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Thursday, July 11, 2024

डिजिटल अटेंडेंस : शिक्षकों का तीसरे दिन भी विरोध जारी, शिक्षकों के विरोध को जनप्रतिनिधियों का भी लगातार मिल रहा समर्थन

डिजिटल अटेंडेंस : शिक्षकों का तीसरे दिन भी विरोध जारी, शिक्षकों के विरोध को जनप्रतिनिधियों का भी लगातार मिल रहा समर्थन


लखनऊ। प्रदेश भर में डिजिटल अटेंडेंस को लेकर तीसरे दिन भी शिक्षकों का विरोध जारी रहा और उन्होंने उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। 

यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के नेतृत्व में सभी संगठनों के पदाधिकारी व शिक्षकों ने सभी ब्लॉकों में सीएम को ज्ञापन भेजा।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि संगठन 11-12 जुलाई को ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों से वार्ता कर उनका पक्ष जानेगा। इसके बाद 15 जुलाई को आगे का निर्णय लेगा। 

सभी शिक्षक संगठनों के संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 15 जुलाई को हर जिलों में स्कूल टाइम के बाद संयुक्त रूप से एकत्र होकर जिला मुख्यालय जाने और डीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया है। 29 जुलाई को लखनऊ में महानिदेशक कार्यालय के घेराव का भी एलान किया है।




लखनऊ। उधर विपक्ष से अखिलेश यादव, चंद्रशेखर के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने भी शिक्षकों का समर्थन किया है। प्रियंका ने फेसबुक पर लिखा प्रदेश के शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस का विरोध कर रहे हैं। उनके तर्क जायज हैं कि ज्यादातर स्कूल दूर ग्रामीण इलाकों में हैं। इनकी दिक्कतों का ध्यान नहीं रखा गया। 

उन्होंने पूछा कि क्या ऑनलाइन अटेंडेंस से ही स्कूली शिक्षा की समस्याएं खत्म हो जाएंगी? उन्होंने कहा कि शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी, पोलियो ड्यूटी, कोरोना ड्यूटी, कई तरह के सर्वे, रैली में भीड़ बढ़ाने, भूसा ढोने जैसे गैरशैक्षणिक कार्य में उलझाया जाता है। स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। शिक्षकों को हॉफ डे, पेड लीव व मेडिकल सुविधा नहीं है।  इन समस्याओं का समाधान निकाले बिना अव्यावहारिक आदेश जारी करना शिक्षकों को भावनात्मक व मानसिक चोट पहुंचाना है। 


वहीं आम आदमी पार्टी शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव अजय गुप्ता ने भी शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने के आदेश को तानाशाही बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस आदेश को तुरंत वापस ले।



अखिलेश के ट्वीट से भ्रमित हुए शिक्षक

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार देर रात एक्स पर लिखा कि आखिरकार शिक्षकों की एकजुटता के सामने भाजपा सरकार को डिजिटल अटेंडेंस का अपना अतार्किक निर्णय स्थगित करना ही पड़ा। भाजपा सरकार को अब समझ आ गया होगा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सबसे बड़ा आदेश होती है। न कि सत्ता की मनमर्जी। शिक्षकों को इस नैतिक विजय के लिए बधाई। हालांकि विभाग अपना आदेश वापस नहीं लिया है। इसे लेकर शिक्षकों के बीच में भ्रम की स्थिति रही

विशेष परिस्थिति में पांच साल की नौकरी पूरी होने से पहले भी ले सकते हैं स्टडी लीवः हाईकोर्ट

विशेष परिस्थिति में पांच साल की नौकरी पूरी होने से पहले भी ले सकते हैं स्टडी लीवः हाईकोर्ट

उच्च शिक्षा निदेशक का आदेश आदेश रद्द, कोर्ट ने कहा-एक माह के अंदर लें उचित फैसला

प्रयागराज। विशेष परिस्थिति में पांच साल की नौकरी पूरी होने से पहले भी - अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) लिया जा सकता है। हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा निदेशक प्रयागराज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उन्होंने याची को इस आधार पर अध्ययन अवकाश देने से इन्कार कर दिया था कि उसकी सेवा पांच साल पूरी नहीं हुई है।


कोर्ट ने एक माह में कानून के अनुसार उचित निर्णय लेने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने प्रिया मिश्रा की याचिका पर यह आदेश दिया। याची प्रिया ने सहायक प्रोफेसर (समाजशास्त्र) के पद पर राजकीय बालिका स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबारी, आजमगढ़ में 29 जून 2021 कार्यभार ग्रहण किया था।


याची का स्थानांतरण 31 जून  2022 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय बालिका डिग्री महाविद्यालय, सेवापुरी, वाराणसी में कर दिया गया। याची उक्त महाविद्यालय में कार्यरत हैं। इस दौरान याची ने नौ जून 2023 को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। कहा कि सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पीएचडी कर रही थीं।


उन्होंने नियमित शोध छात्रा के रूप में अपना पाठ्यक्रम और दो साल का कार्य पूरा कर लिया है। अपनी सेवाओं में शामिल होने से पहले याची ने शोध कार्य से दो साल की अवधि के लिए अस्थायी रूप से वापसी ली थी। यह अवधि 28 जून 2023 को समाप्त हो गई। याची ने 29 जून 2023 से 28 जून 2024 तक एक वर्ष की अवधि के लिए अध्ययन अवकाश देने को आवेदन किया था। 


निदेशक, उच्च शिक्षा, यूपी, प्रयागराज ने चार अप्रैल 2023 के आदेश से आवेदन खारिज कर दिया। कहा गया कि वित्तीय पुस्तिका खंड दो के नियम 146 (ए) के प्रावधानों के अनुसार, अध्ययन अवकाश केवल उस सरकारी कर्मचारी को दिया जा सकता है, जिसकी सेवा कम से कम पांच साल पूरी हो चुकी हो। याची की सेवा पांच साल पूरी नहीं हुई। 


इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश फंडामेंटल रूल्स के नियम 84 के तहत राज्यपाल की ओर से यह प्रावधान है कि 'पांच वर्ष से कम सेवा वाले सरकारी कर्मचारियों को सामान्यतः अध्ययन अवकाश प्रदान नहीं किया जाना चाहिए।' दलील दी कि 'सामान्यतः' शब्द का प्रयोग यह दर्शाता है कि विशेष परिस्थितियों में पांच वर्ष की सेवा पूरी करने की आवश्यकता में छूट दी जा सकती है।

बेसिक शिक्षकों के विरोध के बीच डिजिटल अटेंडेंस को लेकर सख्ती शुरू, बाराबंकी-उन्नाव में सभी शिक्षकों के वेतन रोकने का निर्देश

बेसिक शिक्षकों के विरोध के बीच डिजिटल अटेंडेंस को लेकर सख्ती शुरू, बाराबंकी-उन्नाव में सभी शिक्षकों के वेतन रोकने का निर्देश


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों के विरोध के बीच जिलों में सख्ती शुरू हो गई है। बाराबंकी व उन्नाव में तीन दिन उपस्थिति दर्ज नहीं कराने वाले शिक्षकों का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है।

वहीं दूसरी तरफ तीसरे दिन भी शिक्षकों का पूरे प्रदेश में विरोध जारी रहा और उन्होंने डिजिटल अटेंडेंस दर्ज नहीं कराई। बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने यह भी कहा है कि 11 जुलाई से डिजिटल अटेंडेंस न दर्ज कराने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

उन्नाव की बीएसए ने भी पहले ही निर्देश दिए था कि शिक्षकों-कर्मचारियों का डिजिटल उपस्थिति दर्ज न कराना विभागीय आदेश की अवहेलना है। उन्होंने ऐसे शिक्षकों-कर्मचारियों का वेतन- मानदेय अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है।


Wednesday, July 10, 2024

अब 11 महीने के लिए ही रखे जाएंगे तदर्थ शिक्षक, नए सत्र में फिर से होगा नवीनीकरण, शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

अब 11 महीने के लिए ही रखे जाएंगे तदर्थ शिक्षक, नए सत्र में फिर से होगा नवीनीकरण, शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश


निश्चित मानदेय पर काम करने के लिए शिक्षकों को देना होगा शपथपत्र

अधिकतम 62 साल तक की उम्र तक मानदेय पर काम कर सकेंगे

कैबिनेट की मुहर के बाद शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश


लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के तदर्थ शिक्षकों को मानदेय पर काम करने के लिए एक शपथपत्र देना होगा कि वे निश्चित मानदेय पर कार्य करेंगे। उन्हें 11 महीने के लिए ही रखा जाएगा। नए सत्र में फिर से उनका नवीनीकरण होगा। वे अधिकतम 62 साल तक की उम्र तक मानदेय पर काम कर सकेंगे। पिछले दिनों कैबिनेट से इसका प्रस्ताव पास होने के बाद शासन ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में समिति बनेगी। इसमें तीन अन्य सदस्य होंगे। जिन तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं 09 नवंबर 2023 को समाप्त हुई हैं, वही मानदेय शिक्षक के लिए पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता पर उन्हें पूर्व में तैनात रहे विद्यालयों में ही रखा जाएगा। अपर शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता वाली समिति जरूरत के अनुसार जिले या मंडल में तैनात कर सकती है। मानदेय अधिकतम 11 महीने के लिए दिया जाएगा। अगले सत्र के लिए फिर से सहमति व प्रार्थना पत्र देने के बाद आगे काम

माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता के अनुसार 09 नवंबर 2023 को हटाए गए 2254 तदर्थ शिक्षकों को मानदेय शिक्षक के रूप में तैनाती के लिए लिया जाएगा। सत्र शुरू होने के 15 दिन पहले ही नवीनीकरण के लिए सहमति व प्रार्थना पत्र दिया जाएगा। यह शिक्षक सृजित या नियमित पद के सापेक्ष नहीं नियुक्त होंगे, बल्कि अतिरिक्त होंगे।



