इलाहाबाद : यूपी बोर्ड को लकदक करने की तैयारी है। इसके लिए वह सारे जतन करने की कवायद शुरू हुई है जिससे युवाओं में बोर्ड के प्रति और रुझान बढ़े। सब कुछ दुरुस्त रहा तो परिषद के पाठ्यक्रम में वह सारे विषय समाहित होंगे जो ऊंची कक्षाओं में पढ़ने वाला युवा जिंदगी की नई राह पर चलता है।
बोर्ड मुख्यालय की शक्ल बदलने एवं संसाधनों से लैस करने के लिए परीक्षा शुल्क में मामूली बढ़ोतरी करने की योजना बनी है। शासन ने मंजूरी दी तो अन्य प्रांतों की तर्ज पर परीक्षा शुल्क से बोर्ड का कायाकल्प होगा। इतना ही नहीं वर्षो से सेवा करने वाले अनुचरों को प्रमोशन देने के लिए भी योजना पर लगभग सहमति बन गई है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी बोर्ड की बैठक शनिवार को मुख्यालय पर हुई। इसके एजेंडे में वैसे तो करीब एक दर्जन विषय थे, जिन्हें सामान्य करार दिया जा रहा था, लेकिन बैठक में मंथन के बाद जो निकला वह किसी संजीवनी से कम नहीं है। बोर्ड ने बीते सितंबर में कक्षा 11 एवं 12 के अलग-अलग हुए पाठ्यक्रम पर ध्वनिमत से मुहर लगा दी है। यह अगले साल से लागू होंगे। बोर्ड ने इस पर चिंता व्यक्त की कि परिषद के स्कूलों में चल रहा पाठ्यक्रम वर्षो पुराना है इसमें बड़ा बदलाव करने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि विज्ञान आदि विषयों में जो पढ़ाया जा रहा है वह नए पाठ्यक्रमों को देखते हुए काफी पुराना लगता है। मसलन बायोलॉजी तो पढ़ाई जा रही है, लेकिन बायो टेक्नोलॉजी का उसमें जिक्र नहीं है। ऐसे ही कंप्यूटर अप्लीकेशन आदि विषय की पढ़ाई कराने पर जोर दिया गया। साथ ही कृषि की पढ़ाई अंग्रेजी के साथ कराने की मांग भी सदस्यों ने उठाई।
इस पर यह तय हुआ कि परिषद विषय समितियों से इस संबंध में चर्चा करके नए पाठ्यक्रमों को समाहित करवाने पर जोर देगा। यूपी बोर्ड हर साल लाखों छात्र-छात्रओं की परीक्षा आयोजित करता है इसमें प्रश्न पत्र व कापियों के अलावा अन्य कार्यो में बड़े पैमाने पर धन खर्च होता है। इससे बोर्ड मुख्यालय एवं क्षेत्रीय कार्यालय अपग्रेड नहीं हो पा रहे हैं। डुप्लीकेट अंक पत्र आदि जारी करने में भी मामूली शुल्क ही सालों से लिया जा रहा है।
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