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Sunday, May 8, 2022

स्कूली बच्चों के लिए हाइब्रिड लर्निग सिस्टम विकसित किया जाए, पीएम मोदी ने की नई शिक्षा नीति की समीक्षा

पीएम मोदी ने की नई शिक्षा नीति की समीक्षा, स्कूल छोड़ चुके बच्चे फिर शुरू कर पाएंगे पढ़ाई

स्कूली बच्चों के लिए हाइब्रिड लर्निग सिस्टम विकसित किया जाए : पीएम मोदी



 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि समता, गुणवत्ता, वहनीयता (sustainability) और जवाबदेही के उद्देश्यों को हासिल करने की दिशा में पिछले दो सालों में कई कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से मुख्य धारा में शामिल करने से लेकर उच्च शिक्षा में ‘मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट’ की व्यवस्था शुरू करने तक कई सुधारों की पहल की गई है जो देश की प्रगति में कारगर साबित होंगे।


बैठक में मौजूद रहे मंत्री और अधिकारी

इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार, अन्नपूर्णा देवी और राजकुमार रंजन सिंह, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी के मिश्रा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष, अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के निदेशक सहित शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


बैठक के दौरान प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय संचालन समिति के अधीन तैयार किए जा रहे राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा की प्रगति से अवगत कराया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा इस प्रकार विकसित की जानी चाहिए कि स्कूल जाने वाले छात्रों को कम से कम जोखिम का सामना करना पड़े।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को स्कूली बच्चों को प्रौद्योगिकी के अत्यधिक संपर्क से बचने के लिए आनलाइन और आफलाइन सीखने की हाइब्रिड प्रणाली विकसित करने की वकालत की। पीएम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।


आधिकारिक बयान के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा कि नई नीति पहुंच, समानता, समावेशिता व गुणवत्ता के उद्देश्यों के साथ शुरू की जा रही है। आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा बनाए गए डाटाबेस को स्कूल के रिकार्ड के साथ समेकित रूप से एकीकृत किया जाना चाहिए क्योंकि बच्चे आंगनवाड़ी से वहां जाते हैं। बयान में कहा गया कि छात्रों में वैचारिक कौशल विकसित करने के लिए उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित खिलौनों के उपयोग पर जोर दिया। 


उन्होंने सुझाव दिया कि विज्ञान प्रयोगशालाओं वाले माध्यमिक विद्यालयों को मिट्टी परीक्षण को क्षेत्र में किसानों के साथ जुड़ना चाहिए। नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल न जाने वाले बच्चों का पता लगाने व उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के विशेष प्रयासों व उच्च शिक्षा में बहुप्रवेश व निकास की शुरुआत से कई परिवर्तनकारी सुधार शुरू किए हैं। 


मोदी को अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय संचालन समिति के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। बयान में कहा गया कि स्कूली शिक्षा में बालवाटिका में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने, निपुण भारत, विद्या प्रवेश, परीक्षा सुधार और कला-एकीकृत शिक्षा, खिलौना आधारित शिक्षाशास्त्र जैसे अभिनव किए गए हैं जिनसे बच्चों का समग्र विकास होने के साथ वे बेहतर तरीके से सीख भी सकेंगे।

यूपी बोर्ड : एक लाख से ज्यादा छात्रों की छूटी प्रायोगिक परीक्षा

यूपी बोर्ड : एक लाख से ज्यादा छात्रों की छूटी प्रायोगिक परीक्षा

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षा संपन्न तो हो गई, लेकिन 1,03,798 परीक्षार्थियों की परीक्षा छूट गई। अब इन परीक्षार्थियों की परीक्षा कराने के लिए यूपी बोर्ड शासन की अनुमति से जल्द ही नई तिथि घोषित करेगा। इसके पहले विद्यालयवार छूटे परीक्षार्थियों की गणना की जा रही है। विद्यालयों में परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए नए सिरे से परीक्षा केंद्र निर्धारित किए जाएंगे।


दो चक्र में मंडलवार प्रायोगिक परीक्षा 20 अप्रैल से चार मई तक कराई गई। प्रायोगिक परीक्षा की तिथि घोषित किए जाने के बाद परीक्षा शुरू कराने में अंतर न होने के कारण तमाम परीक्षार्थी जानकारी के अभाव में परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सके। ऐसे में बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर प्रायोगिक परीक्षा छूटने वाले परीक्षार्थियों की विद्यालयवार और विषयवार जानकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर छह मई की रात्रि 12 बजे तक मांगी थी। बोर्ड सचिव के मुताबिक तय समय में 1,03,798 परीक्षार्थियों की परीक्षा छूटने की जानकारी विद्यालयों की और से पोर्टल पर दी गई है। किस विद्यालय में किस विषय के कितने परीक्षार्थी हैं, इसकी गणना की जा रही है। जहां अधिक परीक्षार्थी होंगे, 

वहां उसी विद्यालय को केंद्र बनाने में प्राथमिकता दी जाएगी। जिन विद्यालयों में परीक्षार्थियों की संख्या कम होगी, वहां के परीक्षार्थियों का केंद्र नजदीक के अधिक संख्या वाले विद्यालय में बनाया जाएगा। परीक्षा केंद्र निर्धारण और परीक्षकों की नियुक्ति के बाद शासन की अनुमति से परीक्षा तिथि घोषित कर परीक्षा संपन्न कराई जाएगी।

परीक्षकों की कमी से रह गया कुछ विषयों में मूल्यांकन

प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा- 2022 की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य लगभग पूरा हो गया है। कुछ जिलों में इक्का दुक्का विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन विषय के परीक्षक नहीं होने से रह गया है। इसके लिए बोर्ड सचिव की अनुमति से नजदीकी जिले से विषय के परीक्षक बुलाकर या उत्तरपुस्तिकाओं को गोपनीयता बरतते हुए वहां भेजकर मूल्यांकन करा लिया जाएगा। जिन विषयों में कुछ जिलों में परीक्षक नहीं हैं, वहां उत्तरपुस्किाओं की संख्या कम है। बोर्ड परीक्षा की ढाई करोड़ से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने के लिए सात मई की तिथि निर्धारित की गई थी। अधिकांश जिलों में शत प्रतिशत उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पूरा हो गया है। कानपुर देहात, कानपुर नगर, कन्नौज में सैन्य विज्ञान विषय के परीक्षक नहीं हैं। ऐसे में नजदीकी जिले से सैन्य विज्ञान विषय के परीक्षक को बुलाकर मूल्यांकन अविलंब पूर्ण किया जाएगा। बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने बताया कि 60 से अधिक जिलों ने मूल्यांकन पूरा हो जाने की रिपोर्ट भेज दी है। शनिवार को मूल्यांकन का आखिरी दिन होने के कारण कुछ जिलों में देर तक कार्य करके मूल्यांकन पूरा किया गया।

Saturday, May 7, 2022

कड़ी निगरानी में 14 मई से होंगी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं

यूपी : मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 14 मई से, मजिस्ट्रेट तैनात करने के निर्देश, कहा कि पर्चे किसी भी सूरत में लीक न हों

कड़ी निगरानी में 14 मई से होंगी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं


रजिस्ट्रार परिषद एसएन पांडेय के मुताबिक परीक्षा की सभी तैयारियां मुकम्मल करने को कहा गया है। विद्यालय, जिला, परिषद और निदेशालय स्तर पर सचल दल तैनात करने को कहा गया है। सेक्टर, स्टेटिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।



उप्र मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित की जाने वाली सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी, कामिल एवं फाजिल की परीक्षा 14 मई से होंगी। इस बाबत विभाग अल्पसंख्यक कल्याण विभाग केविशेष सचिव जेपी सिंह ने निदेशक , रजिस्ट्रार परिषद एवं सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर मजिस्ट्रेट तैनात करने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि पर्चे किसी भी सूरत में लीक न हों।



रजिस्ट्रार परिषद एसएन पांडेय के मुताबिक परीक्षा की सभी तैयारियां मुकम्मल करने को कहा गया है। विद्यालय, जिला, परिषद और निदेशालय स्तर पर सचल दल तैनात करने को कहा गया है। सेक्टर, स्टेटिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।


स्पष्ट कहा गया है कि सचल दल में महिला निरीक्षिकाओं की भी तैनाती की जाए। पुरुष सदस्यों द्वारा बालिका परीक्षार्थियों की तलाशी नहीं ली जाएगी। जनपदों को भी सेक्टरों में बांटा जाए। मजिस्ट्रेटों  एवं सचल दलों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्र लीक होने की घटना न होने पाए। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए कम से कम दो सशस्त्र गार्डोँ की तैनाती की जाए।

UPTET 2022 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित प्रश्नों पर किया जवाब तलब

UPTET 2022 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित प्रश्नों पर किया जवाब तलब



प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी के आठ विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल याचिका पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी से विस्तृत जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने रॉबिन जायसवाल व 200 अन्य की याचिका पर अधिवक्ता अभिषेक राय व अन्य को सुनकर दिया है।



 याचिका में यूपीटीईटी के आठ प्रश्नों को विवादित बताया गया है। कहा गया है कि इनमें से चार प्रश्न 2017 के थे। उन चार में से तीन प्रश्नों के उत्तर सुप्रीम कोर्ट तक से गलत माने गए थे और इस वर्ष फिर वे चार प्रश्न पूछे गए हैं। मांग की गई है कि विवादित प्रश्नों का विषय विशेषज्ञों से सही उत्तर प्राप्त कर उनके नम्बर दिए जाएं।

छात्रवृत्ति के लिए 18 मई से एक जुलाई तक करें आवेदन

छात्रवृत्ति के लिए 18 मई से एक जुलाई तक करें आवेदन

■ 05 को हार्ड कॉपी जमा करें जुलाई तक आवेदन

■ कक्षा नौ और दस के सामान्य व एससी छात्रों को मिलनी है छात्रवृत्ति


लखनऊ : प्रदेश सरकार ने कक्षा नौ व दस और कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं तथा मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, नर्सिंग, आदि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले गरीबी की रेखा के नीचे के परिवारों के अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति व फीस भरपाई के आवेदन की समय सारिणी जारी कर दी है।


नए शैक्षिक सत्र 2022-23 में कक्षा नौ व दस की कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थी आगामी 18 मई से 1 जुलाई के बीच आनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस अवधि में आवेदन करने से वंचित विद्यार्थियों को 2 जुलाई से 7 अक्तूबर के बीच आवेदन करने का एक और अवसर मिलेगा। इसी क्रम में कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति के गरीब छात्र-छात्राएं 10 मई से 7 जुलाई के बीच आनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

महिला शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए मांगी गई तय प्रारूप में गोपनीय आख्या

महिला शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए मांगी गई तय प्रारूप में गोपनीय आख्या

अपर शिक्षा निदेशक ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजा पत्र


प्रयागराज । अधीनस्थ राजपत्रित (महिला शाखा) के रिक्त पदों पर पात्रता सूची में संभावित शिक्षिकाओं (प्रवक्ता/ एलटी) को जल्द ही प्रोन्नति मिलेगी। इसके लिए अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) डॉ. अंजना गोयल ने शुक्रवार को सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र जारी कर पात्रता सूची में संभावित शिक्षिकाओं का विवरण सहित गोपनीय आख्या एवं प्रमाणपत्र मांगे हैं।