ये हैं दिशा-निर्देश

■हाईस्कूल स्तर पर 25 हजार, इंटर स्तर पर 30 हजार रुपये मानदेय मिलेगा।

■ मानदेय भुगतान प्रबंधतंत्र समय- समय पर जारी निर्देश पर करेगा।

■12 दिन का आकस्मिक व 17 दिन का चिकित्सीय अवकाश मिलेगा।

■ निर्धारित अवकाश के अतिरिक्त काम न करने पर मानदेय कटेगा। 

■ आकस्मिक मृत्यु पर मृतक आश्रित को कोई सेवा लाभ नहीं मिलेगा। 

■ मानदेय भुगतान के आधार पर स्थायी नियुक्ति या नियमितीकरण नहीं होगा।


दूसरे दिन सूबे में एक भी शिक्षक ने नहीं लगाई ऑनलाइन हाजिरी, आदेश वापस लिये जाने की अफवाहों को शासन ने नकारा

दूसरे दिन सूबे में एक भी शिक्षक ने नहीं लगाई ऑनलाइन हाजिरी, आदेश वापस लिये जाने की अफवाहों को शासन ने नकारा

शिक्षक के देर से आने का असर कक्षाओं पर

लखनऊ। शिक्षकों के विरोध के बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने डिजिटल उपस्थिति के आदेश वापसी को अफवाह बताते हुए इसको बच्चों के हित के लिए बेहतर बताया है। बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एमकेएस सुंदरम ने कहा कि स्कूली बच्चे सभी हितधारको में सबसे महत्वपूर्ण हैं। यदि कोई शिक्षक एक या दो घंटे देरी से स्कूल आता है, तो कक्षा के दो पीरियड बर्बाद हो जाते हैं। इसलिए शिक्षक उपस्थिति को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस नेक प्रयास में कुछ असुविधाएं हो सकती हैं। हमें अपने स्कूली बच्चों की बेहतरी के लिए उन असुविधाओं को सहन करने की जरूरत है। ब्यूरो

10 जुलाई 2024
लखनऊ । प्राइमरी शिक्षकों ने सरकार की अपील को पूरी तरह से नकार दिया और मंगलवार को पूरे प्रदेश में एक भी शिक्षक ने ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाई। साथ ही दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य निपटाया। इस बीच लगातार दूसरे दिन भी कई जिलों में प्राइमरी शिक्षकों ने स्कूल समय के बाद धरना-प्रदर्शन कर आनलाइइन हाजिरी के आदेश को रद्द करने की मांग की। 


दूसरी ओर इसे लेकर राजनीति गर्मा गई है। विपक्षी नेताओं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव समेत कई नेताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिक्षकों की मांग पर विचार करने की मांग की है।


विपक्षी नेताओं और दलों ने शिक्षकों को दिया समर्थनः सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि शिक्षकों पर विश्वास करने से अच्छी पीढ़ी जन्म लेती है। वे इस मुद्दे पर शिक्षकों के साथ हैं। सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने लिखा कि सरकार अध्यापकों की उपस्थिति ऑनलाइन कराने पर आमादा है जबकि सरकार अध्यापकों की वर्ष में 30 ईएल, और हाफ सीएल देने की मांग नहीं मान रही। वहीं धौरहरा के सपा सांसद आनंद भदौरिया ने लिखा कि शिक्षक राष्ट्र निर्मता है। उसे इस तरह के फैसलों से आहत न करें। नगीना के सांसद चन्द्रशेखर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि 12 रजिस्टर डिजिटल बनाना पूर्णतया अनुचित और अव्यवहारिक प्रतीत होता है।


सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी लिखा मुख्यमंत्री को पत्रः भाजपा के एमएलसी अवधेश कुमार सिंह 'मंजू सिंह' ने मुख्मंत्री को पत्र लिख कर कहा है कि इस नई व्यवस्था में विसंगतियां बताई गई है। शिक्षकों की समस्याओं का समाधान पर भी विचार होना चाहिए।


स्कूली बच्चों की बेहतरी के लिए आनलाइन हाजिरी जरूरीः सुंदरम

ऑनलाइन हाजिरी के आदेश वापस लिये जाने की अफवहों को नकारते हुए देर शाम सरकार की ओर से भी बयान जारी किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमके शनमुगा सुंदरम् ने कहा है कि शिक्षकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि वे अगली पीढ़ी को पढ़ा रहे हैं और उसका विकास कर रहे हैं। इस नेक प्रयास में कुछ असुविधाएं हो सकती हैं। हमें बच्चों की बेहतरी के लिए असुविधाओं को सहन करने की जरूरत है।




छह लाख शिक्षकों में से 16 हजार ने ही लगाई आनलाइन हाजिरी

उपस्थिति में आधा घंटा समय बढ़ाने के बावजूद किया बहिष्कार

08 जुलाई 2024
परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में सोमवार से शिक्षकों के लिए शुरू की नई आनलाइन उपस्थिति को व्यवस्था बहिष्कार के कारण पहले ही दिन चौपट रही। कुल 1,32.469 कियाालयों में पढ़ा को 6,09,282 शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों में से 16.015 बानी मात्र 2.6 प्रतिशत ने आनलाइन हाजिरी दर्ज कराई।


 14 जिले में एक भी शिक्षक ने आनलाइन उपस्थिति नहीं दर्ज कराई। भटेही में सर्वाधिक 14 प्रतिशत बानी 5,730 में से 1,058 शिक्षकों ने व्यवस्था का पालन किया। उपस्थिति के लिए आधा घंटे और मोहलत दिए जाने के बावजूद भी शिक्षकों ने काली प‌ट्टी बांधकर इसका विरोध किया। विभान को उम्मीद है कि आगे 15 दिनों में व्यवस्था पटरी पर आएगी। 


प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा एमकेएना सुंदरम का कहना है कि शिक्षकों को सुबह आठ बजे को बजाए 8:30 बजे तक आनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की छूट दी गई है। ऐसे में उम्मीद है कि शिक्षक इस व्यवस्था का पालन करेंगे। देश के कई राज्यों में आनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए यह जरूरी है।


 शिक्षकों ने अपनी समस्याएं भी गिनाई 
बड़ी संख्ना में विद्यालयों की मैपिंग ठीक न होने के कारण स्कूल में
उपस्थित होने के बावजूद भी उनकी अनलाइन लोकेशन कई किलोमीटर दूर दिखाई जा रही ज्वरण कई जिलों में जल जमव के है। बरसात के ज्वरण दिक्कत हो की है। या बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि शिक्षक लगातार अर्द्ध अवकाश, तीन दिन लगातार देर होने पर आकस्मिक अवकाश और अर्जित अवकाश देने की मांग कर रहे हैं. लेकिन अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे। ऐसे में शिक्षक काली प‌ट्टी बांधकर विरोध जारी रखेंगे।


 प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शमां ने कहा कि शीतकालीन अवकाश चाले न दिया जाए लेकिन अर्जित अवकाश व द्वितीय शनिवार का अवकाश कर्मचारियों की तरह ही दिया जाए। शिक्षक अगर बेोड़ी थी देर से विद्यालय पहुंचेगा तो उसका पूरे दिन का वेतन कट जाएगा, यह गलत व्यवस्था है। अर्द्ध अवकाश की सुविधा मिलनी चाहिए। जिन 14 जिलों में एक भी शिक्षकों ने अनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर्ता उनमें बाराबंकी, संभल, सहारनपुर, गोरखपुर उन्नाव बदा गोंडा, बाराइच, महराजगंज, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर व संत कबीर नगर शामिल है।


प्रशासनिक कौशल में दक्ष होंगे शिक्षाधिकारी, सीमैट में दिया जा रहा है 10 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

प्रशासनिक कौशल में दक्ष होंगे शिक्षाधिकारी, सीमैट में दिया जा रहा है 10 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू


प्रयागराज। प्रांतीय शिक्षा सेवा संवर्ग (पीईएस) के अधिकारियों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार से राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमैट) में शुरू हो गया है। प्रशिक्षण के दौरान उनको प्रशासनिक कौशल के साथ ही अकादमिक और वित्तीय मामलों में दक्ष बनाया जाएगा। इसमें प्रदेशभर के 40 बीएसए, एडीआईओएस, वरिष्ठ प्रवक्ता, उप सचिव, जीआईसी प्रिंसिपल शामिल हुए हैं।


 सीमैट निदेशक संजय यादव ने कहा कि शैक्षिक अधिकारी के रूप में आप सभी को बेसिक, माध्यमिक, साक्षरता व एससीईआरटी के क्रियाकलापों के क्रियान्वयन में भूमिका निभानी है। कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्था का विकास एवं उन्नयन उसके प्रधान के नेतृत्व, प्रशासकीय कौशल व प्रबंधकीय कुशलता पर निर्भर करता है।


प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन ही आपको सफल बनाता है। यह प्रशिक्षण आपको कुशल शैक्षिक नेतृत्वकर्ता, प्रशासक व शिक्षाविद् के रूप में विकसित करने के साथ-साथ वित्तीय व विधिक पहलुओं में भी दक्ष होने में सहायता देगा।



डिजिटल हाज़िरी : बेसिक शिक्षकों ने दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर किया काम, अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेता और एमएलसी समर्थन में उतरे

डिजिटल हाज़िरी : बेसिक शिक्षकों ने दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर किया काम, अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेता और एमएलसी समर्थन में उतरे


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल अटेंडेंस को लेकर मंगलवार को दूसरे दिन भी शिक्षकों का विरोध जारी रहा। शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर कक्षाएं लीं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, सपा के प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव, सांसद चंद्रशेखर समेत कई पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने शिक्षकों का समर्थन किया। इन लोगों ने शिक्षकों के पक्ष में एक्स पर लिखा और सीएम को पत्र भेजा है।


