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Friday, December 20, 2024

मान्यता की पत्रावली यूपी बोर्ड को न भेजने पर फंसे कई DIOS, यूपी बोर्ड सचिव ने मांगा कार्यवाही संबंधी प्रस्ताव

मान्यता की पत्रावली यूपी बोर्ड को न भेजने पर फंसे कई DIOS, यूपी बोर्ड सचिव ने मांगा कार्यवाही संबंधी प्रस्ताव


• वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय के 12 जिलों में रोकी गईं 74 पत्रावलियां 


प्रयागराज । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) से मान्यता लेने के लिए प्रबंधतंत्र की ओर से किए गए आनलाइन आवेदन के क्रम में कई पत्रावलियां जिला स्तर पर रोक लिए जाने को यूपी बोर्ड सचिव ने गंभीरता से लिया है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने परीक्षण कराया तो वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय के 12 जनपदों से कुल 74 पत्रावलियां क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत नहीं की गईं। इसे माध्यमिक शिक्षा परिषद की नियमावली का उल्लंघन माना गया। ऐसे में संबंधित जनपदों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने का प्रस्ताव बोर्ड सचिव ने क्षेत्रीय अपर सचिव से मांगा है। संबंधित डीआइओएस के विरुद्ध कार्यवाही के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।


मान्यता लेकर विद्यालय संचालित करने के लिए यूपी बोर्ड सचिव ने आनलाइन आवेदन लिए थे। इस क्रम में प्राप्त आवेदनों का परीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट के साथ जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्रावली क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजी जानी थी। इस क्रम में क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ, बरेली, गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी की ओर से प्रस्तुत की गईं सभी 327 पत्रावलियों का यूपी बोर्ड मुख्यालय में हुई बैठक में मान्यता समिति ने मानकों पर परीक्षण किया। इसमें कुल 103 पत्रावलियों को स्वीकृत कर 224 पत्रावलियों को अस्वीकृत कर दिया गया।


मान्यता का प्रकरण शासन स्तर पर उठने के बाद बोर्ड सचिव ने परीक्षण कराया तो पता चला कि अयोध्या से 28, आजमगढ़ से 20, गाजीपुर से 13, जौनपुर से तीन, अमेठी व मीरजापुर से दो-दो तथा आंबेडकरनगर, बलिया, मऊ, चंदौली, भदोही और सोनभद्र जिले से एक-एक पत्रावली संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी को प्रस्तुत नहीं की गई। इस स्थिति पर बोर्ड ने संबंधित डीआइओएस एवं क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यशैली को असंतोषजनक माना। 


बोर्ड सचिव ने क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी के अपर सचिव को भेजे पत्र में लिखा है कि संबंधित डीआइओएस ने परिषद के विनियम का पालन नहीं किया, साथ ही क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा सतत् पर्यवेक्षण एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की गई। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की उदासीनतापूर्ण एवं गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली के दृष्टिगत उनके विरुद्ध कार्यवाही के लिए साक्ष्य सहित प्रस्ताव यूपी बोर्ड मुख्यालय को उपलब्ध कराएं, जिससे उनके विरुद्ध कार्यवाही किए जाने की अनुशंसा शासन को भेजी जा सके।

69000 शिक्षक भर्ती में फिर नहीं हो सकी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अब जनवरी के पहले सप्ताह में उम्मीद


69000 शिक्षक भर्ती में फिर नहीं हो सकी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अब जनवरी के पहले सप्ताह में उम्मीद

20 दिसम्बर 2024
लखनऊ
69000 teacher recruitment: 69000 शिक्षक भर्ती के मामले में बृहस्पतिवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई। इसके पहले भी चार बार इस मामले में तारीख मिलने के बाद भी सुनवाई नहीं हो सकी। 

69000 शिक्षक भर्ती में बृहस्पतिवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई। इससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी है। इस मामले की अब जनवरी के पहले सप्ताह में सुनवाई प्रस्तावित है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि पिछले कई बार से तारीख लग रही है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इससे अभ्यर्थियों में काफी निराशा है। उम्मीद है कि जल्द हमें न्याय मिलेगा।




69000 शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई 11 दिसम्बर को

07 दिसंबर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की अगली तिथि अब 11 दिसंबर लग गई है। इस मामले में पिछली कई बार से सुनवाई के लिए केस का नंबर न आने पर अभ्यर्थी निराश हैं। साथ ही उन्हें यह उम्मीद भी है कि अगली तिथि पर सुनवाई होगी और उन्हें जल्द से जल्द न्याय मिलेगा।

सुशील कश्यप व भास्कर सिंह के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने बैठक कर अगली सुनवाई को लेकर रणनीति तय की। अभ्यार्थियों ने कहा कि बेसिक शिक्षा के अधिकारियों ने इस शिक्षक भर्ती की चयन सूची को आज तक मूल चयन सूची के रूप में जारी नहीं किया गया। जबकि हाईकोर्ट लखनऊ सिंगल बेंच, डबल बेंच, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग भी शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची मांग चुका है। 



69000 शिक्षक भर्ती में नहीं हो सकी सुनवाई, 17 दिसंबर मिली अगली तारीख 

05 दिसंबर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के मामले की बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। इससे अभ्यर्थियों में निराशा है। सुनवाई की अगली तिथि 17 दिसंबर संभावित है। वहीं अभ्यर्थियों ने इस मामले में जल्द से जल्द सुनवाई कर उनको न्याय देने की मांग की है।

लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा 13 अगस्त को इस मामले में दिए गए आदेश पर नौ सितंबर को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी। इसके बाद इस मामले में सुनवाई के लिए 15 अक्तूबर, 12 नवंबर, 20 नवंबर, 27 नवंबर और फिर चार दिसंबर की डेट मिली। किंतु इन तिथियों पर सुनवाई नहीं हो सकी।

आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि आज भी हमारे मामले में सुनवाई का नंबर नहीं आया। हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द इस मामले की सुनवाई कर सुप्रीम कोर्ट हमें न्याय देगा। वहीं अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का पक्ष रख रहे विनय पांडेय ने कहा कि आज कुछ कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। 



69000 शिक्षक भर्ती की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब चार दिसम्बर को

02 दिसंबर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 10 दिसंबर की जगह अब चार दिसंबर को होगी। इस मामले की सुनवाई अब जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस संजय करोल करेंगे। 
आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे भास्कर सिंह व सुशील कश्यप ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर वह सुप्रीम कोर्ट से निश्चित तौर पर जीतेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 69000 शिक्षक भर्ती में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 का उल्लंघन किया है।

यही वजह है कि लखनऊ हाईकोर्ट डबल बेंच ने 13 अगस्त को 69000 शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को रद्द करके नई सूची बनाने के निर्देश दिए हैं। 



69000 शिक्षक भर्ती में नहीं हो पाई सुनवाई, अगली डेट 10 दिसम्बर को सुनवाई संभावित 

28 नवंबर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। इस पर अभ्यर्थियों ने निराशा जताई है। अभी अगली सुनवाई की प्रस्तावित तिथि 10 दिसंबर है, हालांकि इससे पहले भी सुनवाई संभावित है। अभ्यर्थियों ने एक बार फिर से प्रदेश सरकार से इस मामले में पहल करने की मांग की है।

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि आज प्रस्तावित सुनवाई अपरिहार्य कारणों से नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों का न्याय की उम्मीद बढ़ती जा रही है। वहीं भास्कर सिंह व सुशील कश्यप ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 2000 आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थी ही याची बने हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह 10 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में याची लाभ का प्रस्ताव प्रस्तुत करे। ताकि इस मामले का निस्तारण हो सके।

उन्होंने कहा कि वह एक से तीन दिसंबर तक ई-मेल भेजकर राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश आदि से जल्द से जल्द इस मामले की सुनवाई की अपील करेंगे। दूसरी तरफ अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की लड़ाई लड़ रहे विनय पांडेय ने कहा कि जल्द ही इस मामले में सुनवाई होने की उम्मीद है। 



69000 शिक्षक भर्ती की सुप्रीम कोर्ट में नहीं हो सकी सुनवाई, अब 27 नवंबर को होगी अगली सुनवाई 

21 नवंबर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले की बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी। किंतु कतिपय कारणों से यह सुनवाई नहीं हो सकी। इससे अभ्यर्थियों में निराशा है। सुनवाई की अगली तिथि 27 नवंबर लगी है। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त को पुरानी सभी सूची को निरस्त करते हुए आरक्षण नियमों के अनुसार नई सूची बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद चयनित अभ्यर्थी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट चले गए। 


69000 शिक्षक भर्ती की सुप्रीम कोर्ट में अब 27 नवंबर को होगी सुनवाई

लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले की बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई। इससे अभ्यर्थियों में निराशा है। अब 27 नवंबर सुनवाई होगी। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त को पुरानी सभी सूची को निरस्त करते हुए आरक्षण नियमों के अनुसार नई सूची बनाने के निर्देश दिए थे। 
इसके बाद चयनित अभ्यर्थी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट चले गए। जहां मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश पर नौ सितंबर को सुनवाई के बाद रोक लगा दी थी। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि 23 सितंबर के बाद से लगातार डेट मिल रही है। इससे अभ्यर्थियों में निराशा है।

चयनित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे विनय पांडेय ने कहा कि अब 27 नवंबर को होने वाली सुनवाई में न्याय की उम्मीद है। 




69000 शिक्षक भर्ती की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज,  सुनवाई पर टिकी अभ्यर्थियों की उम्मीद 

20 नवम्बर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले की बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि उनके मामले में निर्णय होगा और उन्हें जल्द न्याय मिलेगा। पिछले कई तारीखों पर सुनवाई नहीं हो सकी है, इससे प्रभावित अभ्यर्थी निराश हैं। पहले सुनवाई की प्रस्तावित तिथि 19 नवंबर थी जो अब बदलकर 20 नवंबर को हो गई है।

69000 शिक्षक भर्ती मामले में 13 अगस्त को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने नई सूची बनाकर आरक्षण नियमों का पालन करते हुए नई सूची जारी करने का निर्देश दिया था। इसे अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थीयों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