हालांकि इससे पूर्व भी महिला शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए उनका विवरण मांगा गया था, लेकिन कई जगह से मनमाने ढंग से अपने हिसाब से प्रारूप तैयार कर शिक्षिकाओं की गोपनीय आख्या निदेशालय को भेजकर खानापूरी कर ली गई। अपर शिक्षा निदेशक ने अपने पत्र में कहा है कि यह स्थिति शुचितापूर्ण एवं त्वरित निस्तारण में बाधा उत्पन्न करती है।


 उन्होंने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से कहा है कि निर्धारित प्रारूप में संबंधित शिक्षिकाओं को संपूर्ण विवरण अंकित कर गोपनीय आख्या/ प्रमाणपत्र एवं अन्य वांछित अभिलेख 13 मई तक पंजीकृत डाक के माध्यम से या वाहक के माध्यम से निदेशालय के नियुक्ति 2 अनुभाग को प्राप्त करा दें निर्धारित तिथि तक आख्या या अभिलेख न मिलने की स्थिति में शिक्षिका की प्रोन्नति बाधित होती है तो इसके लिए संबंधित मंडलीय या जनपदीय अधिकारी के साथ ही संबंधित संस्थाधिकारी एवं शिक्षिका की जिम्मेदारी होगी।



प्रयागराज : अधीनस्थ राजपत्रित (महिला शाखा) के रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए पात्रता सूची में संभावित शिक्षिकाओं की गोपनीय आख्या निर्धारित प्रारूप में न होने पर फिर से मांगी गई है। इसके लिए 13 मई अंतिम तिथि तय की गई है। अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) डा. अंजना गोयल ने प्रदेश के सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी) को पत्र लिखकर कहा है कि तय प्रपत्र के अनुरूप कई शिक्षिकाओं की गोपनीय आख्या उपलब्ध नहीं कराई गई है। अपर शिक्षा निदेशक ने कहा है कि गोपनीय आख्या प्रस्तुत करने के लिए पूर्व में प्रपत्र भेजा गया था। 


इसके बावजूद मनमाने ढंग से स्वयं प्रारूप निर्धारित कर गोपनीय आख्या निदेशालय को भेजना शासकीय कार्यों के शुचितापूर्ण निस्तारण में बाधा उत्पन्न करना है। पदोन्नति का लाभ प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापक (एलटी) दोनों को मिलना है। निर्देश दिए हैं कि पात्रता सूची की संबंधित शिक्षिकाओं का संपूर्ण विवरण तय प्रारूप में अंकित कर गोपनीय आख्या/ प्रमाणपत्र एवं अन्य वांछित अभिलेख निर्धारित तिथि तक भेजना सुनिश्चित करें। पुन: संलग्न किया गया है।


 इसे पंजीकृत डाक के माध्यम से अथवा वाहक के माध्यम से निदेशालय के नियुक्ति-2 अनुभाग में प्राप्त कराना सुनिश्चित करें। तय तिथि तक गोपनीय आख्या व अन्य पत्रादि प्राप्त न होने पर यदि किसी शिक्षिका की पदोन्नति बाधित होती है तो उसके लिए संबंधित मंडलीय एवं जनपदीय अधिकारी के साथ ही संबंधित संस्थाधिकारी और शिक्षिका स्वयं जिम्मेदार माने जाएंगे।




डेढ़ साल से नहीं मिला छह माह का बकाया वेतन


प्रयागराज 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों को डेढ़ साल से छह माह का वेतन नहीं मिला है। चयनित अभ्यर्थियों को प्रयागराज में 16 अक्तूबर 2020 को नियुक्ति मिली थी, जबकि वेतन का भुगतान मई 2021 से शुरू हुआ। शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन देकर शुरुआत छह माह के वेतन के एरियर भुगतान की मांग की है। 


प्रयागराज में 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत नियुक्त शिक्षकों का कहना है कि उन्हें शुरुआत छह माह 14 दिनों के वेतन का भुगतान नहीं हुआ है, जबकि अन्य जनपदों में इसका भुगतान प्रथम वेतन के साथ किया जा चुका है। वहीं, प्रयागराज इस मामले में पिछड़ा हुआ है और यहां यह प्रक्रिया 18 माह बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत नियुक्त शिक्षकों ने मांग की है कि बकाया वेतन के एरियर का भुगतान शीघ्र किया जाए। 


नियमित सेवा से पहले दस्तावेज का सत्यापन क्यों नहीं? : हाई कोर्ट, अफसरों की जवाबदेही तय कर मांगी रिपोर्ट

नियमित सेवा से पहले दस्तावेज का सत्यापन क्यों नहीं : हाई कोर्ट, अफसरों की जवाबदेही तय कर मांगी रिपोर्ट
 
फर्जी डिग्री से नियुक्ति पाने का मामला : हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से अफसरों की जवाबदेही तय कर मांगी रिपोर्ट



प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा एलटी अध्यापक को बर्खास्त करने के आदेश पर रोक लगा दी। अध्यापक को फर्जी बीएड अंकपत्र व डिग्री के आधार पर नियुक्ति पाने का दोषी करार देते हुए बर्खास्त कर दिया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को 1993 में तदर्थ नियुक्त अध्यापक को 2008 में नियमित करने व 2015 में चयन वेतनमान देने वाले शिक्षा विभाग कुशीनगर के सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया है।


 अधिकारियों की जवाबदेही तय कर तीन माह में रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज का सत्यापन नियमित सेवा में लेने के समय ही किया जाना चाहिए था। ऐसा क्यों नहीं किया गया? फर्जी अंक पत्र वाला व्यक्ति सरकारी धन से कैसे नियुक्त किया गया? कोर्ट ने निदेशक के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि याची के अध्यापन कार्य में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने जनता इंटर कालेज रामकोला, कुशीनगर कृषि अध्यापक अशोक कुमार सिंह की याचिका पर दिया है। मामले के अनुसार याची एलटी ग्रेड कृषि अध्यापक पद पर तदर्थ रूप में छह मार्च 1993 को नियुक्त किया गया। क्षेत्रीय समिति ने 15 सितंबर 2008 को सेवा नियमित कर दी।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक के एलटी अध्यापक की बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी है। अध्यापक को फर्जी बीएड अंकपत्र के आधार पर नियुक्ति पाने का दोषी करार देते हुए उसे बर्खास्त कर दिया गया था।


कोर्ट ने राज्य सरकार को 1993 में तदर्थ नियुक्त अध्यापक को 2008 में नियमित करने और 2015 में चयन वेतनमान देने वाले शिक्षा विभाग कुशीनगर के सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही तय कर तीन माह में रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने जनता इंटर कॉलेज रामकोला कुशीनगर के अध्यापक अशोक कुमार सिंह की याचिका पर दिया है।


कोर्ट ने कहा है कि फर्जी अंकपत्र वाला व्यक्ति सरकारी धन से कैसे नियुक्त किया गया। दस्तावेज का सत्यापन नियमित सेवा में लेने के समय ही किया जाना चाहिए था। ऐसा क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने निदेशक के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि याची के अध्यापन कार्य में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न किया जाए।लोकसेवक से ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं की जा सकतीकोर्ट ने कहा कि एक लोक सेवक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि दस्तावेज का सत्यापन किए बगैर सेवा नियमित कर देगा। डीआईओएस सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी की भी जवाबदेही है। चयन वेतनमान देने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही है। विभागीय जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा सेवा नियमित करने से लेकर चयन वेतनमान देने तक की जांच होनी चाहिए।


याची ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन न होने पर याचिका दायर की थी। नोटिस जारी होने केबाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने धारा 16 ई (10) के अंतर्गत कार्यवाही शुरू की। याची ने जवाब दिया कि उसकी नियुक्ति बीएससी कृषि डिग्री के आधार पर की गई थी। फर्जी डिग्री के आरोपों से इनकार किया। सुनवाई केदिन याची की पत्नी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती थी। उसने निदेशक को इसकी सूचना दी। इसके बाद दोबारा बुलाए बगैर याची की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जिसे चुनौती दी गई है।

संस्कृत विश्वविद्यालय भी कराएंगे बीए, बीएससी की पढ़ाई

संस्कृत विश्वविद्यालय भी कराएंगे बीए, बीएससी की पढ़ाई



नई दिल्ली: संस्कृत विश्वविद्यालय अब संस्कृत की पढ़ाई तक ही सीमित नहीं रहेंगे, वे दूसरे विश्वविद्यालयों की तरह सभी ऐसे विषयों की शिक्षा देंगे, जो रोजगारपरक के साथ छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर सकें। इनमें बीए, बीएसएसी और बीकाम जैसे डिग्री कोर्स भी शामिल होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय बहु विषयक केंद्र के रूप में तब्दील होंगे। संस्कृत को आम लोगों से जोड़ने सहित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय खुद को किस तरह से तैयार करें, इसको लेकर शनिवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है।



देश के तीनों केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने संयुक्त रूप से पत्रकारों से चर्चा में यह जानकारी दी है। इनमें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति के कुलपति प्रोफेसर राधाकांत ठाकुर शामिल हैं।


प्रोफेसर पाठक ने बताया कि संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए आयोजित इस परिचर्चा को उत्कर्ष महोत्सव नाम दिया गया है। यह महोत्सव सात मई से नौ मई तक दिल्ली में चलेगा। शनिवार यानी सात मई को महोत्सव का शुभारंभ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा करेंगे। इस अवसर पर कई विद्वान मौजूद होंगे। इस दौरान परिचर्चा का विषय ‘नए शैक्षिक युग में संस्कृत अध्ययन का वैश्विक उन्मुखीकरण’ रखा गया है। महोत्सव के दूसरे दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. मुरली मनोहर जोशी और समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान होंगे।



तीसरी कक्षा से संस्कृत, छठी से वैदिक गणित पढ़ेंगे बच्चे

धर्मशाला : हिमाचल में अगले शैक्षणिक सत्र से तीसरी कक्षा से बच्चे संस्कृत पढ़ेंगे। तीसरी और चौथी कक्षा में परीक्षा नहीं होगी, जबकि पांचवीं कक्षा में होगी। छठी से दसवीं कक्षा तक वैदिक गणित भी पढ़ाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुरेश कुमार सोनी ने शुक्रवार को निदेशक मंडल की 118वीं बैठक में लिए फैसलों की जानकारी पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि मेरिट आधार पर दसवीं व जमा दो कक्षा के मेधावियों की छात्रवृत्ति राशि में बढ़ोतरी की गई है। दसवीं में मेरिट में आने वाले 400 बच्चों को 7200 रुपये छात्रवृत्ति दी जाती थी। अब इसे 12 हजार रुपये किया गया है। जमा दो के आर्ट्स व कामर्स के सौ-सौ बच्चों को 10 हजार की जगह 15 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी। विज्ञान संकाय के बच्चों को 12 हजार की जगह 17 हजार रुपये मिलेंगे।

