जागरण संवाददाता, बागपत : ऐसे शिक्षक जो शासन-प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा चुके हैं, वह राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय पुरस्कार हरगिज नहीं पा सकेंगे। इस बाबत, बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश बाबू शर्मा ने बीएसए को निर्देश जारी किया है। इसी में इस बात का उल्लेख है।बीएसए को 15 मार्च तक चिन्हित शिक्षकों का ब्यौरा व आवेदन भेजना होगा। पुरस्कार देने को उन शिक्षकों का चयन होगा, जिन्होंने शैक्षिक क्षेत्र में उत्कृष्ट काम किया है। सहायक अध्यापक का नियमित 15 साल और प्रधानाध्यापक का 20 साल का शिक्षण अनुभव होना जरूरी है। दिव्यांग शिक्षकों को अनुभव में पांच साल की छूट मिलेगी। बीएसए को चिन्हित शिक्षकों के विशेष कार्यों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा। कहा है कि यदि किसी दिव्यांग शिक्षक ने दिव्यांग बच्चों को शिक्षा देने में उल्लेखनीय कार्य किया है तो उन्हें विशिष्ट श्रेणी के पुरस्कार दिलाने को चिन्हित किया जाए। बेसिक शिक्षा निदेशक ने बीएसए को भेजे पत्र में कहा है कि जिला स्तरीय समिति के माध्यम से चिन्हित शिक्षकों का ब्यौरा भेजा जाए। समिति में डायट प्राचार्य, बीएसए और राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य का होना अनिवार्य है, लेकिन शासन-प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने वाले और गबन या किसी अन्य आपराधिक मामले में फंसे शिक्षकों को पुरस्कार नहीं मिलेगा। प्रदेश के 19 शिक्षकों को राष्ट्रीय और 17 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार मिलेगा।
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