
Wednesday, April 6, 2022

मदरसों से खत्म होंगे दीनी तालीम देने वाले 5339 शिक्षकों के पद, शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा असर
मदरसों से खत्म होंगे दीनी तालीम देने वाले 5339 शिक्षकों के पद, शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा असर
योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में मदरसा शिक्षा में कई बड़े बदलाव करने जा रही है। मदरसों में अब दीनी तालीम कम कर हंिदूी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों पर अधिक फोकस किया जाएगा। मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम को सरकार ऐसा बनाने जा रही है जिससे यहां के छात्र भी दूसरे बोर्ड के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। सरकार के इस फैसले से मदरसों से दीनी तालीम देने वाले 5339 शिक्षकों के पद चरणवार तरीके से खत्म हो जाएंगे। अब मदरसों में कुल 8129 शिक्षकों के पदों में से 6455 पद आधुनिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के रहेंगे।
प्रदेश में वित्त पोषित 558 मदरसे हैं, जिनमें 8129 शिक्षकों व 558 प्रधानाचार्य के पद हैं। इन पर सरकार हर साल 866 करोड़ रुपये खर्च करती है। इतनी बड़े खर्च के बावजूद मदरसों में छात्र संख्या लगातार घट रही है। इसका मुख्य कारण यहां ऐसे विषयों को पढ़ाया जाना जिसके कारण यहां के बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते हैं। इसलिए सरकार मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम में अहम बदलाव करने जा रही है। अभी तक कक्षा एक से पांच तक के मदरसों में सभी पांचों शिक्षक दीनी तालीम देने वाले होते हैं। कक्षा छह से आठ तक के मदरसों में तीन शिक्षकों में दो दीनी तालीम वाले होते हैं।
इसी प्रकार आलिया (कक्षा 9 व 10) स्तर के मदरसों में चार में से तीन शिक्षक दीनी तालीम देने के लिए होते हैं। यानी कक्षा छह से आठ व आलिया स्तर के मदरसों में अभी केवल एक-एक शिक्षक ही वैकल्पिक विषय पढ़ाने वाले होते हैं।
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डा. इफ्तिखार अहमद जावेद की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 में जरूरी संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने का प्रस्ताव पास हुआ।
इसमें तय हुआ कि प्रत्येक कक्षा के स्तर पर केवल एक शिक्षक ही दीनी तालीम देने के लिए रहेंगे। ऐसे में कक्षा एक से पांच तक के मदरसों में पांच शिक्षकों में एक शिक्षक दीनी तालीम व चार शिक्षक आधुनिक विषय पढ़ाने वाले रहेंगे। कक्षा छह से आठ तक के मदरसों में तीन शिक्षकों में एक दीनी तालीम व दो आधुनिक विषय पढ़ाने वाले रहेंगे।
इसी प्रकार आलिया स्तर के मदरसों में चार शिक्षकों में एक दीनी तालीम व तीन आधुनिक शिक्षा से जुड़े शिक्षक रहेंगे। वर्तमान में अब 8129 शिक्षकों के पदों में 7013 पद दीनी तालीम देने वाले व 1116 पद वैकल्पिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के हैं। नई व्यवस्था में अब 558 मदरसों में 1674 पद दीनी तालीम वाले शिक्षकों के रह जाएंगे।
दीनी तालीम देने वाले पुराने शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा असर
मदरसा बोर्ड के इस फैसले का दीनी तालीम देने वाले पुराने शिक्षकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जितने शिक्षक रिटायर होते जाएंगे उनके स्थान पर आधुनिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षक भर्ती होते जाएंगे। पहले चरण में जितने भी रिक्त पद हैं, उनमें आधुनिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षक भर्ती किए जाएंगे। जहां दीनी तालीम देने वाले शिक्षक अधिक हैं उन्हें दूसरे मदरसों में तबादला किया जाएगा।
अब 8129 पदों में 6455 शिक्षक रहेंगे हंिदूी, अंग्रेजी, विज्ञान व गणित पढ़ाने वाले, मदरसा शिक्षा में कई बड़े बदलाव करने जा रही योगी सरकार
मदरसा बोर्ड ने सर्वसम्मति से केवल एक प्रश्नपत्र दीनियात विषय का रखा है। बाकी पांच विषय हंिदूी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के रहेंगे। इसलिए अब तहतानिया, फौकानिया व आलिया स्तर के मदरसों में केवल एक-एक शिक्षक ही दीनियात विषयों के रहेंगे, अन्य सभी शिक्षक हंिदूी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान के रहेंगे। इसके लिए एक प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है।
-डा. इफ्तिखार अहमद जावेद, अध्यक्ष, मदरसा बोर्ड
महापुरुषों व स्वतंत्रता सेनानियों की पढ़ाई जाएगी जीवनी
मदरसों के छात्रों को अब भारत के महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जीवनी पढ़ाई जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यहां के बच्चों में देश प्रेम व भक्ति का भाव जागृत हो सके और वे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा ले सकें।

बांदा : उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति किए गए 7 करोड़ के फर्नीचर घोटाले में जांच समिति गठित
बांदा : उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति किए गए 7 करोड़ के फर्नीचर घोटाले में जांच समिति गठित
बांदा जनपद के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति किए गए 7 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के घटिया फर्नीचर घोटाले में जांच के लिए डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आपूर्तिकर्ता फर्म को 15 दिन के अंदर घटिया फर्नीचर न बदलने पर काली सूची में डालने और एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
जनपद के 494 उच्च प्राथ स्कूलों में 14.957 डेस्क बेच / फर्नीचर की आपूर्ति की गई है। इसके लिए शासन ने 7 करोड़ 11 लाख 95 हजार 530 रुपये जारी किए हैं। प्रत्येक डेस्क की कीमत 4760 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है। फर्नीचर की आपूर्ति सीतापुर की एक फर्म को सौंपी गई है। फर्म जो फर्नीचर स्कूलों को आपूर्ति किया है यह इतना घटिया है कि उठाने धरने में ही टूट रहा है।
30 मार्च (बुधवार) को प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला यूनिट ने जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी के नेतृत्व में बीएसए व अन्य अधिकारियों की शिकायती पत्र देकर घटिया फर्नीचर आपूर्ति की गैर विभागीय अधिकारियों से जांच कराने की मांग की थी।
डीएम अनुराग पटेल ने घटिया फर्नीचर संबंधी अमर उजाला में छपी खबर का हवाला देकर जारी आदेश में इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। समिति के सदस्यों में डिप्टी कलेक्टर लाल सिंह सहित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आईटीआई अनुदेशक (काष्ठ) नरेंद्र प्रजापति शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के अंदर जांच करके अपनी विस्तृत संयुक्त जांच रिपोर्ट उन्हें पेश करें।
उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपाल सिंह ने फर्नीचर आपूर्ति करने वाली सीतापुर की फर्म को जारी आदेश में कहा है कि 15 अप्रैल तक सभी अति/खराब फर्नीचर बदलना सुनिश्चित करें वरना उच्चाधिकारियों को सूचित करके फर्म को काली सूची में डालकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। बीएसए ने फर्म को इस बात के लिए भी लताड़ा है कि फर्नीचर बदलने के बारे में पहले भी आदेश दिए गए थे लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। बीएसए ने सभी खंड शिक्ष कारियों को निर्देश दिए हैं. कि अपने क्षेत्र के स्कूलों में क्षतिग्रस्त या खराबडेस्क मैच की सूची दो दिन में उपलब्ध कराएं।

संसाधन के साथ बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा: बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री
आगामी शैक्षिक वर्ष की कार्ययोजना तय करने हेतु बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने ली जिम्मेदारों संग बैठक।
संसाधन के साथ बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा: बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री
लखनऊ : बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा है कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से किया जाए, इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं हो।
बच्चों को संसाधन के साथ बेहतर शिक्षा दी जाए इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। बेसिक शिक्षा निदेशालय में मंगलवार को विभागीय अधिकारियों के साथ योजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने उक्त बातें कहीं।(
माननीय मुख्यमंत्री श्री MYogiAdityanathth जी के निर्देशानुसार आगामी शैक्षिक वर्ष की कार्ययोजना तय करने के लिए आज लखनऊ बेसिक शिक्षा निदेशालय सभागार में महानिदेशक बेसिक शिक्षा श्रीमती अनामिका सिंह, विशेष सचिव श्री अवधेश तिवारी समेत विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा और आगामी कार्य योजना पर चर्चा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

