लिए नया एप विकसित करवा रहा है। इसपर पंजीकरण, आवेदन को पूर्ण करने और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा होगी।

साथ ही विभाग की ओर से विद्यार्थियों को नोटिफिकेशन भी भेजा जाएगा, बशर्ते वे एप की सेटिंग में इसकी अनुमति दें। इससे विद्यार्थियों को यह भी पता चलेगा कि उनके आवेदन का स्टेटस क्या है। भुगतान कब होगा। जब खाते में राशि जाएगी तो उसकी सूचना भी एप के माध्यम से विद्यार्थी ले सकते हैं।

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के एप अभी तक सिर्फ महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में ही विकसित हुए हैं। इससे शत-प्रतिशत पात्र छात्रों को योजना का लाभ देने की सरकार की मंशा पूरी हो सकेगी। चालू सत्र में ही यह व्यवस्था लागू होने की संभावना है

Tuesday, May 13, 2025

छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई : छात्रों के लिए एकल पंजीकरण होगा अनिवार्य, गड़बड़ियां रोकने को चालू वित्त वर्ष में ही लागू होगी व्यवस्था, हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र पाते हैं योजना का लाभ

छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई : छात्रों के लिए एकल पंजीकरण होगा अनिवार्य, गड़बड़ियां रोकने को चालू वित्त वर्ष में ही लागू होगी व्यवस्था, हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र पाते हैं योजना का लाभ


लखनऊ। छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई योजना में अब छात्रों के लिए एकल पंजीकरण (ओटीआर) अनिवार्य होगा। गड़बड़ियां रोकने के लिए चालू वित्त वर्ष में ही यह व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है। इस योजना में हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र लाभांवित होते हैं।


प्रदेश में छात्रवृत्ति योजनाएं कई विभागों से संचालित होती है। यहां तक कि किसान परिवारों के छात्रों के लिए मंडी परिषद भी यह योजना चलाती है। एक ही वित्त वर्ष में छात्र एक से अधिक योजनाओं में लाभ न पा सके, इसके लिए वन टाइम पंजीकरण (ओटीआर) की व्यवस्था अनिवार्य करने का फैसला किया गया है।


इसके तहत प्रत्येक छात्र को अब योजना का लाभ लेने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण (ओटीआर) कराना होगा। राज्य सरकार के पोर्टल पर भी आवेदन करते समय यह ओटीआर बताना होगा। खास बात यह है कि छात्र को पूरे विद्यार्थी जीवन में सिर्फ एक बार ओटीआर लेना होगा। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में ही सभी छात्रों को ओटीआर लेना अनिवार्य होगा।



छात्रवृत्ति में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई : 
छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि, गोरखपुर समेत कई संस्थानों के इस तरह के मामलों की जांच की जा रही है। जिलास्तर पर छात्रवृत्ति का डाटा लॉक न किए जाने से इस तरह की दिक्कतें पैदा हुई हैं। प्रदेश सरकार ने इस योजना में शत-प्रतिशत पात्र छात्रों को भुगतान के आदेश दिए हैं। इसके लिए अगले वित्त वर्ष के बजट से भी छूटे छात्रों को भुगतान की व्यवस्था की जा रही है। 


वित्त वर्ष 2024-25 में देखने में आया कि मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि, गोरखपुर के तमाम छात्रों का डाटा ही तय तिथि तक लॉक नहीं किया गया। इस वजह से 31 मार्च तक छात्र योजना का लाभ नहीं पा सके। प्रकरण में उच्चस्तर पर शिकायत हुई तो इन छात्रों को नए वित्त वर्ष में दो मई तक भुगतान हो सका। शासन इन मामलों की जांच करा रहा है कि किसी तकनीकी कारण से डाटा पोर्टल पर शो नहीं हुआ या फिर संबंधित अधिकारियों की लापरवाही रही। प्रमुख सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण सुभाष शर्मा ने बताया कि निदेशालय से रिपोर्ट मांगी गई है। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

Sunday, April 27, 2025

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य करने की तैयारी

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य करने की तैयारी 


लखनऊ। प्रदेश सरकार छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई योजना में गड़बड़ियां रोकने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य की जाएगी। यह व्यवस्था चालू सत्र से ही लागू करने की तैयारी है। इसके दायरे में 24-27 लाख छात्र आएंगे।


प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों को परिवार की सालाना आय ढाई लाख रुपये तक और अन्य वर्गों के लिए सालाना आय दो लाख रुपये तक होने पर इस योजना का लाभ दिया जाता है। केंद्र सरकार ने भी योजना में बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था लागू करने के लिए कहा है। इससे वास्तविक छात्र ही योजना का लाभ ले सकेंगे।


उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश सरकार ने पहले चरण में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए यह व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। आईटीआई से लेकर बीटेक, एमबीबीएस और एमबीए के विद्यार्थी इस दायरे में आएंगे।


 हर साल 60 लाख से ज्यादा छात्र योजना का लाभ पाते हैं। इनमें 40-45 फीसदी विद्यार्थी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के होते हैं। छात्रवृत्ति देने वाले चारों विभाग समाज कल्याण, जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण इस योजना को एक साथ लागू करेंगे। इस संबंध में शीघ्र ही आदेश जारी होने की संभावना है।