वहीं आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी सरकार से इसका पालन किए जाने के लिए मांग कर रहे थे। किंतु इस पर निर्णय नहीं हो सका और अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने लखनऊ हाईकोर्ट के डबल बेंच के आदेश पर नौ सितंबर को सुनवाई के बाद रोक लगा दी थी। साथ ही 23 सितंबर को अगली सुनवाई की तिथि तय की थी। लेकिन इस तिथि को सुनवाई नहीं हो सकी। फिर 15 अक्तूबर और 12 नवंबर की तिथि लगी। किंतु इस दिन भी सुनवाई नहीं हो सकी। इसको लेकर अभ्यर्थी निराश हैं।



कल नहीं हो सकी सुनवाई, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में अब 19 नवंबर को होगी सुनवाई

13 नवंबर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ में यह सुनवाई होनी थी। लेकिन, समयाभाव के कारण केस की सुनवाई नहीं हो सकी। वहीं अगली तिथि 19 नवंबर प्रस्तावित की गई है।


69000 शिक्षक भर्ती : आज भी नहीं हो सकी सुनवाई

लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच में आज इस मामले पर सुनवाई होनी थी। अगली तिथि 19 नवंबर प्रस्तावित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी इस भर्ती में आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के पक्ष में निर्णय देते हुए पुरानी सभी सूची निरस्त करते हुए नई सूची जारी करने के निर्देश दिए थे। इसे लेकर चयनित वर्ग के अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं।



69000 शिक्षक भर्ती की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

11 नवम्बर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार 12 नवंबर को होगी। यह सुनवाई 15 नवंबर को प्रस्तावित थी। सुनवाई पहले होने के कारण आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सोमवार को बैठक कर आगे की रणनीति बनाई। साथ ही उम्मीद जताई कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अक्तूबर से चल रहा है। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले की एक सुनवाई हुई है। इसके बाद से इस पर डेट लग रही है। दिवाली से पहले इस मामले में अगली तिथि 15 नवंबर को प्रस्तावित हुई थी। किंतु अब यह 12 नवंबर को ही लग गई है।

 पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप व प्रदेश संरक्षक भास्कर सिंह ने बैठक में कहा कि वह 2020 से इस मामले की लड़ाई लड़ रहे हैं। 

Thursday, December 19, 2024

उच्च शिक्षा के लिए प्रदेश में विदेशी विवि के परिसरों को मिली मंजूरी

उच्च शिक्षा के लिए प्रदेश में विदेशी विवि के परिसरों को मिली मंजूरी


लखनऊ। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि विधानसभा ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने वाले चार विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इससे प्रदेश में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और विदेशी विवि परिसरों के लिए रास्ता साफ हो गया है। 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को शिक्षा का हब बनाने में यह ऐतिहासिक कदम है। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि नए विश्वविद्यालयों और विदेशी परिसरों के माध्यम से छात्रों को उनके प्रदेश में ही विश्वस्तरीय शिक्षा का अवसर मिलेगा। विदेशी विश्वविद्यालय के आने से प्रदेश के छात्रों को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा, उन्हें उच्च शिक्षा प्रदेश में ही सस्ती और सहज मिलेगी। 


उन्होंने कहा कि अब किसी भी अन्य राज्य में रजिस्टर्ड संस्थाएं, कम्पनियां, ट्रस्ट जिनका रिकार्ड भी अच्छा हो, यूपी में निजी विव खोलने के लिए योग्य होंगी। अगर यूजीसी विदेशी विवि को प्रदेश में मान्यता दी जाती है तो ऐसी संस्थाएं भी प्रदेश में विवि स्थापित कर सकेगी। मंत्री ने कहा कि यह विधेयक प्रदेश के छात्रों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे। 

माध्यमिक शिक्षकों ने घेरा निदेशालय, दिनभर चले प्रदर्शन में सेवा सुरक्षा के साथ पदोन्नति व पेंशन की उठाई मांग

माध्यमिक शिक्षकों ने घेरा निदेशालय, दिनभर चले प्रदर्शन में सेवा सुरक्षा के साथ पदोन्नति व पेंशन की उठाई मांग


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षकों ने बुधवार को पार्क रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के शिविर कार्यालय का घेराव किया। दिनभर चले प्रदर्शन के बाद, शाम चार बजे शिक्षकों ने सचिवालय के घेराव के नियत से कदम बढ़ाया तो पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। इस दौरान शिक्षकों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई।


सभी शिक्षक पहले तो निदेशालय के सामने शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। जैसे ही माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी ने सचिवालय की ओर कदम बढ़ाने के लिए शिक्षकों से कहा वैसे ही पुलिस भी सतर्क हो गई। 


इस बारे में प्रादेशिक उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि चयन बोर्ड अधिनियम की धारा 21 हमारे पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ने समाप्त नही होने दी थी। हम भी सेवा सुरक्षा संबंधी धारा बहाल कराएंगे।


उन्होंने कहा हमारी मांग है कि शिक्षकों की पदोन्नति संबंधी धारा 12, प्रधानाचार्यों की तदर्थ पदोन्नति संबंधी धारा 18, तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण निःशुल्क चिकित्सा सुविधा सरकार की ओर से दी जाए। 


शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि एक वर्ष बीतने के बाद भी शिक्षकों की सेवा सुरक्षा संबंधी धारा 21 को बहाल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा अब इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो अत एकमात्र संघर्ष का ही रास्ता है।

यूपी : सैनिक स्कूल में प्रवेश परीक्षा की तैयारी पूरी, परीक्षा 29 दिसम्बर की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी


यूपी : सैनिक स्कूल में प्रवेश परीक्षा की तैयारी पूरी, परीक्षा 29 दिसम्बर की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी 


सैनिक स्कूल में प्रवेश परीक्षा की तैयारी पूरी कर ली गई है। एडमिट कार्ड विद्यालय की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सैनिक स्कूल लखनऊ सरोजनीनगर और गोरखपुर में प्रवेश परीक्षा की तैयारी पूरी हो गई है। सत्र 2025-26 में कक्षा 6 व 9 में प्रवेश के लिए ये परीक्षा 29 दिसंबर को आयोजित होगी। प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले सभी बच्चों के एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए। 


आवेदक अपने एडमिट कार्ड विद्यालय की बेबसाइट www.upsainikschool.org से डाउनलोड कर सकते हैं। आवेदक एडमिट कार्ड डाउनलोड करते समय अपने आवेदन पत्र एवं एडमिट कार्ड का विवरण जरूरी तौर पर चेक कर लें एवं किसी तरह की समस्या होने पर विद्यालय के हेल्पलाइन नम्बर 7052777795 पर फोन कर सकते है अथवा ईमेल आईडी info@upsainikschool.org पर मेल कर सकते हैं।


परीक्षा के बाद इस तरह होगा चयन
प्रवेश के लिए, उम्मीदवारों को एक प्रश्न पत्र वाली लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिए। अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, गणित और बौद्धिक क्षमता। परीक्षा ओएमआर आधारित होगी। रिक्त सीटों की संख्या के सापेक्ष तीन गुना उम्मीदवारों को मेरिट के आधार पर साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। मेडिकल जांच और साक्षात्कार के बाद मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। 10 सीटों को भुगतान सीटों के हिस्से के रूप में घोषित किया गया है। भुगतान सीट की स्कूल फीस सामान्य सीट फीस से दोगुनी है। इसलिए भुगतान सीटें उम्मीदवारों को मेरिट के क्रम में केवल 100 की मेरिट रैंक तक ही दी जाएंगी।


इन जनपदों में आयोजित होगी परीक्षा
परीक्षा आगरा, अयोध्या, बरेली, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ।

Wednesday, December 18, 2024

एडेड डिग्री कॉलेज के शिक्षकों का तीन साल में एक बार तबादला, कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सहायता प्राप्त महाविद्यालय अध्यापक स्थानान्तरण नियमावली- 2024 को प्रख्यापित करने की दी मंजूरी

एडेड डिग्री कॉलेज के शिक्षकों का तीन साल में एक बार तबादला, कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सहायता प्राप्त महाविद्यालय अध्यापक स्थानान्तरण नियमावली- 2024 को प्रख्यापित करने की दी मंजूरी 


लखनऊ । कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सहायता प्राप्त महाविद्यालय अध्यापक स्थानान्तरण नियमावली- 2024 को प्रख्यापित करने की सहमति दे दी है। इसके तहत अब सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों का तीन साल पर एक बार तबादला हो सकेगा।


पूर्व में एडेड कालेजों के शिक्षकों के तबादलों में काफी समस्याएं आती थी। 10 साल सेवा के बाद ही तबादले का प्रावधान था। बाद में अवधि पांच साल कर दी लेकिन इससे भी एडेड कॉलेजों के शिक्षकों की समस्याएं दूर नहीं हुईं। 


नए शिक्षा आयोग के गठन संस्तुति पर सरकार ने एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण तीन वर्ष पर एक बार करने का प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।


उच्च शिक्षा विभाग की ओर से तबादला प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। पूर्व में तबादला पाने के लिए पांच साल की सेवा अनिवार्य थी। इसे सरल करते हुए तीन साल किया गया है। विभाग के अनुसार शिक्षकों को तबादला के लिए अपने महाविद्यालय के प्रबंधतंत्र से और संबंधित विश्वविद्यालय से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। इस अनुमोदित आवेदन को निदेशक उच्च के सामने प्रस्तुत करना होगा। 

1504 शिक्षकों, 390 प्रधानाध्यापकों की 31 मार्च तक पूरी होगी भर्ती प्रक्रिया, एडेड जूनियर हाईस्कूलों में 10 महीनों से भर्ती है अटकी

1504 शिक्षकों, 390 प्रधानाध्यापकों की 31 मार्च तक पूरी होगी भर्ती प्रक्रियाएडेड जूनियर हाईस्कूलों में 10 महीनों से भर्ती है अटकी

निर्दलीय सदस्य ने इस मुद्दे पर किया सदन का बहिर्गमन


लखनऊ : अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों के 1,504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अगले साल 31 मार्च तक पूरी की जाएगी। मेरिट लिस्ट जारी करने और अंतिम चयन परिणाम के बाद तैनाती की प्रक्रिया निर्धारित तारीख तक पूरी कर ली जाएगी। 


विधान परिषद में मंगलवार को निर्दलीय सदस्य राजबहादुर सिंह चंदेल व डा. आकाश अग्रवाल के सवाल पर सरकार ने यह आश्वासन दिया। बीते 10 महीने से चयन परिणाम जारी न होने से अभ्यर्थी परेशान हैं। बीती 15 फरवरी को हाईकोर्ट ने परीक्षा परिणाम जारी करने को लेकर दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था।