KVS : केवीएस में दाखिले की उम्र से जुड़े मसले पर हो रहा है विचार
KVS : केवीएस में दाखिले की उम्र से जुड़े मसले पर हो रहा है विचार
kvs admission उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) द्वारा दाखिले की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर छह साल किए जाने पर सवाल खड़ा उठाया है। न्यायालय ने केवीएस से कहा है कि आपने खुद अपने हलफनामे में माना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार से मिले निर्देश पर दाखिल की उम्र सीमा बढ़ाई है।
जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा है कि ‘केंद्र के जिस पत्र का हवाला देकर दाखिले की उम्र 5 साल से बढ़ाकर छह साल किया है, उसमें स्पष्ट तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए अगले दो से तीन साल में रोड मैप तैयार करने को कहा गया है, ऐसे में आपका रोड मैप कहां है। उन्होंने कहा कि यदि आपने इस बारे में कोई रोड मैप तैयार किया है तो वह कहां है।’ केवीएस ने दाखिले की उम्रसीमा बढ़ाने को सही ठहराते हुए अपने हलफनामे में कहा था कि पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए मिले निर्देश के तहत ऐसा किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान केवीएस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने न्यायालय को बताया कि मामले पर विचार किया जा रहा है और इस बारे में शुक्रवार को समुचित जवाब दिया जाएगा। इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
इससे पहले, उच्च न्यायालय ने सोमवार को केवीएस से यह बताने के लिए कहा था कि इस साल पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र पहले की तरह पांच साल की जा सकती है या नहीं। न्यायालय ने केवीएस के वकील से इस बारे में दिशा निर्देश लेने और अवगत कराने का निर्देश दिया था।
न्यायालय ने केंद्रीय विद्यालयों में पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम उम्र पांच वर्ष से बढ़ाकर छह साल किए जाने के केवीएस के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया था। इससे पहले याचिकाकर्ता बच्ची की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि वह न तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को चुनौती दे रहे हैं और न ही केवीएस के अधिकार को।
अग्रवाल ने कहा था कि वह सिर्फ आनन फानन में दाखिले की न्यूनतम उम्र में बढ़ोतरी किए जाने और इसके लिए अपनाए तरीके के खिलाफ हैं। इसके बाद जस्टिस पल्ली ने केवीएस के वकील से ‘यह बताने के लिए कहा था कि इस साल पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र पहले की तरह पांच साल की जा सकती है या नहीं। उन्होंने कहा था कि यदि केवीएस किसी तरह का इस बारे में निर्णय नहीं लेता है तो वह अगली सुनवाई पर समुचित आदेश पारित करेंगे।
केवीएस ने पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामा में दाखिले की न्यूनतम उम्र छह साल किए जाने को सही ठहराया था। केवीएस ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम उम्र छह साल करने का फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है।
KVS Admission 2022 : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- केंद्रीय विद्यालय संगठन बताए, इस साल दाखिले की उम्र 5 साल की जा सकती है या नहीं?
KVS Admission 2022 : दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) से यह बताने के लिए कहा है कि इस साल पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र पहले की तरह 5 साल की जा सकती है या नहीं। हाईकोर्ट ने केवीएस के वकील से इस बारे में दिशा निर्देश लेने और अवगत करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस रेखा पल्ली ने केंद्रीय विद्यालयों में पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम उम्र पांच वर्ष से बढ़ाकर छह साल किए जाने के केवीएस के फैसले के चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को निर्देश दिया। इससे पहले याचिकाकर्त बच्ची की ओर से वकील अशोक अग्रवाल ने कहा कि वह न तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को चुनौती दे रहे हैं और ना ही केवीएस के अधिकार को। अग्रवाल ने कहा कि वह सिर्फ आनन-फानन में दाखिले की न्यूनतम उम्र में बढ़ोतरी किए जाने और इसके लिए अपनाए गए तरीके के खिलाफ हैं।
इसके बाद जस्टिस पल्ली ने केवीएस के वकील से यह बताने के लिए कहा है कि इस साल पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र पहले की तरह 5 साल किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि केवीएस किसी तरह का इस बारे में निर्णय नहीं लेता है तो वह अगली सुनवाई पर समुचित आदेश पारित करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल यानी गुरुवार को होगी।
केवीएस ने पिछले सप्ताह हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा में दाखिले की न्यूनतम उम्र छह साल किए जाने को सही ठहराया था। केवीएस ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम उम्र छह साल करने का फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है।
केवीएस ने यह भी कहा है कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत छह से 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही कहा है कि केंद्र सरकार ने इस मसले पर गहन विचार-विमर्श के बाद एनईपी 2020 को अधिसूचित किया है, जिसमें शैक्षणिक और पाठ्यचर्या पुनर्गठन की एक नई योजना लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा केवीएस ने केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2021 में सभी राज्यों को लिखे गए पत्र का हवाला दिया है, जिसमें अगले दो से तीन साल में एनईपी को लागू करने का रोडमैप तैयार करने को कहा गया है। साथ ही सरकार द्वारा केवीएस को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया गया है।
केवीएस ने एक बच्ची की ओर से उम्रसीमा बढ़ाने के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करने की मांग की है। केंद्रीय विद्यालय में पहली कक्षा में दाखिले का इंतजार कर रही बच्ची आरिन की ओर से वकील अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष ने केवीएस के निर्णय को मनमाना, अतार्किक और अनुचित बताते हुए रद्द करने की मांग की है। याचिका में कहा है कि याचिकाकर्ता की उम्र 5 साल नौ महीने 28 दिन है और वह अभी यूकेजी में पढ़ रही है और इस साल पहली कक्षा में दाखिला लेने का इंतजार कर रही है।
Tuesday, April 5, 2022

अशासकीय जूनियर हाईस्कूल प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक भर्ती 2021 के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग को घेरा शिक्षा निदेशालय
अशासकीय जूनियर हाईस्कूल प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक भर्ती 2021 के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग को घेरा शिक्षा निदेशालय
लखनऊ। अशासकीय जूनियर हाईस्कूल प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक भर्ती 2021 के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग को लेकर सोमवार को निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि भर्ती परीक्षा 17 अक्तूबर को हुई थी। इसका परिणाम 15 नवंबर को जारी किया गया था तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री ने 30 दिसंबर को ट्वीट कर यह जानकारी दी थी कि परीक्षा के अंतिम चरण की प्रक्रिया 30
दिसंबर से शुरू कर दी जाएगी, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे कई बार निदेशालय से लेकर तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास तक चक्कर काट चुके हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। परीक्षा में सहायक अध्यापक पद के लिए 45,257 और प्रधानाध्यापक पद के लिए 1,722 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं।
अभ्यर्थियों ने सोमवार सुबह से प्रदर्शन करने के बाद शाम को मुख्यमंत्री आवास पर जाने लगे तो पुलिस ने सभी को सिविल अस्पताल पर रोक वापस कर दिया। प्रदर्शनकारियों में राम औतार, धनंजय चंद्रप्रताप, पल्लवी, आकांक्षा मिश्रा, सूरज समेत कई अभ्यर्थी मौजूद रहे।

यूपी : मदरसों में भी कैमरे की नजर में होंगी मुंशी मौलवी और आलिम की परीक्षाएं, अनुदानित या स्थायी मदरसों में कराई जा सकती है परीक्षा
यूपी : मदरसों में भी कैमरे की नजर में होंगी मुंशी मौलवी और आलिम की परीक्षाएं, अनुदानित या स्थायी मदरसों में कराई जा सकती है परीक्षा
डॉ. जावेद के मुताबिक ऐसे में यह निर्णय लिया गया है कि अनुदानित और स्थायी मदरसों में ही इन परीक्षाओं को संपन्न कराया जाए। इसके लिए कैमरे लगाए जाएं ताकि परीक्षा पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।
यूपी बोर्ड की तर्ज पर इस बार मदरसा बोर्ड की भी परीक्षाएं मदरसों में ही कैमरे की नजर में कराने की तैयारी है। इस बाबत सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर इस योजना पर काम करें। जोरशोर से इसकी तैयारियों को अमली जामा पहनाने की मशक्कत शुरू हो गई है।
14 मई से मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं हैं। सेकेंडरी (मुंशी/मौलवी) एवं सीनियर सेकेंडरी (आलिम) की परीक्षाएं शुरू होनी हैं। बोर्ड चेयरमैन डा. इफ्तिखार जावेद ने बताया कि जिस समय ये परीक्षाएं होंगी, उसी समय यूपी बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्याकंन होगा। बहुत से जिलों केजिला विद्यालय निरीक्षकों ने यह तर्क दिया कि यूपी बोर्ड के शिक्षक इस समय पुस्तिकाओं के मूल्याकंन में व्यस्त रहेंगे। साथ ही काफी विद्यालयों में भी यह काम चलेगा क्योंकि उन्हें मूल्यांकन केंद्र बनाया जाएगा। ऐसे में मदरसों की परीक्षाओं की वैकल्पिक व्यवस्था यदि हो जाए तो ठीक रहेगा।
डॉ. जावेद के मुताबिक ऐसे में यह निर्णय लिया गया है कि अनुदानित और स्थायी मदरसों में ही इन परीक्षाओं को संपन्न कराया जाए। इसके लिए कैमरे लगाए जाएं ताकि परीक्षा पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके। गौरतबल है कि इस बार मदरसोें में अध्ययन का नया सत्र भी लेट चल रहा है। कोरोना महामारी के कारण पठन पाठन लेट हुआ। फिर रमजान का महीना होने के कारण इसके बाद ही परीक्षाओं का कार्यक्रम तय किया है। यूपी मदरसों में इन परीक्षाओं के लिए लगभग सवा लाख छात्र हैं। प्रदेश में कुल 558 अनुदानित मदरसे हैं। इसके अलावा 7442 आधुनिक मदरसे हैं।
बोर्ड परीक्षाओं के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से कहा है कि जिला प्रशासन से समन्वय रखें। प्रशासन यदि यूपी बोर्ड के विद्यालयों में परीक्षा कराना चाहे तो कोई परेशानी नहीं होगी। यदि ऐसा नहीं होगा तो मदरसों में पूरी व्यवस्थाओं के साथ परीक्षा कराने की तैयारी मुकम्मल की जाए।
- एसएन पांडेय, रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड

सीएम योगी ने किया स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ : एक-एक स्कूल गोद लें अफसर व जनप्रतिनिधि, मिशन कायाकल्प से विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा
सीएम योगी ने किया स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ : एक-एक स्कूल गोद लें अफसर व जनप्रतिनिधि, मिशन कायाकल्प से विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को श्रावस्ती से स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की और शिक्षकों से अभियान को सफल बनाने की अपील की।
कोरोना के कारण दो वर्ष से स्कूल बंद रहे। इसका सबसे प्रतिकूल असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा। इसलिए स्कूल चलो अभियान से सभी परिवार के हर बच्चे को जोड़ना जरूरी होगा। इसकी निगरानी व स्कूलों को संसाधन युक्त बनाने के लिए हर अधिकारी व जनप्रतिनिधि को एक एक विद्यालय को गोद लेना चाहिए। यह आह्वान सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। वह इकौना के जयचंदपुर कटघरा संविलयन विद्यालय में स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ कर रहे थे।
उन्होंने मौजूद अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वह मिशन कायाकल्प को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए एक-एक विद्यालय को गोद लेकर उसे समग्र तौर पर विकसित करें। सीएम ने कहा कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जान बचाने के लिए मुफ्त दवा, वैक्सीन के साथ गरीबों को माह में दो बार राशन दिया गया। इस दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित शिक्षा व्यवस्था रही। हालांकि इससे निपटने को ऑनलाइन एजूकेशन देने का पूरा प्रयास किया गया। कोरोना संक्रमण को रोकने में काफी हद तक सफलता पाने के बाद अब बेसिक शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
सीएम ने कहा कि इसके लिए स्कूल चलो अभियान के साथ हर परिवार के हर बच्चे को जोड़ना जरूरी है। बच्चों के विकास से ही समाज और राष्ट्र सक्षम होगा। सीएम ने जोर देकर कहा कि अधिकारी व जनप्रतिनिधि गोद लेने वाले स्कूल में फर्नीचर, शौचालय, पुस्तकें, पेयजल, खेल का मैदान, सोलर सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने में अपना योगदान कर सकते हैं। इस पुनीत कार्य में सहभागिता करना सबसे बड़ा पुण्य होगा।
मिशन कायाकल्प से बदली स्कूलों की तस्वीर
सीएम योगी ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले स्कूल में बच्चे आते ही नहीं थे। बदहाली के कारण सरकारी स्कूल दूर से पहचान में आ जाते थे लेकिन मिशन कायाकल्प के तहत अब सरकारी स्कूल भी चमक रहे हैं। इसीलिए इनमें नामांकन भी कई गुना बढ़ा है। इस दौरान स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ करने आए मुख्यमंत्री ने मंच पर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें शिक्षा के साथ ही खेल के प्रति प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत जतायी। साथ ही बच्चों को खेल किट प्रदान कर उनका उत्साह भी बढ़ाया।
भगवान बुद्ध के कारण श्रावस्ती को चुना
मुख्यमंत्री ने श्रावस्ती से ही स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ करने को लेकर कहा कि यह जिला आकांक्षी जिले में शामिल है। यहां भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद जीवन का सबसे ज्यादा वर्षावास व्यतीत किया था। भगवान बुद्ध ने आप दीपो भव: का सूत्र यहीं बताया था। कार्यक्रम से पूर्व छात्रों ने शंख ध्वनि कर सीएम का स्वागत किया। जबकि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छात्राओं ने जूडो-कराटे, जिमनास्टिक से जुड़े कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। इस मौके पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह, विधायक राम फेरन पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्र समेत अन्य अधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सीएम ने दुलार के बाद खुद परोसा एमडीएम
स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ करने आए मुख्यमंत्री ने मंच पर मौजूद 11 बच्चों के साथ दुलार करते हुए उन्हें खुद अपने हाथों से एमडीएम का भोजन परोस कर खिलाया। सीएम को बच्चों को खाना परोसते देखते हुए मंच पर मौजूद बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्र व विधायक राम फेरन पांडे ने हैरत में पड़ गए। बाद में उन्होंने भी आगे बढ़कर बच्चों को भोजन परोस कर खिलाना व दुलारना शुरू कर दिया।
Monday, April 4, 2022

CUET 2022 : अब 6 अप्रैल से शुरू होंगे कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन, यहां जानें अहम डिटेल्स
CUET 2022 : अब 6 अप्रैल से शुरू होंगे कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन, यहां जानें अहम डिटेल्स
एनटीए ने CUET 2022 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तारीख आगे बढ़ा दी है। प्रवेश परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली में एक लैंग्वेज टेस्ट दो विषय-विशिष्ट प्रश्नपत्र और एक जनरल टेस्ट होगा। वहीं सेकेंड शिफ्ट में चार डोमेन-विशिष्ट विषय और विकल्प भाषा विषय शामिल हैं।
नई दिल्ली : CUET 2022: कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (Common Universities Entrance Test, CUET 2022) के लिए रजिस्ट्रेशन की शुरू होने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। एग्जाम आयोजित कराने वाली एजेंसी यानी कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency, NTA) द्वारा 02 अप्रैल को जारी अपडेट के अनुसार cuet.samarth.ac.in पर 6 अप्रैल से आवेदन पत्र जारी होंगे। इस आवेदन फॉर्म को 6 मई तक जमा करना होगा। ऐसे में स्टूडेंट्स ध्यान दें कि, जो भी स्टूडेंट्स यूजी प्रोगाम में प्रवेश लेना चाहते हैं, उन्हें इस दौरान तक फॉर्म भरकर सबमिट करना होगा, क्योंकि इसके बाद उन्हें दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा। वहीं इस परीक्षा के माध्यम से देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में शुमार, DU, Jamia, JNU सहित अन्य सेंट्रल यूनिवर्सिटी दाखिले दिया जाएगा।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) यह परीक्षा सीबीटी मोड में आयोजित कराएगी। यह परीक्षा छात्रों को देश भर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी के यूजी प्रोगाम में एडमिशन लेने के लिए एक एग्जाम होगा। इससे स्टूडेंट्स को 12वीं में कम अंक आने के चलते मनचाही यूनिवर्सिटी में दाखिला नहीं ले पाने की दिक्कत से छुटकारा मिल सकेगा।
CUET 2022 के लिए जारी लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, प्रवेश परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली में एक लैंग्वेज टेस्ट, दो विषय-विशिष्ट प्रश्नपत्र और एक जनरल टेस्ट होगा। वहीं सेकेंड शिफ्ट में चार डोमेन-विशिष्ट विषय और विकल्प भाषा विषय शामिल हैं।
कौन कर सकता है अप्लाई
CUET 2022 के लिए स्टूडेंट्स को को किसी मान्यता प्राप्त राज्य या नेशनल स्कूल बोर्ड से न्यूनतम 50% कुल अंकों के साथ कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
13 भाषाओं में होगी परीक्षा
CUET 2022 का आयोजन 13 भाषाओं में होगा। इनमें तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती, उड़िया, बंगाली, असमिया, पंजाबी, अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू सहित 13 भाषाओं में आयोजित किया जाएगा।
स्टूडेंट्स ध्यान दें कि CUET परीक्षा में सभी प्रश्न 12वीं कक्षा के सेलेबस से पूछे जाएंगे। इसके अलावा, सीयूईटी सिलेबस 12वीं के NCERT बुक्स पर आधारित होता है। वहीं परीक्षा की तारीख जल्द ही NTA की ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के लिए आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स को 10वीं की मार्कशीट 12वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट साइज फोटो, स्टूडेंटस सिग्नेचर, फोटो आईडी प्रूफ, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित डॉक्यूमेंट्स होना चाहिए। इसके साथ ही कैटेगिरी सार्टिफिकेट होना चाहिए।
वहीं कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

68500 शिक्षक भर्ती : जिला आवंटन के लिए शिक्षकों के आवेदन फंसे, नहीं खुल रही वेबसाइट
68500 शिक्षक भर्ती : जिला आवंटन के लिए शिक्षकों के आवेदन फंसे, नहीं खुल रही वेबसाइट
68500 शिक्षक भर्ती : पसंदीदा जिला आवंटन के लिए वाट्सएप नंबर पर मांगा प्रत्यावेदन
68,500 शिक्षक भर्ती के चयनितों को पसंदीदी जिला न मिलने का मामला तूल पकड़ चुका है। ऐसे में बेसिक शिक्षा परिषद ने चयनित अभ्यर्थियों की सहूलियत के लिए वाट्सएप नंबर 8005379280 जारी किया है।
जिन अभ्यर्थियों का आवेदन फार्म भरने में डाटा नाटफाउंड प्रदर्शित हो रहा है, वो उक्त नंबर पर चार अप्रैल को दोपहर 12 बजे तक प्रत्यावेदन भेज दें। ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन फार्म पांच अप्रैल को भरे जाएंगे।
हाल ही में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल ने गाइड लाइन जारी की, जिसके तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले शिक्षकों को जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन आवेदन का मौका दिया गया।
परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षक भर्ती के तहत चयनित मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (एमआरसी) के अभ्यर्थी मनपसंद जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। जनपद आवंटन के लिए अधिकतर शिक्षकों के फॉर्म नहीं खुल पा रहे हैं, जबकि फॉर्म भरने के लिए दो दिन शेष रह गए हैं। इस मसले पर चयनित सहायक अध्यापकों ने रविवार को शिक्षा निदेशालय में बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में विभिन्न जनपदों से शामिल सहायक अध्यापक शनी कुमार सिंह, आलोक शुक्ला, नवीन सिंह, सचिन गौतम, श्यामू वर्मा, सुनील प्रजापति, अश्विनी गुप्ता, अखिलेश यादव, शैलेंद्र मणि, अभिषेक प्रताप सिंह का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन में विसंगति के कारण जिला आवंटन की प्रक्रिया फंस गई है। 68500 शिक्षक भर्ती में शिक्षकों का जनपद आवंटन गलत तरीके से किया गया था।
मनपसंद जिले का किया जाना है चयन
हाल ही में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल ने गाइड लाइन जारी की, जिसके तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले शिक्षकों को जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन आवेदन का मौका दिया गया, लेकिन समस्या यह है कि अधिकतर शिक्षकों का जनपद आवंटन के लिए फॉर्म नहीं खुल पा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि सचिव कार्यालय से भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। उनकी मांग है कि व्हाट्सएप में प्रत्यावेदन और याचिकाओं से संबंधित विवरण न लेकर सभी याचिकाकर्ताओं के ऑनलाइन आवेदन के लिए फॉर्म खोल दिया जाए, जिससे सभी शिक्षक जल्द से जल्द आवेदन कर अपने पसंदीदा जनपद का चुनाव कर सकें।
अगर तकनीकी दिक्कत है तो सभी शिक्षकों के लिए ऑनलाइन आवेदन का विकल्प खोल देना चाहिए। इसके बाद जिलों में काउंसलिंग के माध्यम से उनका सत्यापन करा लिया जाए। अगर कोई शिक्षक याची नहीं है और गलत तरीके से लाभ लेने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
एक दिन बढ़ाई आवेदन की तिथि
बेसिक शिक्षा परिषद ने एमआरसी अभ्यर्थियों के जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की अंतिम तिथि पांच अप्रैल तक बढ़ा दी है। पहले चार अप्रैल तक आवेदन मांगे गए थे।