कई जिलों में बैठक कर संयुक्त शिक्षक मोर्चा भी बनाया गया। ताकि सभी संगठन एक मंच पर आकर सामूहिक विरोध कर सकें। बरेली में प्राथमिक शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा), महिला शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ ने सामूहिक रूप से संयुक्त मोर्चा बनाकर रणनीति तैयार की। तय किया कि बुधवार को जिले के सभी ब्लॉकों में उप मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।


विरोध में शिक्षकों ने डिजिटल अटेंडेंस दर्ज नहीं कराई और एक्स पर बायकाट ऑनलाइन हाजिरी का अभियान चलाया। शिक्षकों ने 15 सीएल, 30 ईएल, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, कैशलेस चिकित्सा सुविधा परिवार सहित, प्रमोशन देने की मांग की। दूसरे दिन भी काफी कम संख्या में शिक्षकों ने डिजिटल उपस्थिति दर्ज कराई। दूसरी तरफ देर शाम डिजिटल अटेंडेंस को स्थगित करने की सूचना सोशल मीडिया पर वायरल हुई। हालांकि शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में कोई बदलाव नहीं किया गया है।



पहले विभागों के प्रशासनिक मुख्यालयों में लागू हो डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था : अखिलेश

भाजपा के एमएलसी ने भी सीएम को लिखा पत्र

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि कोई शिक्षक देर से स्कूल नहीं पहुंचना चाहता है, लेकिन कहीं सार्वजनिक परिवहन, रेल का बंद फाटक और कहीं घर से स्कूल के बीच की दूरी काफी होने से देरी होती है। क्योंकि स्कूल के समीप शिक्षकों के रहने के लिए न तो सरकारी आवास होते हैं, न दूरस्थ इलाकों में किराए पर घर उपलब्ध होते हैं। इसीलिए डिजिटल अटेंडेंस का विकल्प बिना व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के संभव नहीं है। 

पहले यह अन्य सभी विभागों के प्रशासनिक मुख्यालयों में लागू किया जाए। इससे उच्च अधिकारियों को इसके व्यावहारिक पक्ष और परेशानियों का अनुभव होगा। गोंडा में मंगलवार को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भी शिक्षकों ने ज्ञापन दिया। नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने सीएम को पत्र भेजकर ऑनलाइन उपस्थिति का आदेश निरस्त करने की मांग की। सपा सांसद आनंद भदौरिया, एमएलसी आशुतोष सिन्हा, भाजपा एमएलसी डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह व डॉ. बाबूलाल तिवारी, अवधेश कुमार सिंह ने भी इस मामले में सीएम को पत्र लिखा है।



Tuesday, July 9, 2024

वेतन भुगतान मामले में आदेश के 14 साल बाद भी विभाग दाखिल नहीं कर सका जवाब, हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक समेत कई अफसरों के खिलाफ जारी किया वारंट

वेतन भुगतान मामले में आदेश के 14 साल बाद भी विभाग दाखिल नहीं कर सका जवाब, हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक समेत कई अफसरों के खिलाफ जारी किया वारंट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर इंटर कॉलेज नेवरिया के एक अध्यापक के वेतन भुगतान के मामले में आदेश के बावजूद 14 साल तक जवाब न दाखिल करने पर प्रयागराज के माध्यमिक शिक्षा निदेशक, वाराणसी के संयुक्त शिक्षा निदेशक, जौनपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक, वित्त अधिकारी और कॉलेज के प्रबंध समिति के मैनेजर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने अध्यापक
बजरंगबली दुबे की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट में इन सभी को पांच जुलाई तक रिकॉर्ड समेत अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। लेकिन, न जवाब दाखिल हुआ न अधिकारी पेश हुए। इससे नाराज कोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।


याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि वर्ष 2010 ने दाखिल याचिका पर जवाब तलब किया गया था। लेकिन, करीब 14 साल बाद भी जवाब दाखिल नही हो सका। इस पर कोर्ट ने इन्हें पांच जुलाई को तलब किया था। मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी। 

फीस और मूल प्रमाणपत्र नहीं लौटाने वाले कॉलेजों की अब मान्यता होगी निरस्त, यूजीसी ने फीस वापसी नीति पर सख्त कार्रवाई का मन बनाया

फीस और मूल प्रमाणपत्र नहीं लौटाने वाले कॉलेजों की अब मान्यता होगी निरस्त, यूजीसी ने फीस वापसी नीति पर सख्त कार्रवाई का मन बनाया 


 रुक जाएगा अनुदान


नई दिल्ली। छात्रों की फीस न लौटाने पर अब कॉलेजों की मान्यता सीधे रद्द होगी। कॉलेजों को प्राथमिकता के आधार पर फीस और मूल प्रमाणपत्र वापस करने होंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों व अभिभावकों की शिकायतों पर पहली बार फीस वापसी नीति, 2024 में सख्त कार्रवाई की रूपरेखा बनाई है।


ऐसी शिकायत मिलने पर विवि और कॉलेजों की मान्यता रद्द करने, अनुदान रोकने, ऑनलाइन व दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रमों की मंजूरी समाप्त करने के साथ डिफॉल्टर सूची में डाल दिया जाएगा। ऐसे संस्थानों के नाम अखबारों के साथ आयोग की वेबसाइट पर पहली बार सार्वजनिक किए जाएंगे। 


अब तक ऐसे संस्थानों के खिलाफ सिर्फ जुर्माना लगाया जाता है। यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष जोशी ने सभी विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों को पत्र लिखकर कहा है कि ऐसे संस्थानों के खिलाफ आयोग सख्त कार्रवाई करेगा। 


इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों पर भी लागू होंगे नियम

नए नियम इंजीनियरिंग, मेडिकल, फॉर्मेसी, आर्किटेक्चर समेत सभी विश्वविद्यालय व कॉलेजों पर लागू होंगे। कोई छात्र दाखिले के बाद सीट छोड़ता है, तो नियमों के तहत फीस में से कुछ राशि काटकर बाकी लौटाना अनिवार्य है। 


ये हैं नियम : दाखिले की अंतिम तिथि से 15 दिन पहले तक सीट छोड़ने पर 100%, इसके बाद 90% फीस वापस होगी। अंतिम तिथि के 15 दिन बाद तक 80 फीसदी और 15-30 दिन में 50% वापस होगी।

डिजिटल हाजिरी के विरोध में बेसिक शिक्षक लामबंद, पहले दिन ही परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था हुई धड़ाम

स्कूल में शिक्षकों ने विरोध स्वरूप हाथ पर काली पट्टी बांधकर किया शिक्षण कार्य

ऑनलाइन उपस्थिति के आदेश पर भारी पड़ा शिक्षकों का विरोध


डीजी स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से जारी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश पर पहले दिन बेल्हा के शिक्षकों का विरोध भारी पड़ा। परिषदीय और कस्तूरबा स्कूल के शिक्षक, शिक्षिकाओं ने सोमवार को ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के विरोध में हाथ पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। ऐलान किया कि हमारी मांगे पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा।



डिजिटल हाजिरी के विरोध में बेसिक शिक्षक लामबंद, पहले दिन ही परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था हुई धड़ाम


लखनऊ । शिक्षकों के भारी विरोध के कारण पहले दिन ही परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था धड़ाम हो गई। पूरे प्रदेश में कुल 6,09,282 परिषदीय प्राइमरी शिक्षकों में सिर्फ 16,015 शिक्षकों ने ही ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की, बाकी ने इसका बहिष्कार किया। तमाम शिक्षक संगठन ऑनलाइन हाजिरी के विरोध में लामबंद हो गए हैं।


शिक्षक संगठनों के आह्वान पर शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया और आनलाइन उपस्थिति से उन्हें मुक्त रखे जाने की मांग दोहराई है। दूसरी तरफ सरकार ने आशा जताई है कि समय की पाबंदी के मामले में शिक्षक जिम्मेदारी मानेंगे और अगले एक सप्ताह या एक पखवाड़े के भीतर सुधार होगा। 


दरअसल, प्राइमरी शिक्षकों के लिए आठ जुलाई से ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य की गई थी। इस निर्णय के खिलाफ प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों ने आदेश लागू होने के एक दिन पूर्व से ही मोर्चा खोल दिया था।


हाजिरी के लिए दिया गया अतिरिक्ति समय

विरोध को देखते हुए डीजी स्कूल शिक्षा की ओर से सुबह के समय ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए आधे घंटे का अतिरिक्ति समय भी दिया गया लेकिन शिक्षकों का विरोध जारी रहा।

Monday, July 8, 2024

ऑनलाइन हाजिरी के खिलाफ सोशल मीडिया में बेसिक शिक्षकों का फूटा आक्रोश, X पर चलाया विरोध अभियान

UP teachers' digital protest against online attendance


LUCKNOW: Thousands of teachers of UP government's primary and upper primary schools launched an online attack on the Basic Shiksha Parishad move to make teachers' attendance digi- tal. A large number of govern- ment school teachers started a trend on X (formerly twitter) and for several hours it remained a top trend against introduction of online attendance from July 8. #boycottonlineattendance was trending on X all through out the day.

More than 462,000 tweets created panic among top offi- cials of the department who tried to reach out to teachers dig- itally by sending out tweets explaining that the interest of the teachers would not be com- promised.

"We are aware of your prob lems, you can mark your attend- ance after 30 minutes. Orders have been given for digital sig- natures of council schools. But now there is an opportunity to mark attendance 30 minutes after the scheduled time. Instructions have been given to basic education officers and block education officers. Yes, it is definitely necessary to men- tion the reason for reaching school late," reads a post of the basic education department to pacify angry teachers. The gov- ernment school teachers are up in arms against the order of the State Project Office that makes it mandatory to mark their attendance digitally (online) with location in school 15 min utes prior to the start of regular classes.

