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Friday, June 10, 2022

गैर शैक्षणिक कामों से बेसिक शिक्षक परेशान, पढ़ाई भी हो रही प्रभावित

गैर शैक्षणिक कामों से बेसिक शिक्षक परेशान, पढ़ाई भी हो रही प्रभावित



बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व संविलियन विद्यालयों के शिक्षकों को जिस प्रकार से गैर शैक्षणिक कार्य सौंपे जाते हैं उससे उनको परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही कक्षाओं का संचालन भी प्रभावित होता है। 16 जून से सभी प्राथमिक विद्यालय ग्रीष्मावकाश के बाद खुल जाएंगे। हालांकि, शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहने से कक्षाओं का संचालन कैसे होगा इस पर संशय की स्थिति बनी हुई है।


प्राथमिक विद्यालयों में नौनिहालों को उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। इसके लिए डीबीटी, मिड-डे मील व छात्रवृत्ति समेत अन्य योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, लेकिन विद्यालयों में तैनात शिक्षकों को गैर शैक्षणिक जिम्मेदारी सौंपे जाने से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। शिक्षक भी गैर शैक्षणिक कार्यों के बोझ तले दबे नजर आ रहे हैं। अलग-अलग समय पर शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों के संपादन में जुटना पड़ रहा है।


इन्हें खातों की फीडिंग, बच्चों की फोटो अपलोड करने, हाउस होल्ड सर्वे, स्कूल चलो अभियान रैली, अभिभावक संपर्क, प्रेरणा पोर्टल पर विवरण फीडिंग, अभिभावकों के बैंक खातों की पोर्टल पर फीडिंग, मिड-डे मील की व्यवस्था, कंपोजिट ग्रांट से खरीद, एसएमसी की बैठक, पीटीए की बैठक, रसोइयों का चयन, एसएमसी खाते का प्रबंधन, मिड डे मील के खाते का प्रबंधन, बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी, बीएलओ ड्यूटी, जनगणना चुनाव ड्यूटी, संकुल व बीआरसी की बैठक, वित्तीय खातों का हिसाब करना, विद्यालय के अभिलेख तैयार करना, विद्यालय की रंगाई-पुताई, मिशन शक्ति के  कार्यक्रम, अमृत महोत्सव कार्यक्रम, स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम व शिक्षक डायरी भरने के साथ ही अन्य कार्य सौंपे जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षक कई औपचारिकताओं व गैर सरकारी कार्यों के बीच उलझे रहते हैं जिसका सीधा प्रभाव शैक्षणिक कार्यों पर पड़ता है।



कम शिक्षकों वाले स्कूलों में अधिक दिक्कत

 काफी संख्या में ऐसे विद्यालय भी हैं जहां निर्धारित मानक के सापेक्ष शिक्षकों की तैनाती काफी कम है। ऐसे में गैर शैक्षणिक कार्यों की वजह से इन विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर अधिक असर पड़ता है। शिक्षक भी मजबूरी में प्रशासनिक कार्रवाई के डर से गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त दिखते हैं।


16 से फिर शुरू होगा नामांकन अभियान

ग्रीष्मावकाश के बाद 16 जून से सभी विद्यालय फिर खुल रहे हैं। विद्यालय खुलने पर छात्र-छात्राओं का नामांकन लक्ष्य के सापेक्ष करने के लिए एक बार फिर शिक्षक घर-घर अभिभावकों से संपर्क के लिए निकलेंगे।

कम प्रसार वाले समाचार पत्र में विज्ञापन अभ्यर्थियों से अन्याय, रिक्त पदों को ठीक से विज्ञापित न करना मौलिक अधिकार का हनन

कम प्रसार वाले समाचार पत्र में विज्ञापन अभ्यर्थियों से अन्याय

रिक्त पदों को ठीक से विज्ञापित न करना मौलिक अधिकार का हनन


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिक्त पदों पर भर्ती के लिए ठीक से विज्ञापित नहीं किया जाना संभावित उम्मीदवारों के मूल अधिकार का हनन है । यह उचित प्रक्रिया का पालन न किया जाना है । मामले में एकल पीठ के आदेश को सही करार देते हुए रवि प्रताप की ओर से दाखिल विशेष याचिका को खारिज कर दिया गया। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने दिया है।


विद्यालय प्रबंधन समिति ने लिपिक भर्ती का विज्ञापन एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित कराया था। जिसके बाद उसे चयन समिति ने लिपिक पद पर विधिवत नियुक्त किया था किंतु जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस आधार पर वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया था कि लिपिक भर्ती का विज्ञापन कम प्रसारण वाले समाचार पत्र में प्रकाशित कराया गया है। जिसे चुनौती देते हुए उसके द्वारा याची ने कोर्ट को बताया कि याचिका योजित की गई थी।



प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि कम प्रसार वाले समाचार पत्रों में भर्ती विज्ञापन प्रकाशित कराना उस पद के उम्मीदवारों के साथ अन्याय है। इस प्रकार के विज्ञापन संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 की मूल भावना के विपरीत हैं।


✍️  कोर्ट आर्डर


Thursday, June 9, 2022

जीआइसी एलटी की स्थाई वरिष्ठता जल्द, वरिष्ठता निर्धारण न होने से अटकी है प्रोन्नति

जीआइसी एलटी की स्थाई वरिष्ठता जल्द, वरिष्ठता निर्धारण न होने से अटकी है प्रोन्नति



प्रयागराज :  राजकीय इंटर कालेज के सहायक अध्यापकों (एलटी) की स्थाई वरिष्ठता लंबे समय से अटकी हुई है। वरिष्ठता निर्धारित नहीं होने से करीब पांच हजार शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं मिल पा रही है। राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ को विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा ने बातचीत में भरोसा दिया है कि वरिष्ठता निर्धारण का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा।


राजकीय शिक्षकों की वर्ष 1991 से दिसंबर 2000 की स्थाई वरिष्ठता वर्ष 2004 प्रकाशित हुई। इसके बाद से स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हुई। अस्थाई वरिष्ठता निर्धारित करके आपत्ति मांगे जाने की औपचारिकता पूरी की जाती है, लेकिन स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हो पा रही है। इस संबंध में पिछले दिनों राजकीय शिक्षक संघ के महामंत्री रामेश्वर । प्रसाद पाण्डेय ने अपर शिक्षा निदेशक राजकीय के यहां जानकारी की तो । thsti बताया गया कि पत्रावली शासन में अनुमति के लिए लंबित है।


ऐसे संघ की प्रांतीय अध्यक्ष छाया शुक्ला, कार्यकारी प्रांतीय महामंत्री सत्य शंकर मिश्र ने महामंत्री के साथ मामले को विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा शंभू कुमार के समक्ष रखा। बताया कि स्थाई वरिष्ठता निर्धारण की फाइल डेढ़ माह से शासन में अटकी है। इस पर विशेष सचिव ने समीक्षा अधिकारी से पूछताछ की है। उन्होंने भरोसा दिया है कि जल्द ही स्थाई वरिष्ठता निर्धारित की जाएगी।


प्रांतीय महामंत्री ने बताया कि इसकी प्रक्रिया निदेशालय से अपर शिक्षा निदेशक मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक के क्रम में चलने के कारण लंबी हो जाती है। इसी कारण 22 वर्ष से स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हो सकी है।

Wednesday, June 8, 2022

छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए 14 भाषाओं में शुरू होंगे चैनल, 200 नए टीवी चैनलों को शुरू करने की रूपरेखा

छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए 14 भाषाओं में शुरू होंगे चैनल

200 नए टीवी चैनलों को शुरू करने की शिक्षा मंत्रालय ने तैयार की रूपरेखा


नई दिल्ली: सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के •लिए प्रस्तावित दो सौ नये टेलीविजन (टीवी) चैनल को शुरू करने की रूपरेखा लगभग तैयार हो गई है। यह चैनल फिलहाल 14 प्रमुख भाषाओं में संचालित होंगे। इस दौरान प्रत्येक कक्षा के लिए एक समर्पित चैनल होगा। जो स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी के लिए होगा। इनमें से करीब सौ चैनलों को इसी साल से शुरू करने की योजना है। शिक्षा मंत्रालय इसे लेकर तेजी से तैयारी में जुटा है। कंटेंट तैयार करने के लिए निजी कंपनियों की भी मदद ली जा रही है।


शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल जो रूपरेखा तैयार की गई है, उसमें बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे सभी भाषाओं में चैनल शुरू किए जाएंगे, जिसमें अभी पढ़ाई हो रही है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाएं भी उन भाषाओं में आयोजित हो रही हैं। इसके तहत जिन 14 भाषाओं को चिन्हित किया गया उनमें हिंदी, अंग्रेजी के साथ पंजाबी, असमिया, बांग्ला, ओडिया, गुजराती, मराठी, तेलगू, तमिल, कन्नड़, मलयालम, उर्दू और संस्कृत होगी। हालांकि राज्यों की मांग के आधार पर इनमें कुछ और भाषाओं को भी शामिल किया जा सकता है। 


वैसे भी सरकार का फोकस सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने को लेकर है । इसकी सिफारिश नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी प्रमुखता से की गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भी हाल ही में भाषाओं को लेकर उठे विवाद के बाद साफ किया था कि सभी भारतीय भाषाएं हमारी राष्ट्रीय भाषा है। सभी में पढ़ाई के समान अवसर मिलेंगे।


छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने की इस योजना पर तेजी से अमल के लिए शिक्षा मंत्रालय ने अपने संसाधनों के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली निजी कंपनियों से भी मदद मांगी है। इस दौरान कुछ जोड़ा भी है।

मदरसों में NCERT पाठ्यक्रम लागू, धार्मिक के साथ आधुनिक शिक्षा में दक्ष होंगे छात्र

मदरसों में वैकल्पिक नहीं अनिवार्य होगी गणित और विज्ञान की पढ़ाई

मदरसों में NCERT पाठ्यक्रम लागू, धार्मिक के साथ आधुनिक शिक्षा में दक्ष होंगे छात्र



उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने स्कूलों की तर्ज पर मदरसों में आधुनिक शिक्षा की कवायद शुरू कर दी है। वर्तमान सत्र से मदरसों में गणित, विज्ञान, नागरिक शास्त्र और इतिहास अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा।


मदरसों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू कर दिया गया है। इससे पहले मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ उर्दू, अंग्रेजी व हिंदी ही अनिवार्य थी। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने मदरसों में सात विषयों की पढ़ाई अनिवार्य करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस सभी विषयों के प्रश्न पत्र 100 - 100 अंकों के होंगे।


परिषद ने मदरसों में कक्षा एक से 12 तक की कक्षाओं में प्रारंभिक गणित, नागरिक शास्त्र, प्रारंभिक विज्ञान व इतिहास को अनिवार्य कर दिया है। छात्र अब तीन के बजाय सात विषयों को अनिवार्य रूप से पढ़ेंगे। ये विषय पहले वैकल्पिक रूप से पढ़ाए जाते थे। अब स्थायी किए जाने से छात्रों को पढ़ाई करने में आसानी होगी। 


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद का कहना है कि मदरसों में पहले भी वैकल्पिक रूप से आधुनिक विषय पढ़ाए जा रहे थे। अब इन्हें अनिवार्य किया जा रहा है। इससे मदरसों में पढ़ने वाले छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।



यूपी के मदरसों में आधुनिक विषयों की पढ़ाई पर जोर


लखनऊ । प्रदेश के मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसों की परीक्षाओं में अब धार्मिक शिक्षा, अरबी और फारसी के पर्चों के नम्बर कम होंगे। उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद ने इन तीनों विषयों के कुल 100 नम्बर तय किए हैं जबकि आधुनिक विषयों-अंग्रेजी, विज्ञान, कम्प्यूटर सांइस, गणित, हिन्दी, समाज विज्ञान आदि विषयों के पर्चे क्रमश: 100-100 नम्बर के होंगे।


यह जानकारी परिषद के चेयरमैन डा. इफ्तेखार जावेद ने दी। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में विषय बदले गए हैं। परिषद का फैसला हो गया है। हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, कम्प्यूटर साइंस, समाज विज्ञान को अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही अब परीक्षार्थियों के लिए पूर्णांक भी तय किए गए हैं। धार्मिक शिक्षा (दीनयात) और अरबी व फारसी को सौ नम्बर में बांटा गया है।


वजह पूछे जाने पर चेयरमैन ने कहा कि मकसद यह है कि देश तेजी से बदल रहा है तो मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में भी उसी के अनुरूप बदलाव करने पड़ेंगे। मदरसों में धार्मिक शिक्षा बेशक पठन-पाठन का अनिवार्य अंग है। मगर सिर्फ धार्मिक शिक्षा ग्रहण कर के मौलवी और इमाम बनने से भविष्य नहीं संवरेगा।


जरूरत इस बात की है कि इन मदरसों से पढ़कर निकलने वाले अब समाज की मुख्यधारा में शामिल होते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की शिक्षा भी ग्रहण कर सकें।

डीएलएड कॉलेजों ने कदम पीछे खींचे , प्रवेश लेने से किया इनकार

डीएलएड कॉलेजों ने कदम पीछे खींचे , प्रवेश लेने से किया इनकार

 
लखनऊ : इस वर्ष एक दर्जन डीएलएड (पुराना नाम बीटीसी) कॉलेजों ने प्रवेश लेने से इनकार कर दिया है। कॉलेजों ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी को पत्र लिख कर कहा है कि उन्हें विद्यार्थी आवंटित न किए जाएं। प्रदेश में डीएलएड के 3100 निजी कॉलेज हैं।


पिछले तीन-चार वर्षों से यूपी में डीएलएड की सीटें खाली रह जा रही हैं। प्रदेश में डीएलएड की 2.50 लाख सीटें हैं लेकिन पिछले वर्ष भी 50 फीसदी सीटें खाली रह गई थीं। अब डीएलएड कॉलेज विद्यार्थियों के लिए तरस रहे हैं। वर्ष 2009 में आरटीई कानून लागू होने के बाद कक्षा एक से पांच तक में केवल बीटीसी वालों को ही मान्यता दी गई थी। 


2011 में जब यह कानून लागू हुआ तो प्रदेश में केवल 10,600 सीटें ही बीटीसी की थी और निजी कॉलेजों की संख्या 65 से 70 थी। धीरे-धीरे निजी कॉलेजों ने भी डीएलएड प्को जोड़ा और बीते 10 सालों में 3100 कॉलेज खुल चुके हैं।

UP Board Result : यूपी बोर्ड रिजल्ट की तारीख अभी तय नहीं, सोशल मीडिया में चल रही फर्जी सूचनाा, अभी रिजल्ट तैयार नहीं

UP Board Result : यूपी बोर्ड रिजल्ट की तारीख अभी तय नहीं, सोशल मीडिया में चल रही फर्जी सूचनाा, अभी रिजल्ट तैयार नहीं

अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने बताया कि रिजल्ट अभी तैयार किया जा रहा है। सोशल मीडिया में जो परिणाम घोषणा की तारीख चल रही है, वह अधिकारिक नहीं है। अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। रिजल्ट तैयार होते ही तारीख की घोषणा की जाएगी।


यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम की घोषणा की तारीख अभी तक नहीं हो सकी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी यह नहीं बता पा रहे हैं कि रिजल्ट किस दिन घोषित होगा। उनका कहना है कि रिजल्ट तैयार होते ही तारीख की घोषणा की जाएगी।

इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने बताया कि रिजल्ट अभी तैयार किया जा रहा है। सोशल मीडिया में जो परिणाम घोषणा की तारीख चल रही है, वह अधिकारिक नहीं है। अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। रिजल्ट तैयार होते ही तारीख की घोषणा की जाएगी।

Tuesday, June 7, 2022

विजय किरण आनन्द द्वारा प्रभारी महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश; विशेष सचिव बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन; राज्य परियोजना निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान एवं निदेशक मध्याहन भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश के पद का प्रभार किया गया ग्रहण।

श्री विजय किरण आनंद को मिला महनिदेशक स्कूल शिक्षा का प्रभार।

विजय किरण आनंद की DGSE पद पर एक बार फिर वापसी

🆕 Update 

विजय किरण आनन्द द्वारा प्रभारी महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश;  विशेष सचिव बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन; राज्य परियोजना निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान एवं निदेशक मध्याहन भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश के पद का प्रभार किया गया ग्रहण।


लखनऊ। राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 21 आईएएस अफसरों को बदल दिया। गोरखपुर के जिलाधिकारी विजय किरन आनंद को एक बार फिर बेसिक शिक्षा विभाग का विशेष सचिव एवं स्कूल शिक्षा महानिदेशक के पद पर तैनाती दी गई है। उनके पास कुंभ मेला अधिकारी प्रयागराज का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।

बेसिक शिक्षा विभाग की सचिव अनामिका सिंह को महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग में सचिव नियुक्त किया गया है।





UPTET प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगने से बीएड खेमें में बेचैनी, डीएलएड खेमा कर रहा मजबूत पैरवी

UPTET प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगने से बीएड खेमें में बेचैनी, डीएलएड खेमा कर रहा मजबूत पैरवी


बीएड वालों के लिए UPTET 2021 का प्रमाणपत्र जारी करने पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार रहने से बीएड खेमें में  खलवली मच गयी है. डीएलएड वाले अपना पक्ष मजबूती से रख रहे हैं. क्योंकि कुछ राज्यों ने बीएड को प्राइमरी से बाहर कर दिया है. अब देखना यह है कोर्ट में राज्य सरकार क्या पक्ष रखती है. 


