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Monday, May 23, 2022

उच्च शिक्षा में परीक्षा से संबंधित शिकायत के लिए WhatsApp नंबर जारी

उच्च शिक्षा में परीक्षा से संबंधित शिकायत के लिए WhatsApp नंबर जारी

विश्वविद्यालयों में परीक्षा के दौरान अनियमितता होने पर इसकी शिकायत व्हाट्सएप नंबर-8081572223 पर की जा सकती है। यह नंबर जारी करते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रश्नपत्रों एवं उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने के लिए इन्हें जियो टैगिंग युक्त वाहनों से पहुंचाया जाए। श्री उपाध्याय रविवार को वर्चुअल बैठक कर निर्देश दिए।


उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उच्च शिक्षा में परीक्षाओं की शुचिता, गरिमा व गोपनीयता को बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्नातक, परास्नातक और अन्य पाठ्यक्रम से संबंधित संचालित हो रही परीक्षाओं का जायजा लिया।

सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट पहले ही पहुंचाया जाए। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की जांच के लिए सचल दल की संख्या में वृद्धि करने के भी निर्देश दिए। नोडल सेंटर पर पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाए।

आपको बता दें, आए दिन परीक्षा से पहले पेपर लीक होने जैसी खबरें आ जाती है, जिसका सबसे ज्यादा असर उन उम्मीदवारों पर होता है जो दूर दराज से परीक्षा देने के लिए केंद्र पहुंचते हैं। परीक्षा लीक होने के बाद, परीक्षा रद्द कर दी जाती है, और उम्मीदवार परीक्षा की नई तारीख के इंतजार में बैठे रहते हैं। जितनी देर से परीक्षा होती है, उतनी ही देरी से रिजल्ट जारी किया जाता है। इसी के  साथ नियुक्ति प्रक्रिया में देरी होती है। इन सभी परिस्थितियों से बचने के लिए व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया है। ताकि परीक्षा का संचालन सही से ढंग से कियाी जा  सके।

सरकार ने मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान की

सरकार ने मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान की


उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की दिशा में सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। देश में मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान बना दी है। अब सिर्फ पांच एकड़ के विकसित भूखंड पर ही मुक्त विश्वविद्यालय को खोलने की मंजूरी मिल जाएगी। अभी इसके लिए 40 से 60 एकड़ विकसित भूखंड होना जरूरी था। देश में मुक्त विश्वविद्यालयों के विस्तार की राह में यह एक बड़ी अड़चन थी। शहरी क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर भूमि मिलना मुश्किल था।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मुक्त विश्वविद्यालयों के लंबे समय से अटके कई प्रस्तावों पर मंथन के बाद यह फैसला लिया है। इसे लेकर अधिसूचना भी जारी हो गई है। वैसे भी मुक्त विश्वविद्यालयों को खोलने के मौजूदा नियम करीब 33 साल पहले यानी 1989 में तैयार किए गए थे। तब से यही प्रचलन में है। इस बीच इन्हीं अड़चनों के चलते देश में अब तक सिर्फ एक केंद्रीय मुक्त विश्वविद्यालय सहित करीब 14 मुक्त विश्वविद्यालय ही खुल सके हैं। यूजीसी के चेयरमैन डाक्टर एम जगदीश कुमार के मुताबिक, मुक्त विश्वविद्यालयों को खोलने से जुड़े नियमों को शिथिल करने से देश में मुक्त विश्वविद्यालय तेजी से खुलेंगे। इनकी पहुंच भी देश के कोने-कोने तक होगी। अभी देश का एक बड़ा वर्ग इसलिए भी उच्च शिक्षा से वंचित है, क्योंकि उच्च शिक्षा अभी भी उनकी पहुंच से काफी दूर है। साथ ही उनके पास संसाधन भी नहीं है।


यूजीसी ने मुक्त विश्वविद्यालयों के खोलने से जुड़े नियमों को शिथिल करने के साथ ही अन्य नियमों को यथावत रखा है। जिसमें फैकल्टी और दूसरी सुविधाएं शामिल हैं। यूजीसी का मानना है कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। मुक्त विश्वविद्यालयों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी होगी।

Sunday, May 22, 2022

बीएसए फिरोजाबाद पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड, सूचनाएं मुहैया नहीं कराने पर हुई कार्रवाई

बीएसए फिरोजाबाद पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड, सूचनाएं मुहैया नहीं कराने पर हुई कार्रवाई



फिरोजाबाद। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाएं मुहैया न कराने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगा है। यह कार्रवाई राज्य सूचना आयुक्त ने की है। अर्थदंड की धनराशि की कटौती करने के लिए राज्य सूचना आयोग की ओर से उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।


टूंडला क्षेत्र के गांव जटपुरा निवासी पुन्नीराम ने बेसिक शिक्षा विभाग से सूचनाएं मांगी थी। न मिलने पर आगे अपील की। अपील के बाद भी सूचनाएं मुहैया नहीं कराए जाने को राज्य सूचना आयुक्त ने गंभीरता से लिया। अर्थदंड की धनराशि वसूलने के आदेश मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा को दिए हैं।

सीबीएसई ने किया बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र पैटर्न में बदलाव

CBSE : बोर्ड परीक्षा में 30% वैकल्पिक सवाल घटाए गए, योग्यता आधारित सवालों की संख्या 10% बढ़ी


लखनऊ : केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने सत्र 2022-23 की बोर्ड परीक्षाओं का पैटर्न जारी कर दिया है। पैटर्न से साफ हो गया है कि बोर्ड परीक्षाओं में वही छात्र आगे रहेंगे जो रटने की बजाय समझकर पढ़ाई करेंगे। इस बार वैकल्पिक सवालों को 50प्रतिशत से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। कुल 30 वैकल्पिक सवाल पैटर्न में कम किए गए हैं।


समझ को बताते हैं केस स्टडी पर सवाल: विशेषज्ञों की मानें तो बीते दो वर्षों में कोरोना की वजह से सीबीएसई के प्रश्न पत्र बोर्ड परीक्षा में काफी सरल रहे। अब हालात सामान्य होने पर बोर्ड ने एक बार फिर पुराने रुख पर लौटते हुए छात्रों के सामने केस स्टडी, क्षमता जांच आधारित प्रश्न को समाहित करने का फैसला लिया है। केस स्टडी पर आधारित सवाल छात्र की क्षमता का सही आकलन करेंगे। इसके लिए छात्रों को अच्छी तैयारी के साथ बोर्ड परीक्षा में जाना होगा।


वर्ष 2021-22 में बोर्ड की परीक्षाएं दो भागों टर्म एक और टर्म दो में बांट कर करायी गई। जिसे सत्र 2022-23 से खत्म कर दिया गया है। अब एक ही परीक्षा में छात्रों का मूल्यांकन किया जाना है। आगामी बोर्ड परीक्षाओं में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव भी दिखेगा। इसी के आधार पर तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं।


नए प्रारूप के हिसाब से तैयारी: सीबीएसई  बोर्ड की ओर से सत्र 2021-22 की परीक्षाओं के प्रश्न पत्र का प्रारूप आ गया है। सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है इसी प्रारूप के आधार पर छात्र-छात्राओं की तैयारी कराएं। ताकि समय से छात्र परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर सकें। छात्रों की समझ को देखने के लिए केस स्टडी सवाल अहम भूमिका अदा करते हैं। क्योंकि केस स्टडी पर आधारित सवालों को रटने से हल नहीं किया जा सकता है।


योग्यता आधारित सवालों की संख्या 10 बढ़ी
सत्र 2022-23 में कक्षा नौ से 12 की परीक्षाओं में छात्रों का मूल्यांकन छात्र की समझ, योग्यता आधारित शिक्षा पर केन्द्रित होगा। नए सत्र की परीक्षाओं में योग्यता आधारित सवालों की संख्या दस फीसदी तक बढ़ाई जाएगी। बोर्ड ने इस सम्बंध में सभी प्रधानाचार्यों के लिए सर्कुलर जारी कर दिया है। 2021-22 की परीक्षाओं में 50 वैकल्पिक प्रश्न पूछे गए थे। जिन्हें घटाकर आगामी परीक्षाओं में 20 कर दिया गया है। कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के साथ कक्षा नौ और 11 की वार्षिक परीक्षाएं भी इसी प्रारूप पर होंगी। आन्तरिक मूल्यांकन में बदलाव नहीं किया गया।

योग्यता आधारित प्रश्न
50%

लघु-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
30%

वैकल्पिक प्रश्न
20%


सीबीएसई ने किया बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र पैटर्न में बदलाव


अब शैक्षणिक सत्र के अंत में एक बार वार्षिक परीक्षा लेगा बोर्ड
नौवीं और 11वीं में भी इसी बदले हुए पैटर्न पर ली जाएगी परीक्षा


नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्रों के पैटर्न में बदलाव किया है। नई शिक्षा नीति के तहत किए गए ये बदलाव मौजूदा सत्र से ही लागू होंगे। इसके तहत एक प्रश्नपत्र तीन घंटे का होगा। सीबीएसई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इसी सत्र (2022-23) से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं कोरोना पूर्व के वर्षो की भांति एक ही टर्म में सत्र के अंत में वार्षिक परीक्षा के रूप में आयोजित की जाएंगी।


