
Wednesday, November 30, 2016

गोंडा : परसपुर विकास मंच ने डीएम को भेजा पत्र, कस्तूरबा स्कूलों की सुविधाओं की हो नियमित जांच
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की बदहाल स्थिति को सुधारने की मांग उठने लगी है। परसपुर विकास मंच के पदाधिकारियों ने डीएम को पत्र भेजकर इन स्कूलों की सुविधाओं की नियमित जांच कराने की मांग की है।
डीएम को लिखे गए पत्र में परसपुर विकास मंच के अरुण कुमार सिंह, राम सुंदर पांडेय, राम मनोहर तिवारी, वीडी सिंह सहित अन्य ने कहा है कि कस्तूरबा स्कूलों की दशा दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। कहीं पर बैठने की व्यवस्था नहीं है तो कहीं पर सोने के लिए बिस्तर नहीं है। खाना बनाने के लिए समुचित प्रबंध नहीं है। यही नहीं अधिकतर स्कूलों में बालिकाओं को अभी तक गर्म कपड़े नहीं वितरित किए गए हैं। कई स्कूलों में शुद्ध पेयजल का प्रबंध नहीं है। जिससे बालिकाओं को दिक्कत हो रही है। यही नहीं यह भी आरोप लगाया गया है कि कई स्कूलों में बालिकाओं को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कस्तूरबा स्कूलों की सुविधाओं की नियमित जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।

गोंडा : अफसरों की लापरवाही से शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं , शिक्षकों के स्थानांतरण में हो रही हीलाहवाली , शुरू होगा स्थानांतरण-बीएसए
एक जगह कई वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों का स्थानांतरण होना है। इसके लिए शासन ने प्रक्रिया शुरू कराने का निर्देश दिया था, लेकिन जिले में अब तक विभागीय अफसर मौन हैं। इससे शिक्षकों को समस्या से जूझना पड़ रहा है। जिले में शिक्षण कार्य कर रहे कई शिक्षक घर से काफी दूरी पर हैं। पिछले तीन वर्षों से शासन ने स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगा रखा था। ये शिक्षक घर से दूर रहकर शिक्षण कार्य कर रहे थे। सरकार ने इनके तबादले का रास्ता साफ कर दिया है। सितंबर में शासन में इसकी अनुमति देकर प्रक्रिया शुरू कराने का निर्देश दिया था मगर जिले में अब तक कोई कार्यवाही नहीं चालू की गई है। घर से दूर रहकर शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षक परेशानी ङोल रहे हैं। घर से दूर दूसरे शिक्षा क्षेत्रों में शिक्षण कार्य कर रहे अध्यापकों को शासन के इस निर्णय से राहत मिलने की उम्मीद थी लेकिन अफसरों की लापरवाही से शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं हो पा रहा है। एक हजार शिक्षक तबादला चाह रहे हैं। इसके तबादले की कार्रवाई पर विभाग के जिम्मेदार मौन हैं।
शुरू होगा स्थानांतरण-इस संबंध में बीएसए अजय कुमार सिंह का कहना है कि सारी प्रकिया पूरी कराई जा रही है। दस दिसबंर से तक स्थानांतरण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