निर्दलीय सदस्य डा. आकाश अग्रवाल ने इस मुद्दे पर सदन से बहिर्गमन भी किया। दोनों ही सदस्यों ने कहा कि एडेड जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापकों व सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों पर चयन के लिए वर्ष 2021 में आयोजित परीक्षा अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षकों के 1,504 पदों के सापेक्ष 2,71071 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी और 42,066 अभ्यर्थी परीक्षा में पास हुए। 


प्रधानाध्यापकों के 390 पदों के सापेक्ष 14,931 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी और इसमें से 1544 अभ्यर्थी परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। ऐसे में कुल 43,610 अभ्यर्थियों को परीक्षा परिणाम का इंतजार है क्योंकि इन्हीं में से मेरिट तैयार कर अंतिम चयन परिणाम जारी किया जाना है। 10 महीने पहले कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। फिर भी बेसिक शिक्षा विभाग प्रक्रिया नहीं पूरी कर पा रहा है।


 इस पर विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह को निर्देश दिए कि वह 31 मार्च 2025 तक भर्ती प्रक्रिया को पूरी कराएं। मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि वह निर्धारित तारीख तक भर्ती प्रक्रिया को पूरी कराएंगे।

प्रदेशभर में निःशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण की होगी उच्च स्तरीय जांच

प्रदेशभर में निःशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण की होगी उच्च स्तरीय जांच


लखनऊ : चालू शैक्षिक सत्र में सरकारी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के सभी विद्यार्थियों को निश्शुल्क दी जाने वाली पाठ्यपुस्तकें मिलीं या नहीं, इसकी जांच कराई जाएगी। अगले वर्ष फरवरी तक इस प्रकरण की जांच पूरी की जाएगी। अगले वर्ष एक अप्रैल को शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र के पहले ही दिन सभी छात्रों को मुफ्त किताबें मिल जाएं, इसके लिए व्यवस्था बनाई जाएगी। विधान परिषद में शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सवाल पर सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया।


विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 515 करोड़ रुपये का बजट है। ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने सिद्धार्थ नगर के ब्लाक संसाधन केंद्र, बांसी के कर्मचारियों द्वारा बीती 15 अक्टूबर को 4,133 सरकारी किताबें आठ हजार रुपये में बेचे जाने और इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) व दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने का मुद्दा उठाया।


 कहा कि बीईओ की गिरफ्तारी को अब उप जिलाधिकारी नौगढ़ अवैधानिक बता रहे हैं। ऐसे में अपराध करने वाले अधिकारी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कर्मचारियों ने यह स्वीकार किया है कि कुल आठ हजार रुपये में किताबें बेची गईं। छह हजार रुपये बीईओ व एक-एक हजार रुपये दोनों कर्मचारियों ने लिए। 


इस पर विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह को निर्देश दिए कि वह अगले बजट सत्र से पहले पाठ्यपुस्तक वितरण की उच्च स्तरीय जांच और पुस्तक वितरण का सत्यापन कराएं। मंत्री ने कहा कि वह जांच व सत्यापन का कार्य पूरा कर सदन को अवगत कराएंगे।

फिलहाल नहीं होगी यूपी में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती: विधानसभा में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का जवाब

फिलहाल नहीं होगी यूपी में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती: विधानसभा में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का जवाब 


लखनऊ: बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती की कोई नई योजना फिलहाल नहीं है। प्रदेश में शिक्षकों की संख्या मानक के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 30 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। अगर शिक्षामित्रों को भी जोड़ लिया जाए तो यह अनुपात एक शिक्षक पर 22 छात्रों का हो जाता है।


प्रश्नकाल में सपा सदस्य अनिल प्रधान और संदीप सिंह के प्रश्न पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगर प्रदेश में छात्रों की संख्या बढ़ेगी और नए छात्र आएंगे तो सरकार जरूर शिक्षकों की भर्ती पर विचार करेगी। इस पर अनिल प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में एक आंकड़े में बताया है कि प्रदेश में 7.85 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि यह आंकड़ा कहां से आया है, इसको वह दिखवा रहे हैं।

Tuesday, December 17, 2024

निजी विद्यालयों को मान्यता देने को संशोधित नियमावली में नहीं होगा बदलाव, माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने कहा, विद्यालयों को मानने होंगे नए नियम

निजी विद्यालयों को मान्यता देने को संशोधित नियमावली में नहीं होगा बदलाव माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने कहा, विद्यालयों को मानने होंगे नए नियम

• न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होना चाहिए निजी विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन


लखनऊः शीतकालीन सत्र के पहले दिन विधान परिषद में माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने स्पष्ट किया है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद की तरफ से निजी (वित्तविहीन) विद्यालयों को मान्यता देने के लिए संशोधित नियमावली में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों के लिए खेल व अन्य गतिविधियों के लिए विद्यालयों में मैदान की जरूरत होती है। इसी के मद्देनजर मान्यता की नियमावली में बदलाव किया गया है।


विधान परिषद के सदस्य डा. आकाश अग्रवाल व राज बहादुर सिंह चन्देल ने मुद्दा उठाया कि नई नियमावली के अनुसार हाई स्कूलों को कभी भी उच्चीकृत नहीं किया जा सकता है। पुराने विद्यालयों को उच्चीकृत करने के लिए नियमावली में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि शहरों में निजी विद्यालय और भूमि नहीं जुटा सकते हैं वल्कि विद्यालयों में और मंजिलों का निर्माण करा सकते हैं। संशोधित नियमावली के अनुसार शहरी क्षेत्रों में विद्यालयों को मान्यता लेने के लिए कम से कम 3,000 व ग्रामीण क्षेत्रों में 6,000 वर्ग मीटर भूमि होना जरूरी है।


 उमेश द्विवेदी ने कहा कि जो विद्यालय पहले से मान्यता प्राप्त हैं, उन्हें उच्चीकृत किया जाए। डा. हरि सिंह ढिल्लो ने कहा कि एकल विषय वाले विद्यालयों को भी नई नियमावली के अनुसार ही मान्यता दी जा रही है। इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि नियमावली में काफी सोच-विचार कर संशोधन किया गया है। इसलिए इसमें बदलाव संभव नहीं है।


संस्कृत पाठशालाओं का हो सुधार 
विधान परिषद के सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने प्रदेश की संस्कृत पाठशालाओं की स्थिति सुधारने की मांग की है। उन्होंने सदन में कहा कि संस्कृत पाठशालाओं के भवनों की देखरेख न होने के कारण ज्यादातर भवन जर्जर हो चुके हैं। वहीं संस्कृत शिक्षकों को भी केवल 15,000 रुपये का मानदेय दिया जा रहा है। मान्यता प्राप्त संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान सूची में शामिल नहीं किया जा रहा है। 


उन्होंने निजी विद्यालयों के शिक्षकों को कम से कम 25,000 रुपये वेतन दिया जाने की मांग की। इस पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि अंशकालिक शिक्षकों के वेतन भुगतान की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की होती है। यह सरकार का दायित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि अरबी फारसी मदरसों को लेकर बनाई गई सेवा नियमावली में दंड प्रक्रिया की व्यवस्था को स्पष्ट नहीं किया गया है। शिक्षकों व कर्मचारियों के हित में नियमावली में संशोधन की जरूरत है।

अगले शैक्षणिक वर्ष से 20 प्रतिशत सस्ती मिलेंगी कक्षा 9 से 12 की NCERT पाठ्यपुस्तकें

अगले शैक्षणिक वर्ष से 20 प्रतिशत सस्ती मिलेंगी कक्षा 9 से 12 की NCERT पाठ्यपुस्तकें


नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सोमवार को आगामी शैक्षणिक वर्ष से कक्षा 9 से 12 तक की पाठ्यपुस्तकों की कीमतों में 20 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की। 


एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की। वे एनसीईआरटी मुख्यालय में सभागार के निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम में भाग ले रहे थे।

सकलानी ने कहा कि पहली बार पाठ्यपुस्तकों की कीमत में इतनी कमी की गई है। इस वर्ष एनसीईआरटी ने कागज खरीद की दक्षता में काफी सुधार किया और नवीनतम प्रिंटिंग मशीनों के साथ प्रिंटर भी शामिल किए हैं।

 एनसीईआरटी ने इसका लाभ देश के छात्रों को देने का फैसला किया है। भूमि पूजन कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की। 

विधान परिषद में ₹25 हजार महीना वेतन देने की मांग पर सरकार का जवाब – वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन का दायित्व प्रबंधतंत्र का

विधान परिषद में ₹25 हजार महीना वेतन देने की मांग पर सरकार का जवाब – वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन का दायित्व प्रबंधतंत्र का

विधान परिषद में शिक्षक एमएलसी ने 25 हजार रुपये महीना वेतन देने की उठाई थी मांग


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा के वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को 25 हजार रुपये महीना वेतन देने का मुद्दा सोमवार को विधान परिषद में शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उठाया। उन्होंने कहा कि पूरी योग्यता होने के बाद भी शिक्षक बदहाली व भुखमरी के कगार पर हैं। लगभग 2600 विद्यालयों के तीन लाख शिक्षक उपेक्षा का शिकार हैं।


इसके जवाब में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि निर्धारित सेवा शर्तों के अनुसार इन शिक्षकों की परिलब्धियों का भुगतान प्रबंध तंत्र करेगा। प्रबंधतंत्र भुगतान निजी स्त्रोत से करेगा, यह सरकार का दायित्व नहीं है।


 इस पर नेता प्रतिपक्ष लालबिहारी यादव ने कहा कि यह जवाब असांविधानिक है। नए बदलाव में अंशकालिक शिक्षक रहे ही नहीं, वह पूर्णकालिक हो चुके हैं। एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल ने वित्तविहीन विद्यालयों को मान्यता देने के लिए जारी नियमावली को नियमों के विपरीत बताया। कहा कि जमीन और जमानत राशि के मानक न्यायोचित नहीं हैं। एमएलसी राजबहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि पहले से चल रही संस्थाओं को उच्चीकृत करने के लिए मानक शिथिल किए जाएं।


इस पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि वित्तविहीन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए मान्यता शर्त में संशोधन किया गया है। एनईपी-2020 के अनुसार विद्यालयों में खेलकूद के मैदान जरूरी हैं। 10वीं कक्षा में शारीरिक व व्यायाम शिक्षा देने के लिए जमीन जरूरी है। ऐसे में नई नियमावली में किसी तरह के संशोधन की कोई जरूरत नहीं है।


 एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने प्रदेश के अरबी-फारसी मदरसों में प्रभावी सेवा नियमावली को दोषपूर्ण व शिक्षकों के हित के विपरीत बताया। उन्होंने इंटर शिक्षा अधिनियम में निलंबन की अवधि 60 दिन करने और संस्कृत पाठशालाओं को संसाधनयुक्त बनाने के लिए शिक्षकों को वेतन की समानता व असहायिक संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान सूची पर लेने की मांग की। इसे अधिष्ठाता ने सरकार को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेज दिया। 

First Aid Box in Basic Shiksha Schools: परिषदीय स्कूलों में हो सकेगा बच्चों का प्राथमिक उपचार, कंपोजिट ग्रांट से फर्स्टएड बॉक्स की होगी व्यवस्था, एक शिक्षक होगा प्रशिक्षित

First Aid Box in Basic Shiksha Schools: परिषदीय स्कूलों में हो सकेगा बच्चों का प्राथमिक उपचार, कंपोजिट ग्रांट से फर्स्टएड बॉक्स की होगी व्यवस्था, एक शिक्षक होगा प्रशिक्षित 



लखनऊ। आपात स्थिति में अब बच्चों का प्राथमिक उपचार स्कूल में ही हो सकेगा। इसके लिए परिषदीय स्कूलों में प्राथमिक स्वास्थ्य किट की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक को प्राथमिक उपचार के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।


सूबे के परिषदीय विद्यालयों में करीब करोड़ों बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल परिसर में प्रायः बच्चे खेल-खेल में चोटिल हो जाते हैं, या आकस्मिक बीमार पड़ जाते हैं।


स्कूल में की जाएगी स्वास्थ्य किट की व्यवस्था, एक शिक्षक को किया जाएगा प्रशिक्षित

ऐसी स्थिति में अब बच्चों का प्राथमिक उपचार स्कूल में ही हो सकेगा। इसके लिए परिषदीय स्कूलों में प्राथमिक स्वास्थ्य किट की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक को स्वास्थ्य सेवा देने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। पिछले माह विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट के तहत लगभग एक करोड़ की राशि भेजी गई थी। सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए थे कि इस बार खेल सामग्री के साथ ही स्वास्थ्य किट भी खरीदनी है।


किट में सभी प्रकार की जरूरी दवाएं मौजूद होंगी, जिससे बच्चों को आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार मिल सकेगा। सभी विद्यालयों में राशि भेजी जा चुकी है। किट खरीदने के निर्देश भी दिए गए हैं। आने वाले दिनों में सभी स्कूलों में किट की जांच की जाएगी।


किट में होंगे ये सामान
स्वास्थ्य किट में डिटॉल, पट्टी, गरम पट्टी, बैंडेज, रुई, कैंची, एंटीसेप्टिक लोशन, क्रीम, टेप, ग्लब्स, थर्मामीटर, सेफ्टी पिन, साबुन, चिमटी, लाल दवा, फिटकरी, सैनिटाइजर रहेगा।

Monday, December 16, 2024

बेसिक शिक्षा : नौ साल से प्रमोशन नहीं हुए, पहले वाले भी होने लगे निरस्त, जानिए! क्या है विवाद?

बेसिक शिक्षा : नौ साल से प्रमोशन नहीं हुए, पहले वाले भी होने लगे निरस्त,  जानिए! क्या है विवाद?


लखनऊ : प्रदेश के बेसिक स्कूलों में नौ साल से शिक्षकों के प्रमोशन नहीं हुए। इससे पहले जो प्रमोशन हुए थे, वे भी अब वरिष्ठता विवाद में उलझते जा रहे हैं। वरिष्ठता विवाद के बाद हाई कोर्ट के निर्देश पर तीन जिलों के प्रमोशन निरस्त भी कर दिए गए हैं। इससे प्रदेश के अन्य जिलों के प्रमोट हुए शिक्षक भी सहमे हुए हैं कि इस आदेश असर प्रदेश के सभी जिलों पर न पड़े।


60 फीसदी स्कूल प्रभारी हेड के सहारे 
बेसिक स्कूलों में आखिरी बार 2015 में प्रमोशन हुए थे। पहले जिला स्तर से प्रमोशन होते थे। ऐसे में कई जिले तो ऐसे हैं जहां 15 साल से प्रमोशन ही नहीं हुए हैं। इस वजह से प्रदेश के करीब 60% स्कूलों में स्थायी हेड मास्टर नहीं हैं। वे प्रभारी शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। अब तीन जिलों के प्रमोशन फिर से रद कर दिए गए हैं। ये जिले बुलंदशहर, सहारनपुर और सोनभद्र हैं। इससे अब प्रदेश में शिक्षकों को डर सता रहा है कि कहीं उनके जिले में भी प्रमोशन पर कोर्ट के आदेश का असर न पड़े।


जानिए! क्या है विवाद?

तीन जिलों में रद किए गए प्रमोशन में मुख्य विवाद वरिष्ठता तय करने को लेकर है। जूनियर स्कूलों के हेड के पद पर जो प्रमोशन किए गए थे, उसमें कार्यभार ग्रहण करने की तारीख के आधार पर वरिष्ठता तय की गई थी। इसको लेकर कुछ शिक्षक तभी कोर्ट चले गए थे कि वरिष्ठता का निर्धारण नियुक्ति की तारीख से होना चाहिए, न कि कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से। जूनियर हाईस्कूलों में कुछ शिक्षक ऐसे भी थे जिनकी भर्ती सीधे जूनियर में ही हुई थी।

उन्होंने भी एक मुकदमा दायर कर दिया। इस तरह इस मामले में तीन पक्ष हो गए। इस पर कोर्ट ने इसी साल सरकार को निर्देश दिए थे कि वरिष्ठता का निर्धारण तय नियमावली के आधार पर करते हुए मामले को निस्तारित किया जाए। बेसिक शिक्षा विभाग ने अब इसका निस्तारण करते हुए संबंधित बीएसए को आदेश जारी कर दिए। जिन तीन जिलों के शिक्षक कोर्ट गए थे, वहां के बीएसए ने प्रमोशन निरस्त कर दिए हैं।

Sunday, December 15, 2024

सुनवाई नहीं कर रहे अधिकारी बेरोजगारों को हाईकोर्ट से बची आस, जूनियर एडेड हाईस्कूलों में 1894 पदों पर शिक्षक भर्ती का मामला लटका

सुनवाई नहीं कर रहे अधिकारी बेरोजगारों को हाईकोर्ट से बची आस, जूनियर एडेड हाईस्कूलों में 1894 पदों पर शिक्षक भर्ती का मामला लटका


■ हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से पूछी टाइमलाइन

■ तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है एडेड जूनियर शिक्षक भर्ती

■ 15 फरवरी को हाईकोर्ट में सभी याचिकाएं हुई खारिज

 17 अक्तूबर 2021 को कराई  गई थी लिखित परीक्षा


प्रयागराज । प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक और प्रधानाध्यापकों के 1894 पदों पर भर्ती बेरोजगारों के लिए सिरदर्द बन गई है। 15 फरवरी 2024 को हाईकोर्ट में सभी याचिकाएं खारिज होने के बाद महीनों प्रयागराज से लखनऊ तक अफसरों के चक्कर काटने के बाद बेरोजगारों को अब हाईकोर्ट से ही भर्ती पूरी होने की आस लगी है। कॉलेज प्रबंधकों की ओर से दायर याचिका में हाईकोर्ट ने 10 दिसंबर को बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की टाइमलाइन पूछी है।


प्रदेश के 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती के लिए 17 अक्तूबर 2021 को लिखित परीक्षा कराई गई थी। 15 नवंबर 2021 को परिणाम घोषित होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने कम अंक मिलने की शिकायत करते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं कर दी थी। हाईकोर्ट के आदेश पर शासन ने 12 अप्रैल को एक समिति का गठन करते हुए आपत्तियों की जांच कराई। 571 शिकायतों के मिलान में 132 शिकायतें सही पाई गई थी। इस पर पुनर्मूल्यांकन करते हुए परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने 6 सितंबर 2022 को संशोधित परिणाम जारी किया।


परीक्षा में सम्मिलित 271071 अभ्यर्थियों में से 42066 जबकि प्रधानाध्यापकों की भर्ती के लिए 14,931 अभ्यर्थियों में से 1544 को सफल घोषित किया गया था। हालांकि कुछ अभ्यर्थियों ने संशोधित परिणाम को भी चुनौती दी थी लेकिन अंततः हाईकोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण कराने के आदेश दिए थे। उसके बाद से बेरोजगार प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अफसर सुनवाई नहीं कर रहे।

अब देश में भी होगी विदेश जैसी पढ़ाई और स्किलिंग, शिक्षा मंत्रालय तैयारी में जुटा, विदेशी संस्थानों की खूबियों का हो रहा अध्ययन

अब देश में भी होगी विदेश जैसी पढ़ाई और स्किलिंगशिक्षा मंत्रालय तैयारी में जुटा, विदेशी संस्थानों की खूबियों का हो रहा अध्ययन 


उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों का जुटाया जा रहा डाटा

छात्रों को लुभाने वाली विदेशी संस्थानों की खूबियों का हो रहा अध्ययन 

2024 में करीब 13.50 लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए


नई दिल्लीः उच्च शिक्षा की जिन खूबियों के चलते हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र दुनिया के दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे हैं, उसे थामने के लिए सरकार के स्तर पर अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें सबसे अहम उनकी पसंद के कोर्सों की पहचान कर देश में ही अब वैसी पढ़ाई और स्किलिंग करने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से उच्च शिक्षा में सुधार के लिए उठाए गए कदमों को इससे जोड़कर देखा जा रहा है। इसमें स्नातक की पढ़ाई के साथ ही छात्रों के लिए अब इंटर्नशिप को अनिवार्य किया गया है। उनकी योग्यता को परखने के लिए एक क्रेडिट फ्रेमवर्क की भी शुरूआत की गई है। इसमें 30 घंटे की पढ़ाई के बाद एक क्रेडिट अंक मिलेगा।


देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की पहल को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा मंत्रालय ने विदेशों में जाने वाले छात्रों को देश में ही रोकने को लेकर एक रोडमैप पर काम शुरू किया है। इसके तहत वह तमाम जानकारियां जुटाने में लगा है मसलन शिक्षा के लिए सबसे अधिक छात्र किन-किन देशों में जा रहे हैं, वह किन कोर्सों में दाखिला ले रहे हैं। साथ ही इन विदेशी संस्थानों और देशों की कौन सी ऐसी खूबियां हैं जो छात्रों को अपनी ओर लुभाती हैं और उन्हें इन कोर्सों की पढ़ाई पर कितने पैसे खर्च करने पड़ते हैं।


छात्रों के अन्य देशो की ओर रुख से शिक्षा मंत्रालय इसलिए भी चिंतित है, क्योंकि देश में यह चलन अब एक स्टेटस सिंबल का रूप लेते ले चुका है। हर साल उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में जहां करीब नौ लाख भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए थे, वहीं वर्ष 2024 में करीब 13.50 लाख छात्रों ने उच्च शिक्षा के लिए विदेश की ओर रुख किया है। इस चलन से देश को प्रतिभा और पैसा दोनों का नुकसान हो रहा है क्योंकि देखने में आया है कि पढ़ाई के लिए विदेश जाने के बाद कम ही छात्र देश लौटते हैं।


यूजीसी की कुछ अहम पहल

• स्नातक की पढ़ाई के साथ अब इंटर्नशिप को अनिवार्य किया गया है। पढ़ाई में इसके लिए भी क्रेडिट मिलेगा।

• किसी भी तरह की पढ़ाई और अनुभव अब क्रेडिट अंक में तब्दील होगा। इसके आधार पर छात्र बीच में कभी भी पढ़ाई को छोड़ और उसमें शामिल हो सकेंगे।

• अनुभव भी पढ़ाई में शामिल किया जाएगा। इसमें कला, शिल्प, संगीत आदि क्षेत्रों से जुड़ा निजी अनुभव या फिर कहीं भी किए काम के अनुभव पर उन्हें क्रेडिट अंक मिलेंगे। इसके आधार वह डिग्री व डिप्लोमा कर सकेंगे।

• किसी भी विषय में दाखिला लेने की अब स्वतंत्रता होगी। भले ही उन्होंने 12वीं तक वह विषय न पढ़ा हो। वह विषय विशेष में स्नातक या परास्नातक कर सकेंगे।

तबादले के लिए शासन को प्रस्ताव भेजते ही बेसिक शिक्षक खोजने लगे जोड़ीदार, व्हाट्सएप समूहों में संदेशों की हुई भरमार

तबादले के लिए शासन को  प्रस्ताव भेजते ही बेसिक शिक्षक खोजने लगे जोड़ीदार, व्हाट्सएप समूहों में संदेशों की हुई भरमार  

शिक्षकों के जिले के भीतर बाहर तबादले का प्रस्ताव, बीते साल शिक्षकों की तमन्ना पूरी न हो सकी थी


लखनऊ : बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा उत्तर प्रदेश शासन को म्यूचुअल ट्रांसफर का प्रस्ताव भेजे जाने की खबर वायरल होते ही बेसिक शिक्षकों से जुड़े व्हाट्सअप समूह ऐसी कई पोस्टों से पटने लगे  जिनमें पारस्परिक तबादले के लिए  जोड़ीदार की तलाश की जा रही थी।  सुबह खबर आई कि विभाग ने शीतावकाश के दौरान शिक्षकों के जिले ने के भीतर व बाहर तबादले का प्रस्ताव - शासन को भेजा है। यह खबर मिलते ही शिक्षक अपने तबादले के लिए साथी तलाशने लगे।


तमाम शिक्षक जिले के भीतर व बाहर तबादला चाहते हैं। बीते साल  भी तबादले की प्रक्रिया पूरी की गई थी लेकिन इसके बावजूद सभी शिक्षकों की तमन्ना पूरी नहीं हो सकी थी। अब फिर से विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर अनुमति मांगी है। ऐसे में उम्मीद जगी है कि शायद आने वाली सर्दियों की छुट्टियों में जिले के भीतर व बाहर शिक्षकों के पारस्परिक स्थानान्तरण किए जाएं। 


शिक्षक जिले के भीतर व बाहर तबादला कराने के लिए अपने जोड़ीदार की तलाश में पूरी शिद्दत से जुट गए हैं। व्हाट्सअप समूहों व व्यक्तिगत रूप से साथी की तलाश की जा रही है ताकि शासन की अनुमति मिलने पर तबादले के लिए आवेदन किया जा सके। हालांकि यह सब कुछ शासन की हामी पर भी निर्भर होगा। अभी सिर्फ प्रस्ताव भेजा गया है।

5 साल की सेवा वाले परिषदीय शिक्षक ही कर सकेंगे स्थानांतरण के लिए आवेदन, म्युचुअल तबादले स्कूल से स्कूल ही होंगे

5 साल की सेवा वाले परिषदीय शिक्षक ही कर सकेंगे स्थानांतरण के लिए आवेदन, म्युचुअल तबादले स्कूल से स्कूल ही होंगे


■ सर्दियों की छुट्टियों में शुरू होंगे बेसिक शिक्षकों के म्युचुअल तबादले

■ बेसिक शिक्षा परिषद ने शासन को प्रस्ताव भेजा, महिला शिक्षकों को तय अवधि में छूट नहीं


लखनऊ : बेसिक शिक्षकों के अंतःजनपदीय (जिले के अंदर) और अंतरजनपदीय (जिले के बाहर) म्युचुअल तबादले सर्दियों की छुट्टियों में शुरू होंगे। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अंतरजनपदीय म्युचुअल तबादलों के लिए पांच साल पूरा कर चुके महिला और पुरुष शिक्षक ही आवेदन कर सकेंगे। पहले महिला शिक्षकों के लिए यह समय सीमा दो साल थी। अब उन्हें विशेष परिस्थितियों में ही तय समय से पहले अपने गृह जिले या ससुराल में तबादलों पर विचार किया जाएगा। म्युचुअल तबादले स्कूल से स्कूल ही किए जा जाएंगे।


बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने शासन को म्युचुअल तबादलों का प्रस्ताव भेजा है। तबादलों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाएंगे। 15 दिसम्बर से सर्दियों की छुट्टियां होनी है। प्रस्ताव में कहा गया है कि तबादले सर्दियों और गर्मियों की छुट्टियों में ही किए जा सकेंगे। अंतरजनपदीय तबादलों के प्रस्ताव में सर्दियों की छुट्टियों से पहले आवेदन प्रकिया शुरू करने की बात कही गई है। 


वहीं अंतःजनपदीय तबादलों के लिए समय सीमा भी तय की गई है। तय तारीख पर बीएसए मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों का ब्योरा अपडेट करेंगे। उसके बाद ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किए जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन के 15 दिन के भीतर ऑनलाइन आवेदन का प्रिंट आउट बीएसए कार्यालय में जमा किया जाएगा। उसके 15 दिन के अंदर पात्रता के संबंध में बीएसए और सीडीओ निर्णय लेंगे। उसके एक महीने के अंदर बीएसए जिलास्तरीय समिति की बैठक बुलाकर संस्तुति करेंगे। उसके 15 दिन के भीतर आपत्तियां मांगी जाएंगी। उसके बाद गर्मियों या सर्दियों की छुट्टियों में स्थानांतरण और कार्यमुक्ति का आदेश जारी किया जाएगा। 


कक्षा एक से पांच तक कोई भी शिक्षक किसी भी शिक्षक के स्थान पर आपसी सहमति से तबादले के लिए आवेदन कर सकेगा। वहीं, कक्षा छह से आठ तक संबंधित विषय के शिक्षक ही एक दूसरे का विकल्प हो सकेंगे


🆕 देखें क्लिक करके भेजे गए स्थानांतरण हेतु प्रस्ताव 👇






जनपद से बाहर और जनपद के अंदर परिषदीय शिक्षकों के म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए शासन को भेजा गया प्रस्ताव

14 दिसंबर 2024
प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से परिषदीय शिक्षकों के जिले के भीतर और एक से दूसरे जिले में पारस्परिक तबादले के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी की ओर से विशेष सचिव बेसिक शिक्षा को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि पारस्परिक तबादले से छात्र शिक्षक अनुपात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही अध्यापन का कार्य भी शिक्षक अधिक सुगमता से कर सकेंगे। 

जिले के अंदर पारस्परिक तबादले के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। वहीं, एक से दूसरे जिले में तबादले के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी।

ऑनलाइन तबादले के लिए सूचना अपलोड करने के लिए शिक्षक जिम्मेदार होंगे और त्रुटिपूर्ण सूचना पर उनके प्रत्यावेदन पर विचार नहीं होगा। शासन से मंजूरी मिलने पर वर्तमान सत्र में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश के दौरान तबादले होंगे।


🆕 देखें क्लिक करके भेजे गए स्थानांतरण हेतु प्रस्ताव 👇










बेसिक शिक्षकों के फिर पारस्परिक तबादले की तैयारी, इस बार भी जिले से जिले की बजाय स्कूल से स्कूल में स्थानान्तरण की योजना

■ सर्दी की छुट्टियों में हो सकता है शिक्षकों का स्थानान्तरण

■ बेसिक शिक्षा परिषद ने की तैयारी, जल्द जारी होगा आदेश

12 दिसंबर 2024
प्रयागराज । परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों को छह महीने में दूसरी बार अंतरजनपदीय पारस्परिक तबादले का तोहफा देने की तैयारी है। बेसिक शिक्षा परिषद ने सर्दी की छुट्टियों में एक से दूसरे जिले में पारस्परिक स्थानान्तरण की तैयारियां शुरू कर दी है। शिक्षक सेवा नियमावली में गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में तबादले का प्रावधान है। सबकुछ ठीक रहा तो 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश में शिक्षकों का स्थानान्तरण हो जाएगा।


इस बार भी जिले से जिले की बजाय स्कूल से स्कूल में स्थानान्तरण की योजना है। इससे पहले इसी साल गर्मी की छुट्टियों में 19 जून को 2796 परिषदीय शिक्षकों (1398 जोड़े) का तबादला हुआ था। हालांकि तबादले का शासनादेश दो जून 2023 को जारी हुआ था। कानूनी अड़चन के कारण शिक्षकों को सालभर इंतजार करना पड़ा था। उस समय स्कूल से स्कूल तबादला करने के खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं भी की थी, जो अभी लंबित हैं। 


स्थानान्तरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक फिर से तबादला करने का अनुरोध कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है कि शासन से अनुमति मिलने पर सर्दी की छुट्टियों में अंतरजनपदीय पारस्परिक तबादले की कार्रवाई की जाएगी।