10 बिन्दुओं में जानिए आज सम्पन्न प्रेरणा DBT यूट्यूब सेशन की मुख्य बातें

10 बिन्दुओं में जानिए आज सम्पन्न प्रेरणा DBT यूट्यूब सेशन की मुख्य बातें


1) प्रेरणा डी0बी0टी0 हेतु सभी छात्र छात्राओं का आधार अनिवार्य कर दिया गया है।

2) जो छात्र छात्राये आधार नामांकन से वंचित है उनकी सूची दे और आधार नामांकन कराये बी0आर0सी0 पर दो क्रियाशील मशीनें उपलब्ध है।अभिभावक के रुचि न लेने की स्थिति में छात्र छात्राओं के आधार नामांकन की स्वयं पहल करें।

3) छात्र छात्राओं के माता पिता का आधार नंबर भी अनिवार्य है।

4) माता पिता का आधार सीडेड खाता भी होना चाहिए।

5) माता पिता दोनो के जीवित न होने की स्थिति में ही अभिभावक का आधार व खाता मान्य होगा।

6) डी0बी0टी0 आधार बेस्ड ट्रांजेक्शन है माता पिता व अभिभावक का जो खाता आधार सीडेड होगा उसमे भुगतान पहुँच जाएगा।

7) एस0आर0 पंजिका व आधार में नाम मे ,जन्म तिथि में अथवा किसी प्रविष्टि में भिन्नता होने की स्थिति में अभिभावक से बात करनी होगी कि क्या सही है।यदि अभिभावक यह बताता है कि एस0आर0 पंजिका की प्रविष्टियां सही है ,ऐसी स्थिति में आधार में संशोधन होगा।यदि आधार सही है एस0आर0 पंजिका गलत है,ऐसी स्थिति में एस0आर0 पंजिका में कोई संशोधन नही किया जाएगा बल्कि अलग से डी0बी0टी0 कार्य की एक पंजिका बनाई जाएगी उसमे सभी प्रविशिया दर्ज की जाएंगी।आधार के अनुसार प्रविष्टियां भरी जाएंगी।

8) किसी भी नव प्रवेशी छात्र छात्रा का प्रवेश यदि वो आधार नामांकन से वंचित है,रोका नही जाएगा।प्रवेश के उपरांत उसका आधार नामांकन कराये।

9) प्रेरणा डी0बी0टी0 एप में जो आधार में छात्र छात्राओं, माता पिता अथवा अभिभावक का जो नाम नाम ,जन्म तिथि,जैसे भी अंकित है वही दर्ज की जाएगी।उसमे से कुछ घटाया अथवा बढ़ाया नही जायगा।

10) जो छात्र छात्राये विगत वर्ष डी0बी0टी0 का लाभ ले चुके है अथवा जिन्हें धनराशि खाते में मिली है उन्ही की फ़ोटो अपलोड की जाएगी।


सभी प्रधानाध्यापक/इंचार्ज उक्त निर्देशो का अक्षरशः अनुपालन करते हुए डी0बी0टी0 का कार्य नवीन छात्र छात्राओं का पंजीयन,पुराने छात्र छात्राओं का वेरिफिकेशन का कार्य समय से पूर्ण करना सुनिश्चित करे।


✍️  यहीं देखें पूरा यूटयूब सेशन 👇


 

09 मई 2022 को प्रेरणा पोर्टल पर छात्र-छात्राओं का रजिस्ट्रेशन एवं आधार सत्यापन से सम्बन्धित यूट्यूब सत्र आयोजन के संबंध में 

✍️  यूटयूब सत्र से जुड़ने का लिंक 

👉  https://youtu.be/iAXAmBLjDh0


शैक्षिक सत्र 2022 23 में नामांकित छात्र-छात्राओं के प्रेरणा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन एवं आधार सत्यापन के साथ-साथ पोर्टल पर पूर्व से पंजीकृत छात्र-छात्राओं के आधार सत्यापन एवं गत वर्ष में लाभान्वित छात्र-छात्राओं के फोटो (पूर्ण यूनिफॉर्म में) अपलोड किए जाने की सुविधा प्रदान करते हुए प्रेरणा डीबीटी मोबाइल ऐप का नया वर्जन लांच किया जा रहा है।


 मोबाइल ऐप के इस नए वर्जन के संचालन से संबंधित तकनीकी पहलुओं और संचालन के दौरान उत्पन्न होने वाली संभावित कठिनाइयों के समाधान के लिए दिनांक 9 मई 2022 को पूर्वाहन 11:00 बजे से एक यूट्यूब सेशन आयोजित किया जा रहा है।


 आप से अपेक्षित है कि अपने जनपद के समस्त अध्यापकों, ए आर पी, एस आर जी, कंप्यूटर ऑपरेटर, अन्य तकनीकी स्टाफ के साथ-साथ समस्त खंड शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भी इस यूट्यूब सत्र में प्रतिभाग करें।


Friday, May 6, 2022

फतेहपुर : स्वमूल्यांकन के आधार पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2021-22 हेतु 5 स्टार और 4 स्टार श्रेणी में 446 विद्यालयों का होगा सत्यापन

स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए होगा स्कूलों का सत्यापन
 

एक नजर में आवेदन और स्टार पर

● आवेदन वाले स्कूल 1076
● फाइव स्टार वाले 21
● फोर स्टार वाले 425
● थ्री स्टार वाले 630

फतेहपुर : स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए जनपद स्तरीय समिति ने उन 446 परिषदीय विद्यालयों का सत्यापन एवं मूल्यांकन कराने का फैसला किया है, जिन्हें पांच एवं चार स्टार मिले हैं। सत्यापन के दौरान विद्यालयों द्वारा आवेदन के दौरान उपलब्ध कराई गई सूचनाओं, फोटोग्राफ्स एवं वस्तुस्थिति को परखा जाएगा। सत्यापन के उपरांत वस्तुस्थिति की रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इस सम्बन्ध में दो दिन पूर्व डायट सभागार में एक बैठक भी बुलाई गई थी।

बीते सत्र में स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए स्कूलों से आवेदन मांगे गए थे। स्वमूल्यांकन के आधार पर जिले के 1076 हेड मास्टरों व प्रभारी हेडमास्टरों ने स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए आवेदन किए थे। स्वमूल्यांकन के आधार पर किए गए आवेदन के फलस्वरूप स्कूलों को रेटिंग दी गई है।

अब स्कूलों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं का मूल्यांकन व सत्यापन किया जाना है। इसके लिए जनपदीय समिति ने बैठक के बाद एआरपी, एसआरजी, डायट प्रवक्ताओं तथा मेंटरों के जरिए सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। सत्यापन व मूल्यांकन के नियमों को बताने के लिए डायट सभागार में बुलाई गई बैठक में विस्तार से चर्चा की गई।

समिति ने साफ तौर पर कहा है कि आने वाली 13 मई तक सत्यापन कार्य समाप्त कर लिया जाए। इसके बाद रिपोर्ट आगे भेजी जाएगी। इसके साथ ही साथ सर्वश्रेष्ठ विद्यालय को पुरस्कार से भी नवाजा जलाएगा। ताकि उनका उत्साह भी बढ़े।



फतेहपुर : स्वमूल्यांकन के आधार पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2021-22 हेतु 5 स्टार और 4 स्टार श्रेणी में 446 विद्यालयों का होगा सत्यापन

13 मई तक ARP, SRG और डायट प्रवक्ता मेंटर के जरिए होगा सत्यापन, देखें विद्यालय की सूची और सत्यापन कर्ता का नाम


स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2021-22" हेतु जनपद फतेहपुर के कुल 1076 विद्यालयों द्वारा स्वमूल्यांकन के आधार पर आनलाइन आवदेन किया गया है। जिसके सापेक्ष 21 विद्यालय 5 स्टार श्रेणी में, 425 विद्यालय 4 स्टार श्रेणी में तथा 630 विद्यालय 3 स्टार श्रेणी में निर्धारित अंक प्राप्त किये हैं।


 मुख्य विकास अधिकारी महोदय की अध्यक्षता में गठित जनपद स्तरीय समिति की बैठक दिनांक 05.05.2022 में लिये गये निर्णयानुसार 5 स्टार श्रेणी से आच्छादित 21 विद्यालय तथा 4 स्टार श्रेणी से आच्छादित 425 विद्यालय कुल 446 विद्यालयों का मूल्याकन / सत्यापन ए०आर०पी० एस०आर०जी० तथा डायट के प्रवक्ता मेंटर से कराया जाना है।


तत्क्रम में संलग्न विवरणानुसार सम्बन्धित ए०आर०पी० एस०आर०जी० तथा डायट के प्रवक्ता / मेंटर की ड्यूटी उनके नाम के सम्मुख आवंटित विद्यालय का सत्यापन / मूल्यांकन किये जाने हेतु लगायी जाती है। तथा निर्देशित किया जाता है कि दिनांक 13.05.2022 तक अपने-अपने आवंटित विद्यालय का सत्यापन / मूल्याकन करना सुनिश्चित करें। 


सत्यापन / मूल्यांकन किये जाने की प्रक्रिया से सम्बन्धित एक कार्यशाला दिनांक 07.05.2022 को अपरान्ह 12 बजे से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभागार में आहूत की गयी है। जिसमें ससमय प्रतिभाग करना सुनिश्चित करें।



जून के दूसरे हफ्ते में आएगा यूपी बोर्ड का रिजल्ट, 75 फीसदी से अधिक कॉपियों का मूल्यांकन कार्य पूरा

जून के दूसरे हफ्ते में आएगा यूपी बोर्ड का रिजल्ट, 75 फीसदी से अधिक कॉपियों का मूल्यांकन कार्य पूरा

■ यूपी बोर्ड ने परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की 
■ प्रायोगिक परीक्षा भी हुई पूरी स्कूलों से मांगे गए नंबर


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम जून के दूसरे सप्ताह में घोषित करने की तैयारी है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव में जून के दूसरे सप्ताह में बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित करने की बात है।


प्रदेश के 271 केंद्रों पर 10वीं 12वीं की सवा दो करोड़ से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन अंतिम दौर में है। केंद्र प्रभारियों को भेजे गए निर्देश के अनुसार शनिवार तक सभी कॉपियां जांची जानी है। इस बीच रिजल्ट तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। जैसे-जैसे कॉपियों का मूल्यांकन होता जा रहा है, परीक्षार्थियों के अंक अपलोड होते जा रहे हैं। प्रायोगिक परीक्षाओं के अंक भी स्कूलों से मांग लिए गए हैं।

हाईस्कूल के आंतरिक मूल्यांकन एवं इंटर के खेल और शारीरिक शिक्षा विषय के प्राप्तांकों को पहले ही मांगा जा चुका है। गौरतलब है कि 10वीं 12वीं के लिए पंजीकृत 5192689 परीक्षार्थियों में से 4775749 परीक्षा में शामिल हुए थे।

प्रायोगिक परीक्षा से वंचितों की मांगी लिस्ट

बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने इंटर की प्रायोगिक परीक्षा से वंचित छात्रों की लिस्ट मांग ली है। सचिव ने चार मई को जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजा है। इसके लिए बोर्ड का पोर्टल गुरुवार को खोल दिया गया जिस पर शुक्रवार की रात 12 बजे तक छूटे हुए परीक्षार्थियों की विद्यालयवार और विषयवार संख्या अपलोड करनी है।

CUET में आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ी, हाथ से न जाने दें ये मौका