जानिए क्या हुआ था विगत की सुनवाई में 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी टेट पास करने वाले बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने पर पहले से लगाई गई रोक बरकरार रखी है। कोर्ट ने मामले में स्थगन आदेश को बढ़ाते हुए एनसीटीई को 14 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने प्रतीक मिश्रा व चार अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


मंगलवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि एनसीटीई जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं करेगी, वह कुछ नहीं कर सकती है। तो कोर्ट ने एनसीटीई को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई अब जुलाई में होगी। याची पक्ष की ओर से अधिवक्ता तान्या पांडेय ने तर्क दिया कि मामले में यूपी सरकार और एनसीटीई दोनों बच रहे हैं। वे स्थिति को स्पष्ट नहीं कर रहे हैं।


याची पक्ष का तर्क था कि राजस्थान हाईकोर्ट ने एनसीटीई (नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजूकेशन) के 28 जून 2018 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें बीएड डिग्री धारकों को भी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने के लिए पात्र माना गया है।


कहा गया कि जब नोटिफिकेशन ही रद्द कर दिया गया तो बीएड डिग्री धारक प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने के पात्र ही नहीं रहे। लिहाजा टेट 2021 पास करने वाले बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाण पत्र न जारी किए जाएं। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए टेट 2021 में क्वालीफाई करने वाले बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाण पत्र अगली सुनवाई तक न जारी करने का आदेश दिया था। साथ ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी से भी जानकारी मांगी थी।

समाज कल्याण के 489 स्कूलों में भर्ती पर रोक, छात्रों के अनुपात में अधिक शिक्षक होने पर लिया गया निर्णय

समाज कल्याण के 489 स्कूलों में भर्ती पर रोक, छात्रों के अनुपात में अधिक शिक्षक होने पर लिया गया निर्णय


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त और समाज कल्याण विभाग से संचालित व अनुदानित प्रदेश के 489 प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और वित्तीय अनुमोदन पर रोक लगा दी गई है। अनु सचिव शासन ने 11 मई को निदेशक समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर इन स्कूलों में चयन के लिए गठित समिति भंग कर दी है। साथ ही छात्र-शिक्षक अनुपात तार्किक बनाने का अनुरोध किया है।


समाज कल्याण विभाग ने अनुदानित स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों एवं उनमें पंजीकृत व उपस्थित छात्र-छात्राओं की सूचनाएं अक्टूबर 2021 में जिला समाज कल्याण अधिकारियों से जुटाई तो पता चला कि 489 स्कूलों में कुल 71006 छात्र पंजीकृत हैं। इन स्कूलों में स्वीकृत 3676 पदों के सापेक्ष 1759 शिक्षक कार्यरत हैं। कक्षा एक से पांच तक के इन स्कूलों में शिक्षकों के औसतन 7.5 पद स्वीकृत हैं। जबकि छात्र-छात्राओं की संख्या काफी कम है।

कुछ स्कूलों में 23 से 25 तक हैं शिक्षक: यह भी पता चला कि कुल स्कूलों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या 23 से 25 तक है। शासन का मानना है कि शिक्षा के सार्वभौमीकरण के बाद समाज कल्याण के इन प्राथमिक स्कूलों की उपादेयता ही समाप्त हो चुकी है क्योंकि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रति एक से डेढ़ किमी. पर स्कूल स्थापित किए गए हैं।

भविष्य में जरूरत होने पर परीक्षा से होगी भर्ती: शासन ने साफ किया है कि भविष्य में जरूरत होने पर समाज कल्याण के अनुदानित स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षा के जरिए शिक्षकों की भर्ती होगी।

30 से कम छात्र वाले स्कूल बंद होंगे

आदेश में साफ है कि जिन स्कूलों में 30 से कम बच्चे पंजीकृत हैं उन्हें अनुदान सूची में बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है। इन स्कूलों के छात्रों को बेसिक शिक्षा विभाग के निकटस्थ स्कूलों में प्रवेश देकर शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में समायोजित करने को कहा है।

अल्पसंख्यक संस्थानों की भर्ती में शक्तियां सीमित : हाइकोर्ट

अल्पसंख्यक संस्थानों की भर्ती में शक्तियां सीमित : हाइकोर्ट

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थान में लिपिक भर्ती के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने अलीगढ़ के अल्पसंख्यक संस्थान श्री उदय सिंह जैन कन्या इंटर कॉलेज में कार्यरत लिपिक मनोज कुमार जैन की याचिका पर दिया है। याचिका के अनुसार विद्यालय प्रबंध समिति ने याची की लिपिक संवर्ग में नियुक्ति जनवरी 2018 में की थी, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया था। याची ने डीआईओएस के आदेश के विरुद्ध याचिका की, जिसमें न्यायालय ने डीआईओएस के आदेश को निरस्त करते हुए पुन: आदेश करने का निर्देश दिया, लेकिन डीआईओएस ने फिर वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने में असहमति जताई।


अहम फैसला : अल्पसंख्यक संस्थानों को कर्मचारियों की नियुक्ति का है विशेषाधिकार


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम आदेश में कहा है कि सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत विशेष अधिकार प्राप्त है।

इस अधिकार के तहत वह अपने यहां कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं, उसमें राज्य सरकार की ओर से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मनोज कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में कहा गया कि विद्यालय प्रबंध समिति ने याची की लिपिक संवर्ग में नियुक्ति जनवरी 2018 में की थी, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया था।

याची ने वर्ष 2018 में डीआईओएस के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश को निरस्त करते हुए पुन: आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। किंतु जिला विद्यालय निरीक्षक ने दूसरी बार भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने में अपनी असहमति जताई थी।

शिक्षा विभाग ने विज्ञापन पर उठाए थे सवाल

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपने प्रतिशपथ पत्र में बताया कि विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा लिपिक पद हेतु दिए गए विज्ञापन की न तो विभाग से अनुमति ली गई थी और न ही विज्ञापन में न्यूनतम आवश्यक योग्यता, आयु सीमा और वेतनमान का वर्णन किया गया था।

 विभाग का कहना था कि विद्यालय प्रबंधन ने चयन समिति में जिला अधिकारी द्वारा नामित सदस्य एवं आरक्षित वर्ग के सदस्य के स्थान पर विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सहायक अध्यापक को सदस्य के रूप में शामिल किया गया, जो कि चयन समिति की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करते हैं।

याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वित्त पोषित अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालय में लिपिक संवर्ग में भर्ती हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात कहा कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों में लिपिक भर्ती हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक का पूर्व अनुमोदन आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों की नियुक्ति के मामले में चयन समिति में जिला अधिकारी द्वारा नामित एवं आरक्षित वर्ग के सदस्य को शामिल करना भी आवश्यक नहीं है ।अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता भंग नहीं कर सकती सरकारहाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार अल्पसंख्यक संस्थानों पर प्रशासनिक अधिकार के नियम थोपकर उनकी स्वायत्तता भंग नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति को बिना अर्हता पाए जाने पर ही अवैध ठहरा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था को संविधान द्वारा प्रदत्त विशेष अधिकारों की उपेक्षा कर दो बार आदेश दिया है।