Teachers of council schools will have to mark their attend ance from July 8, according to basic education department order, reads an order of state project director Kanchan Verma The teachers are opposing it on social media as they feel that it will harm them in more ways than one. 

They claimed that as per rules they were required to reach their schools by 7:30 am and mark their attendance between 7:45 am to 8 am before the start of their classes.

They alleged that in remote villages internet connectivity was not good and it took time to mark attendance online.

Many schools were located in remote areas and remained surrounded with water in rainy season. So if a teacher reached late, he/she would be marked absent and leave would be deducted. However, understand- ing the problems of teachers and employees, the department has given the facility of marking attendance 30 minutes later than the scheduled time.

Regarding the digitization of council schools run by Uttar Pra- desh Basic Education Council, on June 18, information was given about the module devel- oped under the name 'Digital Registers' on the Prerna portal and guidelines were given regarding 12 digital registers to be used at the school level.

The teachers are expected to give their realtime attendance with location. School are func- tional between 8 am to 2 pm, but the state government wants teachers to upload their attend- ance between 7.45 to 8 am.

Teachers say often there are internet problem in remote areas and real time uploading may not be possible at the accu- rate time.



ऑनलाइन हाजिरी के खिलाफ सोशल मीडिया में बेसिक शिक्षकों का फूटा आक्रोश, X पर चलाया विरोध अभियान


■ सुबह हाजिरी लगाने आधे घंटे का अतिरिक्त समय दिया गया
■ विभिन्न संगठन अलग अलग तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे


सोशल मीडिया पर चलाया अभियान

बेसिक शिक्षकों ने रविवार को कि 'एक्स' पर #boycott ऑनलाइनहाजिरी अभियान चलाया। इसमें शिक्षकों ने मांग की उन्हें 15 सीएल, 30 ईएल व 15 हाफ सीएल दिया जाए। इसके बाद ही शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी को स्वीकार करेंगे। सभी शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक 20 जुलाई तक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करते हुए अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद भी शासन की आंख नहीं खुलती हैं तो कार्य बहिष्कार का फैसला लिया जा सकता है।


लखनऊ । परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सोमवार से ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के जरिए भी शिक्षक अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस बीच डीजी स्कूल शिक्षा ने ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए आधे घंटे का अतिरिक्ति समय दे दिया है।


डीजी स्कूल शिक्षा ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि आठ जुलाई से शिक्षकों के विद्यालय आने का समय डिजिटल उपस्थिति पंजिका में सुबह 7:45 बजे से आठ बजे तक दर्ज किए जाने के निर्देश दिए गए थे। अग्रिम आदेश तक 30 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है। इस तरह शिक्षक अब सुबह 8:30 बजे तक (कारण सहित उल्लिखित करते हुए) अपनी उपस्थित दर्ज करा सकेंगे। यह सूचना सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भी भेजी गई है।


उधर, विभिन्न संगठनों ने अलग-अलग तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सोमवार से प्रदेश के सभी जिलों में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपेगा। 


प्राथमिक शिक्षक संघ संबद्ध अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने आठ जुलाई को विद्यालयों में काली पट्टी बांधकर विरोध करने की घोषणा की है। इसके बाद नौ जुलाई को सभी जिलों में बीएसए को ज्ञापन सौंपेंगे। 


शिक्षकों का कहना है कि अभी बारिश का मौसम चल रहा है। रास्ते कट जाते हैं। ऐसे में यदि शिक्षक फंस जाता है और एक मिनट भी देरी से पहुंचता है तो वह अनुपस्थित माना जाएगा। ऐसे ही जाड़े के दिनों में घना कोहरा होने पर स्कूलों में पहुंचने में थोड़ी देरी हो सकती है।

यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि संगठन ऑनलाइन उपस्थिति के विरोध में हाईकोर्ट की शरण में जा रहा है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि यह आदेश न्यायसंगत नहीं है।



डिजिटल अटेंडेंस पर बेसिक शिक्षकों का विरोध तेज, टैबलेट पर चेहरा दिखाकर उपस्थिति लगाने की व्यवस्था का व्यापक स्तर पर विरोध शुरू


काली पट्टी बांध करेंगे काम, परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक संगठनों ने बैठक कर जताई नाराजगी

कहा, निर्णय वापस नहीं लिया तो तेज करेंगे आंदोलन

15 जुलाई को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में सोमवार से शिक्षकों, कर्मचारियों की डिजिटल अटेंडेंस (टैबलेट पर चेहरा दिखाकर उपस्थिति) लगाने की व्यवस्था का व्यापक स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। रविवार को विभिन्न शिक्षक संगठनों ने बैठक कर इस पर नाराजगी जताई। साथ ही सोमवार से काली पट्टी बांधकर काम करने और 15 जुलाई को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।


विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में डिजिटल अटेंडेंस को काले कानून की संज्ञा दी गई। प्रदेश व जिला पदाधिकारियों की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि सभी ने एक स्वर से इस व्यवस्था का विरोध किया है। हम जिला स्तर पर प्रदर्शन कर सीएम को ज्ञापन भेजेंगे। साथ ही मांग करेंगे कि पहले शिक्षकों की ईएल, सीएल, हाफ डे जैसी मांग पूरी की जाए। बरसात की दिक्कत को देखते हुए फिलहाल डिजिटल अटेंडेंस स्थगित की जाए।

वहीं, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ की प्रांतीय कोर कमेटी की बैठक लखनऊ संघ कार्यालय पर हुई। प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षकों, शिक्षा मित्रों व अनुदेशकों के मांगों का बिना समाधान किए, शिक्षक संगठनों से समन्वय के बिना एकतरफा काला कानून को थोपने पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि शासन की आंख नही खुलती हैं तो कार्य बहिष्कार का ऐलान किया जायेगा। विभाग पहले लंबित मुद्दों पर निर्णय ले, उसके बाद डिजिटल अटेंडेंस लागू करे।


उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की पीडब्ल्यूडी सभागार में हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्य ने डिजिटल अटेंडेंस को स्थगित करने की मांग की। बेसिक शिक्षा मंत्री को भेजे ज्ञापन में संगठन ने शिक्षकों को ईएल, सीएल, हाफ डे, प्रतिकर अवकाश देने की मांग की। साथ ही 15, 20 मिनट देर होने पर किसी तरह की कार्रवाई न करने की मांग की है। 


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित कार्यालय में हुई जिला व प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में 11, 12 जुलाई को ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों से बैठक कर उनका मत जानने और उसके बाद आगे के आंदोलन की घोषणा करने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने इस निर्णय के पूर्ण बहिष्कार की घोषणा की है। इस मामले में सोमवार को डीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन देने का निर्णय लिया है।



एक्स पर बायकाट ऑनलाइन अटेंडेंस कराया ट्रेंड

शिक्षकों ने डिजिटल अटेंडेंस के खिलाफ रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अभियान चलाया। दोपहर तक लगभग साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षकों ने इसे शेयर किया। इसके माध्यम से उन्होंने इस व्यवस्था को स्थगित करने की मांग की। हालांकि विभाग अभी पीछे हटने को तैयार नहीं है।


आज से परिषदीय स्कूलों में दर्ज होगी ऑनलाइन उपस्थिति, 
विभाग ने 30 मिनट की दी राहत, 8.30 बजे तक लगेगी हाजिरी

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की मांग और दिक्कत को देखते हुए शिक्षकों, कर्मचारियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के निर्धारित समय सुबह 7:45 से 08 बजे तक में राहत दी है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से संबंधित अधिकारियों को सूचित किया है कि डिजिटल उपस्थिति पंजिका पर शिक्षक उपस्थिति अंकित करने के लिए 30 मिनट का अतिरिक्त समय यानी 8:30 बजे तक (कारण सहित उल्लिखित करते हुए) का समय दिया गया है। हालांकि शिक्षक इससे संतुष्ट नहीं है। 

Sunday, July 7, 2024

यूपी सरकार का अनुदानित मदरसों के छात्र छात्राओं को अब प्रमुख शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाने का इरादा, सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल

यूपी सरकार का अनुदानित मदरसों के छात्र छात्राओं को अब प्रमुख शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाने का इरादा, सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल

यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन, मदरसा शिक्षक व प्रबंधक इस पहल से नाखुश


लखनऊ । यूपी सरकार का अनुदानित मदरसों के छात्र छात्राओं को अब प्रमुख शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाने का इरादा है। यूपी सरकार ने इसी मंशा के साथ सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है। पर यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन, मदरसा शिक्षक व प्रबंधक इस पहल से नाखुश हैं।


इस बाबत हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के इस 22 मार्च को दिये गये आदेश और हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में 4 अप्रैल को जारी शासनादेश के खिलाफ दायर की गयी पांच याचिकाओं की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट 16 जुलाई को होनी है। 


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डा.इफ्तेखार अहमद जावेद का कहना है कि मदरसों को बंद करके उनमें पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को मुख्यधारा के स्कूलों में दाखिल करना उचित नहीं है। हां, अगर प्रदेश में जिस एक्ट से मदरसे संचालित होते हैं उस एक्ट में कुछ जरूरी बदलाव किये जा सकते हैं। 


उधर, मदरसों के शिक्षकों के संगठन आल इण्डिया टीचर्स एसोसिएशन मदारसि-ए-अरबिया के महासचिव वहीदुल्लाह खान सईदी का कहना है कि मदरसों में सिर्फ धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी जाती बल्कि प्राच्य भाषाओं के संरक्षण व पठन-पाठन के लिए संचालित होते हैं।

सरकारी टैबलेट की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, अफसरों के फरमान पर बेसिक शिक्षकों में गुस्से का माहौल