हरदोई : विद्यालय बने तबेला बांधे जा रहे जानवर, काश ! फटकार से सुधर जाएं जिम्मेदार
काश ! फटकार से सुधर जाएं जिम्मेदार
घरों से बोरी लेकर आते हैं बच्चे सुप्रीम कोर्ट ने विद्यालयों के बच्चों को टाट बोरे की फट्टी पर बैठालने पर नाराजगी जताई है लेकिन देखा जाए तो जिले के कुछ प्राथमिक विद्यालयों में यह भी नहीं है। बच्चे अपने स्कूली बैंगों में घरों से बोरी लेकर आते हैं और उन्हीं पर कक्षाओं में बैठते हैं। विद्यालय विकास अनुदान में बच्चों को बैठालने के संसाधन का भी इंतजाम किया जाना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता।
गायब हो चौकी और बेंच ऐसा नहीं कि बच्चों के बैठने का इंतजाम नहीं किया गया था। कुछ वर्ष पूर्व प्राथमिक के बच्चों के लिए चौकी और उच्च प्राथमिक स्कूलों में डेस्क और बेंच का इंतजाम किया गया था लेकिन कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में चौकी और बेंच गायब हो गए हैं। जहां हैं भी वह कमरे में बंद हैं और बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।
परिषदीय विद्यालयों की दशा देखकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है। देखा जाए तो इलाहाबाद में ही नहीं शायद ही ऐसा कोई जिला हो जहां पर शिक्षा के नाम पर खेल न हो रहा हो। हरदोई में तो पूरी तरह से व्यवस्था का मजाक उड़ाया जा रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता तो दूर की बात है विद्यालयों में बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिलती हैं। बातें तो आसमान की हो रही हैं लेकिन हकीकत पूरी व्यवस्था की पोल खोल रही है। विभागीय लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद में व्यवस्था सुधार का जो आदेश दिया है, पूरे प्रदेश में लागू हो जाए तो बच्चों का उनका हक मिल जाए।
बेसिक शिक्षा ही समाज की नींव है और इसके सुधार को लेकर शासन प्रशासन गंभीर है। सर्व शिक्षा अभियान में तो दिल खोलकर धनराशि खर्च हो रही है। शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर संसाधनों पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है लेकिन सब कुछ कागजों पर ही हो रहा है। जिले के कुछ विद्यालयों को छोड़ दें तो अधिकांश की यही दशा है। केंद्र और प्रदेश सरकार विद्यालयों को साफ सुथरा और शौचालयों पर जोर दे रही है। बच्चों के लिए पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप से लेकर बाटर टैंक तक बनवाये गए हैं लेकिन देखा जाए तो जिले के करीब 40 फीसद विद्यालयों में बच्चों के शौचालयों का इंतजाम नहीं है। कागजों पर तो व्यवस्थाएं सही हैं लेकिन हकीकत में ताला पड़ा है। तो कई विद्यालयों के शौचालयों में दरवाजे तक नहीं हैं। इसी तरह हैंडपंपों में कई केवल ठूठ है तो कहीं वर्षों से खराब पड़े हैं। ऐसा नहीं कि जिम्मेदार जानते नहीं हैं। सब कुछ जानते हुए भी चुप हैं और इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मरम्मत और रंगाई पुताई पर खर्च होते हैं लाखों रुपये : विद्यालयों की मरम्मत से लेकर रंगाई पुताने के लिए प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च होते हैं। देखा जाए तो प्रति विद्यालय में विद्यालय विकास अनुदान पांच हजार रुपये जिसमें मरम्मत आदि का काम कराया जाता है तो प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में उनके कक्षा कक्षों के अनुसार पांच से 10 हजार 500 रुपये भेजे जाते हैं। लेकिन विद्यालयों में कुछ दिखाई नहीं देता है। कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में रंगाई पुताई तक नहीं कराई जाती है। बाउंड्रीवाल गिरी रहती है तो पानी की टंकी में ही गंदगी छाई रहती है लेकिन कोई देखने वाला नहीं है।
विद्यालय बने तबेला बांधे जा रहे जानवर : परिषदीय विद्यालयों की दशा के लिए विभाग तो जिम्मेदार है ही कुछ अभिभावक और ग्रामीण भी जिम्मेदार हैं। ग्रामीणों के बच्चे विद्यालयों में पढ़ते हैं लेकिन कोई विद्यालयों को खलिहान बना देता है तो कोई तबेला और जानवर तक बांधे जाते और तो और विद्यालयों के दरवाजे और खिड़की भी कुछ स्थानों पर तोड़ दिए जाते। शिक्षक शिक्षिकाएं चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते और मजबूर होकर बैठे रहते हैं