डीआईओएस का आदेश निरस्त, करना होगा वेतन का भुगतान

कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा लिपिक को वित्तीय सहमति न प्रदान करने संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए याची को वर्ष 2018 से वित्तीय सहमति प्रदान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने याची को अगले तीन महीनों में वर्ष 2018 से अद्यतन अवधि तक का वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया, साथ ही अगले 3 महीनों में एरियर भुगतान न होने की स्थिति में याची को 12 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही राज्य को भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी से ब्याज की वसूली करने की छूट दी है।

Monday, June 6, 2022

विद्यार्थियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएगी सरकार, 14 जिलों के 28041 विद्यालयों में लगेंगे जल शोधन संयंत्र

विद्यार्थियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएगी सरकार, 14 जिलों के 28041 विद्यालयों में लगेंगे जल शोधन संयंत्र



लखनऊ : स्कूलों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने नई रणनीति अपनाई है। इसके तहत 14 जिलों में अल्ट्रा फिल्ट्रेशन तकनीक पर आधारित जल शोधन संयंत्र लगवाए जाएंगे।


दरअसल, दूषित पेयजल से बच्चों के बीमार होने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे निपटने के लिए सरकार ने स्कूलों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का फैसला किया है। पहले चरण में प्रदेश के 14 जिलों के 28041 स्कूलों में जल शोधन संयंत्र लगवाए जाएंगे।


अगले चरण में इसे अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी है। इससे संचारी रोगों पर रोकथाम में भी बड़ी मदद मिल सकेगी।


गौरतलब है कि प्रदेश सरकार बुंदेलखंड में पीने के लिए शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चला रही है। सरकार ने 2021 22 के बजट में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 15000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था, जिसके सापेक्ष 2022- 23 के बजट में 19500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

अब प्राथमिक विद्यालयों में होगा वर्षा जल संचयन, बांदा, चित्रकूट और महोबा के 100 स्कूलों में लगेंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

अब प्राथमिक विद्यालयों में होगा वर्षा जल संचयन, बांदा, चित्रकूट और महोबा के 100 स्कूलों में लगेंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम



बांदा : बुंदेलखंड में बारिश का जल संरक्षित करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री की 100 दिन की कार्ययोजना में इसे शामिल किया गया है। चित्रकूटधाम मंडल के 100 प्राथमिक विद्यालयों में रूफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने हैं। बांदा और चित्रकूट के 35- 35 और महोबा के 30 विद्यालयों में ये सिस्टम लगाए जाएंगे। इसी सत्र में इस पर काम शुरू हो जाएगा।


चित्रकूटधाम मंडल में 4586 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें तीन जिलों बांदा, चित्रकूट और महोबा के विद्यालयों में रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने हैं। बांदा से ब्लॉक वार 120 विद्यालयों को चिह्नित कर सूची प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव कुशवाहा को सौंपी गई है। बांदा जिले के बबेरू ब्लॉक के 16, बड़ोखर के 20, बिसंडा के 16, जसपुरा से एक, कमासिन के 20, महुआ से 16, नरैनी के 15, तिंदवारी के 16 विद्यालय चिह्नित किए गए हैं।


प्राथमिक विद्यालयों में रूफ रेन वाटर हारवेसिस्टंग सिस्टम लगाए जाने के लिए विद्यालयों को चिन्ति कर सूची कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को सौंप दी है। जल्द ही इस पर काम शुरू होगा। रामपाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा।

एप से होगी स्कूलों की ग्रेडिंग, 27 प्रकार के पैरामीटर के आधार पर की जाएगी राजकीय स्कूलों की ग्रेडिंग

एप से होगी स्कूलों की ग्रेडिंग, 27 प्रकार के पैरामीटर के आधार पर की जाएगी राजकीय स्कूलों की ग्रेडिंग


प्रयागराज : प्रदेश के 2200 से अधिक राजकीय माध्यमिक हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों की ग्रेड अब मोबाइल एप से होगी। यह ग्रेडिंग 27 अलग-अलग पैरामीटर के आधार पर की जाएगी। मोबाइल एप से ग्रेडिंग के लिए कई मंडलों के जेडी, डीआईआएस और प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।


अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) मंजू शर्मा ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जला विद्यालय निरीक्षकों को एप की मदद स स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की रिसोर्स मैपिंग कराने के निर्देश दिए थे। इसके तहत लखनऊ, बरेली, अलीगढ़, आजमगढ़, प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, बस्ती, चित्रकूट, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, गोरखपुर, झांसी, कानपुर एवं मिर्जापुर मंडल का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।


अब डीआईओएस जिले के पांच फीसदी विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण कर मोबाइल एप पर अंकित विवरण का भौतिक सत्यापन कर प्रमाणित डाटा जेडी को भेजेंगे। जिन 27 अलग-अलग पैरामीटर के आधार पर ग्रेडिंग होनी हैं, उनके अकादमिक, कक्षा कक्ष विवरण, व्यवहारिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, वाईफाई, स्मार्ट क्लास, फर्नीचर, गैर अकादमिक खेल का मैदान, व्यायामशाला, बहुउद्देश्यीय हाल, कला और शिल्प कक्ष, व्यवसायिक शिक्षा कक्ष आदि शामिल हैं।

संस्कृत विश्वविद्यालय : भर्ती परीक्षा परिणाम रद्द, परीक्षा नए सिरे से कराए जाने की तैयारी

संस्कृत विश्वविद्यालय : भर्ती परीक्षा परिणाम रद्द, परीक्षा नए सिरे से कराए जाने की तैयारी


वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में विवादों में आई सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा के परिणाम आखिरकार निरस्त हो गए। शिक्षकों, अभ्यर्थियों के विरोध और राजभवन से जवाबतलब होने के बाद कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी बैकफुट पर आ गए।


रविवार को राजभवन से लौटे कुलपति ने अध्यापक परिषद के साथ मैराथन बैठक के बाद परीक्षा परिणाम रद्द करने का निर्णय लिया। भर्ती परीक्षा अब नए सिरे से विज्ञापित होगी या पुराने विज्ञापन पर ही नई परीक्षा कराई जाएगी, इसके लिए राजभवन के आदेश का इंतजार हो रहा है। विश्वविद्यालय में 56 सहायक आचार्य और 14 सहायक पुस्तकाध्यक्ष पदों के लिए 29 मई को परीक्षा हुई थी। परीक्षा के बाद पहले दिन से ही अभ्यर्थियों ने बिना अनुक्रमांक या कोड की ओएमआर शीट पर आपत्ति जाहिर की थी। ‘हिन्दुस्तान’ ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया। सभी पक्षों की पड़ताल करते हुए परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़यिां भी सामने रखीं। विश्वविद्यालय के अध्यापक परिषद ने भी इस धांधली पर कुलपति का खुलकर विरोध करते हुए राजभवन से शिकायत की। दो जून को राज्य विश्वविद्यालयों की बैठक में कुलाधिपति ने इन गड़बड़ियों पर सवाल पूछे और सभी प्रपत्रों के साथ कुलपति को शनिवार को राजभवन तलब किया। रविवार को राजभवन से लौटे कुलपति ने बैठक बुलाई और भर्ती परीक्षा परिणाम को तत्काल निरस्त करने की सूचना दी।

यूपी बोर्ड : 15 जून तक जारी होगा परीक्षा का परिणाम

यूपी बोर्ड : 15 जून तक जारी होगा परीक्षा का परिणाम


लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा - 2022 का परिणाम 15 जून तक जारी होगा। बोर्ड की ओर से परीक्षा परिणाम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

यूपी बोर्ड में हाई स्कूल परीक्षा में 27,81,654 और इंटरमीडिएट में 24,11,035 परीक्षार्थी सहित कुल 51, 92, 689 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे। इनमें से हाई स्कूल में 25,25,007 और इंटरमीडिएट में 22, 50, 742 परीक्षार्थियों सहित कुल 47,75, 749 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। बोर्ड की ओर से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का कार्य पूरा करा लिया गया है । 




उतर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा के परिणाम अब किसी भी वक्त जारी किए जा सकते हैं। कॉपियों का मूल्यांकन 20 मई से पहले ही पूरा हो चुका है। अब रिजल्ट का ही इंतजार है।