CUET 2022 के लिए आवेदन अब 22 मई  तक

CUET में आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ी, हाथ से न जाने दें ये मौका 


नई दिल्ली  : यूनिवर्सिटीज एंट्रेंस टेस्ट ( सीयूईटी) 2022 के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 22 मई तक बढ़ाने का फैसला किया गया है। यह फैसला यह परीक्षा आयोजित कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने किया है।



 गुरुवार को एनटीए ने कहा कि हम कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) के लिए आवेदन जमा  करने की अंतिम तिथि 22 मई तक बढ़ा रहे हैं। हमें उम्मीद है कि यह फैसला छात्रों को सीयूईटी के लिए आवेदन करने का अतिरिक्त अवसर प्रदान करेगा। आप सभी को शुभकामनाएं। अधिक जानकारी "https://cuet.samarth.ac.in" पर मिलेगी । पहले सीयूईटी 2022 आवेदन की अंतिम तिथि 6 मई थी।

कैसे संभव 20 फीसदी नांमाकन? जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर ही करीब डेढ़ फीसदी तो एक साल में कहां से बढ़ेंगे बीस फीसदी बच्चे।

कैसे संभव 20 फीसदी नांमाकन? जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर ही करीब डेढ़ फीसदी तो एक साल में कहां से बढ़ेंगे बीस फीसदी बच्चे। 



फतेहपुर : इन दिनों दोआबा के परिषदीय शिक्षकों के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने अपने हेडमास्टरों व शिक्षकों से कहा है कि नवीन शैक्षिक सत्र में गत सत्र के मुकाबले बीस फीसदी की वृद्धि होनी चाहिए। इतना बड़ा लक्ष्य देख भीषण तपिश में शिक्षकों के शरीर से पसीना निकलने की दर में जरूर इजाफा हो गया है।


एक साल में कहां से बढ़ेंगे बीस फीसदी बच्चे: नाम न छापने की शर्त पर शिक्षक कहते हैं कि जब जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर ही करीब डेढ़ फीसदी के आसपास है तो हम नामांकन में सिर्फ एक साल में बीस फीसदी का इजाफा कैसे कर सकते हैं। वह बीस फीसदी नामांकन किस तरह बढ़ाएंगे, यह बड़ा सवाल है।


पहले कक्षा पांच व आठ की हो भरपाई: शिक्षक कहते हैं कि मान लीजिए किसी छोटे गांव में स्थित विद्यालय में गत सत्र में कक्षा पांच उत्तीर्ण कर 30 बच्चे निकल गए तो इन 30 बच्चों की तो भरपाई हो, फिर हम बीस फीसदी इजाफे के बारे में सोचेंगे। छोटे से गांवों में बड़ी संख्या में उत्तीर्ण बच्चों की भरपाई ही लक्ष्य साबित हो रही है।


न्यूनतम वृद्धि दर वाले जिलों में था फतेहपुर

2011 की जनगणना में यह जिला न्यूनतम दशकीय वृद्धि करने वाले टाप फाइव जिलों में शुमार था। इसकी दशकीय वृद्धि दर 14.05 प्रतिशत दर्ज की गई थी। 20 नामांकन बढ़ोत्तरी पर सवाल हो रहे हैं।


प्रत्येक ग्राम पंचायतों में अभी कई बच्चे हैं जो स्कूल से दूर हैं। शिक्षकों से पिछले सत्र में गए बच्चों की भरपाई का ही लक्ष्य दिया गया है। पिछले सत्र में करीब 40 हजार बच्चे आगे की पढ़ाई के लिए निकले हैं। -संजय कुशवाहा, बीएसए

ग्राम सचिवालय के 50 मीटर दायरे में मुफ्त वाईफाई, आदेश जारी हुआ

ग्राम सचिवालय के 50 मीटर दायरे में मुफ्त वाईफाई, आदेश जारी हुआ


राज्य सरकार ग्राम सचिवालय के 50 मीटर दायरे में लोगों को मुफ्त वाईफाई की सुविधा देगी। इसके लिए प्रदेश के 58,189 ग्राम पंचायत सचिवालय को वाईफाई से जोड़ा जाएगा।


अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया है। उन्होंने पंचायती राज निदेशक को इसके लिए जल्द काम शुरू कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के गांवों को स्मार्ट गांव बनाना चाहते हैं। इसके लिए ग्राम पंचायत कार्यालय को ग्राम सचिवालय का दर्जा दिया जा रहा है। गांवों की जनता को विभिन्न विभागों से जिन दस्तावेजों, अभिलेखों व कागजात की जरूरत पड़ती है। ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से इसे देने की व्यवस्था की जा रही है।


ग्राम पंचायतों में रहने वाली ग्रामीण जनता की क्षमता का पूर्ण विकास व नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी जरूरी है। स्मार्ट ग्राम की उक्त परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए शासन ने ग्राम पंचायत के ग्राम सचिवालय कार्यालयों को हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का फैसला किया है। इंटरनेट कनेक्टिविटी की ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिससे ग्राम सचिवालय भवन के 50 मीटर दायरे में ग्रामीणों को फ्री वाईफाई की सुविधा मिल सके। निदेशक पंचायती राज इस दिशा में तुरंत काम शुरू करेंगे, जिससे ग्रामीणों को इसका लाभ मिल सके।

नॉलेज एक्सचेंज के तहत उच्च शिक्षण संस्थान पांच-पांच गांव गोद लेंगे

नॉलेज एक्सचेंज के तहत उच्च शिक्षण संस्थान पांच-पांच गांव गोद लेंगे


छात्रों को किताबी ज्ञान से अलग व्यापक जन-जीवन से जुड़ी शिक्षा देने के लिए उच्च शिक्षा संस्थान, नॉलेज एक्सचेंज (ज्ञान विनिमय ) के तहत पांच गांवों को गोद लेंगे।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत किए जा रहे उपायों के तहत छात्रों को सामाजिक सरोकार की गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। साथ ही गांव के सामाजिक, आर्थिक विकास को भी सुनिश्चित किया जाएगा। यूजीसी ने देश मे गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए कई तरह की रूपरेखा तैयार की है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत किए जा रहे उपायों के तहत छात्रों के जीवन कौशल से जुड़े पाठ्यक्रम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका मकसद स्नातक छात्रों में ऐसे गुणों को विकसित करना है, जो उनको सफलता दिलाने में सहायक हों। साथ ही छात्रों में स्वक्षमता, भावनात्मक योग्यता, बौद्धिक क्षमता, आत्मविश्वास, सामाजिक योग्यता, व्यावसायिक क्षमता जैसे गुण भी विकसित हों। जिससे छात्र विश्व स्तर पर मौजूद रोजगार के अवसरों को प्राप्त करने के लिए अपनी क्षमता विकसित कर सफलता प्राप्त कर सके। नई शिक्षा नीति के तहत हर संस्थान के सामाजिक व औद्योगिक जुड़ाव को बढ़ाने की रणनीति पर भी काम हो रहा है।


इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सामाजिक व औद्योगिक रूप से रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ना है। एक अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद कम से कम दो तिहाई छात्रों को पढ़ाई के दौरान सामाजिक उत्पादकता से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ने व औद्योगिक कामकाज की बेहतर समझ दिलाना है।


मूल्यांकन प्रणाली इस तरह से विकसित की गई है, जिसमे निरंतर मूल्यांकन के साथ सीखने को भी प्रेरित किया जा सके और उच्च शिक्षा ज्यादा अच्छे परिणाम देने वाली बन सके।

इस शैक्षिक सत्र डिजिटल पर जोर, हाजिरी-निरीक्षण टैब से,प्राइमरी के साथ माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी टैबलेट देने की योजना

इस शैक्षिक सत्र डिजिटल पर जोर, हाजिरी-निरीक्षण टैब से,
प्राइमरी के साथ माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी टैबलेट देने की योजना


लखनऊ । इस शैक्षिक सत्र में यूपी में डिजिटल पर जोर रहेगा। प्राइमरी के साथ अब माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी टैबलेट दिया जाएगा। प्राइमरी स्कूलों के दो शिक्षकों को लैपटॉप दिया जाएगा। सभी माध्यमिक स्कूलों, केजीबीवी और 21 हजार प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास भी लगाई जाएगी। ये प्रस्ताव राज्य सरकार समग्र शिक्षा अभियान की वार्षिक कार्ययोजना में भेज रही है। प्रदेश में 2675 माध्यमिक और 1.33 लाख प्राइमरी व जूनियर स्कूल हैं।


प्राइमरी स्कूलों में डाटा अपलोड करने से लेकर बायोमीट्रिक हाजिरी तक के लिए टैबलेट देने की योजना पर पिछले तीन सालों से काम चल रहा है लेकिन अभी तक प्रधानाध्यापकों के पास टैबलेट नहीं पहुंचे हैं। अब इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी टैबलेट दिया जाएगा। प्राइमरी स्कूलों के दो शिक्षकों को हिन्दी व गणित को सुदृढ़ बनाने के लिए लैपटॉप दिया जाएगा।



ई लाइब्रेरी पोर्टल भी बन रहा

प्रदेश सरकार छात्रों तक अध्ययन सामग्री की आसानी से उपलब्धता के लिए ईझ्रलाइब्रेरी पोर्टल विकसित करेगी। इससे कम संसाधनों में विद्यार्थियों तक शैक्षिक सामग्री की पहुंच आसान होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसे 100 दिनों की कार्ययोजना में शामिल किया है।


बायोमिट्रिक अटेंडेंस के निर्णय वापसी की मांग

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की आम सभा की बैठक का आयोजन गुरुवार को किया गया। जिसमें शिक्षकों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस तथा उसकी वेतन से संबद्धता के लिए कुलाधिपति महोदया के पत्र पर गहन चर्चा की गई। सभा का मत था कि विश्वविद्यालय शिक्षकों एवं अन्य सरकारी कर्मियों के कार्य की प्रकृति में अंतर होता है। विवि ज्ञान के सृजन एवं वितरण के केंद्र हैं। विश्वविद्यालय शिक्षकों का कार्य शिक्षण के साथ-साथ शोध भी है। बायोमेट्रिक उपस्थिति का निर्णय मात्र शिक्षण कार्य को ध्यान में रख कर लिया गया है। जबकि शिक्षक शोध भी करता है जो समय सीमा से परे है।

पॉलीटेक्निक : 7 से 12 मई के बीच सुधारें आवेदन पत्र की त्रुटियां, दाखिले के लिए आए ढाई लाख आवेदन

पॉलीटेक्निक : 7 से 12 मई के बीच सुधारें आवेदन पत्र की त्रुटियां, दाखिले के लिए आए ढाई लाख आवेदन

पॉलीटेक्निक संस्थाओं में दाखिले के लिए ढाई लाख से अधिक आवेदन हुए हैं। अब आवेदन के लिए अंतिम तिथि में कोई विस्तार नहीं किया जाएगा।


उत्तर प्रदेश में सरकारी, अनुदानित व निजी पॉलीटेक्निक संस्थाओं की दो लाख चौबीस हजार सीटों पर दाखिले के लिए ढाई लाख से अधिक आवेदन हुए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि बृहस्पतिवार को समाप्त हो गई। अभ्यर्थी आवेदन पत्र में हुईं त्रुटियों को 7 से 12 मई के बीच ऑनलाइन सुधार सकेंगे।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के प्रभारी सचिव राम रतन ने बताया कि बृहस्पतिवार को अंतिम तिथि तक 2,63,444 आवेदन हुए हैं। अब आवेदन के लिए अंतिम तिथि में कोई विस्तार नहीं किया जाएगा।