सरकार कागज में ही दिखा रही सब चकाचक, ठंडक में स्कूल के नौनिहाल बैठ रहे टाट-पट्टी पर
पूरी तरह से हाईटेक होते युग और स्मार्ट होते शैक्षणिक माहौल के बीच सरकारी प्राइमरी स्कूलों में कहीं नौनिहालों के लिए टाट-पट्टी, कहीं कक्षाओं में उखड़ी हुई जमीन, कहीं दीवारों में सीलन और कहीं गंदगी के बीच भोजन बनाए जाने की व्यवस्था। इतना ही नहीं, स्कूलों में बने शौचालयों में साफ सफाई का कोई मद नहीं, कहीं-कहीं तो शौचालय ही नहीं हैं। इलाहाबाद के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों की कुछ ऐसी ही सूरत है। पूरे जिले में परिषदीय स्कूलों की सूरत बताने के लिए जिला मुख्यालय में स्थित एक स्कूल ही काफी है। लेकिन ऐसे उदाहरण दर्जनों हैं। पीडी टंडन रोड स्थित प्राथमिक स्कूल में नौनिहाल आज भी टाट-पट्टी पर ही बैठकर शिक्षा का ककहरा सीख रहे हैं जबकि ठंडक का मौसम आ गया है। जिस रसोई में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन बनता है वहां की दीवारें सीलन भरी हैं, छत में जाले लगे और फर्श पर भी सफाई के माकूल इंतजाम नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि रसोईघर के बगल में पानी भरा रहता है जिसकी निकासी नहीं कराई जाती। इससे कभी कोई दुर्घटना होने की आशंका भी बनी रहती है और भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं। गौरतलब है कि जिला मुख्यालय में शिक्षा विभाग के सभी बड़े अफसरों और प्रशासनिक अफसरों का कार्यालय है इसके बावजूद इस प्रकार के स्कूलों की स्थिति से सभी की बेफिक्री है।
नगरक्षेत्र में दर्जनों स्कूल चल रहे एकल : नगर क्षेत्र में दर्जनों स्कूल एकल चल रहे हैं। जबकि विभागीय नियम शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने में रोड़ा बने हुए हैं।
शासनादेश जारी नहीं होने से नगर क्षेत्र के दर्जनों स्कूल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इन शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई, मिड डे मील पर पूरा ध्यान रखने सहित विभागीय लिखापढ़ी और अन्य सरकारी कामकाज भी करने पड़ते हैं

गोरखपुर : प्रधान व कोटेदार की लड़ाई में भोजन को तरस रहे नौनिहाल, दूध तथा फल का वितरण भी नहीं
स्थानीय स्तर पर लापरवाही और बड़े अफसरों के लालफीताशाही में नौनिहाल दोपहर में स्कूल पर भोजन के लिए पंद्रह दिन से तरह रहे हैं। सहजनवां ब्लाक के उच्च माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय कसरवल के बच्चों को भूखे रहने के पीछे ग्राम प्रधान तथा कोटेदार की आपसी लड़ाई बताई जा रही है। खाद्यान्न खत्म होने के बाद विद्यालय में खाना नहीं बन रहा है, जबकि जिम्मेदार अफसरों तक बात पहुंचाने का दावा कर हैं।
सहजनवां ब्लाक क्षेत्र के कसरवल स्थित उच्च प्राथमिक एवं प्राथमिक विद्यालय में 15 दिन से मध्याह्न् भोजन सहित विशेष डाइट भी बंद है। विभागीय सूचना होने के बावजूद इसका कोई हल नहीं निकलता दिख रहा है, जिसके कारण बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पा रहा है। ब्लाक क्षेत्र के ग्राम सभा कसरवल में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय तथा प्राथमिक विद्यालय दो अलग-अलग जगह स्थित हैं लेकिन दोनों में करीब 15 दिनों से छात्रों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पा रहा है। इस बात की सूचना अध्यापकों ने ग्राम प्रधान से लेकर विभागीय अधिकारियों को दे रखी है, जिसमें कहा गया है कि खाद्यान्न के अभाव में छात्र-छात्रओं को भोजन नहीं मिल पा रहा है। दूध तथा फल का वितरण भी नहीं किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि छात्रों के भोजन में व्यवधान का कारण ग्राम प्रधान तथा कोटेदार के बीच का विवाद है।
Tuesday, November 29, 2016

