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Monday, October 16, 2017

अब शासन ने बोर्ड प्रशासन को दिया निर्देश, तैयार कराएं सिलेबस, 25 साल के बाद यूपी बोर्ड में फिर वैदिक गणित की पढ़ाई


खुशखबरी : वैदिक गणित में उपलब्ध है 39 व 41 का वर्ग 139 और 41 का वर्ग वैदिक विधि से निकालने में इन दोनों संख्याओं के पास की संख्या 40 को लेकर उसका वर्ग 1600 लिखना है। अब 39 का वर्ग निकालने के लिए 1600 में से पहले 40 घटा दें फिर 39 यानि 1600-40-39। यह करेंगे तो बड़ी ही सरलता से उत्तर आएगा 1521 जो कि 39 का वर्ग है। ठीक इसी तरह 41 का वर्ग निकालने के लिए आपको 40 के वर्ग यानि 1600 में एक संख्या अधिक जोड़नी है। मतलब 16004041 यानि1681। ये 41 का वर्ग है जो सही उत्तर होगा।

धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद 1गणित के सवाल मिनटों में सूत्र के जरिये हल होते हैं। यह संभव होता है वैदिक गणित से। यूपी बोर्ड भले ही सीबीएसई के पाठ्यक्रम को अपनाने जा रहा है लेकिन, छात्र-छात्रओं को वैदिक गणित भी पढ़ाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं, ताकि वह कठिन से कठिन प्रश्नों का चुटकी बजाते जवाब दे सकें। यूपी बोर्ड के लिए वैदिक गणित का पाठ्यक्रम कोई नई बात नहीं है, बल्कि 25 साल बाद वह दोबारा पाठ्यक्रम को जगह देने की तैयारी कर रहा है। 1माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड ने 1992 में तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार में वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल किया था। इस पाठ्यक्रम को आत्मसात करने की वजह छात्र-छात्रओं को कठिन लगने वाले गणित विषय को आसानी से पढ़ाये जाने की तमाम विधियां रही हैं। असल में वैदिक गणित के जन्मदाता स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ ने ऐसे सूत्र बनाए जिनके जरिये बच्चों को बिना पहाड़ा पढ़े गणित का सवाल हल करने की कला आ जाती है। स्वामी तीर्थ ने सारे सूत्र संस्कृत मेंलिखे हैं लेकिन, उनमें से अधिकांश हंिदूी में भी उपलब्ध हैं। 1वैदिक गणित में सात विधियों का प्रयोग करके जोड़, घटाना, गुणा और भाग आसानी से किया जा सकता है। इसका सबसे अधिक लाभ प्रतियोगी परीक्षाओं में उठाया जा सकता है। पिछले दिनों शासन स्तर पर यूपी बोर्ड के अफसरों के साथ हुई 1बैठक में वैदिक गणित को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का निर्देश हुआ है। माना जा रहा है कि जल्द ही वैदिक गणित के पारंगत पाठ्यक्रम समितियों के सदस्यों को बुलाकर विमर्श शुरू होगा। तैयारी है कि आगामी नए शैक्षिक सत्र से सीबीएसई का पाठ्यक्रम लागू हो। इसी में वैदिक गणित को जोड़े जाने की तैयारी है। बोर्ड के सूत्र बताते हैं कि 1992 में यह पाठ्यक्रम जुड़ा था लेकिन, बाद की सरकारों ने इससे किनारा कर लिया, हालांकि छात्र-छात्रओं में इसकी पढ़ाई को लेकर उत्साह रहा है। बोर्ड के अफसर अभी इस मुद्दे पर खुलकर नहीं कह रहे हैं, लेकिन इसे लागू करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।’

कल्याण सिंह की सरकार में 1992 में हो चुका पाठ्यक्रम में शामिल

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