UP Board 10th, 12th Result 2022:  यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं परीक्षा के परिणाम अब किसी भी दिन जारी किए जा सकते हैं। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 20 मई से पहले ही पूरा हो चुका है। वहीं  12वीं में प्रैक्टिकल के लिए शेष रह गए छात्रों के लिए तीसरे चरण के प्रैक्टिकल मई अंत तक पूरे हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (UPMSP) के रिजल्ट इस सप्ताह में जारी किए जा सकते हैं। बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, परिणाम जून के दूसरे सप्ताह में जारी किए जा सकते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि इस सप्ताह यूपी बोर्ड की ओर परीक्षा परिणाम जारी की तिथि का ऐलान किया जा सकता है।

आपको बता दें कि प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर 10वीं-12वीं की सवा दो करोड़ से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया है। इसके बाद प्रैक्टिकल परीक्षा के अंक भी रिजल्ट में जोड़े जाने थे। यूपी बोर्ड का रिजल्ट तैयार करने करने में करीब एक सप्ताह का समय लगने की संभावना थी। इस साल यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 के लिए 52 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया है।  यूपी बोर्ड के नतीजे आपको upmsp.edu.in के साथ लाइव हिंदुस्तान पर भी देखने को मिलेंगे। इसके लिए आपको इस पेज पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा, यहां आप नतीजे चेक कर सकेंगे। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद नतीजे जारी होने पर आप इसी लिंक पर क्लिक कर नतीजे चेक कर सकेंगे।

UP Board Result 2022 ऐसे चेक कर सकेंगे:
स्टेप 1-  सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं।
स्टेप 2- अब होम पेज पर दिखाई दिए "UPMSP 10th/12th Result 2022" लिंक पर क्लिक करें।
स्टेप 3- मांगी गई जानकारी भरें और सबमिट करें।
स्टेप 4- रिजल्ट आपके सामने होगा।
स्टेप 5- आप चाहें तो भविष्य के लिए प्रिंटआउट ले सकते हैं।

करीब 52 लाख छात्रों कराया था रजिस्ट्रेशन:
यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं की परीक्षाएं 24 मार्च 2022 से 12 अप्रैल 2022 तक आयोजित कराई गई थीं।  यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं परीक्षा में करीब 52 लाख छात्र-छात्राओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन परीक्षा में कुल 48 लाख विद्यार्थियों ने ही भाग लिया था, यानी 4 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी थी।

Sunday, June 5, 2022

अनधिकृत रूप से निलंबन और वेतन न देने पर तत्कालीन फतेहपुर BSA पर कार्रवाई का हाईकोर्ट का निर्देश, ठोका 50 हजार का हर्जाना

अनधिकृत रूप से निलंबन और वेतन न देने पर तत्कालीन फतेहपुर BSA पर कार्रवाई का हाईकोर्ट का निर्देश,  ठोका 50 हजार का हर्जाना


 
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षिका को अनधिकृत रूप से निलंबित करने और निलंबन काल का वेतन न देने के मामले में फतेहपुर के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके पंडित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की छूट दी है। कोर्ट ने 50 हजार का हर्जाना भी लगाया है। कोर्ट ने शिक्षिका को छह सप्ताह के भीतर नलंबन अवधि के वेतन व भत्ते का भुगतान सात प्रतिशत ब्याज की दर के साथ करने का निर्देश भी दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने रचना सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची की नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय नराचा में वित्त पोषित प्राथमिक विद्यालय में 2006 में हुई थी। याची का कहना था कि उसने छह अक्तूबर 2007 से पांच मार्च 2008 तक बिना वेतन अवकाश की मांग की थी। उसका यह अवकाश स्वीकृत कर दिया गया। 


अवकाश पर रहने के दौरान पांच मार्च 2008 को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अनधिकृत रूप से सेवा से अनुपस्थित रहने के आरोप में निलंबित कर दिया। उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई। बाद में 20 जनवरी 2010 को तीन वर्ष तक सेवा से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया।


✍️ देखें कोर्ट आर्डर 

आयुसीमा में छूट के दोबारा लाभ पर रोक नहीं : हाईकोर्ट

50 वर्ष की अभ्यर्थी की नियुक्ति का हाईकोर्ट ने BSA को दिया निर्देश

आयुसीमा में छूट के दोबारा लाभ पर रोक नहीं : हाईकोर्ट


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि सहायक अध्यापक भर्ती के मामले में 29 सितंबर 2016 की गाइडलाइन के तहत आयु सीमा में छूट का दोबारा लाभ लेने पर कोई रोक नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कुशीनगर द्वारा आयु सीमा में छूट का दोबारा लाभ मांगने के आधार पर सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति न देने के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही उसे सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कुशीनगर के कमलेश कुमार की याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह को सुनकर दिया है। अधिवक्ता का कहना था कि याची ने 2016 में विज्ञापित 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में आवेदन किया था। 


कुशीनगर जिले में इसके लिए 660 पद विज्ञापित किए गए। विशिष्ट बीटीसी योग्यता धारक याची ने अनुसूचित जाति वर्ग के तहत आवेदन किया और वह चयनित हो गई। सूची में उसका नाम ने 160वें क्रम पर था। अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया लेकिन याची को नियुक्ति पत्र नहीं जारी किया गया। 


इस पर याची ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कुशीनगर से संपर्क किया तो बताया गया कि उसका नाम चयनित अभ्यर्थियों की लंबित सूची में रखा गया है। उसके बाद याची ने याचिका कर हाईकोर्ट से प्रत्यावेदन निर्णीत करने का आदेश प्राप्त किया। इसके बावजूद बीएसए ने उसका प्रत्यावेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसे दोबारा आयुसीमा में छूट का लाभ नहीं मिलेगा।


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा सहायक अध्यापक भर्ती में 29 सितंबर 2016 की गाइडलाइन के तहत आयु सीमा में छूट का दोबारा लाभ लेने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कुशीनगर के सहायक अध्यापक की नियुक्ति न देने के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही याची को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। 


यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कुशीनगर के कमलेश कुमार की याचिका पर दिया है। याची ने 2016 में विज्ञापित 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में आवेदन किया था । 


कुशीनगर जिले में इसके लिए 660 पद विज्ञापित किए गए। विशिष्ट बीटीसी योग्यता धारक याची ने अनुसूचित जाति वर्ग के तहत आवेदन किया और वह चयनित हो गई। सूची में उसका नाम ने 160वें क्रम पर था। अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया लेकिन याची को नियुक्ति पत्र नहीं जारी किया गया ।


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Saturday, June 4, 2022

माध्यमिक शिक्षा के बाबुओं के पटल 30 जून तक बदलने का निर्देश, तीन साल से जमे कार्मिक आयेंगे दायरे में

माध्यमिक शिक्षा के बाबुओं के पटल 30 जून तक बदलने का निर्देश,  तीन साल से जमे कार्मिक आयेंगे दायरे में



लखनऊ : माध्यमिक शिक्षा के सभी कार्यालयों में एक ही पटल पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय से जमे कार्मिक हटाएं जाएंगे। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने निर्देश दिया है कि 30 जून तक ऐसे कार्मिकों को दूसरे पटल का कार्य आवंटित किया जाए। 


यह भी निर्देश है कि कार्यालय प्रमुख अपने विभागाध्यक्षों को 30 जून को ही इस आशय का प्रमाणपत्र दें कि उनके यहां कोई कार्मिक तीन साल से एक ही पटल पर कार्यरत नहीं है। शासन ने 13 मई को आदेश दिया है कि समूह ग के कार्मिकों का पटल परिवर्तन व फील्ड में कार्यरत का क्षेत्र अनिवार्य रूप से बदला जाए। पटल परिवर्तन को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए।


69000 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत आरक्षित वर्ग में 6800 पदों की अतिरिक्त भर्ती का शासनादेश तलब

69000 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत आरक्षित वर्ग में 6800 पदों की अतिरिक्त भर्ती का शासनादेश तलब


प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के मामले में पांच जनवरी 2022 को जारी उस शासनादेश को तलब किया है जिसके जरिए पिछड़ा वर्ग के 6800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई है। इस शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने प्रतीक मिश्र की याचिका पर दिया है।


याची के अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि शासन ने 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती में 6800 अतिरिक्त सहायक अध्यापकों की सूची जारी कर नियुक्त करने का निर्णय लिया है। 16 मई 2020 को शासन ने 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। उसके बाद सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने तीन चरणों की काउंसलिंग से 69000 अध्यापकों की भर्ती पूर्ण की। 