कानपुर मण्डल : शिक्षकों के व्यक्तित्व की होगी मनोवैज्ञानिक जांच, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र ने चुने मंडल के 2700 शिक्षक, शिक्षक-शिक्षिकाओं से किए जा रहे 375 सवाल
मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र ने मंडल के परिषदीय प्राथमिक व जूनियर स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के व्यक्तित्व व कार्यकुशलता की मनोवैज्ञानिक पड़ताल शुरू की है। शिक्षकों से निर्धारित प्रपत्र पर 375 सवाल किए जा रहे हैं। बाद में सवालों के जवाबों का अध्ययन करके नतीजे निकाले जाएंगे।
राज्य शैक्षिक, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की पहल पर मनोविज्ञान केंद्र ने कानपुर मंडल के सभी जिलों के सभी विकास खंडों से 2700 शिक्षक शिक्षिकाओं का चयन किया है। एबीएसए के माध्यम से उनसे सवालों के जवाब लिए जा रहे हैं। बाद मे एकत्र आंकड़ों व तथ्यों का एनसीईआरटी के मनोवैज्ञानिक अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इन बिंदुओं की होगी पड़ताल
व्यक्तित्व के प्रभावी व गैर प्रभावी बिंदु, अध्यापन की शैली, आत्मविश्वास का स्तर, ज्ञान का स्तर, आत्मनियंत्रण की स्थिति, मनोतनाव का स्तर, सामाजिक सोच, निजता के सोच की स्थिति, स्वयं लाभ प्राप्त करने का सोच, अनुशासन के प्रति समर्पण की स्थिति, दूसरों को बात समझाने का तरीका, साथी शिक्षकों व बच्चों से व्यवहार के साथ वैयक्तिक ईगो के ग्राफ का अध्ययन किया जाएगा।
यह है तस्वीरकार्यक्षेत्र : मंडल के सभी जिले
चयनित स्कूल : सभी विकास खंडों से कुल शिक्षकों का चयन : 2700 पहले प्रपत्र में सवाल : 187 दूसरे प्रपत्र में सवाल : 187 मुख्य बिंदु : 16 प्रश्नप्रपत्र भराने का काम कानपुर व झांसी मंडलों में चल रहा है। इसे जल्द पूरा करा कर एससीईआरटी को भेजा जाएगा। वहां इसकी मार्किग करके नतीजे निकाले जाएंगे। जांच में टालू व गलत जवाब वाले शिक्षकों का बाहर कर दिया जाएगा। नतीजों के आधार पर शिक्षकों की काउंसलिंग व प्रशिक्षण होगा। - डॉ. एलके सिंह, मंडलीय मनोविज्ञानी, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र