अभ्यर्थियों ने आवेदन पत्र में नाम, पता, मोबाइल नंबर या अन्य कोई ब्योरा गलत भर दिया है तो उसे 12 मई तक वेबसाइट jeecup.admissions.nic.in पर दुरुस्त कर सकते हैं। इसके बाद 30 मई से प्रवेश परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र/हॉल टिकट डाउनलोड किए जा सकेंगे।

ऑनलाइन/सीबीटी प्रवेश परीक्षाएं 6 से 10 जून तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित की जाएंगी। प्रवेश परीक्षा से संबंधित निर्देश व अन्य जानकारी परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

Thursday, May 5, 2022

कोविड की संभावित लहर एवं गर्मी के परिप्रेक्ष्य में ग्रीष्म अवकाश जल्दी शुरू करने के सम्बन्ध में उ०प्र० बाल अधिकार संरक्षण आयोग का पत्र

कोविड की संभावित लहर एवं गर्मी के परिप्रेक्ष्य में ग्रीष्म अवकाश जल्दी शुरू करने के सम्बन्ध में उ०प्र० बाल अधिकार संरक्षण आयोग का पत्र



जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती : OMR शीट के कोठार का ताला खुला, रिपोर्ट शासन को प्रेषित

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती : OMR शीट के कोठार का ताला खुला, रिपोर्ट शासन को प्रेषित

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती में कम अंक मिलने की हो सकेगी जांच 

कोठार में मिले दस्तावेजों से जुड़ी रिपोर्ट पीएनपी ने शासन को भेजी



प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती के परिणाम पर अभ्यर्थियों ने कम अंक मिलने का आरोप लगाए थे। उक्त मामले की जांच गत दिनों लंबित रही क्योंकि ओएमआर शीट जिस कोठार में रखी थी, उसके ताले की चाभी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2021 के पर्चा लीक मामले में जेल भेजे गए उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) के पूर्व सचिव के पास थी। एडेड जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक के 1504 और प्रधानाध्यापक के 390 पदों के लिए पीएनपी ने परीक्षा कराई थी।


 परिणाम 15 नवंबर 2021 को घोषित किया गया था। इसमें प्रधानाध्यापक पद के लिए 1722 और सहायक अध्यापक पद के लिए 45,257 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। इसके बाद पीएनपी यूपीटीईटी 28 नवंबर-2021 को कराने की तैयारी में जुट गया। इधर, शिक्षक भर्ती के कुछ अभ्यर्थियों ने कम अंक मिलने का आरोप लगाते हुए साक्ष्य के रूप में ओएमआर शीट की कार्बन कापी लगाकर शिकायत शासन तक की।


परीक्षा के कारण शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई और परीक्षा से पहले यूपीटीईटी का पर्चा लीक हो जाने के आरोप मे तत्कालीन सचिव के जेल भेज दिए जाने के कारण शिक्षक भर्ती की शिकायतें दबीं रह गई। मामले में अभ्यर्थियों की ओर में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने व धरना प्रदर्शन करने पर नए सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने शासन को एक प्रस्ताव भेजा। इसके बाद शासन के निर्देश पर कोठार का ताला खोलने के लिए समिति गठित की गई। समिति ने वीडियोग्राफी कराते हुए कोठार का ताला खोलवाया। 



कोठार में मिले अभिलेखों का विवरण रजिस्टर में दर्ज करने के साथ जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती के अभिलेखों से जुड़ी रिपोर्ट पीएनपी सचिव की ओर से शासन को भेज दी गई है। अब मामले में शासन के आदेश पर पीएनपी की ओर से आगे की कार्यवाही की जाएगी।

अगले शैक्षणिक सत्र से चार साल का होगा इंटीग्रेटेड बीएड

अगले शैक्षणिक सत्र से चार साल का होगा इंटीग्रेटेड बीएड


 नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत शैक्षणिक सत्र 2023-24 से चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स किया जा सकेगा। बुधवार को राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने केंद्र और राज्य सरकारों के बहु-विषयक विश्वविद्यालयों और संस्थानों में बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकाम-बीएड कोर्स पायलट मोड पर चलाने की अधिसूचना जारी की है।



 इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 31 मई तय की गई है। इन कोर्स में प्रवेश के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराएगी। मेरिट के आधार पर सीट आवंटन होगा। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के सदस्य सचिव ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।

Wednesday, May 4, 2022

ग्रेच्युटी भुगतान को लेकर बीएसए फर्रुखाबाद अवमानना में तलब

ग्रेच्युटी भुगतान को लेकर बीएसए फर्रुखाबाद अवमानना में तलब



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना के मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी फर्रुखाबाद लालजी यादव को नौ मई को हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने देवव्रत की अवमानना याचिका पर अधिवक्ता अनुराग शुक्ल को सुनकर दिया है। इससे पहले कोर्ट ने लालजी यादव के खिलाफ अवमानना आरोप निर्मित कर कारण स्पष्ट करने को कहा था कि क्यों न उन्हें जानबूझकर आदेश की अवहेलना करने के लिए दंडित किया जाए।


उसके बाद बीएसए ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर ग्रेच्युटी का भुगतान करने की जानकारी दी लेकिन ब्याज का भुगतान नहीं किया। इस पर कोर्ट ने उन्हें तलब किया। हाजिर न होने पर बीएसए को आदेश का पूरी तरह से पालन कर नौ मई को पेश होने का निर्देश दिया है।


याची के पिता जगदंबा प्रसाद प्राथमिक विद्यालय निविया, राजेपुर, फर्रुखाबाद में प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल में उनकी मृत्यु हो गई। उसके बाद उनके सेवानिवृत्ति परिलाभों का भुगतान कर दिया गया लेकिन ग्रेच्युटी का भुगतान यह कहते हुए करने से इनकार कर दिया गया कि मृत्यु से पहले याची के पिता ने 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति विकल्प नहीं दिया है। विकल्प न देने वाले अध्यापक 62 साल की आयु तक कार्य करेंगे लेकिन वे ग्रेच्युटी के हकदार नहीं होंगे।


कोर्ट ने कहा कि उषा रानी केस में कोर्ट ने विकल्प भरने से पहले मृत्यु होने वाले अध्यापकों को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त मानते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि विकल्प देने से पहले मृत्यु पर यह नहीं कह सकते कि 62 साल का विकल्प ही देते। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए दो माह में ग्रेच्युटी के भुगतान का आदेश दिया और देरी से भुगतान पर आठ फीसदी ब्याज देने को कहा। आदेश का पालन नहीं किया गया तो अवमानना याचिका की गई। उस पर अवसर देने पर भी आदेश का अनुपालन नहीं किया तो कोर्ट ने अवमानना आरोप निर्मित कर दंड देने पर कारण बताने का आदेश दिया था।




BSA ने कोर्ट की सख्ती पर दी ग्रेच्युटी, लेकिन ब्याज भुगतान नहीं


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फर्रुखाबाद के बेसिक शिक्षा अधिकारी लालजी यादव को नौ मई को तलब किया है। इससे पहले कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना आरोप निर्मित कर 21 अप्रैल को कारण बताने को कहा था कि क्यों न उन्हें जानबूझकर कोर्ट आदेश की अवहेलना करने के लिए दंडित किया जाय? बीएसए ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर ग्रेच्युटी का भुगतान करने की जानकारी दी, लेकिन ब्याज का भुगतान नहीं किया। इस पर कोर्ट ने 26 अप्रैल को तलब किया। 


हाजिर न होने पर कोर्ट ने बीएसए को आदेश का पूरी तरह से पालन कर नौ मई को पेश होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने देववृत की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अनुराग शुक्ल ने बहस की। मामले के अनुसार याची के पिता जगदंबा प्रसाद प्राथमिक विद्यालय निविया, राजेपुर, फर्रुखाबाद में प्रधानाध्यापक के पद कार्यरत थे। सेवा काल में उनकी मृत्यु हो गई।


 सेवानिवृत्ति परिलाभों का भुगतान किया गया, लेकिन ग्रेच्युटी का भुगतान करने से इन्कार कर दिया गया। कहा गया कि मृत्यु से पहले याची के पिता ने 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति विकल्प नहीं दिया है। विकल्प न देने वाले अध्यापक 62 साल की आयु तक कार्य करेंगे, लेकिन ग्रेच्युटी के हकदार नहीं होंगे। कोर्ट ने कहा कि ऊषारानी केस में कोर्ट ने विकल्प भरने से पहले मृत्यु होने वाले अध्यापकों को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त मानते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया है। 


कोर्ट का मानना है कि विकल्प देने से पहले मौत पर यह नहीं कह सकते कि वे 62 साल का विकल्प ही देते। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए दो माह में ग्रेच्युटी का भुगतान आठ प्रतिशत ब्याज के साथ करने का आदेश दिया। आदेश का पालन नहीं किया गया तो अवमानना याचिका दायर की गई। आदेश का अनुपालन नहीं किया तो कोर्ट ने अवमानना आरोप निर्मित कर दंड देने पर कारण बताने का आदेश दिया।

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बढ़ा दाखिला, शिक्षकों के 51 हजार पद हैं खाली

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बढ़ा दाखिला, शिक्षकों के 51 हजार पद हैं खाली


बेसिक शिक्षा परिषद के 1.50 लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में अभियान चलाकर छात्र-छात्राओं की संख्या तो बढ़ाई जा रही है लेकिन सबसे अहम सवाल है कि इन बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या कब बढ़ेगी। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के मुताबिक प्राथमिक स्कूलों में 30 बच्चों और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। 


यही नहीं उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान/गणित, भाषा और सामाजिक विषय का एक शिक्षक होना अनिवार्य है। लेकिन इन मानकों का पालन नहीं हो रहा। पिछले साढ़े तीन साल में परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। ये स्थिति तब है जबकि प्रदेश सरकार ने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में स्वयं स्वीकार किया था कि उस समय शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। हर साल परिषदीय स्कूलों से औसतन 12 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं। 


यदि ये संख्या जोड़ ली जाए तो शिक्षकों के कम से कम 75 हजार पद खाली हैं। डीएलएड, बीएड, टीईटी/सीटीईटी पास बेरोजगार तीन साल से नई भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। आखिरी बार एक दिसंबर 2018 को 69000 भर्ती शुरू हुई थी।


आरटीई लागू होने के बाद नहीं हुआ पद सृजन
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में जुलाई 2011 में आरटीई लागू होने के तकरीबन 11 साल बाद भी मानक के अनुरूप शिक्षकों के पद सृजित नहीं हो सके हैं। कुछ साल पहले बेसिक शिक्षा परिषद के तत्कालीन सचिव संजय सिन्हा ने आरटीई मानक के अनुरूप प्रत्येक जिले में शिक्षकों के पद सृजित किए थे। सूत्रों के अनुसार उस रिपोर्ट में गाजियाबाद, नोएडा जैसे दो-चार जिलों को छोड़कर अधिकांश जिलों में शिक्षकों के पद बढ़ रहे थे। लेकिन सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के कारण वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी। 


17 लाख अतिरिक्त बच्चों का हुआ दाखिला
प्रयागराज। प्रदेशभर के परिषदीय स्कूलों में एक से 30 अप्रैल तक चलाए गए प्रवेश उत्सव में पिछले साल की तुलना में 17 लाख अतिरिक्त बच्चों का दाखिला हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग ने दो करोड़ नामांकन का लक्ष्य रखा है। हर जिले को 20 प्रतिशत अतिरिक्त नामांकन का लक्ष्य मिला था। अधिकांश जिलों में पिछले साल से अधिक बच्चों का प्रवेश हुआ है।




परिषदीय स्कूलों में बढ़ा दाखिला, अहम सवाल कब बढ़ेंगे शिक्षकों के पद?