सीबीएसई के निदेशक (अकादमिक) द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, इस वर्ष से 10वीं की सालाना बोर्ड परीक्षा में लगभग 40 प्रतिशत प्रश्न समझ आधारित होंगे। ये बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे, जिनमें केस स्टडी आधारित व पैराग्राफ पर आधारित प्रश्न प्रश्न होंगे। 20 प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ होंगे और बाकी के 40 प्रतिशत प्रश्न लघु उत्तरीय व दीर्घ उत्तरीय होंगे।


 12वीं की परीक्षा में 30 प्रतिशत प्रश्न समझ आधारित बहुविकल्पीय होंगे, जिनमें केस स्टडी व पैराग्राफ आधारित प्रश्न होंगे। 20 प्रतिशत वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे, जबकि शेष 50 प्रतिशत प्रश्न लघु और दीर्घ उत्तरीय पूछे जाएंगे। सीबीएसई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बोर्ड ने पहले की तरह वार्षिक परीक्षाओं का निर्णय सभी हितधारकों की प्रतिक्रिया लेने के बाद लिया है। ये परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी।


सीबीएसई ने कोरोना महामारी के कारण सत्र 2021-22 में 10वीं और 12वीं की परीक्षा दो टर्म में लेने का निर्णय किया था, लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए बोर्ड ने पहले की तरह शैक्षणिक सत्र से अंत में एक वार्षिक परीक्षा लेने का निर्णय किया है।
संयम भारद्वाज, परीक्षा नियंत्रक, सीबीएसई



पाठ्यक्रम में बदलाव : CBSE बोर्ड 10वीं व 12वीं में 20 फीसदी होंगे वस्तुनिष्ठ प्रश्न



सीबीएसई के 10वीं बोर्ड में 40 फीसदी क्षमता (कंपीटेंसी) आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं 12वीं में क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या 30 फीसदी रहेगी। अभी तक दसवीं और 12वीं में 10 फीसदी ही क्षमता आधारित प्रश्न रहते थे। इस बार से बोर्ड ने क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी है। बोर्ड ने 2022-23 सत्र का मूल्यांकन पैटर्न जारी कर दिया है। दसवीं और 12वीं में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या 20 फीसदी रहेगी।



बोर्ड की मानें तो क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या इस बार बढ़ाई गयी है। पहले दसवीं और 12वीं बोर्ड में 10 फीसदी प्रश्न क्षमता आधारित होते थे, लेकिन अब इसकी संख्या बढ़ा दी गयी है। अभी तक क्षमता आधारित प्रश्न केवल दीर्घ उत्तरीय ही पूछे जाते थे। अब मल्टीपल च्वाइस, केस स्टडी, लघु उत्तरीय प्रश्न में भी क्षमता आधारित प्रश्न को शामिल किया गया है।


ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण के कारण दसवीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा दो पार्ट में टर्म-1 और टर्म-2 ली गयी लेकिन 2023 में फिर एक ही बोर्ड की परीक्षा होगी। इसके लिए बोर्ड ने नौंवी-दसवीं और 11वीं-12वीं का प्रश्न पत्र पैटर्न जारी किया है।



मल्टीपल च्वाइस वाले भी होंगे प्रश्न : बोर्ड द्वारा मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न को रखा गया है। टर्म-1 परीक्षा में मल्टीपल च्वाइस के प्रश्न पूछे गये थे, जो विषयवार सिलेबस का 50 फीसदी था। अब 20 फीसदी वस्तुनिष्ठ प्रश्न में ही मल्टीपल च्वाइस के रहेंगे।


नौवीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षा इसी पैटर्न पर : बोर्ड ने स्कूलों को नौवीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षा भी इसी पैटर्न पर लेने का निर्देश दिया है। इससे छात्र अपना आकलन कर पायेंगे। बोर्ड द्वारा आंतरिक मूल्यांकन में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। आंतरिक मूल्यांकन पहले जैसे ही 20 फीसदी रखा गया है।


किताबी दुनिया से अलग सोचें बच्चे : किताबी दुनिया से बच्चे अलग सोचें, इसके लिए क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गयी है।


इसके तहत वास्तविक जीवन से जुड़े प्रश्न बोर्ड परीक्षा में पूछे जाएंगे। इससे छात्रों को वास्तविक जीवन और दिनचर्या की जानकारी होगी। बता दें कि अभी तक किताबी दुनिया से जुड़े प्रश्न ही परीक्षा के दौरान छात्रों से पूछे जाते थे। इसे देखते हुए लंबे विचार के बाद सीबीएसई बोर्ड ने प्रश्न पत्र के पैटर्न में यह बदलाव लाने का निर्णय लिया है। 

शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नाकाबिलियत के कारण बढ़ रहे अवमानना के मामले, लापरवाह शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई का हाईकोर्ट का आदेश

शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नाकाबिलियत के कारण बढ़ रहे अवमानना के मामले,  लापरवाह शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई का हाईकोर्ट का आदेश

शिक्षा विभाग के अधिकारी म्यूजिकल चेयर गेम में लिप्त,  अपना काम न कर दूसरे पर मढ रहे तोहमत : इलाहाबाद हाईकोर्ट


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अपना काम न कर दूसरे पर तोहमत मढ़ने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना मामलों की बाढ़ है। अधिकतर मामले प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के हैं।


 शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नाकाबिलियत के कारण अवमानना के मामले बढ़ रहे हैं। इससे कोर्ट कार्यवाही में समय खराब हो रहा है क्योंकि एक अवमानना केस वर्षों चलता है और अंत में आदेश का पालन किया जाता है। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है ताकि कोर्ट को इनके खिलाफ आदेश न करना पड़े।


यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सुनील कुमार दुबे की अवमानना याचिका पर अधिवक्ता शैलेश पांडेय व अन्य को सुनकर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आठ माह तक जिला विद्यालय निरीक्षक व अपर शिक्षा निदेशक बैठे रहे। जब अवमानना मामले की तारीख पास आई तो कहा उन्हें दो लाख से अधिक के भुगतान का अधिकार नहीं है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के अनुमोदन पर ही भुगतान किया जा सकता है। यह भी कहा कि शिक्षा निदेशक को संस्तुति भेज दी गई है।


कोर्ट ने कहा कि माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की आदत है कि अपना कर्तव्य पालन न करना और ठीकरा दूसरे अधिकारी पर फोड़ देना। अधिकारियों को सर्कुलर की जानकारी थी कि निदेशक का अनुमोदन जरूरी है, फिर भी चुपचाप बैठे रहे और कोर्ट में पेश होने से पहले शिक्षा निदेशक को पत्रावली भेज दी। उसके बाद समय मांग लिया जबकि संस्तुति तत्काल भेजनी थी। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को एक सप्ताह में निर्णय लेकर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।


याची आदर्श इंटर कॉलेज मिर्जापुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक को छठें व सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत याची को अवशेष वेतन भुगतान करने का आदेश दिया था। याची को 20,73418 रुपये का भुगतान किया जाना है, जिसका पालन नहीं किया गया।


✍️  कोर्ट आर्डर

Saturday, May 21, 2022

परिषदीय विद्यालयों में इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को पूर्णकालिक प्र०अ० का वेतनमान एवं अन्य लाभ दिए जाने के संबंध में उ०प्र० प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद ईकाई का बीएसए सीतापुर को ज्ञापन

परिषदीय विद्यालयों में इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को पूर्णकालिक प्र०अ० का वेतनमान एवं अन्य लाभ दिए जाने के संबंध में उ०प्र० प्राथमिक शिक्षक संघ का ज्ञापन





जुलाई से बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने की तैयारी, 2273 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सबसे पहले होगा लागू

जुलाई से बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने की तैयारी


2273 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सबसे पहले होगा लागू

इसके बाद एडेड, वित्तविहीन विद्यालयों में कराया जाएगा अमल


लखनऊ : प्रदेश के 33 हजार से अधिक माध्यमिक विद्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग इसे चरणवार लागू करेगा। सबसे पहले राजकीय माध्यमिक कालेजों में इसे जुलाई से ही लागू किया जा सकता है। इसके बाद अशासकीय सहायताप्राप्त यानी एडेड और फिर अंत में वित्तविहीन माध्यमिक कालेजों में अमल कराया जाएगा।


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य विश्वविद्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दिया है। साथ ही वहां वेतन भुगतान इसी उपस्थिति के आधार पर करने के निर्देश हैं। इसी तर्ज पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी कदम बढ़ाया है। प्रदेश में अभी 33,734 माध्यमिक विद्यालय हैं जिनमें 1.27 करोड़ छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए 3.92 लाख शिक्षक कार्यरत हैं।


विभाग ने स्कूलों को दिए जाने वाले वार्षिक बजट में पहले ही प्रविधान किया था कि विद्यालय बायोमीट्रिक मशीन लगवाएं ताकि उनकी हाजिरी दर्ज हो सके। कई स्कूलों ने बायोमीट्रिक मशीनें लगाई हैं और कुछ जगह लगाई जा रही हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री के समक्ष 100 दिन की कार्ययोजना में इसे शामिल किया गया । अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने बताया कि बायोमीट्रिक हाजिरी प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में लागू की जाएगी। पहले चरण में 2273 कालेजों में जुलाई से ही इसे अनिवार्य किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 2000 बच्चों को दिए जाएंगे लैपटाप

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 2000 बच्चों को दिए जाएंगे लैपटाप