सरकारी टैबलेट की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, अफसरों के फरमान पर बेसिक शिक्षकों में गुस्से का माहौल


परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों को विभाग की ओर से टैबलेट मुहैया कराए गए हैं ताकि उनके आने-जाने के समय पर राज्य स्तर तक निगरानी रखी जा सके। इस महीने से ऑनलाइन सेल्फी के साथ उपस्थिति प्रक्रिया लागू कर दी गई।


सूबे के ज्यादातर स्कूलों में हालांकि अभी यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जिन स्कूलों में शुरू हुई है वहां से टैबलेट हैंग होने और ऑन  न होने की बहुत शिकायतें सामने आ रही हैं। इसको लेकर शिक्षकों में रोष का माहौल है। उन्होंने विभाग पर परेशान करने का आरोप लगाया है।

शिक्षकों का कहना है कि विभाग की ओर से दिया गया टैबलेट बहुत ही घटिया गुणवत्ता का एवं 4 जी पर आधारित है। सेल्फी के लिए 2 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा, 3 जीबी रैम और 32 जीबी रोम दी गई है। इसमें जरूरी एप के अलावा ऑनलाइन कार्यों के लिए विभाग की ओर से 24 से भी अधिक एप डाउनलोड कराए गए हैं। 


शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामी के चलते उपस्थिति के लिए प्रेरणा पोर्टल ज्यादातर खुलता ही नहीं। यदि खुलता भी है तो फोटो अपलोड  करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों से इस समस्या के बारे में बताने पर वे शिक्षकों पर अपने मोबाइल से फोटो अपलोड करने का दबाव बना रहे हैं।

Saturday, July 6, 2024

CTET July 2024 के Admit Card हुए जारी, डाउनलोड करें डायरेक्ट लिंक से

CTET July 2024 के Admit Card हुए जारी, डाउनलोड करें डायरेक्ट लिंक से


CBSE CTET Admit Card 2024: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने जुलाई सत्र की परीक्षा के लिए केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) 2024 के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। जिन उम्मीदवारों ने सफलतापूर्वक पंजीकरण किया था, वे आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in. से सीटीईटी एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। सीटीईटी जुलाई 2024 का आयोजन 7 जुलाई को किया जाएगा।

🔴 एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।




CTET जुलाई 2024 एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए आवेदकों को अपने लॉगिन क्रेडेंशियल जैसे कि आवेदन संख्या की आवश्यकता होगी। एडमिट कार्ड में परीक्षा स्थल का पता होगा जहां उम्मीदवार को उपस्थित होना है। इसके अलावा नाम, परीक्षा तिथि, परीक्षा समय, पेपर विवरण और परीक्षा-दिन के दिशा-निर्देश भी होंगे। उम्मीदवारों को परीक्षा के दिन परीक्षा केंद्र पर वैध सरकारी-अनुमोदित आईडी प्रूफ के साथ सीटेट हॉल टिकट 2024 ले जाना आवश्यक है।

🔴 एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।


🔵 ऑफिसियल साइट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें।



मूल समस्याओं को नजरअंदाज कर डिजिटाइजेशन पर जोर से शिक्षक नाराज

मूल समस्याओं को नजरअंदाज कर डिजिटाइजेशन पर जोर से शिक्षक नाराज


लखनऊ। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल 14 जून को डिजिटाइजेशन की समस्या व अन्य मुद्दों पर मुख्यमंत्री से मिला था। एसोसिएशन का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस पर विभाग से जानकारी मांगी गई लेकिन अधिकारी उचित जवाब नहीं दे पाए हैं।

 दूसरी तरफ परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल अटेंडेंस पर जोर लगाए हुए हैं। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि हमने सीएम से शिक्षकों की मूल समस्याओं को हल करने के बाद डिजिटाइजेशन प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। 



डिजिटल हाज़िरी दर्ज करने को लेकर बेसिक शिक्षकों ने रखी शर्त, विरोध जारी

 लखनऊ परिषदीय स्कूलों में 15 जुलाई से टैबलेट पर चेहरा दिखाकर शिक्षकों व छात्रों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी। यानी फेस रिक्ाग्निशन सिस्टम के माध्यम से हाजिरी लगाई जाएगी। स्कूलों को इसके लिए टैबलेट दिए गए हैं और सिम खरीदने व इंटरनेट की सुविधा के लिए धन भी दिया जा चुका है। ऐसे में अब अधिकारी हर हाल में इस व्यवस्था को लागू कराने पर जोर दे रहे हैं। उधर शिक्षकों ने शर्त रखी है कि अगर वह किन्हीं कारणों से विलंब से पहुंचे तो उन्हें छूट दी जाए।


शिक्षकों ने मांग की है कि विलंब होने पर उन्हें पूरे दिन के लिए अनुपस्थित न माना जाए। अर्द्ध अवकाश या फिर तीन दिन विलंब होने पर एक आकस्मिक अवकाश लेने की छूट दी जाए। उपस्थिति व मिड-डे मील सहित 12 रजिस्टर डिजिटल किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल बादव कहते हैं कि बड़ी संख्या में शिक्षक दूर-दराज के क्षेत्रों से विद्यालय आते हैं।

 तमाम परिषदीय स्कूल भी ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां पहुंचने में समय लगता है। किन्हीं कारणों से वह लेट हो जाएं ती पूरे दिन के लिए अनुपस्थित न माना जाए। उपस्थिति सुबह विद्यालय खुलते समय और बंद होते समय लगाने की व्यवस्था की गई है।

शिक्षक माह में 2 दिन लेट हो जाता है तो उस पर कार्रवाई न की जाए। 3 दिन लेट होता है तो एक सीएल लगाने का नियम हो। हर माह में 2 हाफ सीएल की व्यवस्था होनी चाहिए। ~ विनय कुमार सिंह प्रांतीय अध्यक्ष, PSPSA 

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री अरुणेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि अगर कोई शिक्षक पांच मिनट भी दे से पहुंचता है तो उसका एक दिन का वेतन कट जाएगा। टैबलेट से उपस्थिति दर्ज करने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे व्यावहारिक बनाया जाए। अर्जित अवकाश की सुविधा भी शिक्षकों को दी जाए।

छात्रवृत्ति के लिए घोषित हुईं आवेदन की तिथियां

छात्रवृत्ति के लिए घोषित हुईं आवेदन की तिथियां

10 जुलाई से पूर्व दशम के विद्यार्थी कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन 

शैक्षिक सत्र 2024-25 में पूर्व दशम (कक्षा नौ व 10) के विद्यार्थियों को छात्रवृति योजना से लाभान्वित करने के लिए समय सारिणी जारी की गई है। उच्च शिक्षा के विद्यार्थी 12 जुलाई और पूर्व दशम के विद्यार्थी 10 जुलाई से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद पात्रता व नियम पूरा करने वाले विद्यार्थियों के खाते में धनराशि अंतरित की जाएगी।


छात्रवृत्ति योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2024-25 में समाज कल्याण विभाग ने आवेदन समय सारिणी जारी कर दी है। अनुसूचित जाति के दशमोत्तर के विद्यार्थी (कक्षा 11 से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले) छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए पहले चारण में 12 जुलाई से 16 नवंबर तक, दूसरे चरण में 17 नवंबर से 31 दिसंबर और तीसरे चरण में एक जनवरी 2025 से 31 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। 


वहीं पूर्व दशम के विद्यार्थी (कक्षा नौ व 10) 10 जुलाई से दो सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। हार्डकॉपी विद्यालय में जमा करने की तारीख आवेदन पत्र भरने के सात दिन के अंदर और विलंब से आठ नवंबर 2024 तक होगी। विद्यालय आवेदन पत्र को ऑनलाइन सत्यापित व अग्रसारित 11 जुलाई से 18 नवंबर तक कर सकेंगे।

यूपी बोर्ड ने जारी किया स्क्रूटनी का परिणाम

यूपी बोर्ड : स्क्रूटनी का परिणाम किया घोषित

प्रयागराज । यूपी बोर्ड परीक्षा 2024 के स्क्रूटनी (सन्निरीक्षा) का रिजल्ट शुकवार को घोषित कर दिया गया है। पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों ने परिषद की वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर स्क्रूटनी का परिणाम अपलोड कर दिया है। प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय की अपर सचिव विभा मिश्रा की ओर से जारी सूचना के मुताबिक स्क्रूटनी के लिए कुल 12,206 प्रत्यावेदन मिले थे, जिसमें से 3891 छात्र-छात्राओं के अंक में संशोधन हुआ है।

20 अप्रैल को हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2024 का परिणाम घोषित किया गया था। उस समय यूपी बोर्ड ने कम अंक मिलने को लेकर परीक्षार्थियों से स्क्रूटनी के लिए आवेदन मांगे थे। प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय में हाईस्कूल के 2065 छात्र-छात्राओं और इंटरमीडिएट में 10,141 परीक्षार्थियों ने प्रत्यावेदन दिए थे। अपर सचिव ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी कराई। शुक्रवार को परिणाम घोषित कर दिया गया। 

उन्होंने बताया कि वेबसाइट पर उन्हीं परीक्षार्थियों के अनुक्रमांक अपलोड किए गए हैं, जिनके अंक में परिवर्तन हुए हैं। जिन परीक्षार्थियों के परीक्षाफल ल में में संशोधन हुआ है, उनके संशोधित मुद्रित प्रमाणपत्र/अंकपत्र उनके जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से उनके विद्यालय में भेजे जाएंगे। ऐसे परीक्षार्थी पूर्व में निर्गत अंकपत्र/प्रमाणपत्र प्रधानाचार्य को वापस करते हुए अपना संशोधित अंकपत्र वहां से प्राप्त कर सकेंगे।



