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Saturday, January 24, 2026

यूपी प्रमाण पोर्टल पर कॉलेजों का रिपोर्ट कार्ड, हर महीने 44 मानकों की कसौटी पर कसेंगे, लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ होगी कार्रवाई

यूपी प्रमाण पोर्टल पर कॉलेजों का रिपोर्ट कार्ड, हर महीने 44 मानकों की कसौटी पर कसेंगे, लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ होगी कार्रवाई


लखनऊ। डिग्री कॉलेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा व उच्च स्तरीय शोध सुनिश्चित करने के लिए यूपी प्रमाण पोर्टल तैयार किया गया है। अब इस पोर्टल के माध्यम से डिग्री कॉलेजों की निगरानी होगी, उनका मूल्यांकन और रैंकिंग की जाएगी। 44 मानकों की कसौटी पर कॉलेजों को कसा जाएगा और फिर रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहली बार ऐसी व्यवस्था की जा रही है।


राज्य स्तरीय क्वालिटी एश्योरेंस सेल (एसएलक्यूएसी) के माध्यम से इस पोर्टल पर नजर रखी जाएगी। सभी सरकारी व एडेड डिग्री कॉलेजों को इस पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। सभी डिग्री कॉलेज प्रमाण पोर्टल https://updcs.crispindia.net पर अपना पंजीकरण कराएंगे। जिस पर कॉलेज की पूरी प्रोफाइल के साथ साथ उनकी रैंकिंग भी प्रदर्शित होगी। 

हर महीने कॉलेजों को 44 मानकों पर अपने प्रदर्शन की रिपोर्ट खुद भरनी होगी। छात्रों व शिक्षकों की बॉयोमीट्रिक उपस्थिति, इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल में पंजीकरण, एनआईआरएफ रैंकिंग, रिसर्च, रिसर्च प्रोजेक्ट, आईएसओ सर्टीफिकेशन, एल्युमिनाई एसोसिएशन, कितने छात्र अप्रेंटिशसिप कर रहे हैं, एकेडमिक कैलेंडर का पालन व वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन और स्वयं पोर्टल के माध्यम से छात्रों को कराए जा रहे ऑनलाइन पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी देनी होगी। 100 अंकों में कॉलेजों का मूल्यांकन किया जाएगा। हर तीन-तीन महीने पर इसका रिपोर्ट कार्ड जारी होगा। लापरवाह कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी।


अब ग्रीन कैंपस भी बनाना होगाः डिग्री कॉलेजों ने अपने यहां हरियाली बढ़ाने और ग्रीन कैंपस बनाने के लिए क्या पहल की इसके अंक भी शामिल किए गए हैं यानी कॉलेजों में पेड़-पौधे लगाने और हरा-भरा परिसर बनाने को भी इसके माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा। सभी कॉलेजों को इसके लिए तैयारी करनी होगी वरना वह रैंकिंग में फिसल जाएंगे। उन्हें अधिक से अधिक पौधे लगाने को प्रेरित किया जाएगा।


साहित्यिक चोरी रोकने के लिए करेंगे उपाय
शोध कार्यों व प्रोजेक्ट वर्क में साहित्यिक चोरी रोकने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं या नहीं यह भी बताना होगा। अगर वह साहित्यिक चोरी रोकने के लिए उपाय नहीं कर रहे तो आगे उन्हें इसका प्रयोग करना ही होगा। जिससे कॉलेजों के शोध कार्यों व प्रोजेक्ट वर्क में मौलिकता बढ़ेगी। अभी कॉलेजों में इस तरह के उपाय नहीं किए जा रहे। आगे करना होगा।

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