महराजगंज : मृतक आश्रित पेंशन के लिए 37 वर्ष से अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगा रहा है पर पेंशन अब तक स्वीकृत नहीं की गयी। बुढ़ापा आ गया, कमर झुक गयी और अब पेंशन की आस में उसकी सांस टूटने की नौबत भी आ गई है।
सन् 1977 से पेंशन के लिए भटक रहे मृतक आश्रित ने बुधवार को तहसील दिवस पर मंडलायुक्त से न्याय की गुहार लगाई और फफक पड़ा। मंडलायुक्त भी द्रवित हो गए और कहा कि नियमानुसार पेंशन स्वीकृत कराएंगेऔर न्याय भी दिलाएंगे। परतावल ग्राम सभा के टोला धरमंता निवासी महंगू मिश्र पुत्र जगई मिश्र ने कलक्ट्रेट परिसर स्थित सदर तहसील में आयोजित तहसील दिवस में मंडलायुक्त को दिये शिकायती पत्र में लिखा है कि प्रार्थी की पत्नी शंकरी देवी 28 दिसम्बर 1973 को सहायक अध्यापिका बनीं
उनकी मृत्यु सेवाकाल के दौरान 21 फरवरी 1977 को हो गई। तब से लेकर अब तक उनकी पत्नी की पेंशन स्वीकृत नहीं की गई। सैकड़ों अधिकारियों/ कर्मचारियों से फरियाद किया परन्तु अभी तक केवल आश्वासन ही मिला है।
मंडलायुक्त ने इस सम्बन्ध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया कि पेंशन के लिए भटक रहे वृद्ध मंहगू मिश्र की समस्या सप्ताह भीतर समाधान कराएं और कृत कार्यवाही से मंडलायुक्त को भी सूचित करें।
खबर साभार : 'दैनिक जागरण'
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