लखनऊ: प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के दो हजार बच्चों को लैपटाप प्रदान करने का निर्णय लिया है। सरकार ने इन बच्चों को छह माह में लैपटाप प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। इस पर करीब आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे।


कोरोना वायरस के कारण निराश्रित हुए बच्चों के लिए सरकार ने उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जून 2021 में शुरू की थी। सरकार इन बच्चों के पालन-पोषण से लेकर इनकी पढ़ाई तक का खर्च उठाती है। 


ऐसे बच्चों को चार हजार रुपये प्रति माह सरकार देती है। योजना के तहत अब तक 11,049 पात्र बच्चों का चयन हुआ है। इन्हें प्रत्येक तीन माह पर 12-12 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। इनमें से 480 बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता दोनों की ही मृत्यु कोरोना के कारण हुई थी। शेष 10,569 ऐसे बच्चे हैं जिनके माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु हुई है। 


प्रदेश सरकार विद्यालय जाने योग्य सभी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करवा रही है। इनमें से दो हजार बच्चों को सरकार आगामी छह माह के अंदर लैपटाप प्रदान करेगी।

गर्मी की छुट्टी में शिक्षकों को स्कूल बुलाने पर आपत्ति

गर्मी की छुट्टी में शिक्षकों को स्कूल बुलाने पर आपत्ति



प्रयागराज। माध्यमिक स्कूलों में 21 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश में समर क्लास के नाम पर शिक्षकों और बच्चों को बुलाने के कुछ जिला विद्यालय निरीक्षकों के आदेश पर शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने आपत्ति जताई है।


 शिक्षक विधायक ने शुक्रवार को यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल से मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया। कहा कि ऐसे समय में जबकि अधिकतम तापमान 45 डिग्री के ऊपर चल रहा है तो किसी छात्र या छात्रा के साथ कोई घटना हो जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा। 


माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडल मंत्री अनुज कुमार पांडेय ने बताया कि बोर्ड सचिव ने कहा कि उन्होंने केवल शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया है। ग्रीष्मावकाश में विद्यालय खोलने का कोई निर्देश जारी नहीं किया है। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष राम प्रकाश पांडेय, जिला मंत्री जगदीश प्रसाद, कोषाध्यक्ष रविंद्र त्रिपाठी आदि रहे।

UP Board Result 2022 Kab Aayega? 47 लाख छात्र पूछ रहे सवाल; UPMSP ईमेल पर भेजेगा हाई स्कूल, इंटर रिजल्ट

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट जून में हो सकता है जारी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं का परिणाम जून के दूसरे हफ्ते में रिजल्ट जारी कर सकता है। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा होने के बाद से रिजल्ट जारी करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। माना जा रहा है माध्यमिक शिक्षा विभाग जल्द ही परिणाम की तारीख का ऐलान करेगा।

UP Board Result 2022 Kab Aayega? 47 लाख छात्र पूछ रहे सवाल; UPMSP ईमेल पर भेजेगा हाई स्कूल, इंटर रिजल्ट

UP Board Result 2022 Kab Aayega? एक तरफ यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 कब आएगा जैसे 47 लाख छात्र-छात्राएं पूछ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर UPMSP द्वारा यूपी बोर्ड 10वीं रिजल्ट 202 और यूपी बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2022 ईमेल से भेजने की तैयारियां की जा रही हैं।।


नई दिल्ली : UP Board Result 2022 Kab Aayega? यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में सम्मिलित हुए 47 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के मन में यही सवाल है कि यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 कब आएगा? उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की तरफ से आधिकारिक तौर पर UP Board Result 2022 Date को लेकर कोई भी घोषणा अभी तक नहीं की गई है। हालांकि, परिषद के सूत्रों से प्राप्त अपडेट के आधार पर प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 8 मई 2022 तक हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य पूरा हो जाने के बाद शासन से अनुमति मिल गई है और इस समय यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 बनाए जा रहे हैं।

UPMSP ईमेल पर भेजेगा हाई स्कूल, इंटर रिजल्ट (UP Board Result 2022 on Email)

दूसरी तरफ, यूपीएमएसपी द्वारा यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 को इस बार आधिकारिक वेबसाइट, upmsp.edu.in और यूपी रिजल्ट पोर्टल, upresults.nic.in पर जारी किए जाने के साथ-साथ ईमेल (UP Board Result 2022 on Email) से भी उपलब्ध कराए जाने की तैयारियां की जा रही हैं। यूपी बोर्ड के अधिकारियों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार हाई स्कूल के 25.25 लाख स्टूडेंट्स को उनका यूपी बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2022 और इंटर के 22.50 लाख स्टूडेंट्स को उनका यूपी बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2022 घर बैठे ही उनके रजिस्टर्ड ईमेल आइडी पर मिल जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इस नई प्रक्रिया से स्टूडेंट्स को साइबर कैफे के चक्कर नहीं लगाने होंगे और परिणाम देखने के लिए अत्यधिक यूजर्स के एकसाथ विजिट करने से वेबसाइट हैंग होने की समस्या भी नहीं रहेगी।

बता दें कि यूपी बोर्ड द्वारा हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन 24 मार्च से 12 अप्रैल 2022 तक किया गया था। इसके बाद, मूल्यांकन कार्य 8 मई तक पूरा कर लिया गया। हालांकि, एक लाख से अधिक छात्रों के छूटे प्रैक्टिकल का आयोजन 17 मई से 20 मई 2022 तक पूरे किए जाने के निर्देश बोर्ड द्वारा जारी किए गए थे।

Friday, May 20, 2022

कार्यवाहक प्रधानाचार्य को सेवानिवृत्ति के बाद प्रवक्ता की पेंशन देना नियमविरुद्ध, न्यायालय ने दिया प्रधानाचार्य पद के वेतन के आधार पर लाभ देने का आदेश

कार्यवाहक प्रधानाचार्य को सेवानिवृत्ति के बाद प्रवक्ता की पेंशन देना नियमविरुद्ध, न्यायालय ने दिया प्रधानाचार्य पद के वेतन के आधार पर लाभ देने का आदेश
बिना पदोन्नति सालों साल कार्यवाहक प्र०अ० के रूप में कार्यरत बेसिक शिक्षक क्यों अपने हक के लिए नहीं लड़ते!!?


परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं की गतिमान स्थानांतरण/समायोजन प्रक्रिया के संबंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को लिखा पत्र

परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं की गतिमान स्थानांतरण/समायोजन प्रक्रिया के संबंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को लिखा पत्र

हरदोई में बेसिक शिक्षा का रिश्वतखोर बाबू घूस लेते गिरफ्तार, सात लाख एरियर भुगतान के लिए मांगे थे 1.40 लाख

हरदोई में बेसिक शिक्षा का रिश्वतखोर बाबू घूस लेते गिरफ्तार, सात लाख एरियर भुगतान के  लिए मांगे थे 1.40 लाख

एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार घूस लेते दबोचा


हरदोई । शिक्षक से एरियर भुगतान के लिए घूस मांगने वाले उपबेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिपिक जैनुल खां को गुरुवार को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सात लाख एरियर भुगतान के लिए 20 फीसदी यानी 1.40 लाख रुपये घूस मांगी थी।


पिहानी के संविलियन विद्यालय जाजूपुर में तैनात सहायक अध्यापक महेश कुमार 2019 में गम्भीर बीमारी के शिकार हो गए। कई महीने इलाज चला। इस अवधि का उनका सात लाख एरियर बकाया था। कई बार चक्कर लगाने पर भी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने लिपिक जैनुल से बात की।


उन्होंने 20 फीसदी कमीशन पर एरियर भुगतान कराने को कहा। महेश कुमार ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया। गुरुवार को जैनुल ने महेश को दस हजार रुपये लेकर कार्यालय आने को कहा। कार्यालय पहुंच जैसे ही 10 हजार रुपये बाबू को दिए एंटी करप्शन की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिए। सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। बीएसए वीपी सिंह ने बताया कि नियमानुसार कार्रवाई होगी। 

Thursday, May 19, 2022

हर स्कूल को मिलेंगे कंप्यूटर और प्रोजेक्टर, संचालित होगी उत्कृष्ट योजना

हर स्कूल को मिलेंगे कंप्यूटर और प्रोजेक्टर, संचालित होगी उत्कृष्ट योजना

विश्व बैंक देगा 500 मिलियन डालर, शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों का भी होगा कायाकल्प


लखनऊ  :  प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए विश्व बैंक की सहायता से उत्कृष्ट (यूपी नालेज बेस्ड रिस्पांस टू स्कूलिंग एंड टीचिंग ) योजना संचालित की जाएगी। योजना के संचालन के लिए विश्व बैंक 500 मिलियन डालर (तकरीबन 3850 करोड़ रुपये) की आर्थिक सहायता देगा। उत्कृष्ट योजना के तहत प्री प्राइमरी, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, कौशल विकास और शिक्षक प्रशिक्षण के ढांचे को डिजिटल टेक्नोलाजी से लैस करने के साथ शिक्षकों को भी डिजिटल शिक्षा के लिए तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार ने योजना के संचालन के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है। प्रदेश में योजना के संचालन के लिए विस्तृत खाका तैयार किया जा रहा है।


प्री-प्राइमरी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को तकनीकी से लैस किया जाएगा। पढ़ाई शुरू करने वाले बच्चों के लिए टीचिंग-लर्निंग मैटीरियल उपलब्ध कराया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छह माह के सेवारत प्रशिक्षण के माध्यम से उनका पेशेवर तरीके से विकास किया जाएगा। 