यूपी बोर्ड ने जारी किया स्क्रूटनी का परिणाम
 

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के क्षेत्रीय कार्यालयों से स्क्रूटनी का परिणाम जारी कर दिया गया है। यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर शुक्रवार की शाम को परिणाम का लिंक दे दिया गया है। क्षेत्रीय कार्यालय वार परिणाम दिया गया है। अभ्यर्थी वहीं से अपने अनुक्रमांक देख ले। वेबसाइट पर केवल उन्हीं का अनुक्रमांक दिया गया है, जिनके अंक पत्र में संशोधन हुआ है।


यूपी बोर्ड का परिणाम जारी होने के बाद स्क्रूटनी के आवेदन आनलाइन लिए गए थे। बोर्ड की वेबसाइट पर 14 मई तक स्क्रूटनी के लिए 29,555 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था।


उसमें से हाईस्कूल के 4748 और इंटरमीडिएट 24,807 आवेदन आए। पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, मेरठ और गोरखपुर में स्क्रूटनी हुई। स्क्रूटनी के दौरान कॉपी चेक नहीं होती है बल्कि नंबर जोड़ने में कहीं चूक होने पर उसे ठीक किया गया है। 


प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय में कुल 12206 आवेदन आए थे। उससे से हाईस्कूल के 2065 और इंटरमीडिएट के 10141 आवेदन आए थे। इसमें से हाईस्कूल के 613 और इंटरमीडिएट के 3278 विद्यार्थियों के अंक पत्र में संशोधन हुआ है। अन्य में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


यूपी बोर्ड की क्षेत्रीय सचिव विभाग मिश्रा ने बताया कि बोर्ड की वेबसाइट जिनके अंक पत्र संशोधित हुए हैं, उनका अनुक्रमांक जारी किया गया है। इनके अंक पत्र संशोधित होकर इस महीने के अंत तक विद्यालयों में भेजे जाएंगे। 

Friday, July 5, 2024

बड़े स्कूलों में मर्ज होंगे बेसिक स्कूल? गौतमबुद्ध नगर से शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट, देशभर में लागू होगी ये व्यवस्‍था?

बेसिक को हाई स्कूलों में मिलाने की तैयारी? यूपी के गौतमबुद्ध नगर जिले में होगा अध्ययन

केंद्र सरकार के पायलट प्रोजेक्ट कंसल्टेशन ऑफ स्कूल में जिले के चार स्कूल चिन्हित, प्रदेश के 75 जिलों में से गौतमबुद्ध नगर को चुना

बड़े स्कूलों में मर्ज होंगे बेसिक स्कूल?  गौतमबुद्ध नगर से शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट, देशभर में लागू होगी ये व्यवस्‍था?


उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूल आसपास के बड़े स्कूलों में मर्ज होंगे। केंद्र सरकार के पायलट प्रोजेक्ट कंसल्टेशन ऑफ स्कूल के तहत यूपी के 75 जिलों में से ग्रेटर नोएडा के चार स्कूलों का चयन किया गया है। यहां प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे पूरे यूपी में लागू किया जाएगा।


यूपी में शिक्षा का स्तर उठाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। इसके तहत बेसिक स्कूलों को उसके आसपास के बड़े स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल ग्रेटर नोएडा के चार स्कूलों को चयनित किया गया है। यहां प्रयोग सफल होने के बाद इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा। इनको मर्ज कैसे किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार पायलट प्रोजेक्ट कंसल्टेशन ऑफ स्कूल के तहत अध्ययन करा रही है।


इसी के तहत गौतमबुद्ध नगर के चार बेसिक स्कूलों का चयन किया गया है। यहां पर भारत सरकार की टीम अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेगी। उसके बाद प्रोजेक्ट को पूरे देश में लागू किया जाएगा। इस संबंध में बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से केंद्र सरकार के अफसरों ने गौतम बुद्धनगर के अफसरों को निर्देशित किया है।


जिला बेसिक ‌शिक्षा अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार कंसल्टेशन ऑफ स्कूल नाम से पायलट प्रोजेक्ट के तहत बेसिक स्कूलों को बड़े स्कूलों में मर्ज करने की तैयारी कर रही है। अध्ययन के लिए यूपी के गौतमबुद्ध नगर के चार स्कूल चयनित किए गए हैं। इन स्कूलों में 16 से 18 बच्चों का नामांकन है। स्कूलों के आसपास कक्षा एक से 12 तक के सरकारी स्कूलों को देखा जाएगा। छोटे स्कूलों को इन बड़ों स्कूलों में मर्ज किया जाएगा।


गौतमबुद्धनगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने क्या बताया?
गौतम बुद्ध नगर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट में हर प्रदेश से एक जिला चुना गया है। उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर को चुना हैं। भारत सरकार की टीम यहां आकर स्कूलों को मर्ज करने की स्टडी करेगी। विभाग सहयोगी के तौर पर काम करेगा। तीन माह में स्टडी रिपोर्ट पूरी की जाएगी। उसके बाद इस प्रोजेक्ट को देश भर में लागू किया जाएगा।

अध्ययन में नए स्कूल तक बच्चों के जाने की व्यवस्था और उनका नामांकन, साथ ही ऐसे होने पर किस-किस तरह की समस्या आएंगी। इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। तीन माह के अंदर अध्ययन पूरा हो जाएगा। अफसरों ने बताया कि नए शिक्षा नीति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम को आसान बनाने के मकसद से प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। विलय होने से बेसिक स्कूलों पर हो रहा खर्च भी कम होगा।


मध्य प्रदेश का मॉडल भी रहा है चर्चा में
मध्य प्रदेश का ‘एक शाला-एक परिसर’ मॉडल भी काफी चर्चा में रहा है। इसके तहत जिन स्कूलों में 50 से कम छात्र, उनका बड़े स्कूल में विलय किया गया। नीति आयोग ने सभी राज्यों में इसे लागू करने की सिफारिश भी की थी, लेकिन इस समय सरकार अपने पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है।

बताते चले कि पूर्व में यूपी में भी संविलियन के जरिए एक परिसर में स्थित स्कूलों का आपस में मर्जर किया जा चुका है। 

स्थानांतरण/ समायोजन सम्बन्धी कई मांगों / बिंदुओं को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने परिषद सचिव को लिखा पत्र

स्थानांतरण/ समायोजन सम्बन्धी कई मांगों / बिंदुओं को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने परिषद सचिव को लिखा पत्र 


Thursday, July 4, 2024

मानदेय पर रखे जाने के प्रस्ताव से तदर्थ शिक्षक नाराज, कहा- भीख नहीं सम्मान चाहिए

मानदेय पर रखे जाने के प्रस्ताव से तदर्थ शिक्षक नाराज, कहा- भीख नहीं सम्मान चाहिए

25-30 हजार रुपये मानदेय पर रखने के प्रस्ताव का किया विरोध


लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में तैनात रहे तदर्थ शिक्षकों को 25 से 30 हजार रुपये मानदेय पर रखे जाने के प्रस्ताव से नाराजगी है। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि हमें भीख नहीं सम्मान चाहिए। प्रदेश सरकार का यह निर्णय सही नहीं है।


माध्यमिक तदर्थ शिक्षक संघर्ष समिति ने कैबिनेट में आए प्रस्ताव पर कहा है कि मुख्यमंत्री से ऐसी उम्मीद नहीं थी। जिस विद्यालय में हम सभी शिक्षक सम्मान के साथ 25 से 30 वर्षों तक कार्य कर चुके हैं, वहां पर 25 व 30 हजार मानदेय पर उसी विद्यालय में काम करने को कहा जा रहा है। जबकि चपरासी का वेतन इससे अधिक है। इससे तदर्थ शिक्षकों में काफी आक्रोश है।

समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि 53 दिन की याचना में उच्च अधिकारियों से जिस प्रस्ताव पर सहमति बनी थी, उसे कैबिनेट में नहीं रखा गया। यह प्रस्ताव उससे अलग है। यह स्वीकार नहीं है। प्रदेश संरक्षक रमेश सिंह ने कहा कि सभी तदर्थ शिक्षक जो भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सदस्य हैं, लखनऊ में भाजपा कार्यालय में आकर प्रदेश अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल सिंह राणा ने कहा कि कैबिनेट ने तदर्थ शिक्षकों का मानदेय प्रबंधक के खाते में जाने की बात कही है, इससे शिक्षकों का शोषण बढ़ेगा। प्रदेश महामंत्री सुशील शुक्ला ने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

गौरतलब है कि मंगलवार को हुई कैबिनेट में एडेड माध्यमिक विद्यालयों में मानदेय पर शिक्षकों को रखने की नीति को हरी झंडी दी थी। साथ ही 2254 तदर्थ शिक्षकों को 25 से 30 हजार रुपये मानदेय पर समायोजित करने पर भी सहमति दी गई थी। 



2200 से ज्यादा तदर्थ शिक्षकों की मानदेय पर होगी पुनर्नियुक्ति

लखनऊ : योगी सरकार ने साल 2023 में सेवा से हटाए गए 2200 से ज्यादा शिक्षकों को अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मानदेय पर रखे जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिसका असर शिक्षण कार्य पर हो रहा है। शैक्षणिक कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए 2023 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेवा से मुक्त किए गए 2200 से ज्यादा शिक्षकों को अस्थायी तौर पर पुनर्नियुक्ति का अवसर दिया जा रहा है, जो शिक्षक कक्षा 9 और 10 में पढ़ाएंगे उन्हें 25 हजार और जो लोग कक्षा 11-12 में पढ़ाएंगे उन्हें 30 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। प्रबंधन को यह धनराशि दी जाएगी, अगर वे इससे ज्यादा देना चाहते हैं तो शिक्षकों अपने पास से दे सकते हैं। 