UPTET Result 2021 : यूपीटीईटी रिजल्ट इसी सप्ताह
UPTET Result 2021 : यूपीटीईटी रिजल्ट इसी सप्ताह
UPTET Result 2021 : यूपीटीईटी रिजल्ट इसी सप्ताह घोषित होगा। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
UPTET Result 2021 : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा ( यूपीटीईटी ) का परिणाम इसी सप्ताह updeled.gov.in पर घोषित होगा। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा जा चुका है। संशोधित उत्तरकुंजी और परिणाम इसी हफ्ते आने की उम्मीद है। 22 दिसंबर के शासनादेश के अनुसार 23 फरवरी को संशोधित उत्तरकुंजी और 25 फरवरी को परिणाम घोषित होना था। करीब 18 लाख परीक्षार्थी बेसब्री से यूपीटीईटी रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव के कारण परिणाम ( UP TET Result ) जारी नहीं हो सके थे। चुनाव के बाद शपथग्रहण और मंत्रिमंडल गठन में समय लग गया। सूत्रों के अनुसार परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने तैयारी पूरी कर ली है। शासन की अनुमति मिलने के बाद परिणाम जारी कर दिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर गुस्साए अभ्यर्थी
रिजल्ट में देरी को लेकर सोशल मीडिया पर अभ्यर्थी पिछले कुछ दिनों से अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले चुनाव, फिर परिणाम, उसके बाद विभागों का बंटवारा... उसके बाद भी रिजल्ट जारी नहीं हो पा रहा है। भर्तियों की बात बाद में करें, पहले यूपीटीईटी का रिजल्ट जारी होना चाहिए। यह परीक्षा तीन सालों से लटकी हुई है।
यूपीटीईटी परीक्षा 2021 का आयोजन 23 जनवरी को दो शिफ्टों में किया गया था। इसमें कुल 21,65,179 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से कुल 18,22,112 (84.15 फीसदी) सम्मिलित हुए थे। प्राथमिक स्तर के लिए आयोजित परीक्षा में पंजीकृत 12,91,627 अभ्यर्थियों में से 10,73,302 (83.09) उपस्थित हुए थे। उच्च प्राथमिक स्तर के लिए पंजीकृत 8,73,552 अभ्यर्थियों में से 7,48,810 (85.72) उपस्थित हुए थे।
UPTET : उ0प्र0 शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 का परिणाम इसी सप्ताह
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) का परिणाम इसी सप्ताह घोषित होगा। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा जा चुका है। संशोधित उत्तरकुंजी और परिणाम इसी हफ्ते आने की उम्मीद है। 22 दिसंबर के शासनादेश के अनुसार 23 फरवरी को संशोधित उत्तरकुंजी और 25 फरवरी को परिणाम घोषित होना था।
विधानसभा चुनाव के कारण परिणाम जारी नहीं हो सके थे। चुनाव के बाद शपथग्रहण और मंत्रिमंडल गठन में समय लग गया। सूत्रों के अनुसार परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने तैयारी पूरी कर ली है। शासन की अनुमति मिलने के बाद परिणाम जारी कर दिया जाएगा।
Sunday, April 3, 2022

देखें Live : स्कूल चलो कार्यक्रम का सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा शुभारंभ School Chalo Abhiyan 2022 Yogi Adityanath
देखें Live : स्कूल चलो कार्यक्रम का सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा शुभारंभ School Chalo Abhiyan 2022 Yogi Adityanath
दिनांक: 04/04/2022 को माननीय मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से जनपद श्रावस्ती में “स्कूल चलो अभियान” का शुभारम्भ किय जाएगा। उक्त कार्यक्रम का दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्राइमरी चैनल पर प्रातः 10:00 बजे से लाईव प्रसारण किया जाएगा तथा यू-ट्यूब पर https://youtu.be/lYa9P5gJmns लिंक के माध्यम से देखा जा सकेगा।
🔴 नीचे क्लिक करके देखें Live कार्यक्रम 👇
दो करोड़ नामांकन लक्ष्य के साथ स्कूल चलो अभियान आज से
लखनऊ : स्कूल की पढ़ाई से छूटे हुए बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए प्रदेश में सोमवार से स्कूल चलो अभियान संचालित किया जाएगा। इसके तहत वर्ष पांच साल से अधिक उम्र से लेकर 14 वर्ष तक के ऐसे बच्चे, जो कभी स्कूल नहीं गए या ड्रापआउट हैं, उन्हें चिह्न्ति कर उनका परिषदीय स्कूलों में नामांकन कराया जाएगा।
ऐसे बच्चों को चिह्न्ति करने के लिए घर-घर सर्वेक्षण अभियान 30 अप्रैल तक चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को श्रवस्ती में स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ करेंगे। कोरोना काल के दौरान पिछले दो शैक्षिक सत्रों के दौरान स्कूल चलो अभियान नहीं संचालित किया जा सका था।
परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही थी, लेकिन शैक्षिक सत्र 2017-18 से यह ढर्रा बदला। बच्चों की संख्या में आ रही गिरावट न सिर्फ उस वर्ष थमी बल्कि उसके बाद से साल दर साल छात्र नामांकन का ग्राफ बढ़ता गया। शैक्षिक सत्र 2021-22 परिषदीय स्कूलों में 1.73 करोड़ बच्चे नामांकित थे। शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को स्कूल चलो अभियान के दौरान परिषदीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाकर दो करोड़ करने का लक्ष्य दिया है।
वहीं, विद्यालय स्तर पर बच्चों का अधिक से अधिक नामांकन कराने के लिए परिषदीय स्कूलों में विद्यालयों के शिक्षक स्थानीय समुदाय, विद्यालय प्रबंध समिति व मां समिति के सदस्यों के सहयोग से घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को चिह्न्ति करेंगे और अभिभावकों को बच्चे का स्कूल में नामांकन कराने के लिए प्रेरित करेंगे।
इस दौरान आउट आफ स्कूल बच्चों के चिन्हांकन, छात्र नामांकन, बच्चों की उपस्थिति आदि का विश्लेषण करते हुए जिला व ब्लाक स्तर पर भी गोष्ठियां व कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। साथ ही मंडल, जिला और ब्लाक स्तरीय सभी शिक्षा अधिकारी भी गांवो में पहुंचकर अभिभावकों को बच्चों के नामांकन के लिए प्रेरित करेंगे।
School Chalo Abhiyan : सौ फीसदी नामांकन लक्ष्य के साथ उत्तर प्रदेश में आज से शुरू होगा स्कूल चलो अभियान, सीएम योगी करेंगे आगाज
स्कूल चलो अभियान का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करना है।
आबादी के आधार पर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सरकार ने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके तहत राज्य में सोमवार, 04 अप्रैल, 2022 से स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विधायकों को एक-एक स्कूल गोद लेने के निर्देश भी दिए हैं। अभियान के तहत स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही छात्रों को यूनिफॉर्म और जूते-मोजे भी उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, शौचालय, पेयजल, पर्याप्त फर्नीचर और स्मार्ट क्लास जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्ध सुनिश्चित की जाएगी।
100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री की योजना के अनुसार, स्कूल चलो अभियान का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि परिषद के स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा में बच्चों के नामांकन के लिए स्कूल चलो अभियान चार अप्रैल से शुरू होगा। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथा श्रावस्ती में सोमवार सुबह 10 बजे करेंगे। समारोह का सभी विद्यालयों में सीधा प्रसारण किया जाएगा।
30 अप्रैल तक चलेगा अभियान
बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि 30 अप्रैल तक चलने वाले अभियान में सर्वाधिक बच्चों का नामांकन करने वाले स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सम्मानित भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने और प्रतिदिन स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे और मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देंगे। समारोह में सीएम के साथ बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी शामिल होंगे। जिलों में स्थानीय मंत्री, सांसद और विधायक अभियान के शुभारंभ समारोह में शामिल होंगे।
श्रावस्ती जिले में राज्य में सबसे कम साक्षरता दर
यह अभियान राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा के भविष्य को आकार देने और प्राथमिक विद्यालयों के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कम साक्षरता दर वाले जिलों को प्राथमिकता दी जाए और राज्य के प्राथमिक स्कूलों को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाए। श्रावस्ती जिले में राज्य में सबसे कम साक्षरता दर है, इसके बाद बहराइच, बलरामपुर, बदायूं और रामपुर आते हैं। सीएम योगी ने कहा कि सरकारी स्कूलों को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत नया रूप दिया जाएगा।
विधायकों को भी गोद लेना होगा स्कूल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और विधायकों को स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी की योजनानुसार जनप्रतिनिधि न केवल अभियान से जुड़ेंगे, बल्कि विधायकों को एक-एक स्कूल गोद लेना होगा। इसके अलावा, अधिकारियों को भी एक-एक स्कूल के समग्र विकास पर ध्यान देना होगा। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग को सभी सरकारी स्कूलों को छात्रों को शौचालय, पीने का पानी, फर्नीचर और स्मार्ट क्लास जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
साथ ही कार्यक्रम का सीधा प्रसारण CM हैंडल पर निम्न लिंक्स के माध्यम से भी देखा जा सकेगा:-
१) Youtube (यू-ट्यूब पर)
२) Twitter
३)Facebook
अतः अपेक्षित है कि इस कार्यक्रम की जानकारी समस्त अभिभावकों, शिक्षकों, एस०आर०जी०, ए०आर०पी० में प्रसारित करें, जिससे अधिक से अधिक जन समुदाय उक्त कार्यक्रम को देखकर लाभान्वित हो सके।
महानिदेशक
स्कूल शिक्षा, उ०प्र०