वहीं बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के सीखने-समझने की क्षमता में वृद्धि के लिए टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल शिक्षा के लिए 1.35 लाख स्कूलों में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे। विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बच्चों के लर्निंग आउटकम को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किये जाएंगे। 


बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ाने में शिक्षकों के लिए मददगार साबित होने वाले डिजिटल तकनीक पर आधारित ट्रेनिंग माड्यूल और शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पालिटेक्निक के सहयोग से 2000 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं के कौशल विकास के लिए ऐसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किये जाएंगे जिनकी बाजार में मांग हो।


डायट बनेंगे स्मार्ट

शिक्षक प्रशिक्षण के राज्य और जिला स्तरीय संस्थानों को तकनीकी दृष्टि से सुदढ़ करना भी योजना का एक प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में स्मार्ट कलास विकसित किये जाएंगे। हर डायट में वाई-फाई सुविधा से युक्त कंप्यूटर लैब, विभिन्न विषयों के लैब और पुस्तकालय स्थापित किये जाएंगे। आवासीय प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक डायट में हास्टल भी बनाए जाएंगे।


योजना के ये भी हैं उद्देश्य

• कोरोना महामारी और आपदाओं के कारण बच्चों की पढ़ाई और उनके सीखने-समझने की क्षमता में के लिए शैक्षिक व्यवस्था को सक्षम बनाना।

• स्कूलों में बच्चों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में किशोर वय की छात्राओं के ड्रापआउट रेट में कमी लाना।

• राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मंशा के अनुरूप आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्कूलों के बीच समन्वय स्थापित करना

Quality of School Education: स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए इसी साल से छिड़ेगी मुहिम, NCERT शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगा रिपोर्ट

Quality of School Education: स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए इसी साल से छिड़ेगी मुहिम, NCERT शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगा रिपोर्ट

शिक्षा की गुणवत्ता परखने को इसी साल से मुहिम, स्कूलों के साथ छात्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार
 

स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता (quality of school education) को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। अब शैक्षणिक बदलावों की सालाना परख होगी। इस पूरी व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर गठित एक स्वतंत्र इकाई देखेगी।


नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच उसमें आने वाले बदलावों की अब सालाना परख भी होगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र इकाई गठित होगी, जो इस पूरी व्यवस्था को देखेगी। फिलहाल इस प्रस्तावित एजेंसी को 'परख' नाम दिया गया है। वहीं इस पूरी मुहिम को इसी साल से शुरू करने की तैयारी भी है। इसमें स्कूलों के साथ छात्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा।




एनसीईआरटी को सौंपी जिम्‍मेदारी

इसके आधार पर ही उन्हें जरूरी सुविधाएं और मदद मुहैया कराई जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल इसके लिए रोडमैप तैयार करने का जिम्मा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को सौंपा गया है। जो जल्द ही इस रिपोर्ट को शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगी।


जिम्मा एनसीईआरटी के पास

वैसे अभी भी स्कूली शिक्षा को गुणवत्ता को परखने का जिम्मा एनसीईआरटी के पास ही है। जो फिलहाल नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) के जरिए इसे जांचने का काम करती है। इस बीच एनएएस- 2021 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट जल्द ही जारी होने के संकेत दिए गए है। सूत्रों की मानें तो स्कूलों की गुणवत्ता को परखने के लिए एनएएस-2021 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट ही आधार बनेगी।


बदलावों को परखा जाएगा

इसके आधार पर बदलावों को परखा जाएगा। मंत्रालय की प्रस्तावित योजना के मुताबिक परख देश भर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की गुणवत्ता को जांचने का काम करेगी। यह एक स्वतंत्र एजेंसी रहेगी। इसके साथ ही इसमें ऐसे प्रोफेशनल्स को शामिल किया जाएगा, जिनकी इस तरह के आकलन में विशेषज्ञता है। यह पूरा आकलन आनलाइन होगा।


प्रत्येक छात्र की संपूर्ण प्रगति भी सामने आएगी

इसके जरिए जहां स्कूलों की गुणवत्ता का पता चलेगा, वहीं प्रत्येक छात्र की संपूर्ण प्रगति भी सामने आएगी। गौरतलब है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को जांचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इस पहल के साथ राज्यों से भी अपने स्तर पर गुणवत्ता को आंकने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है।


इनोवेशन पर भी होगा फोकस

स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को परखने में अब इनोवेशन पर भी फोकस होगा। जिसमें प्रत्येक स्कूलों में इस दिशा में उठाए गए कदमों और ऐसी प्रतिभाओं को पहचाना जाएगा। साथ ही स्कूलों की रुचि को पहचान करके उन्हें आगे बढ़ने में मदद दी जाएगी। वैसे भी स्कूली छात्रों को इनोवेशन से जोड़ने के लिए मौजूदा समय में स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब (Atal Tinkering Labs, ATL) स्थापित किए जा रहे है। जहां बच्चे अपनी इनोवेशन से जुड़ी प्रतिभा को निखार सकते है।

"Building perspective on Education" विषय पर यू-ट्यूब टॉक सेशन के सम्बन्ध में।

"Building perspective on Education" विषय पर यू-ट्यूब टॉक सेशन के सम्बन्ध में।



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परिषदीय विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां 20 मई से

परिषदीय विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां 20 मई से



लखनऊ: बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां शुक्रवार से शुरू हो रही हैं। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार 16 जून से विद्यालय खुल जाएंगे और पठन-पाठन होगा। शैक्षिक सत्र जुलाई के बजाए अब एक अप्रैल से शुरू होता है। 


अवकाश की समय सारिणी भी बदल चुकी है। 21 मई से 30 जून तक मिलने वाला ग्रीष्मावकाश अब 20 मई से 15 जून तक रहेगा। प्राथमिक स्कूलों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश भी होता है।






 परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने बताया कि विद्यालयों में गुरुवार तक पढ़ाई होगी, शुक्रवार से छुट्टियां शुरू होंगी जो 15 जून तक रहेंगी। 16 जून को स्कूल सुबह साढ़े सात बजे खुलेंगे और तेजी से पढ़ाई कराई जाएगी।

अनुदेशकों के मानदेय में प्रदेश सरकार को कितना बजट दिया, नहीं बता सका केंद्र, अगली सुनवाई 24 मई को

अनुदेशकों के मानदेय में प्रदेश सरकार को कितना बजट दिया, नहीं बता सका केंद्र, अगली सुनवाई 24 मई को

New update 21 May 2022

इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 27000 से अधिक अनुदेशकों का मानदेय 17000 रुपये प्रतिमाह देने के एकल खंडपीठ के निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपीलों पर शुक्रवार को भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। भारत सरकार की ओर से मुख्य न्यायमूर्ति की खंडपीठ के सामने उपस्थित एएसजीआई कोर्ट में यह स्पष्ट नहीं कर सके कि केंद्र सरकार ने अनुदेशकों को दिए जाने वाले मानदेय के मद में राज्य सरकार को कितना पैसा दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 मई को होगी।


एएसजीआई ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें इस मुद्दे पर बात रखने के लिए कुछ और समय दिया जाए। केंद्र की तरफ से यह भी कहा गया कि अगली तारीख पर किसी अधिकारी को कोर्ट में बुलाया जाएगा ताकि इस मामले में सही जानकारी से कोर्ट को अवगत कराया जा सके।


मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ इस मामले में राज्य सरकार द्वारा दाखिल अपीलों पर सुनवाई कर रही है। एकल जज के आदेश के खिलाफ सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ बेंच दोनों जगह पर अपील कर रखी है। सरकार की इन अपीलों पर एक साथ सुनवाई हो रही है।


पैसा जारी करने के बावजूद नहीं दिया गया 17 हजार मानदेय

लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वहां के वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्रा तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी इस मामले में सरकार की तरफ से उपस्थित रहे। सरकार का कहना है कि अनुदेशकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है और ऐसे में संविदा में दी गईं शर्तें और मानदेय उन पर लागू होगा। कहा गया कि केंद्र सरकार ने इस मद में आवश्यकतानुसार पैसा राज्य सरकार को अपने अंश का नहीं दिया है। ऐसे में सरकार अपने स्तर से अनुदेशकों को भुगतान कर रही है।


अनुदेशकों की तरफ से कहा गया कि केंद्र सरकार ने अपनी योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय 2017 में 17 हजार कर दिया था। यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा पैसा जारी करने के बावजूद उनको 17000 प्रतिमाह की दर से मानदेय नहीं दिया जा रहा है, जो गलत है। कोर्ट अब इन अपीलों पर 24 मई को सुनवाई करेगी।





उच्च प्राथमिक स्कूलों के अनुदेशकों के मानदेय में अब सुनवाई 20 मई को



 प्रयागराज : प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 27000 से अधिक अनुदेशकों का मानदेय 17000 रुपया प्रतिमाह देने के एकल जज के निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपीलों पर बुधवार को भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। 


प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रयागराज व लखनऊ की खंडपीठों में अपीलें दाखिल कर रखी हैं। लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्रा तथा इलाहाबाद से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी सरकार की ओर से बहस कर रहे हैं। 



अनुदेशकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है और ऐसे में संविदा शर्तों और तय मानदेय उन पर लागू होगा। कहा गया कि केंद्र ने राज्य सरकार को अपने अंश का पूरा भुगतान नहीं किया है। राज्य सरकार अपने स्तर से अनुदेशकों का भुगतान कर रही है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की खंडपीठ कर रही है।

JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय 6वीं कक्षा के परिणाम पर बड़ी खबर, जानें कब होगा घोषित

JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय 6वीं कक्षा के परिणाम पर बड़ी खबर, जानें कब होगा घोषित


JNVST Class 6th Result 2022 नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा 30 अप्रैल को आयोजित की गई थी। इसके बाद से ही स्टूडेंट्स रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। परीक्षार्थी ध्यान दें कि नतीजे जारी होने के बाद वे एनवीएस की आधिकारिक वेबसाइट पर नतीजे देख पाएंगे।



नई दिल्ली : JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय 6वीं कक्षा का परिणाम इंतजार कर रहे छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके पैरेंट्स के लिए अहम खबर है। नवोदय विद्यालय समिति,एनवीएस (Navodaya Vidyalaya Samiti (NVS) जल्द ही छठवीं कक्षा का परिणाम जारी करेगा। 


इस कक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित हुई जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा (JNVST) 2022 का परिणाम का लिंक एनवीएस की आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in पर उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे में जो भी, छात्र-छात्राएं जेएनवीएसटी कक्षा 6 परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, वे ध्यान रखें कि एक बार रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र और उनके माता-पिता स्टूडेंट्स के परीक्षा के पंजीकरण संख्या / रोल नंबर और जन्म तिथि का उपयोग करके जेएनवी कक्षा 6 प्रवेश परिणाम 2022 की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा, स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स के लिए नीचे आसान स्टेप्स दिए गए हैं, जिनको फाॅलो करके भी रिजल्ट देखा जा सकता है।




JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा परिणाम जांचने के लिए इन स्टेप्स को करें फॉलो


नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा परिणाम जांचने के लिए सबसे पहले स्टूडेंट्स आधिकारिक वेबसाइट- navodaya.gov.in पर जाएं। इसके बाद, "जेएनवीएसटी कक्षा 6 परिणाम 2022" लिंक पर क्लिक करें। अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्म तिथि दर्ज करें और सबमिट पर क्लिक करें। इसके बाद, आपका जेएनवीएसटी कक्षा 6 का परिणाम स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। परिणाम डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए एक प्रिंटआउट लें।


नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा 30 अप्रैल को आयोजित की गई थी। इसके बाद से ही स्टूडेंट्स रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि स्टूडेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जेएनवीएसटी 6वीं कक्षा परिणाम 2022 की तारीख और समय के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। केवल मीडिया रिपोर्ट्स में संभावना जताई जा रही है कि नतीजे जल्द घोषित हो सकते हैं, इसलिए स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करते रहें।

Wednesday, May 18, 2022

यूपी के डिग्री कॉलेजों को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है योगी सरकार, जानें क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

यूपी के डिग्री कॉलेजों को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है योगी सरकार, जानें क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

यूपी के डिग्री कॉलेजों में सुविधाएं बढ़ाने को लेकर योगी सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार सरकारी डिग्री कॉलेज में सरकार पढ़ाई-लिखाई के अलावा खेल-कूद, और योग को प्रोत्साहन की तैयारी है।


यूपी के सरकारी डिग्री कॉलेजों को लेकर योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। योगी सरकार ऐसे डिग्री कॉलेजों में कई तरह की सुविधाएं देने की तैयारी में हैं। जानकारी के अनुसार पढ़ाई-लिखाई के साथ खेलकूद, शारीरिक शिक्षा और योग को प्रोत्साहन देने के लिए योगी सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। 

आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि सरकारी डिग्री कॉलेजों को वित्तीय मदद सूबे का खेलकूद विभाग उपलब्ध कराएगा। विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत ऊंची और लंबी कूद, डिस्कस थ्रो के साथ ही सामान्य कोर्ट, सिंथेटिक कोर्ट तैयार किये जाएंगे। वहीं शारीरिक शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। खेलकूद विभाग द्वारा प्रस्तावित सुविधाएं के तहत सरकारी महाविद्यालयों में दौड़ने के लिए ट्रैक तैयार किये जाएंगे। डिस्कस थ्रो, लांग व हाई जंप के अलावा सामान्य कोर्ट/सिंथेटिक कोर्ट, वुमेन फ्लोरिंग/ग्रास कोर्ट तैयार किए जाएंगे।

साथ ही मेडिसिन बाल उपलब्ध कराए जाएंगे। इन सुविधाओं के लिए एक लाख रुपये प्रति महावद्यिालय की दर से दो करोड़ के बजट का प्रावधान एसएनडी (नई मांग) के जरिए प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने बताया कि राजकीय महाविद्यालयों में योग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने शारीरिक शक्षिकों को योग का प्रशिक्षण दिलाएगी।

इन शारीरिक शिक्षकों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा संचालित एचआरडी सेंटर व राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज द्वारा संचालित कार्यक्रमों में योग का प्रशक्षिण दिलाया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में राजकीय महाविद्यालयों में 86 शिक्षक कार्यरत हैं। 28 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए सरकार अधियाचन लोक सेवा आयोग को भेज रही है। साथ ही जिन 58 राजकीय कालेजों में शारीरिक शिक्षा के पद सृजित नहीं हैं, वहां पद सृजन का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिया गया है।

शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु स्थानांतरण नीति की गतिमान प्रक्रिया को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को पत्र लिखकर रखीं अपनी मांगे।

शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु स्थानांतरण नीति की गतिमान प्रक्रिया को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को पत्र लिखकर रखीं अपनी मांगे।


जनपद के अंदर स्थानांतरण को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सचिव परिषद को पत्र लिख रखीं मांगें, देखें

जनपद के अंदर स्थानांतरण को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सचिव परिषद को पत्र लिख रखीं मांगें, देखें 


SMC खातों को एकमात्र बैंक में खोले जाने की बाध्यता को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति, पत्र लिखकर बदलाव की रखी मांग

SMC खातों को एकमात्र बैंक में खोले जाने की बाध्यता को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति,  पत्र लिखकर बदलाव की रखी मांग




उत्साह : बीएड प्रवेश परीक्षा में टूटा तीन वर्षों का रिकॉर्ड, आए रिकार्ड तोड़ आवेदन

उत्साह : बीएड प्रवेश परीक्षा में टूटा तीन वर्षों का रिकॉर्ड,  आए रिकार्ड तोड़ आवेदन


बरेली । उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में इस बार आवेदकों की संख्या ने बीते तीन वर्ष के रिकार्ड को तोड़ दिया है। इस बार रुहेलखंड विश्वविद्यालय को प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। अभी तक 6.40 लाख अभ्यर्थी परीक्षा के लिए आवेदन कर चुके हैं। पिछले वर्ष यह संख्या 6.14 लाख तक गई थी। अभी आवेदन के लिए तीन दिन शेष हैं ऐसे में आंकड़ा और बढ़ना तय है।


रुहेलखंड विश्वविद्यालय इस समय बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन ले रहा है। ऑनलाइन आवेदन 18 अप्रैल से शुरू हुए थे। 15 मई तक बिना विलंब शुल्क के आवेदन हुए। 16 मई से 20 मई तक विलंब शुल्क के साथ आवेदन जारी हैं। वर्ष 2019 में भी रुहेलखंड विवि यह प्रवेश परीक्षा करवा चुका है। तब 6.09 लाख आवेदन आए थे। वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में लखनऊ यूनिवर्सिटी ने प्रवेश परीक्षा कराई। वर्ष 2020 में 591000 और वर्ष 2021 में 614000 लोगों ने आवेदन किया। इस बार बीते तीन वर्षों के रिकार्ड टूट चुके हैं। अभी तक 6.40 लाख आवेदक ऑनलाइन फार्म भर चुके हैं।


बीएड में आए रिकार्ड तोड़ आवेदन: यूपी बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक डा पीबी सिंह ने बताया कि बीते तीन वर्षों की तुलना में इस बार बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए रिकार्ड तोड़ आवेदन आए हैं। पिछले वर्ष लखनऊ विश्वविद्यालय ने 1500 रुपये फीस ली थी। हमने छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए फीस में 500 रुपये की भारी कटौती की।


परीक्षा केंद्रों की सूची भी जल्द होगी फाइनल


छह जुलाई को होने वाली प्रवेश परीक्षा के लिए केंद्रों के निर्धारण का काम भी तेजी से चल रहा है। कॉलेजों में मौजूद सुविधाओं के आधार पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय केंद्रों की सूची जारी करेगा। पर्याप्त संसाधन वाले ए और बी कैटेगरी के कॉलेजों को ही केंद्र बनाया जाएगा।

टेट पास बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक बरकरार, 14 जुलाई को अगली सुनवाई

टेट पास बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक बरकरार, 14 जुलाई को अगली सुनवाई


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी टेट पास करने वाले बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने पर पहले से लगाई गई रोक बरकरार रखी है। कोर्ट ने मामले में स्थगन आदेश को बढ़ाते हुए एनसीटीई को 14 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने प्रतीक मिश्रा व चार अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


मंगलवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि एनसीटीई जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं करेगी, वह कुछ नहीं कर सकती है। तो कोर्ट ने एनसीटीई को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई अब जुलाई में होगी। याची पक्ष की ओर से अधिवक्ता तान्या पांडेय ने तर्क दिया कि मामले में यूपी सरकार और एनसीटीई दोनों बच रहे हैं। वे स्थिति को स्पष्ट नहीं कर रहे हैं।


याची पक्ष का तर्क था कि राजस्थान हाईकोर्ट ने एनसीटीई (नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजूकेशन) के 28 जून 2018 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें बीएड डिग्री धारकों को भी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने के लिए पात्र माना गया है।


कहा गया कि जब नोटिफिकेशन ही रद्द कर दिया गया तो बीएड डिग्री धारक प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने के पात्र ही नहीं रहे। लिहाजा टेट 2021 पास करने वाले बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाण पत्र न जारी किए जाएं। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए टेट 2021 में क्वालीफाई करने वाले बीएड डिग्री धारकों को पात्रता प्रमाण पत्र अगली सुनवाई तक न जारी करने का आदेश दिया था। साथ ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी से भी जानकारी मांगी थी।

संविदा पर नियुक्ति का आदेश नहीं कर सकते : हाईकोर्ट

संविदा पर नियुक्ति का आदेश नहीं कर सकते : हाईकोर्ट



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सेवक को नियुक्ति पत्र जारी करने से इनकार करने के एकल पीठ के आदेश से सहमत होते हुए मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि संविदा पर नियुक्त करने के लिए याचिका नहीं की जा सकती।



एकल पीठ ने कहा था कि ग्राम रोजगार सेवक कोई पद नहीं है। उन्हें एक से दो साल के लिए संविदा पर नियुक्त किया जाता है। संविदा पर नियुक्त करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। याची क्षतिपूर्ति मांग सकता है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी एवं न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने शैजाद ख़ान की अपील खारिज करते हुए दिया है। खंडपीठ ने कहा कि अपीलार्थी ऐसा कोई कानून नहीं दिखा सका जिसके तहत उसे नियुक्ति पाने का अधिकार मिला हो।

याची ने अलीगढ़ जिले के विकासखंड खैर की ग्राम पंचायत राजपुर को ग्राम रोजगार सेवक नियुक्त करने का निर्देश जारी करने की याचिका की। जिसे एकल पीठ ने खारिज कर दिया। इसे अपील में चुनौती दी गई थी।

कोर्ट ने 23 नवंबर 2007 के शासनादेश के हवाले से कहा कि संविदा पर नियुक्ति पर ग्राम पंचायत का निर्णय अंतिम होगा। उसे ही याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। अन्य फैसले के हवाले से कोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेश से किसी के अधिकार का सृजन नहीं होता। संविदा पर नियुक्त करने के आदेश के लिए याचिका नहीं की जा सकती। कोर्ट ने संविदा पर नियुक्त करने की मांग खारिज करने के एकल पीठ के फैसले पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

फैसला सरकार का : 2003 तक मान्यता प्राप्त मदरसों को अनुदान नहीं

फैसला सरकार का :  2003 तक मान्यता प्राप्त मदरसों को अनुदान नहीं


लखनऊ । प्रदेश सरकार अब वर्ष 2003 तक के आलिया स्तर की स्थाई मान्यता प्राप्त मदरसों को अनुदान नहीं देगी। यह निर्णय मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से लाए गए प्रस्ताव पर लिया गया।


दरअसल, प्रदेश सरकार ने यह निर्णय प्रदेश की पिछली समाजवादी सरकार के कार्यकाल में हुए फैसले को पलटते हुए लिया है। सपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2003 तक की मान्यता प्राप्त 146 मदरसों को अनुदान सूची पर लिए जाने का निर्णय हुआ था। उसके बाद 100 मदरसे अनुदान सूची पर ले भी लिए गए थे।


बाकी बचे 46 मदरसों को अनुदान सूची पर लेने से पहले ही सरकार में अर्न्तकलह शुरू हो गई थी, उसके बाद यह 46 मदरसे अनुदान पर नहीं लिए जा सके। इनमें से कुछ मदरसों ने अदालत की शरण ले ली। इस वक्त प्रदेश के कुल 560 मदरसों को सरकार द्वारा अनुदान दिया जा रहा है। अनुदान के तहत इन मदरसों के शिक्षकों, कर्मियों का भुगतान किया जाता है।

NTSE : मेधावियों को छह महीने से छात्रवृत्ति परीक्षा का इंतजार

NTSE : मेधावियों को छह महीने से छात्रवृत्ति परीक्षा का इंतजार


प्रयागराज : हजारों मेधावियों को छह महीने से राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएसई) का इंतजार है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से हर साल देशभर से दो हजार मेधावियों को छात्रवृत्ति के लिए चुना जाता है। मेधावियों का चयन दो स्तर की परीक्षा के आधार पर किया जाता है।


मनोविज्ञानशाला के संयोजन में राज्य स्तरीय परीक्षा नवंबर के प्रथम रविवार को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय कराता है। दूसरे चरण की परीक्षा एनसीईआरटी की ओर से मई के दूसरे रविवार को होती है। लेकिन 2021 की फाइल शिक्षा मंत्रालय में फंसने से अब तक परीक्षा नहीं हो सकी है।


उत्तर प्रदेश के लिए नोडल एजेंसी मनोविज्ञानशाला को भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इस परीक्षा में किसी भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल में 10वीं में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकते हैं।



यूपी का सर्वाधिक कोटा

एनटीएसई के प्रथम चरण की परीक्षा में सफल छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलता है। दूसरे चरण के लिए प्रत्येक राज्य का कोटा तय है। इसमें सर्वाधिक कोटा यूपी का है। यूपी से 1408 मेधावी दूसरे चरण की परीक्षा देते हैं। महाराष्ट्र 774, बिहार 691, पश्चिम बंगाल 569 और मध्य प्रदेश के 530 मेधावी दूसरे चरण में जाते हैं।

11वीं से पीएचडी तक मिलता है वजीफा

सफल मेधावियों को कक्षा 11 व 12 में 1250 रुपये प्रतिमाह, स्नातक व परास्नातक में दो हजार रुपये प्रतिमाह और शोध के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानक के अनुरूप छात्रवृत्ति दी जाती है। 2020 में आयोजित पहले चरण की परीक्षा में लगभग 35 हजार और 2019 में तकरीबन 19 हजार छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे।

CTET July 2022 Notification : इस सप्ताह जारी हो सकता है केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा का नोटिफिकेशन, जानें अपडेट

CTET July 2022 Notification : इस सप्ताह जारी हो सकता है केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा का नोटिफिकेशन, जानें अपडेट



CTET July 2022 Notification केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के जुलाई 2022 संस्करण के लिए नोटिफिकेशन सीबीएसई द्वारा इस सप्ताह के दौरान जारी किया जा सकता है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।


नई दिल्ली : CTET July 2022 Notification: वर्ष में दो बार आयोजित की जाने वाली केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के आमतौर पर जुलाई में आयोजित पहले संस्करण की तैयारी में जुटे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अलर्ट। परीक्षा आयोजित करने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा सीटीईटी जुलाई 2022 नोटिफिकेशन को जल्द ही जारी किया जा सकता है। 



विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीबीएसई सीटीईटी जुलाई 2022 नोटिफिकेशन को इसी सप्ताह के दौरान 20 मई को जारी कर सकता है। हालांकि, बोर्ड की तरफ से आधिकारिक तौर पर सीटीईटी नोटिफिकेशन जुलाई 2022 डेट की घोषणा अभी तक नहीं की गई है, ऐसे में उम्मीदवार सीटीईटी के आधिकारिक पोर्टल, ctet.nic.in पर अपडेट के लिए समय-समय पर विजिट करते रहें।


CTET July 2022 Notification: आवेदन प्रक्रिया

केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालयों, आदि समेत देश भर के केंद्रीय बोर्डों या राज्य बोर्डों से सम्बद्ध विद्यालयों में पहली से लेकर पांचवीं तक की कक्षाओं में प्राइमरी टीचर के तौर पर भर्ती और छठवीं से आठवीं तक की कक्षाओं के लिए ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) की भर्ती के लिए पात्रता निर्धारित करने लिए लिए सीटीईटी परीक्षा का आयोजन किया जाता है। पहली कटेगरी के लिए उम्मीदावरों को पेपर 1 के लिए आवेदन करना होगा और दूसरी कटेगर के लिए उम्मीदवार पेपर 2 के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन हेतु उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने वाले अप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।


बता दें कि सीबीएसई ने सीटीईटी दिसंबर 2021 परीक्षा का आयोजन 16 दिसंबर से 21 जनवरी 2022 तक विभिन्न निर्धारित तारीखों पर किया था। परीक्षा में पेपर 1 के लिए 18.92 लाख उम्मीदवारों और पेपर 2 के लिए 16.62 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण किया था। हालांकि, परीक्षा के दौरान पेपर 1 में 14.95 लाख उम्मीदवार और पेपर 2 में 12.78 लाख उम्मीदवार उपस्थित हुए थे। इन सम्मिलित हुए उम्मीदवारों में से 4.45 लाख उम्मीदवार पेपर 1 के आधार पर सफल घोषित किए गए थे और पेपर 2 में प्रदर्शन के आधार पर 2.20 लाख उम्मीदवार योग्य पाए गए थे।