जिन तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं शासनादेश 9 नवम्बर 2023 द्वारा समाप्त की गईं, वे ही मानदेय शिक्षक के लिए पात्र होंगे। यथासम्भव मानदेय शिक्षक को उसी विद्यालय में रखा जाएगा, जिनमें वे तदर्थ शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे हैं।



तदर्थ शिक्षकों की मानदेय शिक्षक में रखे जाने को कैबिनेट की मंजूरी

हाईस्कूल स्तर के मानदेय शिक्षक हेतु मानदेय की धनराशि ₹25,000 प्रतिमाह एवं इंटरमीडिएट स्तर के मानदेय शिक्षक हेतु मानदेय की धनराशि ₹30,000 प्रतिमाह होगी।


यूपी सीएम की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अस्थायी रूप से मानदेय-शिक्षक रखे जाने की प्रक्रिया एवं कार्य निष्पादन शर्तें, 2024 को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

जिन तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं शासनादेश दिनांक 09 नवम्बर, 2023 द्वारा समाप्त की गयी हैं, वे ही मानदेय शिक्षक हेतु पात्र होंगे। मानदेय शिक्षक नितांत अस्थायी तौर पर रखे जाएंगे।

हाईस्कूल स्तर के मानदेय शिक्षक हेतु मानदेय की धनराशि ₹25,000 प्रतिमाह एवं इंटरमीडिएट स्तर के मानदेय शिक्षक हेतु मानदेय की धनराशि ₹30,000 प्रतिमाह होगी।




अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों के तदर्थ शिक्षकों को मानदेय पर रखने की तैयारी

लखनऊः अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों के तदर्थ शिक्षकों को मानदेय पर रखने की तैयारी की जा रही है। मंगलवार को कैबिनेट में मानदेय शिक्षकों की नियुक्ति और उनकी सेवा शर्तों के लिए नियम- कानून बनाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है।

 अगर इस पर मुहर लगी तो 20 से 30 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके शिक्षकों को मानदेय पर रखा जाएगा। बीते वर्ष नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इनकी सेवाएं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने खत्म कर दी थीं। ऐसे करीब तीन हजार शिक्षक हैं, जिन्हें इसका लाभ मिलेगा।


वर्ष 1993 के बाद एडेड स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। वर्ष 2000 से 2004 के बीच एडेड स्कूलों में नियमों को ताक पर रखकर इन शिक्षकों की बड़ी संख्या में नियुक्ति की गई तो मामला कोर्ट तक पहुंच गया। 11 नवंबर, 2023 को माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ऐसे 1,115 तदर्थ शिक्षक जिन्हें वेतन नहीं मिल रहा था उन्हें 17 महीने का बकाया वेतन देकर सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया था। 

वहींजो शिक्षक पहले से वेतन पा रहे थे उन्हें भी निकाल दिया गया। शिक्षकों की अचानक सेवाएं समाप्त करने के कारण इसका विरोध शुरू हो गया। अब इन्हें मानदेय पर रखकर राहत देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में लोकभवन में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में करीब एक दर्जन प्रस्ताव आने की उम्मीद है।

Wednesday, July 3, 2024

कक्षा एक और दो के छात्रों के बस्ते खाली, नहीं मिलीं निःशुल्क किताबें

कक्षा एक और दो के छात्रों के बस्ते खाली, नहीं मिलीं निःशुल्क किताबें


लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने के बाद फिर से पढ़ाई शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक कक्षा एक व कक्षा दो के 42 लाख विद्यार्थियों के बस्ते खाली हैं। इन्हें अभी तक निश्शुल्क पाठ्य-पुस्तकें नहीं मिली हैं। लखनऊ, बलिया व देवरिया सहित तमाम जिलों में मुख्यालय तक किताबें पहुंचा दी गई हैं, लेकिन यहां से विद्यालय तक पहुंचाने का कार्य अभी बाकी है। 


अभी यहां से खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय और फिर वहां से न्याय पंचायत संसाधन केंद्रों (एनपीआरसी) तक फिर विद्यालय पहुंचेंगी। वहीं कार्य पुस्तिकाओं की छपाई का काम अब शुरू हुआ है।

राज्य पाठ्य-पुस्तक अधिकारी माधव तिवारी का कहना है कि पाठ्य-पुस्तकें तेजी से जिलों में पहुंचाई जा रही हैं। जिले तक पहुंचने के बाद वहां के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें विद्यालय तक पहुंचाएं। किसी भी कीमत पर शिक्षक किताबें ढोकर स्कूल नहीं ले जाएंगे। फिलहाल विद्यालयों में पढ़ाई शुरू हो गई है और किताबें पहुंचना अभी बाकी है। 

वहीं कक्षा एक व कक्षा दो के विद्यार्थियों को दो-दो अभ्यास पुस्तिकाएं भी दी जानी है, लेकिन अब इनकी छपाई का कार्य शुरू हो पाया है। ऐसे में अभी 15 दिन बाद ही ये विद्यालय तक पहुंच पाएंगी। कक्षा एक व कक्षा दो में इस शैक्षिक सत्र 2024- 25 से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू किया गया है। फिर मार्च में चुनाव आचार संहिता लगने के कारण टेंडर की प्रक्रिया में देरी हुई। 

चुनाव आयोग की अनुमति के बाद टेंडर किया गया और फिर छपाई शुरू हुई। ऐसे में छात्रों को कठिनाई हो रही है। एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हुआ था। गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने के बाद फिर से पढ़ाई शुरू हो गई है।

Tuesday, July 2, 2024

देखें डिजिटल छात्र उपस्थिति का जनपदवार आंकड़ा (1 जुलाई 2024)

देखें डिजिटल छात्र उपस्थिति का जनपदवार आंकड़ा (1 जुलाई 2024) 


शासनादेश के क्रम में पंजिकाओं के डिजिटाइजेशन के सम्बन्ध में निर्देश निर्गत किए हैं । इसके साथ ही यूजर मैनुअल भी उपलब्ध कराए गए हैं तथा ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है।
 
तत्क्रम में दिनांक 1 July , 2024 के डाटा विश्लेषण से निम्न बिन्दु संज्ञान में आए हैं

👉 डिजिटल छात्र उपस्थिति पंजिका में किसी भी जनपद में छात्र उपस्थिति 25% से अधिक नहीं प्राप्त हुई है । 

👉  छात्र उपस्थिति 10% या अधिक वाले जनपद : हमीरपुर, कौशांबी, बागपत, हापुड़ , प्रयागराज, भदोही, ललितपुर, एटा, लखनऊ, हाथरस, फिरोजाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, मैनपुरी, संत कबीर नगर, अमरोहा, कासगंज, अंबेडकरनगर, फर्रुखाबाद में छात्र उपस्थिति 10% या अधिक प्राप्त हुई है । 

👉 जनपद: बदायूँ, बहराइच एवं उन्नाव में छात्र उपस्थिति 0% प्राप्त हुई है ।

यह अत्यंत खेद का विषय है कि राज्य परियोजना कार्यालय स्तर से निरंतर निर्देशित किए जाने के बाद भी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है । तत्सम्बन्धी जनपदवार सूची संलग्न है।

अतः आपका व्यक्तिगत ध्यान आकृष्ट करते हुए निर्देशित किया जाता है कि दैनिक अनुश्रवण करते हुए डिजिटल पंजिकाओं का शत प्रतिशत प्रयोग सुनिश्चित कराएं ।

 समस्त AD BASIC को निर्देशित किया जाता है कि अपने मण्डल के जनपदों का दैनिक अनुश्रवण करते हुए अनुपालन सुनिश्चित कराएं।


महानिदेशक
स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश


परिषदीय शिक्षकों के लिए जारी की गई स्थानांतरण/समायोजन नीति में व्यापक कमियों को दूर किये जाने तथा स्थानान्तरण/समायोजन किये जाने के पूर्व पदोन्नति किये जाने के सम्बंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का महनिदेशक को मांगपत्र

परिषदीय  शिक्षकों के लिए जारी की गई स्थानांतरण/समायोजन नीति में व्यापक कमियों को दूर किये जाने तथा स्थानान्तरण/समायोजन किये जाने के पूर्व पदोन्नति किये जाने के सम्बंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का महनिदेशक को मांगपत्र 



एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 1898 शिक्षकों का तबादला, यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर जारी किया स्थानांतरण आदेश

एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 1898 शिक्षकों का तबादला, यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर जारी किया स्थानांतरण आदेश


प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के 1898 प्रवक्ताओं, सहायक अध्यापकों और प्रधानाचार्यों का स्थानांतरण कर दिया गया है। इन सभी का स्थानांतरण आदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट https://upmsp.edu.in पर जारी कर दिया गया है। जिनका स्थानांतरण हुआ है, उन्हें वेबसाइट से आदेश डाउनलोड करने कहा गया है। इसी आदेश के आधार पर वह कार्यमुक्त होकर कार्यभार ग्रहण कर सकेंगे।


एडेड विद्यालयों में स्थानांतरण के लिए 14 से 27 जून तक आवेदन लिए गए थे। आवेदन ऑफलाइन लिए गए। वैसे इसके लिए आवेदन प्रक्रिया वर्षभर चलती रहती है। शासन से स्थानांतरण नीति आने तक शिक्षा निदेशालय में आठ सौ आवेदन आ चुके थे। शासनादेश आने के बाद निदेशालय में आवेदकों की भीड़ लग गई। 

निर्धारित तिथि तक करीब दो हजार आवेदन जमा हुए। इन आवेदनों की जांच के बाद अब स्थानांतरण किया गया। क्योंकि, यह प्रक्रिया ऑफलाइन थी, इसलिए आदेश जारी करने के लिए तीन दिन तक अफसरों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। 

अंत: जनपदीय स्थानांतरण (समायोजन) के विरोध में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी

अंत: जनपदीय स्थानांतरण (समायोजन) के विरोध में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी

• आज से शुरू होगी प्रक्रिया, 19 जुलाई को जारी होगा स्थानांतरण

प्रयागराजः बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के अंतः जनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही विरोध शुरू हो गया है। बेसिक शिक्षा परिषद सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने 31 मार्च तक विद्यालयों में हुए छात्र नामांकन के आधार पर सरप्लस शिक्षकों को चिह्नित करने का निर्देश दिया है और इसी आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे। 

इसके विपरीत शिक्षकों ने कहा है कि अप्रैल में अधिक संख्या में प्रवेश हुए हैं तथा जुलाई तक प्रवेश की समयसीमा होने के कारण और भी प्रवेश होंगे। इस तरह मार्च के नामांकन के आधार पर स्थानांतरण/ समायोजन किए जाने से अधिक विद्यार्थी होने के बावजूद शिक्षक कम हो जाएंगे। इस कारण पूर्व की तरह सितंबर के छात्र अनुपात में शिक्षक चिह्नित किए जाएं। अगर मांग नहीं मानी गई तो शिक्षक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

आदेश के अनुसार अंतःजनपदीय स्थानांतरण/समायोजन की प्रक्रिया दो जुलाई से शुरू होगी। शिक्षकों को 25 विकल्पों के साथ आवेदन करना होगा, जिसका सत्यापन किया जाएगा। स्थानांतरण के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। 

बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा है कि स्थानांतरण आदेश की जारी समय सारिणी में कई बिंदुओं पर शिक्षकों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया है। कई गांव नगर पालिका/नगर निगम सीमा में आ जाने के कारण नगरीय क्षेत्र में हो गए हैं। ऐसे में नगरीय सीमा में शामिल हुए गांवों के विद्यालयों को नगरीय सीमा में मानकर प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इसके अलावा कई और विसंगतियां बताते हुए शिक्षक जल्द परिषद सचिव की ओर से जारी ही हाई कोर्ट में याचिका लगाएंगे



अंतःजनपदीय स्थानांतरण एवं समायोजन की समय सारिणी जारी होते ही कई बिंदुओं पर बेसिक शिक्षकों का विरोध शुरू

• 30 सितंबर के नामांकन पर छात्र अनुपात तय करने की मांग
• नगर पालिका क्षेत्र में आए विद्यालय की गिनती नगर में हो


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के अंतःजनपदीय स्थानांतरण एवं समायोजन के लिए तैयारी कर ली गई है। इसके लिए परिषद सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने समय सारिणी जारी कर दी है, लेकिन इसी के साथ शिक्षकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। 

कहा है कि मार्च तक के नामांकन के आधार पर स्थानांतरण/ समायोजन किए जाने से विषमता और बढ़ जाएगी, क्योंकि 30 मार्च के बाद विद्यालयों में नामांकन बढ़ गए हैं। इस तरह अधिक छात्र संख्या के बजाय पुराने नामांकन के आधार पर स्थानांतरण किए जाने से अधिक संख्या वाले विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हो जाएगी। इसके अलावा नगर पालिका के सीमा विस्तार वाले क्षेत्र के विद्यालयों को नगर क्षेत्र में शामिल कर लिया जाता तो बहुत शिक्षक समायोजन से बच जाते। इसके अलावा कई और बिंदुओं पर भी विरोध है।

स्थानांतरण के लिए जारी निर्देश में परिषद सचिव ने कहा है कि छात्र अनुपात में अधिक अध्यापक वाले विद्यालयों से आवश्यकता वाले विद्यालयों में स्थानांतरण किए जाएंगे। इसके लिए मार्च माह तक हुए छात्र नामांकन को आधार माना गया है। 

उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने शिक्षकों की मांग के अनुसार पूर्व की तरह 30 सितंबर 2024 तक होने वाले नामांकन के आधार पर छात्र-शिक्षक अनुपात तय करने को कहा है। इससे छात्र संख्या के अनुपात में विद्यालय को शिक्षक मिल सकेंगे। इससे पठन-पाठन सुचारु चल सकेगा।

 चूंकि समायोजन में जूनियर शिक्षक प्रभावित होंगे, इसलिए मांग की गई है कि वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हो, क्योंकि जूनियर का ही समायोजन होता रहा तो वह जहां जाएंगे, जूनियर ही रहेंगे। हर जगह छात्र संख्या कम होने पर जूनियर को ही हटाया जाता रहेगा।



कॉमर्स को विज्ञान-गणित में शामिल करने से विसंगति
परिषदीय शिक्षकों के समायोजन में फंसेगा पेच, जानिए क्यों? 

प्रयागराज । सूबे के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन की कवायद एक बार फिर से तेज हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सत्र में जिले के अंदर शिक्षकों के समायोजन के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के चलते शिक्षकों के समायोजन में पेच फंसने के आसार हैं। इसका मुख्य कारण कॉमर्स को विज्ञान-गणित में शामिल करना और 30 सितंबर के बजाय 31 मार्च तक के पंजीकृत छात्रों के आधार पर समायोजन किया जाना है।

विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो पहले समायोजन में 30 सितंबर तक के पंजीकृत छात्रों की संख्या मानी जाती थी लेकिन अब 31 मार्च तक के पंजीकृत छात्रों की संख्या के आधार पर स्कूलों में समायोजन किया जाएगा। मार्च में प्राथमिक में कक्षा पांच और उच्च प्राथमिक में कक्षा आठ के छात्र बाहर हो जाते हैं। शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से 31 मार्च तक होने के चलते छात्रों की संख्या स्कूल में कम होना लाजिमी है। 


छात्र संख्या कम होने पर उन विद्यालय के शिक्षकों का समायोजन किसी अन्य विद्यालय में हो सकता है। फिर वह शिक्षक इस प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती देने के लिए बाध्य होगा। जूनियर हाईस्कूलों में यानी कक्षा 6 से 8 तक में इस बार कॉमर्स से स्नातक शिक्षकों को मानव सम्पदा पोर्टल पर सब्जेक्ट मैपिंग में गणित-विज्ञान में दिखाया गया है जबकि उनकी नियुक्ति सामाजिक विषय के शिक्षक के तौर पर होती है। इसके चलते समायोजन का लाभ न पाने वाले विज्ञान गणित शिक्षक प्रक्रिया को चुनौती दे सकते हैं।

Monday, July 1, 2024

यूपी बोर्ड : 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का प्रवेश पांच अगस्त तक, बोर्ड सचिव ने जारी की अग्रिम पंजीकरण की समय सारिणी

यूपी बोर्ड : 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का प्रवेश पांच अगस्त तक

● बोर्ड सचिव ने जारी की अग्रिम पंजीकरण की समय सारिणी
● पंजीकृत छात्र-छात्राओं के आवेदन upmsp.edu.in पर किए जाएंगे अपलोड




प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बोर्ड परीक्षा 2025 की तैयारी शुरू कर दी है। विद्यालय खुलने के साथ यूपी बोर्ड ने कक्षा नौ से 12 तक के विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2024-25 के लिए अग्रिम पंजीकरण की समय सारिणी घोषित कर दी। पांच अगस्त तक प्रवेश लिए जाएंगे। बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने नए सत्र की समय सारिणी जारी कर दी है। सचिव के मुताबिक, 10वीं एवं 12वीं की कृषि भाग-एक की परीक्षा में शामिल होने वाले पंजीकृत छात्रों के आवेदन ४स्रे२स्र्र. ी४ि. ल्ल पर ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे।


हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं से प्राप्त परीक्षा शुल्क 10 अगस्त तक प्रधानाचार्य कोषागार में जमा करा सकेंगे। शुल्क की सूचना एवं छात्र-छात्राओं के शैक्षिक विवरण वेबसाइट पर 16 अगस्त तक अपलोड किए जाएंगे। 10 अगस्त के बाद 100 रुपये विलंब शुल्क के साथ परीक्षा शुल्क 16 अगस्त तक जमा होगा, जिसकी सूचना और शैक्षिक विवरण 20 अगस्त तक अपलोड किए जा सकेंगे।

इसका परीक्षण 21 से 31 अगस्त तक होगा। त्रुटि को एक से 10 सितंबर मध्य रात्रि तक सुधारने का अवसर रहेगा। 30 सितंबर तक कक्षा नौ से 12 तक के पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली एवं संबंधित कोषपत्र की एक प्रति परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए डीआइओएस कार्यालय में प्रधानाचार्यों को जमा करनी होगी।


कंपार्टमेंट के छात्र 20 अगस्त तक ले सकेंगे दाखिला

बोर्ड ने कक्षा नौ व 11 के छात्र-छात्राओं के अग्रिम पंजीकरण का कार्यक्रम जारी किया है। परीक्षा वर्ष 2026 एवं वर्ष 2025 की कृषि भाग-एक की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले 11वीं के छात्र-छात्राओं के अग्रिम पंजीकरण आवेदन परिषद की वेबसाइट upmsp. edu. in पर अपलोड किए जाएंगे। हाईस्कूल कंपार्टमेंट परीक्षा उत्तीर्ण एवं सन्निरीक्षा (स्क्रूटनी) में उत्तीर्ण अभ्यर्थी कक्षा-11 में 20 अगस्त तक प्रवेश ले सकेंगे। कक्षा नौ व 11 के छात्र-छात्राओं के अग्रिम पंजीकरण शुल्क 50 रुपये कोषागार में चालान के माध्यम से जमा करने तथा पंजीकरण की सूचना व विवरण परिषद की वेबसाइट पर 25 अगस्त की मध्य रात्रि तक अपलोड किए जा सकेंगे। अपलोड विवरणों की जांच 26 अगस्त से पांच सितंबर तक होगी। इसमें मिली त्रुटि छह से 20 सितंबर की मध्य रात्रि तक सुधारी जा सकेगी।