RTE लागू होने के बाद नहीं हुआ पदसृजन


प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के 1.50 लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में अभियान चलाकर छात्र-छात्राओं की संख्या तो बढ़ाई जा रही है लेकिन सबसे अहम सवाल है कि इन बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या कब बढ़ेगी। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के मुताबिक प्राथमिक स्कूलों में 30 बच्चों और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए।




यही नहीं उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान/गणित, भाषा और सामाजिक विषय का एक शिक्षक होना अनिवार्य है। लेकिन इन मानकों का पालन नहीं हो रहा। पिछले साढ़े तीन साल में परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। ये स्थिति तब है जबकि प्रदेश सरकार ने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में स्वयं स्वीकार किया था कि उस समय शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। हर साल परिषदीय स्कूलों से औसतन 12 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं।


यदि ये संख्या जोड़ ली जाए तो शिक्षकों के कम से कम 75 हजार पद खाली हैं। डीएलएड, बीएड, टीईटी/सीटीईटी पास बेरोजगार तीन साल से नई भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। आखिरी बार एक दिसंबर 2018 को 69000 भर्ती शुरू हुई थी।


आरटीई लागू होने के बाद नहीं हुआ पद सृजन :


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में जुलाई 2011 में आरटीई लागू होने के तकरीबन 11 साल बाद भी मानक के अनुरूप शिक्षकों के पद सृजित नहीं हो सके हैं। कुछ साल पहले बेसिक शिक्षा परिषद के तत्कालीन सचिव संजय सिन्हा ने आरटीई मानक के अनुरूप प्रत्येक जिले में शिक्षकों के पद सृजित किए थे। सूत्रों के अनुसार उस रिपोर्ट में गाजियाबाद, नोएडा जैसे दो-चार जिलों को छोड़कर अधिकांश जिलों में शिक्षकों के पद बढ़ रहे थे। लेकिन सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के कारण वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी।


प्रयागराज। प्रदेशभर के परिषदीय स्कूलों में एक से 30 अप्रैल तक चलाए गए प्रवेश उत्सव में पिछले साल की तुलना में 17 लाख अतिरिक्त बच्चों का दाखिला हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग ने दो करोड़ नामांकन का लक्ष्य रखा है। हर जिले को 20 प्रतिशत अतिरिक्त नामांकन का लक्ष्य मिला था। अधिकांश जिलों में पिछले साल से अधिक बच्चों का प्रवेश हुआ है।


● हर जिले को 20 प्रतिशत अधिक नामांकन का दिया था लक्ष्य

● कई जिलों में पिछले साल से कहीं अधिक हो गया बच्चों का दाखिला

● साढ़े तीन साल से प्राथमिक स्कूलों के लिए नहीं हुई शिक्षकों की भर्ती

● हर साल प्राइमरी के तकरीबन 12 हजार शिक्षक हो जाते हैं सेवानिवृत्त

● सरकार ने भी माना था कि प्रदेश में शिक्षकों के 51 हजार पद हैं खाली

● प्रदेशभर के विद्यालयों में 75 हजार के करीब पद हैं खाली

● आखिरी बार 2018 में हुई थी 69 हजार शिक्षक भर्ती

Tuesday, May 3, 2022

स्कूल बसों में 12 वर्ष से कम के बच्चों की क्षमता के डेढ़ गुना तक कर सकेंगे सवारी, उत्तर प्रदेश मोटर यान नियमावली में संशोधन की अधिसूचना जारी

स्कूल बसों में 12 वर्ष से कम के बच्चों की क्षमता के डेढ़ गुना तक कर सकेंगे सवारी, उत्तर प्रदेश मोटर यान नियमावली में संशोधन की अधिसूचना जारी 


लखनऊ : शासन ने सोमवार को उत्तर प्रदेश मोटर यान नियमावली में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी। इसके तहत स्कूल बसों के मामले में 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ले जाने के लिए बैठने की क्षमता के डेढ़ गुना बच्चों को बैठाने की अनुमति होगी। मिनी बस में सीटिंग क्षमता 13 से 22 तक होती है, जबकि मिडी बस में सीटिंग क्षमता 23 से 37 तक होती है। इसी के साथ डीजल या सीएनजी से चलने वाली निजी बस (ठेका गाड़ी) का प्रारंभिक पंजीकरण अब 15 वर्ष के लिए मान्य होगा। पहले यह 10 वर्ष के लिए मान्य होता था।


उत्तर प्रदेश मोटर यान नियमावली 1998 को संशोधित कर यह नई नियमवली तैयार की गई है। इसके प्रारूप का प्रकाशन चार जनवरी 2022 को किया गया था। सोमवार को परिवहन विभाग ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (अट्ठाइसवां संशोधन) नियमावली 2022 की अधिसूचना जारी कर दी। इसमें कहा गया है कि डीजल या सीएनजी चालित निजी बस (ठेका गाड़ी) प्रारंभिक रजिस्ट्रीकरण की तिथि से 15 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होगी। पहले यह अवधि 10 वर्ष थी। इसी तरह डीजल, पेट्रोल या सीएनजी चालित विद्यालय वैन प्रारंभिक रजिस्ट्रीकरण की तिथि से 15 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होगी।

बड़ी बसों में दो आपातकालीन निकास होंगे

नियमावली में आपातकालीन द्वार की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत मिनी और मिडी बसों से भिन्न बसों में सेवा द्वार के विपरीत दिशा में एक आपातकालीन निकास होगा। इसके अलावा बस के पीछे की ओर एक आपातकालीन निकास होगा। मिनी व मिडी बसों की दशा में न्यूनतम एक आपातकालीन निकास होगा और यह सेवा द्वार के विपरीत या बस के पीछे की तरफ स्थित होगा।

फतेहपुर : 457 प्रधानाध्यापकों प्रभारियों का रोका गया वेतन, सभी 13 ब्लाकों की समीक्षा में मिला कम नामांकन, पिछले सत्र के मुकाबले कम नामांकन वाले स्कूल जद में

फतेहपुर : 457 प्रधानाध्यापकों प्रभारियों का रोका गया वेतन, सभी 13 ब्लाकों की समीक्षा में मिला कम नामांकन, पिछले सत्र के मुकाबले कम नामांकन वाले स्कूल जद में, किताबें नहीं आईं किसका रोकेंगे वेतन, शिक्षक व जागरूक अभिभावक उठा रहे सवाल

फतेहपुर :  बीते अप्रैल में स्कूल चलो अभियान के दौरान पिछले सत्र के मुकाबले नामांकन करने में विफल रहने वाले जिले के सभी ब्लाकों में करीब 457 हेड व इंचार्ज हेड का वेतन बीएसए ने अवरूद्ध कर दिया है। ब्लॉक की नामांकन समीक्षा के दौरान बीएसए ने जिन विद्यालयों में 30 सितंबर 2021 की तुलना में नामांकन कम पाया, उन विद्यालयों के हेडमास्टरों व इंचार्ज का वेतन रोक दिया।


स्कूल चलो अभियान के दौरान प्रत्येक जिले, ब्लॉक व स्कूल को नामांकन लक्ष्य दिया गया है। अप्रैल माह में इस लक्ष्य को पूरा करना था। 30 अप्रैल को बीईओ द्वारा दी गई रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान बीएसए संजय कुशवाहा ने यह कार्रवाई की। देवमई के 37, हसवा में 77 समेत अन्य सभी ब्लाकों के 457 प्रधानाध्यापक व प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। नामांकन प्रगति संतोषजनक न पाए जाने पर बीएसए का यह रूख देख दूसरे ब्लॉकों के शिक्षकों व अधिकारियों में बेचैनी का आलम है।

अप्रैल में ही नामांकन पर जोर क्यों: उधर शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीते सालों में सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है।

इस बार विभाग अप्रैल में ही मनमाना नामांकन लक्ष्य देकर शिक्षकों के शोषण पर आमादा है। वे तर्क देते हैं कि क्या मई, जुलाई, अगस्त व सितंबर में प्रवेश नहीं होने हैं। अप्रैल में महुआ बिनाई व गेहूं कटाई जैसे कार्यों में व्यस्त रहने के कारण तमाम अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश नहीं करा पाए। हाउस होल्ड सर्वे के दौरान मिले बच्चों के प्रवेश के लिए अभिभावकों को ही सूचनाएं देनी पड़ती हैं।

एक की कमी पर भी रोक दिया वेतन: देवमई ब्लॉक की समीक्षा के दौरान बीएसए ने उन हेड व इंचार्ज का भी वेतन रोक दिया है जिनके नामांकन में पिछले सत्र के मुकाबले एक, दो, तीन या चार बच्चों की कमी थी। बीएसए के इस रूख से शिक्षकों में रोष है।

तो पूरे स्टाफ का रूकेगा वेतन:

बीएसए ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी पांच मई तक नामांकन की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई जाती तो इन विद्यालयों के सभी शिक्षकों का वेतन अवरूद्ध कर दिया जाएगा। उधर शिक्षकों का यह भी कहना है कि प्रेरणा पोर्टल व डीबीटी ऐप में पंजीकरण के समय तमाम तकनीकी खामियां आ रही हैं। शिक्षक इनसे जूझ रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

किताबें नहीं आईं किसका रोकेंगे वेतन

शिक्षक व जागरूक अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि नए सत्र को एक माह बीत गया लेकिन अब तक स्कूलों में किताबें नहीं आई हैं। इस भारी कमी पर विभाग किसका वेतन रोकेगा, किस पर कार्रवाई होगी।

गत वर्ष से बीस फीसदी अधिक का नामांकन कराने का लक्ष्य दिया गया था, बड़ी संख्या में विद्यालयों ने लक्ष्य को पूरा कर लिया हैं, लेकिन 457 से अधिक विद्यालयों में गतवर्ष के सापेक्ष भी नामांकन नहीं किया गया है। इन सभी प्रधानाध्यापकों और प्रभारियों का वेतन रोकते हुए लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। संजय कुशवाहा, बीएसए

अगले साल से अटल आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई, सीएम योगी का अक्टूबर तक निर्माण पूरा करने का निर्देश, पाठ्यक्रम में योग व खेलकूद को शामिल करने पर जोर

अगले साल से अटल आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई, सीएम योगी का अक्टूबर तक निर्माण पूरा करने का निर्देश, पाठ्यक्रम में योग व खेलकूद को शामिल करने पर जोर