नोशनल वेतनवृद्धि के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने एक कॉमन प्रोफार्मा जारी

नोशनल वेतनवृद्धि के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने एक  कॉमन प्रोफार्मा जारी


लखनऊ। शासन की ओर से 30 जून व 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को नोशनल वेतनवृद्धि जोड़ते हुए पेंशन व ग्रेच्युटी का लाभ दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। किंतु माध्यमिक शिक्षा विभाग में विभिन्न उप शिक्षा निदेशक अलग-अलग प्रारूप पर इसके लिए सूचना मांग रहे थे। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने एक कॉमन प्रोफार्मा जारी किया है।


निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि उप शिक्षा निदेशक कार्यालयों से पूर्व में जारी सभी प्रोफार्मा निरस्त किए जाते हैं। सभी मंडलीय उप शिक्षा निदेशक को भेजे आदेश में उन्होंने कहा है कि इसी नए व कॉमन प्रोफार्मा पर पेंशनरों से अपेक्षित सूचनाएं लेकर कोषाधिकारी कार्यालय में जमा करें व निदेशालय को भी सूचित करें।


उत्तर प्रदेश अवकाश प्राप्त माध्यमिक शिक्षण कल्याण एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को नोशनल वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाना है। इसमें जिले, पेंशनर, विद्यालय का नाम, जन्मतिथि, सेवानिवृत्त तिथि, पीपीओ संख्या की जानकारी पेंशनर को देनी है। अध्यक्ष देवेंद्र नाथ मिश्र व महामंत्री राजकुमार बाजपेई ने कहा है कि इससे पेंशनरों को अनावश्यक परेशान नहीं होना पड़ेगा। 

Saturday, December 14, 2024

बीएसए औरैया के खिलाफ हाईकोर्ट से जमानती वारंट जारी कर किया तलब , निलंबन को लेकर अदालत के आदेश का पालन नहीं करना पड़ा भारी


बीएसए औरैया के खिलाफ हाईकोर्ट से जमानती वारंट जारी कर किया तलब , निलंबन को लेकर अदालत के आदेश का पालन नहीं करना पड़ा भारी   


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी औरैया के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर उनको स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है। कोर्ट ने सीजेएम औरैया को निर्देश दिया है कि 7 जनवरी को वह बीएसए की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित कराए। सहायक अध्यापिका सुनीता द्विवेदी की अवमानना याचिका पर न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय ने यह आदेश दिया।


याची के अधिवक्ता के मुताबिक बीएसए ने याची को 15 जून 2024 को निलंबित कर दिया था। इस आदेश को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने बीएसए को याची के विरुद्ध चल रही विभागीय कार्रवाई दो माह में पूरी करने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।


बीएसए ने इस आदेश का पालन नहीं किया तो याची ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। जिस पर कोर्ट ने बीएसए को आदेश का पालन कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने अथवा स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था । मगर बीएसए ने न तो आदेश का अनुपालन किया और ना ही स्वयं अदालत में उपस्थित हुए । उनका पक्ष रखने कोई अधिवक्ता भी नहीं आया । इस पर कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए 7 जनवरी को तलब कर लिया है।

कामिल और फाजिल डिग्री की संबद्धता का तैयार करें प्रस्ताव, विभागीय मंत्री राजभर ने दिया निर्देश


कामिल और फाजिल डिग्री की संबद्धता का तैयार करें प्रस्ताव, विभागीय मंत्री राजभर ने दिया निर्देश

14 दिसंबर 2024
लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद कामिल (स्नातक) और फाजिल (परास्नातक) की डिग्री सुप्रीम कोर्ट से असांविधानिक घोषित होने के बाद मदरसों में पढ़ रहे छात्र- छात्राओं का भविष्य अधर में है। 

इसे लेकर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया। शुक्रवार को आयोजित बैठक कैबिनेट मंत्री ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय से डिग्री की संबद्धता के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति, उच्च शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा के अलावा संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर विचार विमर्श किया जाएगा। 




मदरसा शिक्षकों की मांग – भाषा विवि से संबद्ध हों कामिल, फाजिल स्तर के मदरसेअल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मदद का दिया भरोसा


11 दिसंबर 2024
लखनऊ। ऑल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया के प्रांतीय सम्मेलन में बुधवार को कामिल और फाजिल स्तर के मदरसों की संबद्धता ख्वाजा मुईनुददीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय से कराने की मांग उठी। वहीं, मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का छह साल का बकाया मानदेय का भुगतान न होने और नौ साल से नए मदरसों को मान्यता न देने का मुद्दा भी उठाया गया।

सम्मेलन में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को 30 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया। मंत्री ने मदरसों से संबंधित हर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। वहीं, विधान परिषद की प्रश्न एवं संदर्भ समिति के सभापति राज बहादुर सिंह चंदेल ने शिक्षकों और मदरसों की समस्याओं को सदन में उठाने का वादा किया। 


गोमतीनगर में आयोजित एसोसिएशन सम्मेलन में के महामंत्री वहीदुल्लाह खान सईदी ने कहा कि कामिल व फाजिल स्तर के मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन व परीक्षाओं के आयोजन के लिए विवि से संबद्धता पर कार्यवाही सरकार को करना है। उन्होंने कामिल व फाजिल स्तर के मदरसों को ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि से संबद्ध कराने की मांग की।


इस मौके पर सभी बोडों के अवकाश नियमों पर आधारित पुस्तक अवकाश नियम संग्रह का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के संरक्षक व समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा के अध्यक्ष मौलाना इकबाल कादरी और मौलाना तारिक शम्सी मौजूद रहे।


वन नेशन वन एजुकेशन कानून से मिलेगी राहत

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि वन् नेशन वन एजुकेशन के कानून बनने से मदरसों से संबंधित बीमारी दूर हो सकती है। उन्होंने कहा कि वे 13 दिसंबर को अधिकारियों के साथ बैठक में 30 सूत्री मांगपत्र पर चर्चा करेंगे। उन्होंने एक सवाल के जवाब में मदरसा बोर्ड का गठन, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी का गठन और सुन्नी व शिया वक्फ बोर्डों में सीईओ की नियुक्ति जल्द कराने का आश्वासन दिया। 

उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के विधायकों की सदन में सच बोलने की हिम्मत नहीं है, सभी पार्टी के गुलाम है। हम जंगल के शेर हैं, इसलिए खुलकर दहाड़ते हैं।

मदरसा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि मदरसों के सर्वे पर करोड़ों रुपये खर्च हुए लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। सिर्फ ये पता चला कि यूपी में 8,449 मदरसे हैं, जिसमें साढ़े सात लाख बच्चे पढ़ते हैं।

उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा में अब डिग्री व डिप्लोमा के छात्रों को अब परीक्षा और परिणाम के लिए नहीं करना होगा बड़ा इंतजार, डिग्री-डिप्लोमा सेक्टर के लिए जारी करेंगे परीक्षा कैलेंडर

उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा में अब डिग्री व डिप्लोमा के छात्रों को अब परीक्षा और परिणाम के लिए नहीं करना होगा बड़ा इंतजार, डिग्री-डिप्लोमा सेक्टर के लिए जारी करेंगे परीक्षा कैलेंडर

प्रभारी महानिदेशक प्राविधिक शिक्षा को भी मिला प्रमुख सचिव जैसा अधिकार



लखनऊ। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा में डिग्री व डिप्लोमा के छात्रों को अब परीक्षा परिणाम के लिए तीन या छह महीने तक इंतजार नहीं करना होगा। इन विद्यार्थियों की परीक्षा समय से होगी और परिणाम भी समय पर आएगा।


अब डिग्री व डिप्लोमा सेक्टर के लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग हर साल परीक्षा कैलेंडर जारी करेगा। इसकी जिम्मेदारी शासन ने प्रभारी महानिदेशक प्राविधिक शिक्षा को दी है। दरअसल, प्राविधिक शिक्षा विभाग में पहली बार प्रभारी महानिदेशक की तैनाती की गई है। शासन ने देर से ही सही लेकिन उनके कार्य व दायित्व का निर्धारण किया है। उन्हें प्रमुख सचिव जैसे अधिकार दिए गए हैं। महानिदेशक को प्राविधिक शिक्षा विभाग में डिग्री और डिप्लोमा सेक्टर में नियुक्ति, बजट, पठन-पाठन, सेवा नियम, निदेशालय के कार्य, निर्माण से जुड़े अधिकार दिए गए हैं।


शासन ने लगभग तीन महीने पहले 13 सितंबर को प्राविधिक शिक्षा विभाग में प्रभारी महानिदेशक के रूप में अविनाश कृष्ण सिंह की नियुक्ति की थी। अब शासन ने उनका कार्य व दायित्व निर्धारित कर दिया है। इसमें कहा गया है कि वे विभाग के डिग्री व डिप्लोमा सेक्टर के सभी कार्यों का प्रशासनिक नियंत्रण करेंगे।


सभी निदेशालयों, कुलसचिव कार्यालय व सचिव कार्यालयों का पर्यवेक्षण व निर्देश भी जारी करेंगे। शासन ने यह स्पष्ट किया है कि वित्तीय प्रकरणों के निस्तारण में कोई दिक्कत आने पर उसका निराकरण विभाग के अपर मुख्य सचिव, मुख्य सचिव और मंत्री से अनुमोदन लेकर करेंगे।


यूपी बोर्ड ने जारी किए दसवीं व बारहवीं के मॉडल प्रश्नपत्र, यहां से करें डाऊनलोड

यूपी बोर्ड ने जारी किए दसवीं व बारहवीं के मॉडल प्रश्नपत्र, यहां से करें डाऊनलोड 

परीक्षार्थियों को अभ्यास के लिए मिलेगा काफी वक्त बेहतर होगी तैयारी


प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने वर्ष 2025 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्नपत्र शुक्रवार को जारी कर दिए। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। ऐसे में मॉडल प्रश्नपत्रों के आधार पर अभ्यास के लिए परीक्षार्थियों को काफी वक्त मिल जाएगा।


यूपी बोर्ड ने प्रमुख विषयों के मॉडल प्रश्नपत्र अपनी वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर शुक्रवार को जारी कर दिए हैं। इनके लिंक एक्स अकाउंट (X) @upboardpryj और फेसबुक अकाउंट madhyamik shiksha parishad पर भी अपलोड कर दिए गए हैं।


बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार परीक्षार्थी वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से 10वीं व 12वीं के मॉडल पेपर प्राप्त कर सकते हैं। यूपी बोर्ड 2025 की परीक्षा के लिए कुल 54,32,519 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। इनमें हाईस्कूल के 27,41,674 व इंटरमीडिएट के 26,90,845 परीक्षार्थी शमिल हैं।


मॉडल प्रश्नपत्र अपलोड कर दिए जाने से परीक्षार्थियों को काफी लाभ होगा। मॉडल प्रश्नपत्रों के आधार पर उन्हें अभ्यास के लिए काफी वक्त मिल जाएगा और यही अभ्यास उनके बेहतर प्रदर्शन में काम आएगा।

यूपी के सभी विश्वविद्यालयों में एकल प्रवेश प्रणाली लागू करने का निर्णय

यूपी के सभी विश्वविद्यालयों में एकल प्रवेश प्रणाली लागू करने का निर्णय 


लखनऊ । प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में एकल प्रवेश प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया, जिससे छात्र ऑनलाइन माध्यम से ही सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले सकेंगे। प्रदेश के विश्वविद्यालयों की नियुक्ति समितियों में सरकार के प्रतिनिधित्व के लिए एक समिति गठित की जाएगी। उच्च शिक्षा के संचालन और बेहतर समन्वय के लिए निदेशक उच्च शिक्षा का कैंप कार्यालय लखनऊ में स्थापित किया जाएगा।


 ये फैसले गुरुवार को 'राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ' की पहली बैठक में लिए गए। इसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने की। उच्च शिक्षा में प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तरीय कार्यकारिणी निकाय गठन का प्रस्ताव पारित किया गया। मंत्री ने निर्देश दिया कि शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशालाएं हों।

Friday, December 13, 2024

सरकारी संस्थानों और विद्यालयों में पत्रकारों की बगैर अनुमति एंट्री बैन

सरकारी संस्थानों और विद्यालयों में पत्रकारों की बगैर अनुमति एंट्री बैन


मऊ, 13 दिसंबर 2024 
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पत्रकारों के सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थाओं में प्रवेश और अभिलेख निरीक्षण पर नए नियम जारी किए गए हैं, जिससे पत्रकारिता जगत में तीखी बहस छिड़ गई है। जिला सूचना अधिकारी मऊ द्वारा जारी पत्र (पत्रांक 219/सू०वि०/सूचना/2024-25) में पत्रकारों की गतिविधियों को स्पष्ट दिशानिर्देशों के अधीन रखा गया है।  


सरकारी निर्देशों के अनुसार, कोई भी पत्रकार किसी सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्था में बिना संस्था प्रमुख या उनके द्वारा नामित सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त, यदि किसी पत्रकार को प्रवेश की अनुमति मिलती है, तो वह संस्था प्रमुख की सहमति के बिना सरकारी अभिलेखों का निरीक्षण या परीक्षण नहीं कर सकता।  


पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पत्रकारों के लिए सूचना एवं जन संपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी मान्यता प्राप्त पहचान पत्र होना अनिवार्य है। यह नियम स्वतंत्र मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ-साथ समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों के संपादकों व ब्यूरो चीफ पर भी लागू होता है।  


नए निर्देशों को लेकर पत्रकारिता जगत में असंतोष की लहर देखी जा रही है।  वहीं, सरकारी अधिकारी इन नियमों को संस्थानों की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक मानते हैं। अब यह देखना होगा कि इन नियमों का प्रभाव पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सरकारी संस्थाओं की पारदर्शिता पर कैसा पड़ता है।  


नौकरी में सुपरमैन के नाम से मशहूर हो चुके सूबे के बेसिक शिक्षकों को अब क्रिकेट अंपायरिंग का मिला नया जिम्मा

नौकरी में सुपरमैन के नाम से मशहूर हो चुके सूबे के बेसिक शिक्षकों को अब क्रिकेट अंपायरिंग का मिला नया जिम्मा


सरकारी नौकरी में सुपरमैन के नाम से मशहूर हो चुके सूबे के बेसिक शिक्षकों को अब नया टास्क मिलने वाला है। हर फन में माहिर माने जाने वाले शिक्षकों से अब क्रिकेट मैच में अंपायरिंग भी कराने की तैयारी है। 


रुहेलखंड इलाके के एक बड़े जिले में इसका बाकायदा फरमान भी जारी हो चुका है। एसएसपी साहब के इस फरमान का पालन कराने का जिम्मा बीएसए को दिया गया है। फरमान में नौ सहायक शिक्षकों को इस काम के लिए पुलिस लाइन में आमद करानी है। 


पहले से ही पोलियो अभियान से लेकर चुनाव तक ड्यूटी के बोझ से दबे शिक्षकों में इस फरमान से खलबली मची है। अब भला पुलिस का आदेश नकार किसे क्लीन बोल्ड होना है।


Thursday, December 12, 2024

सामूहिक नकल की पुष्टि के बाद डीएलएड गणित की दो केंद्रों की परीक्षा निरस्त, 17 दिसंबर को दोबारा होगी

सामूहिक नकल की पुष्टि के बाद डीएलएड गणित की दो केंद्रों की परीक्षा निरस्त, 17 दिसंबर को दोबारा होगी


प्रयागराज । डीएलएड प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल की पुष्टि होने के बाद मऊ और गाजीपुर के एक-एक केंद्र की परीक्षा निरस्त कर दी गई है। पुनर्परीक्षा 17 दिसंबर को होगी।


सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से मऊ व गाजीपुर के डायट प्राचार्यों को भेजे गए पत्र के अनुसार संत देवराहा बाबा इंटर कॉलेज मझवारा मऊ और महामंडलेश्वर श्री बालकृष्ण यति इंटर कॉलेज गाजीपुर में नौ अगस्त को आयोजित डीएलएड प्रथम सेमेस्टर गणित विषय में सामूहिक नकल हुई थी।


 इसकी रिपोर्ट राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एससीईआरटी) निदेशक को भेजी गई थी। एससीईआरटी निदेशक के अनुमोदन के बाद सभी प्रशिक्षुओं की परीक्षा दोबारा कराई जाएगी। 

यूपी बोर्ड के बच्चों के लिए बनाई जा रही अंग्रेजी व्याकरण की किताब, 1.25 करोड़ बच्चों को अध्ययन में होगी सुविधा आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान को मिली जिम्मेदारी

यूपी बोर्ड के बच्चों के लिए बनाई जा रही अंग्रेजी व्याकरण की किताब, 1.25 करोड़ बच्चों को अध्ययन में होगी सुविधा आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान को मिली जिम्मेदारी


प्रयागराज । यूपी बोर्ड के कक्षा नौ से 12 वीं तक के तकरीबन 1.25 करोड़ छात्र-छात्राओं के लिए आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) के विशेषज्ञ पहली बार अंग्रेजी व्याकरण (ग्रामर) की किताब बना रहे हैं।

इन नयी पुस्तकों में अधिकांश 20वीं सदी का अंग्रेजी साहित्य तथा विश्व में ब्रिटेन के साथ-साथ अन्य स्थानों का अंग्रेज़ी लेखन शामिल है जो कि पारंपरिक साहित्य से काफी अलग है। यह भी पता चला कि पाठ्यपुस्तक के अलावा वे विषय वस्तु जो बोर्ड परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में हैं ग्रामर, राइटिंग स्किल्स (नोट राइटिंग, आर्टिकल राइटिंग, लेटर राइटिंग) तथा अनुवाद के लिए कोई प्रामाणिक पठन सामग्री उपलब्ध नहीं है। 


इसे देखते हुए पहले ईएलटीआई ने सबसे पहले कक्षा नौ से 12वीं तक के शिक्षकों के लिए गाइड विकसित की, जिससे उन्हें नयी पाठ्यपुस्तकों को पढ़ाने में सहूलियत हो। उसके बाद अब अंग्रेज़ी ग्रामर की पुस्तक विकसित जा रही है। ईएलटीआई के प्राचार्य डॉ. स्कंद शुक्ल के अनुसार, व्याकरण की पारंपरिक पुस्तकों से हटकर नई किताब में यथासंभव व्याकरण के नियमों को बहुत आसान भाषा में दिया जा रहा है। 


इससे विद्यार्थियों को नियमों को रटना नहीं पड़ेगा और वे उन नियमों को समझकर स्वयं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयोग कर सकेंगे। इनमें समय के साथ अनुपयोगी हो गए नियमों और विषय-वस्तु को सम्मिलित नहीं किया जा रहा। इस काम में संस्थान के अकादमिक स्टाफ (शमा परवीन, कृष्णा कुमारी, रेशु सिंह, संदीप दुबे, कुलदीप पांडे) के साथ-साथ जीजीआईसी कौशाम्बी और प्रयागराज से रश्मि प्रिया सिंह, रूचि त्रिपाठी, रश्मिता सिंह, एलबीएस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. संतोष शुक्ल तथा राजकीय पीजी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विष्णु प्रताप सिंह सहयोग कर रहे हैं। इविवि के अंग्रेज़ी विभाग के शिक्षकों से जांच करवाने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

राष्ट्रीय/राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त प्रधानाचार्य / शिक्षकगण जो अपनी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर दिनांक 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, को सेवा विस्तार दिये जाने के संबंध में।

राष्ट्रीय/राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त प्रधानाचार्य / शिक्षकगण जो अपनी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर दिनांक 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, को सेवा विस्तार दिये जाने के संबंध में।


यूपी बोर्ड की परीक्षा के मद्देनजर छह माह के लिए हड़ताल पर रोक, एस्मा लागू

यूपी बोर्ड की परीक्षा के मद्देनजर छह माह के लिए हड़ताल पर रोक, एस्मा लागू।  


प्रयागराज। यूपी बोर्ड की 24 फरवरी से शुरू होने जा रहीं परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षा परिषद के अधीन सभी सेवाओं में हड़ताल पर छह माह की अवधि के लिए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसके लिए शासन ने अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है।

अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि लोकहित में ऐसा करन आवश्यक एवं समीचीन है। इसलिए एस्मा को लागू करते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन सभी सेवाओं में हड़ताल को तात्कालिक प्रभाव से छह माह तक की अवधि के लिए निषिद्ध किया जाता है।

अगले छह माह के दौरान ही यूपी बोर्ड की परीक्षाएं होनी हैं। मूल्यांकन भी होना है और परिणाम भी घोषित किया जाना है। परीक्षा संबंधी कार्यों का संचालन सुचारु रूप से हो सके, सो माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन सभी सेवाओं में हड़ताल पर रोक लगाई गई है। 