शासन के संज्ञान में यह लाया गया कि आरक्षण नियम लागू करने में गलती हो गई है और 6800 आरक्षित पदों पर सामान्य श्रेणी के अभर्थियों का चयन कर लिया गया है। इसके बाद शासन ने पांच जनवरी 2022 के शासनादेश से आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की, पांच जनवरी के उस शासनादेश को सार्वजनिक नहीं किया इस पर कोर्ट ने 19 अप्रैल को सरकार को पांच जनवरी के शासनादेश को पेश करने का निर्देश दिया।

CBSE National Award For Teachers 2022 : सीबीएसई शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन, देश भर से 32 शिक्षक होंगे चयनित

CBSE शिक्षक अवार्ड के आवेदन अब 30 जून तक

🆕 Update 
लखनऊ। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने एक्सीलेंस इन टीचिंग एंड स्कूल लीडरशिप अवार्ड के लिए आवेदन की तारीख बढ़ा दी है। अब सीबीएसई के शिक्षक 30 जून तक अवार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। अभी तक बोर्ड ने 20 जून आवेदन की अन्तिम तिथि तय कर रखी थी। बोर्ड की ओर से प्रत्येक वर्ष श्रेष्ठ शिक्षकों को यह अवार्ड दिया जाता है।


CBSE National Award For Teachers 2022 : सीबीएसई शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन शुरू, देश भर से 32 शिक्षक होंगे चयनित





CBSE National Teacher Award: शिक्षकों को चयन उनके अंक के आधार पर किया जाएगा। सौ अंक में जिन्हें सबसे ज्यादा अंक मिलेगा, उन्हें यह सम्मान दिया जायेगा। पुरस्कार के लिए प्राथमिक से लेकर 12वीं तक के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं।

  

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि जारी कर दी है। ऑनलाइन आवेदन शिक्षकों को 20 जून तक करनी है। इस पुरस्कार के लिए वहीं शिक्षक आवेदन करेंगे जो शिक्षक के रूप में दस साल पूरे कर लिये होंगे। इस बार देश भर से 32 शिक्षकों का चयन किया जायेगा। जो शिक्षक चयनित होंगे, उन्हें पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन सम्मानित किया जायेगा।


ऑनलाइन आवेदन के लिए बोर्ड ने वेबसाइट पर लिंक दिया है। उसी लिंक पर जाकर शिक्षकों को आवेदन करनी है।
शिक्षकों को चयन उनके अंक के आधार पर किया जाएगा। सौ अंक में जिन्हें सबसे ज्यादा अंक मिलेगा, उन्हें यह सम्मान दिया जायेगा। पुरस्कार के लिए प्राथमिक से लेकर 12वीं तक के शिक्षक चयनित होंगे। इसके अलावा देश भर से पांच प्राचार्य को भी सम्मानित किया जायेगा। प्राचार्य भी इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते है।


 भाषा के लिए अलग से शिक्षक होंगे सम्मानित

बोर्ड ने इस बार विषय वार भी शिक्षकों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। इसमें भाषा के भी शिक्षक शामिल है। इसके अलावा भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीवविज्ञान, बिजनेस स्टडीज, एकाउंटेसी, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, मनोविज्ञान, भौतिकी, शारीरिक शिक्षा आदि विषय शामिल है। बोर्ड द्वारा विषय वार शिक्षकों का चयन किया जायेगा। इसके अलावा उप प्राचार्यो को भी सम्मानित किया जायेगा।

प्रदेश के साढ़े चार हजार से अधिक अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में जरूरी संसाधन बढ़ाने की तैयारी

प्रदेश के साढ़े चार हजार से अधिक अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में जरूरी संसाधन बढ़ाने की तैयारी


लखनऊ : प्रदेश के साढ़े चार हजार से अधिक अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में सरकार जरूरी संसाधन बढ़ाने की तैयारी कर रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी कालेजों से चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है इसके बाद संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा।


प्रदेश के उन एडेड विद्यालयों को भी संवारा जा रहा है जिनकी स्थापना के 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं और जर्जर अवस्था में हैं। साथ ही वे विद्यालय जहां छात्र संख्या अधिक है लेकिन, संसाधनों का अभाव है वहां भी विकास कार्य कराए जाने हैं। सरकार प्रोजेक्ट अलंकार के तहत एडेड माध्यमिक विद्यालयों का जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। 


इसके लिए संबंधित विद्यालय की प्रबंध समिति को पहले विद्यालय के खाते में कार्य के सापेक्ष धनराशि देनी होगी और इसके बाद उतनी ही धनराशि अनुदान के रूप में सरकार देगी। इस योजना के तहत 300 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को लाभ नहीं दिया जा रहा है। छात्र संख्या के हिसाब से मिलने वाली अनुदान राशि घोषित हो चुकी है।


अब माध्यमिक विद्यालयों के संसाधनों की पड़ताल शुरू की गई है, सभी जिलों से 30 मई तक सूचना मांगी गई थी लेकिन अधिकांश ने रिपोर्ट नहीं दी है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा डा. महेंद्र देव ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में यह भी पूछा है कि उनके विद्यालय में सोलर पैनल, आर्ट रूम, रेन वाटर हार्वे¨स्टग और साइकिल स्टैंड आदि की सुविधा है या नहीं। विभाग इसकी सूचना जल्द ही शासन को भेजेगा। सरकार विद्यालयों में इन संसाधनों को जल्द ही बढ़ा सकती है।

उच्च शिक्षा में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार योजना 2022 हेतु आवेदन पत्रों का आमंत्रण, विज्ञप्ति देखें

उच्च शिक्षा में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार योजना 2022 हेतु आवेदन पत्रों का आमंत्रण, विज्ञप्ति देखें ।

शिक्षक पुरस्कार के लिए मांगे आवेदन, राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए निदेशालय में 15 जून तक जमा होंगे फॉर्म


प्रयागराज : उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार 2022 के लिए आवेदन मांगे हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज के अनुसार पूर्ण रूप से भरे हुए फॉर्म संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति / कुलसचिव की संस्तुति के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय में 15 जून शाम पांच बजे तक ऑफलाइन भेजे जा सकते हैं।


राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के तीन-तीन शिक्षकों (प्रति श्रेणी एक-एक ) पुरस्कार दिए जाएंगे। कला, विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, वाणिज्य प्रबंधन और साहित्य के क्षेत्र में कुल नौ शिक्षकों को सरस्वती पुरस्कार दिए जाएंगे। 


शिक्षा के उन्नयन और नवीन शिक्षण कार्य में उच्च स्तरीय योगदान के लिये 15 शिक्षकों को शिक्षक श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इनमें राज्य विश्वविद्यालयों के छह (प्रति श्रेणी दो-दो ) जबकि राजकीय और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के तीन-तीन शिक्षकों (प्रति श्रेणी एक एक ) पुरस्कार दिए जाएंगे। अध्यापन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्ववित्तपोषित महाविद्यालय के तीन शिक्षकों को भी शिक्षक श्री पुरस्कार ( प्रति श्रेणी एक-एक) मिलेगा।



Friday, June 3, 2022

अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण व जनपद के अन्दर शिक्षकों की पारदर्शी, स्थाई स्थानान्तरण नीति लागू कर स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में RSM ने लिखा पत्र

अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण व जनपद के अन्दर शिक्षकों की पारदर्शी, स्थाई स्थानान्तरण नीति लागू कर स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में RSM ने लिखा पत्र

Thursday, June 2, 2022

तीन माह से फंसा आठ हजार शिक्षकों का वेतन, माध्यमिक के समग्र शिक्षा अभियान का अलग वेतन मद होने से संकट

तीन माह से फंसा आठ हजार शिक्षकों का वेतन

● माध्यमिक के समग्र शिक्षा अभियान का अलग वेतन मद होने से संकट

● जीआइसी की तरह एक वेतन मद मांग की पत्रावली वित्त विभाग में अटकी

प्रयागराज : प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित 1472 विद्यालयों के करीब आठ हजार शिक्षक तीन माह से वेतन से वंचित हैं। अभी तक ये विद्यालय राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के नाम से संचालित थे। जीआइसी के शिक्षकों की तरह इन • शिक्षकों का वेतन मद एक किए जाने की मांग राजकीय शिक्षक संघ कई बार उठा चुका है। इस संबंध में पत्रावली वित्त विभाग में अटकी है।


समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित विद्यालयों में शिक्षकों के नौ हजार पद सृजित हैं, जिसमें से करीब आठ हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इनको मार्च, अप्रैल और मई का वेतन नहीं मिला है। इस स्थिति पर राजकीय शिक्षक संघ ने गहरी आपत्ति जताई है। संघ के महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि इन शिक्षकों के वेतन में 60 प्रतिशत अंशदान केंद्र सरकार से मिलता है। शेष 40 प्रतिशत राज्य सरकार देती है। ऐसे में कभी केंद्र सरकार का तो कभी राज्य सरकार का हिस्सा अटक जाता है, जिससे अक्सर समय पर वेतन नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक रमसा के नाम पर चयनित नहीं हैं, बल्कि उन्हें विद्यालय संचालन के लिए भेजा गया है। ऐसे में उनका वेतन मद भी जीआइसी शिक्षकों की तरह किया जाना चाहिए, ताकि वित्तीय वर्ष लागू होते ही बजट निर्धारित हो सके।

इस मामले को राजकीय शिक्षक संघ की अध्यक्ष छाया शुक्ला लखनऊ में भी उठा चुकी हैं। शिक्षक संघ और शिक्षकों के दबाव में समग्र शिक्षा अभियान को और से मार्च के अंत में वेतन मद परिवर्तन के लिए पत्रावली वित्त विभाग को भेजी गई, जो कि वहीं पड़ी है। महामंत्री के मुताबिक, वित्त विभाग कहता है कि वेतन मद बदलने से केंद्र का मद रुक जाएगा। इस तर्क का उन्होंने विरोध करते हुए कहा कि बेसिक में स्कूल चलो अभियान के शिक्षकों का मद परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की तरह एक है, लेकिन अड़चन नहीं आती, तो इसमें कैसे आएगी। उन्होंने वेतन मद बदलने की मांग उठाई है, ताकि वेतन की समस्या से छुटकारा मिल सके।

तदर्थ शिक्षकों को राहत, वेतन रोकने का आदेश वापस

प्रयागराज जिले में तैनात 36 तदर्थ शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। उनका वेतन रोकने का आदेश जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने वापस ले लिया है। डीआइओएस ने बताया कि पिछले दिनों अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिए गए निर्देश के अनुपालन में वेतन रोका गया था। वहां से कोई लिखित आदेश नहीं आया इसलिए अब वेतन रोकने संबंधी निर्देश वापस ले लिया गया है। उन्होंने समीक्षा बैठक में उस समय कहा था कि एक जनवरी सन 2000 के बाद तैनात तदर्थ शिक्षकों का वेतन नहीं जारी होना चाहिए।

उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय : छह अगस्त को कराई जाएगी बीएड की प्रवेश परीक्षा, 29 जून ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि

उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय : छह अगस्त को कराई जाएगी बीएड की प्रवेश परीक्षा, 29 जून ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि

उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय शैक्षिक सत्र 2022-23 बीएड सामान्य व बीएड स्पेशल पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा छह अगस्त को प्रस्तावित की है। आनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थियों को वेबसाइट www.uprtou.ac.in के माध्यम से 29 जून तक आवेदन का मौका दिया गया है। उसके बाद विलंब शुल्क के साथ नौ जुलाई तक फार्म भर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने इसका विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है।


विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ निदेशक नीरांजली सिन्हा ने बताया कि बीएड प्रवेश परीक्षा शुल्क सामान्य व पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 1200 रुपये है। विलंब शुल्क के साथ 1500 रुपये जमा होंगे। इसी तरह अनुसूचित जाति, जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 900 रुपये और विलंब शुल्क के साथ 1200 रुपये आनलाइन जमा करने होंगे।


इन तिथियों का रखें ध्यान 

29 जून: आनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि

नौ जुलाई : विलंब शुल्क के साथ आनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि

10 से 14 जुलाई : आनलाइन आवेदन विवरण में त्रुटि संशोधन की अवधि 

21 जुलाई : विश्वविद्यालय वेबसाइट से प्रवेश परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र डाउनलोड करना

छह अगस्त: प्रवेश परीक्षा की तिथि (संभावित)

अगस्त के तीसरे सप्ताह: वेबसाइट पर प्रवेश परीक्षा परिणाम जारी होना 
सितंबर के प्रथम सप्ताह से प्रवेश परामर्श का प्रारंभ

बिना मान्यता वाले मदरसों की सूची बना रहा आयोग

बिना मान्यता वाले मदरसों की सूची बना रहा आयोग

लखनऊ : गोसाईगंज के शिवलर स्थित सुफ्फामदीनतुल उलमा मदरसे में छात्रों के पैरों को जंजीर से बांधने का मामला उजागर होने के बाद बाल संरक्षण आयोग ने सख्ती शुरू कर दी है।


आयोग ने प्रदेश भर में बिना मान्यता के चल रहे मदरसों की रिपोर्ट तैयार कराना शुरू कर दी है। ऐसे मदरसों को आयोग अब बंद कराने की कार्रवाई करेगा। छात्रों को प्रताड़ित करने के मामले में आयोग पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। आयोग ने इस प्रकरण के सामने आने के बाद सोमवार को मदरसे में मौलवी व दोनों छात्रों के पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिये थे। इस मामले में पुलिस कमिश्नर से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी थी। मंगलवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम ने निरीक्षण में बच्चों की भावनाओं को भड़काने वाले पम्फलेट मिले थे। बच्चों की खान पान और कपड़ों की स्थिति भी निरीक्षण में अच्छी नहीं मिली थी।

जो मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं, वह मान्यता के लिए जल्दी ही आवेदन कर दें। बिना मान्यता के मदरसों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा।

सुचिता, सदस्य, बाल संरक्षण आयोग

Wednesday, June 1, 2022

हाईकोर्ट ने विभागीय जांच के बगैर अध्यापक को बर्खास्त करने के बीएसए अमरोहा के आदेश को किया रद्द, बकाया वेतन का ब्याज समेत करने का आदेश

हाईकोर्ट ने विभागीय जांच के बगैर अध्यापक को बर्खास्त करने के बीएसए अमरोहा के आदेश को किया रद्द, बकाया वेतन का ब्याज समेत करने का आदेश


 
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विभागीय जांच के बगैर अध्यापक को बर्खास्त करने के बीएसए अमरोहा के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही अध्यापक को उसके निलंबन की तिथि से बकाया वेतन का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से करने का निर्देश दिया है।



यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने अमरोहा के नज़ाकत अली की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमरोहा ने याची को अप्रैल 2014 में निलंबित कर दिया था।

शिक्षामित्रों-अनुदेशकों को बताया शिक्षक, डीएलएड व बीटीसी बेरोजगारों में आक्रोश

शिक्षामित्रों-अनुदेशकों को बताया शिक्षक, डीएलएड व बीटीसी बेरोजगारों में आक्रोश

 

प्रयागराज : बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के जवाब से नई शिक्षक भर्ती आंदोलन को झटका लगा है। विधानसभा में डॉ. मुकेश वर्मा के सवाल पर संदीप सिंह ने जो जवाब दिया है उसमें परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत 3,32,734 नियमित शिक्षकों के साथ 1,47,766 शिक्षामित्रों को भी शिक्षक माना है। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत 1,20,860 नियमित शिक्षकों के साथ 27,555 अंशकालिक अनुदेशकों को भी शिक्षक माना है।



नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुसार शिक्षक-छात्र अनुपात पूरा होने के कारण नई भर्ती की उम्मीद भी कम दिखाई पड़ रही है। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को शामिल करने के कारण भर्ती की उम्मीद धूमिल होने से डीएलएड व बीटीसी बेरोजगारों में आक्रोश है। डीएलएड प्रशिक्षित पंकज मिश्र का कहना है कि जब शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट से रद्द हो चुका है तो उन्हें शिक्षक-छात्र अनुपात की गणना में शामिल करना अनुचित है। योगी सरकार ने ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर स्वीकार किया है कि अभी 51112 पद रिक्त हैं।

राजकीय विद्यालयों की मोबाइल एप से ग्रेडिंग, स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कराई जाएगी पैरामीटर के आधार पर रिसोर्स मैपिंग