सोनभद्र : पांच शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी करार, डीएम ने अपर जिलाधिकारी से शुरू कराई जांच, बीएसए से पांचों शिक्षकों की नियुक्ति पत्रावली तलब
अपर जिलाधिकारी रामचंद्र ने बताया कि प्राथमिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से नियुक्ति संबंधी पत्रवली तलब की गई है। यह खेल तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर के जमाने में हुई है। यदि बीएसए द्वारा पत्रवली उपलब्ध नहीं कराई गई तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। पत्रवली उपलब्ध होने के बाद की जाने वाली जांच में सबूत पाए जाने पर तत्कालीन बीएसए के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
हाल के दिनों में 16 हजार शिक्षकों की भर्ती के दौरान जिले में तैनात पांच शिक्षकों की नियुक्ति को फर्जी करार दिया जा रहा है। इसे लेकर सुगबुगाहट तो काफी दिनों से चल रही थी लेकिन मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंच गई। जिलाधिकारी ने तत्काल इस मामले की जांच अपर जिलाधिकारी रामचंद्र को सौंप दी और अपर जिलाधिकारी ने जांच भी शुरू कर दी है। सोमवार को अपर जिलाधिकारी ने बीएसए से पांचों शिक्षकों की नियुक्ति पत्रवली तलब की। कहा जा रहा है एडीएम जल्द ही भर्ती प्रक्रिया से संबंधित सभी पत्रवलियों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में ही जब्त कर सकते हैं। उधर जांच शुरू होने से संबंधित शिक्षकों की धुकधुकी भी बढ़ गई है।
नक्सल प्रभावित जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग में नियुक्ति व तबादले में हुए खेल का मामला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। तबादले में बरती गई अनियमितता का मामला अभी खत्म ही नहीं हुआ था कि पांच शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति के मामले ने अफसरों की नींद उड़ा दी है। प्रदेश में 16 हजार शिक्षकों की भर्ती के मामले में सोनभद्र जनपद से आनलाइन आवेदन करने वाली कुसुम लता, मुहम्मद सिकंदर समेत आधा दर्जन लोगों ने जिलाधिकारी को पत्र देकर शिकायत की थी। इनका कहना था कि तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखकर पांच ऐसे लोगों का शिक्षक पद पर तैनाती किया गया है जो न तो आनलाइन आवेदन किए थे और न ही जिले में हुई काउंसिलिंग में ही प्रतिभाग किए थे। शिकायत करने वालों ने बाकायदा शिक्षकों का नाम की सूची भी डीएम को मुहैया कराई है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक कौशांबी की रहने वाली पिछड़ी जाति की एक महिला की प्राथमिक विद्यालय सेमरी विसुनार, फतेहपुर की पिछड़ी जाति की महिला की प्राथमिक विद्यालय उरमौरा, कौशांबी जिले की अनुसूचित जाति की महिला की प्राथमिक विद्यालय पसहीकला में तैनाती की गई है।
इसके अलावा ऐसे दो शिक्षकों की तैनाती प्राथमिक विद्यालय सजौर व प्राथमिक विद्यालय तिलौली में की गई है। कथित फर्जी तरीके से हुई सभी पांचों शिक्षकों की तैनाती राबट्र्सगंज ब्लाक में उन स्कूलों में तैनाती दी गई है जो मुख्यालय से सटे गांव हैं। ताकि उनको किसी प्रकार की परेशानी न होने पाए। जबकि हम लोग नियम के तहत आनलाइन आवेदन किए थे और मेरिट भी थे लेकिन हम लोगों को काटकर इनकी तैनाती की गई। जो सरासर गलत है।

रामपुर : अब दिव्यांग भी अपने पैरों पर चल सकेंगे, विकलांग कल्याण विभाग में करा सकते हैं पंजीकरण, सर्जरी के लिए बीएसए ने जारी किए निर्देश

रामपुर : उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के सदस्यों ने की मांग, तीन दिसंबर तक जारी किया जाए वेतन
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के सदस्यों ने तीन दिसंबर तक नवंबर माह का वेतन जारी करने की मांग की है। इसको लेकर उन्होंने वित्त एवं लेखाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना था कि पिछले कई माह से शिक्षकों को समय से वेतन नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते शिक्षकों को आíथक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में यह आवश्यक है कि शिक्षकों को समय से वेतन जारी किया जाए। उन्होंने नवंबर माह का वेतन भी तीन दिसंबर तक जारी करने की मांग की है। जिलाध्यक्ष डॉ. राजवीर सिंह, रवेन्द्र गंगवार, कमर इस्हाक जव्वाद, अंजुम स्नेही, उमराव सिंह आदि उपस्थित रहे।





