Wednesday, December 11, 2024

देखें : PFMS के अन्तर्गत अब तक जारी की गई लिमिट का विवरण

देखें : PFMS के अन्तर्गत अब तक जारी की गई लिमिट का विवरण


अयोध्या समेत पांच जिलों में खुलेंगे नए केंद्रीय विद्यालय, अब सबसे ज्यादा केन्द्रीय विद्यालय यूपी में होंगे


अयोध्या समेत पांच जिलों में खुलेंगे नए केंद्रीय विद्यालय, अब सबसे ज्यादा केन्द्रीय विद्यालय यूपी में होंगे


लखनऊ । यूपी के पांच जिलों अयोध्या, जौनपुर, कन्नौज, बिजनौर और महराजगंज में नए केन्द्रीय विद्यालय खोले जाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इन विद्यालयों के खुलने पर यूपी में केन्द्रीय विद्यालयों की संख्या 127 हो जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन विद्यालयों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया था।


अयोध्या जिले के चांदपुर हरवंश क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय का निर्माण किया जाएगा। यह इस जिले का दूसरा केंद्रीय विद्यालय होगा। जौनपुर जिले के पयागपुर, महराजगंज जिले के महराजगंज क्षेत्र में भी केन्द्रीय विद्यालय खुलेगा। बिजनौर और कन्नौज में केन्द्रीय विद्यालयों का पहली बार निर्माण होगा। इन नए केन्द्रीय विद्यालयों में 4800 छात्रों को पढ़ाई का मौका मिलेगा। हर विद्यालय में 960 विद्यार्थियों की क्षमता होगी। इससे 63 लोगों को स्थाई रोजगार प्राप्त होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार सभी केंद्रीय विद्यालयों को पीएम श्री स्कूल के रूप में नामित किया गया है।


सबसे ज्यादा केन्द्रीय विद्यालय यूपी में होंगे

यूपी में 127 केन्द्रीय विद्यालय (केवी) होंगे और इसके साथ ही यूपी सबसे अधिक केवी वाला प्रदेश बन जाएगा। केवी के संचालन के लिए प्रदेश को तीन संभागों लखनऊ, आगरा और वाराणसी में बांटा गया है। इस समय 122केवी चल रहे हैं। लखनऊ संभाग में 48, आगरा में 37 व वाराणसी संभाग में 37 केवी का संचालन हो रहा है।




देशभर में खुलेंगे 85 केंद्रीय और 28 नवोदय विद्यालय, 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च, केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली : गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अंतिम छोर पर बैठे लोगों तक पहुंचाने में जुटी केंद्र सरकार ने देश में 85 केंद्रीय विद्यालयों और 28 नए नवोदय विद्यालयों को खोलने की घोषणा की है। सर्वाधिक 13 केंद्रीय विद्यालय जम्मू-कश्मीर में खोले जाएंगे। जिन 28 नए नवोदय विद्यालयों को खोलने की घोषणा की गई है, उनमें सबसे अधिक आठ नवोदय विद्यालय अरुणालय प्रदेश में खोले जाएंगे। 


इस विद्यालयों के खोलने पर अगले आठ सालों में आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे। यह सभी पीएम- श्री स्कूलों के रूप में कार्य करेंगे। अयोध्या के चांदपुर में भी केंद्रीय विद्यालय खोला जाएगा। 


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम फैसला लिया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि ये 85 नए केंद्रीय विद्यलाय देश के 19 राज्यों में खोले जाएंगे।



यूपी में पांच नए केंद्रीय विद्यालय खुलेंगे

■ पूरे देश में खुलेंगे 85 केंद्रीय और 28 नवोदय विद्यालय खुलेंगे ■ छात्रों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने का अवसर

नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को नए केंद्रीय विद्यालयों को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में 85 नए केंद्रीय और 28 नए नवोदय विद्यालय खोले जाएंगे। इनमें यूपी में पांच नये केन्द्रीय विद्यालय होंगे। ये विद्यालय उन जिलों खोले जाएंगे जिनको नवोदय विद्यालय योजना के तहत कवर नहीं किया गया है। 

उन्होंने कहा कि नए केंद्रीय विद्यालय खुलने से देश भर में 82 हजार से अधिक छात्रों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। मौजूदा समय में 1256 कार्यात्मक केंद्रीय विद्यालय हैं। इनमें तीन विदेश में हैं। इनमें मॉस्को, काठमांडू और तेहरान शामिल हैं। 13.56 लाख छात्र इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं।

शिक्षकों से नहीं ले सकते गैर शैक्षणिक कार्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक और नियमित वेतन भुगतान का दिया आदेश

शिक्षकों से नहीं ले सकते गैर शैक्षणिक कार्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक और नियमित वेतन भुगतान का दिया आदेश
 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षिका से चुनाव संबंधित कार्य लिए जाने के रामपुर के एसडीएम/ चुनाव पंजीकरण अधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने शिक्षिका का वेतन रोकने के आदेश पर भी रोक लगा दी है और उसे नियमित वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया है। सहारनपुर की संयमी शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया।


याची के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा का कहना था कि याची को एसडीम/ चुनाव पंजीकरण अधिकारी रामपुर मनिहारान ने चुनाव संबंधी विविध कार्यों में लगाया था जिसकी वजह से याची द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। वह छात्रों को पढ़ाने का काम नहीं कर पा रही थी। बाद में एसडीएम ने 29 अक्टूबर 2024 के आदेश से याची का वेतन रोक दिया गया।


अधिवक्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा सुनीता शर्मा एडवोकेट की जनहित याचिका पर पारित फैसले का हवाला दिया। इस निर्णय में खंडपीठ ने कहा है कि शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते हैं। खंडपीठ ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा है कि बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है, यह उनके मौलिक अधिकार में शामिल है तथा अनिवार्य शिक्षा अधिनियम की धारा 27 में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं लिया जा सकता है। शिक्षकों से सिर्फ 10 वर्ष में होने वाली जनगणना, आपदा राहत और सामान्य निर्वाचन के समय ही सेवा ली जा सकती है। इसके अलावा उनसे कोई अन्य ड्यूटी लेना अवैधानिक है। खंडपीठ ने कहा है कि शिक्षकों का कार्य सिर्फ छात्रों को पढ़ाना है।

Tuesday, December 10, 2024

कक्षा 6 JNVST 2025: जवाहर नवोदय में प्रवेश हेतु फर्जी एडमिट कार्ड पर नवोदय विद्यालय समिति ने दी चेतावनी

कक्षा 6 JNVST 2025: जवाहर नवोदय में प्रवेश हेतु फर्जी एडमिट कार्ड पर नवोदय विद्यालय समिति ने दी चेतावनी


नई दिल्ली ।  नवोदय विद्यालय समिति (NVS) ने कक्षा 6 के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा (JNVST) 2025 (समर बाउंड) के संदर्भ में सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। समिति ने जानकारी दी है कि कुछ फर्जी/धोखाधड़ी से बने एडमिट कार्ड सार्वजनिक रूप से प्रसारित किए जा रहे हैं, जो उम्मीदवारों को भ्रमित करने का प्रयास हैं।  


समिति ने स्पष्ट किया है कि JNVST 2025 के लिए अब तक कोई एडमिट कार्ड जारी नहीं किया गया है। आधिकारिक एडमिट कार्ड जल्द ही NVS द्वारा जारी किए जाएंगे। पंजीकृत उम्मीदवार इसे NVS की आधिकारिक वेबसाइट www.navodaya.ac.in से मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।  


समिति ने जनता को आगाह करते हुए कहा है कि किसी अन्य स्रोत से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने से बचें। यह कदम फर्जी दस्तावेज़ों के प्रसार को रोकने और उम्मीदवारों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।  


इस संबंध में, NVS के परीक्षा उपायुक्त नयन किशोर पटेल ने कहा, “किसी भी प्रकार के फर्जी एडमिट कार्ड से सावधान रहें। NVS केवल अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से एडमिट कार्ड जारी करता है।”  


यह चेतावनी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से जारी की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें और अन्य स्रोतों से बचें।  


नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव, रिक्त रह गए 27,713 पदों पर भर्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी मिल चुकी है हरी झंडी

नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव, रिक्त रह गए 27,713 पदों पर भर्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी मिल चुकी है हरी झंडी

हाईकोर्ट का आदेश, दो माह में पूरी करनी है 68,500 में से शेष रह गए पदों पर भर्ती 


प्रयागराज। परिषदीय विद्यालयों में नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए डीएलएड अभ्यर्थियों ने सोमवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव किया। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को दो माह में नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। वहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी अभ्यर्थियों को राहत मिल चुकी है। आयोग ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।


मामला परिषदीय विद्यालयों में 68,500 शिक्षक भर्ती का है, जिसमें 27,713 पद खाली रह गए थे। अभ्यर्थी चाहते थे कि कटऑफ गिराकर रिक्त पदों को भरा जाए लेकिन हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 27,713 पदों पर नई भर्ती की जाए।


कटऑफ गिराकर रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर कुछ अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट भी गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उनकी याचिका खारिज हो गई। अभ्यर्थी चाहते हैं कि रिक्त पदों पर नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती शीघ्र शुरू की जाए।


इस मसले पर डीएलएड छात्रों ने सोमवार को शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव करते हुए ज्ञापन सौंपा और पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की आयोग के सचिव से वार्ता भी हुई। डीएलएड संघ के अध्यक्ष रजत सिंह का कहना है कि छह वर्षों से ज्यादा समय से प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन नहीं आया है और पद रिक्त होने के बावजूद बेरोजगार अभ्यर्थी नौकरी के लिए भटक रहे हैं।


रजत ने बताया कि वार्ता के दौरान आयोग के सचिव मनोज कुमार ने जानकारी दी कि नई शिक्षक भर्ती के लिए विभागों और बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र भेज दिया गया है। आयोग भी प्रयासरत है कि नई शिक्षक भर्ती जल्द शुरू की जाए। जल्द ही संबंधित विभागों के साथ बैठक कर इस पर निर्णय लिया जाएगा। आयोग के घेराव के दौरान तेज प्रताप यादव, नीरज सिंह, धर्मवीर मौर्या, अजीत यादव, रोहित तिवारी, आकाश शुक्ला, शिवम सिंह आदि मौजूद रहे।