अटल आवासीय विद्यालयों को लेकर हुए प्रजेंटेशन में सीएम ने दिए निर्देश

कहा- वर्ष 2023 में अवश्य शुरू कर दिए जाएं ये विद्यालय


लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालयों का निर्माण तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता के साथ इनका निर्माण हो और वर्ष 2023 में इन विद्यालयों में हरहाल में शिक्षण कार्य शुरू हो जाए। उन्होंने सोमवार को अटल आवासीय विद्यालयों की मानक संचालन प्रक्रिया का प्रस्तुतीकरण देखने के बाद ये निर्देश दिए। इन विद्यालयों का निर्माण श्रम विभाग की ओर से कराया जा रहा है जिनमें श्रमिकों एवं अनाथ बच्चों को शिक्षा दी जाएगी।


उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी विद्यालय निर्माण और उसके संचालन की प्रगति की मॉनिटरिंग करें। समयबद्धता और गुणवत्ता में लापरवाही पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें। अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन सुरेश चंद्रा ने सीएम को अटल आवासीय विद्यालयों के निर्माण तथा संचालन के संबंध में प्रगति से अवगत कराया।


सभी सुविधाएं हों, योग तथा खेल पर जोर : सीएम ने कहा कि इन विद्यालयों में खेल मैदान और कौशल विकास की भी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। यह विद्यालय ऐसे मॉडल बनें जिनसे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिले। विद्यालयों के संचालन व अनुश्रवण के लिए राज्य, मंडल तथा जिला स्तर पर समितियों का गठन करें। विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की तैनाती और पाठ्यक्रम निर्धारण के संबंध में शीघ्र प्रक्रिया अपनाएं योग्य व्यक्तियों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित कर पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुकूल निर्धारित किया जाए।


उन्होंने योग तथा स्पोट्र्स को पाठ्यक्रम में विशेष रूप से शामिल करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि अटल आवासीय विद्यालयों और छात्रावास के भवनों का वास्तु शिल्प भारतीय दर्शन व संस्कृति के अनुरूप हो। इसकी शैली उत्कृष्ट व जीवंत हो। इसके निर्माण में आधुनिक तकनीक, डिजाइन और सुविधाओं का समावेश किया जाए।

यूपी के 1000 बीएड व डीएलएड कॉलेजों में इस बार प्रवेश नहीं, एनसीटीई ने परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट जमा न करने वाले कॉलेजों पर की कार्रवाई

यूपी के 1000 बीएड व डीएलएड कॉलेजों में इस बार प्रवेश नहीं, एनसीटीई ने परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट जमा न करने वाले कॉलेजों पर की कार्रवाई 



प्रदेश में करीब 1000 महाविद्यालय हैं, जहां इस बार बीएड व डीएलएड में दाखिले नहीं होंगे। एनसीटीई ने सख्त रवैया अख्तियार करते हुए परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट जमा न करने वाले महाविद्यालयों पर कार्रवाई की है। यह फैसला दिल्ली में 27 अप्रैल को हुई जनरल बॉडी मीटिंग में लिया गया और इसका आदेश सभी संबंधित महाविद्यालयों को भेज दिया गया है। कानपुर के 100 बीएड व डीएलएड महाविद्यालयों में इस बार एडमिशन नहीं होंगे। एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने इन कॉलेजों का सत्र 2022-23 में शून्य कर दिया है।


एनसीटीई ने बीएड व डीएलएड कॉलेजों से परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया था। इस रिपोर्ट में कॉलेजों को छात्र संख्या, कॉलेज की जमीन, क्षेत्रफल, शिक्षक, छात्रों का ब्योरा समेत कई बिंदुओं पर जानकारी देनी थी। अप्रेजल रिपोर्ट भरने की अंतिम तिथि को कई बार बढ़ाया गया। इसके बावजूद कानपुर नहीं बल्कि प्रदेश और देशभर में ऐसे कॉलेजों की संख्या अधिक रही, जिन्होंने रिपोर्ट नहीं दी।


इसके बाद एनसीटीई ने गंभीर कार्रवाई की है। एनसीटीई ने बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि रिपोर्ट न देने वाले इन कॉलेजों का सत्र शून्य रहेगा। जिन कॉलेजों ने रिपोर्ट नहीं दी है, उनके नाम सत्र 2022-23 की काउंसिलिंग में नहीं जोड़े जाएंगे। उप्र स्ववित्तपोषित कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने कहा कि यह रिपोर्ट दो बार से ऑनलाइन भरी जा रही है।


करीब 100 कानपुर स्थित डीएलएड कॉलेज और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएड कॉलेज हैं, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। इनका सत्र शून्य रखने का आदेश हुआ है। अभी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। विवि के शिक्षा विभाग के निदेशक प्रो. मुनेश कुमार ने कहा कि कई बार रिमाइंडर के बाद भी अप्रेजल रिपोर्ट न देने पर एनसीटीई ने कॉलेजों पर कार्रवाई की है।

5वीं व 8वीं की बोर्ड परीक्षा संभव, शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही लागू हो सकती है यह व्यवस्था

5वीं व 8वीं की बोर्ड परीक्षा संभव, शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही लागू हो सकती है यह व्यवस्था


स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने की दिशा में बड़े कदम की तैयारी में केंद्र

केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर शुरू की राज्यों के साथ व्यापक चर्चा

इससे छात्रों की प्रगति और उनके रुझानों को ट्रैक किया जा सकेगा

शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही लागू हो सकती है यह व्यवस्था



स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने सहित छात्रों की प्रतिभा को प्रत्येक स्तर पर आंकने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही कुछ और बड़े कदम उठा सकती है। इसके तहत तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा की परीक्षाएं भी दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं जैसी आयोजित की जा सकती हैं। फिलहाल यह बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उसके जैसी होगी। इनका आयोजन भी क्षेत्रीय स्तर पर किसी उपयुक्त प्राधिकरण की देखरेख में होगा। केंद्र राज्यों के साथ व्यापक चर्चा शुरू कर चुका है।



कई राज्यों में पहले भी पांचवीं व आठवीं के स्तर पर ऐसी परीक्षाएं आयोजित होती थीं। हालांकि, वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून आने के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई, क्योंकि इस कानून के तहत आठवीं तक किसी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता था। इस बीच कई राज्यों ने शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने के लिए पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं को फिर से शुरू करने की पहल की है। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इसे शुरू भी कर दिया है। लेकिन तीसरी के स्तर पर अब तक इसे कहीं नहीं अपनाया गया है।


शिक्षा मंत्रलय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने की इस पहल के तहत नए कदम की तैयारी है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इसे लेकर सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि स्कूलों में छात्रों को रटकर याद कराने के बजाय उन्हें वास्तविक ज्ञान दिया जाए। साथ ही उन्हें कौशल विकास से भी जोड़ा जाए। यही वजह है कि शिक्षा मंत्रलय अब निचले स्तर पर एक मानक तय करना चाहता है।


शिक्षा मंत्रलय ने इस पहल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही आयोजित करने की योजना बनाई है। इस पर अंतिम फैसला राज्यों की सहमति के बाद ही होगा। योजना के तहत स्कूली स्तर पर होने वाली परीक्षा वार्षिक परीक्षा की तरह ही होगी, लेकिन इसका आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर होगा।

परिषदीय विद्यालयों में अब तक एक करोड़ 90 लाख विद्यार्थियों का नामांकन

परिषदीय विद्यालयों में अब तक एक करोड़ 90 लाख विद्यार्थियों का नामांकन



लखनऊ : प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिलाने में नया रिकार्ड बन रहा है। 30 अप्रैल तक चले स्कूल चलो अभियान के दौरान विद्यालयों में पिछले वर्ष की अपेक्षा करीब 17 लाख अधिक छात्र-छात्राओं को प्रवेश देने का दावा किया गया है। अब तक एक करोड़ 90 लाख छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिल चुका है। वैसे दो करोड़ नामांकन का लक्ष्य अभी दूर है। बेसिक शिक्षा विभाग चार मई को बैठक कर रहा है इसमें अभियान निरंतर चलाए जाने पर मुहर लगना तय माना जा रहा है। 



बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से चल रहा है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार अप्रैल को श्रावस्ती में स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ किया था। उन्होंने पहली बार विभाग को छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिलाने के लिए दो करोड़ का लक्ष्य तय किया। ज्ञात हो कि इसके पहले हर वर्ष प्रवेश का अभियान चलता था लेकिन लक्ष्य तय करने की जगह अधिकाधिक प्रवेश पर जोर दिया जाता था। विभाग ने तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए 30 अप्रैल तक स्कूल चलो अभियान चलाने का आदेश दिया।

KVS Class 1 Admission List 2022 : इन स्टूडेंट्स को मिलेगा केंद्रीय विद्यालयों की पहली कक्षा में दाखिला

KVS Class 1 Admission List 2022 : इन स्टूडेंट्स को मिलेगा केंद्रीय विद्यालयों की पहली कक्षा में दाखिला


KVS Class 1 Admission List 2022 केंद्रीय विद्यालय संगठन ने पहली कक्षा में प्रवेश के लिए चयनित किए स्टूडेंट्स की लिस्ट जारी कर दी है। पैरेंट्स अपने बच्चे का नाम संगठन द्वारा पहली ऑनलाइन लॉटरी से जारी दाखिला सूची में देख सकते हैं।


नई दिल्ली : KVS Class 1 Admission List 2022: देश और विदेशों में स्थित केंद्रीय विद्यालयों में वर्ष 2022-23 के लिए पहली कक्षा में दाखिले के लिए चयनित स्टूडेंट्स की लिस्ट जारी कर दी गई है। केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) द्वारा कक्षा 1 में प्रवेश के लिए योग्य पाए गए छात्र-छात्राओं के नामों की घोषणा पहले ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से की गई। ऐसे में जिन पैरेंट्स ने अपने बच्चे का केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए फॉर्म भरा है, वे केवीएस की आधिकारिक वेबसाइट, kvsangathan.nic.in पर एक्टिव किए गए लिंक या नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक से अपना बच्चे का नाम पहली लिस्ट में चेक कर सकते हैं।





इन स्टेप में देखें केवीएस पहली कक्षा दाखिला सूची

पैरेंट्स को पहली दाखिला सूची में अपने बच्चे नाम चेक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा और फिर होम पेज पर ही दिए गए एनाउंसमेंट्स सेक्शन में दिए गए सम्बन्धित लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद नये पेज पर पैरेंट्स को अपना राज्य और जिस केंद्रीय विद्यालय में दाखिले के लिए फॉर्म भरा है, उसका चयन ड्रॉपडाउन लिस्ट में से सेलेक्ट करना होगा। इसके बाद उस विद्यालय में पहली कक्षा के दाखिले के लिए पहली सूची ओपेन होगी, जिसमें पैरेंट्स अपने बच्चे का नाम सर्च कर सकेंगे।


दूसरी लिस्ट 6 मई को आएगी


वहीं, केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा हाल ही में 27 अप्रैल 2022 को जारी पहली कक्षा में दाखिले के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार कक्षा 1 में प्रवेश के लिए दूसरी लिस्ट 6 मई और तीसरी लिस्ट 10 मई 2022 को जारी की जाएगी। हालांकि, पैरेंट्स को ध्यान देना चाहिए किसी भी केंद्रीय विद्यालय के लिए दूसरी लिस्ट तभी जारी की जाएगी जबकि पहली लिस्ट से दाखिले की प्रक्रिया के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं। इसी प्रकार, दूसरी लिस्ट से दाखिले के बाद बची हुई सीटों के लिए ही तीसरी लिस्ट जारी होगी।