सुधार का प्रयास : स्कूली भोजन की गुणवत्ता परखेंगे उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र
सुधार का प्रयास : स्कूली भोजन की गुणवत्ता परखेंगे उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र
नई दिल्ली: कोरोना काल के बाद देश भर के स्कूल अब पूरी तरह से खुल गए हैं। सरकार का फोकस स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने को लेकर है। इस लिहाज से जो अहम कदम उठाए गए हैं, उनमें स्कूलों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को परखने का जिम्मा अब उच्च शिक्षण संस्थानों को दिया गया है। उन्हें स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन को जांचना होगा औक खुद भी उसे चखकर उसकी रेटिंग करनी होगी।
पीएम पोषण के नाम से (पहले मिड डे मील) स्कूली बच्चों को गर्मागर्म भोजन मुहैया कराने के लिए चलाई जा रही इस स्कीम में शिक्षा मंत्रालय का सबसे ज्यादा फोकस गुणवत्ता को बेहतर बनाने को लेकर है। नई पहल के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के फूड एंड न्यूट्रिशन विभाग में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अनिवार्य रूप से एक स्कूल का दौरा करना होगा। जो उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होगा। इस दौरान छात्रों को मंत्रालय की ओर से तैयार किया गया एक फार्मेट भी भरना होगा, जिसमें भोजन से जुड़ी करीब 25 जानकारियां देनी होंगी। इतना ही नहीं, छात्रों को रिपोर्ट सीधे शिक्षा मंत्रालय को मेल पर भेजनी होगी। उन्हें बताना होगा कि खाना अच्छा, सामान्य या फिर खराब है।

यूपी में अजब गजब : मैनपुरी में मास्टर जी पकड़ेंगे गोवंश और आगरा में करेंगे बीएसए कार्यालय की चौकीदारी।
यूपी में अजब गजब : मैनपुरी में मास्टर जी पकड़ेंगे गोवंश और आगरा में करेंगे बीएसए कार्यालय की चौकीदारी।
● हर माह की 5, 15 और 25 तारीख को निराश्रित गोवंश पकड़ेंगे मास्टर जी
● आगरा बीएसए कार्यालय की सुरक्षा में रोस्टर से 20 शिक्षक करेंगे चौकीदारी
जनगणना, चुनाव ड्यूटी समेत तमाम काम ‘ढो’ रहे मास्टर जी अब निराश्रित गोवंश पकड़ेंगे और चौकीदारी भी करेंगे। आगरा में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की सुरक्षा के लिए बाकायदा रोस्टर जारी करके शिक्षकों की चौकीदारी करने के लिए ड्यूटी लगाई गई है तो मैनपुरी में मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र में शिक्षकों को निराश्रित गोवंश पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक संगठनों ने इन अजब-गजब ‘ड्यूटियों’ को लेकर आक्रोश जताया है। वहीं राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने ट्वीट कर इस पर सवाल उठाए हैं।
मैनपुरी में सीडीओ विनोद कुमार ने दिशा निर्देश जारी किए हैं कि जनपद के शिक्षक आवारा गोवंश को पकड़ने में प्रशासन की मदद करेंगे। इसके लिए बीएसए, एबीएसए और परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की मदद ली जाएगी। प्रत्येक माह की 5, 15 और 25 तारीख को अभियान चलाकर निराश्रित गोवंश पकड़े जाएंगे। इस काम में सभी खंड शिक्षाधिकारी और बीएसए सहयोग करेंगे। सीडीओ ने साप्ताहिक समीक्षा बैठक में यह निर्देश जारी किए हैं।
इधर, आगरा में शिक्षकों को चौकीदारी का काम सौंप दिया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी रोस्टर में 20 शिक्षकों की कार्यालय की सुरक्षा में ड्यूटी लगाई गई हैं। यह क्रम बीते माह से चल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि जो शिक्षक ड्यूटी करने से मना करते हैं उनके खिलाफ कार्यवाही की जाती है। असल में बीएसए में तैनात चौकीदार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसके बाद चौकीदार गायब हो गया। अब विभाग चौकीदारी का काम कर्मचारियों और शिक्षकों से ले रहा है। शिक्षकों-कर्मचारियों में इस बात को लेकर रोष है।
🔴 शिक्षकों के काम की लिस्ट
● मिड डे मील
● जनगणना करना
● वोटर लिस्ट
● आम चुनाव
● बच्चों का हेल्थ चेकअप
● स्कूल की बिल्डिंग बनानी
● बैंक में बच्चों के खाते खुलवाने
● एफिडेविड बनवाने
● आर्थिक गणना
● पल्स पोलियो
● बच्चों का वजीफा आवेदन
● जन्म प्रमाणपत्र
● जाति प्रमाणपत्र
नोट-इसके अलावा भी गाहे-बगाहे आने वाले काम
ट्वीट : रालोद अध्यक्ष ने उठाए सवाल
मैनपुरी के मुख्य विकास अधिकारी का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने सवाल उठा दिए। जयंत ने पत्र को आधार बनाकर आवारा गोवंश को लेकर ट्वीट किया और इस ट्वीट में केंद्र और राज्य सरकारों पर पर भी टिप्पणी की। हालांकि इसके बाद विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि सिर्फ गोवंश को चिन्हित कर विभाग को शिक्षक बता दें।
रिकार्ड रूम में कई तरह के दस्तावेज होते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को रिकॉर्ड रूम की सुरक्षा को लेकर रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी लगायी जा रही है। शिक्षक जो आफिस में अटैच हैं, हो सकता है उनके नाम आए हों। -सतीश कुमार, बीएसए, आगरा
आक्रोश : मजबूरी में कर रहे नौकरी
शिक्षकों और कर्मचारियों में इस बात को लेकर रोष है। लेकिन सवाल नौकरी का है तो ऐसे में कर्मचारी और शिक्षक रात और दिन में चौकीदारी की ड्यूटी करने को मजबूर हैं। रोस्टर के आधार पर उनकी ड्यूटी लगती है। जो ड्यूटी करने से मना करते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी जाती है। बेसिक शिक्षा अधिकारी दिन और तारीख के हिसाब से निर्देश जारी करते हैं।
निराश्रित गोवंश को पकड़कर गोशाला ले जाने का काम चल रहा है। शिक्षक ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं। वे गोवंश को चिह्नित कर विभाग को बता दें ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके। उनके पत्र का यही सार है। -विनोद कुमार सीडीओ, मैनपुरी


प्रदेश के 7,442 मदरसों की बोर्ड करेगा जांच, कई जिलों में फर्जी मदरसों की शिकायत के बाद लिया निर्णय
प्रदेश के 7,442 मदरसों की बोर्ड करेगा जांच
◆ कई जिलों में फर्जी मदरसों की शिकायत के बाद लिया निर्णय
◆ आधुनिकीकरण योजना का लाभ लिया है इन मदरसों ने
लखनऊ : प्रदेश मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले सभी 7, 442 मदरसों की जांच कराने जा रही है। अमरोहा, कुशीनगर और गोंडा में कागजों में चल रहे फर्जी मदरसों की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। योजना के संचालन के बाद से मदरसों के शैक्षिक स्तर में कितना सुधार आया, इसके लिए शैक्षिक गुणवत्ता का मूल्यांकन भी होगा।
दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मुस्लिम बच्चों को गुणवत्ता और आधुनिक शिक्षा के लिए अनुदान दिया जाता है। पारंपरिक शिक्षा के अलावा विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, हिंदी और सामाजिक अध्ययन जैसे विषय पढ़ाने के लिए प्रत्येक मदरसे में तीन-तीन शिक्षक रखे जाते हैं। स्नातक शिक्षकों को छह हजार व परास्नातक शिक्षकों को 12 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। प्रदेश सरकार भी स्नातक शिक्षकों को दो हजार व परास्नातक शिक्षकों को तीन हजार रुपये अतिरिक्त मानदेय देती है। इस योजना में प्रदेश के 7,442 मदरसों के 21,126 शिक्षक शामिल हैं।
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की बोर्ड में सदस्य तनवीर रिजवी द्वारा योजना में शामिल अमरोहा के कई मदरसों के अस्तित्व में न होने संबंधी शिकायत पर बोर्ड ने सर्वसम्मति से प्रदेश के सभी संबंधित मदरसों की जांच कराने का निर्णय लिया।
शिकंजा मदरसा बोर्ड को अमरोहा सहित कई जिलों में ऐसे मदरसों की सूचना मिली है जिनका अस्तित्व नहीं है। यह मदरसे आधुनिकीकरण योजना का लाभ ले रहे हैं। इसलिए मदरसा बोर्ड इस योजना में शामिल प्रदेश के सभी मदरसों की जांच कराने जा रहा है। शेषनाथ पाण्डेय, रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद
Saturday, April 2, 2022