राजकीय विद्यालयों की मोबाइल एप से ग्रेडिंग, स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कराई जाएगी पैरामीटर के आधार पर रिसोर्स मैपिंग


● अपर शिक्षा निदेशक ने जेडी और डीआईओएस को दिए निर्देश

● एक से तीन जून तक मोबाइल एप के लिए दिया जाएगा प्रशिक्षण

प्रयागराज : प्रदेश के 2200 से अधिक राजकीय माध्यमिक हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों की ग्रेडिंग मोबाइल एप से होगी। अपर शिक्षा निदेशक (व्यवसायिक शिक्षा) मंजू शर्मा ने 28 मई को सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को एप के मदद से स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की रिसोर्स मैपिंग कराने के निर्देश दिए हैं। मोबाइल एप से ग्रेडिंग के लिए तीन फेरों में जेडी, डीआईओएस और प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।


एक जून को 11 से 12:30 बजे की पाली में लखनऊ व बरेली जबकि 2:30 से चार बजे की पाली में अलीगढ़, आजमगढ़, प्रयागराज व वाराणसी का प्रशिक्षण होगा। दो जून को 11 से 12:30 बजे की पाली में अयोध्या, बस्ती, चित्रकूट व देवीपाटन जबकि 2:30 से चार बजे तक आगरा, मेरठ, मुरादाबाद व सहारनपुर मंडल का प्रशिक्षण होगा। तीन जून को 11 से 12:30 बजे तक गोरखपुर, झांसी, कानपुर व मिर्जापुर मंडल का प्रशिक्षण है।

डीआईओएस जिले के कुल राजकीय विद्यालयों के सापेक्ष पांच प्रतिशत विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित विद्यालयों की ओर से मोबाइल एप पर अंकित विवरण का भौतिक सत्यापन कर पुष्टि करते हुए आवश्यक संशोधन कर प्रमाणित डाटा जेडी को भेजेंगे। पहले, दूसरे और तीसरे फेरे की यह सत्यापन रिपोर्ट दो से पांच, तीन से छह और चार से सात जून तक भेजनी है।

डीआईओएस आरएन विश्वकर्मा ने मोबाइल एप से ग्रेडिंग संबंधी आदेश की पुष्टि की है।

पॉलीटेक्निक : परिवर्तन की सूचना ई-मेल से, परीक्षा तिथि संशोधन का मिलेगा विकल्प

पॉलीटेक्निक : प्रवेश परीक्षाएं 27 से 30 जून के मध्य, 20 जून से डाउनलोड करें प्रवेशपत्र

लखनऊ : प्रदेश में विभिन्न डिप्लोमा व पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में शैक्षिक सत्र 2022-23 में प्रवेश के लिए कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षाएं अब 27 से 30 जून के मध्य कराई जाएंगी। प्रवेश परीक्षा के प्रवेश-पत्र अभ्यर्थी 20 जून से डाउनलोड कर सकेंगे। पहले छह से 10 जून के मध्य परीक्षाएं होनी थी, किंतु अपरिहार्य कारणों से प्रवेश परीक्षा की तारीखें आगे बढ़ा दी गई हैं। पहली बार परीक्षा की तारीखें टकराने पर परिषद की प्रवेश परीक्षा तारीख बदलने का विकल्प दिया जा रहा है।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के प्रभारी सचिव राम रतन ने बताया कि वर्ष 2022 की कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षाओं से संबंधित निर्देश व अन्य नवीनतम जानकारी वेबसाइट jeecup.admissions.nic.in पर उपलब्ध कराई जाएगी। परीक्षा अवधि में यदि किसी अभ्यर्थी की कोई अन्य परीक्षा संयुक्त प्रवेश परीक्षा (पालीटेक्निक) - 2022 के समान दिवस को ही निर्धारित है तो ऐसी दशा में अभ्यर्थी परीक्षा तारीख परिवर्तन के लिए upjeew®wwexam@gmail.com पर उक्त परीक्षा का प्रवेश पत्र अटैच कर ईमेल भेज करके परीक्षा तारीख बदलने का अनुरोध कर सकेंगे। परिषद की ओर से अभ्यर्थी के आवेदन पर विचार कर परीक्षा तारीख बदल दी जाएगी व परीक्षा तारीख परिवर्तन की सूचना प्रेषक को उसी मेल आइडी पर भेजी जाएगी।

पॉलीटेक्निक : परिवर्तन की सूचना ई-मेल से, परीक्षा तिथि संशोधन का मिलेगा विकल्प 

लखनऊ : पॉलीटेक्निक में विभिन्न डिप्लोमा/ पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सों वर्ष 2022-23 की प्रवेश परीक्षा अब 27 से 30 जून के बीच होंगी। पहले यह छह से 10 जून के बीच होनी थी। यह जानकारी संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के प्रभारी सचिव राम रतन ने दी है।


प्रवेश-पत्र-हाल टिकट 20 जून से डाउनलोड किए जा सकेंगे। वहीं अभ्यर्थी उस दिन अन्य परीक्षा होने की स्थिति में अपनी परीक्षा तिथि भी संशोधित करवा सकेंगे।

मॉक टेस्ट के लिए लिंक पोर्टल पर दिया जाएगा: अभ्यर्थियों को कम्प्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया से परिचित कराने के लिए मॉक टेस्ट के लिए लिंक भी पोर्टल पर दिया जाएगा। प्रवेश-पत्र पर भी लिंक अंकित होगा। कम्प्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षाओं से संबंधित निर्देश के लिए वेबसाइट jeecup. admissions. nic. in पर जानकारी दी जाएगी।

परीक्षा तिथि संशोधन का मिलेगा विकल्प 

राम रतन ने बताया कि प्रवेश परीक्षा के समय अन्य परीक्षाएं होने की दशा में पहली बार परिषद परीक्षा तिथि बदलने का विकल्प उपलब्ध कराने जा रही है। परीक्षा अवधि में यदि किसी अभ्यर्थी की कोई अन्य परीक्षा संयुक्त प्रवेश परीक्षा (पालिटेक्निक)-2022 वाले दिन हो तो ऐसी दशा में अभ्यर्थी परीक्षा तिथि परिवर्तन के लिए ई मेल upjee2022 exam@ gmail. com कर उस परीक्षा का प्रवेश पत्र अटैच कर परीक्षा तिथि परिवर्तन का अनुरोध कर सकेंगे। परिषद द्वारा अभ्यर्थी के आवेदन पर विचार कर परीक्षा तिथि परिवर्तित कर दी जाएगी। इसकी सूचना ई मेल से ही दी जाएगी।

शिक्षक भर्ती : 6800 पदों पर भर्ती की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने किया निदेशालय का घेराव

शिक्षक भर्ती : 6800 पदों पर भर्ती की मांग को लेकर निदेशालय का घेराव

69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को निशातगंज स्तिथ बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव किया। चिलचिलाती धूप में शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने 6800 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।


69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को निशातगंज स्तिथ बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव किया। चिलचिलाती धूप में शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने 6800 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। अभ्यर्थियों ने करीब पांच से छह घंटे तक प्रदर्शन किया। महानिदेशक बेसिक शिक्षा से वार्ता के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डेन छोड़ा। सोमवार को अभ्यर्थियों ने परिवर्तन चौक पर भी जोरदार प्रदर्शन किया था।

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने सुबह से ही बेसिक शिक्षा निदेशालय पर 6800 पदों पर नियुक्ति पत्र दिए जाने को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस और अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया लेकिन कोई बात नहीं बनी। अभ्यर्थी मुख्यमंत्री जी से मुलाकात की बात पर अड़े रहे। बहुत मान मनौव्वल के बाद आखिर चार बजे महानिदेशक बेसिक शिक्षा से वार्ता को अभ्यर्थी राजी हुए। अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधि ने महानिदेशक से मुलाकात की।

अभ्यर्थियों का कहना था कि कोर्ट ने नियुक्ति पर कोई रोक नहीं लगाई है। इस दौरान अभ्यर्थियों ने सुपर न्यूमेरिक पोस्ट के माध्यम से विभाग में नए पद सृजित कर 6800 पदों पर नियुक्ति का एक रास्ता भी सुझाया। इसके बाद अभ्यर्थियों को पुलिस ने अपनी गाड़ियों से ईको गार्डेन छोड़ा।