Monday, May 2, 2022

भारतीय शिक्षा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा साइबर खतरा : रिपोर्ट

भारतीय शिक्षा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा साइबर खतरा : रिपोर्ट


● दूरस्थ शिक्षा की स्वीकार्यता, शिक्षा के डिजिटलीकरण व आनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों के चलन से बढ़ा खतरा

● भारत के बाद अमेरिका, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और ब्राजील का स्थान


नई दिल्ली : एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के शैक्षणिक संस्थानों और आनलाइन प्लेटफार्मों पर सबसे ज्यादा साइबर खतरा है। भारत के बाद खतरे के लिहाज से अमेरिका, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और ब्राजील के शैक्षणिक संस्थान हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड- 19 महामारी के दौरान दूरस्थ शिक्षा की स्वीकार्यता, शिक्षा के डिजिटलीकरण और आनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों के चलन ने साइबर हमले का दायरा बढ़ा दिया है।


'साइबर खतरे के निशाने पर वैश्विक शिक्षा क्षेत्र' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैश्विक शिक्षा क्षेत्र पर वर्ष 2022 की पहली तिमाही में वर्ष 2021 के मुकाबले साइबर खतरा 20 प्रतिशत बढ़ गया है। रिपोर्ट को सिंगापुर स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) संचालित डिजिटल जोखिम प्रबंधन उद्यम क्लाउडएसईके' के 'जोखिम शोध एवं सूचना विश्लेषण विभाग द्वारा संकलित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल एशिया और प्रशांत क्षेत्र में पता लगाए गए खतरों में से 58 प्रतिशत के निशाने पर भारतीय या भारत स्थित शैक्षणिक संस्थान और आनलाइन प्लेटफार्म थे।


इसमें बाईजूज, आइआइएम कोझीकोड और तमिलनाडु के तकनीकी शिक्षा निदेशालय पर किए | गए हमले शामिल हैं। साइबर खतरे के 10 प्रतिशत लक्ष्य इंडोनेशिया | में थे। कुल मिलाकर अमेरिका | दुनियाभर में दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश था, जहां कुल 19 घटनाएं | दर्ज की गईं, जो उत्तरी अमेरिका में 86 प्रतिशत खतरों के लिए जिम्मेदार थीं। इनमें हार्वर्ड विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों पर रैमसमवेयर | हमले शामिल हैं।

बैंक खाते में जाएगा परीक्षा ड्यूटी का पारिश्रमिक, उपस्थिति के आधार पर होगा भुगतान

बैंक खाते में जाएगा परीक्षा ड्यूटी का पारिश्रमिक, पारिश्रमिक का भुगतान उपस्थिति के आधार पर

● केंद्राध्यक्ष के माध्यम से उनकी उपस्थिति भी रोजाना आनलाइन दर्ज कराई जाएगी

● अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव दिए


लखनऊ : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षा में ड्यूटी कर रहे शिक्षकों का भुगतान अब सीधे बैंक खाते में किया जाएगा। केंद्राध्यक्ष के माध्यम से उनकी उपस्थिति भी रोजाना आनलाइन दर्ज कराई जाएगी।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर सभी विश्वविद्यालयों में यह व्यवस्था लागू की जा रही है। व्यवस्था में यह बदलाव एक सदस्यीय कमेटी की सिफारिशें के आधार पर किया गया गया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के संबंध में कई सुझाव दिए थे। कमेटी में तीन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों व चार विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियंत्रकों को भी शामिल किया गया था।

नई व्यवस्था के तहत परीक्षा के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा महाविद्यालयों को दी जाने वाली अग्रिम धनराशि की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा के लिए विभिन्न महाविद्यालयों को उनके यहां स्थापित परीक्षा केंद्र पर आवंटित परीक्षार्थियों की संख्या और प्रति परीक्षा के लिए निर्धारित दर के आधार पर गणना कर के केंद्र व्यय की पूरी धनराशि परीक्षा से पहले ही एकमुश्त दी जाएगी। यह धनराशि अग्रिम के रूप में नहीं होगी और न इसका समायोजन होगा। परीक्षा के बाद उपभोग प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय को दिया जाएगा। पूर्व में महाविद्यालयों को परीक्षा कराने के लिए अग्रिम धनराशि दी जाती थी, जिसका समायोजन नहीं हो पाता था और आडिट आपत्तियां आती थीं।

ताजा आदेश के अनुसार केंद्राध्यक्ष, सहायक केंद्राध्यक्ष व कक्ष निरीक्षक के पारिश्रमिक का भुगतान इनकी वास्तविक उपस्थिति के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्राध्यक्ष को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह दिन-प्रतिदिन के आधार पर इनकी उपस्थिति आनलाइन व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय को भेजेंगे। साथ ही इनका बैंक खाता विवरण व पैन नंबर भी विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराएंगे। परीक्षा खत्म होने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा पारिश्रमिक की गणना करके उसका भुगतान सीधे बैंक खाते में किया जाएगा।


● राजीव ओझा

Sunday, May 1, 2022

शिक्षकों के GPF भुगतान में 4.92 करोड़ की हेराफेरी, अलीगढ़ जिले में तैनात रहे तत्कालीन चार BSA से स्पष्टीकरण तलब

शिक्षकों के GPF भुगतान में 4.92 करोड़ की हेराफेरी, अलीगढ़ जिले में तैनात रहे तत्कालीन चार BSA से स्पष्टीकरण तलब



बेसिक शिक्षा में भविष्य निधि (पीएफ) के भुगतान में 4.92 करोड़ की गड़बड़ी सामने आई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने धन की रिकवरी भू-राजस्व की तरह कराने की संस्तुति की है। हेराफेरी में अलीगढ़ जिले में तैनात रहे तत्कालीन चार बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आरोपित किया गया है। सभी से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण तलब किया गया है, इसके बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।



प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सभी खंड विकास व नगर क्षेत्रों की सामान्य भविष्य निधि के अग्रिम व अंतिम भुगतान की जांच के लिए जिलाधिकारी अलीगढ़ ने 25 अगस्त 2021 को संस्तुति की थी। शासन ने 18 अक्टूबर 2021 को जांच के लिए डायट प्राचार्य अलीगढ़ की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच समिति गठित की। 


जांच समिति ने सात जनवरी 2022 को शासन को रिपोर्ट सौंपी है इसमें कहा गया कि बेसिक शिक्षा के जीपीएफ भुगतान में लेखाधिकारी कार्यालय के सहायकों से मिलकर योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन की अनियमितता की गई है। बेसिक शिक्षा के विशेष सचिव आरवी सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विस्तृत जांच में यह भी सामने आया है कि भविष्य निधि के भुगतान में पद के दायित्वों का सही से निर्वहन होता तो इतनी धनराशि का गबन नहीं होता।


 2007 से 2010 तक के अभिलेख गायब जांच समिति ने पाया कि अभिलेख जानबूझकर गायब किए गए। बीच में पृष्ठ फाड़े जाने से 2007 से 2010 तक के अभिलेख गायब हैं। और इससे सही धनराशि का आकलन नहीं हो सका। जिले के विकासखंडों में चार करोड़ 92 लाख 39 हजार 749 रुपये की अनियमितता सामने आई है और इस धन की रिकवरी भू-राजस्व की तरह करने की संस्तुति की गई है।


तत्कालीन चार बीएसए से स्पष्टीकरण तलब

शासन ने अलीगढ़ के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी रहे एसपी यादव (10 दिसंबर 2012 से 21 सितंबर 2015 तक), संजय शुक्ला ( 21 सितंबर 2015 से 19 मई 2016 तक), धीरेंद्र कुमार यादव ( 19 मई 2016 से 15 मई 2018 तक) और डा. लक्ष्मीकांत पांडेय (15 मई 2018 से 16 जुलाई 2021 तक ) से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा है। अनियमितता में प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर जवाब तलब हुआ है।

नियुक्ति की मांग को लेकर 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का भाजपा प्रदेश कार्यालय पर धरना

नियुक्ति की मांग को लेकर 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का भाजपा प्रदेश कार्यालय पर धरना


नियुक्ति की मांग को लेकर शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय के भीतर धरना दिया।


अभ्यर्थी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कराए जाने को लेकर कार्यालय के भीतर करीब आधा घंटे तक बैठे रहे। प्रदर्शनकारी महिला अभ्यर्थियों को कार्यालय से बाहर निकालने के लिए पुलिस ने जबरदस्ती की। महिलाओं को घसीटा गया। इस दौरान एक अभ्यर्थी पुलिस कर्मी के पैरो से लिपट गई। इस धक्का-मुक्की के बीच अभ्यर्थी पूजा, माधुरी व शान को हल्की चोटे भी आईं। 


पुलिस ने सभी को जबरन बस में बैठा कर ईको गार्डेन छोड़ दिया। अभ्यर्थियों ने 6800 पदों की जारी हुई नई सूची के आधार पर नियुक्ति प्रदान किए जाने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थी ईको गार्डेन में बीते करीब एक माह से प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने बताया कि 2018 में 69 हज़ार शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं हुआ था। अभ्यर्थी राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग गए। आयोग के आदेश के बाद भी नियुक्ति नहीं मिली।



अभ्यर्थियों ने जून 2021 से आंदोलन शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया। इस वर्ष पांच जनवरी को 6800 अभ्यर्थियों की नई सूची जारी हुई। इसके बावजूद नियुक्ति नहीं मिली। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी केवल नियुक्ति दिए जाने की मांग कर रहे थे।

दूसरे प्रदेशों का शैक्षणिक अनुभव भी उत्तर प्रदेश के महाविद्यालय की सेवा में जोड़ने का हाईकोर्ट का निर्देश

दूसरे प्रदेशों का शैक्षणिक अनुभव भी उत्तर प्रदेश के महाविद्यालय की सेवा में जोड़ने का हाईकोर्ट का निर्देश



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर राज्यों के महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर शैक्षणिक अनुभव को उत्तर प्रदेश के महाविद्यालय की सेवा में जोड़ने का निर्देश दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने डॉ. अनूप कुमार पांडेय की याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह को सुनकर दिया है। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के दो सरकारी महाविद्यालयों में प्राप्त शैक्षणिक अनुभव को याची की सेवा में जोड़कर उसे प्रोन्नति व वेतन वृद्धि आदि सभी लाभ देने का निर्देश दिया है। एडवोकेट सीमांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि याची की नियुक्ति साकेत महाविद्यालय अयोध्या में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई है।


इससे पूर्व वह छत्तीसगढ़ के दो सरकारी महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिक्स के पद पर अपनी सेवाएं दे चुका है। इस आधार पर याची कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रमोशन व सीनियर स्केल पाने का अधिकारी है लेकिन निदेशक उच्च शिक्षा ने याची को यह लाभ देने से इनकार कर दिया है। उसका शैक्षणिक अनुभव नहीं जोड़ा जा रहा है।