यूपी : 12 लाख विद्यार्थियों को ही मिल पाएंगे टैबलेट और स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्टफोन की आपूर्ति नहीं कर सकी कंपनियां
यूपी : 12 लाख विद्यार्थियों को ही मिल पाएंगे टैबलेट और स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्टफोन की आपूर्ति नहीं कर सकी कंपनियां
प्रदेश सरकार ने 2021 में स्नातक, स्नातकोत्तर, तकनीकी, डिप्लोमा, कौशल विकास, पैरा मेडिकल और नर्सिंग सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययरत 68 लाख विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और टैबलेट देने का निर्णय किया था।
प्रदेश में उच्च शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के सभी विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन के लिए लंबा इंतजार करना होगा। टैबलेट और स्मार्टफोन आपूर्ति का ठेका लेने वाली आईटी कंपनियां 18 लाख में से 12 लाख आपूर्ति नहीं कर सकी है। प्रदेश सरकार ने कंपनियों के खिलाफ जुर्माना लगाने की कवायद शुरू की है।
प्रदेश सरकार ने 2021 में स्नातक, स्नातकोत्तर, तकनीकी, डिप्लोमा, कौशल विकास, पैरा मेडिकल और नर्सिंग सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययरत 68 लाख विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और टैबलेट देने का निर्णय किया था। शिक्षण संस्थानों की ओर से 50 लाख विद्यार्थियों का डाटा अपलोड किया गया। प्रदेश सरकार ने टैबलेट और स्मार्टफोन वितरण के लिए यूपीडेस्को को नोडल संस्था नामित किया था। यूपीडेस्को की ओर से किए गए टेंडर में देश की प्रमुख आईटी कंपनी लावा, सैमसंग और एसर ने 12,700 रुपये प्रति टैबलेट की दर से आपूर्ति करने पर सहमति दी है।
जबकि लावा और सैसमंग ने 10,800 रुपये की दर से स्मार्टफोन की आपूर्ति करने पर सहमति दी है। कंपनियों को तीन महीने में कुल 18 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित करने का आर्डर दिया गया था। कंपनियां तीन महीने में केवल 12 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित कर सकी है।
औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि अब तक जिलों में साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित किए गए है। कंपनियां अब तक केवल 12 लाख टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित कर सकी है। उन्होंने बताया कि कंपनियों पर टैबलेट और स्मार्टफोन की आपूर्ति नहीं कर पाने के कारण जुर्माना भी लगाया गया है इसकी वसूली उनकी जमानत राशि से की जाएगी।
दो करोड़ टैबलेट स्मार्टफोन के लिए दोबारा होगा टेंडर
अरविंद कुमार ने बताया कि योजना वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए ही थी। सरकार के संकल्प पत्र में दो करोड़ विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन देने की घोषणा है उसके लिए सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे।
100 दिन में बंट जाएंगे टैबलेट स्मार्टफोन
अरविंद कुमार ने बताया कि 12 लाख में से साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और टैबलेट बंट चुके है। और शेष जिलों में पहुंच गए है। विभाग की सौ दिन की कार्ययोजना में सभी जिलों में शेष साढ़े आठ लाख टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित करने का लक्ष्य रखा है।
इसलिए नहीं हो सकी आपूर्ति
अरविंद कुमार का कहना है स्मार्टफोन और टैबलेट में उपयोग होने वाले तकनीकी उपकरणों का उत्पादन कम हो रहा है इसलिए कंपनियां समय पर उत्पादन नहीं कर सकी। रुस और यूक्रेन युद्ध के चलते भी तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में लगती होड़, परीक्षा कराने की जिद में कोर्ट तक लड़ते हैं केस, आर्थिक लाभ के उद्देश्य से पनपता है नकल का बाजार
यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में लगती होड़, परीक्षा कराने की जिद में कोर्ट तक लड़ते हैं केस, आर्थिक लाभ के उद्देश्य से पनपता है नकल का बाजार
■ केंद्र निर्धारण के साथ में शुरू हो जाता है नकल माफियाओं का खेल
■ हर साल हाईकोर्ट में वित्तविहीन स्कूलों की ओर से होती हैं याचिकाएं
● ऑनलाइन केंद्र निर्धारण के बावजूद नहीं बंद हुआ नकल का खेल
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए हर साल केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में होड़ लगती है। यही कारण है कि हर साल केंद्र बनने के लिए वित्तविहीन स्कूलों की ओर से हाईकोर्ट में याचिकाएं होती हैं।
ऐसे में सवाल है कि वित्तविहीन स्कूलों में बोर्ड परीक्षा कराने की आखिरकार ऐसी भी क्या जिद है। एक बार मुकदमा करने में कम से कम 25 हजार रुपये खर्च होता है। साफ है कि शुचितापूर्वक और नकलविहीन परीक्षा की बजाय आर्थिक लाभ के उद्देश्य से वित्तविहीन स्कूल के प्रबंधक इतने रुपये फूंकते हैं।
इसी लालच का परिणाम बलिया जिले में देखने को मिला कि परीक्षा के एक दिन पहले ही पेपर आउट हो गया। बलिया में ये पहली बार नहीं हुआ है। 2019 और 2020 की परीक्षा में भी प्रश्नपत्र आउट हुए थे। हकीकत में 2019 से ऑनलाइन केंद्र निर्धारण की व्यवस्था लागू होने के बावजूद जिला स्तर पर हस्तक्षेप पूरी तरह से बंद नहीं। है। हर साल हर जिले में एक से दो दर्जन स्कूल तक ऑफलाइन बनाए जाते हैं। इनमें प्रभावशाली लोगों के स्कूलों के केंद्र बनने से लेकर रुपयों के लेनदेन के आरोप भी लगते रहे हैं।
बलिया के निलंबित जिला विद्यालय निरीक्षक ब्रजेश मिश्रा के खिलाफ कई विभागीय जांचें चल रही हैं। जौनपुर में बतौर डीआईओएस 123 शिक्षकों की अवैध नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट तक गया था जिसकी जांच चल रही है। इसके अलावा ब्रजेश मिश्र के खिलाफ चल रही कई प्रतापगढ़ में भी अवैध नियुक्तियों के मामलों की जांच लंबित है। हरदोई में जब वह बीएसए थे जब एक रसोईया ने उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज कराई थी। बलिया में भी उनके खिलाफ कई शिकायतें प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक की गई हैं।
मेरी याचिका पर ही हाईकोर्ट ने ऑनलाइन केंद्र निर्धारण का आदेश दिया था। कहने को 2019 से ऑनलाइन केंद्र बन रहे हैं लेकिन हकीकत में हर साल हर जिले में एक से दो दर्जन तक ऑफलाइन केंद्र बनाए जाते हैं। ऐसे स्कूल सेंटर बनते हैं जो मानक में फिट नहीं बैठते और कम्प्यूटर भी उन्हें केंद्र नहीं बनाता। नकल का खेल रोकना है तो पूरी तरह से केंद्र निर्धारण ऑनलाइन करना होगा। - जियारत हुसैन, प्रधान महासचिव वित्तविहीन शिक्षक महासभा
केंद्र बनने के लिए जो वित्तविहीन स्कूल याचिकाएं करते हैं निश्चित रूप से उनके अपने हित होते हैं। उनका उद्देश्य केवल केंद्र बनना होता है। - अमरनाथ वर्मा, पूर्व सचिव यूपी बोर्ड व पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक

अब छात्रवृत्ति का बजट नहीं होगा वापस, इस बार ज्यादा छात्र-छात्राओं को मिली छात्रवृत्ति
अब छात्रवृत्ति का बजट वापस नहीं होगा, इस बार ज्यादा छात्र-छात्राओं को मिली छात्रवृत्ति
लखनऊ : प्रदेश के समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण विभागों की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई का बजट अब वित्तीय वर्ष खत्म होने पर न वापस (लैप्स ) होगा और न ही सरेण्डर होगा।
केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं से सम्बंधित सभी विभागों को इसी वित्तीय वर्ष में सिंगिल नोडल एकाउंट खोलने के आदेश दिये थे और इसका सख्ती से अनुपालन करवाया। समाज कल्याण विभाग ने भी भारतीय स्टेट बैंक में सिंगिल नोडल एकाउंट खुलवाया है।
जिसमें छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का पूरा आवंटित बजट डाला गया है और गुरुवार 31 मार्च को वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बावजूद अप्रैल में भी छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि लाभार्थी छात्र-छात्राओं के खाते में भेजी जाती रहेगी। समाज कल्याण निदेशालय के अफसरों के अनुसार छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि लाभार्थी छात्र-छात्राओं के खाते में भेजे जाने पर अगर ट्रांजेक्शन फेल हो जाता है और लाभार्थी के खाते में धनराशि नहीं पहुंचती है तो लाभार्थी इससे वंचित नहीं होगा। इसके लिए एक नियम बनाया जा रहा है जिसके बारे में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
आडिट आपत्तियों पर रिपोर्ट न देने पर निदेशक नाराज
लखनऊ : लखनऊ में 2019-20 के शैक्षिक सत्र में छात्रवृत्ति व फीस भरपाई वितरण के ब्यौरे के आंतरिक आडिट में गम्भीर अनियमितताएं पाई गई हैं। समाज कल्याण निदेशक राकेश कुमार ने इस बारे में लखनऊ की जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनीता सिंह को सख्त पत्र लिखकर तत्काल रिपोर्ट तलब की है। पत्र में चेतावनी दी गयी है कि अगर समय से इन आडिट आपत्तियों पर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करवाई गई तो जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टी दी जाएगी।
कोर्स सत्र 2021-22 सत्र 2020-21
लाभार्थी संख्या लाभार्थी संख्या
एस.सी. पोस्ट मैट्रिक 1168482 802648
सामान्य पोस्ट मैट्रिक 536938 500204
एस.सी.प्री मैट्रिक 320390 362511
सामान्य प्री.मैट्रिक 1247933 118153

शिक्षा विभाग के दो बड़े पूर्व अफसरों पर चल रही विजिलेंस जांच, आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप
शिक्षा विभाग के दो बड़े पूर्व अफसरों पर चल रही विजिलेंस जांच, आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप
इंटरमीडिएट का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में जेल भेजे गए बलिया के निलंबित जिला विद्यालय निरीक्षक ब्रजेश मिश्र पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उनके पास आय से अधिक संपत्ति होने के आरोपों की भी जांच कराई जा सकती है। शिक्षा विभाग के दो पूर्व अफसरों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच पहले से चल रही है। इन दोनों पर भी आय से अधिक संपत्ति के आरोप हैं।
शासन ने निदेशक साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं के पद पर रहे संजय सिन्हा को पांच मार्च 2021 को निलंबित करते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। फिर 31 अगस्त 2021 को वह सेवानिवृत्त हो गए। जांच में शिकायतों को गंभीर और प्रथमदृष्ट्या सही पाए जाने पर सितंबर 2021 को विजिलेंस को खुली जांच की अनुमति दे दी गई।
संजय सिन्हा अपने सेवाकाल में नौ वर्षों तक बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव रहे। सचिव के रूप में उनके इस कार्यकाल के दौरान विभिन्न अनियमितताओं की शिकायतों पर तत्कालीन महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने जांच की थी। लगभग एक वर्ष तक चली इस जांच में संजय सिन्हा पर अनियमित रूप से लगभग एक हजार शिक्षकों के तबादलों का अनुमोदन करने तथा नौ से 10 जिलों में मृतक आश्रित के रूप में अनियमित नियुक्तियां किए जाने की शिकायतें सही पाई गईं। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें निलंबित कर विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए। यह जांच अभी चल रही है।
इससे पहले 12 सितंबर 2017 को शासन ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा के पद से सेवानिवृत्त वासुदेव यादव की संपत्तियों की विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। वर्ष 2014 में शिक्षा निदेशक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वासुदेव यादव ने सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी और फिर विधान परिषद के सदस्य चुन लिए गए थे। अप्रैल 2021 में सामने आई विजिलेंस की जांच रिपोर्ट में वह आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाए गए। जांच में विजिलेंस को उनकी संपत्तियां आय से 109 फीसदी अधिक मिली थीं। इसके बाद विजिलेंस ने उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया।
Friday, April 1, 2022