UP Board Result 2022: यूपी बोर्ड रिजल्ट में होगी देरी, यहां जानिए वजह और कब तक हो सकते घोषित

UP Board Result 2022: यूपी बोर्ड रिजल्ट में होगी देरी, यहां जानिए वजह और कब तक होंगे घोषित

UP Board Result 2022 हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नतीजे अगले महीने यानी कि जून के पहले या फिर दूसरे सप्ताह में घोषित हो सकते हैं। हालांकि पहले संभावना जताई जा रही थी कि 10वीं 12वीं का रिजल्ट मई की आखिरी में रिलीज हो सकता है।


नई दिल्ली, एजुकेशन डेस्क। UP Board Result 2022: यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी होने में अब देरी हो सकती है। आशंका जताई जा रही है कि अब हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परिणाम मई में जारी कर पाना मुश्किल होगा। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जा रहा है। इसके पीछे की वजह है, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की ओर से अब तीसरे चरण के यानी कि छूटी हुए प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित की जा रही है। इसके मुताबिक, उत्तर प्रदेश बोर्ड आज यानी कि 17 मई से 20 तक यह प्रैक्टिकल एग्जाम कराता है। अब ऐसे में जब, 20 मई, 2022 को यह परीक्षाएं समाप्त होंगी।


इसके बाद इन परीक्षाओं के अंकों का एकत्र करने के बाद फिर परीक्षाफल तैयार किया जाएगा। इन स्थितियों के आधार पर मीडिया रिपोर्ट्स में कयास लगाए जा रहे हैं कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नतीजे अगले महीने यानी कि जून के पहले या फिर दूसरे सप्ताह में घोषित हो सकते हैं। हालांकि पहले संभावना जताई जा रही थी कि 10वीं, 12वीं का रिजल्ट मई की आखिरी में रिलीज हो सकता है। लेकिन अब ऐसा हो पाना मुश्किल दिख रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी बोर्ड की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट रिजल्ट डेट की जांच करने के लिए स्टूडेंट्स को केवल UPMSP की आधिकारिक वेबसाइट पर ही विजिट करना चाहिए।

इस साल यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 51,92,689 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 50 लाख से अधिक ने परीक्षा दी थी। वहीं यूपीएमएसपी इंटर परीक्षा के लिए 24,11,350 छात्र और हाई स्कूल के लिए 27,81,654 छात्र उपस्थित हुए थे। यूपी बोर्ड के अनुसार, पचास लाख से अधिक स्टूडेंट्स की करीब 2.25 करोड़ उत्तरपुस्तिकाएं थीं, जिनकी जांच हुई है।

Tuesday, May 17, 2022

देश में जल्द खुलेंगे विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस, रेगुलेशन तैयार करने का काम अन्तिम चरण में

देश में जल्द खुलेंगे विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस, रेगुलेशन तैयार करने का काम अन्तिम चरण में



 उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को अब विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि देश में ही उन्हें विदेश जैसी शिक्षा मिलेगी। इसके तहत देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को जहां विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है, वहीं विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस भी देश में जल्द खोलने की तैयारी है। इसे लेकर रेगुलेशन तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है जो फिलहाल अंतिम चरण में है। दुनियाभर के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ देश में कैंपस खोलने के लिए बातचीत भी शुरू हो गई है।


अभी यह तय नहीं है कि देश में फिलहाल कितने विदेशी विश्वविद्यालय अपने कैंपस खोलने जा रहे हैं। रेगुलेशन आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। बावजूद इसके विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का फोकस ऐसे सभी विदेशी विश्वविद्यालयों पर है, जहां पढ़ाई के लिए भारतीय छात्र सबसे ज्यादा उत्साहित रहते हैं। 



मौजूदा समय में विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए हर साल करीब नौ लाख छात्र विदेश जाते हैं। जहां वे पढ़ाई और रहने-खाने आदि पर करीब 25 बिलियन अमेरिकी डालर (करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये) खर्च करते हैं। यूजीसी के चेयरमैन एम. जगदीश कुमार कहते हैं, हम उच्च शिक्षा की मौजूदा स्थिति को बदलना चाहते हैं जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेश जाते हैं और दूसरे देशों से आने वाले छात्रों की संख्या काफी कम है। मालूम हो कि देश में दूसरे देशों से भी पढ़ाई के लिए करीब 50 हजार विदेशी छात्र आते हैं जो दुनिया के 165 देशों से आते हैं। हालांकि इनमें से दो-तिहाई छात्र सिर्फ पांच-छह देशों के ही होते हैं।



 सरकार इस पहल से पूरी स्थिति को बदलना चाहती है। जिसमें देश के बच्चे विदेशों में पढ़ने के लिए कम जाएं, जबकि विदेशी छात्रों को लुभाया जा सके। उल्लेखनीय है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद सरकार लगातार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में जुटी है। इसके तहत शोध कार्यो को प्राथमिकता दी जा रही है, साथ ही दोहरी डिग्री और साझा डिग्री कोर्स शुरू करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।

UP बोर्ड : इंटर के छूटे परीक्षार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा आज से

UP बोर्ड : इंटर के छूटे परीक्षार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा आज से


प्रयागराज: उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा से वंचित परीक्षार्थियों की परीक्षा 17 मई से शुरू करा रही है। सभी छूटे 1,03,798 परीक्षार्थियों की परीक्षा चार दिन में संपन्न कराई जानी है। 


इसके लिए परीक्षकों की ड्यूटी लगाने के साथ परीक्षा संबंधी प्रपत्र केंद्रों पर भेज दिए गए हैं। बोर्ड ने कहा है कि सभी परीक्षार्थी अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य से संपर्क कर परीक्षा में अनिवार्य रूप से सम्मिलित हों, क्योंकि अंतिम तिथि 20 मई के बाद किसी को कोई अतिरिक्त अवसर नहीं दिया जाएगा। सचिव ने प्रधानाचार्यो को पूर्व में ही निर्देश दिए हैं कि बोर्ड की लिखित परीक्षा के केंद्र पर प्रायोगिक परीक्षा कराने की बाध्यता नहीं है, लेकिन सीसीटीवी से सुसज्जित प्रयोगशाला में ही परीक्षा कराई जानी है।


बीएड का बढ़ा क्रेज तो बंद होने लगे डीएलएड कॉलेज, पिछले सत्र में 106 प्राइवेट कॉलेजों को एक भी छात्र नहीं मिला था

बीएड का बढ़ा क्रेज तो बंद होने लगे डीएलएड कॉलेज, पिछले सत्र में 106 प्राइवेट कॉलेजों को एक भी छात्र नहीं मिला था


🔴 बीएड में दाखिला लेने लगे बेरोजगार


राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने 28 जून 2018 को बीएड डिग्री धारियों को भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती में मान्य कर दिया था। चूंकि डीएलएड करने के बाद अभ्यर्थी सिर्फ कक्षा एक से आठ तक की शिक्षक भर्ती में ही आवेदन कर सकते हैं और बीएड करने के बाद कक्षा एक से 10 तक के स्कूलों में शिक्षक बनने को अर्ह हो जाते हैं। इसलिए अभ्यर्थी अब बीएड को प्राथमिकता दे रहे हैं।


आंकड़ों पर एक नजर

● 3087 प्राइवेट डीएलएड कॉलेज पूरे प्रदेश में हैं
● 2,18,300 डीएलएड की सीटों पर होता है प्रवेश
● 96,134 सीटें ही 2021 में भरी जा सकी थीं


प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में बीएड मान्य होने के बाद से डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन (डीएलएड या पूर्व में बीटीसी) का क्रेज घटता जा रहा है। स्थिति यह है कि अब प्राइवेट डीएलएड कॉलेजों पर ताले पड़ने लगे हैं। ऐसे समय में जबकि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय डीएलएड-2022 सत्र के प्रवेश की तैयारी में जुटा है, पश्चिमी यूपी के सात निजी डीएलएड कॉलेजों ने एडमिशन लेने से मना कर दिया है। इन कॉलेजों को पिछले साल एक भी छात्र नहीं मिला था।


कभी नौकरी की गारंटी रहे डीएलएड के 2021 सत्र में प्रदेश के 106 प्राइवेट कॉलेजों को एक भी छात्र नहीं मिला था। सैकड़ों कॉलेज ऐसे थे जिन्हें बमुश्किल एक दर्जन छात्र मिले थे। 2020 का सत्र शून्य होने के कारण प्रवेश नहीं हुआ और 2021 में डीएलएड की 2,18,300 सीटों में से 96,134 भरी जा सकी थीं। आधी से अधिक 1,32,766 सीटें खाली रह गई थीं। आधी सीटें भी नहीं भरने से निजी कॉलेजों की कमाई पूरी तरह खत्म हो गई और इनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

प्रत्यावेदन के जरिए 822 शिक्षकों ने मांगा अपना मूल जिला

प्रत्यावेदन के जरिए 822 शिक्षकों ने मांगा अपना मूल जिला


Updated : 18 मई 2022
प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद में चार साल पहले आई 68500 शिक्षकों की भर्ती अब जिला आवंटन में उलझी हुई है। चयन के बाद शिक्षकों को जिला आवंटन किया गया तो तमाम शिक्षक अपने मूल जनपद से दूर पहुंच गए। उसके बाद जो सूची जारी की गई, उसमें कम मेरिट के शिक्षकों को उनके गृह जनपद या समीपवर्ती जिले आवंटित हो जाने पर विरोध शुरू हो गया। अधिक मेरिट के बावजूद दूर जिलों में तैनाती पाए शिक्षकों के विरोध करने पर उनसे फिर प्रत्यावेदन लिया जा रहा है।