परीक्षा जिंदगी का छोटा सा हिस्सा - इससे डरे नहीं, बच्चों को पीएम मोदी के टिप्स
परीक्षा जिंदगी का छोटा सा हिस्सा - इससे डरे नहीं, बच्चों को पीएम मोदी के टिप्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्कूली छात्रों और अभिभावकों के साथ ‘परीक्षा पे चर्चा’ की। उन्होंने छात्रों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, परीक्षा हमारी जिंदगी का छोटा-सा हिस्सा है, जिससे हम पहले भी गुजर चुके हैं, ये नया नहीं है। इसलिए हमें डरना नहीं चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अभिभावकों व शिक्षकों को भी सलाह दी। उन्होंने कहा, आप बच्चों पर अपने सपनों का बोझ न डालें। आपकी और शिक्षकों की अपेक्षाएं पूरी करने में बच्चों को जिस उलझन से गुजरना पड़ता है यह चिंता का विषय है।
बच्चों को पीएम के टिप्स
1. बच्चे परीक्षा के दौरान घबराहट भरे माहौल से दूर रहें, आप अपने दोस्तों की नकल न करें
2. परीक्षा देते-देते हम सभी लोग ‘एक्जाम प्रूफ’ हो चुके हैं, आपने जो तैयारी की है, उसमें विश्वास से आगे बढ़कर परीक्षा दें
3. प्रतिस्पर्धा को जीवन के सबसे बड़े उपहार के रूप में लें, प्रतिस्पर्धा होगी तभी तो आपकी परख होगी
4. माता-पिता बच्चों की पसंद नापसंद का ध्यान रखें, बच्चे मन को स्थिर करेंगे तो उनका फोकस बढ़ेगा
परीक्षा पे चर्चा 2022 : पीएम मोदी ने परीक्षा के तनाव को लेकर विद्यार्थियों को दिया गुरुमंत्र, प्रधानमंत्री ने युवा छात्रों को दिया P-3 का मंत्र
PM Modi Pariksha Pe Charcha (PPC 2022) Exam Tips for Students: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 01 अप्रैल को विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा पे चर्चा की। विद्यार्थियों के मन से बोर्ड परीक्षा का तनाव दूर भगाने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई सारे टिप्स साझा किए। पीएम ने अमूल्य जीवन का सामर्थ्य पहचानने की बात पर जोर देते हुए कहा कि परीक्षाओं को एक सजह प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। परीक्षा से जिंदगी नहीं बनती है। यह सिर्फ एक पड़ाव होती हैं। पढ़िए पीएम मोदी के संबोधन की खास बातें —
बेटियों तेजी से आगे बढ़ रहीं, एक दिन पुरुष भी आरक्षण मांगेंगे
परीक्षा पे चर्चा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हल्की-फुल्की और मजाकिया बातों पर सभी छात्र और शिक्षक जोर-जोर से ठहाका लगाने लगे। शिक्षा और राष्ट्रीय नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़तीं बेटियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जल्द ही ऐसा समय भी आएगा कि महिलाओं की जगह पुरुष आरक्षण मांगने लगेंगे। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने आसान शब्दों कई सामाजिक समस्याओं को भी उठाया और नई पीढ़ी को उनके उन्मूलन के लिए अपना संदेश भी दिया।
प्रधानमंत्री ने युवा छात्रों को दिया पी-3 का मंत्र
पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के दौरान स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए उसका क्रेडिट बच्चों को दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता की मेरी भावनाओं को चार चांद लगाने का काम देश के बच्चों ने किया है। इसमें आज हम जहां पहुंचे हैं, उसका सबसे ज्यादा क्रेडिट मैं बालक-बालिकाओं को देता हूं। उन्होंने कहा कि ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्होंने कई बार अपने परिजनों को इधर-उधर कूड़ा फेंकने पर टोका है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने पी-3 का मंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि हमें दुनिया में P3 movement चलाने की जरूरत है। ये P3 movement यानी Pro-Planet-People से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ेंगे, तो इससे हमें लाभ मिलेगा।
परिजन, शिक्षकों के पास समय नहीं, खुद को जानना जरूरी
परीक्षा पे चर्चा 2022 के दौरान प्रधानमंत्री ने आत्म विश्लेषण करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आप स्वयं के विषय पर जरूर विश्लेषण कीजिए। कामकाजी माता-पिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब बच्चा दिन भर क्या करता है, उसके लिए मां- बाप के पास समय नहीं है। वहीं, शिक्षक को केवल सिलेबस से लेना देना है कि मेरा काम हो गया, मैंने बहुत अच्छी तरह पढ़ाया, अब बस। लेकिन बच्चे का मन कुछ और करता है। जब तक हम बच्चों की शक्ति, सीमाओं, रुचियों और उनकी अपेक्षाओं को जानने का प्रयास नहीं करते हैं, तो वे आगे नहीं बढ़ पाते हैं, क्योंकि उन्हें सपोर्ट नहीं मिल पाता। प्रधानमंत्री ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि आप अपने मन की, अपनी अपेक्षाएं बच्चे पर न थोपें, उन पर बोझ न बढ़ाए।

फतेहपुर : दोआबा के 72 शिक्षक और शिक्षिकाएं हो गए सेवानिवृत्त
फतेहपुर : दोआबा के 72 शिक्षक और शिक्षिकाएं हो गए सेवानिवृत्त
फतेहपुर : दोआबा के 92 शिक्षक-शिक्षिकाओं समेत शिक्षणेत्तर कर्मचारी 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए। उनकी पेंशन और जीपीएफ की पत्रावलियां संस्तुति कर भेज दी गईं हैं। बेसिक की कुछ फाइलों में आपत्ति मिलने पर ब्लाक मुख्यालयों को वापस भेजी गई हैं। शिक्षक संगठन सेवानिवृत्त शिक्षकों को समय देयक दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।
परिषदीय स्कूलों के कुल 49 शिक्षकों समेत शिक्षणेत्तर कर्मी सेवानिवृत्त हुए हैं। वित्त एवं लेखाधिकारी विनय प्रजापति ने बताया कि पत्रावलियों को संस्तुति के साथ प्रयागराज भेजा जा चुका है। 7फाइलों में आपत्तियां मिलने के कारण मलवां, देवमई, असोथर एवं ऐरायां ब्लाक को वापस किया गया है। शेष फाइलों को पूर्ण कर संस्तुति दे दी गई है। जिनमें 39 की पेंशन भी लगभग बन गई है।
म्ाध्यमिक के 23 शिक्षक हुए सेवानिवृत्त माध्यमिक शिक्षा विभाग के भी 23 शिक्षक शिक्षिकाएं सेवानिवृत्त हो गए।
डीआईओएस महेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि छह प्रधानाध्यापक, दो प्रवक्ता, 10 सहायक शिक्षक एवं पांच शिक्षणेत्तर कर्मी शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आलोक शुक्ला ने बताया कि सेवा से निवृत्त हुए लोगों के देयक की फाइल संस्तुति संगविभाग द्वारा भेजी जा रही चुकी हैं।
चार एनपीएस तो 68 को पुरानी पेंशन
बेसिक एवं माध्यमिक विभाग से सेवानिवृत्त शिक्षकों में चार को एनपीएस का लाभ मिलेगा। शेष 68 को पुरानी पेंशन यानि जीपीएस का लाभ मिलेगा। जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग में तीन एनपीएस के 46 जीपीएस के शामिल हैं। इसी तरह से माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक एनपीएस एवं 22 जीपीएस के लाभार्थी हैं।