मंगलवार शाम तक 822 शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय में इस उम्मीद में प्रत्यावेदन जमा किए कि विकल्प में | दर्शाया जिला आवंटित हो जाएगा। बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय में मंगलवार को प्रत्यावेदन देने पहुंचे अभ्यर्थियों ने बताया कि विभाग उन्हें प्रत्यावेदन और विकल्प के नाम पर परेशान कर रहा है। कोर्ट के आदेश पर जब शिक्षकों ने जिला आवंटन के लिए विकल्प के साथ प्रत्यावेदन दिया था, तब नहीं बताया गया कि 30 जिलों में पद रिक्त नहीं है। उन्हें यह पता तब चला जब 10 मई को बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने जिला आवंटन की सूची जारी की तो कई का स्थानांतरण नहीं हुआ।



शिक्षकों का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर लिए गए प्रत्यावेदन के दौरान ही स्पष्ट किया जाना चाहिए था कि 30 जिलों में पद रिक्त नहीं है। ऐसे में 30 जिलों को छोड़कर अन्य जिलों का विकल्प दिया जाए। ऐसा किया गया होता तो इस प्रचंड गर्मी में दूर दराज जिलों से सफर तय कर प्रत्यावेदन देने के लिए परेशान न होना पड़ता।






68500 शिक्षक भर्ती के 229 शिक्षकों ने जिला आवंटन हेतु मांगा प्रथम विकल्प

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की 68500 पदों की शिक्षक भर्ती में विवादों से नाता चार साल में खत्म नहीं हो पाया। बेसिक शिक्षा परिषद सचिव ने कोर्ट के आदेश के आदेश पर 2908 शिक्षकों को विकल्प के जिले आवंटित कर दिए, लेकिन सामान्य वर्ग के 229 शिक्षक फिर भी वंचित रह गए। वंचित शिक्षकों ने सामान्य वर्ग के रिक्त बचे 4881 पदों पर पूर्व में आनलाइन भरे प्रथम वरीयता के विकल्प में शिफ्ट करते हुए जिला आवंटन की मांग की है।


वंचित अभ्यर्थियों का कहना है कि इस भर्ती में जिला आवंटन में अनियमितता की गई थी, जिसके खिलाफ याचिका लगाई गई थी। इसका निस्तारण कर हाई कोर्ट ने 14 सितंबर 2021 को आदेश दिया कि सामान्य वर्ग के अपीलकर्ताओं से उनकी पसंद के तीन जिलों का विकल्प लेकर समायोजन किया जाए।



 इस क्रम में दस मई को जिला आवंटन में सामान्य वर्ग के 727 शिक्षकों का भी जिला आवंटन हुआ, लेकिन 229 रह गए, जिसमें मुख्य याचिकाकर्ता भी शामिल है। चार सूचियां जारी होने के बाद भी सभी को राहत नहीं मिलने से अभ्यर्थियों ने नाराजगी है। मांग की गई है कि सामान्य वर्ग के बचे पदों की पूर्व की तरह शिफ्टिंग कर जनपद आवंटित किया जाए।

Monday, May 16, 2022

जालौन : नि:शुल्क पुस्तक वितरण में करोड़ों के गड़बड़झाले के आरोप पर डीएम ने गठित की जांच समिति, जानें पूरा मामला

जालौन : नि:शुल्क पुस्तक वितरण में करोड़ों के गड़बड़झाले के आरोप पर डीएम ने गठित की जांच समिति, जानें पूरा मामला


उरई : जिले में बेसिक शिक्षा विभाग की एक और करतूत सामने आई है। वर्ष 2021-22 के सत्र में निश्शुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण व कार्य पुस्तिकाओं के क्रय विक्रय में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। अब इस करतूत को दबाने के लिए विद्यालयों से शत प्रतिशत पुस्तकें बांटे जाने का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने इस मामले को संज्ञान में लिया है। मामले को काफी दिनों से बेसिक शिक्षा विभाग दबाने में जुटा है। डीएम प्रियंका निरंजन ने फिलहाल एक जांच कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं



वर्ष 2021- 2022 के शैक्षिक सत्र में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा निश्शुल्क पाठ्य पुस्तकें व कार्य पुस्तिकाओं के क्रय विक्रय व वितरण में जमकर गड़बड़झाला किया गया है। शासन से 2 करोड 37 लाख रुपये की राशि से प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकों का वितरण होना था, लेकिन जिले में 60 प्रतिशत पुस्तकों का वितरण भी नहीं किया गया। इस बात की तस्दीक स्वयं प्राथमिक विद्यालय कर रहे हैं। अब घोटाले की आंच को दबाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जिले भर के विद्यालयों से जबरन पुस्तकें वितरण का प्रमाण पत्र मांग रहा है। सवाल है कि जब पुस्तकें बांटी ही नहीं गई तो उनसे पुस्तक वितरण का प्रमाण पत्र क्यों मांगा जा रहा है। मामले में बीएसए प्रेम चंद्र यादव का पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन लगातार स्विच आफ रहा।


शिक्षकों पर जबरन बनाया जा रहा दबाव :

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान ने बताया कि जिले में पुस्तक वितरण के नाम पर करोड़ों का घोटाला किया गया है। घोटाले को छिपाने के लिए विभाग के उच्चाधिकारी अपने विभागीय अधिकारियों के माध्यम से अध्यापकों पर दबाव बनाकर फर्जी पुस्तक वितरण प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। उन्हें वेतन रोकने व निलंबन तक की धमकी दी जा रही है। आरोप है कि जांच के नाम पर जिला प्रशासन ने पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया है।



ऐसे किया गया गड़बड़झाला :

वर्ष 2021- 2022 में जिले के महेबा व कदौरा ब्लाक के किसी भी विद्यालय में कक्षा एक की किताबें नहीं पहुंची। यह बात शिक्षक दबी जुबान से बताते हैं जबकि किताबों के वितरण को लेकर बीते अक्टूबर माह में शिक्षको के द्वारा जनपद के नौ ब्लाकों से मांगपत्र बीईओ के माध्यम से बीएसए को प्रेषित किए थे। फिर भी किताबें नही भेजी गईं। इससे पूर्व 2020- 21 में भी निशुश्ल्क बांटी जाने वाली पुस्तकें विद्यालयों तक नही पहुंचाई गईं थीं।



जनपद में परिषदीय विद्यालयों की संख्या व छात्रों की संख्या

प्राथमिक विद्यालय : 949

उच्च प्राथमिक विद्यालय : 322

कंपोजिट विद्यालय : 229

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कुल छात्र

1लाख 55 हजार 394

हिंदी माध्यम के छात्रों की संख्या : 1लाख 36 हजार 344

अंग्रेजी माध्यम के छात्रों की संख्या : 19 हजार 50

उर्दू माध्यम के छात्रों की संख्या : 1523

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शिकायत मिली है, जिसमें एक जांच कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम कालपी को नामित किया गया है। कुछ स्थानों में किताबों का वितरण न होने की बात सामने आई है। जांच के बाद स्थिति सामने आएगी।

प्रियंका निरंजन, डीएम जालौन

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जिले के बीएसए पर गंभीर आरोप हैं इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। शिक्षकों को अनावश्यक प्रताड़ित किया जा रहा है। जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा की गई है। दोषी लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

धनश्याम अनुरागी, जिला पंचायत अध्यक्ष, शिकायतकर्ता




 

सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया में दोहरी व्यवस्था के खिलाफ 1 जून को निदेशालय का घेराव

सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया में दोहरी व्यवस्था के खिलाफ 1 जून को निदेशालय का घेराव 



लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया में दोहरी व्यवस्था के खिलाफ 1 जून को निदेशालय का घेराव करने का निर्णय किया है। इसके साथ ही गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों को बुलाने संबंधी दिए जा रहे निर्देशों का भी विरोध किया है।


संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की रविवार को मुख्यालय में हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष श्रवण कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई थी। ऑनलाइन स्थानांतरण में तमाम कमियों के खिलाफ कुछ शिक्षक हाईकोर्ट चले गए, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी विभाग के अधिकारी कोर्ट में काउंटर नहीं लगा रहे। इसके कारण स्थानांतरण प्रक्रिया बाधित है। दूसरी तरफ गुपचुप तरीके से अपने चहेतों का स्थानांतरण कर रहे हैं। इस दोहरी व्यवस्था से शिक्षक आक्रोशित हैं। इसलिए 1 जून को निदेशालय का घेराव किया जाएगा।



प्रदेश संरक्षक डॉ. हरि प्रकाश यादव ने आरोप लगाया कि 21 मई से 30 जून तक ग्रीष्म अवकाश है, लेकिन अधिकारी रोजाना नए-नए आदेश जारी कर ग्रीष्मावकाश के दौरान शिक्षकों को विद्यालय आने पर विवश कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि यदि ग्रीष्म अवकाश में शिक्षकों को बुलाना है तो उसके बदले अर्जित अवकाश प्रदान किया जाए। प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने छात्र/छात्राओं की ईमेल आईडी के लिए शिक्षकों पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए इसे रोकने की मांग की।