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा के आवेदन की तिथि 18 अप्रैल से 20 मई तक प्रस्तावित
यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा के आवेदन की तिथि 18 अप्रैल से 20 मई तक प्रस्तावित
🆕 Update
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022-23 के आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है। सोमवार को हुई बैठक में प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों का डाटा जुटाने और बुकलेट के प्रकाशन पर विचार-विमर्श हुआ। रजिस्ट्रार डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि बीएड के आवेदन करने की प्रस्तावित तिथि 18 अप्रैल से 20 मई के मध्य है।
शासन ने इस बार बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय को दी है। विश्वविद्यालय की ओर से ही तय कार्यक्रम के मुताबिक परीक्षा कराएगा। शासन के निर्देश के मुताबिक प्रवेश परीक्षा एक से सात जुलाई के बीच होगी और परिणाम पांच अगस्त को जारी किए जाएंगे। सफल अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग 10 से 25 अगस्त के बीच होगी। नियमित सत्र 29 अगस्त से शुरू करने का निर्देश दिया गया है। सोमवार को अधिकारियों की बैठक में परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संभावित संख्या और परीक्षा केंद्र बनाए जाने के बारे में बात की गई।
UP BEd Entrance Exam 2022-23 : 18 अप्रैल से भरे जाएंगे यूपी बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आवेदन फार्म
उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022-23 के आवेदन 18 अप्रैल से भरे जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया 20 मई तक चलेगी। शासन की ओर से आवेदन प्रक्रिया का शेड्यूल रुहेलखंड विश्वविद्यालयको भेज दिया गया है।
🔴 देखें बीएड आवेदन 2022-23 से जुड़ी प्रमुख तारीखें
• 15 अप्रैल को जारी होगा बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का विज्ञापन।
• आनलाइन आवेदन 18 अप्रैल से 20 मई तक भरे जाएंगे।
• 1 से 7 जुलाई के बीच होगी बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा।
• 5 अगस्त को जारी होगा बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का परिणाम।
• 10 से 25 अगस्त के बीच होगी काउंसलिंग।
• 29 अगस्त से शुरू होगा नया सत्र।
उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022-23 के आवेदन 18 अप्रैल से भरे जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया 20 मई तक चलेगी। शासन की ओर से आवेदन प्रक्रिया का शेड्यूल रुहेलखंड विश्वविद्यालयको भेज दिया गया है। परीक्षा जुलाई के प्रथम सप्ताह में होगी। बीएड प्रवेश परीक्षा की तैयारियों को लेकर विश्वविद्यालयने कोर वर्किंग ग्रुप का गठन कर दिया है। आज होने वाली बैठक में परीक्षा की तैयारियों से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
इस वर्ष उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022 के आयोजन की जिम्मेदारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली को मिली है। शासन की ओर से बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन शुल्क सामान्य और ओबीसी के लिए 1000 रुपये और एससी-एसटी के लिए 500 रुपये रखा है। सामान्य-ओबीसी के लिए 1600 रुपये और एससी-एसटी के लिए 800 रुपये विलंब शुल्क निर्धारित किया गया है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन से आवेदनफार्म भरे जाने का कार्यक्रम मिलने के बाद तैयारियां शुरू कर दी हैं। दूसरी तरफ परीक्षा को लेकर शासन से मार्गदर्शन लेने के लिए विश्वविद्यालयके अफसर मंगलवार को लखनऊ भी जाएंगे। साथ ही 2021 की बीएड परीक्षा कराने वाली लखनऊ यूनिवर्सिटी के अफसरों के साथ मीटिंग भी करेंगे।
परीक्षा को लेकर सात सदस्यीय कोर ग्रुप का गठन
संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा को लेकर रुहेलखंड विश्वविद्यालयने सात सदस्यीय कोर ग्रुप का गठन किया है। कोर ग्रुप में कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार स्टेट कोआर्डिनेटर, सदस्य प्रो. एसके पांडेय, प्रो. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. क्षमा पांडेय, डॉ. गौरव राव, डॉ. ईरम नईम और आलोक सक्सेना शामिल हैं। कुलसचिव की अध्यक्षता में सोमवार को कोर ग्रुप की बैठक होगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीख में नहीं होगा टकराव
रुहेलखंड विश्वविद्यालयजुलाई के पहले सप्ताह में प्रवेश परीक्षा कराएगा। ऐसे में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से बीएड की प्रवेश परीक्षा की तिथि न टकराए, इसको लेकर विश्वविद्यालयप्रशासन काफी सजग है। रेलवे, यूपीएससी, अधीनस्थन सेवा चयन आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीख के आधार पर बीएड की डेट तय की जाएगी। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों और प्रतियोगी परीक्षा कराने वाले संस्थानों को पत्र भी विश्वविद्यालयलिखेगा।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि शासन से आवेदन फार्म भरे जाने का कार्यक्रम आ गया है। परीक्षा की तैयारियों को लेकर कोरग्रुप का गठन कर दिया गया है। सोमवार को बैठक में प्रवेश परीक्षा को लेकर रोडमैप तैयार किया जाएगा।
प्रवेश परीक्षा एक से सात जुलाई के बीच आयोजित की जाएगी। परीक्षा परिणाम 5 अगस्त को जारी किया जाएगा। परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों की काउंसलिंग 10 से 25 अगस्त के बीच करायी जाएगी। बीएड-2022 का नियमित सत्र 29 अगस्त से शुरू होगा।
बीएड (द्विवार्षिक) पाठ्यक्रम प्रवेश परीक्षा-2022 का आयोजन महात्मा ज्योतिबा फूले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की ओर से किया जाएगा। उधर, प्रदेश सरकार ने बी.एड प्रवेश परीक्षा का परीक्षा शुल्क एक तिहाई कम किया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि बीएड संयुक्त परीक्षा-2022 का विज्ञापन 15 अप्रैल को जारी किया जाएगा। प्रवेश परीक्षा एक से सात जुलाई के बीच आयोजित की जाएगी। परीक्षा परिणाम 5 अगस्त को जारी किया जाएगा। परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों की काउंसलिंग 10 से 25 अगस्त के बीच करायी जाएगी। बीएड-2022 का नियमित सत्र 29 अगस्त से शुरू होगा।
बीएड प्रवेश परीक्षा शुल्क कम किया
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि सामान्य वर्ग और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा शुल्क अभी 1500 रुपये और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 750 रुपये है। उन्होंने बताया कि इसमें इसमें एक तिहाई (करीब 33 प्रतिशत) कमी करने का निर्णय लिया है। सामान्य, पिछड़े वर्ग और राज्य के बाहर के अभ्यर्थियों का शुल्क करीब 1000 रुपये, विलंब शुल्क के साथ 1600 रुपये निर्धारित किया है। एससी-एसटी के अभ्यर्थियों का परीक्षा शुल्क करीब 500 रुपये और विलंब शुल्क के साथ 800 रुपये निर्धारित किया है। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में सभी उत्तीर्ण छात्रों की काउंसलिंग शुल्क को भी एक हजार रुपये से घटाकर 650 रुपये किया है।
UP BEd JEE 2022: योगी सरकार का युवाओं को बड़ा उपहार, बीएड प्रवेश परीक्षा व काउंसिलिंग का शुल्क घटेगा
UP BEd 2022 उत्तर प्रदेश में इस वर्ष बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022 का आयोजन महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की ओर से किया जाएगा। प्रदेश के छात्र और छात्राओं के हित में बीएड प्रवेश परीक्षा का शुल्क घटाने का निर्णय लिया गया है।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार युवाओं को बड़ा उपहार देने जा रही है। इस वर्ष की बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा व काउंसिलिंग शुल्क में बड़ी कटौती हो रही है। बीएड संयुक्त परीक्षा 2022 का विज्ञापन 15 अप्रैल को जारी होगा।
बीएड संयुक्त परीक्षा 2022 में आवेदन करने के लिए सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग व राज्य के बाहर के छात्रों को 1000 रुपये व विलंब शुल्क के साथ 1600 रुपये शुल्क देना होगा, जो पहले 1500 रुपये व विलंब शुल्क के साथ 2500 रुपये लिया जा रहा था। प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को काउंसिलिंग कराने के लिए 650 रुपये शुल्क देना होगा, जो पहले 1000 रुपये देना पड़ता था।
उत्तर प्रदेश में इस वर्ष बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022 का आयोजन महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली की ओर से किया जाएगा। प्रदेश के छात्र और छात्राओं के हित में बीएड प्रवेश परीक्षा का शुल्क घटाने का निर्णय लिया गया है।
बीएड संयुक्त परीक्षा 2022 का विज्ञापन 15 अप्रैल को जारी होगा। आवेदन की तारीखों का उल्लेख विज्ञापन में किया जाएगा। वहीं, प्रवेश परीक्षा एक से सात जुलाई के मध्य आयोजित कराई जाएगी। परीक्षा परिणाम पांच अगस्त को जारी होगा। परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों की काउंसिलिंग 10-25 अगस्त के बीच होगी। बीएड-2022 का नियमित सत्र 29 अगस्त से शुरू हो जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग शुक्रवार को इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी करेगा। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022 के लिए आनलाइन आवेदन भरने के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 500 रुपये व विलंब शुल्क के साथ 800 रुपये निर्धारित हो रही है, जो कि पहले 750 रुपये व विलंब शुल्क के साथ 1250 रुपये देनी पड़ती थी। इस परीक्षा के लिए हर वर्ष कई लाख छात्र-छात्राएं आवेदन करते आ रहे हैं।
यूपी बीएड जेईई 2022 की आवेदन प्रक्रिया
◆ आनलाइन आवेदन के लिए आधिकारिक वेबसाइट - www.mjpru.ac.in पर जाएं ।
◆ UPBEd के लिए यहां क्लिक करें पर क्लिक करें।
◆ आपको UP BEd पर पुनर्निर्देशित किया जाएगा। 2022 पोर्टल। आप उपरोक्त दो चरणों को छोड़कर सीधे यूपी बीएड पोर्टल पर जा सकते हैं।
जेईई फार्म के लिंक पर क्लिक करें।
◆न्यू यूजर रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करें।
◆ निर्देश पढ़ें और 'मैं सहमत हूं' चेक-बाक्स पर टिक करें।
◆ मांगे गए विवरण दर्ज करें और पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 'जनरेट ओटीपी' बटन पर क्लिक करें।
◆ परीक्षा के लिए आवेदन करने के लिए क्रेडेंशियल के साथ साइन इन करें।
◆आवेदन पत्र को पूरा करें।
पुष्टिकरण पृष्ठ का एक प्रिंट-आउट लें।

यूपी : परिषदीय अध्यापकों के अंतर्जनपदीय तबादले हो सकते हैं जल्द, ऑनलाइन ही किए जाएंगे ट्रांसफर
यूपी : परिषदीय अध्यापकों के अंतर्जनपदीय तबादले हो सकते हैं जल्द, ऑनलाइन ही किए जाएंगे ट्रांसफर
उच्च स्तरीय निर्देश के बाद महकमे में अंतर्जनपदीय तबादले की कवायद शुरू की गई है। तबादला नीति के अनुसार ऑनलाइन ही तबादले किए जाएंगे।
बेसिक शिक्षा परिषद में सहायक अध्यापकों के अंतर्जनपदीय तबादले ग्रीष्मावकाश में कराने की तैयारी है। सहायक अध्यापकों के परस्पर तबादले भी किए जाएंगे। बेसिक शिक्षा परिषद में 2020 के बाद से सहायक अध्यापकों के अंतर्जनपदीय तबादले नहीं हुए है।
वहीं 2021 में प्रस्तावित परस्पर तबादले भी नहीं हो सके है। सहायक अध्यापकों की ओर से अंतर्जनपदीय और परस्पर तबादले की मांग की जा रही है। शिक्षक संगठन भी विभाग पर तबादले को लेकर दबाव बना रहे है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक उच्च स्तरीय निर्देश के बाद महकमे में अंतर्जनपदीय तबादले की कवायद शुरू की गई है। तबादला नीति के अनुसार ऑनलाइन ही तबादले किए जाएंगे। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि तबादले का मामला लंबित नहीं रखा जाएगा, जल्द इसमें कार्यवाही की जाएगी।
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